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उत्तर प्रदेश : आपदा में अवसर तलाश करने वाले LPG की कालाबाजारी पर सख्त योगी सरकार, 4800+ जगहों पर छापेमारी: 70 FIR दर्ज, 10 गिरफ्तार

इसे
कहते हैं "आपदा में अवसर" मिलना, पर इस बार पासा उल्टा पड़ गया और गैस माफियाओं का बरसों पुराना काला खेल बेनकाब हो गया...!
अभी कुछ पहले News18 पर एंकर रुबिका लियाकत के शो गूंज में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता प्रो धर्मेंद्र यादव के साथ आए कार्यकर्ता ने कहा कि "जिससे गैस लेते हैं वह अब 3000 रूपए में दे रहा है. .." जब उससे एजेंसी का नाम पूछा गया तो बता नहीं पाया, हालाँकि एंकर ने एजेंसी का नाम बताने के लिए बहुत जोर दिया, लेकिन अफवाह फ़ैलाने वाले ने नाम नहीं बताया। योगी सरकार को उस व्यक्ति की तलाश कर अफवाह फ़ैलाने के आरोप में सजा देनी चाहिए। भारत में वर्तमान में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार ने भविष्य की सुरक्षा और आपूर्ति को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए सावधानीवश गैस रिफिल बुकिंग हेतु 25 दिनों की समय सीमा निर्धारित कर दी है। सरकार का उद्देश्य प्रबंधन सुधारना था, किंतु इस नियम के लागू होते ही देश भर की गैस एजेंसियों पर मची अफरातफरी ने एक बहुत बड़े घोटाले की कलई खोलकर रख दी है।
सच्चाई यह है कि गैस एजेंसी मालिकों ने एक व्यवस्थित सिंडिकेट बना रखा था। ये लोग आम घरेलू उपभोक्ताओं के नाम पर, उनकी जानकारी के बिना ही स्वयं घरेलू गैस रिफिल बुक कर लेते थे और उन सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक इकाइयों जैसे व्यावसायिक संस्थानों पर 'ब्लैक' में बेच रहे थे। जब तक बुकिंग की कोई समय सीमा नहीं थी, उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता था कि उसके हिस्से की गैस कहीं और बेची जा चुकी है। किंतु अब जैसे ही 25 दिन की शर्त लागू हुई, और जब वास्तविक उपभोक्ता ने अपना सिलेंडर बुक करने का प्रयास किया, तो सिस्टम ने "Already Booked" दिखाकर बुकिंग रिजेक्ट कर दी। उपभोक्ता हैरान और परेशान कि उसने तो काफी समय यानि विगत एक महीने से सिलेंडर लिया ही नहीं तो फिर यह बुकिंग रिजेक्ट कैसे हो गई...?
उपभोक्ता पैनिक में आकर गैस एजेंसियों के बाहर बुकिंग अथवा सिलेंडर के लिए लाईन लगाकर खड़े हो गए...!
ऐसी स्थिति में एजेंसी मालिक मुंह छिपाकर भागने लगे या वहां हंगामा खड़ा होने लगा...!
क्यों...?
क्योंकि गैस कंपनियों के सिस्टम/सर्वर पर उपस्थित डाटा के अनुसार उपभोक्ता के सिलेंडर को तो गैस एजेंसी मालिकों ने बेच कर खा लिया था।
यह स्पष्ट है कि भारत में गैस की कोई किल्लत नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम संकट इन बिचौलियों यानि गैस एजेंसी मालिकों की काली करतूतों का परिणाम है। सरकार के इस एक निर्णय ने घरेलू गैस की अवैध बिक्री के इस बड़े रैकेट को सार्वजनिक कर दिया है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच दुनियाभर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। भारत में भी ईंधन को लेकर कई नए नियम बनाए गए हैं और इस बीच देशभर में कालाबाजारी और जमाखोरी किए जाने के मामले सामने आए हैं।
इस बीच योगी आदित्यानाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने एलपीजी (LPG) की कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पूरे उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन टीमों ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।
आँकड़ों के अनुसार, 12 मार्च से सोमवार (16 मार्च) तक प्रदेश में कुल 4,816 जगहों पर निरीक्षण और छापेमारी की जा चुकी है। इस दौरान 70 FIR दर्ज की गई हैं जबकि 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जाँच अधिकारियों ने बताया कि 67 लोग अवैध LPG गतिविधियों में संलिप्तता के शक में अभियोजन का सामना कर रहे हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है जब देश के कई हिस्सों में मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण LPG की घबराहट में बुकिंग (Panic Booking) बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, 4108 LPG वितरकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को उनकी बुकिंग के अनुसार समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित हो सके। सरकार ने LPG स्टॉक की नियमित समीक्षा करने का भी फैसला किया है और सिलेंडरों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी और जमाखोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही यूपी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और LPG की लगातार उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जिलों में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
एजेंसियाँ पूरे प्रदेश में सक्रिय रहकर आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं ताकि कहीं भी कालाबाजारी या कमी की स्थिति न बने। स्थिति पर नजर रखने के लिए सरकार ने खाद्य आयुक्त कार्यालय और सभी जिलों में 24 घंटे कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं और आपूर्ति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
यदि आप भी इस समस्या से त्रस्त हैं या आपके नाम पर भी घरेलू गैस सिलेंडर की अवैध बुकिंग करके गायब कर दी गई है, तो चुप न बैठें और तुरंत संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
शिकायत दर्ज करने हेतु महत्वपूर्ण नंबर:
* MOPNG हेल्पलाइन (LPG): 1906 (24/7 आपातकालीन और शिकायत सेवा)
* भारत गैस (Bharat Gas): 1800-22-4344
* इंडेन (Indane): 1800-233-3555
* एचपी गैस (HP Gas): 1800-233-3555
* राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: 1800-11-4000 या 1915
जागरूक बनें और इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी आवाज उठाएं।

West Bengal : ममता ग्रीन फाइल और documents क्यों लेकर गयी? क्या इन्हीं में घोटाला छिपा है? भ्रष्टाचार और कोयला तस्करी पर ED की दस्तक

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति और तृणमूल सरकार एक बार फिर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कोयला तस्करी को सत्ता–संरक्षण देने के भंवर में फंस गई है। गुरुवार (8 जनवरी) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कोलकाता में पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म I-PAC के कार्यालय और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की गई। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के आईटी सेल के प्रतीक जैन हेड भी हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, छापेमारी की यह कार्रवाई अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग, जाली दस्तावेज आदि के मामले में की जा रही है। इसने ममता बनर्जी सरकार की इमेज पर एक और गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बता दें कि ममता सरकार इससे पहले भी शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला, पशु तस्करी, कोयला तस्करी, महिलाओं के शोषण, रेप केस और बढ़ते अपराधों के गंभीर आरोपों में फंस चुकी है। इस बार सीधे ममता बनर्जी की पार्टी और राजनीतिक कंसलटेंसी से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला सामने आया है।

पारदर्शिता की जगह अहंकार और जवाबदेही की जगह टकराव
आज पश्चिम बंगाल देश के सामने एक ऐसा उदाहरण बन रहा है, जो कि सत्ता के लंबे शासन में पारदर्शिता की जगह अहंकार और जवाबदेही की जगह टकराव से चल रहा है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं होती, बल्कि उन तथ्यों के आधार पर है, जो जांच में सामने आए हैं। ऐसे में यदि ममता बनर्जी सच में अपने आपको बेदाग मानती हैं, तो उन्हें जांच से डरने की नहीं, सहयोग करने की जरूरत है। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा अपराध जांच नहीं, सच से भागना होता है। इस समय ममता बनर्जी वही कर रही हैं। इससे साफ है कि उनके मन में किसी काले कारनामे का पर्दाफाश होने का डर समाया हुआ है।

ममता के राज में सत्ता, पैसे और सिस्टम का गठजोड़?
सबसे अहम तथ्य यह है कि प्रतीक जैन न केवल I-PAC के डायरेक्टर हैं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आईटी सेल के प्रमुख भी बताए जाते हैं। यानी यह मामला केवल एक कंसलटेंसी फर्म तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सत्ता के डिजिटल, रणनीतिक और चुनावी इको सिस्टम तंत्र तक पहुंचता दिखाई देता है। ममता बनर्जी अक्सर केंद्र सरकार पर “राजनीतिक बदले” का आरोप लगाती रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर सब कुछ पारदर्शी है तो ईडी बार-बार टीएमसी के इतने करीबी नेताओं, मंत्रियों और अफसरों तक क्यों पहुंच रही है? क्या यह महज संयोग है या फिर सत्ता के भीतर पनपते उस सिस्टम का संकेत है, जहां राजनीति, पैसा और प्रशासन एक-दूसरे में घुलते जा रहे हैं?

अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में छापेमारी
छापेमारी के बाद ED ने मीडिया से कहा कि छापेमारी अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। ED ने कहा कि कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर छापे पूरी तरह सबूतों के आधार पर किए जा रहे हैं। यह किसी राजनीतिक दल या चुनाव से जुड़ा मामला नहीं है। यह कार्रवाई अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में हो रही है। फिलहाल 10 ठिकानों पर तलाशी जारी है। 6 पश्चिम बंगाल और 4 दिल्ली में बताए जाते हैं। एजेंसी ने बताया कि जांच में कैश जनरेशन, हवाला ट्रांसफर से जुड़े परिसर शामिल हैं। किसी भी पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोग दो ठिकानों पर पहुंचे, अवैध दखल दिया और दस्तावेज छीन लिए।

कारनामों की पोल खुलने से ममता की धड़कने बढ़ीं
दरअसल, सीएम ममता बनर्जी को जैसे ही आई-पैक में छापे की जानकारी मिली, वे प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गईं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि क्या ईडी का काम पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना है? सीएम ने कहा कि मेरी पार्टी के सभी दस्तावेज उठा ले जाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में SIR के बाद अब इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में ज्यों-ज्यों विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, त्यों-त्यों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हिंदुओं की खिलाफत, मुस्लिम तुष्टिकरण, एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और अब ईडी के छापे ने ममता बनर्जी की धड़कने बढ़ा दी हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के दम पर जिस तरह तृणमूल कांग्रेस जीतती रही है, उस पर एसआईआर ने सेंध लगा दी है। इस रिवीजन में राज्य के 58 लाख से ज्यादा ‘फर्जी’ वोटर के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं।

खाली हाथ आईं ममता हरी की ग्रीन फाइल सुर्खियों में आई
ममता खाली हाथ आईं थीं, लेकिन घर से बाहर निकलीं तो हाथ में ग्रीन फाइल थी। छापेमारी के दौरान प्रतीक जैन अपने घर पर ही मौजूद थे। यह कार्रवाई सुबह से जारी थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं।

जांच में बाधा डाली, सीएम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कहा कि ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल देने का काम किया है। ईडी सबूतों के आधार पर अपना काम कर रही है। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘छापेमारी के बारे में ED पूरी डिटेल्स दे सकती है। लेकिन यह सच है कि ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल दिया। ममता ने आज जो किया, वह जांच में बाधा डालना था। मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। IPAC ऑफिस में वोटर लिस्ट क्यों मिली। क्या IPAC कोई पार्टी ऑफिस है।’

प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक ने संभाली

  • I-PAC (Indian Political Action Committee) एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन है।
  • यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है।
  • I-PAC पहले Citizens for Accountable Governance (CAG) थी। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ की थी। बाद में इसका नाम I-PAC रखा गया।
  • प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक के पास आ गई।
  • प्रशांत ने बाद में बिहार में ‘जन सुराज’ पार्टी बनाई।
  • I-PAC तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ 2021 से जुड़ी है।