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सबरीमाला मंदिर में आरिफ मोहम्मद खान ने किया दर्शन, भड़के सुन्नी नेता ने याद दिलाया शरिया

सेकुलरिज्म के नाम पर जनता को ठकने वाले हिन्दू नेताओं को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद के सबरीमाला मंदिर पर कट्टरपंथियों द्वारा भड़कने पर अपनी आंखें खोलनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा टोपी नहीं पहनने पर हंगामा मचाने वाले क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? कहाँ है उनका सेकुलरिज्म का ज्ञान? 
सुन्नी नेता अब्दुल हमीद फैजी अंबालाक्कदावु ने सबरीमाला मंदिर जाने के लिए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर हमला करते हुए कहा कि इस्लाम से बाहर जाने का रास्ता खुला हुआ है।

केरल के राज्यपाल की सबरीमाला यात्रा पर मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अंबालाक्कदावु ने कहा कि आरिफ मोहम्मद आरिफ खान ने सभी अनुष्ठानों का पालन किया था जो एक धर्मनिष्ठ हिंदू करते हैं। सुन्नी नेता ने कहा, “प्रिय दोस्तों, हमने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को हाल ही में सबरीमाला मंदिर में पूजा करते हुए देखा। हमने उन्हें सभी रस्मों को सच्चे रूप में करते हुए और इस तरह से उन्होंने इस्लाम से बाहर जाने का रास्ता खोल दिया है।”

 “राज्यपाल के नाम से यह धारणा बनेगी कि वह आस्था से मुसलमान हैं। उसके पास पैगंबर मुहम्मद का नाम है और आरिफ वह शब्द है जो उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो अल्लाह को बहुत करीब से जानता है।” अंबालाक्कदावु ने कहा, हिजाब पर राज्यपाल की टिप्पणी को किसी मुस्लिम द्वारा की गई टिप्पणी के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

विशेष रूप से, केरल के राज्यपाल ने कर्नाटक में हिजाब समर्थक आंदोलन के खिलाफ मुखर होकर कहा था कि अगर ‘हिजाब के अधिकार’ के तर्क को स्वीकार कर लिया जाता है तो मुस्लिम महिलाएँ हार जाएँगी। इसके अलावा, उन्होंने निहित स्वार्थों के लिए हिजाब मुद्दे का फायदा उठाने के लिए कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भी लताड़ा था।

आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ हमले को जारी रखते हुए, सुन्नी नेता ने आगे कहा कि राज्यपाल इस्लाम का उपहास कर रहे हैं कि यह उन्हें भाजपा में नए स्थान दिलाएगा। सुन्नी नेता ने कहा, “इस्लाम में एक शर्त है कि अगर कोई मुसलमान दूसरे धर्मों के पूजा स्थल पर जाता है, उनके रीति-रिवाजों का पालन करता है और उनकी तरह कपड़े पहनते हैं तो वह इस्लाम से बाहर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह एक निर्विवाद तथ्य है कि यदि कोई इस्लाम के मूल सिद्धांतों पर सवाल उठाता है, तो वह धर्म से बाहर हो जाएगा। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आरिफ मोहम्मद खान गैर-मुस्लिम या काफिर बन गए हैं। फतवे जारी करना धार्मिक विद्वानों पर निर्भर है। मैं केवल शरिया कानूनों की बात कर रहा हूँ।”

अंबालाक्कदावु ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि हिजाब और शरीयत के बारे में बोलने वाले खान इस्लामी विद्वान हैं या नहीं। उन्होंने अपने कामों से इस्लाम के बाहर जाने का काम किया है।

कट्टरपंथियों के रवैए से आहत मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर ने किया इस्लाम छोड़ने का फैसला

मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर (साभार: जानम टीवी)
सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 13 वीरों की वीरगति पर एक तरफ पूरा देश रो रहा है, तो दूसरी ओर कुछ कट्टर इस्लामी देश के असली हीरो के जाने पर अट्टाहास कर रहे हैं। इससे निराश केरल के मलयाली फिल्मों के फिल्म निर्देशक अली अकबर ने इस्लाम को छोड़ हिंदू धर्म में वापसी करने का ऐलान कर दिया है। फेसबुक लाइव पर निर्देशक ने कहा कि वे इस्लाम का परित्याग कर रहे हैं।

अली अकबर ने कहा कि सेना प्रमुख सीडीएस बिपिन रावत की वीरगति के बाद कई लोग फेसबुक पर जश्न मना रहे थे, जिसके विरोध में वो इस्लाम को ही छोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 दिसंबर 2021 को सीडीएस बिपिन रावत की मौत के बाद अकबर ने फेसबुक पर एक लाइव वीडियो शूट किया था, लेकिन फेसबुक ने उसे नस्लीय बताकर फिल्म निर्देशक के अकाउंट को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया। इसके बाद फिल्म निर्देशक ने दूसरा फेसबुक अकाउंट बनाया और उसके जरिए लाइव आकर इस्लाम छोड़ने का ऐलान कर दिया।

फेसबुक के जरिए सीडीएस रावत को श्रद्धांजलि देने वाले फिल्म निर्देशक ने कहा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए मैं अपना धर्म छोड़ रहा हूँ, न मेरा और न ही मेरे परिवार का कोई और धर्म है।” उन्होंने लाइव में कहा, “मैं उन कपड़ों का एक टुकड़ा फेंक रहा हूँ, जिनके साथ मैं पैदा हुआ था।” दरअसल, जब फिल्म निर्देशक ने सीडीएस रावत की वीरगति पर लाइव वीडियो बनाना शुरू किया तो कट्टर इस्लामियों ने उनके वीडियो पर हजारों की संख्या में लॉफिंग की इमोजी लगाकर इसका मजाक उड़ाया, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुईं।

इस मामले पर ट्विटर यूजर प्रतीश विश्वनाथ ने कहा कि मलयालम के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अली अकबर हिंदू धर्म अपना रहे हैं और अपना नाम बदलकर रामसिम्हन रख रहे हैं। इस्लाम की वर्तमान पीढ़ी को देखकर बहुत अच्छा लगा, जिनके पूर्वजों को बलपूर्वक परिवर्तित किया गया था, वे वापस जड़ों की ओर आ रहे हैं।