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ब्राह्मण विरोधी नफरत, कश्मीरी पंडितों का मजाक और विक्टिम कार्ड: अंबेडकरवादी लक्ष्य लेकी ने की साइबर बुलिंग, वकील ट्यूलिप शर्मा ने दर्ज कराई शिकायत

                                   लक्ष्य लेकी, ट्यूलिप शर्मा (फोटो साभार: Instagram)
खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लक्ष्य लेकी सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गए हैं। IIM इंदौर से पढ़े और TedX स्पीकर लक्ष्य के खिलाफ क्रिमिनल लॉयर और इन्फ्लुएंसर ट्यूलिप शर्मा ने साइबर शिकायत दर्ज कराई है। उस पर ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने, जातिगत गालियाँ देने और महिलाओं को अपमानजनक मैसेज भेजने का आरोप है।

ऑपइंडिया से बातचीत में ट्यूलिप ने शिकायत के बारे में कहा कि ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि लक्ष्य जैसे लोग एक जगह पर नहीं रुकते, वो लगातार ऐसी हरकतें करते रहते हैं।

लक्ष्य लेकी आईआईएम इंदौर के ग्रेजुएट हैं और टीईडीएक्स स्पीकर भी रह चुके हैं। वे ‘लक्ष्य स्पीक्स’ नाम से इंस्टाग्राम पेज और यूट्यूब चैनल चलाते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 5 लाख 53 हजार फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब पर 14 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स।

ट्यूलिप ने भारतनाट्यम और देवदासी पर उसके दावों पर उठाए सवाल, तो लक्ष्य ने ब्राह्मणों को दी गालियाँ

ट्यूलिप शर्मा ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल @_tulipsharma पर एक वीडियो डाला। इसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्य लेकी काफी समय से जाति-विरोध के नाम पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी है और इंटरनेट पर नफरत कोई नई बात नहीं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोई विरोधी राय बर्दाश्त न कर सके। वे ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं जो अगर कोई उनके पोस्ट पर विरोधी कमेंट करे तो डीएम में आकर गंदी-गंदी बातें करते हैं।

ट्यूलिप ने बताया कि सब कुछ 11 फरवरी को शुरू हुआ जब लक्ष्य लेकी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो डाला। उसमें उन्होंने दावा किया कि भारतनाट्यम को ब्राह्मणों ने हड़प लिया है। उन्होंने कहा कि भारतनाट्यम ब्राह्मणों की सांस्कृतिक चोरी है, असली डांस सदिर अट्टम या दासी अट्टम था जो देवदासियां करती थीं। उनका कहना था कि तमिल ब्राह्मण महिला रुक्मिणी देवी ने उस डांस के सेक्सुअल/इरोटिक हिस्से को हटा दिया, उसे साफ-सुथरा बना दिया, लेकिन ऐसा करते हुए सदिर अट्टम की असली जड़ों से इसे अलग कर दिया।

इसके जवाब में ट्यूलिप शर्मा ने कमेंट किया, “आपकी लॉजिक के मुताबिक, ‘ब्राह्मण’ महिला रुक्मिणी देवी ने देवदासियों के यौन शोषण के चक्र को खत्म कर दिया। अब इसमें समस्या क्या है? एक तरफ आप इसे दमनकारी व्यवस्था मानते हैं, फिर कोई सुधार करे तो भी समस्या है सिर्फ इसलिए कि सुधार करने वाली ‘ब्राह्मण’ है। हंसते हुए। जिंदगी में थोड़ी क्लैरिटी लाओ और व्हाट्सएप नॉलेज पर निर्भर मत रहो।”

लेकिन ट्यूलिप शर्मा के तर्क का तथ्यों से जवाब देने की बजाय लक्ष्य लेकी उनके डीएम में घुस आए और जातिगत गालियाँ देने लगे। अपने दावे के समर्थन में शर्मा ने बातचीत के स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी शेयर किए। 

ट्यूलिप शर्मा ने बताया कि बात ब्राह्मण लड़कियों की भी नहीं थी, फिर भी लक्ष्य लेकी अपनी ब्राह्मण एक्स गर्लफ्रेंड्स के बारे में डींगें हाँकने लगे। ट्यूलिप ने कहा, “बात ब्राह्मण लड़कियों की नहीं थी लेकिन लक्ष्य लेकी अपनी सारी एक्स को ब्राह्मण बताकर बहस जीतना चाहते थे। पूरी कम्युनिटी की लड़कियों को इस्तेमाल करके बहस जीतना दिखाता है कि वे कितने बड़े जातिवादी हैं।”

लक्ष्य लेकी की ब्राह्मण लड़कियों को ऑब्जेक्ट बनाने वाली सोच को और एक्सपोज करते हुए शर्मा ने बताया कि वो जाति खत्म करने के लिए ‘अंतरजातीय बच्चे’ पैदा करने की बात कर रहा था।

                                                          सोर्स: ट्यूलिप शर्मा का वीडियो

शर्मा ने वीडियो में कहा, “उनका पूरा प्रोफेशन ही ब्राह्मणों को गालियाँ देने पर टिका है और फिर वे अपनी ब्राह्मण एक्स के बारे में डींग मारते हैं। वे और आगे बढ़कर कहते हैं कि अंतरजातीय बच्चे बनाकर जाति खत्म कर रहे हैं।” शर्मा ने बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

एक वीडियो में लक्ष्य लेकी ने खुद कहा था कि वे अपनी एससी/एसटी कम्युनिटी के बाहर डेट करने की हिम्मत नहीं रखते, लेकिन ट्यूलिप शर्मा की एक फीमेल फॉलोअर के मैसेज बॉक्स में उसने लिखा, “ब्राह्मण गर्लफ्रेंड मुझे ब्लो जॉब देती है, प्रॉब्लम?”

                                                         ट्यूलिप शर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी से

कई पब्लिकली शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने ट्यूलिप शर्मा को डीएम में लिखा, “होली चॉप्ड, ब्राह्मण लड़की के लिए तुम बहुत बदसूरत हो।” एक और मैसेज में उन्होंने लिखा, “मेरी गर्लफ्रेंड तुमसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। तुम तो बॉयफ्रेंड वाली भी नहीं लगतीं।”

एक और मैसेज में लक्ष्य ने लिखा, “4 ब्राह्मण एक्स, सब तुमसे ज्यादा खूबसूरत।”

इस बीच ट्यूलिप शर्मा ने अपने फॉलोअर्स को बताया कि उन्होंने आईटी एक्ट और संबंधित बीएनएस सेक्शन के तहत लक्ष्य लेकी के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज करा दी है।

बैकलैश के बीच लक्ष्य लेकी ने दावा किया कि ट्यूलिप शर्मा ने उनके जातिवादी और अपमानजनक मैसेज के जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, वे फेक हैं। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी केस में फंसाने की कोशिश हो रही है।  

एक और वीडियो में लक्ष्य ने फिर दोहराया कि शर्मा के साथ उनकी चैट के सारे स्क्रीनशॉट फेक हैं। इस अंबेडकरवादी जाति एक्टिविस्ट ने विक्टिम कार्ड खेला और खुद की तुलना रोहित वेमुला से कर दी।

लक्ष्य ने कहा कि रोहित वेमुला के साथ भी इसी तरह की तरकीबें इस्तेमाल की गई थीं। लक्ष्य का रोहित वेमुला से अपनी तुलना करना बहुत बेशर्मी भरा था, क्योंकि असल में तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि वेमुला एससी जाति से नहीं थे।  

अक्सर घटिया प्रोपेगेंडा करता रहा है लक्ष्य लेकी

ज्यादातर कथित जाति-विरोधी ‘एक्टिविस्ट्स’ की तरह लक्ष्य लेकी भी जाति श्रेष्ठता के विरोध के नाम पर ब्राह्मणों को निशाना बनाता रहा है। एक वीडियो में उसने कहा कि दूसरे देशों में वेजिटेरियन होते हैं लेकिन भारत में ‘प्योर वेजिटेरियन’ होते हैं। ब्राह्मणों के शाकाहार से जुड़े धार्मिक विश्वास पर हमला करते हुए उसने कहा, “केवल भारत में ही ‘प्योर वेजिटेरियन’ का कॉन्सेप्ट है। क्योंकि यहाँ शाकाहार सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं है। ये शुद्धता, श्रेष्ठता और जाति के बारे में है। ये कहने के बारे में है कि मैं भगवान के ज्यादा करीब हूँ और तुम मांस खाने वाले दलित कम हो। वो ब्राह्मणवादी नजरिया तो वीगन लोगों में भी दिखता है जब वे दलित एक्टिविस्ट्स को वीगन न होने पर शर्मिंदा करते हैं।”

लक्ष्य ने ये नैरेटिव फैलाया कि ‘प्योर’ शब्द का मतलब जातिगत श्रेष्ठता या भगवान से ज्यादा निकटता है, जबकि असल में ये सिर्फ शाकाहार में सख्ती को दिखाता है।

जुलाई 2025 में एक पॉडकास्ट में लक्ष्य ने दावा किया कि ब्राह्मणों ने मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भेदभाव किया। उसका कहना था कि ब्राह्मणों ने शिवाजी की जाति की वजह से उनका राजतिलक करने से इनकार कर दिया था और उन्हें बनारस से पुजारी बुलाने पड़े।

ये दावा कट्टर ‘जाति-विरोधी’ एक्टिविस्ट्स द्वारा गढ़ा गया ब्राह्मण-विरोधी नैरेटिव का हिस्सा है। हकीकत में स्थानीय ब्राह्मणों ने शिवाजी का ताज नहीं ठुकराया था क्योंकि उन्हें उनकी जाति से कोई समस्या थी, बल्कि इसलिए कि उन्हें ऐंद्रेय राजाभिषेक करना नहीं आता था। इसलिए बनारस से गागाभट्ट को बुलाया गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि गागाभट्ट भी मराठी ब्राह्मण थे, उनका परिवार महाराष्ट्र के पैठण से था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राजतिलक को लेकर विवाद वैदिक रीति बनाम तांत्रिक रीति को लेकर था।

अपने एक एक्स पोस्ट में लक्ष्य ने यादवों को हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसाया क्योंकि ब्राह्मण और ठाकुर उनके साथ शादी के रिश्ते नहीं जोड़ते। उसने लिखा, “और यादव, अपनी राजनीतिक ताकत और क्षत्रियता के दावों के बावजूद, ठाकुरों और ब्राह्मणों द्वारा बराबर नहीं माने जाते। कोई अंतरजातीय शादी नहीं। कोई सम्मान नहीं। सिर्फ ग्रेडेड इनइक्वालिटी। मेरे यादव भाइयों और बहनों इस जाति पिरामिड का हिस्सा बनने की कोशिश मत करो।”

आश्चर्य की बात नहीं कि लक्ष्य लेकी 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का फैन है। उन्होंने मुस्लिम विक्टिमहुड का नैरेटिव फैलाया और कन्हैया कुमार के राजनीतिज्ञ बनने की तुलना उमर खालिद के जेल में रहने से की, सिर्फ इसलिए कि खालिद मुस्लिम है।

खालिद की लंबी जेल पर दुख जताते हुए लक्ष्य ने लिखा, “दो स्टूडेंट लीडर्स। एक ही कैंपस। एक जैसे आरोप। लेकिन दो बहुत अलग किस्मत। कन्हैया कुमार आजाद हैं, मुख्यधारा की राजनीति में आ गए। उमर खालिद, एक मुस्लिम, बेल के बिना 5 साल जेल में। ये संयोग नहीं है। भारत में मुस्लिम होने की कीमत है।”

दिलचस्प बात ये है कि लक्ष्य ने कहा कि उमर खालिद ‘मुस्लिम होने की कीमत’ चुका रहा है, जबकि खालिद खुद को नास्तिक बताता रहा है।

इस्लामो-लेफ्टिस्टों द्वारा उमर खालिद के लिए समर्थन और सहानुभूति जुटाने के लिए फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव के विपरीत ऑपइंडिया ने पहले रिपोर्ट किया था कि 2023 और 2024 में 14 स्थगनों में से 7 स्थगन खुद उमर खालिद ने माँगे थे। इसलिए जमानत वापस लेना ‘देरी’ की वजह से नहीं था। जबकि इस्लामी-लेफ्ट इकोसिस्टम ‘अन्याय’ का रोना रोता रहता है, असल में आरोपित के वकील की नाकाम कोशिशों की वजह से खालिद इतने दिनों से जेल में हैं।

दरअसल, भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इस साल कहा था कि असली समस्या कुछ वकीलों और राजनीतिक ग्रुप्स की सोच में है जो अपने केस सिर्फ कुछ खास जजों से सुनवाना चाहते हैं। ऑपइंडिया ने बार-बार रिपोर्ट किया है कि खालिद की लीगल टीम ने फरवरी 2024 में ‘परिस्थितियों में बदलाव’ का हवाला देकर जमानत अर्जी वापस लेने से पहले कम से कम सात बार स्थगन माँगा था।

कई सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने 1990 के दशक में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार और पलायन का भी मजाक उड़ाया। एक कमेंट के जवाब में लक्ष्य ने लिखा, “कश्मीर ब्राह्मणों का यही हालत था।” एक और में लिखा, “मुझे कुछ नहीं होगा, तुम्हारे कश्मीरी पंडित भाइयों की तरह।”

331करोड़ रूपए की मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहुल गाँधी के करीबी गुजरात कांग्रेस नेता तक पहुँची ED: Rapido ड्राइवर के ‘म्यूल अकाउंट’ से लेनदेन

आदित्य जुला के साथ राहुल गाँधी (फोटो साभार: X_AmitMalviya)
दिल्ली की गलियों में रैपिडो जैसे ट्रांसपोर्ट ऐप के जरिए अपनी बाइक चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले एक ड्राइवर की जिंदगी में तूफान आ चुका है। रोजाना 500-600 रूपए कमाने वाले इस बाइक राइडर की जिंदगी 2 कमरों की झोपड़ी में कटती है, लेकिन उसके बैंक खाते में आठ महीनों में 331 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हो गया। दरअसल, ये कोई किस्मत का खेल नहीं था, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जाल था, जिसके बाद में उसे खुद ही नहीं पता था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच ने खुलासा किया है कि ये ‘म्यूल अकाउंट’ अवैध सट्टेबाजी ऐप 1xBet से जुड़े काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल हुआ। और सबसे चौंकाने वाली बात इसी खाते से गुजरात यूथ कांग्रेस के नेता आदित्य जुला की नवंबर 2024 वाली उदयपुर की लग्जरी शादी पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए। जुला पर फर्जी सिग्नेचर और 17 अलग-अलग PAN नंबर्स इस्तेमाल करने का आरोप है।

ईडी की ये जाँच 1xBet के अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से शुरू हुई, जो दिसंबर 2023 में भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया था। जाँच एजेंसी ने पाया कि 1xBet ने 6,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया, जिनमें यूजर्स से पैसे इकट्ठा कर उन्हें मल्टीपल पेमेंट गेटवे से घुमाया जाता था। कुल 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की लॉन्ड्रिंग का अनुमान है।

इसी चेन में दिल्ली के इस ड्राइवर का खाता फंस गया। 19 अगस्त 2024 से 16 अप्रैल 2025 तक उसके अकाउंट में अनजान सोर्स से बड़े-बड़े डिपॉजिट आते रहे, जो तुरंत संदिग्ध खातों में ट्रांसफर हो जाते।

ईडी अधिकारियों ने कहा, “ये क्लासिक म्यूल अकाउंट है। असली मालिक को पता भी नहीं चलता, लेकिन कानूनी कार्रवाई का खतरा हमेशा रहता है।” ड्राइवर को शायद कमीशन के लालच में या अनजाने में फँसाया गया।

युवा कांग्रेसी नेता की शादी में ₹1 करोड़ का खर्च

उदयपुर शादी का कनेक्शन सबसे बड़ा ट्विस्ट है। ताज अरावली रिसॉर्ट में हुई इस ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ पर 1 करोड़ रूपए से ज्यादा का खर्च इसी म्यूल अकाउंट से हुआ। ईडी ने पाया कि जुला ने रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए फर्जी सिग्नेचर इस्तेमाल किए। साथ ही ट्रैवल एजेंट को 18 लाख रुपये कैश और 17 फर्जी PAN नंबर्स दिए, ताकि बुकिंग एडजस्ट हो सके।

गुजरात यूथ कांग्रेस के अहम चेहरों में से एक है जुला

जुला गुजरात यूथ कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और राहुल गाँधी के करीबी माने जाते हैं। भाजपा आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने 01 दिसंबर 2025 को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इसे हाईलाइट किया। उन्होंने लिखा, “ईडी जाँच में उदयपुर रॉयल वेडिंग का बड़ा खुलासा। रैपिडो ड्राइवर के खाते से 331 करोड़ का ट्रांजेक्शन और अब गुजरात यूथ कांग्रेस लीडर आदित्य जुला का नाम। फर्जी सिग्नेचर से टाज रिसॉर्ट को कॉन्ट्रैक्ट, 18 लाख कैश और 17 PAN नंबर्स। ये लॉन्ड्रिंग चेन का हिस्सा है।” मालवीय ने जुला की राहुल गाँधी के साथ फोटो भी शेयर की, जो वायरल हो गई।
फिलहाल, ईडी ने जुला को पूछताछ के लिए समन भेजा है और शादी से जुड़े परिवारों की जाँच तेज कर दी है। जाँच में ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या ये शादी लॉन्ड्रिंग का एंडपॉइंट थी या कवर-अप।

कैसे होता है म्यूल अकाउंट्स के जरिए पूरा खेल

म्यूल अकाउंट फ्रॉड का ये केस पूरे देश में फैले साइबर क्राइम का आईना है। म्यूल अकाउंट क्या है? सरल शब्दों में ये वो बैंक खाता होता है जो अपराधी काले धन को घुमाने के लिए ‘किराए’ पर लेते हैं। गरीब या बेरोजगार लोगों को 5-7% कमीशन का लालच देकर आधार, PAN, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। फिर OTP चुराकर या पासवर्ड से कंट्रोल ले लेते। छोटे ट्रांजेक्शन से शुरू कर बड़े पैसे घुसेड़ते हैं।
ड्राइवर के केस में भी यही पैटर्न दिखा- अनजान सोर्स से डिपॉजिट और तुरंत सारे पैसे ट्रांसफर। ईडी अधिकारियों के मुताबिक, 1xBet ने ऐसे हजारों अकाउंट्स का नेटवर्क बनाया था। भारत में ऑनलाइन बेटिंग का बाजार 2023 में 1 लाख करोड़ का था, लेकिन ये ज्यादातर अवैध रूप से था। सरकार ने बैन भी लगाया लेकिन लॉन्ड्रिंग चेन शायद अब भी बरकरार है।

कई बड़े सितारे भी लपेटे में

ये पहला केस नहीं। 1xBet जाँच में ही पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन और सुरेश रैना के करोड़ों के एसेट्स अटैच हो चुके हैं। ईडी ने कई क्रिकेटरों और सेलिब्रिटीज से पूछताछ की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 1xBet ने सरोगेट ब्रैंडिंग और ऐड्स से भारतीय यूजर्स को टारगेट किया। कुल लॉन्ड्रिंग 1,000 करोड़ रूपए से ऊपर।

सामने आ चुके हैं म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस

म्यूल अकाउंट से जुड़े कई केस सामने आ चुके हैं। इसी तरह के केस में हैदराबाद में 120 म्यूल अकाउंट्स का गैंग पकड़ा गया था, जिसमें बैंक अफसर भी शामिल थे। वहीं, बेंगलुरु साइबर पुलिस ने गुजरात के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो फेक कंपनियाँ बनाकर डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करता था। सीबीआई ने 8.5 लाख म्यूल अकाउंट्स का पर्दाफाश किया, जिसमें बैंक स्टाफ ने मदद की थी।
इसी तरह वाराणसी के स्लम एरिया में SIM फ्रॉड से लोग फँसाए गए और कश्मीर में 7,000 अकाउंट्स सीज हुए। एक अन्य मामला चाइनीज हैंडलर्स से जुड़ा था, जिसमें 250 करोड़ फ्रॉड में तीन लोग पकड़े गए ते। ये लोग म्यूल अकाउंट्स सप्लाई करते थे। ऐसे ही एक मामले में लखनऊ में ‘युवा ग्लोबल नेटवर्क’ का हिस्सा बने युवा जेल पहुँच चुके हैं, तो मुंबई में 3.81 करोड़ के केस में KYC उल्लंघन केस में भी तीन गिरफ्तार हो चुके हैं।

अपराधियों के जाल में कैसे फँसते हैं आम लोग?

आम आदमी ज्यादातर लालच या अनजान में ऐसे मामलों में फँस जाते हैं। गाँवों और छोटे शहरों में ये ज्यादा होता है। किसी व्यक्ति का फोन आता है, “भाई, खाली खाता इस्तेमाल करेंगे, कमीशन मिलेगा।” और फिर लोग अपनी जानकारियाँ उनके साथ शेयर कर देते हैं। थोड़े से रुपयों यानी कमीशन के लालच में वो ऐसे गिरोह के हाथों फँस जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ती है। सर्वे बताते हैं कि ग्रामीण भारत में 40% फ्रॉड कमीशन के चक्कर में होते हैं।
ईडी का कहना है, “ये चेन रिएक्शन है। एक म्यूल से पैसे दूसरे में घूमते हैं, ट्रेल गुम हो जाती है।” डिजिटल बैंकिंग के जमाने में रेगुलेटरी होल्स से ये आसान हो गया है।
इस केस से सवाल भी उठ रहे हैं कि एनजीओ फंडिंग से लेकर पॉलिटिकल शादियों तक काला धन कैसे घुसता है। ईडी अब बड़े नेटवर्क की तह तक पहुँच रही है। इस मामले में जुला जैसे नाम आने से राजनीतिक घमासान तेज हो गया हो गया है। बहरहाल, अभी जाँच चल रही है, जो जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस मामले की व्यापकता सामने आती जाएगी।

अब बिना एक्टिव सिम के बंद होंगे वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप, DoT ने साइबर फ्रॉड से बचने के लिए बनाए कड़े नियम: जानें SIM-Binding सिस्टम कितना फायदेमंद?

                                                                                            प्रतीकात्मक 
भारत सरकार ने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ तभी चलेंगे जब फोन में उसी नंबर की एक्टिव सिम लगी हो। इसके अलावा वेब लॉगिन भी समय-समय पर री-वेरिफाई होगा। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा यह नियम टेलीकम्युनिकेशन साइबरसिक्योरिटी अमेंडमेंट रूल्स 2025 (Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules 2025) के तहत लागू किया है।

पूरी तरह बदल जाएगा ऐप चलाने का तरीका

सरकार के नए आदेश के बाद अब देश के करोड़ों ऐप यूजरों को अपनी आदतें बदलनी होंगी। पहले मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ इंस्टॉलेशन के समय मोबाइल नंबर माँगती थीं और बाद में चाहें सिम स्लॉट में हो या नहीं, ऐप चलता रहता था। लाखों लोग टैबलेट, सेकेंडरी फोन या सिर्फ वाई-फाई से बिना सिम के WhatsApp और Telegram चला लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
अब यह ऐप तभी खुलेगा जब फोन में वही सिम लगी हो जिससे ऐप रजिस्टर हुआ है और वह सिम एक्टिव और नेटवर्क में हो। अगर सिम बंद है, नंबर ब्लॉक है या फोन में नहीं लगा, तो ऐप खुलना बंद हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे फेक नंबरों और विदेश से चल रहे धोखाधड़ी वाले अकाउंट को रोका जा सकेगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पिछले कुछ समय में भारत में साइबर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है। कई ठग विदेशी नंबर, ऑनलाइन VIP कॉल और बिना सिम वाले ऐप अकाउंट का इस्तेमाल करके लोगों को फँसा रहे थे। क्योंकि ऐप सिम हटाने के बाद भी चलती रहती थी, इसलिए यूजर की पहचान ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो जाता था।
ठग एक नंबर से धोखाधड़ी करते और तुरंत सिम या डिवाइस बदल देते। इस लूपहोल का इस्तेमाल आतंकवादी नेटवर्क, स्कैमर्स, फर्जी कस्टमर केयर एजेंट और डेटा चोरी करने वाले गिरोह कर रहे थे। इसलिए सरकार ने अब साफ कर दिया है कि ऐसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी जो ठगों को छुपने का मौका दे।

नए नियम कैसे करेंगे काम: SIM-Binding और ऑटो लॉगआउट सिस्टम

अब मैसेजिंग ऐप्स पर वह सिस्टम लागू होगा जो फिलहाल बैंकिंग और UPI ऐप्स में इस्तेमाल होता है, यानी SIM-Binding। मतलब ऐप को लगातार यह जाँचना होगा कि फोन में वही सिम लगी है या नहीं। अगर ऐप को 24×7 नेटवर्क में वही सिम डिटेक्ट नहीं हुई तो ऐप बंद हो जाएगी और दोबारा वेरिफिकेशन करना होगा।
यही नहीं, जिन यूजर्स के पास WhatsApp Web या Telegram Web खुले रहते थे, अब उनके लिए बड़ा बदलाव है। हर 6 घंटे में वेब सेशन अपने आप लॉगआउट हो जाएगा और दोबारा QR कोड स्कैन करना पड़ेगा। इससे अगर कोई अपराधी आपका वेब लॉगिन चुरा ले, तो भी नुकसान लंबे समय तक नहीं हो पाएगा।

कंपनियों के लिए जरूरी कदम: 120 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट

सरकार ने इस आदेश को टेलीकम्यूनिकेशन साइबरसिक्योरिटी अमेंडमेंट रूल्स 2025 के तहत लागू किया है। अब WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, JioChat, ShareChat, Josh जैसे सभी प्लेटफॉर्म Telecommunication Identifier User Entities (TIUE) की श्रेणी में आ गए हैं।
इन सभी कंपनियों को 90 दिन में SIM-Binding सिस्टम लागू करना होगा और 120 दिन में लिखित रिपोर्ट जमा करनी होगी कि नियम लागू हो चुका है।
अगर कंपनियाँ पालन नहीं करतीं तो उन पर टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट 2023, आईटी रूल्स और साइबरसिक्योरिटी लॉज (Cybersecurity laws) के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। पहली बार ऐसा हुआ है कि मैसेजिंग ऐप्स को टेलीकॉम स्तर की सख्त निगरानी में लाया गया है।

आम लोगों पर असर: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

इस नियम के बाद अधिकांश सामान्य यूजर को शुरुआत में ज्यादा परेशानी नहीं होगी, खासकर जिन्हें हमेशा अपने नंबर वाले फोन में ऐप चलाने की आदत है। लेकिन जिन यूजर्स का फोन खराब है, जिनके पास दूसरा फोन है, टैबलेट है, या जिन्होंने बिना सिम वाले डिवाइस में ऐप चलाने की आदत बना रखी थी, अब उन्हें बदलाव करना पड़ेगा।
वेब यूजर्स के लिए बार-बार लॉगिन करना थोड़ी झुँझलाहट पैदा करेगा। हालाँकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे फर्जी अकाउंट, नकली लिंक, स्पैम और डरावने फ्रॉड संदेशों में कमी आएगी। आम यूजर सुरक्षित महसूस करेगा और सरकार को लगता है कि डिजिटल सुरक्षा बढ़ेगी।
वहीं, कई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ठग फर्जी या उधार लिए गए डॉक्यूमेंट से आसानी से नया सिम कार्ड ले सकते हैं, इसलिए यह उपाय बहुत ज्यादा फायदा नहीं देगा बल्कि सिर्फ सीमित सुरक्षा ही प्रदान करेगा।
दूसरी तरफ टेलीकॉम सेक्टर इस फैसले का समर्थन कर रहा है। उनका कहना है कि मोबाइल नंबर भारत में सबसे भरोसेमंद डिजिटल पहचान हैं और यह नियम मौजूदा वेरिफिकेशन सिस्टम को और मजबूत बनाकर साइबर सुरक्षा और पहचान की जिम्मेदारी को बढ़ाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम जैसे ऐप्स इसे कैसे लागू करेंगे। अगर यह नियम पूरी तरह लागू हुआ, तो लाखों यूजर्स को ब्राउजर पर लॉगिन रहने की सुविधा खोनी पड़ सकती है और अगर उनका सिम बंद या इनएक्टिव हो गया, तो वे अपने पसंदीदा मैसेजिंग ऐप्स का एक्सेस भी खो सकते हैं।
यानि, यह कदम सुरक्षा तो बढ़ाएगा लेकिन इसके साथ यूजर की सुविधा और प्राइवेसी पर असर पड़ने की चिंता भी बनी हुई है। यह फैसला सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे भले उपयोग में थोड़ी दिक्कत बढ़े लेकिन साइबर अपराधों पर बड़ी रोक लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।

तेलंगाना : चीनी जालसाजों की कैद में 3000 भारतीय, नौकरी के नाम पर फँसाकर महिलाओं से करवाते हैं न्यूड वीडियो कॉल: चंगुल से छूट कर आए युवक ने बताया

                             हैकरों ने 3000 भारतीयों को बंधक बनाया, नौकरी का झाँसा देकर फँसा रहा चीन
खुद को भुक्तभोगी बताते हुए तेलंगाना के एक युवक ने दावा किया है कि चीन के साइबर अपराधियों के चक्कर में कई भारतीय कम्बोडिया में गुलाम बना कर रखे गए हैं। इन पीड़ितों की तादाद लगभग 3000 के आसपास बताई गई है जिसमें कई महिलाएँ शामिल हैं। इन महिलाओं का प्रयोग हनीट्रैप जैसी घटनाओं में न्यूड कॉल तक के लिए किया जा रहा है। गुलाम बनाए गए लोगों में ज्यादातर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बताए जा रहे हैं। अधिकतर लोगों को नौकरी दिलाने का झाँसा दे कर बुलाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलंगाना का रहने वाला मुंशी प्रकाश नाम का मीडिया के युवक सामने आया है। मुंशी प्रकाश ने आपबीती का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech तक पढ़ाई की है। JT हैदराबाद में नौकरी करते हुए मुंशी प्रकाश ने अपना बायोडाटा इंटरनेट पर अपलोड किया था। इसी बायोडाटा को देख कर कम्बोडिया से विजय नाम के व्यक्ति ने प्रकाश को कॉल कर के ऑस्ट्रेलिया में नौकरी का ऑफर दिया। ट्रेवल हिस्ट्री बनाने के लिए मुंशी प्रकाश को पहले मलेशिया का टिकट दिया गया।

12 मार्च, 2024 को को मुंशी प्रकाश मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर पहुँचे। यहाँ से उन्हें विजय का एक स्थानीय प्रतिनिधि मिला जिसने मुंशी प्रकाश से 85,000 डॉलर ले लिए। इसी दौरान एक चीनी व्यक्ति ने मुंशी प्रकाश का पासपोर्ट ले लिया और उन्हें अपने साथ ले कर कम्बोडिया के क्रांग बावेत ले गया। यहाँ मुंशी प्रकाश को एक टॉवर में ले जाया गया जहाँ कई अन्य भारतीय पहले से मौजूद थे। इस टॉवर में मुंशी प्रकाश को 10 दिनों तक फेसबुक पर लड़कियों की फर्जी ID बनाने की ट्रेनिंग दिलाई गई।

मुंशी प्रकाश ने बताया कि फेसबुक की ये ID तमिल और तेलगु सहित कई अन्य भाषाओं में बनवाई जा रही थी। काम के बाद पीड़ित को एक अँधेरे कमरे में बंद रखा जाता था। इनकार करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी और खाना-पीना भी ठीक से नहीं दिया जाता था। फोटो आदि खींचने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। एक दिन मौका पाकर मुंशी प्रकाश ने अपनी बहन को ईमल कर के सारी समस्या बताई। तब मुंशी प्रकाश की बहन से तेलंगाना के प्रशासन को इस मामले से अवगत करवाया था।

स्थानीय स्तर पर समस्या का हल न निकलने पर मुंशी प्रकाश के परिजनों ने भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई। दूतावास की पहल पर कम्बोडिया की पुलिस एक्टिव हुई और मुंशी प्रकाश को बरामद कर लिया। इस बीच चीनी गिरोह ने मुंशी प्रकाश के खिलाफ तहरीर दे कर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया। इस वजह पीड़ित को 12 दिनों तक जेल काटनी पड़ी थी। अंत में 9 अन्य भारतीयों के साथ मुंशी प्रकाश 5 जुलाई, 2024 को कम्बोडिया से भारत वापस भेज दिए गए। भारत आ कर मुंशी प्रकाश ने बताया कि उनकी ही तरह लगभग 3000 भारतीय कम्बोडिया में चीनी जालसाजों की वजह से फँसे हुए हैं।

मुंशी प्रकाश का दावा है कि 3000 बंधकों में कई महिलाएँ भी शामिल हैं। इन महिलाओं से हनीट्रैप का काम करवाया जा रहा है। लड़कियों को नग्न होकर वीडियो कॉल करने पर मजबूर किया जाता है। मुंशी ने बताया कि उन्हें कम्बोडिया में चीनी जालसाजों के जाल में फँसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, मुंबई और दिल्ली के लोग मिले। इन सभी को विदेश में नौकरी का झाँसा दे कर कम्बोडिया बुलाया गया था। जालसाजी के जुटाया गया ये पैसा पहले क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता है। बाद में इसे अमेरिकी डॉलर और अंत में चीनी मुद्रा युवान में बदलवा ली जाती है।

कर्नाटक : महिला वकील के कपड़े उतरवाए, 36 घंटे बिठा कर रखा, डार्क वेब पर अश्लील वीडियो बेचने की धमकी: CBI-पुलिस बन कर ठगा, ब्लैकमेल कर वसूले 11 लाख रूपए

                                                                                                           प्रतीकात्मक चित्र- वारंगल पुलिस
कहते है आसमान पर तारे बहुत तोड़ने के लिए दिमाग चाहिए। अपने स्कूल दिनों में रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता "अभिनव मानव" पढ़ी थी, जो विज्ञानं के बढ़ते कदमों से शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है। दिनकर जी ने स्पष्ट लिखा था कि विज्ञानं जितनी अधिक प्रगति करेगा, मानव के लिए उतनी ही घातक होगी। इसमें दो राय भी नहीं कि विज्ञानं की प्रगति से देश भी प्रगति करते हैं, लेकिन इसका दुरूपयोग समाज में पल रहे कलंकित लोग भी अपनी जीविका के लिए कर रहे हैं। कर्नाटक से मिल रहे समाचार के अनुसार जब एक वकील तक अपने आपको न बचा पाए, आम नागरिक कैसे बच पाएगा। 

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से साइबर क्राइम का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला वकील को वीडियो कॉल कर के 36 घंटों तक कैमरे पर लाइव बिठाए रखा गया। इस दौरान उसके कपड़े तक उतरवा कर अश्लील वीडियो बनाए गई। वीडियो डार्क वेब पर बेचने की भी धमकी दी गई। महिला वकील को ब्लैकमेल कर के 15 लाख रुपए ठग लिए गए। आरोपितों ने खुद को मुंबई पुलिस और CBI का अधिकारी बताया था। घटना बुधवार (3 अप्रैल, 2024) की है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

फोन लाइन पर आए व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। पीड़िता का रैकेट मानव तस्करी और ड्रग्स रैकेट से जुड़े होने की धमकी देते हुए कॉलर ने अपने मोबाइल पर स्काइप एप डाउनलोड करने के लिए कहा। स्काइप एप डाउनलोड करवाने के बाद आरोपितों ने कॉल को किसी अभिषेक चौहान के पास ट्रांसफर कर दिया। खुद को अभिषेक चौहान बता रहे व्यक्ति ने अपना परिचय CBI अधिकारी के तौर पर दिया। कॉलर ने पीड़िता से कहा कि बैंक के किसी स्टाफ ने उनका खाता मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रयोग किया है।

थोड़ी देर बाद पीड़िता को स्काइप एप के जरिए वीडियो कॉल करने के लिए कहा गया। आरोपितों ने पीड़िता को धमकी दी कि वो लगातार वीडियो कॉल पर बनी रहे। यहाँ तक कि तब भी जब वो सो रही हो। डर के मारे पीड़िता ने ऐसा ही किया। अगले दिन खाता सत्यापित करवाने के नाम पर कॉलर ने पीड़िता से अपने एकाउंट में 10 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए। थोड़ी देर बाद उन्होंने पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से 2-2 लाख रुपए के 2 ट्रांजिक्शन और करवाए। इस दौरान उन्होंने पीड़िता से खुद को घर में बंद ही रखने को कहा था। महिला वकील डर से उनकी हर बात मानती रही।

आरोप है कि 36 घंटे तक चली इस वीडियो कॉल के दौरान कॉलर ने नार्को टेस्ट के नाम पर पीड़िता के सारे कपड़े तक उतरवा दिए। बाद में महिला के अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने की धमकी दे कर उस से 10 लाख रुपए और भेजने के लिए ब्लैकमेल किया जाने लगा। आखिरकार पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने IT एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

गुजरात : सॉफ्टवेयर कंपनी के ‘खड़ूस बॉस’ को सेक्स चैट में फँसाया, फिर पत्नी से लेकर HR तक को भेज दी नंगी तस्वीरें

                                                                                          प्रतीकात्मक फोटो, साभार: yespunjab.com
खड़ूस बॉस से बदला लेने की ऐसी कहानी आपने शायद ही सुनी हो! गुजरात के वडोदरा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के बॉस से बदला लेने के लिए दो कर्मचारियों ने उसे हनीट्रैप में उलझाया। फिर उसकी नंगी तस्वीरें उसकी पत्नी से लेकर कंपनी के एचआर तक को भेज दी। तीन महीने तक टॉर्चर झेलने के बाद जब बॉस ने पुलिस से शिकायत की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस ने आईपी एड्रेस के माध्यम से हनीट्रैप का जाल बिछाने वाले लोगों का पता लगाया तो दोनों उसी कंपनी के पूर्व कर्मचारी निकले। इनमें एक महिला और एक पुरुष हैं। कथित तौर पर बॉस की प्रताड़ना से तंग आकर दोनों ने नौकरी छोड़ी थी। फिर महिला के नाम से इंस्टाग्राम पर फेक अकाउंट बनाकर बॉस को फँसाया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फेक अकाउंट से दोनों कर्मचारियों ने करीब चार महीने पहले बॉस के साथ सेक्स चैट शुरू किया। उसे एक वेबसाइट से डाउनलोड की गई कुछ नंगी तस्वीरें भेजी। बॉस उनके जाल में उलझ गया। उसे लगा कि वह किसी महिला के साथ चैट कर रहा है। उसने भी अपनी नंगी तस्वीरें भेज दी। इसके बाद बॉस को फेक अकाउंट से मैसेज आने बंद हो गए।

 चैट बंद होने के कुछ दिन बाद बॉस को ही ईमेल पर दोनों ने उसकी नग्न फोटोज और चैट के स्क्रीनशॉट भेजे। इसके बाद कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को इसी तरह का ईमेल भेजा गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। बॉस की पत्नी को भी उसकी नंगी तस्वीरें और चैट पहले मेल किए गए और फिर स्पीडपोस्ट के जरिए तस्वीरों का प्रिंट आउट उस दफ्तर में भेजा गया जहाँ वह काम करती है।

पुलिस के मुताबिक इंतकाम का यह प्लान बॉस की कथित डाँट के कारण नौकरी छोड़ने वाली महिला कर्मचारी ने अपने एक पुरुष सहकर्मी के साथ मिलकर बनाया था। रिपोर्ट में पीड़ित और आरोपितों की पहचान नहीं बताई गई है। पुलिस के अनुसार पीड़ित इस मामले को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है। हालाँकि पुलिस ने दोनों आरोपितों को सीआरपीसी 41 (ए) के तहत बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। वडोदरा के एसीपी (साइबर क्राइम) हार्दिक मकाडिया ने इसे कॉर्पोरेट दुश्मनी का मामला बताया है।

आफताब ने श्रद्धा का मर्डर किया… क्योंकि इंटरनेट पर सब कुछ आसानी से मिलता है: दीपांकर दत्ता, चीफ जस्टिस, बॉम्बे हाई कोर्ट

श्रद्धा मर्डर केस पर बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का बयान (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता के बयान से यकायक माध्यमिक स्तर पर रामधारी सिंह दिनकर की कविता "अभिनव मानव" की वह पंक्तियाँ 'विज्ञानं जितनी प्रगति करेगी, उतनी विनाशकारी होगी..." स्मरण हो गयी। श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Murder Case) पर बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता (Chief Justice Dipankar Datta) का भी बयान आया है। 19 नवम्बर 2022 को उन्होंने भारत में बढ़ रहे साइबर अपराध पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर हर चीज आसानी से मिल जाने के सकारात्मक के साथ नकारात्मक परिणाम भी होते हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दत्ता ने यह बयान पुणे में टेलीकॉम डिस्प्यूट स्टेटमेंट अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) के ‘टेलीकॉम, ब्रॉडकास्टिंग, आईटी और साइबर सेक्टर्स में डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन मैकेनिज्म’ सेमिनार को संबोधित करते हुए दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेमिनार में बोलते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि लोगों ने श्रद्धा मर्डर केस के बारे में अख़बारों में पढ़ा होगा। उन्होंने इसे मुंबई में प्रेम और दिल्ली में खौफ की संज्ञा दी। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह से अपराधों में बढ़ोत्तरी इसलिए हो रही है क्योंकि इंटरनेट के माध्यम से लोगों को वो तमाम चीजें आसानी से मिल जाती हैं, जिसकी तो तलाश करते हैं।

जस्टिस दत्ता के मुताबिक उन्हें आशा है कि भारत सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही होगी। बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर के मुताबिक हालॉंकि भारत में दूरसंचार विधेयक मौजूद है लेकिन भविष्य की चुनौतियों के लिए एक मजबूत कानून जरूरी होगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने निजी सम्मान की रक्षा करते हुए समाज में सभी को न्याय दिलाने की दिशा में प्रयास करना होगा। न्यायाधीश ने लोगों से इसे एक टारगेट के तौर पर लेने की अपील की है। NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मुद्दे पर बोलते हुए जस्टिस दत्ता ने कहा कि इसकी क्षेत्र के हिसाब से बेंच होनी चाहिए। अंत में उन्होंने लोगों से संवैधनिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।

भारत की साइबर दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव पर जस्टिस दत्ता ने पिछले दिनों की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि 1989 में लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं थे लेकिन 2-3 वर्षों के अंदर उनके पास पेजर आ गए। पहले मोटोरोला के बड़े हैंडसेट की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि बाद में छोटे हैंडसेट आ गए।

बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता के मुताबिक अब आ रहे फोन में ऐसी चीजें उपब्लध हैं, जो पहले सोच से भी परे थीं। न्यायाधीश ने इस नए सिस्टम में हैकिंग के खतरे बढ़ने से सतर्क करते हुए इसे लोगों की निजता पर हमला बताया है।

‘हिन्दू की हत्या पर संभोग जैसा सुख’: प्रोपेगेंडाबाज गायिका कारालीसा मोंटेरियो

                                              कारालीसा मोंटेरियो के नाम से वायरल हो रहा ट्वीट
भारत की मोदी सरकार द्वारा जब से तीन तलाक बिल से लेकर कृषि बिल तक मोदी विरोधियों के सुरताल एक जरूर हो रहे हैं, लेकिन सभी ये भूल रहे हैं कि विरोध करते-करते हिन्दू विरोध बहुत जल्द इन सबको पाताल में पहुंचा देगा और भारत से विपक्ष नाम ही लुप्त हो जाएगा। आने वाले चुनावों में जनता इन मोदी विरोधियों से पूछे कि "अगर मोदी सरकार द्वारा लाये गए कानून जन विरोधी हैं, फिर क्यों तुम सब अपने-अपने घोषणा पत्रों में इसका उल्लेख कर जनता को लॉलीपॉप दी जा रही थी? इनके हिन्दू उम्मीदवारों से पूछा जाए कि जब आंदोलनों में हिन्दू विरोधी नारे लग रहे थे, तब क्यों और किस आधार पर इन नारों का समर्थन कर रहे थे? क्या तुम हिन्दू नहीं हो?" आदि आदि। 

मोदी विरोधियों को जिन मुद्दों का विरोध करना चाहिए, उनमें से किसी एक का विरोध करने का साहस नहीं पा रहे, बस अपनी कुर्सी की खातिर हिन्दुओं को कलंकित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, पता नहीं कैसे इनके संस्कार हैं? रही बात हिन्दू राष्ट्र की, वह तो दीवारों पर 1555 से लिखा हुआ है, अगर पढ़ नहीं पा रहे हो तो उसमें किसी का क्या कसूर। तब नॉस्त्रेदमस ने स्पष्ट लिखा कि 2014 चुनाव में एक अधेड़ उम्र के नेतृत्व में नयी पार्टी सत्ता में आएगी। इस विषय पर अपने लेखों में विस्तार से लिख चूका हूँ।  

दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में लगातार प्रोपेगेंडा फैला रही गायिका कारालीसा मोंटेरियो के नाम से एक ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस ट्वीट में लिखा है, “जब भी किसी हिन्दू की हत्या होती है, मुझे संभोग जैसा सुख प्राप्त होता है। मोदी भले कॉन्ग्रेस मुक्त भारत का सपना देखते हों, लेकिन हम जल्द ही हिन्दू मुक्त भारत बनाएँगे। आमीन।”

                                               वायरल हो रहे ट्वीट का स्क्रीनशॉट
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि कारालीसा मोंटेरियो वही हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अगस्त 2020 में तब फेक न्यूज़ शेयर की थी, जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। उन्होंने पीएम मोदी की एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो लॉन में बैठ कर अख़बार पढ़ रहे हैं और आसपास कुछ बत्तख घूम रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि जब देश महामारी के संकट से जूझ रहा है, तब पीएम मोदी आराम फरमा रहे हैं।

जबकि सच्चाई ये है कि वो तस्वीर 2013 की थी, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। इसी तरह कारालीसा ने ऑपइंडिया को लेकर भी झूठे दावे किए थे। हाल ही में उन्होंने ऑपइंडिया का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें बताया गया था कि ग्रेटा थनबर्ग का असली नाम गजला भट्ट है, और वो एक कश्मीरी कारोबारी की बेटी हैं। वो स्क्रीनशॉट फर्जी थी और ऑपइंडिया ने कभी ऐसा कुछ लिखा ही नहीं।

अब कारालीसा मोंटेरियो ने हिन्दू की हत्या वाली वायरल ट्वीट के स्क्रीनशॉट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उसे फेक करार दिया है। उन्होंने कहा है कि ये फेक ट्वीट है और इसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वो कभी ऐसी भाषा का प्रयोग करती ही नहीं हैं। उन्होंने इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही। साथ ही उद्धव कैबिनेट में कॉन्ग्रेस के मंत्री असलम शेख को टैग भी किया।

‘किसान आंदोलन’ के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा का बाजार गर्म है और रिहाना से लेकर ग्रेटा तक ने इसके लिए ट्वीट्स किए। खबर आई थी कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।