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दिल्ली : शराब और पानी घोटाले के बाद अब शुगर घोटाला : क्या घोटालों की जानकारी न दिए जाने पर सख्ती से बचने के लिए ड्रामा किया जा रहा है? पत्नी सुनीता परहेजी खाना न भेज क्यों अपने सुहाग की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रही है?क्या सुनीता को पति की ज़िंदगी प्यारी नहीं?

क्या बीजेपी के कंधे बन्दूक रख सुनीता को निशाना बनाया जा रहा है? 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। जेल से बाहर आने के लिए तरह-तरह के तिकड़म अपनाए जा रहे हैं। अब पता चला है कि जमानत के लिए उन्होंने एक नया हथकंडा अपनाया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपने नियमित डॉक्टर से सलाह लेने की केजरीवाल की याचिका दायर पर सुनवाई के दौरान ईडी ने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को टाइप-2 डाइबिटीज है, लेकिन वह तिहाड़ जेल में आलू-पूड़ी, आम और मीठा खा रहे हैं। ईडी ने कहा है कि वह ऐसा जानबूझकर रहे हैं, जिससे कि उनका शुगर लेवल बढ़े और उन्हें मेडिकल के आधार पर जमानत मिल जाए। ईडी ने यह भी कहा है कि वह विशेष रूप से मीठा भोजन खा रहे थे। जिसकी किसी भी मधुमेह रोगी को अनुमति नहीं है। 

मधुमेह या कोई षड़यंत्र? 

केजरीवाल के तिहाड़ जाने के बाद से पार्टी में मुख्यमंत्री बनने की होड़ मची हुई है। शायद इसीलिए केजरीवाल मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ रहे। इसके पीछे भी एक गहरी साज़िश होने की शंका है। क्योकि केजरीवाल परिवार में ही कुर्सी रखना चाहते हैं। शायद इसी लिए केजरीवाल ने तिहाड़ जाते समय आतिशी और सौरभ का नाम लेकर कुर्सी से दूर करना चाहा हो? यह भी चर्चा है कि पार्टी में कुर्सी की भगदड़ मचती देख केजरीवाल सुनीता के लिए मुख्यमंत्री का रास्ता साफ करने पर आतिशी और सौरभ के नामों पर मोहर लगाकर इन दोनों को भी तिहाड़ में आने के मजबूर न कर दे। 

ऐसे में तिहाड़ प्रशासन को सख्त कार्यवाही करते हुए घर से आने वाले भोजन की जाँच करनी चाहिए। तिहाड़ प्रशासन क्या सो रहा है? जब किसी भी मधुमेह रोगी को तली चीजें, तेज मसाले, आलू, चुकंदर, मीठी चाय/कॉफ़ी, आम, खरबूजा, तरबूज, और किसी प्रकार का मिष्ठान मना होता है, फिर क्यों पूरी, आलू की सब्जी, आम आदि घर से आने पर किसी भी अनहोनी के होने में तिहाड़ प्रशासन और केजरीवाल की पत्नी के बीच किसी षड़यंत्र को रचे जाने की शंका हो सकती है। संभव हो वह शंका निराधार हो, फिर भी ED, CBI, जेल प्रशासन और कोर्ट्स आदि को सचेत रहने की जरूरत है। किसी उन्होने के होने पर ये सब सवालों के घेरे में आएंगे।  

तब घर का खाना की इजाजत देने वाली कोर्ट भी इन्ही सवालों का जवाब मांगेगी। वास्तव में अगर केजरीवाल मधुमेह रोगी है, फिर पत्नी से पूछना चाहिए कि क्यों बदपरहेजी खाना भेजा जा रहा है? क्या इसके पीछे कोई गहरा षड़यंत्र है? दिल्ली मंत्री आतिशी मार्लेना से पूछना चाहिए कि तिहाड़ जेल और बीजेपी को आरोपित करने से पहले अपने आका की पत्नी से क्यों नहीं पूछती कि जिस मधुमेह रोगी को 50 यूनिट insulin जाती हो, क्यों आलू की सब्ज़ी, पूरी और आम आदि क्यों भेज रही हो? क्या षड़यंत्र रच रही हो? मंत्री आतिशी को अपने पद की गरिमा बनाए रखने के लिए उप-राज्यपाल और तिहाड़ प्रशासन को केजरीवाल को मिलने ऐसे भोजन को तुरंत रोक, मधुमेह रोगी को दिए जाने वाला भोजन दिया जाये।      

सवाल यह है कि जब आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को शुगर और बीपी है तो उन्हें घर से इस तरह का खाना क्यों भेजा जा रहा है? डाइट चार्ट से ये भी पता चलता है कि केजरीवाल नियमित रूप से आलू-पूड़ी, केला, आम और मीठा खा रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल से जुड़ी ये खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। लोग इसी के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

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क्या आप जानते है कि केला और नारियल का पूजा पाठ में खास स्थान क्यों है?


सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य में नारियल और केला को प्रयोग करना का बहुत ही गूढ़ रहस्य है। क्योकि 
नारियल और केला ये दो ही ऐसे फल है जो किसी के जूठे बीज से उत्पन्न नही होते, मतलब अगर हमे आम का पेड़ लगाना है तो हम आम को खाते है और उसके बीज या गुठली को जमीन में गाड़ते है तो वह पौधे के रूप में उगता है,या फिर ऐसे ही गुठली निकाल के लगा दे तो भी वह उस पेड़ का बीज(जूठा या अंग) ही हुआ, लेकिन केले का या नारियल का पेड़ लगाने को केवल जमीन से निकला हुआ पौधा(ओधी) ही लगाते है, जो की खुद में ही पूर्ण है,न किसी का बीज न हिस्सा, न जूठा,इसलिए भगवान को सम्पूर्ण फल अर्पित किया जाता है।

यदि हम दूसरा फल खाकर उसके बीज फेंक दें तो वह फिर से पौधे के रूप में विकसित हो जाएगा। लेकिन अगर हम नारियल के छिलके को खाने के बाद फेंक देते हैं, अगर हम केले को या तो बाहरी छिलके को हटाकर या उसके बिना फेंक देते हैं, तो वह फिर कभी नहीं उग पाएगा। यह मुक्ति/मोक्ष अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है जो कि सामाजिक मुक्ति की अंतिम अवस्था है, बार-बार पुनर्जन्म से मुक्ति। इस प्रकार हम भगवान से हमें मुक्ति राज्य प्रदान करने की कामना के लिए इन्हें अर्पित कर रहे हैं।

यह भी लगभग ऊपर वाले जैसा ही थोड़ा सा है। चूंकि नारियल और केला कभी भी हमारे द्वारा खाने के बाद फेंके गए बीजों से नहीं बन सकते, इसलिए उन्हें किसी भी तरह से मानव लार के संपर्क के बिना शुद्ध माना जाता है। इसलिए इन्हें सबसे शुद्ध फल के रूप में भगवान को अर्पित किया जाता है।

पूजा में बजने वाली घंटी और शंख की ध्वनि का भी सनातन में बहुत महत्व है। यह ध्वनि जितनी दूर जाएगी, असुर उतने ही दूर होते हैं। फिर हवन से होने वाले धुएं का भी अपना महत्व है, आज कल लोग धुएं को घर से बाहर निकालने के लिए एग्जॉस्ट को खोल देते हैं, जो सनातन धर्म गलत है। धुआं जितना देर घर में रहेगा वह कोने-कोने से शैतानी ताकतों को समाप्त करता है। क्योकि हवन करने इतने मन्त्रों का उच्चारण किये जाने से शैतानी हवाएं पस्त होती है और हवन किये जाने का उद्देश्य पूर्ण होता है। इसीलिए कहते है हवन द्वारा घर परिवार की शुद्धि। पूजा में कपूर के जलाये जाने का भी धार्मिक ही नहीं पारिवारिक दृष्टि में बहुत महत्व है।

हमारे पूर्वज कितने ज्ञाता थे,जो चीजे हमे आज तक पता नहीं वो पहले से जानते थे और उसका जीवन में इस्तेमाल कर जीवन पद्दति में ढाल लिए थे,जो हमे परंपरा से प्राप्त हुआ है,केवल हम उन्हे इस्तेमाल करते गए पर उनकी क्यों और क्या महत्ता है ये कभी भी जानने की कोशिश नही किये