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माफीवीर राहुल गाँधी : 8 साल पहले पनामा पेपर्स लीक से शिवराज चौहान के बेटे का कनेक्शन ढूँढने वाले ने कहा- हो गई थी ‘गलतफहमी’

भारत को दो ऐसे माफीवीर नेता अरविन्द केजरीवाल और राहुल गाँधी मिले हैं जो hit and run पॉलिसी अपनाकर अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लगता है दोनों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है। अगर राहुल केजरीवाल पार्टी की हालत देख देश और पार्टी हित में काम नहीं करते Leader of Opposition पद छोड़ देना चाहिए। बार-बार माफ़ी मांगना LoP के लिए बहुत ही शर्म की बात है। शायद इसीलिए पब्लिक भी राहुल की बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से उसी समय निकाल रही।   

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने कोर्ट में मानहानि के मामले में माफी माँगी है। उन्होने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह का पनामा पेपर्स लीक मामले में नाम लिया था। इसके खिलाफ कार्तिकेय सिंह ने राहुल गाँधी के खिलाफ भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का केस दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उनकी प्रतिष्ठा धुमिल हुई है।

इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई। इस दौरान राहुल गाँधी के वकील ने बुधवार (24 जून 2026) को कोर्ट में एक आवेदन दाखिल किया। इसमें उन्होंने अपने मानहानि वाले बयान पर खेद जताया है और कहा कि उनका बयान कार्तिकेय सिंह से जुड़ा नहीं था। अर्जी में हाईकोर्ट से राहुल गाँधी के खिलाफ चल रही मानहानि की कार्यवाही से राहत देने की माँग की गई है।

राहुल गाँधी के वकील ने कोर्ट में साफ किया कि यह बयान केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह एक गलतफहमी थी। राहुल गाँधी के इस लिखित सफाई पर कोर्ट ने कार्तिकेय सिंह से लिखित में प्रतिक्रिया देने के लिए कहा है।

क्या है मामला

करीब 8 साल पहले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के प्रचार के दौरान राहुल गाँधी ने झाबुआ में चुनावी रैली के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा था कि चौहान के शासनकाल में राज्य में ‘बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार’ हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम पनामा पेपर्स में आया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कार्तिकेय शर्मा ने भोपाल के एमपी एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत की, जो सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करती है।

राहुल गाँधी ने कहा था, “पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का नाम पनामा पेपर्स में आया था। पाकिस्तान जैसे देश में उन्हें जेल हुई। यहाँ, एक मुख्यमंत्री के बेटे का नाम पनामा पेपर्स में आता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”

अब राहुल गाँधी अपने आरोपों पर सफाई देते हुए कहते हैं कि उन्हें ‘गलतफहमी’ हुई थी और उन्होंने पनामा पेपर्स लीक मामले में गलती से कार्तिकेय का नाम ले लिया था, जबकि असल में शिवराज सिंह चौहान ‘व्यापम और ई-टेंडर घोटालों में शामिल’ हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गाँधी ने कार्तिकेय को पनामा पेपर्स मामले से गलत तरीके से जोड़कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। शिकायत के बाद, ट्रायल कोर्ट ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया था।

इसके जवाब में, राहुल गाँधी ने समन और मानहानि के मामले को रद्द कराने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच का रुख किया। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल इस याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। बुधवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो याचिकाकर्ता पक्ष ने पहले के निर्देशानुसार निचली अदालत के रिकॉर्ड पेश किए। शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह की ओर से वकील संकल्प कोचर पेश हुए।

हाई कोर्ट में दायर नई अर्जी में राहुल गाँधी ने उस बयान पर खेद व्यक्त किया है और स्पष्ट किया है कि उनका इरादा कार्तिकेय सिंह का जिक्र करने का नहीं था।