Showing posts with label #alimony. Show all posts
Showing posts with label #alimony. Show all posts

भारत में शरिया नहीं चल सकता, जिसे जाना हो पाकिस्तान जाए, कोई नहीं रोकेगा, वहां पूरा शरिया मिलेगा मुस्लिमों को; अब देश नहीं टूटेगा; AIMPLB पर महिला आयोग कार्रवाई करे

सुभाष चन्द्र

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का हनन कहा है और कहा कि यह फैसला शरीयत से मतभेद पैदा करता है और गुजारा भत्ता महिलाओं के लिए “भीख” है। अगर तलाकशुदा महिला को गुजाराभत्ता मांगना भीख है तो हज के लिए सब्सिडी भीख नहीं? 

सबसे बड़ी बात है कि AIMPLB की सदस्य प्रो.मुनिसा बुशरा आबिदी ने महिला होते हुए गुजारे भत्ते को भीख बताते हुए कहा कि “जब महिला अपने पति से सारे रिश्ते ख़त्म कर चुकी है तो उसके सामने भीख मांगने क्यों जाए? उसकी जगह वह खुद से कुछ काम-धंधा कर सकती है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
“पति-भाई भी उसका गुजारा उठा सकते हैं”, वह उस पति की बात कर रही है जिसने तलाक दे दिया और भाई पर जिम्मेदारी क्यों? यहाँ बुशरा का दोगलापन साफ नज़र आ रहा है जो इसे बताना पड़ेगा कि "पति-भाई" से क्या मतलब है? क्या महिला पति को भाई बनाए या भाई को पति बनाए? इस रिश्ते को खुलकर बताना होगा। जब पति ने तलाक दे दिया, और उससे गुजरा भत्ता लेने को भीख बता रही तो "पति-भाई" से क्या मतलब है?

मुस्लिम बोर्ड की महिला आबिदी का बयान अत्यंत शर्मनाक है वह भूल गई, गुजारा भत्ता पाना  जैसे किसी भी तलाकशुदा महिला का अधिकार होता है वैसे मुस्लिम महिला का भी है लेकिन बोर्ड का और खासकर महिला सदस्य का ऐसे अधिकार को “भीख” कहना मुस्लिम महिलाओं का घोर अपमान है और इस तरह के अपमान के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग को संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए

मोहतरमा आबिदी और पर्सनल लॉ बोर्ड की ऐसी सोच की वजह से ही मुस्लिम पुरुषों को बढ़ावा मिलता है आए दिन महिलाओं को तलाक देकर बार बार शादी करने के लिए मैडम आबिदी, तलाक में महिला अपने पति से सारे रिश्ते ख़त्म नहीं करती, बल्कि उसका शौहर उसे तलाक देकर उससे अपने रिश्ते ख़त्म  करता है और उसके लिए उसे गुजारा भत्ता देना लाजमी है महिला तलाक नहीं देती, बल्कि मुस्लिम महिला तो “खुला” देती है जिसे शौहर माने या न माने

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो के फैसले के बाद भी उत्पात मचाया था और अब फिर वह तकरार के रास्ते पर है लेकिन शाहबानो के समय राजीव गांधी झुक गए थे लेकिन अब बोर्ड को पता है कि जिस मोदी ने ट्रिपल तलाक ख़त्म कर दिया वह उनके दबाव में नहीं आना वाला चाहे मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक से मुक्ति पाने के बाद भी मोदी को वोट नहीं दिया लेकिन मोदी ने समाज के हित में वह काम किया एक साधू की तरह और अब यह मुस्लिम महिलाओं की मूर्खता थी जो उन्होंने मोदी के उपकार को नहीं समझा

सबसे बड़ी बात यह है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठन Civil Laws के मामले में तो संविधान की दुहाई देकर शरिया के अनुसार चलने की बात करते हैं लेकिन जब मामला Criminal Laws का होता है तो उसमे शरिया के अनुसार फैसले नहीं चाहता शरिया की याद महिलाओं के अधिकार के समय ही क्यों आती है? अगर शौहर ने गलती से भी तलाक दे दिया तो बीबी को हलाला करना है, क्यों? शौहर को क्यों नहीं? इससे बड़ा दोगलापन नहीं हो सकता यह धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है कि सब कुछ आपकी मर्जी से हो

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठन जिस तरह चल रहे हैं उसे देख कर लगता है वे देश तोड़ने की फ़िराक में हैं लेकिन देश तो अब नहीं टूटेगा और उन्हें अगर शरिया ही चाहिए तो उसके लिए मुस्लिम पाकिस्तान ले चुके हैं और शरिया के लिए वे वहां जा सकते हैं। भारत में न्याय से और संविधान से ही शासन चलेगा

   

जब पाकिस्तान बना था उस वक्त पाकिस्तान और उसके पूर्वी पाकिस्तान की आबादी कुल मिला कर 7.5 करोड़ थी और भारत में मुसलमान 3.5 करोड़ थे पाकिस्तान और बांग्लादेश की आबादी आज 42 करोड़ है यानी 6 गुना बढ़ी है जबकि भारत में मुसलमान 8 गुना बढ़ कर 20 से 25 करोड़ हैं, यानी गांधी और नेहरू का एक और पाकिस्तान बनाने का सपना सच करने की फ़िराक में हैं भारत के मुस्लिम 

ये मुसलमानों को सोचना होगा वो चाहते क्या है?

कांग्रेस और इंडी ठगबंधन के सभी “खलीफा” महिलाओं के गुजारा भत्ते पर खामोश हैं

ट्रिपल तलाक़ से मुक्ति के बाद भी मोदी को वोट न देने वाली मुस्लिम औरतों को अब कुछ समझ आया ? सुप्रीम कोर्ट ने नए फैसले में मोदी के कानून में ही उन्हें गुजारा भत्ते के अधिकार दिए हैं

सुभाष चन्द्र

वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने शाहबानो केस में CrPc के section 125 मुस्लिम महिलाओं को तलाक़ के बाद अपने शौहर से गुजारा  भत्ता लेने का अधिकार दिया था। उस बेंच में जज थे - चीफ जस्टिस वाई वी चंद्रचूड़, जस्टिस रंगनाथ मिश्रा, जस्टिस डी ए देसाई, जस्टिस ओ चिनप्पा रेड्डी और जस्टिस E S Vekkataramaiah इस फैसले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले की पुष्टि की गई थी और मौहम्मद अहमद खान को अपनी पत्नी शाहबानो को गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए गए थे फैसले में कहा गया था मुस्लिम पर्सनल लॉ के रहते हुए भी तलाकशुदा औरत को CrPc के section 125 में गुजारा भाता लेने का अधिकार है

लेखक 
चर्चित YouTuber 

लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम संगठनों के दबाव में और मुस्लिम तुष्टिकरण की खातिर संसद में बिल पास करा कर वह आदेश रद्द कर दिया और मुस्लिम औरतें फिर अपनी पतियों की रहमोकरम पर सड़कों पर आ गई लेकिन 30 साल बाद नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्रिपल तलाक़ से मुक्ति दिलाई और रात के अंधेरे में छोटी छोटी बात पर बच्चों के साथ घर से निकाले जाने से छुटकारा दिलाया लेकिन वे औरतें सब भूल गई और मोदी को 2024 के इलेक्शन में तबियत से उसे हटाने के लिए वोट दिया।  

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाकशुदा मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने के निर्णय से मुस्लिम कट्टरपंथियों में बड़ी जबरदस्त खलबली मच गयी है। उनके द्वारा इसे इस्लाम पर हमला बताया जा रहा है। जुलाई 11 को टीवी परिचर्चाओं में सहभागी बने मौलानाओं को पहली बार जलील होते देखा। सबसे बड़ी बात News18 पर एंकर लुबिका लियाकत द्वारा उस तस्लीम रहमानी को, जिसके कारण निर्दोष नूपुर शर्मा को 'सर तन से जुदा' गैंग की वजह से गुमनामी जिंदगी जीने को मजबूर होना पड़ा, मुंह काला करने को बोल दिया। नीचे देखिए वीडियो। 

हो सकता है कि ये कट्टरपंथी जितना ज्यादा इस मुद्दे को उछलेंगे, उतना ही इस्लाम के लिए नुकसानदेह होने वाला है। इन परिचर्चाओं में एक बात मुखर हुई की निकाह एक contract है, लेकिन ये नहीं बता रहे कि contract for what? हलाला? आने वाले समय में यही contract for what गरमाने वाला है। दूसरे, इन परिचर्चाओं में एक बात और सामने आयी कि 'जब कोई पुरुष चोरी करता है, जेब काटता है, क़त्ल करता है आदि अपराध करने पर कोर्ट को क्यों जाते हैं, तब शरीयत कहाँ चली जाती है? औरतों के अधिकारों पर ही शरीयत क्यों जरुरी हो जाती है?  

    

जुलाई 10 को भी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस B V Nagarathna  और जस्टिस Augustine George Masih की पीठ ने एक बार फिर section 125 में मुस्लिम महिला के गुजारा भत्ता पाने के अधिकार को सही कहा और यह भी कहा कि यदि किसी महिला की अर्जी Section 125 में लंबित है तो वह The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Act, 2019 के अंतर्गत भी अपना अधिकार मांग सकती है

इसी क़ानून में ट्रिपल तलाक़ देने वाले को 3 साल की सजा का प्रावधान किया गया था जिसके खिलाफ बड़े बड़े मौलाना लड़ते रहे हैं 

जुलाई 10 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक मुस्लिम द्वारा लड़ा गया था और हाई कोर्ट ने उसे अपनी तलाकशुदा पत्नी को 10 हजार रूपए महीने गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है  

ऐसे में अब सवाल उठता है कि जो नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं के लिए किया, वह उनके ही हित में था लेकिन कुल मिला कर औरतों समेत 98% मुसलमानों ने मोदी को हटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया और कांग्रेस के तलुए चाटने लगे जिसने शाहबानो केस से लेकर अभी तक मुस्लिम महिलाओं का साथ नहीं दिया 2024 लोक सभा चुनाव में कुछेक मुस्लिम महिलाओं को बीजेपी को वोट देने के कारण तलाक का सामना करना पड़ा। 

आज भी कांग्रेस जुलाई 10 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद से रद्द कराने के लिए हल्ला ठोकेगी अब देखते हैं मुस्लिम संगठनों ने जिस तरह शाहबानो के फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, अब कितना उत्पात करते हैं 

वैसे तो जो आचरण मुस्लिम महिलाओं ने मोदी के लिए दिखाया है, अब मोदी की तरफ से उनके लिए कुछ भी करना फिर से धोखा खाना होगा क्योंकि ये महिलाएं और मुस्लिम पुरुष किसी हाल में मोदी का समर्थन नहीं करेंगे