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‘मजहब’ के नाम पर फिदायीन बनते हैं, पर लिबरल-इस्लामी गैंग चाहता है कि ‘मजहब’ की बात न हो; अजित भारती द्वारा 'डॉक्टरों' की गिरफ्तारी पर बिलखती 'बुआओं' का धुंआधार रोस्ट, देखिए वीडियो

   दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी के वायरल वीडियो पर उदारवादी-मुस्लिम और इस्लामी कट्टरपंथी तिलमिलाए (फोटो साभार: NDTV)
कैसी अजीब विडंबना है कि इस्लाम के नाम पर आतंकवाद करेंगे लेकिन उनके गुर्गे कहते हैं इस्लाम का नाम मत लो। भारत में जयचन्दों की कभी कमी नहीं रही। एक ढूंढने निकलोगे हज़ार मिल जाएंगे। जयचन्द तो मर गया लेकिन अपने वंशज छोड़ गया। हिन्दू राज में जयचन्द चंद चांदी के टुकड़ों के लालच में मुग़ल आक्रांताओं को भारत में घुसा गया। खैर अब आतंकवादियों के साथ-साथ इन जयचन्दों का हिसाब होना शुरू हो चुका है। अगर आतंकी और उनके गुर्गे भारत को गजवा-ए-हिन्द बनाने का असफल प्रयास कर रहे हैं जब 2014 से पहले नहीं कर पाए तो अब क्या क्या करेंगे। 2014 चुनावों से पहले कोशिश तो बहुत हुई थी लेकिन तपस्वियों के तप ने उनके नापाक मंसूबे पूरे नहीं होने दिए। ये भारत ऋषि-मुनियों के तप की भूमि है। उसी तप ने सनातन की समर्पण किए वेद, पुराण, भागवत गीता, शास्त्र, उपनिषद, महर्षि वाल्मीकि ने रामायण, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत और  अनेकों महाकाव्य आदि।       

दिल्ली में लाल किला के पास धमाका करने वाले आतंकी उमर नबी का हाल ही में एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में उमर ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ यानी फिदायीन बनने को सही ठहरा रहा है। वह इसे ‘शहादत का ऑपरेशन’ बताकर पेश करता है। यह वीडियो उन उदारवादी-बुद्धिजीवियों और इस्लामी कट्टरपंथियों की आँखों पर ढकी उस सच्चाई को दिखाता है, जो दावा करती हैं कि ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ है। शायद इसीलिए ऐसे लोगों को वीडियो बाहर आने से परेशानी हो रही है।

आज(21 नवम्बर) को TimesNow नवभारत के अनुसार 7 महीनों में 40 करोड़ का लेन-देन होने के साथ-साथ बम बनाने के वीडियो बरामद हुए।   

ये लोग मीडिया पर इस वीडियो को प्रसारित करने के लिए सवाल उठा रहे हैं और चाहते हैं कि मजहब की बात न हो। वीडियो सामने आने पर मजहब के लिए फिदायीन बनने वाले उमर नबी का महिमामंडन करने में भी लगे कुछ कुछ इस्लामी कट्टरपंथी को यकीन नहीं हो रहा कि एक डॉक्टर इस तरह की चरमपंथी सोच में शामिल कैसे हो सकता है? वे आतंकवादी की मुस्लिम पहचान को अब भी नकार रहे हैं।

उमर नबी के वीडियो का अनुवाद

उमर नबी ने यह रोंगटे खड़े करने वाला वीडियो दिल्ली में धमाका करने से ठीक पहले रिकॉर्ड किया था। वीडियो में वह बिल्कुल प्रोफेशनल अंग्रेजी भाषा में बात कर रहा है। यह उस ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ का सबूत है, जिसका पिछले कई दिनों से जाँच एजेंसियाँ पर्दाफाश करने में लगी हुई हैं। फरीदाबाद, सहारनपुर से लेकर कश्मीर तक अब तक 5 से अधिक डॉक्टर पेशे आतंकी पकड़े जा चुके हैं।

वीडियो में उमर नबी कहता है, “आत्मघाती हमलों का सबसे अहम मुद्दा यह है कि जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि वह किसी तय समय और स्थान पर निश्चित रूप से मरने जा रहा है तो वह एक खतरनाक मानसिकता में चला जाता है। वह खुद को एक ऐसी स्थिति में रखता है, जहाँ वह मान लेता है कि मौत ही उसकी एकमात्र मंजिल है।”

उमर नबी आगे कहता है, “हकीकत यह है कि किसी भी लोकतांत्रिक और मानवीय व्यवस्था में ऐसी सोच या ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह जीवन, समाज और कानून तीनों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”

ऐसा पहली बार हुआ है जब आत्मघाती हमले के आतंकी का वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने से काफी लोगों को परेशानी तो हुई, लेकिन यह कहना गलत नहीं है कि ऐसे वीडियो समाज में फैलने चाहिए ताकि भारत का हर नागरिक इस्लामी कट्टरपंथी की सोच वाली ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले लोगों से बचकर रह सके। क्या पता ऐसे इस्लामी कट्टरपंथी हमारे आसपास ही घूम रहे हों।

लिबरल का ‘इस्लाम से आतंकी विचारधारा’ को ढकने की तमाम कोशिश

वहीं आतंकी उमर नबी की इस वीडियो पर कुछ लिबरल और बुद्धिजीवी तिलमिला गए। ऐसे लोगों ने वीडियो को ‘संवेदनशील’ बताया और आतंकी की छवि पर पर्दा डालने के साथ-साथ इस ‘इस्लाम’ से जोड़ने पर नाराजगी जाहिर की। यह उनका हमेशा वाला प्रोपेगेंडा है। जो सिर्फ ‘मुस्लिमों की हिंसा और क्राइम’ पर आम लोगों को भटकाने की कोशिश में लगे रहते हैं। ये लोग सबसे पहले मीडिया को निशाना बनाते हैं।

ऐसी ही एक इस्लामी कट्टरपंथी RJ सैयमा ने आतंकी उमर नबी की वीडियो सामने लाने वाली मीडियो को निशाना बनाया लेकिन ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले इस आतंकी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं लिखने से कतराई। सैयमा ने लिखा, “मेनस्ट्रीम न्यूज मीडिया आतंकी का वो वीडियो क्यों शेयर कर रहे हैं! ये बहुत ही विचलित करने वाला है और मैं सोच भी नहीं सकती कि इसे देखकर पीड़ितों के परिवारों पर क्या बीत रही होगी! सनसनीखेज TRP का ये दौर कितना विचलित करने वाला है! बिल्कुल निंदनीय।”

                                           सैयमा के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X- @_sayema)

यहाँ सैयमा की ही तरह द हिंदू (The Hindu) की डिप्टी एडिटर विजेता सिंह लिखती हैं, “उस आत्मघाती हमलावर का वीडियो पोस्ट करना बंद करो, तुम बस उसके जहरीले बयान को बढ़ावा दे रहे हो।”

 विजेता सिंह के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X-@vijaita)

इसी क्रम में लिबरल सोच वाली ऋचा द्विवेदी भी अपनाी ‘अलोकप्रिय राय’ लिखती हैं, “डॉक्टर से आत्मघाती हमलावर बने व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए और इसे निश्चित रूप से टेलीविजन पर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।”

                            ऋचा द्विवेदी के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X- @RichhaDwivedi)

कुछ इस्लामी कट्टरपंथी को वीडियो सामने आने से ‘असहज’ हो जाते हैं और सवाल करते हैं, “जब जाँच पूरी नहीं हुई है तो यह वीडियो, निगरानी फुटेज, जाँच संबंधी जानकारी आदि मीडियो को कौन दे रहा है?”   

                                         एक्स यूजर का स्कीनशॉट (साभार: @salman_sayyid)                                   

वहीं इन इस्लामी कट्टरपंथियों को यकीन नहीं होता कि आखिर एक डॉक्टर इस तरह की चरमपंथी सोच वाला कैसे हो सकता है। ये लोग ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ वाले मनगढ़ंत बयान को उछालने में लग जाते हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, “यह वीडियो एक स्पष्ट चेतावनी है कि आतंकवाद धर्म, शिक्षा या पेशेवर पृष्ठभूमि तक सीमित नहीं है। यह एक खतरनाक विकृति है, एक सामाजिक रोग है जो हमारे युवाओं के मन में घर कर गया है और हमारे समाज के ताने-बाने के लिए खतरा बना हुआ है।”

                            एक्स यूजर के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार: X- @tabishhaji)

इन लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों ने आतंकवाद एक धर्म तक सीमित नहीं है वाले प्रोपेगेंडा को बढ़ाने की तमाम कोशिश की। यहाँ तक कि मीडिया पर वीडियो उजागर करने को लेकर सवाल उठाया। ये लोग दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए 15 लोगों की जान गवाने वाले परिवारों का दर्द तो समझ रहे हैं लेकिन इस्लामी कट्टरपंथ से बढ़ते आतंक को नजरअंदाज कर देते हैं।

लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों का दोहरा सच

इससे यह साफ हो गया कि उमर नबी का वीडियो सामने आते ही लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों को जो बेचैनी दिखी, वह दरअसल उनकी अपनी दोहरी राजनीति का पर्दाफाश है। यह वही लोग हैं जो हर मंच पर सच दिखाने का दावा करते हैं लेकिन जैसे ही कोई वीडियो उनकी पसंदीदा कथाओं पर चोट करता है, तुरंत उसे छिपाने में लग जाते हैं।

आतंकी उमर नबी का वीडियो ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराता है, उसे इस्लाम में जरूरी बताता है और युवाओं को हिंसा की राह पर धकेलने के लिए प्रभावित करता है। लेकिन इस जहर पर इन कथित लिबरल की जुबान अचानक सिल जाती है। इनके लिए आतंक का समर्थन करने वाला ‘भटका हुआ नौजवान‘ होता है, जबकि यही लोग गुजरात दंगों में ‘बाबू बजरंगी’ के स्टिंग ऑपरेशन की क्लिप्स दुनिया को दिखाना चाहते हैं। क्योंकि वहाँ एजेंडा पूरा होता है।

ये वही लोग है जो हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर आंतकी बुरहान वानी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ कहकर भावनात्मक एंगल देते हैं और लेकिन ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले उमर नबी पर खामोश रहते हैं। उमर नबी का ठीक दिल्ली ब्लास्ट से पहले ‘सुसाइड-बॉम्बिंग’ पर वीडियो बनाने की यही वजह होगी, क्योंकि इन आतंकियों को पता है कि भारत के लिबरल इनके अपराध को ‘शहादत’ बताने के लिए अब भी बैठे हैं।

क्या पाकिस्तान का समर्थन करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को मुस्लिम बनने का मिला न्योता?: मिस्र के मौलाना का Video वायरल, कहा- अल्लाह को समर्पित हो जाओ ट्रंप

         अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएँ), मिस्र मौलना अल-अदावी (बाएँ) (साभार: Britannica/RT_com)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस्लाम मजहब कबूल करने का न्यौता मिला है। मिस्र के मौलाना अल-अदावी ने वीडियो में ट्रंप के लिए संदेश भेजा। वीडियो में मौलाना कहते हैं, ‘अल्लाह के आगे समर्पण करो और मोक्ष पाओ।’ अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। नेटिजन्स डोनाल्ड ट्रंप को नया मुस्लिम नाम दे रहे हैं।

वीडियो में अल-अदावी ने डोनाल्ड ट्रंप के नाम संदेश जारी कर उन्हें ‘महान अमेरिकी’ बताया। उन्होंने कहा, “अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाओ और तुम्हें मुक्ति मिलेगी। इस्लाम स्वीकार करो और अल्लाह तुम्हें दोगुना ईनाम देगा। अच्छे कर्म करो, अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि अल्लाह एक है और उसका कोई साझीदार नहीं है।”

 मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने ही ट्रंप को साम्राज्य दिया है और वही है जो इसे उनसे छीन सकता है। कहा, राष्ट्र या राष्टपति पद से धोखा मत खाओ, क्योंकि जो लोग तुमसे पहले आए थे वे मर चुके हैं। जॉनसन कहाँ है? निक्सन कहाँ है? कैनेडी कहाँ है?” अल-अदावी ने चेतावनी दी कि एक दिन ट्रंप को उनके कर्मों का फल मिलेगा, इसीलिए उन्हें अल्लाह की राह पर चलना चाहिए।

मौलाना ने ट्रंप से कहा है कि उन्हें अपने देश लौटकर लोगों को बताना कि अल्लाह के अलावा कोई नहीं है। वो कहता है, “इस्लाम को अपनाओ और मुक्ति पाओ। अल्लाह तुम्हें दोगुना इनाम देगा। मुसलमानों द्वारा तुम्हें दिए जाने वाले सबसे महान उपहार के साथ अपने देश लौटो। इस गवाही के साथ कि अल्लाह के अलावा कोई नहीं है, और यह कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।”

यह वीडियो डोनाल्ड ट्रंप के हाल में किए गए खाड़ी दौरे के बाद सामने आया है। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुँचे थे। राष्ट्रपति बनने का बाद यह उनका पहला विदेशी दौरान था। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कुछ मुस्लिम बहुल देशों को चुना।

ट्रंप के इस विदेशी दौरे के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप का जोरदार स्वागत किया जा रहा है। UAE पहुँचे ट्रंप के स्वागत की एक वीडियो काफी वायरल हुई, जिसमें सफेद कपड़े पहने महिलाएँ अपने बालों को हिला रही हैं। यह सऊदी अरब का सांस्कृतिक नृत्य है, जिसे अनोखा स्वागत बताया गया। वहीं, इस वीडियो को लेकर ट्रंप को ट्रोल भी किया गया।

सऊदी अरब के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति कतर पहुँचे थे, जहाँ कतर के अमीर ने उन्हें खुद दोहा एयरपोर्ट पर रिसीव किया। ट्रंप का स्वागत पारंपरिक ऊँटों और उनके रेड साइबर ट्रक के साथ किया गया, जो काफी चर्चा में रहा। इस दौरान ट्रंप की दिलचस्पी अरब संस्कृति में काफी अधिक दिखाई दी।

ट्रंप के अरब देशों में दौरे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग ट्रंप को मुस्लिम समर्थक होने का दावा कर रहे हैं। इसी दौरे के बाद मिस्र के मौलाना अल-अदावी ने ट्रंप को इस्लाम मजहब कबूल करने का न्यौता देने वाली वीडियो वायरल हुई।

वीडियो को रूस की मीडिया संस्था रशिया टाइम्स के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया गया है। इसके बाद से यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। हालाँकि यह साफ नहीं है कि यह वीडियो कब का है और किस मामले में बनाया गया है। लेकिन वीडियो में मौलाना राष्ट्रपति को इस्लाम अपनाने का आग्रह कर रहे हैं।

                   रूस की मीडिया रशियन टाइम्स द्वारा जारी की गई पोस्ट का कैप्शन (साभार: @RT_com)

वीडियो में ट्रंप की शपथ ग्रहण समारोह की एक क्लिप भी जोड़ी गई है, जिसमें वे प्रार्थना सभा में मुस्लिम अजान को ध्यान से सुनते दिखाई दे रहे हैं। इसका अर्थ माना जा रहा है कि ट्रंप इस्लाम से काफी प्रभावित हैं। वहीं, वीडियो पर काफी नेटिजंस चुटकी भी लेते नजर आ रहे हैं।

कुछ इस्लामी ने डोनाल्ड ट्रंप को मुस्लिम नाम भी दे दिया है। ट्रंप को दाऊद याह्या अल-ट्रंफी, डोनालडुद्दीन अब्दुल-बिन-ट्रंपुद्दीन-अमेरिकास्तानी, अबु मुहम्मद डोन-अल-उद्दीन ज़कारिया, मुफ्ती अल शेख अल ट्रंप जैसे मुस्लिम नाम रखने का सुझाव दिया जा रहा है। एक यूजर ने ट्रंप की मुस्लिम टोपी पहने फोटो भी शेयर की है।