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तेलंगाना : कांग्रेस की हिटलरशाही, आलोचना करने वालों पर आतंकवाद वाला कानून क्यों? संविधान और लोकतंत्र का रोना-रोने वाले राहुल गाँधी चुप क्यों?


इमरजेंसी में जिस तरह प्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने गला घोंटा था उसका तेलंगाना कांग्रेस सरकार द्वारा जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। फिर शोर मचाते हैं मोदी सरकार में लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। जनता को गुमराह करती है कांग्रेस। हकीकत में  लोकतंत्र और संविधान कांग्रेस राज में ही खतरे में रहे हैं। अपने राज में कांग्रेस ने संविधान में इतने ज्यादा संशोधन कर संविधान की मूलभावना को ही चकनाचूर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट तक चुपचाप बैठे देखती रही।  

कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी राष्ट्रीय स्तर पर खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा चैंपियन बताते हैं। वे अक्सर भाजपा सरकार पर ‘आवाज दबाने’ का आरोप लगाते हैं, लेकिन तेलंगाना में उनकी अपनी सरकार का रवैया कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार अब सोशल मीडिया पर आलोचना करने वालों के खिलाफ देश के सबसे कड़े कानून ‘यूएपीए’ (UAPA) का इस्तेमाल कर रही है।

X हैंडल पर UAPA लगाने का क्या है पूरा मामला?

दरअसल, तेलंगाना पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के डीआईजी (CI Cell) आर. भास्करन का एक आधिकारिक पत्र सामने आया है। 18 अप्रैल 2026 को जारी इस पत्र में एक्स कॉर्प (X Corp) को संबोधित करते हुए एक ट्विटर हैंडल @TeluguScribe के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। इस पत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43F का हवाला दिया गया है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा, “हम आपसे इस विशिष्ट एक्स (X) खाते से संबंधित निम्नलिखित विवरण प्रदान करने का अनुरोध करते हैं: खाता पंजीकरण की जानकारी, उपयोग लॉग और गतिविधि विवरण, तथा कोई भी अन्य प्रासंगिक डेटा जो हमारी जाँच में सहायता कर सके। यह जानकारी मामले की गहन जाँच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

आलोचना पर आतंकवाद वाला कानून क्यों?

हैरानी की बात यह है कि UAPA जैसा सख्त कानून, जो आमतौर पर आतंकवाद और देश विरोधी गंभीर गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है, उसे महज कुछ ट्वीट्स के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पत्र के अनुसार, उक्त हैंडल पर आपत्तिजनक भाषा और कथित तौर पर ‘पब्लिक फिगर’ की छवि खराब करने वाले ट्वीट किए गए थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकार या नेता की आलोचना करना अब आतंकवाद की श्रेणी में आता है?

कांग्रेस और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर उठते सवाल

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस कार्रवाई से कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करती है। एक तरफ राहुल गाँधी ‘संविधान बचाने’ और ‘बोलने की आजादी’ का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार असहमति की आवाज को कुचलने के लिए UAPA जैसे दमनकारी प्रावधानों का सहारा ले रही है।

इस मामले को देखें तो साफ है कि तेलंगाना में सत्ता मिलते ही कांग्रेस की ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ वाली परिभाषा बदल गई है। क्या रेवंत रेड्डी सरकार इतनी डर गई है कि उसे साधारण ट्वीट्स से राज्य की सुरक्षा को खतरा महसूस होने लगा है? यह सीधे तौर पर लोकतंत्र में विपक्ष और जनता की आवाज को खामोश करने की एक तानाशाही कोशिश नजर आती है।