Showing posts with label #freebees. Show all posts
Showing posts with label #freebees. Show all posts

केजरीवाल की फ्री रेवड़ियों पर बीजेपी की रेवड़ियां जिससे ‘AAP-दा’ मुक्त हुई दिल्ली; नेशनल मीडिया की हार, Man of the Match रहे प्रवेश वर्मा और स्वाति मालीवाल ; कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त

आज 27 साल के बाद बीजेपी की वापसी ने साबित कर दिया है कि दिल्ली वाले बिकाऊ हैं खरीदार चाहिए। लोहे को लोहा ही काटता है यानि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां नहीं बांटी होती अभी भी बीजेपी सत्ता से दूर रहती। इस कटु सच्चाई से कोई दिल्लीवासी इंकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने इतने साल सत्ता किसी काम के बूते नहीं बल्कि रेवड़ियों के दम पर किया। 
दिल्ली से केजरीवाल सत्ता जाने से आम आदमी पार्टी को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, क्योकि दिल्ली निकलने से पंजाब सरकार और दिल्ली नगर निगम भी कभी भी जा सकती है। पंजाब में सरकार जाने का कांग्रेस को फायदा हो सकता है। 

केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां बांट मोदी ने केजरीवाल के उस अहंकार को भी धराशाही कर दिया जो केजरीवाल ने पब्लिक मीटिंग में कहा था कि "केजरीवाल को हराने के लिए मोदी को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा"। लेकिन तपस्वी मोदी ने एक तीर से दो निशाने साधे है। एक तो केजरीवाल का अहंकार दूसरा Deep State और toolkit जिसकी फंडिंग से मोदी विरोधी उछलते रहते हैं। मोदी ने केजरीवाल और इसकी पार्टी को नेस्ताबूत करने अर्थव्यवस्था की भी परवाह नहीं की।   

रही बात कांग्रेस की, इसके लगभग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का जिम्मेदार राहुल गाँधी है। जो पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन पर बीजेपी और आरएसएस से लड़ाई लड़ने की बात बोलने तक तो ठीक था, लेकिन to fight against nation कहना कांग्रेस को खा गया। कई बार लिखा जा चुका है कि कांग्रेस ने अपने आपको बचाए रखने के लिए गाँधी परिवार से दूरी बनानी होगी। कांग्रेस का जो पतन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद शुरू हुआ है आज तक जारी है। सोनिया की कसर को पूरा कर रही भाई-बहन(राहुल और प्रियंका) की जोड़ी। 

आम आदमी पार्टी के साथ मीडिया की भी हार

त्रेता युग से लेकर आज कलयुग तक इतिहास साक्षी है कि महिला के अपमान का क्रोध सत्ता को खा जाता है। आप सांसद स्वाति मालीवाल ने जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी की नाकामियों को उछाला पंजाब सरकार से विज्ञापन मिलने की वजह से किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया, क्योकि मीडिया को अपने राजस्व की चिंता थी जनता की समस्याओं से नहीं। स्वाति के वीडियोस सोशल मीडिया पर छाए रहे। अगर यही वीडियो बीजेपी के खिलाफ होते सारा मीडिया खूब प्रसारित कर रहा होता। इसलिए दिल्ली से केजरीवाल सरकार के जाने में स्वाति मालीवाल की अहम् भूमिका होने के कारण मालीवाल को Man of the Match कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। लेकिन प्रवेश वर्मा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिसने केजरीवाल की नाक में नकेल डाल कही का नहीं छोड़ा। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों में बसते हैं। जनता पर उनका ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप- AAP) और कांग्रेस ने मतदाताओं से खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में मोदी लहर कायम है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर बहुमत मिला है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में दिल्ली के वोटरों ने AAP पर ही झाड़ू चला दी है। AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे खराब स्थिति तो राहुल गांधी की कांग्रेस की है। कांग्रेस का तो एक तरह से सफाया ही हो गया है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति से लोग कांग्रेस से कटते जा रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।

दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।

क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?

दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।

महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान

इस विधानसभा चुनाव में राजधानी में पंजीकृत महिला मतदाताओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। महिलाएँ समाज का वो वर्ग हैं जो बुनियादी सुविधाएँ न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इन्हें पता होता है कि घर के नल से आता गंदा पानी, गली की टूटी सड़क, नाले में भरा पानी कैसे उनके परिवार के लिए घातक है। दिल्ली की महिलाओं को इन्हीं सबसे छुटकारा चाहिए था। उन्हें फ्री बिजली से ज्यादा साफ पानी की जरूरत थी। उन्हें मोहल्ला क्लिनिक से ज्यादा आयुष्माम योजना की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने 10 साल पहले केजरीवाल सरकार में संभावना देखकर उन्हें मौका दिया था, मगर जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने AAP को देखा-परखा और फिर बदलाव के नाम पर अपना वोट दिया।

मोदी की गारंटी

दूसरा, आम आदमी पार्टी ने इन्हीं महिलाओं को टारगेट करते हुए 2100 रुपए देने का ऐलान किया था। लेकिन, दिल्ली की महिलाएँ AAP की फ्री वाले हथकंडे को भाँप चुकी थी। उन्हें उन 2100 रुपए से ज्यादा दिल्ली के विकास को तवज्जो दी। उधर भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में महिलाओं से साफ कह दिया था कि वो न केवल दिल्ली को हर स्तर पर बेहतर बनाएँगे बल्कि जो दिल्ली सरकार इस समय जनकल्याण की योजना चला रहे हैं उन्हें भी बंद नहीं करेंगे।
महिलाओं को इस बात पर डर नहीं था कि अगर वो AAP को वोट नहीं देंगी तो उनके घरेलू बजट पर कोई असर पड़ेगा। उलटा वह संतुष्ट थीं कि भाजपा से उन्हें सम्मान के तौर पर 2500 रुपए की राशि तो मिलेगी ही। साथ ही गर्भवतियों को 25000 रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा घर के गैस सिलेंडर, बिजली की भी उन्हें चिंता नहीं करनी होगी और दिल्ली में बीजेपी के आने पर आयुष्मान योजना जैसी स्कीम भी लागू हो पाएँगी जिससे उनके परिवार को ही फायदा होगा।

मिडिल क्लास की ताकत

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जिस समय जातियों पर लोगों को बाँटकर भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही थीं उस समय बीजेपी लगातार मिडिल क्लास वर्ग पर फोकस बनाए हुई थी। बजट वाले दिन विपक्षी दलों की बाजी तब पलटी जब ऐलान हुआ कि अब 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। विपक्ष ने इस बजट को बकवास तक बताया, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस एक घोषणा ने दिल्ली के मिडिल क्लास को सीधे बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया है।

अभी तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भाजपा के खिलाफ जिस मिडल क्लास को भड़का रही थीं, उसी मिडल क्लास को चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट देकर बड़ा तोहफा दे दिया था।
इसके अलावा पिछले दिनों केंद्र सरकार ने जो 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की थी उससे भी मिडल क्लास काफी प्रभावित हुआ था। इस फैसले से करीबन 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलती। वहीं 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में बढौतरी होती।

पूर्वांचली भी साथ

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए ऐसे दिखाया था कि भाजपा पूर्वांचलियों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली दे रही है। हकीकत जबकि ये थी कि पूनावाला ने वहाँ गाली नहीं दी थी। लेकिन जो खेल आप खेल रही थी उससे निपटना जरूरी था। नतीजतन जमीनी स्तर पर काम करने की कमान बीजेपी ने कई पूर्वांचलियों को सौंपी। इन्हीं पूर्वांचलियों ने दिल्ली में अपनी पूर्वांचल सम्मान मार्च जैसे इवेंट करके अपनी ताकत लगाई और नतीजे सामने हैं।

करप्शन से केजरीवाल चित

इन सब वजहों के अलावा एक सबसे बड़ा कारण दिल्ली में भाजपा की जीत का यह भी था कि दिल्ली की जनता आए दिन AAP के काल में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों से त्रस्त हो गई थी। कभी शीश महल पर खर्च हुए 30-40 करोड़ रुपए की बात मीडिया में आ रही थी तो कभी दिल्ली शराब घोटाला के जरिए फजीहत हो रही थी। इन सारे मुद्दों ने पार्टी की छवि और नेताओं की ईमानदारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं दिल्ली की सड़कों में हर साल भरने वाला पानी और 10 साल से यमुना के साफ करने के झूठे वादे ने भी लोगों का विश्वास AAP से उठा दिया था।
इन्हीं सब बिंदुओं का फायदा भाजपा को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर हुआ और उनके दिए नारे ‘AAP-DA मुक्त’ का असर दिखा। जनता ने मोदी की गारंटियों पर भरोसा दिखाते हुए 5 फरवरी को कमल दबाया। जिसके परिणाम आज देखने को मिले। बीजेपी की इस जीत में 2M (महिला+मिडिल क्लास) 2P (पूर्वांचली+पानी) फैक्टर का बड़ा रोल दिख रहा है। दिल्ली में भाजपा 48 सीट जीत रही है जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 22। पिछले चुनाव में इसी आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
अवलोकन करें:-
शायद पहली बार AAP की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ल

 चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने पलटी हारी बाजी

हाल ही में बीजेपी ने चंडीगढ़ में मेयर पद का चुनाव जीत लिया है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इंडी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। I.N.D.I. Alliance उम्मीदवार को हराकर बीजेपी ने हारी बाजी पलट दी है। बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला I.N.D.I. Alliance के आप-कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता को हराकर चंडीगढ़ की मेयर बन गई हैं। इस चुनाव में 36 वोटों में से बीजेपी को 19 वोट मिले, जबकि आप-कांग्रेस के इंडी गठबंधन को सिर्फ 17 वोट ही मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि बहुमत के बावजूद गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। AAP और कांग्रेस के पार्षदों के क्रॉस वोटिंग के कारण गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा। हैरानी की बात यह भी है कि चंडीगढ़ में एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही है।

कर्जे में कर्नाटक: फ्री की रेवड़ी पड़ रही महंगी : बिजली, बस किराया, पेट्रोल-डीजल और दूध के दाम के बाद अब पानी पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी


कर्नाटक में सिद्धारमैया की कांग्रेस सरकार ने महंगाई को चरम पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही उत्पाद शुल्क, संपत्ति कर, स्टाम्प पेपर ड्यूटी, रोड टैक्स में बढ़ोतरी के साथ ही आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बिजली और दूध की कीमतें बढ़ा दी गईं। और अब राज्य की कांग्रेस सरकार बस किराये के साथ पानी पर टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने पानी पर टैक्स बढ़ाने की घोषणा कर दी है। 
पानी पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद जब लोगों ने विरोध किया तो डिप्टी सीएम ने साफ कह दिया कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कहता है। उन्होंने साफ कहा कि विरोध प्रदर्शन का कोई असर नहीं होगा। मैं पानी की कीमतें बढ़ा दूंगा जिससे जल बोर्ड को हो रहे वित्तीय घाटे की भरपाई हो सके।

कांग्रेस राज में बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। डीके शिवकुमार ने लोगों के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के सामने चल रही वित्तीय कठिनाइयों के कारण जल शुल्क में वृद्धि जरूरी है। ऐसे में चुनाव के समय खटाखट वादे में फंसकर कांग्रेस की सरकार बनाने वाले लोग अपनी खून-पसीने की कमाई को टैक्स में देने को मजबूर हैं।

कर्नाटक को फ्री की रेवड़ी पड़ रही महंगी
इतना ही नहीं फ्री रेवड़ी के कारण कांग्रेस ने कर्नाटक में महंगाई को भी चरम पर पहुंचा दिया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में सरकार आई तो महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा शुरू करेंगे। कांग्रेस सरकार आई और सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने। सरकार बनते ही राज्य की बसों में महिलाओं की यात्रा फ्री कर दी गई। इसका बोझ राज्य सड़क परिवहन निगम पर पड़ा और तीन महीने में ही निगम को 300 करोड़ रुपये का घाटा हो गया। 

बस किराया 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी
कर्नाटक में सरकारी बसों के किराए को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) ने बताया है कि पिछले तीन महीनों में उन्हें 295 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। KSRTC के अनुसार, इस घाटे का कारण शक्ति योजना है। इस योजना के तहत राज्य में महिलाओं को फ्री बस सुविधा दी जाती है। KSRTC के चेयरमैन और कांग्रेस विधायक एसआर श्रीनिवास ने कहा है कि बढ़ती महंगाई के बीच विभाग के रखरखाव के संतुलन के लिए ऐसा किया गया है। उन्होंने कहा कि 12 जुलाई को हुई बोर्ड की बैठक में किराया बढ़ाने का फैसला लिया गया।

3 महीने में 300 करोड़ घाटा
कांग्रेस विधायक एसआर श्रीनिवास ने कहा, ‘यदि हम पिछले तीन महीनों की बात करें तो निगम 295 करोड़ के घाटे में है। हमारे पास लगभग 8000 बसें हैं, सभी बसें 10 से 11 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। लगभग 450 से 500 वोल्वो बसें हैं, वे भी 20 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं, इसलिए हमें नई वोल्वो बसें भी खरीदनी होगी। हमने बैठक में नई खरीद के बारे में चर्चा की है। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए और नई बसें खरीदने, पुरानी बसों के रखरखाव, बहुत सारे खर्च हैं। इसलिए यह अपरिहार्य है कि किराया बढ़ाया जाए। हमें हर चीज का ध्यान रखना है।’

65 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाने पर बेंगलुरु में 11 इंदिरा कैंटीन बंद
रेवड़ी कल्चर के कारण कर्नाटक की कांग्रेस सरकार कर्जे में आकंठ डूब गई है। फ्री में सुविधा देने के वादे ने राज्य का ये हाल कर दिया है कि कांग्रेस अब अपने नेता राहुल गांधी की दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर शुरू इंदिरा कैंटीन भी चला नहीं पा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की फ्री रेवड़ी के कारण राज्य की कांग्रेसी सरकार के पास पैसे की तंगी है। इससे गरीबों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई इंदिरा कैंटीन भी आर्थिक संकट में आ गई है। कैंटीन के ठेकेदारों ने बिलों का भुगतान न होने के कारण बेंगलुरु में 11 इंदिरा कैंटीनों में भोजन परोसना बंद कर दिया है। बुधवार 17 जुलाई की रात से इन 11 कैंटीनों ने खाना परोसना बंद कर दिया है। कैंटीन ठेकेदार का कहना है कि ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) पर 65 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा है।

बकाया पैसे का भुगतान ना होने के कारण बंगलुरु के बसवनगुड़ी, पद्मनाभनगर, भैरसंद्रा, वीवी पुरम, सिद्दापुरा, होमबेगौड़ा नगर, जयानगर, विद्यापीठ, ईजीपुरा, अदुगोडी वार्ड में स्थित इंदिरा कैंटीन को बंद कर दिया गया है। इससे राज्य की कांग्रेसी सरकार की किरकिरी हो रही है। कांग्रेस अपने पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर शुरू पहल को भी ठीक से जारी रखने में असमर्थ है। जो इंदिरा कैंटीन बीजेपी शासनकाल में बंद नहीं हुई वो कांग्रेसी शासनकाल में पैसे की कमी के कारण बंद हो गई है।

नंदिन दूध के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार विकास के काम रोकने के बाद आम आदमी को महंगाई का झटका देने से भी गुरेज नहीं करती। कर्नाटक सरकार ने नंदिनी दूध के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया। अगर यह बढ़े हुए दाम दही, दूध पाउडर जैसे अन्य डेयरी प्रोडक्ट पर भी लागू होते हैं तो आम लोगों की परेशानी और भी बढ़ने वाली है।

कर्नाटक में बिजली दरें 2.89 रुपये प्रति यूनिट बढ़ीं
सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मुफ्त बिजली का वादा कर आम आदमी की जेब काटने का काम कर रही है। सरकार ने नागरिकों को 200 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा किया। साथ ही बिजली की दरें 2.89 रुपये प्रति यूनिट बढ़ा दी गई। अगर कर्नाटक के लोग 200 यूनिट स्लैब से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं तो उन्हें अब 2.89 रुपये प्रति यूनिट की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।

पेट्रोल 3 रुपए, डीजल 3.20 रुपए महंगी
कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए। सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 3 रुपए प्रति लीटर वहीं, डीजल के दाम में 3.20 रुपए का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी ‘कर्नाटक सेल्स टैक्स’ में बदलाव के बाद हुई है। क्योंकि राज्य सरकार ने बिक्री कर में 29.84 प्रतिशत और 18.44 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है।

कर्नाटक सरकार ने मोटर वाहन सहित अन्य की कीमतें बढ़ीं
मोटर वाहन कर : सरकार ने टैक्सियों, स्कूल वैन और बसों सहित वाणिज्यिक वाहनों पर कर बढ़ा दिया है। 15 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले वाहनों के लिए कर में 15 प्रतिशत की वृद्धि और 10-15 लाख रुपये की कीमत सीमा वाले वाहनों के लिए 9 प्रतिशत कर की वृद्धि की गई है। सरकार को इस टैक्स बढ़ोतरी से 472 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है।

कर्नाटक में विकास के काम पड़े हैं ठप
हालत यह है कि प्रदेश में विकास के काम ठप हैं और कांग्रेस फंड की कमी से चुनावी गारंटी को ही पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है। कांग्रेस सरकार ने गारंटी को पूरा करने के लिए दलित समाज के साथ भी धोखा किया है। उसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण योजनाओं के लिए निर्धारित 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए डायवर्ट कर दिया है।

सिद्धारमैया जब-जब आते हैं कर्ज बढ़ जाता है… लिखने पर टीचर सस्पेंड
जब-जब सिद्धारमैया की सरकार आती है, तब-तब राज्य पर कर्ज बढ़ जाता है। कर्नाटक में एक सरकारी टीचर की टिप्पणी चर्चा में है। इस फेसबुक कॉमेंट के बाद चित्रदुर्ग जिले के शिक्षक शांतामूर्ति एमजी को सस्पेंड कर दिया गया है। टीचर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि मुफ्त वादों पर अमल करने की वजह से राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला जाता है। इस पोस्ट में शांतामूर्ति ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल में (2013-18) के बीच कर्नाटक का कर्ज बढ़कर 2 लाख 42 हजार करोड़ तक पहुंच गया।