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क्या राहुल गाँधी बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे? यही सवाल पूछने पर कांग्रेसियों ने इंडिया टुडे के पत्रकार को अमेरिका में धमकाया, पीड़ित ने बताया- गला पकड़ा, फोन छीना

                          पत्रकार रोहित शर्मा और राहुल गाँधी (साभार: इंडिया टुडे/ipanewspack)
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छिन लेते है। इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ अमेरिका में ऐसा हुआ था।

राहुल गाँधी की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस(IOC) के चेयरमैन सैम पित्रोदा से बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर सवाल किया तो वहाँ बैठे कांग्रेस समर्थक लोगों ने पत्रकार का मोबाइल फोन लिया और फुटेज को डिलीट करने के लिए धमकाने लगे।

कहा जा रहा है कि ऐसा करने वालों में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार भी शामिल थे। एक X यूजर अंकुर सिंह ने इसको लेकर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, “अलंकार ने इंटरव्यू रोक दिया। रिकॉर्डिंग डिलीट करने को कहा। पत्रकार ने मना कर दिया तो अलंकार ने उनका आईफोन छीन लिया और उनकी गर्दन पकड़ी। इसके बाद फोन को जबरन अनलॉक करके रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने इस पूरे वाकये को बताया है। उन्होंने लिखा है कि वे 7 सितंबर 2024 को भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की बहुप्रतीक्षित यात्रा को कवर करने के लिए अमेरिका के डलास स्थित टेक्सास गए थे। यहाँ राहुल गाँधी आने वाले थे और भारतीय प्रवासियों, छात्रों, प्रेस और कैपिटल हिल के नेताओं के साथ मुलाकात करने वाले थे।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे। कमरे में मौजूद एक व्यक्ति ने चिल्लाकर कहा कि यह सवाल ‘विवादास्पद’ है। वहाँ मौजूद अन्य लोगों भी उस व्यक्ति के हाँ में हाँ मिलाई।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। हालाँकि, रोहित के जिस सवाल को लेकर यह बवाल किया गया, उस सवाल को उनके ही एक मित्र ने राहुल गाँधी से पूछ लिया और कॉन्ग्रेस ने इसे अपने X हैंडल पर इसे पोस्ट भी किया।

बंगाल : ममता ने हिन्दू महिलाओं के लिए बना दिया नर्क ; कुँवारी या शादीशुदा… कम उम्र वाली सुंदरी को चुनते हैं, वासना तृप्त होने पर ही छोड़ते है: मीडिया में भी मातम, क्यों? देखिए वीडियो

                      संदेशखाली में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग (फोटो साभार : X_Debjanibhatta20)
आज एक महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के होते हुए हिन्दू महिलाओं के लिए बंगाल किसी नर्क से कम नहीं, और ममता खामोश है, क्यों?  यदि यही शोचनीय स्थिति मुस्लिम महिलाओं की होती सभी सियासतखोर चीख-पुकार कर रहे होते। लेकिन हिन्दू महिलाओं की दुर्गति होने पर सब को सांप सूंघ गया, सबके घरों में शायद कोई मातम का माहौल है? वैसे जब से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी है, तभी से 24 परगना सुलग रहा है। जिसकी विस्तृत रपट कुछ वर्ष पूर्व एक हिंदी  पाक्षिक को सम्पादित करते मुख्य समाचार बनाया था। लेकिन आज तक किसी भी पार्टी ने हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, कहीं उनका मुस्लिम वोट बैंक नाराज़ न हो जाए। 

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली से टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामे सामने आ रहे हैं। यहाँ टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

ये सब उसी संदेशखाली की पीड़ित महिलाएँ कह रही हैं, जिन्होंने अब इन अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के ऐलान कर दिया है और पूरे संदेश खाली में टीएमसी के फरार नेता और ममता बनर्जी के खास शेख शाहजहाँ और उनके गुर्गों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 8 फरवरी 2024 से संदेशखाली की महिलाएँ अब टीएमसी के गुंडों का सामना लाठी-डंडों के साथ कर रही हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए 10 फरवरी 2024 को प्रशासन ने धारा-144 तो लगाई, लेकिन टीएमसी गुंडों को अत्याचार करने की पूरी छूट दी। हम मीडिया संस्थानों से उन्हीं पीड़ित महिलाओं की बातचीत सामने रख रहे हैं, जिसमें वो टीएमसी के गुंडों की करतूतों को सामने रख रही हैं।

इसी कड़ी में टीवी9 बांग्ला से बातचीत में संदेशखाली की महिलाओं ने बताया है कि कैसे शिबू हाजरा और उत्तर सरदार की अगुवाई टीएमसी के गुंडों ने लोगों की जमीनों पर कब्जा किए। एक महिला ने बताया कि बीडीओ और स्थानीय पुलिस के जवान टीएमसी के पार्टी काडर की तरह काम करते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि टीएमसी के गुंडों को ‘कट मनी’ का भुगतान करना पड़ता है और अगर किसी वजह से ‘कट मनी’ नहीं दे सके, तो फिर टीएमसी के गुंडे उनकी पिटाई करते हैं। बीजेपी सांसद दिलीप घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर किया है।

एक महिला ने टीवी9 बांग्ला को बताया कि कैसे टीएमसी के गुंडे युवा लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। उसने बताया कि टीएमसी के गुंडे नए और पढ़ाई लिखाई वाले बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करते हैं। महिला ने बताया, “बच्चों से कहा जाता है कि ‘दीदी’ उनका पेट भरती हैं। वो राजनीतिक काम नहीं करेंगे तो खाने के लिए मर जाएँगे। टीएमसी के गुंडे उन बच्चों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला करवाते हैं, लोगों को परेशान कराते हैं और लूट जैसी वारदात कराते हैं। वो बच्चों को शराब और हथियार देकर बर्बाद कर रहे हैं। वो शाहजहाँ की पसंद की औरतों को उठाने के लिए दबाव डालते हैं।”

रिपब्लिक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता और उनके गुंडों ने शेख शाहजहाँ, उत्तर सरदार और शिबू हाजरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर हमला किया और उनका उत्पीड़न किया, तो पुलिस ने उनका हाथ दिया। एक महिला ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हम रात में नींद की एक झपकी तक नहीं ले सके। भारी संख्या में पुलिस वाले बाइकों और कारों पर सवार होकर पहुँचे। वो रात में जोर-जोर से हम सबको धमका रहे थे। हमारे परिवार के मर्द भाग गए थे, क्योंकि उन्हें पुलिस उठा लेती।”

बजरंग दल के कार्यकर्ता की पत्नी ने बताया, “पुलिस हमारे घर में रात 3 बजे घुसी। पुलिस वालों ने मेरे पति को गालियाँ दी और मेरा उत्पीड़न करने की कोशिश की। उन्होंने मेरा पोला (शादीशुदा बंगाली महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला कड़ा) तोड़ दिया। पुलिस ने मेरी बेटी को दूर फेक दिया। वो पुलिस वाले इतने नशे में थे कि वो सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।”

संदेशखाली की एक अन्य महिला ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की बदतमीजियों के बारे में बताया। एक महिला ने कहा, “पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि मैं दूसरे मर्दों के सोती हूँ? वो कैसे ये सवाल पूछ सकते हैं। मुझे जवाब चाहिए। मैंने क्या गलत किया है कि मुझे ‘मादर**’ जैसी गालियाँ दी गई?” महिला ने आगे बताया, “पुलिस वालों ने मेरे पति को ‘सुवर का बच्चा’ कहा। वो मेरे पति को घसीटकर घर से बाहर ले गए। उन्होंने क्या गलत किया था? हमें न्याय चाहिए। क्या पुलिस वाले किसी को भी इस तरह गालियाँ दे सकते हैं?”

संदेशखाली में एक महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडे हमारे पतियों को जबरदस्ती पकड़ कर अपने साथ ले जाते हैं। वो उनसे काम कराते हैं और पैसे भी नहीं देते। अगर कोई पैसों की माँग करता है, तो उसे बेहरमी के साथ पीटा जाता है।”

एक महिला ने एबीपी आनंदा से बातचीत में कहा, “हम कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहते। उत्तम सरदार ने हमें डंडे उठाने पर मजबूर कर दिया। वो पिछले 4 साल से हमारा उत्पीड़न कर रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी वज से हम यहाँ प्रदर्शन कर रहे है। हम अगर टीएमसी की बैठकों में जाते हैं, तो हमारे पतियों को उठा लिया जाता है। संदेशखाली कभी शांत माहौल वाली जगह हुआ करती थी, लेकिन उसे नष्ट कर दिया गया। हम फिर से संदेशखाली में शांति चाहते हैं।”

संदेशखाली की एक महिला ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार ने लोखिर भंडार योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिया है। क्या सरकार पार्टी की कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बदले ‘आर्थिक सहायता’ के तौर पर ऐसा कर रही है?

रिपब्लिक बाँग्ला से बात करते हुए पीड़ित महिला ने कहा, “क्या हम अपने सम्मान के बदले पैसे पा रहे हैं? क्या हमें इस लिए पैसे दिए जा रहे हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को रात में ‘कंपनी’ दें? क्या मुख्यमंत्री हमें अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए पैसे दे रही हैं?”

संदेशखाली में प्रदर्सन के दौरान एक महिला ने बताया, “तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।”

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” इस बात को वहाँ मौजूद एक महिला ने भी दोहराया।

एबीवी आनंदा से बात करते हुए एक पीड़ित ने बताया, “हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। टीएमसी के गुंडों ने हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। यहाँ तक कि उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनवाई गई कंक्रीट की सड़क को भी नष्ट कर दिया।” एक महिला ने बताया है कि उन्हें पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

एक महिला ने रिपब्लिक बाँग्ला के साथ अपनी आपबीती साझा की। महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी खिड़की तोड़ दी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ खींचा और बाहर को कहा। उन्होंने कहा कि वो उसका (महिला का) गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। वहाँ एक और महिला को बाल पकड़ कर खींचा गया और उसकी साड़ी खींचकर अलग कर दी गई। संदेशखाली में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। वो मेरे पति के सामने ही मुझसे बदतमीजी करते रहे। हम शांति चाहते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है मर जाना।”

एक महिला ने रोते हुए बताया, “टीएमसी के कार्यकर्ता सिर्फ महिलाओं को ही पार्टी में बुलाते हैं और उनका शोषण करते हैं। हमें अपने पतियों की जान बचाने के लिए उनकी बात माननी (यौन उत्पीड़न के लिए हाँ) पड़ती है।” महिला ये बात कहती हुई रो पड़ती है और कहती है कि टीएमसी के गुंडे ये भी नहीं सोचते कि वो पार्टी सपोर्टर है।

संदेशखाली में आखिर चल क्या रहा है?

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया।
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बंगाल : महिला मुख्यमंत्री के राज में ‘घर में से महिलाओं को उठा ले जाते हैं TMC के गुंडे, ‘संतुष्ट’ ह
संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। इसके अगले दिन शाहजहाँ शेख के गुंडों ने पलटवार किया, तो ग्रामीणों ने कई जगहों पर उत्पात कर दिया। इस बवाल में कई लोग घायल भी हो गए। इसके बाद ही पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। हालाँकि ऊपर के वीडियो में पीड़ित महिलाएँ उन्हीं अत्याचारों को बयान कर रही हैं, जो इस दौरान महिलाओं ने झेला।