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उमर खालिद को पत्र लिखने वाले कट्टरपंथी ज़ोहरान ममदानी हिम्मत है तो नारा लगा "Washinton/America तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह", फिर देख तमाशा

लोकतंत्र में हर चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं होता, कई बार वह भविष्य की चेतावनी भी होता है। न्यूयॉर्क जैसे शहर का मेयर बनना केवल एक नगर निगम पद नहीं है, यह वैश्विक राजनीति की प्रयोगशाला में प्रवेश का टिकट होता है। यही वजह है कि जोहरान ममदानी का सत्ता में आना केवल अमेरिका की आंतरिक घटना नहीं रह गया, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया में राजनीतिक चिंता का विषय बन गया है।
भारत की न्यायपालिका पर कटघरे में खड़ा करने वाले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान क्वामे ममदानी का दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद को लिखे पत्र का अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए, वरना वह दिन दूर नहीं जब यही कट्टरपंथी अमेरिका को पाकिस्तान या बांग्लादेश बनाने का मौका नहीं चुकेगा। भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसे गंभीरता से लेकर ट्रम्प को लिखना चाहिए। मोदी और ट्रम्प को ममदानी के इस पत्र को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को भी संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए।   

अमेरिका के सबसे बड़े और प्रभावशाली शहर न्यूयॉर्क की मेयर की कुर्सी पर बैठते ही जोहरान क्वामे ममदानी ने ऐसा कदम उठाया है, जो न केवल विवादास्पद है, बल्कि भारत के लिए सीधी चुनौती जैसा लगता है। 1 जनवरी को शपथ लेने के ठीक अगले दिन उनका एक हैंडरिटन पत्र सामने आया, जो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद विवादित कार्यकर्ता उमर खालिद के नाम लिखा गया था। इस पत्र ने भारत में आग की तरह फैलते गुस्से को और भड़का दिया है। कई लोग इसे ममदानी की भारत विरोधी मानसिकता का खुला प्रमाण बता रहे हैं।

जोहरान ममदानी खुद को प्रोग्रेसिव और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट कहता है, लेकिन उसके पहले ही कदम से साफ लगता है कि उसकी प्राथमिकता में सेलेक्टेड चीजे हैं। यानी उसके मुद्दे बहुत सोच-विचार के चुने हुए हैं, खासकर जो मुस्लिम पहचान और कथित इस्लामी पीड़ितों से जुड़े हों।

ममदानी के मेयर बनने के बाद ही क्यों सामने आया उमर खालिद को लिखा पत्र?

कोई भी नया निर्वाचित नेता आम तौर पर शहर की समस्याओं से शुरुआत करता है। अपने शहर की आवास, ट्रांसपोर्ट, अपराध, शिक्षा से जुड़ी समस्या। लेकिन ममदानी ने ऐसा नहीं किया। बल्कि ममदानी ने सत्ता संभालते ही भारत से जुड़े एक अत्यंत विवादित मुद्दे या यूँ समझें कि आतंकवादी को चुना। वो है दिल्ली की जेल में बंद उमर खालिद।

यह कोई संयोग नहीं था। यह एक सोचा-समझा राजनीतिक संकेत था। जोहरान ममदानी जानता था कि उमर खालिद का नाम भारत में किस तरह ध्रुवीकरण पैदा करता है। UAPA जैसे कानून, देशद्रोह के आरोप, दंगे, हिंसाये सब ऐसे विषय हैं जिन पर भारत की न्यायिक प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है। इसके बावजूद एक अमेरिकी मेयर का इस मुद्दे पर टिप्पणी करना साफ बताता है कि उसका मकसद ‘मानवाधिकारट से ज्यादा ‘वैश्विक पहचान’ बनाना था।

यह कहानी सिर्फ वामपंथ की नहीं, बल्कि उस वैचारिक इस्लामी राजनीति की है, जो अब लोकतांत्रिक संस्थानों के भीतर घुसपैठ कर रही है।

वामपंथी या इस्लामी… ममदानी की असली पहचान क्या?

जोहरान ममदानी खुद को वामपंथी कहता है। लेकिन दुनिया जानती है कि आधुनिक वामपंथ अब केवल आर्थिक असमानता की लड़ाई नहीं रह गया। यह पहचान की राजनीति में तब्दील हो चुका है, जहाँ धर्म, जाति और नस्ल को हथियार बनाया जाता है। ऐसे में ये सवाल उठने स्वाभाविक हैं कि अगर ममदानी सिर्फ वामपंथी है, तो उसकी संवेदनशीलता बार-बार केवल इस्लामी मुद्दों पर ही क्यों दिखती है? अगर वो मानवाधिकारों का पैरोकार है, तो चीन के उइगर, पाकिस्तान के बलूच, बांग्लादेश के हिंदुओं पर उसकी आवाज़ क्यों खामोश रहती है? यही सेलेक्टिव नैतिकता ही असली समस्या है।

कुरान हाथ में लेकर शपथ को मानें उसका राजनीतिक संदेश

अमेरिका में किसी भी धार्मिक ग्रंथ पर शपथ लेना कानूनी रूप से गलत नहीं है। लेकिन राजनीति में प्रतीक कभी मासूम नहीं होते। ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेना सिर्फ निजी आस्था नहीं था, बल्कि वह एक सांस्कृतिक संदेश था। यह संदेश न्यूयॉर्क के मतदाताओं से ज्यादा वैश्विक इस्लामी राजनीति के लिए था कि सत्ता के केंद्रों में ‘हमारा आदमी’ पहुँच चुका है।

यही वह बिंदु है जहाँ मजहब निजी नहीं रह जाता, बल्कि राजनीतिक हथियार बन जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममदानी ने हाल ही में एक पत्र लिखकर खालिद के अम्मी-अब्बू को सौंपा। पत्र में लिखा है, “प्रिय उमर, मैं अक्सर तुम्हारे कड़वाहट न अपनाने वाले शब्दों के बारे में सोचता हूँ। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हम सभी तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं।”

यह छोटा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और भारतीय मीडिया में सुर्खियाँ बटोर रहा है। सवाल यह है कि न्यूयॉर्क के मेयर को भारत के आंतरिक मामलों में इतनी दिलचस्पी क्यों? पद संभालते ही शहर की समस्याओं क्राइम, हाउसिंग, ट्रैफिक की बजाय दिल्ली जेल के एक कैदी को पत्र लिखना क्या संयोग है या सोचा-समझा प्रोपेगेंडा?

UAPA केस में मुख्य साजिशकर्ता है उमर खालिद

उमर खालिद का मामला कोई साधारण नहीं है। पूर्व जेएनयू छात्र खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश के लिए गिरफ्तार किया गया। उन पर यूएपीए जैसे सख्त कानून लगे, जिसमें देशद्रोह और आतंकवादी गतिविधियों के आरोप हैं। सरकार के पास सबूत हैं कि दंगे भड़काने में उनकी भूमिका थी। पाँच साल से ज्यादा जेल में हैं, ट्रायल शुरू नहीं हुआ। उनके समर्थक इसे राजनीतिक बदला बताते हैं। हालाँकि वो ऐसे व्यक्ति सैयद कासिम रसूल इलियास का बेटा है,जो प्रतिबंधित आतंकी संगठन SIMI से जुड़ा हुआ था।

भारत पर क्यों साध रहा निशाना?

भारत आज उभरती वैश्विक शक्ति है। भारत का लोकतंत्र, उसकी न्यायपालिका और उसके कानून अंतरराष्ट्रीय वामपंथी और इस्लामी नैरेटिव के लिए असहज हैं। फिर UAPA जैसे कानून इसीलिए भी निशाने पर रहते हैं क्योंकि वे ‘पीड़ित’ और ‘अल्पसंख्यक’ की उस कहानी को तोड़ते हैं, जिसे वैश्विक मंच पर बेचा जाता है।
ऐसे में ममदानी का भारत पर फोकस इसी रणनीति का हिस्सा है। भारत को ‘असहिष्णु’ दिखाओ, उसकी संस्थाओं पर सवाल उठाओ और फिर खुद को नैतिक ऊँचाई पर खड़ा करो।

भारत और हिंदुओं को पहले भी बनाता रहा है निशाना

मेयर जोहरान ममदानी का राजनीतिक करियर उसके तीखे और विवादास्पद बयानों के कारण भी चर्चा में रहा है। वो न सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ आग उगलता रहा है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधता रहा है। उसने पीएम मोदी को युद्ध अपराधी तक कहा था, वो भी अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही। वो अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को ‘मस्जिद के विध्वंस का उत्सव’ और ‘हिंदुत्व फासीवाद’ का प्रतीक बता चुका है।

न्यूयॉर्क से आगे की तैयारी?

यह मानना भोलापन होगा कि ममदानी सिर्फ मेयर बनकर संतुष्ट हो जाएगा। न्यूयॉर्क अमेरिकी राजनीति की सीढ़ी है, मंज़िल नहीं। इतिहास गवाह है कि जो न्यूयॉर्क जीतता है, वह राष्ट्रीय राजनीति की दहलीज़ पर पहुँच जाता है। आज वो भारत पर बोल रहे हैं, कल वो अमेरिका की विदेश नीति पर प्रभाव डालना चाहेगा। भले ही आज वो ‘मानवाधिकार’ की बात कर रहा है, लेकिन कल उसकी बोली इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव से अलग ही जहरीली हो चुकी होगी।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ममदानी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, मुस्लिम और प्रोग्रेसिव वोट बैंक को मजबूत करके। अमेरिका में मुस्लिम नेता जैसे इल्हान उमर, रशीदा तलीब पहले से हैं और ममदानी उन कट्टरपंथियों का नेक्स्ट जेन वर्जन लगते हैं।

मेयर बनते ही पत्र का सामने आना कोई साधारण बात नहीं

जोहरान ममदानी का पत्र अकेला नहीं। ठीक इसी समय आठ अमेरिकी सांसदों ने भारत के राजदूत को पत्र लिखकर खालिद को बेल और निष्पक्ष ट्रायल की माँग की। ये सांसद डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव विंग से हैं, जो अक्सर भारत पर मानवाधिकार के नाम पर दबाव बनाते हैं। खालिद के पैरेंट्स की इनसे मुलाकात भी हुई थी।
ममदानी और इन सांसदों के पत्र की टाइमिंग संदेह पैदा करता है। क्या यह संयोग है कि मेयर बनते ही ममदानी ने यह कदम उठाया? विश्लेषक इसे खुद को मुस्लिम दुनिया में हीरो बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

क्या ममदानी वाकई भारत के लिए बन सकता है खतरा?

भारत के लिए तो जरूर चिंता की बात है। एक विदेशी मेयर का भारत के कानूनी मामलों में दखल खासकर ऐसे व्यक्ति के लिए जो गंभीर आरोपों में जेल में है, विदेशी हस्तक्षेप जैसा लगता है। न्यूयॉर्क के बदलते डेमोग्राफिक्स, बढ़ते मुस्लिम और प्रोग्रेसिव वोटर ने उसे जिताया, लेकिन इससे अमेरिका में इस्लामी राजनीतिक ताकतें मजबूत हो रही हैं। अगर ममदानी आगे बढ़े, तो भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
भारत को, अमेरिका को और दुनिया को यह समझना होगा कि आज की राजनीति में सबसे खतरनाक चीज बंदूक नहीं, बल्कि नैरेटिव है। और जो नेता सत्ता में आते ही नैरेटिव युद्ध शुरू कर देता है, वह सिर्फ एक शहर का मेयर नहीं रह जाता, वह एक वैश्विक एजेंडा बन जाता है।


अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द हो; दिल्ली ब्लास्ट से जाँच के घेरे में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी, विवादित है इसका चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी

अल फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी (फोटो साभार: File/Al Falah University)
         
दिल्ली में लाल किले के सामने सोमवार(10 नवंबर 2025) को बड़ा धमाका हुआ, जिससे पूरा देश दहल गया। मिनटों में जाँच एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और उस ब्लास्ट की जाँच शुरू की जिसमें कम से कम 13 लोगों की जान गई।

जिस तरह अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम आतंकवादियों और अन्य विवादों के साथ जुड़ने की वजह से इसकी मान्यता रद्द करने की मांग भी उठ सकती है।  

जल्दी ही दिल्ली लाल किला ब्लास्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का लिंक सामने आया, क्योंकि धमाका करने वाला आतंकवादी उन तीन मेडिकल डॉक्टर्स का साथी था जो यूनिवर्सिटी से जुड़े थे और हरियाणा पुलिस व जम्मू-कश्मीर पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार हुए थे। पुलिस ने दिल्ली ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले गिरफ्तार डॉक्टर्स से जुड़े ठिकानों से 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद किए थे।

यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो (डॉ) भूपिंदर कौर ने आखिरकार बयान दिया कि यूनिवर्सिटी का पकड़े गए टेरर मॉड्यूल से कोई लिंक नहीं है, लेकिन यूनिवर्सिटी के चांसलर और फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी चुप रहे। हैरानी की बात है कि सिद्दीकी का डिजिटल फुटप्रिंट लगभग नहीं है।

ऑपइंडिया ने चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी पर उपलब्ध जानकारी खँगाली और कुछ परेशान करने वाला इतिहास मिला। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर ज्यादा जानकारी नहीं है। ‘अबाउट’ सेक्शन में लिखा है, ‘मैनेजिंग ट्रस्टी: अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट 1995 से अब तक, चांसलर: अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद 2014 से अब तक, मैनेजिंग डायरेक्टर: अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड 1996 से अब तक।’

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

ऑपइंडिया को मिल्ली गजट की जुलाई 2000 की रिपोर्ट में लिखा मिला कि जवाद अहमद सिद्दीकी नाम का शख्स अपने दो भाइयों के साथ तिहाड़ जेल में था क्योंकि अल-फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में निवेशकों को ठगा था। कंपनी की जानकारी देखी तो पता चला कि वो 1992 में रजिस्टर्ड हुई और स्टेटस ‘स्ट्राइक ऑफ’ है, यानी कंपनी बंद हो चुकी है।

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

जौबाकॉर्प पर उपलब्ध जानकारी से पता चला कि कंपनी का सिर्फ एक डायरेक्टर था, जवाद अहमद सिद्दीकी।

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सिद्दीकी के पुराने डायरेक्टोरियल एसोसिएशन से अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का लिंक मिला। सिद्दीकी मार्च 2019 तक इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

                                                                                                                                 सोर्स: लिंक्डइन

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की और जानकारी देखी तो दो पुराने डायरेक्टर मिले, जवाद अहमद सिद्दीकी और सऊद अहमद सिद्दीकी।

                                                                                                                               सोर्स: लिंक्डइन

ये जानकारी जरूरी थी क्योंकि जब ऑपइंडिया ने मिली गजट में बताए केस को देखा, तो दो नाम थे- जवाद और सऊद। इस केस पर बाद में आएँगे।

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन जोड़ने के लिए कंपनी का पता चेक किया। वो था ‘अल-फलाह हाउस, 274-ए, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली।’

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ये वही पता है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर है।

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हमने ‘jasiddiqui@rediffmail.com’ ईमेल से भी कनेक्शन जोड़ा, जो यूनिवर्सिटी प्रोफाइल वाली कई वेबसाइट्स पर ऑफिशियल ईमेल के तौर पर लिस्टेड है।

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यूनिवर्सिटी के भारत एजुकेशन पेज पर सिद्दीकी और फरदीन दोनों के ईमेल हैं।

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ये ईमेल आईडी अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के जौबाकॉर्प पेज पर भी है, वही कंपनी जो फ्रॉड में शामिल थी।

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साफ है कि जो शख्स गिरफ्तार हुआ और लंबे समय तिहाड़ जेल में रहा, वही जवाद अहमद सिद्दीकी है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी चला रहा है।

कंपनी के मौजूदा डायरेक्टर हैं सुफयान अहमद सिद्दीकी और फरदीन बेग। सुफयान अहमद सिद्दीकी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, फरदीन बेग अल-फलाह यूनिवर्सिटी में टीचर हैं और एंटी-रैगिंग कमिटी के मेंबर भी।

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हमारी रिसर्च में पता चला कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी 2 मई 2014 को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी (अमेंडमेंट) एक्ट, 2014 से स्थापित की गई, जो हरियाणा विधानसभा ने पास किया। यूजीसी से 5 जनवरी 2015 को सेक्शन 2(एफ) और 12(बी) के तहत मान्यता मिली। एक्सपर्ट कमिटी बनी और इंस्पेक्शन विजिट 29-30 मई 2015 को हुई। बाद में कमियों को पूरा करने पर यूजीसी ने मान लिया।

जवाद अहमद सिद्दीकी 2 साल से ज्यादा जेल में रहा

अब उस केस पर आते हैं, जिसके लिए उसे तिहाड़ भेजा गया था। ऑपइंडिया को दिल्ली हाई कोर्ट का 27 मार्च 2003 का जजमेंट मिला, जो जस्टिस आरसी चोपड़ा ने सुनाया था। कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, 2000 में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुई थी आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 468, 471 और 120(बी) के तहत। केस इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, क्राइम ब्रांच, नई दिल्ली को भेजा गया।

केस डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, जवाद सिद्दीकी अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर थे, और सऊद सिद्दीकी (अल-फलाह एजुकेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर में से एक) उसका डायरेक्टर था। पिटिशनर्स और उनके साथी आरोपियों ने ढेर सारे निवेशकों को अपनी कंपनीज में डिपॉजिट करवाया। कोर्ट ने नोट किया कि उन्होंने 7.5 करोड़ रुपये की रकम गबन की। शिकायत केआर सिंह ने की थी, जिन्हें 95 लाख रुपए का चूना लगाया गया था।

जजमेंट में लिखा था, “आरोप है कि पिटिशनर्स ने ढेर सारे लोगों को अपनी ग्रुप कंपनीज में डिपॉजिट करवाया लेकिन बाद में उनके सिग्नेचर फर्जी करके और डॉक्यूमेंट्स बनाकर उन डिपॉजिट्स को अपनी कंपनीज के शेयर्स में बदल दिया।”

जाँच और एफएसएल रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि निवेशकों के सिग्नेचर फर्जी थे। डिपॉजिट कुछ ऐसी कंपनीज के नाम पर लिए गए जो कभी थीं ही नहीं। फिर पैसा आरोपितों के पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर हो गया। जब कोर्ट ने ये जजमेंट पास किया, तब तक जवाद 37 महीने और सऊद 38 महीने जेल में थे।

ट्रिब्यून की जून 2004 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1995 में अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज ने अल-फलाह सहकारी आवास समिति बनाई। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 1996 में समिति को 10,000 स्क्वायर मीटर अलॉट किए, जहाँ मेंबर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए 100 फ्लैट्स बनाने थे। लेकिन कुछ फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से कंस्ट्रक्शन नहीं हुआ और जवाद वगैरह गिरफ्तार हो गए।

जवाद जेल में थे, तब उनके कुछ साथियों ने उन्हें ठगा और उनके सिग्नेचर फर्जी करके 13 करोड़ में कुछ फ्लैट्स बेच दिए। ट्रिब्यून रिपोर्ट में उनकी गिरफ्तारी की खबर छपी थी, जिसमें आरोपित थे एसपी यादव, मंजूर हसन जैदी और संजीव श्रीवास्तव।

जवाद अहमद सिद्दीकी को लेकर ये खुलासे अल-फलाह यूनिवर्सिटी चलाने वालों की विश्वसनीयता और बैकग्राउंड पर गंभीर सवाल उठाते हैं। फ्रॉड और फॉर्जरी के पुराने आरोपों से लेकर टेरर मॉड्यूल से जुड़ा विवाद तक, पैटर्न ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खुद को चल रही जाँच से अलग कर लिया है, लेकिन अल-फलाह की लीडरशिप को संदिग्ध फाइनेंशियल और क्रिमिनल गतिविधियों से जोड़ने वाले सबूत बताते हैं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके मैनेजमेंट की तेजी से गहरी जाँच जरूरी है।

                                                                                                   (साभार :सभी ग्राफ चित्र OpIndia) 

दिल्ली : तिहाड़ में सरेंडर करने के आधे घंटे बाद केजरीवाल को कोर्ट ने 5 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा

 


दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने रविवार (2 जून, 2024) को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया। चुनाव प्रचार के लिए मिली उनकी अंतरिम जमानत रविवार को खत्म हो रही थी। इससे पहले उन्हें किसी भी अदालत से राहत नहीं मिली थी। उनके सरेंडर के बाद खबर आई कि उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जेल जाते-जाते उन्होंने कहा- “मैं देश बचाने के लिए जेल जा रहा हूँ। मुझे नहीं पता कब वापस आऊँगा। वहाँ मेरे साथ क्या-क्या होगा, मुझे नहीं पता।”

संवैधानिक पद पर रहते और संविधान की शपथ लेने वाला अरविन्द केजरीवाल किस तरह इन दोनों को अपमानित कर अपनी शान समझ रहे हैं, जो इस बात साबित कर रहा है कि वह एक तानाशाह बन घोटाले कर ईमानदारी की चोला ओढे घूम जनता को भ्रमित कर रहा है। क्यों नहीं जेल जाने से पहले अपने पद से इस्तीफा दिया? यह भी कोई गहरा षड़यंत्र लगता है। जेल जाते समय दिए भाषण में घोटाले के आरोप में हुए गिरफ़्तारी को देश में तानाशाही के विरुद्ध बताया। यानि न खाता न बही, जो केजरीवाल कहे वही सही। अगर इतने ईमानदार हो तो फिर अपने electronic devices का पासवर्ड क्यों नहीं दे रहे? केजरीवाल और परिवार अच्छी तरह जानता है कि पासवर्ड देकर electonic devices के खुलने से अन्य घोटालेबाज़ों के नाम आने के अलावा शायद पूरा परिवार के भी नाम सामने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है।   

दिल्ली CM केजरीवाल रविवार को अपने घर से निकल कर पहले महात्मा गाँधी की समाधि पर गए, इसके बाद दिल्ली कनॉट प्लेस स्थित हनुमान जी के मंदिर पहुँचे। यहाँ से उन्होंने आम आदमी पार्टी के पार्टी ऑफिस का रुख किया जहाँ उन्होंने एक भाषण दिया और इसके बाद वह तिहाड़ के लिए निकल गए।

केजरीवाल को 10 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार करने के लिए 1 जून, 2024 तक की अंतरिम जमानत दी थी। उन्हें 2 जून को सरेंडर करने को कहा गया था। इस जमानत के दौरान ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर वृद्धि की माँग की थी, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया था।

केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट ने 7 दिन की वृद्धि जमानत अवधि में करने की माँग की थी। उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य कारण बताए थे। उन्होंने कहा था कि शरीर के चेकअप के लिए उन्हें 7 दिन की जमानत चाहिए। हालाँकि, उनकी इन दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना था।

उन्होंने दिल्ली की एक निचली अदालत में भी इस मामले में 7 दिन की अंतरिम जमानत और शराब घोटाला मामले में नियमित जमानत की याचिका लगाई थी। इस मामले में भी उन्हें राहत नहीं मिली थी और कोर्ट ने 5 जून के लिए यह निर्णय सुरक्षित रख लिया था। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर फैसला सुरक्षित है।

केजरीवाल को मार्च, 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया था। एजेंसी ने उन्हें इस मामले में सरगना बताया था। एजेंसी ने उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने का विरोध किया था और स्वास्थ्य आधार को भी नकारा था।

दिल्ली : शराब और पानी घोटाले के बाद अब शुगर घोटाला : क्या घोटालों की जानकारी न दिए जाने पर सख्ती से बचने के लिए ड्रामा किया जा रहा है? पत्नी सुनीता परहेजी खाना न भेज क्यों अपने सुहाग की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रही है?क्या सुनीता को पति की ज़िंदगी प्यारी नहीं?

क्या बीजेपी के कंधे बन्दूक रख सुनीता को निशाना बनाया जा रहा है? 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। जेल से बाहर आने के लिए तरह-तरह के तिकड़म अपनाए जा रहे हैं। अब पता चला है कि जमानत के लिए उन्होंने एक नया हथकंडा अपनाया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपने नियमित डॉक्टर से सलाह लेने की केजरीवाल की याचिका दायर पर सुनवाई के दौरान ईडी ने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को टाइप-2 डाइबिटीज है, लेकिन वह तिहाड़ जेल में आलू-पूड़ी, आम और मीठा खा रहे हैं। ईडी ने कहा है कि वह ऐसा जानबूझकर रहे हैं, जिससे कि उनका शुगर लेवल बढ़े और उन्हें मेडिकल के आधार पर जमानत मिल जाए। ईडी ने यह भी कहा है कि वह विशेष रूप से मीठा भोजन खा रहे थे। जिसकी किसी भी मधुमेह रोगी को अनुमति नहीं है। 

मधुमेह या कोई षड़यंत्र? 

केजरीवाल के तिहाड़ जाने के बाद से पार्टी में मुख्यमंत्री बनने की होड़ मची हुई है। शायद इसीलिए केजरीवाल मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ रहे। इसके पीछे भी एक गहरी साज़िश होने की शंका है। क्योकि केजरीवाल परिवार में ही कुर्सी रखना चाहते हैं। शायद इसी लिए केजरीवाल ने तिहाड़ जाते समय आतिशी और सौरभ का नाम लेकर कुर्सी से दूर करना चाहा हो? यह भी चर्चा है कि पार्टी में कुर्सी की भगदड़ मचती देख केजरीवाल सुनीता के लिए मुख्यमंत्री का रास्ता साफ करने पर आतिशी और सौरभ के नामों पर मोहर लगाकर इन दोनों को भी तिहाड़ में आने के मजबूर न कर दे। 

ऐसे में तिहाड़ प्रशासन को सख्त कार्यवाही करते हुए घर से आने वाले भोजन की जाँच करनी चाहिए। तिहाड़ प्रशासन क्या सो रहा है? जब किसी भी मधुमेह रोगी को तली चीजें, तेज मसाले, आलू, चुकंदर, मीठी चाय/कॉफ़ी, आम, खरबूजा, तरबूज, और किसी प्रकार का मिष्ठान मना होता है, फिर क्यों पूरी, आलू की सब्जी, आम आदि घर से आने पर किसी भी अनहोनी के होने में तिहाड़ प्रशासन और केजरीवाल की पत्नी के बीच किसी षड़यंत्र को रचे जाने की शंका हो सकती है। संभव हो वह शंका निराधार हो, फिर भी ED, CBI, जेल प्रशासन और कोर्ट्स आदि को सचेत रहने की जरूरत है। किसी उन्होने के होने पर ये सब सवालों के घेरे में आएंगे।  

तब घर का खाना की इजाजत देने वाली कोर्ट भी इन्ही सवालों का जवाब मांगेगी। वास्तव में अगर केजरीवाल मधुमेह रोगी है, फिर पत्नी से पूछना चाहिए कि क्यों बदपरहेजी खाना भेजा जा रहा है? क्या इसके पीछे कोई गहरा षड़यंत्र है? दिल्ली मंत्री आतिशी मार्लेना से पूछना चाहिए कि तिहाड़ जेल और बीजेपी को आरोपित करने से पहले अपने आका की पत्नी से क्यों नहीं पूछती कि जिस मधुमेह रोगी को 50 यूनिट insulin जाती हो, क्यों आलू की सब्ज़ी, पूरी और आम आदि क्यों भेज रही हो? क्या षड़यंत्र रच रही हो? मंत्री आतिशी को अपने पद की गरिमा बनाए रखने के लिए उप-राज्यपाल और तिहाड़ प्रशासन को केजरीवाल को मिलने ऐसे भोजन को तुरंत रोक, मधुमेह रोगी को दिए जाने वाला भोजन दिया जाये।      

सवाल यह है कि जब आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को शुगर और बीपी है तो उन्हें घर से इस तरह का खाना क्यों भेजा जा रहा है? डाइट चार्ट से ये भी पता चलता है कि केजरीवाल नियमित रूप से आलू-पूड़ी, केला, आम और मीठा खा रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल से जुड़ी ये खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। लोग इसी के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

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‘परिवारवादी’ राजनीति भी करने लगी आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का किया पत्ता साफ, तिहाड़ जेल से सुनीता केजरीवाल को आगे बढ़ाने में जुटे

आखिर तिहाड़ जेल जाने से पहले अरविन्द केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम लेकर ED के निशाने पर ही नहीं लाये बल्कि शराब घोटाले में बराबर साझी होने के आरोप में शामिल कर अपनी पत्नी सुनीता के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया, जो यह साबित कर रहा है, कि उन्हें पार्टी में किसी पर लेशमात्र भी विश्वास नहीं। जिस मुख्य को पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों पर भरोसा नहीं, उसे तानाशाह और परिवार समर्पित पार्टी ही कहना उचित होगा। 
इंडी गठबंधन की सहयोगी आम आदमी पार्टी भी अब कांग्रेस और अपने अन्य मित्र दलों की तरह परिवारवादी राजनीति की राह पर चल निकली है। दरअसल, दिल्ली के सबसे बड़े शराब घोटाले के मामले में जेल गए सीएम अरविंद केजरीवाल ने बड़ी चालाकी से पत्नी सुनीता को आगे किया है। इसके लिए केजरीवाल ने सुनीता की राह के कांटे बनने वाले सौरभ भारद्वाज और आतिशी को अपने बयानों से उलझा दिया है। उन्होंने कहा है कि विजय नायर उनको नहीं, बल्कि आतिशी और भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। यानि यदि केजरीवाल को सीएम पद छोड़ना पड़े तो आतिशी और सौरभ दावेदार के रूप में न उभर आएं, इसलिए कोर्ट में उनका नाम लेकर उन्हें विवादित बना दिया है। दूसरी ओर आप के विधायकों और सुनीता केजरीवाल की मुलाकातें रणनीति के तहत बढ़ गई हैं। पार्टी में नंबर दो बनने के लिए सुनीता केजरीवाल ने पहली बार विधायकों की बैठक ली, जिसमें 55 विधायक मौजूद थे।

सुनीता केजरीवाल ने बिना किसी पद के ही आप विधायकों की बैठक ले डाली
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आबकारी नीति घोटाले में ईडी की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी (आप) में नंबर-2 के पोजिशन को लेकर चल रही कयासबाजी अब और तेज हो गई है। दरअसल, केजरीवाल ने असुरक्षा की भावना के चलते पार्टी में सैकेंड लाइन ही तैयार नहीं की है। पहली कतार के नेता मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सासंद संजय सिंह, सत्येंद्र जैन आदि जेल में हैं। ऐसे में केजरीवाल के भी जेल जाने के बाद पार्टी के अंदरूनी हलकों में ये चर्चा और तेज हो गई कि यदि विपरीत हालात बने तो नया सीएम कौन होगा? ऐसे ही कयासों के बीच सीएम अरविंद की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने किसी पद पर न होने के बावजूद विधायकों की बैठक ले डाली। इससे साफ हो गया कि आम आदमी पार्टी में भी परिवारवाद का ‘प्रभाव’ दिखाई देने लगा है। ये अलग बात है सालों पहले केजरीवाल, मनीष और संजय सिंह राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं, लेकिन जब केजरीवाल फंसे तो उन्हें भी लालू की तरह परिवार और पत्नी की याद आ गई है।

केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम रणनीति के तहत लिया
सीएम की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने आप विधायकों के साथ ऐसे समय बैठक की है, जब ईडी ने अरविंद केजरीवाल के हवाले से अदालत में दावा किया कि शराब घोटाले का मुख्य संदिग्ध विजय नायर आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। हालांकि, ईडी ने अदालत में करोड़ों के शराब घोटाले का किंगपिन सीएम केजरीवाल को ही बताया है। राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम रणनीति के तहत लिया है। क्योंकि आप नेताओं के जेल जाने के बाद ये वरिष्ठ नेता हैं और सीएम पद की दावेदारी कर सकते हैं। इस बीच सीएम आवास पर सुनीता केजरीवाल ने विधायकों की बैठक ली। इसमें आतिशी, सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत और गोपाल राय सहित करीब 55 विधायक मौजूद रहे। सूत्र बताते हैं कि विधायकों ने अरविंद केजरीवाल के जेल से सरकार चलाने, इस्तीफा देने की स्थिति में सीएम चेहरा बनाने आदि के मुद्दों पर मंथन किया।

लालू के नक्शेकदम पर चलते हुए पत्नी सुनीता का आगे बढ़ा रहे केजरीवाल
साल 1996 में लालू यादव का नाम चारा घोटाले में आया तो बिहार में सियासी भूचाल पैदा हो गया। तमाम तरह की संभावनाओं के बीच लालू यादव ने दबाव में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अटकलें लग रही थीं कि लालू के राजनीति सफर का अंत हो गया, लेकिन तभी लालू यादव ने राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। लालू यादव की तरह दिल्ली के मुख्यमंत्री बड़े शराब घोटाले में फंसे हैं। आम आदमी पार्टी के सामने दो बड़े सवाल हैं- केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद चुनाव में पार्टी का चेहरा कौन होगा? और भ्रष्टाचार के आरोपों से पार्टी कैसे बाहर निकलेगी और इसके नुकसान की भरपाई हो सकेगी? आज हालात ये हैं कि आप पार्टी में सेकेंड लाइन में आम लोगों से जुड़ा कोई बड़ा नेता नहीं है, जिसे सामने किया जा सके। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी इस पर विचार कर रही है कि केजरीवाल की पत्नी को पार्टी का चेहरा बनाया जाए। केजरीवाल को अगर जमानत नहीं मिलती है, तो सुनीता केजरीवाल पार्टी के लिए प्रचार कर सकती हैं।

आतिशी जैसी एक्टिविस्ट के लिए भाजपा में कोई वैकेंसी नहीं- पुरी
इस बीच दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उन्हें, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा को गिरफ्तार करेगी। आतिशी ने मीडिया में यह भी हवा-हवाई दावा किया कि भाजपा ने एक करीबी व्यक्ति से पार्टी में शामिल होने का संदेश भेजा है। इधर, आतिशी के आरोप पर भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आतिशी इस बारे में सबूत दें या कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि आतिशी जैसी एक्टिविस्ट के लिए भाजपा में कोई वैकेंसी नहीं है।

करोड़ों के शीशमहल से एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल तक का सफर
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कभी सरकारी बंगले को शीशमहल बनाने में 45 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन बीती रात उन्हें तिहाड़ जेल में गुजारनी पड़ी। कोर्ट ने 15 अप्रैल तक जेल में भेजा है। बता दें कि केजरीवाल ने सरकारी बंगले के सुंदरीकरण पर 44 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च किए थे। इस भारी-भरकम खर्च पर भी सवाल खड़े हुए थे। अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में तिहाड़ जेल पहुंच गए हैं। जेल में पहली रात बेचैनी में बीती। वह 14 गुणा 8 फीट की कोठरी में देर रात तक घूमते रहे। कुछ ही देर सोए। एशिया की सबसे बड़ी जेल में बंद भारत के पहले मौजूदा मुख्यमंत्री को बैरक नंबर दो में रखा गया है। मुख्यमंत्री को दोपहर में चाय दी गई और रात के खाने में घर का बना खाना परोसा गया। जेल की दीवारों के तनाव ने केजरीवाल का शुगर लेबल घटा दिया है।

लालू, जयललिता, सोरेन ने दिया था सीएम पर दे इस्तीफा, लेकिन केजरीवाल…
लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है कि जेल जाने पर किसी जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री या मंत्री को इस्तीफा देना पड़े। विधायक या सांसद जेल जाएं तो सरकारी कामकाज में बाधा नहीं पड़ती। मंत्रियों के जेल जाने पर भी उनके विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए जा सकते हैं, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने जेल जाने के बावजूद मंत्री पद से बर्खास्त नहीं करने पर राज्य सरकार की आलोचना की थी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ED की गिरफ्तारी से पहले अपना त्यागपत्र दे दिया था। चारा घोटाले में गिरफ्तारी से पहले लालू प्रसाद यादव ने भी इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी को CM बना दिया था। इसी तरह जयललिता ने भी गिरफ्तारी से पहले इस्तीफा दे दिया था। लेकिन केजरीवाल से सीएम पद का मोह छूट ही नहीं रहा है। वे इस जिद पर अड़े हैं कि वे जेल से सरकार चलाएंगे। लेकिन जेल जाने के बावजूद त्यागपत्र नहीं देने से राज्य सरकार के समक्ष संवैधानिक संकट हो सकता है।

मैं भरोसा देता हूं कि दिल्ली की सरकार जेल से नहीं चलेगी- उप राज्यपाल
जेल से सरकार चलाने के AAP के दावे पर उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने बुधवार को यह बड़ी बात कही। उनसे जब यह पूछा कि क्या दिल्ली की सरकार जेल से चलेगी? इस सवाल पर एलजी ने कहा कि ‘ मैं लोगों को भरोसा देता हूं कि दिल्ली की सरकार जेल से नहीं चलेगी।’ कार्यक्रम के पहले दिन एलजी ने देश में हर क्षेत्र में हो रही तरक्की का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है। विकास की यह यात्रा आगे बढ़ती रहेगी। भारत को अब रोका नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उप राज्यपाल ने कहा कि पीएम देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं। एलजी ने जन धन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में इसके तहत 50 करोड़ बैंक खाते खुले और 50 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास अपने मोबाइल फोन हैं।

जेल से सरकार चलाना आसान नहीं, राजनीति में ऐसा कोई उदाहरण भी नहीं
दरअसल, पार्टी को वन मैन शो की तरह चला रहे अरविंद केजरीवाल ने कोई सैकंड लाइनअप ही तैयार नहीं किया। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येंद्र जैसे कुछेक जो बड़े नेता थे, वे भी अब जेल की सलाखों के पीछे हैं। शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद भी अरविंद केजरीवाल CM के पद पर हैं। पार्टी कह रही है कि वे जेल जाते हैं, तो वहीं से सरकार चलाएंगे। हालांकि पूर्व में इस तरह का कोई उदाहरण भी नहीं है, क्योंकि ये इतना आसान नहीं है। फाइलों पर साइन करने से लेकर कैबिनेट मीटिंग तक के लिए उन्हें बार-बार कोर्ट से परमिशन लेनी होगी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में न सिर्फ दिल्ली की सरकार चलाने की चुनौती है, बल्कि पार्टी को चुनाव की तैयारी भी करनी है। इसका पहला असर 22 मार्च को ही दिख गया। दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की वजह से स्थगित करना पड़ा।

जेल से सरकार चलाना गलत, फिर तो हर कोई जेल से ऑफिस चलाने लगेगा
पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि ‘केजरीवाल जेल से सरकार चलाने की बात कह रहे हैं, लेकिन इससे गलत मैसेज जाएगा। फिर किसी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर किसी केस में जेल चला गया, तो वो भी वहीं से ऑफिस चलाने की बात कहेगा। अपराधी भी कोर्ट से डिमांड करेंगे कि हमें भी जेल से काम करने की परमिशन दी जाए।’ दरअसल सीएम अरविंद केजरीवाल ने अबतक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वह ईडी की कस्टडी से ही दिल्ली की सरकार चला रहे हैं। वह अब तक अपने मंत्रियों को दो निर्देश भी जारी कर चुके हैं। ऐसे में हर किसी के मन में एक सवाल उठ रहा है। क्या दिल्ली की सरकार ऐसे ही जेल से चलती रहेगी? दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने इसका साफ-साफ जवाब दे दिया कि ऐसा नहीं होगा।

केजरीवाल के जेल जाने के बाद मजबूरी में एक्टिव हुई पत्नी सुनीता
सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सुनीता केजरीवाल एक्टिव दिख रही हैं। दरअसल, यह उसकी मजबूरी भी है, क्योंकि आप के पास अब कोई बड़ा चेहरा है भी नहीं। इसलिए सुनीता केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की थी। X पर सुनीता केजरीवाल की ये पोस्ट करीब एक साल बाद आई है। बीते एक साल में उन्होंने सिर्फ पार्टी और दूसरे नेताओं की पोस्ट को ही री-पोस्ट किया है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा होने लगी कि सुनीता केजरीवाल पार्टी का चेहरा बन सकती हैं। केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी सुनीता दो बार कैमरे के सामने मैसेज दे चुकी हैं। वीडियो में वे उसी जगह बैठी दिख रही हैं, जहां से अरविंद केजरीवाल लोगों को मैसेज देते हैं। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम सुनीता को पार्टी का चेहरा बनाने के लिए तो नहीं है?


दिल्ली : केजरीवाल सरकार के अधीन तिहाड़ जेल में मसाज करवाते जेल मंत्री सत्येंद्र जैन

                                                         सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल में मसाज लेते हुए
दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन जेल में बंद हैं। जेल से ही उनका हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में सत्येंद्र जैन जेल के अंदर मसाज करवाते नजर आ रहे हैं। जेल के सेल में लगे CCTV कैमरे में सत्येंद्र जैन की मसाज की तस्वीरें/वीडियो कैद हैं।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि वह बड़े आराम से एक बिस्तर पर लेटे हुए हैं। सत्येंद्र जैन के हाथ में कुछ कागज हैं, जिसको वह पढ़ रहे हैं। उनके हाथों और पैरों में मसाज की जा रही है और इस दौरान सत्येंद्र जैन लोगों से बातचीत भी कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये अलग-अलग दिनों की तस्वीरें हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वीडियो में वे अलग-अलग कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं।

सत्येंद्र जैन को जेल में वीवीआईपी ट्रीटमेंट: ED

जो वीडियो सामने आया है, वह 13 सितंबर 2022 का बताया जा रहा है। सीसीटीवी वीडियो तिहाड़ जेल के सेल-4 ब्लॉक A का है। इससे पहले ईडी ने भी दावा किया था कि जेल में सत्येंद्र जैन को वीवीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है।
ED ने अपने हलफनामे में आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन को मसाज की सुविधा मिलने का आरोप लगाया था। ईडी ने कहा था कि सत्येंद्र जैन को समय-समय पर हेड मसाज, फुट मसाज और बैक मसाज मिलता है। यही नहीं, ED के अनुसार सत्येंद्र जैन को अन्य तरह की सुविधाएँ भी दी जा रही हैं।
ईडी ने बताया था कि चूँकि सत्येंद्र जैन जेल मंत्री हैं, इस वजह से वह अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। अब जो तस्वीरें/वीडियो सामने आई हैं, उससे यह साबित भी हो रहा है। ED ने तिहाड़ जेल से सत्येंद्र जैन को मसाज दिए जाने वाली फुटेज ली थी, जो अब सार्वजनिक हो चुका है। खबर यह भी है कि जैन ने कोर्ट से मसाज कराते फुटेज को रोकने की अपील की थी।

सजा की जगह वीवीआईपी मजा

वीडियो सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भाजपा एक बार फिर आम आदमी पार्टी पर हमलावर हो गई है। वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन को जेल में ही वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है। बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा: “तो सजा की जगह सत्येंद्र जैन को मिल रहा था पूरा वीवीआईपी मजा? तिहाड़ जेल में मसाज? पाँच महीने से जमानत नहीं पाने वाले हवालाबाज के सिर की मालिश! आप सरकार द्वारा संचालित जेल में नियमों का उल्लंघन। इस तरह वसूली और मसाज के लिए आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया गया, केजरीवाल को धन्यवाद।”
बीजेपी के इस आरोप पर दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसे राजनीति करार दिया। मनीष सिसोदिया के अनुसार सत्येंद्र जैन को डॉक्टरों ने मसाज करने की सलाह दी है क्योंकि उनका 2 ऑपरेशन किया गया था।
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के जवाबों से हालाँकि सोशल मीडिया यूजर्स संतुष्ट नहीं हैं। लोग फोटो में गोला बना कर रिमोट कंट्रोल और मिनरल वॉटर की बोतलों पर सवाल खड़े कर रहे।
दिल्ली में जेल के भीतर अगर किसी मंत्री को मसाज का मजा मिल रहा है तो जनता भी मसाज की डिमांड करने लगी है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के सामने ही ‘केजरीवाल मसाज सेंटर’ का बोर्ड लगा दिया गया है। जनता पूरी दिल्ली में ऐसे मसाज सेंटर की माँग कर रही है।
दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले ईडी ने जैन के परिवार और कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियाँ कुर्क की थीं। जैन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली में कई शेल कंपनियाँ बनाईं और कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटरों की 54 शेल कंपनियों के माध्यम से 16.39 करोड़ रुपए के काले धन को सफेद किया।