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बांग्लादेश से रात को लुंगी पहन भागे पूर्व राष्ट्रपति, थाईलैंड की पकड़ी फ्लाइट: 2013-23 तक रहे थे देश के मुखिया


बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हामिद सुबह 3 बजे ढाका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से थाई एयरवेज की उड़ान पर सवार हुए और देश छोड़कर चले गए, जबकि अधिकांश बांग्लादेशी गहरी नींद में थे। जब अंतरिम सरकार की नींद खुली और उसे पता चला कि क्या हुआ है, तो उसने अधिकारियों को निलंबित और स्थानांतरित कर दिया और एक उच्च स्तरीय जांच का गठन किया। पूर्व राष्ट्रपति हामिद उन लोगों में शामिल थे, जिनके खिलाफ 
पिछले साल शेख हसीना विरोधी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जांच की जा रही थी । मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति के देश छोड़ने के बाद मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने एयरपोर्ट पर कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

अब्दुल हामिद 2013 से 2023 तक दो कार्यकालों के लिए बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे। वह 2024 में आंदोलन अवधि के दौरान अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज हत्या के कम से कम एक मामले में सह-अभियुक्त भी हैं। हसीना शासन पर उन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने और उनकी हत्या करने का आरोप लगाया गया था जो उन्हें अपदस्थ करना चाहते थे।

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 81 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति किशोरगंज सदर पुलिस स्टेशन में 14 जनवरी को दर्ज हत्या के मामले में आरोपी हैं, जिसमें हसीना और उनके परिवार के सदस्य जैसे शेख रेहाना, सजीब वाजेद जॉय और साइमा वाजेद पुतुल सह-आरोपी हैं। पूर्व मंत्री ओबैदुल कादर भी इस मामले में सह-आरोपी हैं।

इसी के साथ सरकार ने शिक्षा सलाहकार CR अबरार के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल हामिद के थाईलैंड जाने की जाँच करेगी। दूसरी ओर हामिद के परिजन का कहना है कि वह अपने भाई और बहनोई के साथ इलाज के लिए गए हैं। वहीं, राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि वह मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़कर भागे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद पर पिछले साल शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाई और भ्रष्टाचार के लिए जाँच चल रही है। उनके खिलाफ कई मुकदमें दर्ज हैं, जिनमें से एक हत्या का भी केस है। 81 साल के अब्दुल हामिद 2013 से 2023 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। वह शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी से जुड़े हैं, जिस पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हाल ही में प्रतिबंध लगाया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार , स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी), वह संगठन जिसने आरक्षण विरोधी आंदोलन शुरू किया था , जिसने हसीना विरोधी प्रदर्शनों का रूप ले लिया, ने उन लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की, जो हामिद को 24 घंटे के भीतर जाने देने के लिए जिम्मेदार थे।

अमादेर सोमॉय की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी राजनेता हन्नान मसूद ने दावा किया कि हामिद का देश से भागना सत्ता में बैठे लोगों, विशेष रूप से राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन चुप्पू की अनुमति से प्रबंधित किया गया था, ताकि वह मुकदमे से बच सकें।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति बनने से पहले अब्दुल हामिद हसीना की अवामी लीग पार्टी से सांसद थे। दरअसल, उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा अवामी लीग की छात्र शाखा - छात्र लीग से शुरू की थी। अक्टूबर 2024 में युनूस की अंतरिम सरकार ने छात्र लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

ट्रंप को मारने आया था पाकिस्तानी, ईरान ने दी थी ट्रेनिंग: US के कई बड़े नेता थे निशाने पर, गिरफ्तार

                                                      आसिफ मर्चेंट (बाएँ) डोनाल्ड ट्रंप (दाएँ)
अमेरिका के न्याय विभाग ने पिछले महीने एक पाकिस्तानी को गिरफ्तारी किया था। पाकिस्तानी का नाम आसिफ मर्चेंट है। उसके ऊपर आरोप है कि उसने ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से जुड़े कई नेताओं की हत्या की साजिश रची।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ मर्चेंट को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका भेजा गया था। वह अमेरिका जाने से पहले लंबे वक्त तक ईरान में रहा। बाद में इसी साल अप्रैल में उसे पाकिस्तान से अमेरिका भेजा गया।

बताया जा रहा है कि 46 साल के आसिफ मर्चेंट ने अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए दो लोगों को ढूँढकर 5000 डॉलर का भुगतान भी किया था। हालाँकि बाद में पता चला कि वो दो लोग कोई और नहीं बल्कि एफबीआई के सीक्रेट एजेंट थे।

उन्होंने आसिफ मर्चेट की सूचना पुलिस को दी और फिर उसे हिरासत में लिया गया। 16 जुलाई को अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया। आसिफ मर्चेंट की गिरफ्तारी को लेकर FBI के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने कहा मर्चेंट एक खतरनाक हत्या की साजिश रच रहा था, जिसे नाकाम कर दिया गया।

 उन्होंने बताया कि मर्चेंट का ईरान से सीधा कनेक्शन है। उसे ईरान ने ही अमेरिकी नेताओं की हत्या करने के लिए भेजा था। पूछताछ में उसने अमेरिका से अपने कनेक्शन पर कहा कि उसकी दो बीवियाँ हैं एक पाकिस्तान में और दूसरी ईरान में। दोनों जगह उसके बच्चे हैं इसलिए वो आता जाता है।

हालाँकि मीडिया रिपोर्टों में जो अदालती दस्तावेज का हवाला देते हुए जानकारी दी गई है उसमें कहा गया है कि साजिश में कुछ निश्चित घरों से यूएसबी ड्राइव व डॉक्यूमेंट्स को चुराना, नेताओं की हत्या करना, प्रदर्शन करना आदि शामिल था।

उसने इन सभी करतूतों को अंजाम देने के लिए कोड नेम बनाए थे। जैसे-  विरोध प्रदर्शन के लिए “टी-शर्ट”, दस्तावेजों की चोरी के लिए “फलालैन शर्ट”, हत्या के लिए “ऊन जैकेट” और उनकी बैठकों के लिए “यार्न-डाई।”

अदालत में पेश किए गए दस्तावेज में भले ही किसी अकेले नेता की हत्या की साजिश का नाम नहीं है लेकिन मीडिया में इसे ट्रंप से जोड़कर बताया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आसिफ को सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए भेजा गया था और जब सुलेमानी को मारा गया था उस समय डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इसलिए इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप का नाम उन नेताओं की लिस्ट में रखकर देखा जा रहा है जो आसिफ के निशाने पर थे।

इसके अलावा ईरान ने पिछले साल भी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मारने की धमकी दी थी। ईरान के रिवॉल्यूश्नरी गार्ड एयरोस्पेस फोर्स के हेड अमीराली हाजीजादेह ने कहा था, “अल्लाह ने चाहा तो हम ट्रम्प को जरूर मारेंगे। हम उन सभी मिलिट्री कमांडर को मारना चाहते हैं, जो ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या में शामिल थे।”

ईरान द्वारा रची जा रही ट्रंप की हत्या की साजिश पर इसलिए भी इतनी बात हो रही है क्योंकि कुछ समय पहले ही ट्रंप पर एक रैली के दौरान जानलेवा हमला हुआ था। इसके अलावा ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान को लेकर कहा भी था अगर ईरान ने ईरान कभी भी उनकी हत्या करने में कामयाब होता है तो उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका उसे खत्म कर देगा।