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सिलेक्टिव है RJ सायमा का नारीवाद… हिजाब पर करनी थी बात, करने लगी मजहब का बचाव: सोचिए क्या सच में इस्लाम में ‘मर्जी’ चला सकता है इंसान?

           RJ सायमा ने कहा इस्लाम में मर्जी चलती जबरदस्ती नहीं (साभार : X_@_sayema & Chatgpt)
इस्लाम में इंसान की मर्जी की महत्वता है, जबरदस्ती की कोई जगह नहीं- मजहब की ये परिभाषा हाल में आरजे सायमा ने दी है। उन्होंने बड़ी चालाकी से हिजाब-बुर्का मुद्दे पर इस्लाम को डिफेंड किया है कि दुनियाभर में घटना कोई भी हो जाए, लेकिन बात मजहब की आलोचना पर न आए।

ये तरीका ऑस्ट्रेलिया आतंकी हमले के समय अरफा खानम शेरवानी ने भी अपनाया था। हालाँकि, उनकी स्ट्रैटेजी चली नहीं और उनके अपने ही समुदाय के लोग उनपर सवाल खड़ा करने लगे। सायमा के साथ भी यही हुआ है लेकिन वो आँख मूंदकर रखेंगी क्योंकि उन्हें नैरेटिव ये बनाना है कि जो लोग हिजाब पहनने को मजबूर कर रहे हैं वो अच्छे से इस्लाम को नहीं जानते।

दिलचस्प बात है कि सायमा जैसे बुद्धिजीवियों की हिजाब पर राय मौका, घटना और स्थान देखकर बदलती रहती है। जैसे भारत की बात आती है तो ये हिजाब पहनने को सीधा मजहबी अधिकार से जोड़ती हैं, शैक्षणिक संस्थानों में उसे पहने जाने की पैरवी करती हैं और किसी बाहर मुल्क में ये मुद्दा बनता है तो नारीवादी पक्ष निकल आता है, तब ये क्रांतिकारी भी बनती हैं, हिजाब को च्वाइस भी बताती हैं और इस्लाम को डिफेंड करने का लिबरल वर्जन भी खोजती हैं।

मगर, अफसोस उनका ये वर्जन जमीनी हकीकत और मीडिया में मौजूद तमाम उदाहरणों से बिलकुल निकलता है। बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं है। 2025 के दिसंबर माह में ही यूपी के शामली में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी बीवी और दो नाबालिग बेटियों की हत्या कर दी। कारण? तीनों बिना बुर्का पहने घर से बाहर निकल गई थीं। 2021 में असम से खबर आई थी एक महिला को दुकान से सिर्फ इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि उसने जींस पहनी थी, बुर्का नहीं। 2022 में कर्नाटक से रिपोर्ट आई थी कि एक संगठित समूह मुस्लिम महिलाओं पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब या बुर्का के न दिखें।

यह सब भारत की घटनाएँ हैं, किसी दूर-दराज के कट्टर इस्लामिक देश की नहीं। क्या इन पर कभी सायमा कि कोई प्रतिक्रिया या विरोध देखने को मिला? क्या ऐसी खबरों को सुनने के बाद कभी आरजे सायमा ये कहने गईं कि इस्लाम में तो मर्जी चलती है, जबरदस्ती नहीं।

इसी तरह विदेशों में महिलाओं के साथ हिजाब न पहनने पर क्या हुआ, इसके भी तमाम उदाहरण हैं। ईरान की महसा अमीनी याद है आपको? 22 साल की वह लड़की जिसे ‘ठीक से हिजाब न पहनने’ के आरोप में हिरासत में लिया गया और इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।

2014 में ईरान के इस्फाहान में महिलाओं पर तेजाब हमलों की घटनाएँ सामने आईं। जाँच में पता चला कि निशाना वे महिलाएँ थीं जो ‘ढंग से’ हिजाब या बुर्का नहीं पहन रही थीं।
इसी तरह कनाडा की अक्सा परवेज, महज 16 साल की लड़की, जिसकी हत्या उसके अपने परिवार ने इसलिए कर दी क्योंकि वह खुद को ढककर बाहर नहीं जाती थी।

ये तो सिर्फ वे मामले हैं जो मीडिया में आ सके। कितनी घटनाएँ चार-दीवारी के भीतर दबा दी जाती होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। आरजे सायमा क्या इन सभी मामलों में पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को यह समझाने जाएँगी कि इस्लाम मर्जी का मजहब है, जबरदस्ती का नहीं? या फिर हमेशा की तरह यह कहकर पल्ला झाड़ लेंगी कि यह ‘असल इस्लाम’ नहीं है?

विडंबना यह है कि जिस इस्लाम की परिभाषा सायमा गढ़ती हैं, उसे बार-बार गलत उन्हीं लोगों ने साबित किया है जो इस मजहब को सबसे ज्यादा कट्टरता से मानते हैं। अगर आम लोगों को ‘नासमझ’ मान भी लिया जाए, तो उन मुल्ला-मौलानाओं की तकरीरों का क्या जवाब है, जिनकी बातें सुनकर समाज दिशा तय करता है?

खुले मंचों से बार-बार कहा जाता है कि कुरान में हिजाब का जिक्र है और लड़कियों को इसे पहनना ही चाहिए। कई बार तो ये भी बताया जाता है कि महिलाओं को आजादी देना ही गलत बात है। उनके स्कूल जाने से लेकर उनके खुले सर घूमने की चाह तक को इस्लाम के खिलाफ बता दिया जाता है। तब सवाल उठता है- क्या समस्या कुछ ‘भटके हुए लोगों’ की है, या फिर उस विचारधारा की, जिसे हर बार बचाने के लिए कभी आरफा को और कभी आरजे सायमा को नया नैरेटिव गढ़ना पड़ता है?

‘मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देना शरिया कानून के खिलाफ’: AIMPLB सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और UCC को देगा चुनौती, NCW बोला- सभी महिलाओं के लिए हो एक कानून; डिबेट में तस्लीम रहमानी को मुंह काला करने के बोला,देखिए वीडियो

       मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने के निर्णय और UCC को चुनौती देगा AIMPLB (साभार: ऑपइंडिया अंग्रेजी)
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार (14 जुलाई 2024) को कहा कि मुस्लिम महिलाओं से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को वह चुनौती देगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को इद्दत की अवधि के बाद भी गुजारा भत्ता माँगने की अनुमति दी थी। बोर्ड उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को भी चुनौती देगा। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा है कि महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों में कानून एक समान होने चाहिए। चर्चा यह भी है कि अगर मुस्लिम महिला गुजारा भत्ते की हक़दार नहीं, फिर हज के लिए मिलने वाली सब्सिडी हलाल क्यों? हराम क्यों नहीं? 
दरअसल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कट्टरपंथी इस मुगालते में थे, कि सरकार राजीव गाँधी की तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदल देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न ही कोई सम्भावना है। यह भी शक हो रहा है कि तीन तलाक के मुद्दे पर भले ही मर्दों ने औरतों को दबा दिया हो, लेकिन गुजारा भत्ते का मामला इस तरह गर्माने से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ही अस्तित्व पर सवाल उठने शुरू हो चुके हैं। यह भी कहा जा रहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक एनजीओ है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा पाकिस्तान को तोड़ बांग्लादेश बनवाने पर मुस्लिम वोटबैंक को कांग्रेस से घिसकता देख इस एनजीओ को बनाया था। 

दरअसल, 14 जुलाई 2024 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इन दोनों मुद्दों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि बैठक में आठ प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसमें पास पहला प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही है।

इलियास ने कहा, “पहला प्रस्ताव हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में था। यह फैसला शरिया कानून से टकराता है। इस्लाम में शादी को पवित्र बंधन माना जाता है। इस्लाम तलाक को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘महिलाओं के हित’ में बताया जा रहा है, लेकिन शादी के नजरिए से यह फैसला महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।”

सैयद कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा, “अगर तलाक के बाद भी पुरुष को गुजारा भत्ता देना है तो वह तलाक क्यों देगा? और अगर रिश्ते में कड़वाहट आ गई है तो इसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा? हम कानूनी समिति से सलाह-मशविरा करके इस फैसले को वापस लेने के बारे में विचार-विमर्श करेंगे।”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 मुस्लिम विवाहित महिलाओं सहित सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है और वे इन प्रावधानों के तहत अपने पतियों से भरण-पोषण का दावा कर सकती हैं। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 इस धर्मनिरपेक्ष कानून पर लागू नहीं होगा।

वहीं, यूसीसी को लेकर कासिम इलियास ने कहा कि उनकी कानूनी टीम इसको लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “विविधता हमारे देश की पहचान है, जिसे हमारे संविधान ने सुरक्षित रखा है। यूसीसी इस विविधता को खत्म करने का प्रयास करती है। यूसीसी न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।”

उधर, मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं के लिए सभी धर्मों को कानून समान होने चाहिए। शर्मा ने कहा, “महिलाओं के अधिकार सार्वभौमिक होने चाहिए, धर्म के आधार पर निर्धारित नहीं होने चाहिए। महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों के कानून भी समान होने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के बाद आपको गुजारा भत्ता मिलता है तो मुस्लिम महिला को यह क्यों नहीं मिलना चाहिए? मैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात का स्वागत करती हूँ।” NCW प्रमुख ने कहा कि यह निर्णय इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि किसी भी महिला को कानून के तहत समर्थन और सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

ट्रिपल तलाक़ से मुक्ति के बाद भी मोदी को वोट न देने वाली मुस्लिम औरतों को अब कुछ समझ आया ? सुप्रीम कोर्ट ने नए फैसले में मोदी के कानून में ही उन्हें गुजारा भत्ते के अधिकार दिए हैं

सुभाष चन्द्र

वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने शाहबानो केस में CrPc के section 125 मुस्लिम महिलाओं को तलाक़ के बाद अपने शौहर से गुजारा  भत्ता लेने का अधिकार दिया था। उस बेंच में जज थे - चीफ जस्टिस वाई वी चंद्रचूड़, जस्टिस रंगनाथ मिश्रा, जस्टिस डी ए देसाई, जस्टिस ओ चिनप्पा रेड्डी और जस्टिस E S Vekkataramaiah इस फैसले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले की पुष्टि की गई थी और मौहम्मद अहमद खान को अपनी पत्नी शाहबानो को गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए गए थे फैसले में कहा गया था मुस्लिम पर्सनल लॉ के रहते हुए भी तलाकशुदा औरत को CrPc के section 125 में गुजारा भाता लेने का अधिकार है

लेखक 
चर्चित YouTuber 

लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम संगठनों के दबाव में और मुस्लिम तुष्टिकरण की खातिर संसद में बिल पास करा कर वह आदेश रद्द कर दिया और मुस्लिम औरतें फिर अपनी पतियों की रहमोकरम पर सड़कों पर आ गई लेकिन 30 साल बाद नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्रिपल तलाक़ से मुक्ति दिलाई और रात के अंधेरे में छोटी छोटी बात पर बच्चों के साथ घर से निकाले जाने से छुटकारा दिलाया लेकिन वे औरतें सब भूल गई और मोदी को 2024 के इलेक्शन में तबियत से उसे हटाने के लिए वोट दिया।  

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाकशुदा मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने के निर्णय से मुस्लिम कट्टरपंथियों में बड़ी जबरदस्त खलबली मच गयी है। उनके द्वारा इसे इस्लाम पर हमला बताया जा रहा है। जुलाई 11 को टीवी परिचर्चाओं में सहभागी बने मौलानाओं को पहली बार जलील होते देखा। सबसे बड़ी बात News18 पर एंकर लुबिका लियाकत द्वारा उस तस्लीम रहमानी को, जिसके कारण निर्दोष नूपुर शर्मा को 'सर तन से जुदा' गैंग की वजह से गुमनामी जिंदगी जीने को मजबूर होना पड़ा, मुंह काला करने को बोल दिया। नीचे देखिए वीडियो। 

हो सकता है कि ये कट्टरपंथी जितना ज्यादा इस मुद्दे को उछलेंगे, उतना ही इस्लाम के लिए नुकसानदेह होने वाला है। इन परिचर्चाओं में एक बात मुखर हुई की निकाह एक contract है, लेकिन ये नहीं बता रहे कि contract for what? हलाला? आने वाले समय में यही contract for what गरमाने वाला है। दूसरे, इन परिचर्चाओं में एक बात और सामने आयी कि 'जब कोई पुरुष चोरी करता है, जेब काटता है, क़त्ल करता है आदि अपराध करने पर कोर्ट को क्यों जाते हैं, तब शरीयत कहाँ चली जाती है? औरतों के अधिकारों पर ही शरीयत क्यों जरुरी हो जाती है?  

    

जुलाई 10 को भी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस B V Nagarathna  और जस्टिस Augustine George Masih की पीठ ने एक बार फिर section 125 में मुस्लिम महिला के गुजारा भत्ता पाने के अधिकार को सही कहा और यह भी कहा कि यदि किसी महिला की अर्जी Section 125 में लंबित है तो वह The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Act, 2019 के अंतर्गत भी अपना अधिकार मांग सकती है

इसी क़ानून में ट्रिपल तलाक़ देने वाले को 3 साल की सजा का प्रावधान किया गया था जिसके खिलाफ बड़े बड़े मौलाना लड़ते रहे हैं 

जुलाई 10 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक मुस्लिम द्वारा लड़ा गया था और हाई कोर्ट ने उसे अपनी तलाकशुदा पत्नी को 10 हजार रूपए महीने गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है  

ऐसे में अब सवाल उठता है कि जो नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं के लिए किया, वह उनके ही हित में था लेकिन कुल मिला कर औरतों समेत 98% मुसलमानों ने मोदी को हटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया और कांग्रेस के तलुए चाटने लगे जिसने शाहबानो केस से लेकर अभी तक मुस्लिम महिलाओं का साथ नहीं दिया 2024 लोक सभा चुनाव में कुछेक मुस्लिम महिलाओं को बीजेपी को वोट देने के कारण तलाक का सामना करना पड़ा। 

आज भी कांग्रेस जुलाई 10 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद से रद्द कराने के लिए हल्ला ठोकेगी अब देखते हैं मुस्लिम संगठनों ने जिस तरह शाहबानो के फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, अब कितना उत्पात करते हैं 

वैसे तो जो आचरण मुस्लिम महिलाओं ने मोदी के लिए दिखाया है, अब मोदी की तरफ से उनके लिए कुछ भी करना फिर से धोखा खाना होगा क्योंकि ये महिलाएं और मुस्लिम पुरुष किसी हाल में मोदी का समर्थन नहीं करेंगे

सुप्रीम कोर्ट : अब मुस्लिम महिलाएँ तलाक के बाद शौहर से ले सकेंगी गुजारा भत्ता : शाहबानो का हक छीन राजीव गाँधी लाए थे जो ‘तुष्टिकरण’ उस पर लगा फुलस्टॉप

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा दायर कर सकती है। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 धर्मनिरपेक्ष कानून पर हावी नहीं होगा।

शीर्ष न्यायालय की न्यायामूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मुस्लिम महिला के अधिकार को बरकरार रखा। इसको लेकर पीठ ने अलग-अलग, लेकिन सहमति वाले फैसले सुनाए। दरअसल, एक मुस्लिम व्यक्ति ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी पूर्व पत्नी को 10,000 रुपए का अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, “सीआरपीसी की धारा 125 सभी महिलाओं पर लागू होगी, न कि केवल विवाहित महिलाओं पर।” पीठ ने कहा कि यदि धारा 125 के तहत आवेदन लंबित रहने के दौरान संबंधित मुस्लिम महिला तलाक ले लेती है तो वह मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 का सहारा ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम सीआरपीसी की धारा 125 के तहत किए गए उपायों के अतिरिक्त उपाय भी प्रदान करता है। बताते चलें कि सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो मामले में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा था कि सीआरपीसी की धारा 125 एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है, जो मुस्लिम महिलाओं पर भी लागू होता है।

हालाँकि, मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को निरस्त कर दिया गया और 2001 में कानून की वैधता बरकरार रखी गई थी। इस अधिनियम के तहत तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की माँग नहीं कर सकती है।

सीआरपीसी की धारा 125 के अनुसार, एक व्यक्ति जिसके पास पर्याप्त साधन हैं वह अपनी पत्नी, बच्चों (वैध या नाजायज) और पिता या माता का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी है। इस धारा के अनुसार, ‘पत्नी’ में वह महिला शामिल है, जिसका अपने पति से तलाक हो चुका है और उसने दोबारा विवाह नहीं किया है।

यह मामला तेलंगाना के हैदराबाद के मुस्लिम परिवार का है। मार्च 2019 में एक मुस्लिम महिला ने हैदराबाद की एक पारिवारिक अदालत में एक याचिका दी कि उसका पति अब्दुल समद ने उसे तीन तलाक दिया है। इसलिए उसने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत 50,000 रुपए मासिक भरण-पोषण की माँग की। इसके बाद कोर्ट ने जून 2023 में 20,000 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया।

अब्दुल समद ने पारिवारिक अदालत के आदेश को तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि उसने साल 2017 में मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार तलाक लिया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसने अपनी पूर्व पत्नी को ‘इद्दत’ अवधि के दौरान भरण-पोषण के रूप में पहले ही 15,000 रुपए का भुगतान कर दिया है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने दिसंबर 2023 में उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण की राशि को संशोधित कर 10,000 प्रतिमाह कर दिया। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय को छह महीने के भीतर इस मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब्दुल समद संतुष्ट नहीं हुआ। उसने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की।

याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल समद के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष बताया कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 के अनुसार, तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत लाभ का दावा करने की हकदार नहीं है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

केजरीवाल के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएँ, बोलीं- वोट के बदले किया 1000 रूपए देने का वादा, अब तक नहीं दिए; झूठा, धोखेबाज, चोर…

चुनाव आयोग को उन पार्टियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करनी चाहिए जिन्होंने धन का प्रलोभन देकर वोट लेने का काम किया है। कांग्रेस ने गारंटी कार्ड बांटे, तो अब आम आदमी पार्टी का पाखंड सामने आ गया। वैसे अभी तक अपने जीवन में कोई ऐसा चुनाव नहीं देखा जिसमे शराब और रूपए के लालच में वोट नहीं ख़रीदे जाते, लेकिन चुनाव आयोग के पास सबूत नहीं होते थे। अब तो सबूत भी आ गए।  देखना है चुनाव आयोग क्या कार्यवाही करता है? जब जनता लालच में आकर वोट देती है तो फिर किस आधार पर महंगाई, अपराधों में वृद्धि और दूसरे काम न होने पर क्यों रोती है? ये दोगलापन कब ख़त्म करेगी लालची जनता? 

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ महिलाएँ सड़कों पर उतरीं हुई हैं। उनका कहना है कि सीएम केजरीवाल ने उन लोगों से हर महीने 1000 रुपए देने को कहा था, लेकिन वो पैसे अब तक उनके खातों में नहीं आए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाएँ केजरीवाल से 1000-1000 रुपए माँगते दिखीं और सीएम पर दिल्ली की जनता को बेवकूफ बनाने का इल्जाम भी लगाया। महिलाओं का आरोप है चुनाव से पहले उन्होंने वोट पाने के लिए ये वादा किया था।

जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन को ‘दिल्ली महिला मंच’ द्वारा किया जा रहा है। इसकी वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में प्रदर्शनकारी महिलाओं में से एक बुर्काधारी महिला कहती है- “हम लोग महिला मंच से आए हैं और मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से यह सवाल करना चाहती हूँ कि जो फॉर्म अरविंद केजरीवाल ने हमसे भरवाए थे, उसे पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है? आखिर क्यों केजरीवाल अपने वादों से मुकर रहे हैं? दूसरों को यह लोग शराब की बोतलें बाँट रहे हैं, लेकिन हमें एक हजार रुपए तक नहीं दे पा रहे हैं।”

महिलाएँ कहती सुनाई पड़ रही हैं- केजरीवाल ने हमसे वादा किया तो हमने ईमानदारी से उन्हें वोट दिया। उन्होंने फॉर्म भरवाने के बाद भी पैसे नहीं भेजे। ये झूठे हैं, धोखेबाज हैं और चोर हैं।

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मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम वोटरों को लुभाने राहुल के हस्ताक्षर किया गारंटी कार्ड के विरुद्ध शिक

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मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम वोटरों को लुभाने राहुल के हस्ताक्षर किया गारंटी कार्ड के विरुद्ध शिक
“मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग निर्वाचन सदन नई दिल्ली विषय : वोटरों को लुभाने के लिए फायदा देने की गारंटी महोदय, लो...

एक अन्य महिला भी बताती है कि उन लोगों ने फॉर्म भरे थे ताकि उन्हें बाद में 1000 रुपए मिलें। महिला बोली- केजरीवाल ने हमसे वादा किया था कि 18 साल की आयु को पार कर चुकी प्रत्येक बहन-बेटियों को 1 हजार रुपए दिए जाएँगे। ये हमेशा झूठ बोलते हैं। कि दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त है, कहीं बिजली मुफ्त नहीं है और कहते हैं कि बस में यात्रा फ्री है, लेकिन बस वाले महिलाओं को देखकर बस रोकते ही नहीं हैं। यह सरकार हम लोगों को पागल बना रही है। इस सरकार का हमसे कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार सिर्फ झूठे वादे करती है। किसी से भी पूछ लो। मुख्यमंत्री ने सबसे झूठे वादे किए हैं।

दिल्ली : कांग्रेस के बाद मुस्लिम महिलाओं ने AAP के संजय सिंह और राघव चड्ढा की कार को घेरा, कहा – जो वादा किया था वो पैसे दो

           संजय सिंह और राघव चड्ढा की कार घेर कर मुस्लिम महिलाओं ने माँगे पैसे (फोटो साभार: रिपब्लिक भारत)
लोकसभा चुनाव आ गए, कल(जून 9) नरेंद्र मोदी लगातार  तीसरी बार 
प्रधानमंत्री की शपथ लेने पर लालची मतदाताओं को छाती पीटनी के लिए विवश कर दिया है। इन लालचियों ने साबित कर दिया है कि इन्हें किसी विकास और सुविधा से मतलब नहीं, इनके आगे पैसा फेंकों कुछ भी करवा लो। ब्रिटिशर्स और गाज़ी(मुग़ल) अपने साथ कोई लम्बी चौड़ी फौज लेकर नहीं आये थे, उनको मालूम था कि भारत जयचन्द और मीर ज़ाफ़र जैसे लालची मौजूद है। जयचन्द और मीर ज़ाफ़र के वंशज आज भी जीवित है, जो इस चुनाव में सामने आ गया है। भारत विरोधी विदेशी ताकतें पागल नहीं थीं, जो मोदी को सत्ता से हटाने अरबों रूपए जयचन्द और मीर ज़ाफ़र के वारिसों पर खर्च कर रहे थे। 

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले I.N.D.I. गठबंधन ने बड़े-बड़े वादे किए थे और लालच दिया था, जो अब उसकी ही गले की फाँस बन रहे हैं। मुस्लिम महिलाओं ने विपक्षी दलों के इन नेताओं से रुपयों की माँग करते हुए अब हंगामा शुरू कर दिया है। अब AAP (आम आदमी पार्टी) के राज्यसभा सांसदों संजय सिंह और राघव चड्ढा के कार को घेर कर महिलाओं ने पैसों की माँग की है। विपक्षी दलों ने मुस्लिमों से ‘खटाखट पैसे भेजने’ का वादा किया था।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में संजय सिंह और राघव चड्ढा से महिलाओं ने चुनावी वादे के एक-एक लाख रुपए माँगे। इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें जो खटाखट-खटाखट पैसे दिए जाने के वादे किए गए थे, अब वो पैसे कहाँ हैं? बता दें कि इस चुनाव में विपक्षी दलों ने जम कर मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने का लालच देने की योजना पर काम किया। कांग्रेस अपने ही घोषणा-पत्र और आम लोगों में बाँटे गए गारंटी कार्ड में फँस गई हैं। कांग्रेस दफ्तरों पर भी महिलाएँ पहुँच रही है।

असल में कांग्रेस ने इन महिलाओं से वादा किया था कि 5 जून, 2024 से ही महिलाओं के खाते में पैसे पहुँचने शुरू हो जाएँगे। संजय सिंह और राघव चड्ढा को घेर कर ये महिलाएँ कह रही थीं आप हमसे दुआ लेकर ही जाना। हालाँकि, इस दौरान दोनों ही AAP नेता इन महिलाओं से बच कर निकलते हुए नज़र आए। कांग्रेस ने इन महिलाओं को हर साल एक लाख रुपए देने का वादा किया था। बेरोजगार युवाओं को भी नियमित वेतन देने का वादा किया गया था।

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उत्तर प्रदेश : राहुल और अखिलेश ने 1लाख रूपए का लॉलीपॉप दे मुसलमानों को किया ब्लैकमेल ; लिख दी अपने

इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं की लंबी कतार लग गई थी। ये सभी 1 लाख रुपए की माँग कर रही थीं, साथ ही कह रही थीं कि उन्हें वित्तीय लाभ दिया जाए। मुस्लिम महिलाएँ अपना-अपना पहचान-पत्र समेत अन्य दस्तावेज लेकर कांग्रेस के दफ्तर पहुँची थीं। इन महिलाओं ने अपने हाथों में कांग्रेस का ‘गारंटी कार्ड’ भी थाम रखा था, जिसमें एक लाख रुपए के वेतन के अलावा हर शिक्षित युवा को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया है। ‘इस गारंटी कार्ड’ में कर्जमाफी का भी वादा है। मुस्लिम महिलाओं ने इन कार्ड्स को भर भी रखा था।

उत्तर प्रदेश : राहुल और अखिलेश ने 1लाख रूपए का लॉलीपॉप दे मुसलमानों को किया ब्लैकमेल ; लिख दी अपने पतन की पटकथा ; बीजेपी क्या करती रही? चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!



आखिर मुसलमान कांग्रेस के हाथों कब तक ब्लैकमेल होता रहेगा? ये वही कांग्रेस है जिसने मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने की बजाए दोयम दर्जे का बना दिया है। लेकिन मुसलमान आज तक इस कटु सच्चाई को नहीं समझ पा रहा। जिस कारण हिन्दू -जिन्हे कट्टरपंथी, साम्प्रदायिक और फिरकापरस्त कहकर बदनाम करते हैं-इन्हे शक की निगाह से देखता है। इस आरोप के लिए मुसलमान खुद जिम्मेदार हैं। बीजेपी अपने कामों के कारण 400 पार करने में सक्षम थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ता से लेकर मंडल और जिला अधिकारी मोदी-योगी और अमित शाह पर ही निर्भर रहते हैं। यह बात सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं लगभग सभी राज्यों 
में है। कांग्रेस द्वारा जो गारंटी कार्ड वितरित किये हैं, जाँच करनी चाहिए कि किस प्रेस से प्रकाशित हुए और कितने प्रकाशित हुए हैं। 
कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर जिस तरह मुसलमानों को ब्लैकमेल किया, सारे मौलाना, मौलवी और मुस्लिम बुद्धिजीवी मुसलमानों की इतनी बड़ी बेइज्जती पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? अगर यही काम बीजेपी ने किया होता अब तक चील कौओं की तरह चीख-चीखकर आसमान सिर पर उठा लिया होता।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने क्या-क्या प्रपंच नहीं किए। ग्लोबल पावर्स की मदद से लेकर, संविधान और आरक्षण के खिलाफ अफवाह फैलाने तक हर हथकंडा अपनाया। यहां तक कि देश के भोलेभाले मतदाताओं को हर महीने 8500 रुपये के हिसाब से साल के 1 लाख रुपये देने का लालच दिया। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने तो अपनी हर जनसभा में मंच से हर महीने 8500 और साल के 1 लाख रुपये देने की गारंटी देते नहीं थकते थे। उन्होंने तो अपने भाषण में महीने और तारीख तक बता दिए थे कि अमुक तारीख से रुपये बैंक खातों में खटाखट जादू की तरह गिरना शुरू हो जाएगा। यहां तक कि कांग्रेस के कार्यकर्ता गरीब लोगों को गारंटी कार्ड तक बांट दिए जिसमें एक फार्म भी छपा है और नाम-पता भरने का कॉलम है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में गारंटी क्या दी, कांग्रेस के नेताओं ने यह कह कर घर-घर में फर्जी गारंटी कार्ड बांट दिए कि 5 जून को इसे पार्टी ऑफिस में जमा करा देना और खटाखट पैसे मिलने लगेंगे।

ये कोई आरोप नहीं कटु सच्चाई है 
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए, धोखाधड़ी की गई, लोकतंत्र की सामूहिक हत्या हुई लेकिन कोई मीडिया इसको मुद्दा नहीं बनाएगा, कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगा। चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस की इस गारंटी कार्ड पर 420 का मुकदमा होना चाहिए। पीएम मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए और भारत को कमजोर देश बनाने के लिए विदेश से अरबों रुपए फंडिंग की गई। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाए गए। सोशल मीडिया इन्फूएंशर खरीदे गए। इतना सब करने के बाद भी वे मोदी को रोक नहीं पाए।
उत्तर प्रदेश में इतने बड़े उलटफेर की सबसे  बड़ी वजह 1लाख का लॉलीपॉप था, इस बारे में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस उपाध्यक्ष कहते है की उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले 43 लाख गारंटी कार्ड बांटे गए थे। और उनमे से अधिकतर भर कर कांग्रेस कार्यालय पर जमा भी किया जा चुका था। अगर 43 लाख परिवारों को कार्ड मिला और 1 परिवार पर 4  वोट भी जोड़ लो तो 1.5 करोड़ मतदाताओं को उत्तरप्रदेश में प्रभावित किया क्या, और यही एक लाख रूपया देने की गारंटी ही थी इतने बड़े उलटफेर की मुख्य वजह वो वाराणसी हो या फैजाबाद। इसलिए सारे विश्लेषण बेकार है ये नेरेगा और कर्ज माफी के बाद मतदाताओं को दिया गया सबसे बड़ा लॉलीपॉप है। जिसको मतदाताओं ने चुपचाप पकड़ लिए और किसी को हवा भी नही आने दी और जमीनी हवा किसी को समझ नही आई। इस पर चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!

यह कांग्रेस का गारंटी कार्ड है, जो करोड़ों की संख्या में यह कह कर भरवाया गया कि यह गारंटी कार्ड भर दो तुम्हें 100000 रूपए मिलेगा।

इस गारंटी कार्ड में कहीं नहीं लिखा है कि सरकार बनने पर ही 100000 रूपए दिए जाएंगे।

इस गारंटी कार्ड के अनुसार कानूनन कांग्रेस 100000 रूपए देने के लिए बाध्य है। अब वह मुकर नहीं सकती। बीजेपी को भी चाहिए कि इस मुद्दे को सड़कों तक लाकर बड़ा आंदोलन करे। 

मुंगेरी लाल के सपने देखने पर कोई रोक नहीं। राहुल और प्रियंका को परिवारभक्त प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं, वह भी जानते हैं कि परिवार को कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। अगर बनना होता 2004 में सोनिया गाँधी बन गयी होती। सबसे अधिक मूल्यवान होता है विशेषकर राष्ट्र के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए, बच्चा बच्चा जानता है कि ग़ज़वाये हिन्द में उतनी ही देरी है जितनी भारत के विकसित होने में। 

अब ऐसे में पहले क्या ज़रूरी था और है विकास या किराएदारों जिहादियो को बाहर निकालना या उनका सामूहिक सनातनी करण करना। 

दशकों के कांग्रेस के फिरकापरस्त शासन के बाद 1998 में अटल सरकार आई। हम सनातनियो में आस जगी की अब जायेगे वापिस किरायेदार पाकिस्तान भारत बनेगा हिन्दुराष्ट्र। मगर गठबंधन की बैसाखियों के बहाने के कारण उन्होंने कुछ न किया। 

फिर दस साल शून्य में रहने के बाद सबसे पहले हम भक्तो की छाती 56" हुई कि अब तो निश्चित ही खाली होगा हिंदुस्तान घुसपैठियों से(2014) मगर नेता जी तो उन्ही का विश्वास जीतने में लग गए। पूर्ण बहुमत के दृष्टिगत कई कट्टर हिन्दू संगठन मैदान में आये(आरएसएस,विहिप नही) खूब धरने बड़े आंदोलन किये जनसंख्या कानून तुरंत बनवाने को लेकर। जिसकी नितांत,शीघ्रतम आवश्यकता भी थी। 2018 में हमारे मोदी जी ने लाल किले से इसके बनने की समय की मांग भी बताई थी मगर किया क्या कुछ नही। 2019 में तो ताकत बढ़ी कट्टर हिंदूवादियों में आशा उत्साह बढ़ी फिर प्रयास हुए। सोशल मीडिया से भी खूब आवाज उठाई गयी। 

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उत्तर प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ ल

मगर सभी जिम्मेदार कानो में रुई डाल,निगाहें दूसरे ग्रह पे गाढ़ समय को पास करते रहे। हिंदूवादियों में अब भी आस थी। राष्ट्रभक्त,अंधभक्त दोनों को पूरी उम्मीद थी उनपर दवाब भी था कि कुछ तो सोचेंगे करेंगे। डूबते सनातन को उभार ग़ज़वाये हिन्द को चीर करेंगे। 

अधिकतम धर्म प्रेमी तो 2024 बाद इस संविधान को ही खत्म करने की भीषण आस लगाए थे। जिसपे ये नेता निगाहे तो गड़ाए थे मगर व्यस्त होने का नाटक दिखाए थे। तभी ये नारा दिए थे अबकी बार 400 पार। 

मगर दुखद हृदय -पूर्ण बहुमत का स्वर्णिम अध्याय खत्म हो चुका है नेताओ को  गठबंधन का बहाना अटल जी की तरह मिल चुका है। 

अब क्या अध्यादेश का उपयोग कर बनेगा सख्त जनसंख्या कानून,बनेगा भारत हिन्दु राष्ट्र या nrc लागू कर देश से बीस करोड़ घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। घुसपैठियों के निकल जाने के बाद भारतीय मुसलमानों की स्थिति में बड़ी तेजी से बदलाव आएगा। 

विचारणीय है अगर इस इलेक्शन में सरकार पलट जाती तो इन हिन्दू नेताओ की बातें बदल जाती फिर ये कहते भारत बनाओ हिन्दु राष्ट्र।

निराश होने की जरूरत नही है भाजपा अकेली 241 सीट जब इंडी ठगबंधन ने दुनियाभर के भ्रम फैलाकर भी 233 सीट हासिल की है

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार फिर से बन रही हैकुछ पॉज़िटिव बातों को ध्यान में लेकर चुनावों के परिणाम का आनंद ले।

370  के विरोधी महबूबा मुफ्ती और ओमर अब्दुल्ला हार गये है अब उधर भाजपा का मजबूत ग्राउंड तैयार हो गया है।

आंध्र राज्य में लोकसभा की अतिरिक्त राज्य सरकार चंद्र बाबू के साथ बन गई है

ओडिशा में इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई है। अरुणाचल और सिक्किम में राज्य सरकार बन गई है।

पंजाब में 18 से 19 प्रतिशत वोट पाकर आनेवाले समय मे पंजाब में भी अच्छा होने की उम्मीद हो गई हैं

केरल में 1 सीट खोलकर और वोट प्रतिशत बढ़ाकर आने वाले अक्टूबर में  केरल राज्य के चुनाव में एक आशा का निर्माण किया है

तमिलनाडु में वोट प्रतिशत बढ़ गया है तमिलनाडु राज्य के चुनावों में अनहोनी के अनुमान लगा सकते हैं

कुल मिलाकर केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने के अलावा चार राज्यो में सरकार बना दी है

हिमाचल में 4 में से 4

उत्तराखंड में 5 में से 5

दिल्ही में 7 में से 7

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 1

अरुणाचल प्रदेश में 2 में से 2

छत्तीसगढ़ में 11 में से 10

ओडिसा में 21 में से 19

यह आंकड़े भी उत्साह वर्धक ही है

न प्रधानमंत्री की महेनत में कमी थीं ना कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह में कमी थी स्वामी विवेकानंद जी का यह अजर अमर वाक्य था उठो जागो ध्येय प्राप्त न हो तब तक लगे रहो

चुनावों में थोड़ा बहुत उलट फेर होता ही है विपक्षी दल भाजपा NDA हार गई है मोदी लहर खत्म हो गई है की नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें कर रहा है। देश की जनता रुकने वाली नही है न देश रुकने वाला है देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पिछले दस साल में जो काम हुवा है वो काबिले दाद है ही पर जो काम नही हुवा है वो अब होगा वैसे यह बात प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्यों में बार बार की है जो पूरी होगी

प्रधानमंत्री कृत निश्चयी है आप ने जो भरोसा जताया है वो पूरी करने में कल् से लग जाएंगे आंकड़ों की बात करके भ्रम फैलाने वाले ठगबंधन की बात न सुनते हुवे काम पर लग जाना है।

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ लेकर माँग रहीं 1 लाख रूपए : कहा – अपने लोगों को मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे, हमें नहीं दे रहे

उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कांग्रेस  मुख्यालय में मुस्लिम महिलाओं की लगी लंबी कतार (फोटो साभार: India Today)
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित हो गए हैं और कांग्रेस पार्टी भले ही तिहाई अंक तक नहीं पहुँच पाई लेकिन उसने ऐसा माहौल बना रखा है जैसे उसने भाजपा को हरा दिया है। इस चुनाव में राहुल गाँधी ने संपत्ति के बँटवारे समेत कई बड़े-बड़े वादे किए। अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं की लंबी कतार लग गई है। ये सभी 1 लाख रुपए की माँग कर रही हैं, साथ ही कह रही हैं कि उन्हें वित्तीय लाभ दिया जाए।

मुस्लिम महिलाएँ अपना-अपना पहचान-पत्र समेत अन्य दस्तावेज लेकर कांग्रेस के दफ्तर पहुँची हैं। इन महिलाओं ने अपने हाथों में कांग्रेस का ‘गारंटी कार्ड’ भी थाम रखा है, जिसमें एक लाख रुपए के वेतन के अलावा हर शिक्षित युवा को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया है। ‘इस गारंटी कार्ड’ में कर्ज माफी का भी वादा है। मुस्लिम महिलाओं ने इन कार्ड्स को भर भी रखा है। उन्होंने बताया कि यहीं से उन्हें ये कार्ड्स मिले थे। हालाँकि, कइयों का जमा नहीं किया जा रहा और कहा जा रहा है कि लंबी प्रक्रिया है इसकी।

‘India Today’ की रिपोर्ट में आप देख सकते हैं कि तस्लीम नाम की एक महिला ने बताया कि अभी उन्हें कांग्रेस दफ्तर की तरफ से कुछ नहीं बताया गया है। कई फॉर्म्स जमा कर लिए गए हैं। जमा करने के बाद उन्हें स्लिप भी दी गई है। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें कार्ड नहीं मिले, कइयों को दोपहर बाद आने के लिए कहा गया। लाइन में लग कर मुस्लिम महिलाएँ इंतज़ार करती रहीं, 12 बजे के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। कांग्रेस दफ्तर के बाहर खिड़की के पास इंतज़ार करती रहीं।

एक मुस्लिम महिला ने कहा कि ये अपने एरिया में मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे हैं और उन्हें कुछ नहीं दे रहे। एक महिला ने कहा कि वो छोटे बच्चे को घर में छोड़ कर आई हैं, वहीं एक मुस्लिम युवती ने कहा कि अगर पैसे नहीं मिलेंगे तो इन लोगों को स्पष्ट बोल देना चाहिए। महिलाएँ बार-बार दूसरों को गड्डी दिए जाने की बात कहती रहीं। कांग्रेस की प्रोपेगंडा मशीनरी ने इस चुनाव में किस तरह काम किया, ये इसका एक उदाहरण है। इसी तरह ‘मोदी सरकार आरक्षण खत्म कर देगी’ जैसे झूठ फैलाए गए।

केरल : ‘हिजाब न पहनने वाली महिलाओं का चरित्र गड़बड़’: आनाकानी के बाद पुलिस ने मौलाना पर दर्ज की FIR, महिला ने सरेआम हटा दिया था स्कार्फ

प्रगतिशील मुस्लिम मंच अध्यक्ष वीपी सुहरा ने मौलाना मुक्कम उमर फैजी के खिलाफ दर्ज की थी शिकायत (फोटो साभार: asianetnews/
केरल में टीवी डिबेट के दौरान एक मौलाना ने उन महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाया जो हिजाब नहीं पहनतीं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर 4 जनवरी 2024 को उनके खिलाफ केरल के कोझिकोड में एफआईआर दर्ज हुई। इस मामले में शिकायत प्रगतिशील मुस्लिम महिलाओं के मंच NISA की अध्यक्ष वीपी सुहरा ने की थी।

उनकी शिकायत के बाद ही 4 जनवरी को मौलाना के खिलाफ IPC की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले शब्द बोलना) के तहत FIR दर्ज की गई। इस एफआईआर के होने के बाद सुहरा ने मौलाना के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। वे मुस्लिम समुदाय और महिलाओं को खराब तरीके से दिखाने चाहते हैं। वे महिलाओं को बुर्का पहनने वाली और न पहनने वाली में बाँटकर समुदाय में तनाव पैदा करना चाहते हैं। फैजी ने उन सभी महिलाओं का अपमान किया है जो हेडस्कार्फ़ नहीं पहनती हैं।”

सुहरा ने पुलिस पर शुरू में उनकी शिकायत पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने 7 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की, तो पुलिस ने कहा कि अगर उन्हें अदालत से निर्देश मिलेगा तो वे केस दर्ज करेंगे। बाद में हमें कानूनी राय मिली कि पुलिस शिकायत पर कार्रवाई कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम संजीदगी और जिद के साथ अपनी शिकायत पर टिके थे ताकि यह पक्का किया जा सके कि मौलवी पर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए केस दर्ज किया जाए।”

दरअसल, एक टेलीविजन बहस के दौरान एक मौलवी मुक्कम उमर फैजी ने ये कथित टिप्पणी की थी कि जो मुस्लिम महिलाएँ हेडस्कार्फ या हिजाब नहीं पहनती थीं, वे संदिग्ध चरित्र वाली होती हैं।

ये टेलीविजन बहस बीते साल अक्टूबर 2023 में समान नागरिक संहिता पर एक सेमिनार के दौरान सीपीआई (एम) नेता अनिल कुमार के बयान को लेकर हुई थी। कुमार ने कहा था,”कम्युनिस्ट पार्टी के असर की वजह मलप्पुरम में मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब छोड़ दिया और इससे मुस्लिम समुदाय अधिक प्रगतिशील हुआ है।”

इस बयान के बाद वो सीपीआई (एम) के लोकसभा सांसद ए एम आरिफ और पार्टी के कई अन्य मुस्लिम नेताओं के निशाने पर आ गए थे। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य एम वी गोविंदन ने कहा था कि पार्टी कुमार के रुख से राजी नहीं है। वहीं मौलाना ने भी टीवी प्रोग्राम में इस पर अपनी राय दी थी, जिसे सुनकर सुहारा काफी नाराज हो गईं थीं। उन्होंने अक्टूबर में एक सार्वजनिक मंच पर अपने सिर से स्कॉर्फ को हटा दिया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शहर के नल्लालम में कुदुम्बश्री के थिरिके स्कूलिल (बैक टू स्कूल) अभियान के उद्घाटन सत्र के दौरान फैजी की टिप्पणी पर निशाना साधाते हुए कहा था कि सिर ढंकना या नहीं ढंकना महिला की पसंद है ये स्कॉर्फ हटाते हुए कहा था- “मैं सिर पर स्कार्फ पहनकर बड़ी हुई हूँ। यह मेरी आदत का हिस्सा है इसलिए नहीं कि मैं मुस्लिम हूँ।” उनके हेडस्कॉर्फ हटाने का विरोध भी हुआ था जिसके बाद पुलिस के पास शिकायत भी पहुँची थी। 

भारत में पहली घटना : ईरानी औरतों के समर्थन में आईं केरल की मुस्लिम महिलाओं ने एकजुट होकर जलाया हिजाब

                                केरल में मुस्लिम महिलाओं ने एकजुट होकर हिजाब जलाया (फोटो साभार: ANI)
केरल के कोझिकोड टाउन हॉल के सामने मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने रविवार (6 नवंबर 2022) को हिजाब जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। भारत में हिजाब जलाने की यह पहली घटना है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं। ऐसा करके उन्होंने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन का समर्थन करते हुए एकजुटता का संदेश दिया। यह घटना केरल युक्तिवादी संगम द्वारा आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोझिकोड में ‘फैनोस-साइंस एंड फ्री थिंकिंग’ टाइटल का एक सेमिनार आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत मुस्लिम महिलाओं ने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई और संगठन की छह मुस्लिम महिलाओं की अगुवाई में हिजाब जलाया गया। इस दौरान महिलाएँ हाथों में पोस्टर लेकर नारे लगाते हुए भी नजर आईं।

युक्तिवादी संगम एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसके द्वारा हर साल इस तरह के सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। इस आयोजन में मुस्लिम महिलाओं सहित विभिन्न धर्मों के लोग भाग लेते हैं, जो संगठन का हिस्सा हैं।

ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण हुई थी। ईरान में 13 सितंबर 2022 को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी (22) को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए। महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाई थीं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भारी समर्थन मिल रहा है।

भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया था।

हैदराबाद : माँ दुर्गा की प्रतिमा खंडित करने वाली मुस्लिम महिलाओं को बताया जा रहा मानसिक रूप बीमार

                                                                                                       फोटो साभार: news 18

हैदराबाद के खैरताबाद इलाके में 27 सितंबर, 2022 को माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़ने वाली दो मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले को लेकर नामपल्ली के विधायक जेएच मेराज ने मीडियाकर्मियों को बताया, “2 बुर्का पहने महिलाओं ने स्पैनर से देवी की मूर्ति को खंडित कर दिया। उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है। मैं आयुक्त से विस्तृत जाँच करने का अनुरोध करता हूँ।” उन महिलाओं पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति पर भी हमला करने की कोशिश की, क्योंकि उसने उन्हें रोकने की कोशिश की थी।

इससे पहले उन्होंने एक चर्च के बाहर लगी मदर मैरी की मूर्ति को भी तोड़ने की कोशिश की।

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP ने देवी दुर्गा और मदर मैरी की मूर्तियों को तोड़ने वाली दोनों महिलाओं को लेकर कहा, “ये दोनों महिलाएँ अपने अम्मी-अब्बू के साथ रहती हैं। ये मानसिक रूप से बीमार हैं। वे 2018 में जेद्दा से लौटे थे और तब से इसका सामना कर रहे हैं। इनका एक भाई भी है, जो साथ में रहता है।

जिस तरह दोनों महिलाओं को मानसिक रूप से बीमार बताकर बचाने का प्रयास किया जा रहा है, उस स्थिति में सवाल यह उठता है कि "इन्होने अपनी इस्लामिक किताबों या घर में नमाज़ में बाधा डाली? यदि नहीं फिर यह नाटक क्यों? हिन्दू 'सिर तन से जुदा' तो कर नहीं सकते, लेकिन इस मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, अगर ये दोनों महिलायें मानसिक रूप से पीड़ित हैं, इन्हे किसी मानसिक हॉस्पिटल भेज इलाज करवाया जाये और इन्हे केवल एक समय का नाश्ता और एक समय खाना दिया जाए, अगले ही दिन जेहादी सब कबूल देंगी। इनके और इनके घरवालों के बैंक खातों की जाँच करवाई जाने के साथ-साथ समस्त सरकारी सुविधाओं से हमेशा के लिए वंचित किया जाए।  

भाई असीमुद्दीन ने पुलिस को बताया, “मैं अभी तक अपनी बहनों से नहीं मिला हूँ, लेकिन मैंने सुना है कि क्या हुआ है, इसलिए मैं सामने नहीं आया। मेरी माँ और बहनों को सिज़ोफ्रेनिया है और भाई को पैरानॉयड सिज़ोफ्रेनिया है। उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया है। मैं माफी माँगता हूँ। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है, इसलिए मुझे इस बात का ध्यान रखना होगा।”

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP राजेश कुमार ने बताया, “आज सुबह दो मुस्लिम महिलाओं ने खैरताबाद स्थित एक पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा माता की मूर्ति के एक हिस्से में तोड़फोड़ की। एक महिला को स्पैनर ले जाते हुए भी देखा गया था।” DCP ने आगे यह भी बताया कि प्रतिमा पर हमला करने के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया। हालाँकि, महिलाओं के कट्टरपंथी रवैये को देखते हुए स्थानीय लोग जुट गए और उसे पकड़ लिया। लोगों ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें सैदाबाद पुलिस के हवाले कर दिया।

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हैदराबाद : 2 मुस्लिम महिलाओं ने पूजा पंडाल में घुस तोड़ डाली माँ दुर्गा की प्रतिमा: रोकने गए शख्स

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हैदराबाद : 2 मुस्लिम महिलाओं ने पूजा पंडाल में घुस तोड़ डाली माँ दुर्गा की प्रतिमा: रोकने गए शख्स

दोनों महिलाओं को पहली बार एक चर्च के बाहर देखा गया था, जहाँ उन्होंने बाहर रखी मदर मैरी की मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की थी। फिर वे एक दुर्गा पूजा पंडाल गईं, जो नवरात्रि दौरान चर्च से कुछ मीटर की दूरी पर बनाया गया था। अचानक काले बुर्के पहने दो मुस्लिम महिलाएँ दुर्गा पूजा पंडाल (Puja Pandal) में घुस गईं और माता दुर्गा (Durga Mata) की प्रतिमा को खंडित कर दिया। उन्होंने प्रतिमा के कई हिस्सों को खंडित कर दिया है।