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इस्लामियों ने 5 करोड़ रूपए चंदे का देखा था सपना, ‘उम्माह’ से 1.5 करोड़ रूपए भी नहीं मिला: अयोध्या में ‘बड़ा मस्जिद’ बनाने का सपना टूटा, अब बनेगी छोटी सी इमारत


बाबरी मस्जिद के नाम पर मुसलमानों ने करोड़ों रूपए फूंक दिए। ईरान को मदद देने 18 करोड़ इकठे करने वाला मुसलमान अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली जमीन पर मस्जिद बनाने के लिए किसी मुस्लिम मुल्क से मदद नहीं मिल रही। भारत का इस्लामिक कट्टरपंथी भारत की तरह उम्माह और दूसरे मुस्लिम संगठनों को भी बेवकूफ समझता है। वो भी समझता है कि आज की तारीख में भारत का मुसलमान इतना गरीब नहीं कि मस्जिद के लिए खैरात/जकात देने की हैसियत नहीं। राममन्दिर बनकर तैयार हो गया लेकिन इस्लामी हाथ में कटोरा लिए घूम रहा है।   

अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धन्नीपुर में बनने वाली मस्जिद परियोजना का पूरा ढांचा ही ध्वस्त हो गया है। भव्य राम मंदिर के निर्माण पर तमाम तरह की बयानबाजी करने वाले और राम विरोधियों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब मुस्लिम समुदाय की बेरुखी और चंदे के महासंकट के कारण इस मस्जिद का आकार बेहद छोटा कर दिया गया है।

इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ने अस्पताल और लाइब्रेरी जैसी बड़ी योजनाओं को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया है। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में 5 एकड़ जमीन आवंटित की थी। यह जगह राम मंदिर से करीब 25 किलोमीटर दूर लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।

इस जमीन पर पहले एक बेहद भव्य मस्जिद बनाने का बड़ा दावा किया गया था। इस परियोजना में मुख्य मस्जिद के साथ-साथ एक 300 बिस्तरों का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, एक समृद्ध केंद्रीय पुस्तकालय और कम्युनिटी किचन बनाने का पूरा खाका तैयार था। लेकिन खुद मुस्लिम समुदाय ने ही इस परियोजना से पूरी तरह मुँह मोड़ लिया। अपनों की इस भारी बेरुखी के कारण अब यह पूरा भव्य प्रोजेक्ट औंधे मुँह गिर गया है।

चंदे की भारी किल्लत, तिजोरी में नहीं बचा पैसा

जो लोग भव्य राम मंदिर को लेकर आए दिन मीडिया में बड़ी-बड़ी बयानबाजी करते थे, आज उनके खुद के प्रोजेक्ट के लिए चंदे का बड़ा अकाल पड़ गया है। फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने साफ किया कि अब इस जगह पर केवल एक ‘छोटी मस्जिद’ का निर्माण किया जाएगा।

इस छोटी सी मस्जिद को बनाने के लिए भी कम से कम 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपए के फंड की जरूरत है। लेकिन असलियत यह है कि तमाम कोशिशों के बाद भी फाउंडेशन अब तक सिर्फ 1.5 करोड़ रुपए का ही चंदा जुटा पाया है। यह रकम इस योजना के लिए पूरी तरह नाकाफी साबित हुई है, जिसके कारण ट्रस्ट को घुटने टेकने पड़े हैं।

खुद के फायदे के लिए सरकारी फंड के इस्तेमाल पर टिकी निगाहें

मुस्लिम समुदाय से अपेक्षित चंदा और सहयोग न मिलने के कारण अब ट्रस्ट की हालत खराब है। सूत्रों के अनुसार, चंदा इकट्ठा करने में नाकाम रहने के बाद अब अंदरखाने सरकारी सहायता और फंड को अपने तरीके से इस्तेमाल करने की जुगत लगाई जा रही है।

आईआईसीएफ के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने खुद माना कि समुदाय की ओर से इस प्रोजेक्ट को लेकर भारी उदासीनता और अरुचि देखी जा रही है। लोगों ने इस काम के लिए बिल्कुल भी रुचि नहीं दिखाई, जिससे चंदे का यह संकट खड़ा हुआ है।

प्रशासनिक लेटलतीफी और नक्शे का पेंच

परियोजना के समय पर शुरू न हो पाने के पीछे केवल पैसों की कमी ही नहीं थी। ट्रस्ट की प्रशासनिक और तकनीकी कमियाँ भी इसके लिए जिम्मेदार रहीं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) से मस्जिद और पूरे परिसर का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ट्रस्ट को लंबा वक्त लग गया।

शुरुआत में इस 5 एकड़ की जमीन के लैंड यूज (भू-उपयोग) को बदलने में पेंच फँसा। इसके बाद विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) के रूप में एक बड़ी सरकारी राशि जमा करने की तकनीकी बाध्यता सामने आई। हालाँकि बाद में विकास प्राधिकरण ने इस नक्शे को मंजूरी दे दी थी, लेकिन तब तक बजट का संकट इतना बढ़ गया कि ट्रस्ट जमीन पर कोई भी काम शुरू नहीं कर सका।

एक तरफ भव्य राम मंदिर, दूसरी तरफ बदहाली

अयोध्या का यह विवाद दशकों पुराना रहा है। साल 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद पूरे देश में बड़े दंगे हुए थे, जिसमें करीब 2,000 लोग मारे गए थे। इसके बाद साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी जमीन का मालिकाना हक हिंदुओं को सौंपते हुए भव्य राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था।

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे बड़े चुनावी वादे को पूरा करते हुए उस पवित्र स्थान पर एक बेहद भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024 के आम चुनावों से ठीक पहले इस मंदिर का भव्य उद्घाटन भी किया था।

राम मंदिर को लेकर छिड़ा ताजा राजनीतिक घमासान

एक तरफ जहाँ मस्जिद का काम पूरी तरह ठप हो चुका है, वहीं राम मंदिर का प्रबंधन भी इस समय राजनीतिक हमलों का सामना कर रहा है। मंदिर के चंदे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के कुछ आरोपों के बाद हाल ही में इसके प्रबंधन और नेतृत्व में बड़ा फेरबदल किया गया है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे देखते हुए विपक्षी दल इस मामले को एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तमाम विवादों के बीच, मस्जिद का भव्य सपना टूटना और इसका आकार बेहद छोटा होना अब सबसे बड़ी सच्चाई बन चुका है।

मध्य प्रदेश : मकान बेचना है… सागर के शनिचरी-शुक्रवारी से हिंदू कर रहे पलायन: किसी के घर के बाहर फेंक देते थे माँस के टुकड़े

 

                   सागर के शनिचरी-शक्रवारी से हिंदू परिवारों का पलायन (फोटो साभार : Grok)
दैनिक भास्कर की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सागर शहर के शनिचरी और शुक्रवारी इलाकों से हिंदू परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। पिछले 10 सालों में यहाँ की हिंदू आबादी में 4.88 प्रतिशत की कमी आई है, जो गहरी चिंता का विषय है।

रिपोर्ट बताती है कि पिछले 5 सालों में 41 हिंदू परिवारों ने अपने मकान बेचकर ये इलाके छोड़ दिए हैं, और चौंकाने वाली बात ये है कि ये सभी मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खरीदे हैं। कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में 63 हिंदू परिवारों के 228 लोग यहाँ से जा चुके हैं, और अभी भी कई घरों पर ‘बिकाऊ’ के बैनर लगे हुए दिख रहे हैं।

मुस्लिम समाज के लिए अक्सर कहा जाता है कि बेचारे गरीब हैं, अगर मुस्लिम गरीब होने पर मकान खरीद रहे हैं सरकार को इस बात की जाँच करनी चाहिए कि आखिर मकान खरीदने के लिए कहाँ से पैसा आया। मुस्लिम क्षेत्रों में फ्लैट बनने से पहले ही उनके खरीदार खड़े हो जाते हैं। जबकि हिन्दू क्षेत्रों में स्थिति एकदम विपरीत है। दिल्ली विकासपुरी में लगभग 20 वर्षों से डीडीए की कमर्शियल खाली पड़ी है, नीचे के हिस्से में खुली हुई शराब की दुकाने या मोटर मैकेनिक की दुकाने।    

पलायन के पीछे की दर्दनाक कहानियाँ

दैनिक भास्कर की टीम ने कुछ ऐसे परिवारों से बात की जिन्होंने अपने पुश्तैनी मकान छोड़कर जाने को मजबूर हुए हैं:

उमाशंकर शर्मा ने बताया कि उनके 150 साल पुराने पुश्तैनी मकान को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घेर लिया और परेशान करने लगे। घर पर केवल महिलाएँ थीं। मजबूरी में उन्हें अपना 18 लाख रुपये का मकान मात्र 5.30 लाख रुपये में बेचना पड़ा।

राजपाल सिंह ने बताया कि उनके घर के बाहर मीट के टुकड़े और अंडे के छिलके फेंके जाते थे, जिससे वहाँ रहना मुश्किल हो गया था। उनका 625 वर्गफीट का मकान दो साल तक नहीं बिका, आखिर में उन्हें कम कीमत में बेचना पड़ा।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसकी बेटी को मुस्लिम युवक ने प्रेम-प्रसंग में फँसाया, जिससे मजबूरन उसे अपनी बेटी की शादी उस युवक से करानी पड़ी। बाद में बेटी को प्रताड़ित किया गया और मकान बेचने पर मजबूर किया गया।

संतोष कुमार साहू ने बताया कि उनके आसपास सिर्फ 1-2 हिंदू परिवार बचे थे। मुस्लिम लोगों के मकान अधिक होने से उनके बच्चों की शादियाँ नहीं हो रही थीं। वहाँ के माहौल के चलते रिश्ते नहीं आ रहे थे। उन्हें अपने 30 लाख रुपये के मकान को 22 लाख रुपये में बेचना पड़ा।

शनिचरी चौगना इलाके की एक हिंदू महिला ने बताया कि पति के न होने पर उन्हें अपनी दो बेटियों की सुरक्षा का डर रहता था। मुस्लिम समुदाय के लोगों से विवाद के बाद उन्होंने अपने 22 लाख रुपये के मकान को 14 लाख रुपये में बेचा।

विश्व हिंदू परिषद की अपील और प्रशासन की भूमिका

विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष अजय दुबे का कहना है कि क्षेत्र में माहौल खराब होने के कारण हिंदू परिवार अपने मकान बेचकर जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है और कहा है कि उनका संगठन भी परेशान परिवारों की मदद के लिए तैयार है।

यह रिपोर्ट सागर के शनिचरी-शुक्रवारी क्षेत्र में एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर इशारा करती है, जहाँ जनसांख्यिकीय बदलाव और सामाजिक ताना-बाना खतरे में दिख रहा है। यह मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

बिहार : पहलगाम की तरह दरभंगा में जेहादियों ने दरभंगा में लोगों ने राह चलते हिंदुओं पर धर्म पूछ लाठी-तलवार से किए हमले; पाकिस्तान परस्तों को तुरंत गिरफ्तार कर सारी सरकारी सुविधाओं से ब्लैकलिस्ट किया जाए

                                                बिहार के दरभंगा में हिंदुओं पर धर्म पूछकर हमला
पहलगाम आतंकी हमले में 22 अप्रैल को हिंदुओं को धर्म पूछकर मौत के घाट उतारा गया और अब बिहार के दरभंगा में धर्म पूछकर हिंदुओं पर हमला करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने बताया है कि सड़क किनारे खड़े होकर कुछ मजहबी लोगों ने उनसे पहले उनका धर्म पूछा और फिर बाद में उनपर लाठी-डंडा और तलवार से हमला किया।

इस घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है और पुलिस द्वारा 4 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूरी घटना जाले थाना क्षेत्र की है। पीड़ितों की पहचान राजकिशोर यादव, रामसागर यादव, अमित कुमार, सुमित कुमार, रंजीत यादव, ऋतिक यादव, मिथिलेश यादव, लक्ष्मण यादव, सोनू कुमार, दिनेश मांझी के तौर पर हुई है।

पीड़ितों ने बताया कि वो लोग 6 मई को शाम 7 बजे बहेड़ा पोखर के पास मुस्लिम समुदाय के युवक लाठी, भाला, तलवार, रॉड और पिस्टल लेकर खड़े थे। जैसे ही वो लोग उस रास्ते से गुजरे वहाँ उनसे पहले उनका धर्म पूछा गया और फिर जानलेवा हमला कर दिया गया।

घायलों में एक अमित कुमार भी हैं। अमित ने बताया कि उन लोगों ने पहले धर्म पूछा और जैसे ही हमने खुद को हिंदू बताया, उन लोगों ने हमला कर दिया। वो लोग बस हिंदुओं को मार रहे थे।

घटना में कुल 11 लोग घायल हुए हैं। इनमें एक इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाले में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर है। वहीं कुछ को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

घटना के संबंध में लक्ष्मण कुमार यादव, मनोज कुमार यादव, सोनू यादव, दिनेश यादव, संजय यादव ने थाने में शिकायत दी है।

एफआईआर में 21 आरोपितों का नाम दिया गया है। इनमें कुरबान कुरैशी इरफान कुरैशी, सलमान इब्रान कुरैशी, पप्पू कुरैशी, मेराज, रेयाज, आसिफ, इम्तियाज, सरफरराज, एजाज, शहनवाज, दर्जी रिजवान के नाम हैं।

इस पूरे मामले में बता दें कि ये भी कहा जा रहा है कि ये विवाद स्कूटी में टक्कर लगने के बाद शुरू हुआ। टक्कर ऋतिक और दर्जी नूर आलम की बेटे की स्कूटी के बीच हुई थी। ऋतिक ने जब नुकसान का मुआवजा माँगा तो नूर का बेटा आनाकानी करने लगा। ऋतिक ने स्कूटी अपने पास रख ली और कहा स्कूटी अगले दिन मिलेगी।

इसके बाद दोनों को समझाया गया और मामला शांत कराकर उन्हें वापस भेज दिया गया। लेकिन, अगले दिन मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई और फिर हिंदुओं को निशाना बनाने लगी।

पुलिस कार्रवाई की बात करें तो यही पता चला है कि इस केस में 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए जाँच जारी है। पूरे मामले में पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना परिसर में शांति समिति की बैठक कराई। थानाध्यक्ष ने बताया कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।