Showing posts with label #sexual violence. Show all posts
Showing posts with label #sexual violence. Show all posts

हमास की क्रूरता : प्राइवेट पार्ट में चाकू घोंपकर किया बलात्कार, भाई बहन को आपस में सेक्स करने को कहा; आतंकियों ने इजरायलियों पर किए कितने अत्याचार, सामने आई 300 पन्नों की रिपोर्ट

         हमास ने यौन अपराधों का जश्न मनाया था। (फोटो साभार- द इकोनॉमिस्ट, साइलेंस नो मोर/बोस्टन हेराल्ड)
इजरायल के एनजीओ ‘द सिविल कमीशन’ ने ‘साइलेंस्ड नो मोर‘ यानी ‘अब और चुप नहीं’ नाम से एक रिपोर्ट जारी किया है। इसमें 7 अक्टूबर को योजनाबद्ध तरीके से हमास द्वारा रेप और यौन उत्पीड़न के सबूत दिए गए हैं। इसकी टैगलाइन ‘सेक्सुअल टेरर अनवील्ड: 7 अक्टूबर के अनकहे अत्याचार और कैद में बंधकों के खिलाफ’ है।

7 अक्टूबर 2023 इजरायल के इतिहास का सबसे खूनी दिवस था। उस दिन हमास ने नेतृत्व में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद जैसे संगठनों ने इजरायल के मासूम बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को अपना निशाना बनाया था। इस हमले में 1200 से ज्यादा लोग मारे गए। हमलावरों ने घरों, सड़कों, बस्तियों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और एक संगीत समारोह में आतंक मचाया। इस दौरान करीब 251 लोगों को अगवा कर गाजा ले जाया गया। घटना का वीडियो बनाकर पूरी दुनिया में इसको प्रसारित किया गया।

इस दौरान इजरायली नागरिकों के साथ अभूतपूर्व यौन हिंसा किया गया। इस दिल दहला देने वाली घटना के गवाहों ने जब दुनिया को जानकारी दी, तो लोग सन्न रह गए।

इजरायल की गैर लाभकारी संगठन ‘द सिविल कमीशन’ ने 12 मई 2026 को ‘साइलेंस्ड नो मोर’ यानी ‘अब और चुप नहीं’ शीर्षक से करीब 300 पेज की रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का शीर्षक है ‘यौन आतंक का पर्दाफाश: 7 अक्टूबर की अनकही क्रूरताएँ और बंधकों के खिलाफ अत्याचार’।

यौन हिंसा, अपमान और क्रूरता की दास्ताँ

दो साल के रिसर्च के आधार पर आयोग ने जो निष्कर्ष निकाला, उसमें कहा गया है कि यौन और लिंग आधारित हिंसा सुनियोजित, व्यापक और अहम थी। हमास और उसके सहयोगियों ने हमले के दौरान कई जगहों पर और कई फेज में पीड़ितों के साथ यौन शोषण किया और उन्हें यातनाएँ दी। उनका अपहरण, स्थानांतरण किया गया और जेल में डाला गया। इन अपराधों में अत्यधिक क्रूरता और गंभीर मानवीय पीड़ा देखी गई, जिन्हें पीड़ितों को डराने और अपमानित करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया था।

हमले के चश्मदीदों और पीड़ितों के बयान, साक्षात्कार, तस्वीरें, वीडियो, सरकारी दस्तावेज और अन्य प्राथमिक सामग्रियों का उपयोग निष्कर्ष निकालने में किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, “आयोग द्वारा किए गए डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि पीड़ित 52 अलग-अलग राष्ट्रीयताओं के थे, जो अपराधों के अंतर्राष्ट्रीय दायरे और उनके प्रभाव को रेखांकित करता है।” गाजा में हिरासत में लिए गए लोगों में विदेशी या दोहरी इजरायली और विदेशी नागरिकता वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा था।

इसमें कहा गया है कि सबूतों और सामग्रियों की तुलना और अपराधियों के तौर-तरीकों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर आयोग ने कई स्थानों पर की गई यौन और लिंग आधारित हिंसा की 13 पुनरावृत्तियों की पहचान की। इन पुनरावृत्तियों से पता चलता है कि ये अपराध एक व्यापक और सुनियोजित कार्यप्रणाली का हिस्सा थीं।

जाँच में यह भी पता चला कि आतंकवादियों ने हमले में खुद को दिखा कर और यौन उत्पीड़न को डिजिटल माध्यमों से प्रसार कर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने हमले, अपमान और हत्या के फुटेज प्रसारित करने के लिए सोशल मीडिया और पीड़ितों की व्यक्तिगत ऑनलाइन प्रोफाइल का दुरुपयोग किया। परिवार के सदस्यों को अपनों की मृत्यु के बारे में सबसे पहले हमलावरों द्वारा कई बार साझा की गई तस्वीरों या वीडियो के माध्यम से पता चला।

आतंकवादियों ने गोप्रो और बॉडी-वियर कैमरे लगा रखे थे या यह सुनिश्चित किया था कि उनके कृत्यों को रिकॉर्ड किया जाए और सार्वजनिक किया जाए। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि इसी वजह से सभी साइटों पर वीडियो में सशस्त्र समूहों और फिलिस्तीनी नागरिकों को हमलों का जश्न मनाते हुए, प्रसन्न और उत्साहित दिखाया गया। डिजिटल मीडिया के इस दुरुपयोग ने जघन्य क्राइम को मनोवैज्ञानिक युद्ध के हथियार में बदल दिया। इसका लक्ष्य न केवल पीड़ित थे, बल्कि उनके परिवार और पूरा समाज भी था।

पीड़ितों को गाजा पट्टी में घसीट कर ले जाने के बाद भी उन्हें दंडित करने, अपमानित करने और यौन हिंसा का शिकार बनाया गया। आतंक का यह एक सुनियोजित अभियान था। नवजात बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं बख्शा गया। महिलाओं और पुरुषों को घोर अपमान और यौन हिंसा का सामना करना पड़ा। परिवारों को अलग कर दिया गया और बुनियादी चिकित्सा उपचार से वंचित कर दिया गया। दरअसल इन कैदियों के तन-मन पर लगे गहरे चोट का इस्तेमाल प्रचार और दबाव के हथियार के रूप में किया गया।

रिपोर्ट में इन कृत्यों को हमले का ‘केन्द्र’ बताया गया है। इसमें कहा गया है, “महिलाओं और लड़कियों, और कई मामलों में पुरुषों और लड़कों को बलात्कार, यौन यातना, अंग-भंग, जबरन नग्नता और शवों के अपमान का शिकार बनाया गया। माता-पिता की उनके बच्चों के सामने हत्या कर दी गई, भाई-बहनों पर एक-दूसरे के सामने हमला किया गया, पीड़ितों को निर्वस्त्र किया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, उनका वीडियो बनाया गया और प्रदर्शित किया गया। ये आवेश में किए गए अपराध नहीं थे। ये सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से किए गए थे ताकि यौन प्रकृति के अपराधों की क्रूरता को और भी बढ़ाया जा सके।”

परिजनों के सामने यौन उत्पीड़न, मृतकों को भी नहीं बख्शा- पीड़ित

रिपोर्ट में कहा गया है, “हमास और उसके सहयोगियों ने हमले की व्यापक रणनीति के एक अंतर्निहित हिस्से के रूप में जानबूझकर और व्यवस्थित रूप से यौन और लिंग आधारित हिंसा (एसजीबीवी) का इस्तेमाल किया। महिलाओं और बंधकों को निशाना बनाया। नाबालिगों को भी इस तरह की हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया।” जिहादियों ने लोगों को उनके परिवारों की उपस्थिति में हृदयविदारक रूप से यातना दी।

जांच में पता चला कि पीड़ितों को क्रूरता के इंतहा तक तड़पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, “पीड़ितों को जलाना, अंग-भंग करना, बलात्कार, बांधना, प्राइवेट पार्ट में जबरन वस्तुएँ डालना, चेहरे और प्राइवेट पार्ट पर गोली मारना, परिवार के सदस्यों के सामने हत्याएँ और दुर्व्यवहार करना और फाँसी देना शामिल थे। कई पीड़ितों को हथकड़ी लगाए हुए और बंधक के रूप में बरामद किया गया था। लंबे समय तक बंधक बनाए गए लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न आम रहे। इन पीड़ितों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी शामिल थे।”

यातनाओं की वजह से जीवित बचे लोगों को गंभीर और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्षति पहुँची। शवों के पोस्टमार्टम में यौन शोषण, अपमान के सबूत मिले।

जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ितों को हथकड़ी लगाना, बंधक बनाए हुए दिखाना, महिलाओं और बच्चों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना और परेड कराना। माताओं और बच्चों का अपहरण। परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में यौन हिंसा करना, उसका वीडियो बनाना और डिजिटल प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना शामिल है। जबरन विवाह की धमकियाँ भी दी गई। लड़कों और पुरुषों के अंग-भंग करना, बलात्कार और यौन हिंसा के भी सबूत मिले।

एक ही परिवार के लोगों और खून के रिश्ते वाले पीड़ितों को जानबूझकर आपस में यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। इसमें एक विशेष मामले का जिक्र जाँच रिपोर्ट में किया गया है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की उपस्थिति में यौन उत्पीड़न या अपमानित किया गया। इससे पूरा परिवार आतंकित रहता था। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से हमास की कैद के दौरान देखी गई।”

चरमपंथियों ने खुद को कैमरे पर रिकॉर्ड किया और महिलाओं, बच्चों और पूरे परिवारों को पीटते, अपमानित करते, अपहरण करते और उनकी हत्या करते हुए और शवों का अपमान करते हुए वीडियो अपलोड किए। उन्होंने महिलाओं और उनके शवों को युद्ध की लूट के रूप में प्रदर्शित किया। कुछ क्लिप में आतंकवादियों और गाजावासियों को जश्न मनाते हुए दिखाया गया।

इसके अलावा, फुटेज में बेरहमी से क्षत-विक्षत और जलाए गए शव दिखाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है, “हमास और उसके सहयोगियों ने घायल महिलाओं, लड़कियों और बुजुर्ग महिलाओं के हिंसक रूप से अपमानित और अपहरण किए जाने के फुटेज भी प्रसारित किए। हमले का समय सुबह-सुबह होने के कारण इनमें से कई पीड़ितों को उनके रात के कपड़ों में ही ले जाया गया, जिससे वे ज्यादा कष्ट महसूस कर रहे थे।”

रिपोर्ट में नोवा संगीत समारोह में बचे एक व्यक्ति का बयान भी शामिल किया गया। उसने बताया कि उन लोगों ने एक महिला को वाहन से बाहर निकाला, उसके कपड़े जबरदस्ती उतार दिए और उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने उसे बार-बार चाकू मारा, जिससे उसकी मौत हो गई। उसकी मृत्यु के बाद भी उन्होंने उसके साथ बलात्कार करना जारी रखा। यह क्रूरता और हिंसा की भयावहता को दर्शाता है।

एक चश्मदीद राज कोहेन ने बताया, “मैंने उन्हें उसके साथ बलात्कार करते देखा। बलात्कार करते समय हमने उसकी चीखें सुनीं। फिर उन्होंने उसकी हत्या कर दी और उसके बेजान हो जाने के बाद भी उसके साथ दोबारा बलात्कार किया। मैंने उन्हें उसके साथ बलात्कार करते देखा।”

यहूदी राज्य को झकझोर देने वाला वह क्रूर हमला

शुरुआती हमलों में दो गर्भवती महिलाएँ, 28 वर्षीय नित्जान रहुम और 23 वर्षीय एस अबू-रशीद भी निशाना बनीं। अबू-रशीद तो बच गईं, लेकिन उनका बच्चा, रहुम और उनका अजन्मा बच्चा, तीनों ही मारे गए। हमले के तुरंत बाद यौन उत्पीड़न के बारे में गवाहों के बयान और विवरण सामने आए।

रिपोर्ट में बताया गया है, “शुरुआती दिनों से ही पीड़ितों, बचाव कर्मियों, चिकित्सा विशेषज्ञों और मुर्दाघर के कर्मचारियों की रिपोर्टों से संकेत मिल रहे थे कि इन हमलों में यौन हिंसा शामिल है। कई पीड़ित को मौत के बाद ही इन अपराधों से मुक्ति मिली। अनेक मामलों में, पीड़ितों की हत्या हमलों के दौरान या बाद में की गई, और उनके शव क्षत-विक्षत, अधजली अवस्था में बरामद किए गए। यह असाधारण क्रूरता से भरी यौन हिंसा के पैटर्न को दर्शाता है।”

रिपोर्ट में एक घटना के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है, “22 वर्षीय शानी लूक एक पिकअप ट्रक के पीछे मुँह के बल लेटी हुई, आंशिक रूप से नग्न, घायल अवस्था में थी। उसे गाजा की सड़कों पर सशस्त्र अपराधियों ने उसी अवस्था में घुमाया। इस दौरान उसके शरीर पर थूकते और नारे लगाते हुए अपराधी देखे गए।”

हमले के बाद के महीनों में हमास ने अनगिनत वीडियो जारी किए । इनमें निर्दोष बंदी अपनी जान बचाने की गुहार लगाते या शव दिखाते नजर आए। उन्होंने कुछ मामलों में पीड़ितों के परिवार वालों से सीधे संपर्क किया, जिससे उनका दुख और बढ़ गया। इन कार्रवाइयों ने आतंकी हमले के प्रभाव को और बढ़ा दिया, जिससे दर्द और सदमा और भी गहरा गया।

शवों का अंतिम संस्कार करने वाले शेरोन लॉफर के मुताबिक, कई बार इन खूबसूरत युवतियों की आंखों में गोली मारी जाती थी, जिससे उनके चेहरे विकृत हो जाते थे। उनकी मौत इससे नहीं होती थी, बल्कि दिल में गोली लगने से होती थी।

रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के अनुमान वाले रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें आतंकवादियों द्वारा किए गए यौन शोषण और हिंसा सहित अपराधों की गंभीरता को रेखांकित किया गया है। इसमें खुलासा किया गया है कि हमास को अगस्त 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया था, जिसमें उन पक्षों की पहचान की जाती है जिन पर सशस्त्र संघर्ष के दौरान व्यवस्थित बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा करने या उसके लिए जिम्मेदार होने के पक्के सबूत होते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इस सूची में शामिल होने का मतलब यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने भी 7 अक्टूबर के हमलों के दौरान और बंधकों के खिलाफ हमास द्वारा किए गए ऐसे उल्लंघनों के पर्याप्त सबूतों की पुष्टि की है।”

आयोग ने अपहरणकर्ताओं को पीड़ितों को नियंत्रित करने, नागरिक क्षेत्रों में घुसपैठ करने और हिब्रू भाषा में निर्देश जारी करने के तरीके बताने वाले विभिन्न सामरिक नियमावली, नोटबुक, चेकलिस्ट, नक्शे, किताबें और दूसरे संसाधनों की जाँच की। इन सामग्रियों में धार्मिक हिंसा और घृणा परोसा गया था।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर डाला गया है कि “इन सामग्रियों में अरबी से हिब्रू में अनुवादित वाक्यांशों की सूचियाँ भी शामिल हैं, जिनमें आदेशात्मक और अपमानजनक निर्देश (उदाहरण के लिए पीड़ितों को अपनी पैंट उतारने या अपने कपड़े उतारने, लेट जाने, अपने पैर फैलाने का आदेश देना) शामिल हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “इन वैचारिक सामग्रियों में यहूदी लोगों और इजरायली नागरिकों, जिनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, के खिलाफ एक अंतर्निहित अमानवीय कथा शामिल थी, जिन्हें कुछ ग्रंथों और बयानों में हिंसा के वैध शिकार के रूप में दर्शाया गया था।” दरअसल हमास यहूदी समुदाय के खिलाफ हिंसा का समर्थन करता है।

इस नरसंहार और घृणित कृत्यों को न केवल फिल्माया गया, बल्कि धार्मिक अभिव्यक्तियों और जोश के साथ महिमामंडित भी किया गया।

इस्लामी आतंकवाद का भयंकर चेहरा

पीड़ितों और गवाहों ने इस्लामी आतंकवाद की कहानी बयान की। नोवा संगीत समारोह में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने हमले के दौरान सात अन्य लोगों के साथ छिप कर जान बचाई। उसने बताया कि उसने अपने छिपने की जगह के पास तीन अलग-अलग स्थानों से बलात्कार की तीन घटनाओं को देखा।

उन्होंने चीखते-चिल्लाते पीड़ितों को एक-दूसरे को सौंप दिया और फिर उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी और फिर जश्न मनाया। चश्मदीद के मुताबिक, “मुझे नहीं पता कि सामान्य बलात्कार क्या होता है, लेकिन वहाँ जो आवाजें सुनाई दे रही थीं, वे वैसी नहीं थीं। वहाँ हँसी-मज़ाक हो रहा था। चुटकुले चल रहे थे। वे एक-दूसरे को चुटकुले सुना रहे थे। यह सब मजे के लिए किया जा रहा था। वे जश्न मना रहे थे। वे सचमुच इस बात का जश्न मना रहे थे,”

उन्होंने आगे बताया, “एक और घटना यह थी कि मैंने किसी को चिल्लाते हुए सुना, ‘उसे मत छुओ, ऐसा मत करो,’ और फिर उन्होंने उसकी प्रेमिका के साथ उसकी आँखों के सामने बलात्कार किया।” इसके बाद उस जोड़े का भी वही हश्र हुआ।

उन्होंने आगे बताया, “एक और घटना यह थी कि मैंने किसी को चिल्लाते हुए सुना, ‘उसे मत छुओ, ऐसा मत करो,’ और फिर उन्होंने उसकी प्रेमिका के साथ उसकी आँखों के सामने बलात्कार किया।” इसके बाद उस जोड़े का भी वही हश्र हुआ।

बंगाल : ममता ने हिन्दू महिलाओं के लिए बना दिया नर्क ; कुँवारी या शादीशुदा… कम उम्र वाली सुंदरी को चुनते हैं, वासना तृप्त होने पर ही छोड़ते है: मीडिया में भी मातम, क्यों? देखिए वीडियो

                      संदेशखाली में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग (फोटो साभार : X_Debjanibhatta20)
आज एक महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के होते हुए हिन्दू महिलाओं के लिए बंगाल किसी नर्क से कम नहीं, और ममता खामोश है, क्यों?  यदि यही शोचनीय स्थिति मुस्लिम महिलाओं की होती सभी सियासतखोर चीख-पुकार कर रहे होते। लेकिन हिन्दू महिलाओं की दुर्गति होने पर सब को सांप सूंघ गया, सबके घरों में शायद कोई मातम का माहौल है? वैसे जब से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी है, तभी से 24 परगना सुलग रहा है। जिसकी विस्तृत रपट कुछ वर्ष पूर्व एक हिंदी  पाक्षिक को सम्पादित करते मुख्य समाचार बनाया था। लेकिन आज तक किसी भी पार्टी ने हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, कहीं उनका मुस्लिम वोट बैंक नाराज़ न हो जाए। 

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली से टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामे सामने आ रहे हैं। यहाँ टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

ये सब उसी संदेशखाली की पीड़ित महिलाएँ कह रही हैं, जिन्होंने अब इन अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के ऐलान कर दिया है और पूरे संदेश खाली में टीएमसी के फरार नेता और ममता बनर्जी के खास शेख शाहजहाँ और उनके गुर्गों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 8 फरवरी 2024 से संदेशखाली की महिलाएँ अब टीएमसी के गुंडों का सामना लाठी-डंडों के साथ कर रही हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए 10 फरवरी 2024 को प्रशासन ने धारा-144 तो लगाई, लेकिन टीएमसी गुंडों को अत्याचार करने की पूरी छूट दी। हम मीडिया संस्थानों से उन्हीं पीड़ित महिलाओं की बातचीत सामने रख रहे हैं, जिसमें वो टीएमसी के गुंडों की करतूतों को सामने रख रही हैं।

इसी कड़ी में टीवी9 बांग्ला से बातचीत में संदेशखाली की महिलाओं ने बताया है कि कैसे शिबू हाजरा और उत्तर सरदार की अगुवाई टीएमसी के गुंडों ने लोगों की जमीनों पर कब्जा किए। एक महिला ने बताया कि बीडीओ और स्थानीय पुलिस के जवान टीएमसी के पार्टी काडर की तरह काम करते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि टीएमसी के गुंडों को ‘कट मनी’ का भुगतान करना पड़ता है और अगर किसी वजह से ‘कट मनी’ नहीं दे सके, तो फिर टीएमसी के गुंडे उनकी पिटाई करते हैं। बीजेपी सांसद दिलीप घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर किया है।

एक महिला ने टीवी9 बांग्ला को बताया कि कैसे टीएमसी के गुंडे युवा लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। उसने बताया कि टीएमसी के गुंडे नए और पढ़ाई लिखाई वाले बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करते हैं। महिला ने बताया, “बच्चों से कहा जाता है कि ‘दीदी’ उनका पेट भरती हैं। वो राजनीतिक काम नहीं करेंगे तो खाने के लिए मर जाएँगे। टीएमसी के गुंडे उन बच्चों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला करवाते हैं, लोगों को परेशान कराते हैं और लूट जैसी वारदात कराते हैं। वो बच्चों को शराब और हथियार देकर बर्बाद कर रहे हैं। वो शाहजहाँ की पसंद की औरतों को उठाने के लिए दबाव डालते हैं।”

रिपब्लिक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता और उनके गुंडों ने शेख शाहजहाँ, उत्तर सरदार और शिबू हाजरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर हमला किया और उनका उत्पीड़न किया, तो पुलिस ने उनका हाथ दिया। एक महिला ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हम रात में नींद की एक झपकी तक नहीं ले सके। भारी संख्या में पुलिस वाले बाइकों और कारों पर सवार होकर पहुँचे। वो रात में जोर-जोर से हम सबको धमका रहे थे। हमारे परिवार के मर्द भाग गए थे, क्योंकि उन्हें पुलिस उठा लेती।”

बजरंग दल के कार्यकर्ता की पत्नी ने बताया, “पुलिस हमारे घर में रात 3 बजे घुसी। पुलिस वालों ने मेरे पति को गालियाँ दी और मेरा उत्पीड़न करने की कोशिश की। उन्होंने मेरा पोला (शादीशुदा बंगाली महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला कड़ा) तोड़ दिया। पुलिस ने मेरी बेटी को दूर फेक दिया। वो पुलिस वाले इतने नशे में थे कि वो सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।”

संदेशखाली की एक अन्य महिला ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की बदतमीजियों के बारे में बताया। एक महिला ने कहा, “पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि मैं दूसरे मर्दों के सोती हूँ? वो कैसे ये सवाल पूछ सकते हैं। मुझे जवाब चाहिए। मैंने क्या गलत किया है कि मुझे ‘मादर**’ जैसी गालियाँ दी गई?” महिला ने आगे बताया, “पुलिस वालों ने मेरे पति को ‘सुवर का बच्चा’ कहा। वो मेरे पति को घसीटकर घर से बाहर ले गए। उन्होंने क्या गलत किया था? हमें न्याय चाहिए। क्या पुलिस वाले किसी को भी इस तरह गालियाँ दे सकते हैं?”

संदेशखाली में एक महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडे हमारे पतियों को जबरदस्ती पकड़ कर अपने साथ ले जाते हैं। वो उनसे काम कराते हैं और पैसे भी नहीं देते। अगर कोई पैसों की माँग करता है, तो उसे बेहरमी के साथ पीटा जाता है।”

एक महिला ने एबीपी आनंदा से बातचीत में कहा, “हम कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहते। उत्तम सरदार ने हमें डंडे उठाने पर मजबूर कर दिया। वो पिछले 4 साल से हमारा उत्पीड़न कर रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी वज से हम यहाँ प्रदर्शन कर रहे है। हम अगर टीएमसी की बैठकों में जाते हैं, तो हमारे पतियों को उठा लिया जाता है। संदेशखाली कभी शांत माहौल वाली जगह हुआ करती थी, लेकिन उसे नष्ट कर दिया गया। हम फिर से संदेशखाली में शांति चाहते हैं।”

संदेशखाली की एक महिला ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार ने लोखिर भंडार योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिया है। क्या सरकार पार्टी की कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बदले ‘आर्थिक सहायता’ के तौर पर ऐसा कर रही है?

रिपब्लिक बाँग्ला से बात करते हुए पीड़ित महिला ने कहा, “क्या हम अपने सम्मान के बदले पैसे पा रहे हैं? क्या हमें इस लिए पैसे दिए जा रहे हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को रात में ‘कंपनी’ दें? क्या मुख्यमंत्री हमें अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए पैसे दे रही हैं?”

संदेशखाली में प्रदर्सन के दौरान एक महिला ने बताया, “तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।”

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” इस बात को वहाँ मौजूद एक महिला ने भी दोहराया।

एबीवी आनंदा से बात करते हुए एक पीड़ित ने बताया, “हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। टीएमसी के गुंडों ने हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। यहाँ तक कि उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनवाई गई कंक्रीट की सड़क को भी नष्ट कर दिया।” एक महिला ने बताया है कि उन्हें पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

एक महिला ने रिपब्लिक बाँग्ला के साथ अपनी आपबीती साझा की। महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी खिड़की तोड़ दी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ खींचा और बाहर को कहा। उन्होंने कहा कि वो उसका (महिला का) गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। वहाँ एक और महिला को बाल पकड़ कर खींचा गया और उसकी साड़ी खींचकर अलग कर दी गई। संदेशखाली में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। वो मेरे पति के सामने ही मुझसे बदतमीजी करते रहे। हम शांति चाहते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है मर जाना।”

एक महिला ने रोते हुए बताया, “टीएमसी के कार्यकर्ता सिर्फ महिलाओं को ही पार्टी में बुलाते हैं और उनका शोषण करते हैं। हमें अपने पतियों की जान बचाने के लिए उनकी बात माननी (यौन उत्पीड़न के लिए हाँ) पड़ती है।” महिला ये बात कहती हुई रो पड़ती है और कहती है कि टीएमसी के गुंडे ये भी नहीं सोचते कि वो पार्टी सपोर्टर है।

संदेशखाली में आखिर चल क्या रहा है?

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया।
अवलोकन करें:-
 
बंगाल : महिला मुख्यमंत्री के राज में ‘घर में से महिलाओं को उठा ले जाते हैं TMC के गुंडे, ‘संतुष्ट’ ह
संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। इसके अगले दिन शाहजहाँ शेख के गुंडों ने पलटवार किया, तो ग्रामीणों ने कई जगहों पर उत्पात कर दिया। इस बवाल में कई लोग घायल भी हो गए। इसके बाद ही पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। हालाँकि ऊपर के वीडियो में पीड़ित महिलाएँ उन्हीं अत्याचारों को बयान कर रही हैं, जो इस दौरान महिलाओं ने झेला।

इजरायल में हमास के इस्लामी आतंकियों की हैवानियत का नज़ारा, बच्चियों की लाशें, लाशों पर स्पर्म, कटे हुए स्तन… बलात्कार करते-करते मार देते थे गोली

            7 अक्टूबर के हमास हमले की यौन हिंसा की जाँच में हुए खौफनाक खुलासे फोटो साभार: X हैंडल                                @IDF/@CochavElkayam
हमास ने इजरायल पर आतंकी हमले के बाद न सिर्फ आम इजरायलियों को मौत के घाट उतारा बल्कि जीवित और मृत बच्चियों और महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी दरिंदगी भी किया। इसी के मद्देनजर अब इज़रायल पर 7 अक्टूबर, 2023 हमास के हमलों के बाद बलात्कार के मामलों का दस्तावेज तैयार कर रही है। जिसके लिए फोरेंसिक सबूतों, वीडियो और गवाहों के बयान और संदिग्धों से पूछताछ किया जा रहा है।

इसे लेकर जो खुलासे प्रत्यक्षदर्शियों ने अब तक किए हैं वो इंसानियत को शर्मसार करने वाले हैं। हमास के आंतकियों ने पकड़ी गई महिलाओं और लड़कियों का खौफनाक तरीके से रेप और यौन उत्पीड़न ही नहीं किया बल्कि उनके साथ शारीरिक तौर पर भी भयानक हिंसा की। किसी की छाती काट डाली तो किसी को रेप करने के दौरान ही गोली मार कर जान ले ली।

इजरायली बच्चियों की लाशों पर पड़े ताजा स्पर्म ये चीख-चीख कर कह रहा था कि उनके साथ हमास के आतंकियों ने किस कदर हैवानियत की है। खून से सने उनके जिस्मों पर अनगिनत घाव बगैर कहे गवाही दे रहे थे कि हैवानियत का नंगा नाच कैसा होता है।

हमास आंतकियों के भयावह, अमानवीय अपराध

इजरायल की खास 669 स्पेशल टैक्टिस रेस्क्यू यूनिट के एक पैरामेडिक ने सीएनएन को बताया कि उसने पहले भी सभी तरह की जान माल के नुकसान वाली वारदातों की जाँच की है, लेकिन 7 अक्टूबर की हिंसा कल्पना से भी परे की थी।
इस फाइटर पैरामेडिक ने अपना नाम छापने की शर्त पर बताया कि किबुत्ज़ बेरी में हमास के नरसंहार के बाद जब वो किसी जिंदा बचे शख्स की तलाश में घर-घर जा रहे थे। उस दौरान उन्हें एक बेडरूम में दो दो युवा किशोर लड़कियों की लाश मिली।
पैरामेडिक के मुताबिक, “एक की लाश बिस्तर पर पड़ी हुई थी और दूसरी की एक फर्श पर।” उन्होंने आगे बताया फर्श पर पड़ी लड़की अपने पेट के बल थी। उन्हें इसमें कोई शक नहीं था कि किशोरी के साथ बलात्कार किया गया था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता चला कि वह पहले मर गई थी या नहीं।
उन्होंने आगे बताया, “उसकी पैंट घुटने तक खुली हुई है और उसकी गर्दन के पीछे सिर के पास गोली के जख्म थे। उसके सिर के चारों ओर खून का ढेर लगा था है और उसकी पीठ के निचले हिस्से पर स्पर्म पड़ा था।”
उन्होंने आगे बताया कि बिस्तर पर पड़ी लड़की के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी छाती में गोली लगी थी। उनका कहना था कि इन दो लड़कियों को उनके पहुँचने से कुछ वक्त पहले ही मारा गया हो या पहले मार डाला गया हो शायद उनके ही बेडरूम में उनके साथ बलात्कार किया गया था, अभी जाँच के बाद ही पता लगेगा।”
अन्य लोगों ने भी नोवा संगीत समारोह में इसी तरह की खौफनाक और हैवानियत से भरे वाकयों के बारे में बताया था। यहाँ सैकड़ों युवाओं को आतंकवादियों ने मार डाले थे। समारोह के एक आयोजक रामी शमूएल ने कहा कि जब वह भाग रहे थे तो उसने महिला पीड़ितों को बगैर कपड़ों के देखा और जो कुछ हुआ उसके बारे में उसे कोई संदेह नहीं है। उन्होंने बताया, “उन्हें नंगा कर उनके (महिलाओं) दोनों पैर फैलाए गए थे और उनमें से कुछ को मार डाला गया था।”
उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि इन महिलाओं से वहशीपन की हद पार करते हुए यौन हिंसा की गई थी। उनका कहना था कि हमास के आतंकियों ने खासकर औरतों, युवा युवतियों के ही कपड़े उतार फेंके थे। इससे साफ है कि उनका मकसद पहले से ही इनके साथ बलात्कार करना था, क्योंकि उन्होंने वहाँ उस दिन किसी भी पुरुष के कपड़े नहीं उतारे थे।

अभी लंबी चलेगी जाँच

इज़रायल की पुलिस मानती है कि उनकी जाँच में महीनों लग सकते हैं। हिब्रू विश्वविद्यालय की मानवाधिकार कानून विशेषज्ञ एल्कायम-लेवी भी कहती हैं कि यह साफ नहीं है कि किसी भी मामले को कैसे और कहाँ संभाला जाएगा। हालाँकि, उन्होंने कहा कि दोहरी नागरिकता वाले कुछ परिवार इज़रायल के अलावा अन्य देशों में न्याय के लिए जा सकते हैं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी अपने मामले को ले जा सकते हैं।
इजरायली अधिकारियों ने एक प्रेस ब्रीफिंग में जो सबूत जुटाए थे। उसमें एक महिला का बयान भी शामिल था। इस महिला ने 7 अक्टूबर, 2023 को अपने छिपने की जगह से नोवा म्यूजिक फेस्टिवल पर हमास आंतकियों के हमले को अपनी आँखों से देखा था। इस मायने में उनका बयान काफी मददगार साबित होगा।
इस महिला ने अपने बयान में कहा, “उन्होंने (हमास) किसी को झुकाया हुआ था और मुझे समझ आया कि वह उस युवती के साथ बलात्कार कर रहा था और फिर वह उसे दूसरे को बलात्कार के लिए सौप रहा था।”
उसने आगे बताया, “वह जीवित थी। वह अपने पैरों पर खड़ी थी और उसकी पीछे से खून बह रहा था। मैंने देखा कि वह उसके बाल खींच रहा था। उसके लंबे भूरे बाल थे। मैंने उन्हें उसके स्तन काटते हुए देखा और फिर वह उसकी कटे स्तनों को सड़क की ओर फेंक रहा था। उसे दूसरे शख्स ने किसी दूसरे की तरफ उछाला और वो उससे खेलने लगे।”
इसके बाद भी हमास के आतंकियों ने उस युवती को नहीं छोड़ा। गवाह ने आगे बताया, “मुझे याद है कि एक अन्य शख्स ने फिर और उसके साथ बलात्कार किया था और उससे बलात्कार करते-करते ही उसने युवती के सिर में गोली मार दी।”

हमास की दरिंदगी के हजारों बयान वीडियो क्लिप

इजरायली पुलिस सुपरिटेंडेंट डूडी काट्ज़ की रूह भी इन सबूतों के बारे में बताते हुए हुए काँप उठी थी। काट्ज़ के मुताबिक, अधिकारियों ने हमास के हमलों से जुड़े 1,000 से अधिक बयान और 60,000 से अधिक वीडियो क्लिप इकट्ठा किए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इनमें उन लोगों के बयान भी शामिल हैं जिन्होंने महिलाओं के साथ बलात्कार होते देखा था। हालाँकि, उन्होंने कहा कि जाँचकर्ताओं के पास भुक्तभोगी नहीं है और यह भी साफ नहीं है कोई बलात्कार पीड़िता जीवित बची है या नहीं।
बीते महीने हमास के आंतकी हमले में उस दिन गाजा और इजरायल की सीमा के गाँवों और खेतों में लगभग 1,400 इजरायली मारे गए और इससे अधिक घायल हुए। वहीं हमास के आतंकियों ने 240 से अधिक इजरायली नागरिकों को बंधक बनाया। इसमें बच्चे, बुजुर्ग, औरतें सब शामिल थे।
हमास के इन आतंकियों की इस काली करतूत को दुनिया के सामने लाने के लिए सुबूत जरूरी है। तभी इजरायल के पुलिस कमिश्नर शबताई याकोव कहते हैं कि जाँच संभावित तौर पर अभियोग लगाने के काम आएगी, लेकिन अभी इन अपराधों के दस्तावेज़ तैयार करना पहला मिशन है।

कहीं दुनिया भूल न जाए इजरायली बच्चियों, औरतों से हुई हैवानियत

हिब्रू विश्वविद्यालय की मानवाधिकार कानून विशेषज्ञ कोचाव एल्कायम-लेवी ने अत्याचारों के सबूतों के दस्तावेज तैयार करने के लिए अपने साथियों के साथ एक नागरिक आयोग का गठन किया है। उन्हें डर है कि गाजा और इजरायल की जंग के बीच दुनिया इजरायली महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर गौर करना कहीं भूल न जाए। उन्होंने आतंकी हमलों के ठीक एक हफ्ते बाद आए संयुक्त राष्ट्र के एक बयान की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस बयान में यौन हिंसा का जिक्र तक नहीं था।
एल्कायम-लेवी का कहना है, “हम उनके साथ जो कुछ भी हुआ है उसे कभी नहीं जान पाएँगे। जब हम जानते हैं कि जिन महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और जिन पर यौन हमला किया गया उनमें से अधिकांश की हत्या भी कर दी गई।”
लेवी ने यूएन के बयान पर कहा, “इजरायली महिलाओं के तौर पर, हमारे बच्चों के लिए और हम लोगों के लिए यह सिर्फ चुप्पी या बेइज्जती से भी कहीं अधिक बुरा है। यहाँ जो कुछ हुआ उसे हम स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यह बहुत बुरा हुआ है।”