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भारत को कमजोर करने और मोदी का विरोध करने के लिए अब भारतीय उद्योगपति अडानी के पीछे पड़ी अमेरिकी संस्था Hindenburg

भारत में हो रहे आज हर आंदोलन के पीछे जिस tool kit को उछाला जा रहा है, वह आज कोई नई बात नहीं, ये tool kit भारत के स्वतंत्र होने के पहले से ही सक्रीय है। जिसे सभी ने नज़रअंदाज़ किया, लेकिन समय परिवर्तन देश को कमजोर करने वाली हर उस संस्था और व्यक्ति को रोशनी कर रहा है। इन शैतान आत्माओं को किसी मोदी या  योगी से कोई मतलब नहीं, इन्हे न किसी हिन्दू राष्ट्र और न ही किसी गुलाम-ए-मुस्तफा से। इस tool kit को मालूम है कि सारे जहाँ में सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम दो ऐसे फिरके हैं, जिन्हें आसानी से लड़वाया जा सकता है, वही खुनी खेल खिल रहा है। इसीलिए इनका उद्देश्य भारत को कमजोर कर वापस गुलामी की ओर ले जाना है। 

भारत में कितने लोग है जो अपने वास्तविक इतिहास से परिचित है, अपनी संस्कृति को जानते हैं। भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल कर खून से सने मुग़ल आक्रांताओं को महान बताकर गुणगान किया गया। भारतीय संस्कृति को धूमिल करने आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी सभ्यता को फैलाया गया, हिन्दू-मुस्लिमों में दंगा कराने मुग़ल आतताइयों द्वारा हिन्दू धर्म स्थलों को मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तानों बनाये जाने पर हिन्दुओं द्वारा वापस मांगने पर विवादित बनाना आदि आदि। 2014 के बाद से नितरोज किसी न किसी मुद्दे पर धरने, प्रदर्शन कर विवाद करना इसी tool kit का काम है। जब इसका नाम सामने आ ही गया है, जनता को भी इस संस्था को समर्थन देने वाले बिकाऊ लोगो का इनके परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार करना होगा। जिस दिन जनता ने सामाजिक बहिष्कार करना शुरू कर दिया, तभी सच्चाई सामने पर भारत में विश्व गुरु ही सर्वशक्तिशाली बन पायेगा। 

महंगाई और बेरोजगारी के नाम पर नौटंकीबाजों से पूछो भारत के स्वतंत्र होने से पहले एक मजदूर से लेकर धन-संपन्न तक की रसोई देसी घी से तैयार होती थी, आज कौन-से तेल में तैयार होती है। स्वतंत्र होने पर सोना 15/16 रूपए तोला(11 ग्राम से अधिक), एक रूपए का दस सेर(किलो से अधिक) बिकने वाला गेहूं, 4 पैसे सेर(लीटर से अधिक) बिकने वाला दूध मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने पर किस भाव बिक रहा था। किसी चपरासी की भर्ती में BA, MA पास आवेदन नहीं करते थे क्या? मतलब साफ है बेरोजगारी की समस्या तब भी थी, आदि आदि।  वैसे बीच-बीच में लेखों में पुरानी बातों का उल्लेख करता रहता हूँ। 

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को पश्चिमी देश नरेंद्र मोदी के रॉकफेलर के रूप में मानते हैं। गौतम अडानी का आदर्श वाक्य राष्ट्र निर्माण है। अडानी भारत के सबसे बड़े प्राइवेट हवाई अड्डे के संचालकों में से एक है, सबसे बड़े प्राइवेट बंदरगाहों के संचालक और सबसे बड़े तापीय कोयला बिजली उत्पादक हैं। अब इन दिनों जब पश्चिमी देश भारत और पीएम मोदी के खिलाफ एजेंडा चलाए हुए है तो उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था पर हमला कर दिया। इसी क्रम में अमेरिकी फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया कि अडानी ग्रुप शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने इस रिपोर्ट जारी करने से पहले अडानी समूह से कोई टिप्पणी नहीं ली। अडानी ग्रुप ने इस आरोप को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया। इस रिपोर्ट को जारी करने के समय को लेकर भी इस बात का अंदेशा बढ़ जाता है कि यह भारत के खिलाफ एक साजिश है।

गौतम अडानी की कंपनी अडानी समूह का साम्राज्य इतना कमजोर नहीं कि एक रिपोर्ट से उसकी नींव हिल जाए। जमीन से लेकर आसमान तक, पानी से लेकर सड़कों तक, तेल से लेकर ग्रीन एनर्जी तक अडानी समूह का कब्जा है। निवेशक घबराएं नहीं इसे लेकर अखबारों में अडानी ग्रुप ने विज्ञापन दिया है। इस विज्ञापन के जरिए उन्होंने अपनी कंपनियों के विस्तार की झलक दिखाई है। विज्ञापन में जरिए बताया गया है कि कैसे अडानी एंटरप्राइजेज देश निर्माण पर बल दे रहा है। अडानी समूह ने अपने विज्ञापन के जरिए बताया है कि उनका फोकस ‘भारत पर निर्भर वर्ल्ड’ मिशन पर है।

हिंडनबर्ग पर अमेरिका में चल रही आपराधिक जांच

हिंडनबर्ग की शॉर्ट-सेलिंग और हेज फंड के साथ मिलीभगत के लिए अमेरिकी सरकार के न्याय विभाग द्वारा जांच की जा रही है। फर्म के संस्थापक नैट एंडरसन कथित तौर पर कॉर्पोरेट आपदाओं की पहचान करने और उनसे मुनाफा कमाने में माहिर हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च कॉर्पोरेट आपदाओं की पहचान करने और उनसे लाभ उठाने में माहिर है।

कुछ समय पहले अमेरिका के न्याय विभाग ने 30 इन्वेस्टमेंट एवं रिसर्च कंपनियों एवं उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ जांच शुरू की थी। जिन कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी, उनमें हिंडनबर्ग रिसर्च भी शामिल है। ये कंपनियां किसी को टारगेट करके उसकी वित्तीय रिपोर्ट जारी करते थे और उसके स्टॉक पर अपना शॉर्ट पोजीशन बनाते थे। उस कंपनी का स्टॉक जितना ही गिरता उतना ही ये लाभ कमाते थे।

 हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के समय को लेकर उठ रहे सवाल

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अडानी समूह अपनी मूल कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज की FPO (Follow on Public Offer) बाजार में लेकर आई है। FPO स्टॉक एक्सचेंज में पहले से ही सूचीबद्ध कंपनी के नए शेयरों का ऑफर होता है, जिसके माध्यम से कंपनी बाजार से पैसे जुटाती है। अडानी ग्रुप भी FPO के माध्यम से बाजार से 20,000 करोड़ रुपए जुटाने में लगा हुआ है। यह देश का सबसे बड़ा FPO है। ऐसे वक्त में इस रिपोर्ट के आने से यह साफ हो जाता है कि यह कुछ और नहीं बल्कि कंपनी की शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के गलत इरादे से किया गया है।

अडानी ग्रुप के FPO पर रिपोर्ट का दिख रहा है असर

अडानी ग्रुप का यह FPO सब्सक्रिप्शन के लिए 27 जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2023 तक डिस्काउंट पर उपलब्ध है। लेकिन अडानी के शेयरों को लेकर जिस तरह से लोगों में क्रेज था, उसके हिसाब से यह FPO सब्सक्राइब नहीं हुआ है। पहले दिन सिर्फ 0.01 प्रतिशत ही सब्सक्रिप्शन हुआ है। जाहिर सी बात है कि हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट का असर अडानी समूह के सिर्फ मार्केट कैपिटलाइजेशन पर ही नहीं, बल्कि उसके FPO सब्सक्रिप्शन पर भी हुआ है।

रिपोर्ट का मकसद पूरी तरीके से दुर्भावनापूर्णः अडानी ग्रुप

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर अडानी ग्रुप के ग्रुप सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने कहा कि हम हिंडनबर्ग रिसर्च की छपी रिपोर्ट से हैरान हैं क्योंकि उन्होंने हमसे बिना संपर्क किए या फिर सही तथ्यों को वेरिफाई किए बगैर रिपोर्ट पब्लिश की है। अडानी ग्रुप ने कहा कि ये रिपोर्ट गलत सूचनाओं, बासी, निराधार और बदनाम करने वाले आरोपों का एक दुर्भावनापूर्ण मिश्रण है जिसे भारत के सुप्रीम कोर्ट में परखा गया है और उसे कोर्ट द्वारा खारिज किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि अडानी इंटरप्राइजेज के FPO को नुकसान पहुंचाने के इरादे से ये रिपोर्ट लाई गई है। अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट के समय को लेकर भी सवाल उठाया है। उसने कहा कि एफपीओ से ठीक पहले जारी रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से इसे लाया गया है जिसका मकसद अडानी ग्रुप के साख को बट्टा लगाना है।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के आरोप

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, “अडानी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अडानी का नेटवर्थ 120 अरब डॉलर है। इसमें से 100 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा पिछले तीन साल में हुआ। इसका कारण ग्रुप की लिस्टेड सात कंपनियों के शेयरों में तेजी है। इनमें इस दौरान औसतन 819 फीसदी की तेजी हुई है।” रिपोर्ट में अडानी परिवार के नियंत्रण वाली मुखौटा इकाइयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है। ये कंपनियां कैरेबियाई और मॉरीशस से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तक में है। इसमें दावा किया गया है कि इन इकाइयों का उपयोग भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी को अंजाम देने के लिये किया गया। साथ ही ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के धन की हेराफेरी के लिये भी इसका उपयोग किया गया।

क्या हिंडनबर्ग ने शॉर्ट सेलिंग और मुनाफे के लिए जारी की रिपोर्ट

हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट ऐसे समय में जारी की जब अडानी ग्रुप अगले 2 दिनों बाद ही देश का सबसे बड़ा FPO लॉन्च करने वाला था। रिपोर्ट जारी करने के समय को लेकर विश्लेषकों ने हिंडनबर्ग के इरादों पर सवाल उठाए हैं। हिंडेबर्ग पर सवाल एक नजर में इसलिए भी जायज दिख रहा है, क्योंकि यह कंपनी शॉर्ट सेलिंग का कारोबार करती है। हिंडेनबर्ग पर आरोप लगते रहे हैं कि रिसर्च फर्म के नाम पर कंपनियों की रिपोर्ट जारी करती है। इसमें वह कंपनियों की वित्तीय स्थिति का विवरण देती है। इसके कारण जब कंपनी के शेयर लुढ़कने लगते हैं तो वह मुनाफे कमाती है। शॉर्ट सेलिंग की बात खुद हिंडेनबर्ग ने कही है। हिंडेनबर्ग ने कहा था कि वह यूएस ट्रेडेड बॉन्ड और नन-इंडियन ट्रेडेड डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए अडानी ग्रुप की कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन रखेगी।

अडानी के नेटवर्थ में 23 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान

अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाकर अपने एजेंडे में किस तरह सफल रही उसे इस बात से समझा जा सकता है कि इसके कारण गौतम अडानी को बड़ा नुकसान हुआ है। गौतम अडानी की संपत्ति गिरकर 96.6 अरब डॉलर पर पहुंच गई है। इस रिपोर्ट के कारण अडानी के नेटवर्थ में 23 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के कारण निवेशकों, लोगों में एक डर का माहौल सा बन गया, लेकिन अडानी ने एक विज्ञापन के जरिए उन डर को खत्म करने की कोशिश की है। उन्होंने बताने की कोशिश की है कि अडानी समूह की नींव कितनी मजबूत है।

मोदी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका रच रहा है साजिशें, CIA पूरी ताकत से जुटा, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फैला रहा प्रोपेगेंडा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से नया भारत अपने पौराणिक वैभव के साथ विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ रहा है वह दुनिया के कुछ देशों को नागवार गुजर रहा है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को अलग मिर्ची लगी हुई है क्योंकि नया भारत उसकी हां में हां नहीं मिला रहा है बल्कि उसे आंख भी दिखा रहा है। अमेरिका से हथियार खरीदने की जगह भारत ने रूस को चुना, इससे वह तिलमिलाया हुआ है। उसकी सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि आज वह सरकार में किसी मंत्री या नेता को ‘खरीद’ भी नहीं पा रह है। जैसा कि वह कांग्रेस के शासन काल में किया करता था। 

जैसा कि उसने 1994 में इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायण पर जासूसी का आरोप लगवाकर किया था। उस वक्त नंबी नारायण के नेतृत्व में भारत क्रायोजेनिक बनाने के अंतिम चरण में पहुंच गया था। 1994 में नंबी पर आरोप लगाया गया कि जिस क्रायोजेनिक इंजन तकनीक पर वो काम कर रहे थे, उसकी तकनीक उन्होंने लीक करा दी है। नारायणन समेत तीन साइंटिस्ट गिरफ्तार कर लिए गए। उन पर आरोप लगा कि वो ये तकनीक पाकिस्तान को बेच रहे थे। हालांकि ये आरोप बाद में खारिज हो गया। पुलिस को लाख कोशिश के बाद भी कुछ ऐसा नहीं मिला, जिसे आपत्तिजनक कहा जा सके। अमेरिका अपनी चाल में सफल रहा था और भारत अपने अंतरिक्ष अभियान में 15-20 साल पीछे चला गया। 

इसी तरह आज भारत UPI पेमेंट सिस्टम दुनिया में धूम मचा रहा है और इससे अमेरिकी कंपनी वीजा मास्टरकार्ड व्यापक नुकसान होने वाला है। पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत जिस तरह से मजबूत हो रहा है वह अमेरिका नहीं सुहा रहा है और अब वह मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए साजिशें रच रहा है। इसके लिए वह देश के विपक्षी दलों, देशविरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों, लेफ्ट-लिबरल गैंग, खान मार्केट गैंग और अर्बन नक्सलियों को हर तरह से मदद पहुंचा रहा है।

इस संबंध में दडायरेक्टरीचडॉटकॉम ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें मोदी शासन के खिलाफ अमेरिका साजिश का पर्दाफाश किया गया है। लेख में कहा गया है कि मोदी शासन को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका पूरी ताकत से मेहनत कर रहा है। इसके लिए हिलेरी-ओबामा भी इस साजिश का हिस्सा हैं जो कि बाइडन के पीछे की वास्तविक शक्ति हैं। पीएम मोदी के साथ समस्या यह नहीं है कि वह एक हिंदू राष्ट्रवादी हैं, बल्कि यह है कि उन्हें खरीदा नहीं जा सकता। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA जिन्हें खरीद नहीं पाता उनसे घृणा करती है। यहां यह याद रखने की बात है कि कैसे CIA ने भारत के क्रायोजेनिक इंजन के विकास को बर्बाद कर दिया? नंबी नारायणन और अन्य को खरीदा नहीं जा सकता था – इसलिए उन्होंने कांग्रेस में शक्तिशाली भारतीय राजनेताओं के साथ मिलकर इसरो वैज्ञानिकों को बदनाम करने के लिए महिला जासूस का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने अब इसरो के वैज्ञानिकों को बरी कर दिया है – लेकिन बहुमूल्य समय नष्ट हो गया और वैज्ञानिकों की एक पीढ़ी को काम करने से रोक दिया गया।

विक्टोरिया नुलैंडः यूएस डीप स्टेट का शासन परिवर्तन एजेंट

ओबामा हिलेरी कैबल (The Obama Hillary Cabal) आर्म्स, फार्मा और ऑयल लॉबी को नियंत्रित करती है और इसमें 3 महिलाएं हैं: सुसान राइस, सामंथा पावर और विक्टोरिया नुलैंड। विक्टोरिया को यूएस डीप स्टेट के शासन परिवर्तन एजेंट के रूप में जाना जाता है। 2013 में यूक्रेन में EUROMAIDAN विरोध प्रदर्शन के पीछे विक्टोरिया का ही हाथ था। आप देख सकते हैं कि वह किसी देश के लिए कितनी खतरनाक रूप से काम कर सकती है। मार्च 2022 में दिल्ली की अपनी यात्रा पर, वह खुले तौर पर LeLi गिरोह, पत्रिकाओं, जनहित याचिका कार्यकर्ताओं से मिलीं और तमिलनाडु राज्य के नेताओं के साथ गुप्त बैठकें कीं। कोई आश्चर्य नहीं कि पप्पू और डीएमके यूनियन ऑफ स्टेट्स मॉडल की बात कर रहे हैं। इस तरह आने वाले दिनों में कुछ नए नैरेटिव सामने आएं तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

विक्टोरिया नुलैंड की भारता यात्रा का मकसद

विक्टोरिया नुलैंड की यात्रा के दौरान मुख्य उद्देश्य “थोरियम”(THORIUM) थी, तमिलनाडु का अर्थ थोरियम और थोरियम का अर्थ तमिलनाडु है। सीआईए भारत में एजेंटों को नहीं खोना चाहती। वही नूलैंड भारत में है जो हमें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन करने के लिए कह रही है। और भारत में रहते हुए वह कई सीएए विरोधी समूहों / लोगों से मिली – क्यों? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की वकील करुणा नंदी के साथ काफी समय बिताया। अब करुणा को यह कहने के लिए जाना जाता है कि “तीन तलाक पसंद की स्वतंत्रता है। अगर कोई हिंदू पुरुष अपनी पत्नी से कह सकता है कि “मैं तुम्हें तलाक देना चाहता हूं” तो एक मुसलमान को तीन तलाक कहने का अधिकार क्यों नहीं। सचमुच? मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार तीन तलाक का अंत तलाक में होता है। इसके साथ ही वह सीएए के खिलाफ रही हैं और किसान आंदोलन का समर्थन किया है। वह उन प्रभावशाली लोगों से मिल रही हैं जो पीएम मोदी के खिलाफ हैं ताकि आवश्यक धन CIA द्वारा उन तक पहुंचाया जा सके।

फोर्ड फाउंडेशन को वित्त पोषित करता है CIA, केजरीवाल हैं फोर्ड फाउंडेशन अवार्डी 

दिल्ली और पंजाब में अब अरविंद केजरीवाल के रूप में CIA द्वारा वित्त पोषित फोर्ड फाउंडेशन अवार्डी के पार्टी की सरकारें हैं। विक्टोरिया नुलैंड के बाद, भारत की यात्रा करने वाली संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी की प्रशासक सामंथा पावर हैं। इस बार टारगेट हमारी सबसे बड़ी ताकत होगी- फूड। एनजीओ/आंदोलनजीवी द्वारा खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में अराजकता पैदा करने के लिए बड़े विरोध की उम्मीद है। कैबल चाहता है कि इस खाद्य श्रृंखला को तोड़ा जाए। ऐसा वे शास्त्री जी के समय से कई बार कर चुके हैं।

दिल्ली और पंजाब में अब अरविंद केजरीवाल के रूप में CIA द्वारा वित्त पोषित फोर्ड फाउंडेशन अवार्डी के पार्टी की सरकारें हैं। विक्टोरिया नुलैंड के बाद, भारत की यात्रा करने वाली संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी की प्रशासक सामंथा पावर हैं। इस बार टारगेट हमारी सबसे बड़ी ताकत होगी- फूड। एनजीओ/आंदोलनजीवी द्वारा खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में अराजकता पैदा करने के लिए बड़े विरोध की उम्मीद है। कैबल चाहता है कि इस खाद्य श्रृंखला को तोड़ा जाए। ऐसा वे शास्त्री जी के समय से कई बार कर चुके हैं।

भारत के खिलाफ प्रतिबंध: वीजा से इनकार। यह आर्म्स लॉबी की सक्रियता है। विदेश मंत्री जयशंकर के शब्दों ने उनके जख्मों पर नमक छिड़क दिया है… भारतीयों को वीजा क्लियर करने में अमेरिका को 800 दिन लग रहे हैं जबकि चीनियों को वीजा क्लियर करने में 2 दिन लग रहे हैं। कैबल की नापाक साजिशें के तहत सबसे पहले WHO ने 4 भारतीय फार्मा कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने भारत के फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाए गए 4 खांसी और ठंडे सिरप पर अलर्ट जारी किया। इसे गंभीर गुर्दे की खराबी और गाम्बिया में बच्चों के बीच 66 मौतों से जोड़ दिया गया। डब्ल्यूएचओ के हवाले से रायटर ने खबर दी कि कंपनी और नियामक अधिकारियों के साथ आगे की जांच की जा रही है।

इसके बाद ओएनजीसी और बीपीसीएल को मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका में कुछ परियोजनाओं से बाहर करने के लिए मजबूर करने वाली तेल लॉबी हो सकती है। मुंबई में नए अमेरिकी महावाणिज्यदूत हैंकी, एक विशेषज्ञ हैं जो मिस्र में हुए आंदोलन के पीछे मुख्य ताकतों में से एक थे। वह ‘द नूलैंड स्कूल ऑफ रिजीम चेंज’ का छात्र है।

यूक्रेन में EUROMAIDAN विरोध प्रदर्शन

यह विरोध यूक्रेन सरकार के अचानक निर्णय बदले जाने के बाद हुआ। इसके तहत यूक्रेन ने यूरोपीय संघ-यूक्रेन एसोसिएशन समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया और रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने को चुना। CIA को यह मंजूर नहीं था। फरवरी 2014 में यूक्रेनी राजधानी में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच घातक संघर्ष, निर्वाचित राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को हटाने और यूक्रेनी सरकार को उखाड़ फेंकने में परिणत हुआ। तत्काल यूक्रेन में अमेरिकी समर्थक राष्ट्रपति थे और हंटर बाइडेन (वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे) यूक्रेन में जा पहुंचे और व्यवसायों को तोड़ दिया या उनमें भागीदार बन गए। ये नूलैंड और अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े कारोबारी थे।

क्यों अमेरिका व कुछ देश नरेंद्र मोदी से नफरत करते हैं?

एनसीबी ने अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 80000 किलोग्राम नशीली दवाओं को नष्ट कर दिया है। जिन लोगों ने 8 लाख करोड़ रुपये की ड्रग्स खो दी, क्या वे मोदी से नफरत नहीं करेंगे?

ईडी अब तक भ्रष्टों के पास से 1,20,000 करोड़ रुपये का काला धन जब्त कर चुका है। क्या काला धन गंवाने वाले मोदी से नफरत नहीं करेंगे?

मोदी ने फाइजर और मॉडर्न से कोरोना वैक्सीन आयात नहीं किया। उन्होंने स्वदेशी टीके विकसित करने में मदद की और भारत से फाइजर के अपेक्षित व्यवसाय को नष्ट कर दिया। मोदी योग, आयुर्वेद, स्वच्छता और निवारक इलाज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। क्या यह अंतरराष्ट्रीय फार्मा लॉबी मोदी से नफरत नहीं करेगी?

मोदी ने हथियारों के सौदागरों से ख़रीदना बंद कर दिया और सीधे फ़्रांस से राफेल ख़रीद लिया। मोदी ने भारत में रक्षा उपकरण बनाना शुरू किया और रक्षा खरीद कम की। क्या बेहद ताकतवर अंतरराष्ट्रीय रक्षा लॉबी मोदी से नफरत नहीं करेगी?

मोदी ने मध्य पूर्व से महंगा तेल खरीदना बंद कर दिया और रूस से भारी मात्रा में रियायती दर पर खरीदना शुरू कर दिया। क्या यह मध्य पूर्व का तेल माफिया मोदी से नफरत नहीं करेगा?

मोदी भारत की सड़ी-गली व्यवस्था को साफ कर रहे हैं। 75 साल से हमारा खून चूस रहे भ्रष्टाचारी मोदी के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। वे मोदी को रोकने के लिए कुछ भी करेंगे। दुनिया 3 शक्तिशाली लॉबी द्वारा शासित है – डिफेंस लॉबी, ऑयल लॉबी और फार्मा लॉबी। मोदी इन तीनों लॉबी के खिलाफ एक साथ जंग छेड़ रहे हैं। अब आप समझ सकते हैं कि ये लोग मोदी से इतनी नफरत क्यों करते हैं।

मोदी सरकार 2024 में भी चुनाव जीतेगी और ये भ्रष्ट लोग समाप्त हो जाएंगे। मोदी के पास एक ही ताकत है और वो है भारत की जनता। उसके साथ खड़े हो जाओ।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया, NYT लगातार चला रहा मोदी विरोध का प्रोपेगेंडा

पीएम मोदी को सत्ता हटाने की साजिश रच रहा पश्चिमी मीडिया भारत की छवि खराब करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता है, फिर चाहे वह कोविड काल हो, किसान आंदोलन हो, चीन के साथ सीमा विवाद हो या फिर भारत में होने वाले कोई दंगे हों। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स (NYT) भारत की छवि करने वाले मीडिया संगठनों में सबसे आगे है। इसका सबसे बड़ा सबूत 1 जुलाई 2021 को तब देखने को मिला जब NYT ने जॉब रिक्रूटमेंट पोस्ट निकाली। दिल्ली में साउथ एशिया बिजनेस संवाददाता के लिए नौकरी निकाली गई थी। इसमें नौकरी के लिए शर्तें बेहद आपत्तिजनक थी। पत्रकारों के लिए आवेदन में ‘एंटी इंडिया’ सोच होना, ‘हिंदू विरोधी’ सोच होना और ‘एंटी मोदी’ होना भी जरूरी था। अब इससे साफ हो जाता है कि NYT का भारत के प्रति नजरिया क्या है और किस एजेंडे को वह आगे बढ़ा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स का मोदी विरोध कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी अपने लेख में कह चुका है कि पीएम नरेंद्र मोदी से भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को खतरा है। न्यूयॉर्क टाइम्स NRC के विरोध में रिपोर्ट छापता है, न्यूयॉर्क टाइम्स लेख लिखकर कहता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने के करीब पहुंच रहा है? अनुच्छेद 370 की समाप्ति को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स में रिपोर्ट छपती है कि कश्मीर में हजारों मुस्लिम हिरासत में हैं। ये वही न्यूयॉर्क टाइम्स है, जो भारत के मिशन मंगलयान का पहले मजाक उड़ाता है और फिर मिशन सफल होने पर माफी मांग चुका है। सोचिए ऐसा क्यों था कि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले को न्यूयॉर्क टाइम्स ने आतंकवादी हमले की बजाए सिर्फ विस्फोट बताया था? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि पुलवामा में आतंकवादी हमला नहीं, ब्लास्ट हुआ।