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बंगाल : आज़ादी के बाद पहली बार मना ‘पश्चिम बंग दिवस’; मोदी बोले- अब बेड़ियों से मिली मुक्ति, राज्य को दी 820 करोड़ की सौगात

   मोदी ने ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ पर बाबा तारकेश्वर की धरती से  दी 820 करोड़ की सौगात (साभार: नवभारत टाइम्स, एक्स @narendramodi)
जनसभाओं से लेकर राष्ट्रीय मंचों तक देश को आज़ादी दिलवाने के कसीदे पढ़ने वाली कांग्रेस और इसकी समर्थक वामपंथी पार्टी से लेकर ममता बनर्जी की TMC ने इतने साल बंगाल में राज किया, लेकिन कभी बंगाल
 का ‘पश्चिम बंग दिवस’ नहीं मनाया। फिर देशभक्ति की दुहाई देते फिरते हैं। धीरे-धीरे भारत विरोधियों की कठपुतली बनी पार्टियों की कलई खुलनी शुरू से बिलबिला रहे हैं। जो पार्टी राज्य का पावन  ‘पश्चिम बंग दिवस’ नहीं मनाए वह देशभक्त पार्टी नहीं हो सकती।   

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार 2 दिवसीय दौरे पर राज्य पहुँचे। उनके दौरे की शुरुआत हुगली जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले तारकेश्वर से हुई। यहाँ पहली बार आधिकारिक तौर पर आयोजित ‘पश्चिम बंग दिवस’ कार्यक्रम में PM मोदी ने हिस्सा लिया।

इस दौरान राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मंच पर मौजूद रहे। PM मोदी ने राज्य के लिए विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, किसानों के खातों में PM-किसान योजना की राशि जारी की और राजनीतिक व ऐतिहासिक संदर्भों पर भी अपनी बात रखी।

पहली बार आधिकारिक तौर पर मनाया गया ‘पश्चिम बंग दिवस’, इतिहास से जोड़ा गया आयोजन

नई राज्य सरकार ने 20 जून को आधिकारिक ‘पश्चिम बंग दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया। यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में विभाजन संबंधी प्रस्ताव पारित हुआ था। कार्यक्रम के लिए तारकेश्वर को चुना गया, जिसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

 अपने संबोधन में PM मोदी ने कहा, “इस बार पश्चिम बंग दिवस की यह तारीख और भी खास है। आजादी के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान आत्माओं ने जो परिकल्पना की थी। आज पहली बार हम पश्चिम बंग दिवस पर उन सपनों को सच्चाई में बदलते देख रहे हैं।”

मोदी ने आगे कहा, “यह ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास की प्रेरणा बने, हम एक नया और गौरवशाली इतिहास रचे। आज भाजपा-NDA सरकार में विकास के महाअभियान की शुरुआत हो रही है। मैं कामना करता हूँ कि ऐतिहासिक ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ राज्य के विकास के लिए प्रेरणा बने।”

तारकेश्वर मंदिर में पूजा, 820 करोड़ की परियोजनाएँ और रेलवे को बड़ा पैकेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारकेश्वर स्थित बाबा तारकनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद राज्य के लिए लगभग 820 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। इनमें रेलवे अवसंरचना पर विशेष जोर दिया गया और करीब 590 करोड़ रुपए रेलवे परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए।

इसी क्रम में हावड़ा में 99 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 300 बेड के नए डिवीजनल रेलवे अस्पताल का शिलान्यास भी किया गया। सरकार के अनुसार, यह अस्पताल रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

पीएम ने कहा, “बंगाल में दशकों तक पहले लेफ्ट और फिर TMC ने जो गड्ढे बनाए, उन्हें भरने के लिए डबल इंजन सरकार ने सुपरफास्ट गति से काम करना शुरू कर दिया है। बिजली की रफ्तार से फैसले हो रहे हैं। रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में आज यहाँ सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है।”

किसानों को पीएम-किसान की किस्त और नवद्वीप-पुरी रेल सेवा का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त भी जारी की। इसके तहत देश के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में कुल 18,880 करोड़ रुपए सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। इनमें पश्चिम बंगाल के 45 लाख से अधिक किसानों को 900 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिली।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के नवद्वीप और ओडिशा के पुरी के बीच नई सीधी रेल सेवा का भी उद्घाटन किया। माना जा रहा है कि इससे धार्मिक पर्यटन और दोनों राज्यों के बीच संपर्क को मजबूती मिलेगी।

कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और TMC पर हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “उस कठिन समय में कॉन्ग्रेस ने मजबूती से खड़े होने के बजाय घुटने टेक दिए थे। “उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के समय बंगाल को भारत से अलग करने की कोशिश हुई थी और उस दौर की घटनाओं को देश नहीं भूल सकता।
उन्होंने कहा, “बीजेपी की जीत के बाद राज्य में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है, अब बंगाल विकास, निवेश और भविष्य के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।” सभा में उन्होंने कहा, “बंटवारे के समय कॉन्ग्रेस ने बंगाल को अनाथ छोड़ दिया था और स्वतंत्रता के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिए, कितने त्याग सहे, 1946 में, कोलकाता में हुई हिंसा, कितने निर्दोष बंगाली लोग उसकी भेंट चढ़ गए। बंगाल ने रक्तपात सहा, अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता, पहचान को नष्ट नहीं होने दिया।”
उन्होंने कहा, “इसी का परिणाम था कि जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी, तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया। पश्चिमबंग दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं।”
अंत में उन्होंने योग दिवस का भी उल्लेख करते हुए कहा, “कल देश, दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना है। इस बार मैं बंगाल में ही योग दिवस का हिस्सा बनूँगा। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे योगियों की भूमि से जो संदेश जाएगा उससे पूरे विश्व का मार्गदर्शन होगा। मैं चाहूँगा कि इस बार बंगाल के कोने-कोने में योग दिवस के आयोजन हो।”