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‘सनातन का नाश होना चाहिए’: तमिलनाडु विधानसभा में बोले उदयनिधि स्टालिन-चुपचाप सुनते रहे ईसाई CM विजय; क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?

                            तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन और CM विजय (फोटो साभार: ANI)
तमिलनाडु में मिली करारी हार के बाद भी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का राजनीतिक अहंकार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन के खिलाफ जहर उगला है। सनातन धर्म को लेकर अपना पुराना बयान दोहराते हुए उन्होंने सनातन को खत्म करने की बात कही है।

स्टालिन को ज्ञान नहीं कि सदियों प्राचीनतम सनातन को ख़त्म करने पता नहीं कितने आये और गए कोई उनका नामलेवा भी नहीं। अभी स्टालिन के पाप का घड़ा भरा नहीं है। जिस दिन भर जाएगा शायद इनका अपना परिवार ही इसे अपनाने से मना कर दे। सनातन विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। यह अडिग और अमर है और रहेगा। अब जो कालचक्र चल रहा है। जिस दिन बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी हिन्दू और सनातन एकजुट हो गया राज्य के इतिहास में भी इनका कोई नामलेवा नहीं मिलेगा। क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?    

तमिलनाडु के नवनिर्वाचित ईसाई मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की मौजूदगी में मंगलवार (12 मई 2026) को विधानसभा को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “सनातन, जिसने लोगों को बाँटा है। उसका नाश होना चाहिए।”

यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन के खिलाफ जहर उगला हो, इससे पहले भी वो सनातन को खत्म करने की बात कह चुके हैं। इस साल की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सनातन धर्म पर उनकी 2023 की टिप्पणी को हिंदू समुदाय के खिलाफ ‘हेट स्पीच’ माना था।

तमिलनाडु सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री रहते हुए सितंबर 2023 में उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म का सिर्फ विरोध नहीं बल्कि उसका पूरी तरह नाश होना चाहिए।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपने बयान का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बाँटता है। उन्होंने कहा था कि मानवता और समानता के लिए सनातन धर्म को ‘जड़ से खत्म’ करना जरूरी है।

इसके बाद जनवरी 2026 में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने त्रिची सिटी पुलिस द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था। यह FIR उदयनिधि के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप में दर्ज की गई थी। जस्टिस एस श्रीमथी ने तब कहा था कि उदयनिधि का कथित बयान स्वयं ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में आता है, ऐसे में उस पर सवाल उठाने को अपराध नहीं माना जा सकता है।