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मौत का सौदागर से मोदी माद@# तक, लिबरल-इस्लामी गैंग की घृणा से निकली 111वीं गाली: बंद से कांग्रेस-RJD के पाप का ‘पश्चाताप’ करेगा बिहार; आरजेडी ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली

भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने ठीक ही कहा है "विनाश काल विपरीत बुद्धि", यह INDI गठबंधन में कांग्रेस के साथ शामिल पार्टियों पर सटीक बैठ रही है। कांग्रेस जो अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय दलों की बैसाखी का सहारा लिए हुआ है। जीता-जागता उदाहरण बिहार में देखिए। जमीन राष्ट्रीय जनता दल की, कार्यकर्ता आरजेडी का, लेकिन वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गाँधी आगे रहे और तेजस्वी यादव पीछे, क्यों? जो राहुल अकेले दम पर मोदी सरकार से टक्कर लेने में पूरी तरह फेल होने की वजह से क्षेत्रीय दलों के कन्धों पर बैठ उछल रहे हैं, जिसका फायदा न कांग्रेस को हो रहा है और न ही क्षेत्रीय दलों को। बरहाल, कांग्रेस मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय माताश्री को गाली देने से आरजेडी ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। अगर तेजस्वी अकेले प्रचार करते बीजेपी को टक्कर दे सकते थे, लेकिन नाकामयाब राहुल कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी का भी नुकसान कर दिया यानि हम तो डूबेंगे सनम तुम को भी लेकर डूबेंगे।           

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने राजनीतिक करियर में अब तक 111वीं गाली पड़ चुकी है। बिहार के दरभंगा में कांग्रेस-आरजेडी के मंच से उनकी माँ को गाली दी गई। इस पर मोदी भावुक भी नजर आए। गालियों की इस फेहरिस्त की शुरुआत कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी की ‘मौत के सौदागर’ से शुरू होती है।

मोदी की माँ हीराबेन मोदी को गाली दिए जाने के मुद्दे पर एनडीए ने 4 सितंबर को ‘बिहार बंद’ का ऐलान किया। सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक यानी 5 घंटे के लिए ये बंद बुलाया गया है। बंद के दौरान अस्पताल, एंबुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाएँ चालू रहेंगी। एनडीए का कहना है कि ये विरोध लोकतंत्र की गरिमा बचाने के लिए है।

दरअसल दरभंगा में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री मोदी की माँ को गाली दी गई थी। राहुल गाँधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंच से पीएम और उनकी माँ के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसका वीडियो वायरल हो गया था। मंच पर राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और तेजस्वी यादव के पोस्टर लगे थे। गाली देने वाले शख्स मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पीएम मोदी ने चीन दौरे से लौटने के बाद सार्वजनिक तौर पर इस पर दुख जताते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “माँ के अपमान के लिए मैं आरजेडी-कांग्रेस को क्षमा कर सकता हूँ, लेकिन बिहार की जनता कभी माफ नहीं करेगी।” पीएम मोदी ने कहा कि बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से मेरी माँ को गालियाँ दी गईं। ये गालियाँ सिर्फ मेरी माँ का अपमान नहीं है। ये देश की माँ-बहन-बेटी का अपमान है।

मोदी को पड़ी 111 गालियाँ

ये कोई पहला मामला नहीं है, जब पीएम मोदी को कांग्रेस ने गाली दी हो। एनडीटीवी के मुताबिक, ‘मौत का सौदागर’ से लेकर ‘माँ की गाली’ तक पीएम मोदी को 111वीं बार गाली दी गई है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सितंबर 2024 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को उस वक्त तक दी गई गालियों और अपमानजनक शब्दों की सूची उन्हें पकड़ाई थी।

इनमें ‘मौत का सौदागर’, ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’, ‘नीच’, ‘कमीना’, ‘ज़हरीला सांप’, ‘बिच्छु’, ‘चूहा’, ‘रावण’, ‘भस्मासुर’,‘नालायक’,‘कुत्ते की मौत मरेगा’,‘मोदी को ज़मीन में गाड़ देंगे’, ‘राक्षस’, ‘दुष्ट’, ‘कातिल’, ‘हिंदू जिन्ना’, ‘जनरल डायर’,‘जेबकतरा’, ‘गंदी नाली का कीड़ा’, ‘काला अंग्रेज़’,‘कायर’, ‘औरंगज़ेब का आधुनिक अवतार’,‘दुर्योधन’,‘हिंदू आतंकवादी’,‘गदहा’, ‘नामर्द’, ‘चौकीदार चोर है’,‘तुगलक’, ‘मोदी की बोटी-बोटी काट देंगे’,‘साला मोदी’,‘नमक हराम’, ‘गंवार’,‘निकम्मा’ ‘पागल कुत्ता’, ‘भष्मासूर’ शामिल हैं।

सोनिया गाँधी ने कहा था ‘मौत का सौदागर’

पीएम मोदी को अपशब्द करने की शुरुआत कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी ने शुरू की थी। 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘झूठे, बेईमान और मौत का सौदागर’ कहा था। इसके बाद गुजरात की जनता ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लड़ रही बीजेपी को 182 में से 117 सीटें देकर इस गाली का जवाब दिया था।

लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान पड़ी गालियाँ

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं में पहली बार केन्द्र की राजनीति में आए नरेन्द्र मोदी को गाली देने की जैसे प्रतियोगिता ही लग गई। कांग्रेस नेता बेनी प्रसाद वर्मा ने मोदी को ‘पागल कुत्ता’ कहा, वहीं गुलाम नबी आजाद ने गंगूतेली कह कर संबोधित किया। जयराम रमेश ने ‘भस्मासुर’, रेणुका चौधरी ने ‘वायरस’, सलमान खुर्शीद ने ‘बंदर’, संजय निरुपम ने ‘अनपढ़-गंवार’ तो जिग्नेश मेवाणी ने ‘नमक हराम’ कहा था। इमरान मसूद ने ‘ बोटी-बोटी काट देंगे’ कहा।

‘नीच आदमी’ से लेकर ‘चायवाला’ तक

2017 गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को ‘नीच आदमी’ कहा था। इससे पहले उन्होंने ‘चायवाला’ भी कहा था। मणिशंकर अय्यर ने ‘चाय बेचने’ को लेकर तंज कसते हुए कहा था कि कांग्रेस मुख्यालय के सामने टपरी खुलवा देंगे।

राहुल गाँधी ने कहा ‘चौकीदार चोर है।’

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गाँधी ने रफाल सौदे को लेकर पीएम मोदी को ‘चौकीदार चोर है’ कहना शुरू किया। इस दौरान अधीर रंजन चौधरी ने ‘गंदी नाली का कीड़ा’ कहा था. यहाँ तक कि मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पीएम मोदी की तुलना ‘रावण’ से की थी।

बिहार में ‘वोट चोर’ और माँ को दी गाली

बिहार विधानसभा चुनाव में दमखम लगा रहे राहुल गाँधी ने पीएम मोदी को ‘वोट चोर’ कहा। हर मंच, हर रैली में ‘वोट चोर’ का नारा बुलंद कर रही कांग्रेस अब मोदी की माँ को गाली देने पर उतर आई है। इसका जवाब तो विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता देगी।

बिहार : क्या घोटालेबाज़ माँ की कोख में ट्रेनिंग लेकर पेट से बाहर आते हैं? प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ का शुरू हो गया करप्शन?; जो सड़क दरभंगा के BJP सांसद ने बनवाई, 2 महीने बाद उसके ही नाम पर निकाल लिए लाखों

सीता देवी (लाल घेरे में) पर MP गोपाल जी ठाकुर की बनाई सड़क का दोबारा फर्जी निर्माण दिखा कर भुगतान करने का आरोप है (फोटो साभार: Sita Devi & Gopal Jee Thakur/FB)
मार्च 2024 में एक सड़क का निर्माण पूरा हुआ। 11 लाख रुपए की लागत से। 2 महीने बाद फिर से उसी सड़क के निर्माण के नाम पर 6 लाख रूपए दोबारा निकाल लिए गए। मामला बिहार के दरभंगा जिले का है। भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में जिला परिषद की अध्यक्ष सीता देवी हैं।

फर्जी भुगतान के इस मामले की रिपोर्ट दैनिक भास्कर ने प्रकाशित की है। अखबार ने जब सीता देवी से इसको लेकर सवाल किया तो उनका जवाब था- आप (पत्रकार) ऑफिस में आइए, बात की जाएगी। उनका यह भी दावा है कि 11 लाख रुपए से दरभंगा के बीजेपी सांसद गोपाल जी ठाकुर ने देकुली गाँव में जो सड़क बनवाई है वह दूसरी तरफ है और उन्होंने दूसरी तरफ सड़क बनवाई है।

यह दूसरी बात है कि ग्रामीण उनके दावे को खारिज कर रहे हैं। ऑपइंडिया को ग्रामीणों ने बताया है कि सड़क गोपाल ठाकुर के सांसद निधि से ही बनी है। सीता देवी जिस सड़क का दावा कर रही हैं उसका जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं है।

गोपाल जी ठाकुर ने बनवाई सड़क

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, दरभंगा जिला के देकुली गाँव में यह गड़बड़ी हुई है। देकुली गाँव में दिलीप झा के घर से नारायण झा के घर PCC सड़क का निर्माण सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अपनी सांसद निधि से करवाया था। यह सड़क 15वें वित्त आयोग के तहत बनाई गई थी। इसको लेकर सांसद ठाकुर ने जनवरी, 2023 में मंजूरी दी थी।

इसके बाद जनवरी, 2024 में इस सड़क निर्माण के लिए निर्माण विभाग मंजूरी मिल गई और मार्च, 2024 तक यह सड़क बना कर तैयार कर दी गई थी। इस सड़क के निर्माण के लिए मार्च, 2024 में ही भुगतान कर दिया गया था। यह भुगतान 11.67 लाख रूपए का किया गया था। यह काम करवाए जाने की जानकारी 15वीं वित्त आयोग के पोर्टल पर है।

इसका योजना कोड 67389875 है। यह सड़क अभी भी बनी हुई है और गाँव में लोग इससे आवाजाही करते हैं। गोपालजी ठाकुर के निर्माण करवाने का शिलापट भी रोड के किनारे लगा हुआ है।

सीता देवी पर दोहरीकरण के आरोप

इसी सड़क के निर्माण के नाम पर मई, 2024 में 6 लाख रूपए का भुगतान दरभंगा जिला परिषद की चेयरमैन सीता देवी ने किया है। यह भुगतान तीन किश्त में किया गया है। यह भुगतान उसी सड़क के नाम पर किया गया, जिसे गोपाल जी ठाकुर ने बनवाया।

इस योजना का नाम ‘रंजीत झा के घर से चन्द्रमोहन झा के घर तक सड़क का निर्माण’ था। रंजीत झा, उन्हीं नारायण झा के बेटे हैं, जिनके घर के पास निर्माण सांसद गोपाल जी ठाकुर ने करवाया था।

रिपोर्ट कहती है कि सीता देवी ने इस निर्माण का प्रस्ताव तब रखा था, जब वह जिला परिषद की सदस्य हुआ करती थीं और भुगतान तब हुआ, जब वह अध्यक्ष बन गईं। लेकिन प्रश्न उठता है कि जब यह सड़क पहले ही बन चुकी थी तो ऐसे में दोबारा किस सड़क का निर्माण किया गया और किस एवज में पैसा लिया गया।

यह भी प्रश्न उठता है कि यदि उसी सड़क के निर्माण के लिए मार्च, 2024 में 11 लाख रूपए खर्च किए गए तो मई, 2024 में उसकी लागत 6 लाख रूपए कैसे रह गई। इसके अलावा इस पूरे मामले में यह भी प्रश्न उठता है कि मात्र कुछ ही महीनों के भीतर सड़क का निर्माण क्यों करवाया गया?

यदि नहीं करवाया गया तो भुगतान क्यों किया गया और यदि करवाया गया तो इसका कारण पहले बनी सड़क की गुणवत्ता खराब होना था क्या? गुणवत्ता खराब होने वाला तर्क भी इस मामले में फिट नहीं बैठता है, क्योंकि कोई सड़क अगर 2 महीने में टूट जाती तो उस पर जाँच होती। इस मामले में ऑपइंडिया ने एक स्थानीय व्यक्ति से भी बात की है।

ऑपइंडिया ने उनसे सड़क निर्माण के विषय में पूछा। नाम ना छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि इस सड़क का निर्माण गोपालजी ठाकुर ने ही करवाया था और इसे काफी मजबूती से बनवा दिया था। उन्होंने बताया कि इस सड़क के निर्माण को उनके समेत पूरे गाँव ने देखा था।

उन्होंने बताया कि यह सड़क तबसे चल रही है और इसके दोबारा निर्माण की कोई आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार निर्माण के बाद और कोई भी गतिविधि यहाँ उन्हें नहीं दिखी। ग्रामीण ने बताया कि यदि इसको लेकर दोबारा पैसा लिया गया है, तो यह गड़बड़ी है। इस गड़बड़ी को लेकर जाँच की माँग की गई है।

जिला परिषद से जुड़े लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि चुनावी वर्ष में यह घोटाला कहीं सरकार की छवि बिगाड़ने को तो नहीं किया गया। सीता देवी को लोगों ने जनसुराज पार्टी से जुदा बताया है। सीता देवी ने इस मामले में दैनिक भास्कर से बात की है।

उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा, “दोनों दो साईड का मामला है। एक तरफ से सांसद की ओर से और दूसरी तरफ से जिला परिषद की ओर से सड़क बनाई गई है। आप ऑफिस में आए, बात की जाएगी।” अब इस मामले में जाँच की माँग हो रही है।

पहले भी सामने आ चुकी 15 करोड़ रूपए की गड़बड़ी

इससे पहले भी जिला परिषद में 15 करोड़ रूपए की गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। मई, 2025 में ही जिला परिषद के मुख्य अभियंता के नाम से फर्जी तरीके से हस्ताक्षर करके 142 योजनाओं को मंजूरी देने की बात सामने आई थी। इन योजनाओं की लागत 15 करोड़ रूपए थी। बाद में मुख्य अभियंता ने स्वयं इन योजनाओं को मंजूरी देने की बात से इनकार किया था। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद इन योजनाओं पर रोक लगा दी गई थी और जाँच चालू कर दी गई थी।

विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की मोदी के लिए तू-तड़ाक की भाषा सुनकर माथा पकड़ लेंगे आप, हो रही है राहुल गांधी की फजीहत; नेता विपक्ष का पद कर रहे कलंकित

चांदी के चम्मच से खाने को क्या मालूम कि विपक्ष नेता की क्या कीमत है। यह भारत का दुर्भाग्य है कि देश को राहुल गाँधी नाम का विपक्षी नेता मिला है। अगर सच्चाई से देखा जाए तो भारत को अटल बिहारी वाजपेयी जैसा विपक्षी नेता नहीं मिला। जिनसे राहुल की दादी इंदिरा गाँधी तक कोई काम करने से पहले सलाह करती थी। जब ज्ञानी ज़ैल सिंह को राष्ट्रपति बनाने पर अटल जी सलाह लेने पर ज़ैल सिंह का विरोध करते कांग्रेस पार्टी के ही एक से बढ़कर एक सिख विद्वान नेताओं के नाम रखे। यहाँ तक कि अटल जी ने कहीं विदेश में तत्कालीन सिख राजदूत का नाम लेने पर वह तुरन्त अपने पद से त्यागपत्र देकर भारत वापस आ गए कि अटल जी ने इंदिरा जी को मेरा नाम राष्ट्रपति पद के लिए रखा है। लेकिन इंदिरा जी की जिद ज़ैल सिंह को ही राष्ट्रपति बनाने की थी। 

इतना ही नहीं इंदिरा जी की विशेषता थी कि हर समस्या पर अटल जी से विचार-विमर्श किये बिना कोई काम नहीं करती थी और आज उन्ही इंदिरा जी का पोता राहुल विपक्ष नेता के पद को कलंकित करने में लगा है। सड़क से लेकर संसद तक कभी गंभीरता नहीं दिखाई। जबकि नेता विपक्ष का महत्व प्रधानमंत्री से कम नहीं होता।   
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। यह वीडियो राहुल गांधी के बिहार में दरभंगा दौरे का है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी कह रहे हैं कि 
“हमने नरेंद्र मोदी से कहा ‘तुम्हें’ जाति जनगणना करना पड़ेगा, हमने ‘उससे’ कहा कि ‘तुम्हें’ संविधान को माथे से लगाना पड़ेगा।” एक प्रधानमंत्री के बारे में लोकसभा में विपक्ष के नेता से इस तरह तू-तड़ाक की भाषा से देश भर के लोग हैरान हैं। लोग राहुल गांधी के इस बयान को लेकर उसके संस्कार और परवरिश पर कोस रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर कर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते को लताड़ लगा रहे हैं। इससे राहुल ही नहीं गांधी परिवार की भी फजीहत हो रही है…

बिहार : पहलगाम की तरह दरभंगा में जेहादियों ने दरभंगा में लोगों ने राह चलते हिंदुओं पर धर्म पूछ लाठी-तलवार से किए हमले; पाकिस्तान परस्तों को तुरंत गिरफ्तार कर सारी सरकारी सुविधाओं से ब्लैकलिस्ट किया जाए

                                                बिहार के दरभंगा में हिंदुओं पर धर्म पूछकर हमला
पहलगाम आतंकी हमले में 22 अप्रैल को हिंदुओं को धर्म पूछकर मौत के घाट उतारा गया और अब बिहार के दरभंगा में धर्म पूछकर हिंदुओं पर हमला करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने बताया है कि सड़क किनारे खड़े होकर कुछ मजहबी लोगों ने उनसे पहले उनका धर्म पूछा और फिर बाद में उनपर लाठी-डंडा और तलवार से हमला किया।

इस घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है और पुलिस द्वारा 4 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूरी घटना जाले थाना क्षेत्र की है। पीड़ितों की पहचान राजकिशोर यादव, रामसागर यादव, अमित कुमार, सुमित कुमार, रंजीत यादव, ऋतिक यादव, मिथिलेश यादव, लक्ष्मण यादव, सोनू कुमार, दिनेश मांझी के तौर पर हुई है।

पीड़ितों ने बताया कि वो लोग 6 मई को शाम 7 बजे बहेड़ा पोखर के पास मुस्लिम समुदाय के युवक लाठी, भाला, तलवार, रॉड और पिस्टल लेकर खड़े थे। जैसे ही वो लोग उस रास्ते से गुजरे वहाँ उनसे पहले उनका धर्म पूछा गया और फिर जानलेवा हमला कर दिया गया।

घायलों में एक अमित कुमार भी हैं। अमित ने बताया कि उन लोगों ने पहले धर्म पूछा और जैसे ही हमने खुद को हिंदू बताया, उन लोगों ने हमला कर दिया। वो लोग बस हिंदुओं को मार रहे थे।

घटना में कुल 11 लोग घायल हुए हैं। इनमें एक इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाले में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर है। वहीं कुछ को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

घटना के संबंध में लक्ष्मण कुमार यादव, मनोज कुमार यादव, सोनू यादव, दिनेश यादव, संजय यादव ने थाने में शिकायत दी है।

एफआईआर में 21 आरोपितों का नाम दिया गया है। इनमें कुरबान कुरैशी इरफान कुरैशी, सलमान इब्रान कुरैशी, पप्पू कुरैशी, मेराज, रेयाज, आसिफ, इम्तियाज, सरफरराज, एजाज, शहनवाज, दर्जी रिजवान के नाम हैं।

इस पूरे मामले में बता दें कि ये भी कहा जा रहा है कि ये विवाद स्कूटी में टक्कर लगने के बाद शुरू हुआ। टक्कर ऋतिक और दर्जी नूर आलम की बेटे की स्कूटी के बीच हुई थी। ऋतिक ने जब नुकसान का मुआवजा माँगा तो नूर का बेटा आनाकानी करने लगा। ऋतिक ने स्कूटी अपने पास रख ली और कहा स्कूटी अगले दिन मिलेगी।

इसके बाद दोनों को समझाया गया और मामला शांत कराकर उन्हें वापस भेज दिया गया। लेकिन, अगले दिन मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई और फिर हिंदुओं को निशाना बनाने लगी।

पुलिस कार्रवाई की बात करें तो यही पता चला है कि इस केस में 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए जाँच जारी है। पूरे मामले में पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना परिसर में शांति समिति की बैठक कराई। थानाध्यक्ष ने बताया कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

बिहार : साथियों ने हाथ-पाँव पकड़ा, काज़िम अंसारी ने ताबतोड़ घोंपा चाकू… धराया VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के पिता का हत्यारा

             पूर्व मंत्री मुकेश सहनी (बीच में) के पिता जीतन सहनी (दाएँ) का हत्यारा निकला काज़िम अंसारी (बाएँ)
बिहार के पशपालन एवं मत्स्यपालन मंत्री रहे मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या दरभंगा के सुपौल बाजार स्थित जीरात मोहल्ले स्थित उनके आवास पर कर दी गई थी। अब इस मामले में हत्यारे काज़िम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। 70 वर्षीय जीतन सहनी का उनके घर में ही शव मिला था और सामान अस्त-व्यस्त थे। काज़िम अंसारी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने 2022 में 1 लाख रुपए और फिर 2023 में 50,000 रुपए सूद पर लिया था।

इस तरह काज़िम अंसारी ने 70 वर्षीय जीतन सहनी से सूद पर डेढ़ लाख रुपए उधार ले रखे थे। इन्हीं पैसों को लेकर हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। पैसों के अभाव में काज़िम अंसारी की दुकान बंद हो गई थी, बेरोजगार होने के बाद उसने 4% मासिक ब्याज पर अपनी जमीन गिरवी रखी हुई थी। वो पैसा नहीं चुका पा रहा था। 12 जुलाई को वो अपने साथी मोहम्मद सितारे उर्फ़ छेदी के साथ जीतन सहनी के पास गया था। उधर के हिसाब की बात करते हुए वो ब्याज की रकम कम करने और जमीन वापस लेने की बातें कर रहे थे।

इस दौरान दोनों में झगड़ा हो गया। मौके पर मौजूद मोहम्मद छेदी और VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के चचेरे भाई प्रमोद ने इसकी पुष्टि की है। फिर काज़िम अंसारी ने अपने साथियों के साथ मिल कर अपने लोन का कागज़ात जबरन छीनने की साजिश रची, इसके लिए घटना की रात उसने 10-11 बजे के बीच रेकी भी की थी जो CCTV में कैद है। रात के करीब डेढ़ बजे ये लोग पीछे के दरवाजे से घर में घुसे। इन्होंने जीतन सहनी को जगा कर अपने लोग के कागज़ात वापस माँगे।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, जीतन सहनी ने इन्हें गाली देना शुरू कर दिया। काज़िम अंसारी ने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से वार करना शुरू कर दिया, जबकि उसके साथियों ने जीतन सहनी का हाथ-पाँव पकड़ रखा था। इन्होंने घर में रखी अलमारी को भी पानी में फेंक दिया, क्योंकि इन्हें न चाभी मिली न इनके कागज़ात। इन्होंने सोचा कि इससे ये उधार चुकाने से बच जाएँगे। वारदात के समय उसने जो कपड़े पहने थे, उन्हें भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। उस पर फारेंसिक जाँच में खून मिला है। इधर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी सांत्वना देने के लिए मुकेश सहनी के आवास पर पहुँचे।

जेहादियों का तांडव : वहाब ने कुत्ते को रामनामी पहनाया, जामिया में लगे बाबरी के नारे: कही पथराव-कहीं भगवा फाड़ा, दरभंगा से बाड़मेर तक घृणा की कई घटनाएँ

                            दरभंगा में शोभायात्रा पर पत्थरबाजी और हमला (फोटो साभार : दैनिक जागरण)
राम जन्मभूमि पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो गई है। अयोध्या राम मंदिर को लेकर जहाँ चारों ओर हर्षोल्लास देखने को मिल रहा है, वहीं हिंदू और राम नाम से घृणा करने वाले भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। जब तक इन जेहादियों पर कोई सख्त कानून नहीं बनेगा, ये बिकाऊ 'अभिव्यक्ति की आज़ादी'(freedom of speech) के नाम से उपद्रव करते रहेंगे। आखिर 
freedom of speech की छूट एक तरफ़ा क्यों और कब तक? गाजियाबाद में वहाब ने अपने कुत्ते को रामनामी पहनाकर पूरे मोहल्ले में घुमाया तो दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में बाबरी के नारे लगाए गए। राजस्थान के बाड़मेर में भगवा झंडे को फाड़ा गया तो बिहार के दरभंगा में शोभा यात्रा पर पथराव हुआ। गुजरात के वडोदरा में भी शोभा यात्रा को निशाना बनाया गया।

गाजियाबाद में शादाब ने कुत्ते को रामनामी पहनाया

दिल्ली से सटे जिले गाजियाबाद में वहाब ने अपने कुत्ते के गले में भगवान राम के नाम की पटका डाली और उसे पूरे मोहल्ले में घुमाया। इस घटना पर स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध किया तो पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने शादाब को गिरफ्तार कर लिया है। सहायक पुलिस आयुक्त (इंदिरापुरम) स्वतंत्र कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वैशाली सेक्टर तीन में मजहब विशेष के युवक ने ऐसा काम किया। कौशांबी पुलिस ने जाँच के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने वहाब के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ भड़काने समेत अन्य कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।

बिहार के दरभंगा में शोभा यात्रा पर पथराव

बिहार के दरभंगा में रामलला की शोभा यात्रा पर पथराव किया गया। ये मामला सिंहवाड़ा थाने के भपुरा गाँव का है। सोमवार (22 जनवरी 2024) को श्रीराम शोभा यात्रा के दौरान पथराव किया गया। उपद्रवियों ने दो बाइक सहित डीजे वाहन को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। अचानक हुए हमले से शोभायात्रा में शामिल रामभक्तों में अफरातफरी की स्थिति हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया। उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

राजस्थान में फाड़ा भगवा झंडा

राजस्थान के बाड़मेर में एक पोल पर लगे भगवा झंडा को फाड़ दिया गया, जिसके बाद लोग गुस्से में आ गए। गुस्साए लोगों ने हाईवे को जाम कर दिया और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। मामला बाड़मेर के ग्रामीण कोतवाली क्षेत्र का है। पुलिस ने आरोपित को भाडखा कस्बे से गिरफ्तार कर लिया है। घटना 22 जनवरी के शाम की है।

जामिया में बाबरी की गूँज, पुलिस बल की तैनाती

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में बाबरी मस्जिद के समर्थन में नारे लगाए गए। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि नारेबाजी में कुछेक छात्र शामिल थे। इन्होंने ‘स्ट्राइक फॉर बाबरी’ जैसे नारे लगाए। हालाँकि शैक्षणिक गतिविधि पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

वडोदरा में शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी

गुजरात के वडोदरा में भी शोभायात्रा निकाल रही टोली पर पत्थरों से हमला किया गया। वडोदरा के पडरा में जब शोभा यात्रा चल रही थी तो अचानक पत्थरों की बारिश होने लगी। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें अफरातफरी का माहौल दिख रहा है। पास ही एक मस्जिद भी नजर आ रही है। फिलहाल हालात काबू में हैं।
अवलोकन करें:-
राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले भी कई जगहों से हिंसा की खबरे सामने आई थी। कहीं मुस्लिम भीड़ ने छतों से पत्थरबाजी की, तो कहीं पर चलती सड़क पर हिंदुओं को निशाना बनाया। एक जगह तो तिलमिलाहट में इस्लामी कट्टरपंथी ने अयोध्या के राम मंदिर को ही उड़ा डालने की धमकी दी है। गुजरात के मेहसाना में प्राण प्रतिष्ठा से पहले निकाली गई शोभा यात्रा पर छतों से पत्थरबाजी हुई। पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आँसू गैस के छोड़ने पड़े। इलाके में पुलिस बल तैनात है और पत्थरबाजों पर कार्रवाई करते हुए 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। इसी तरह मुंबई के मीरा रोड में भी सनातन यात्रा पर भीड़ ने हमला किया है।

आज दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि देने पर रोक, कल कहेंगे – माँ काली के गले से हटा दो नरमुंडों की माला: बकरीद की कुर्बानी से अलग है सनातन की यह परंपरा

             श्यामा माई मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता के ऊपर बनी है, जो खुद एक तंत्र साधक थे
बिहार सरकार ने दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद हिन्दू आक्रोशित हैं। ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ ने ये फैसला लिया है। इसके अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन हैं, जो पूर्व में विधि सचिव रहे हैं। उनका पुतला जलाते हुए उन्हें पद से हटाने की माँग की जा रही है। श्रद्धालु कह रहे हैं कि हिन्दू परंपरा के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है, इतिहास में प्राचीन काल से जो प्रथा चली आ रही है उसमें बाहर से हस्तक्षेप क्यों किया जा रहा है?

यही कारण है कई ‘बजरंग दल’ जैसे हिन्दू संगठन भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। बिहार में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस की संयुक्त सरकार है जिसके मुखिया नीतीश कुमार हैं। तेजस्वी यादव उनके डिप्टी हैं। तीनों ही दल भाजपा के विरोध में हैं, केंद्र की मोदी सरकार के विरोधी हैं। भाजपा हिंदुत्व के मुद्दों को लेकर मुखर रहती है। ऐसे में हिन्दू धर्म में हस्तक्षेप करने वाले इस फैसले को लेकर विरोध होना स्वाभाविक है। जिन भक्तों की श्यामा माई में आस्था है और जिनकी पीढ़ियाँ दशकों से वहाँ पशु बलि देती आ रही है, उनके हाथ बाँधे जाने का क्या तुक है?

सबसे पहले श्यामा माई मंदिर के बारे में जानते हैं। ये मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर स्थित है। रामेश्वर सिंह साधक भी थे, इसीलिए उनकी चिता पर माँ काली का ये मंदिर बना। यही कारण है कि इसे रामेश्वरी माई मंदिर भी कहा गया। उनके बेटे कामेश्वर सिंह ने सन् 1933 में इसका निर्माण करवाया था। मंदिर के गर्भगृह की बात करें तो माँ काली की प्रतिमा के दाहिनी ओर महाकाल और बाईं ओर गणपति एवं बटुक भैरव स्थापित हैं।

माँ काली के गले में जो मुंडमाला है, उसमें हिंदी वर्णमाला में जितने अक्षर हैं उतने ही नरमुंड हैं। हिंदी वर्णमाला को सृष्टि का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्र में यहाँ विशेष आयोजन होता आ रहा है। बड़ी बात ये है कि यहाँ वैदिक के साथ-साथ तांत्रिक प्रक्रियाओं से भी माँ काली की आराधना होती है। ‘रामेश्वर चरित मिथिला रामायण’ में महाराज के सेवक रह चुके लालदास ने श्यामा माई को माँ सीता का रूप भी बताया है। इसमें कथा है कि सहस्त्रानन्द असुर का एक ठीक भगवान राम को लग गया, जिसके बाद आक्रोशित माँ सीता का रंग काला पड़ गया और जिह्वा निकल आई।

इसके बाद उन्होंने असुर का वध कर दिया। उनके इसी रूप को श्यामा माई कहा गया। कहा जाता है कि उनका क्रोध शांत करने के लिए स्वयं भगवान शिव को आना पड़ा था। यहाँ 2 चीजें गौर करने लायक हैं – पहली, ये एक शाक्त मंदिर है, देवी पूजा का स्थल है। दूसरी, यहाँ तंत्र साधना भी होती आई है। ये दोनों ही सनातन हिन्दू परंपरा का हिस्सा हैं। इनमें पशु बलि दी जाती है। यही कारण है कि हिन्दू श्रद्धालु आक्रोशित हैं। किसी भी समुदाय अपनी पूजा-पद्धति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकता।

असल में ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ ने पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला देकर बलि प्रथा पर रोक लगाई है। प्रदर्शनकारी तैयारी कर रहे हैं कि कुछ दिनों बाद सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा होकर पशु बलि दी जाएगी और राज्य सरकार के इस आदेश के साथ असहयोग की घोषणा होगी। इसी तरह अक्टूबर-नवंबर 2020 में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित कामठी के दुर्गा मंदिर में पशु बलि देने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई थी। केरल में तो कानून बना कर ही पशु बलि को बैन कर दिया गया था।

‘वैदिक भारत’ के संस्थापक और हिन्दू परंपराओं के विशेषज्ञ मोहित भरद्वाज ने तब ऑपइंडिया से कहा था कि पशु बलि की हिन्दू धर्म में अनुमति है, लेकिन कई नियमों एवं पाबंदियों के साथ। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म में ही कई समुदाय देवता को भोजन के रूप में पशु को समर्पित करते हैं। उन्होंने श्रौत और गृह्य सूत्रों का उदाहरण दिया, जिनमें पशु बलि की अनुमति है। सुचित्रा समंता ने ‘एसोसिएशन फॉर एशियाई स्टडीज’ में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में बताया था कि कई तंत्रों एवं पुराणों में पशु बलि की अनुमति है।

यानी, इनमें देवी-देवताओं को भोजन के रूप में मांस और सब्जियाँ, दोनों अर्पण करने के विधान हैं। देवी पूजा में पशु बलि का विशेष महत्व रहा है। जैसे, बंगाल को ले लीजिए। बंगाल में नवरात्रि के दौरान देवी को मांस भी प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है। दुनिया भर में देवी पूजा बंगाल में भी सबसे भव्य तरीके से होती है। वहाँ पशु बलि आम है, क्योंकि ये शाक्त परंपरा का हिस्सा है। शाक्त, हिन्दू समाज का हिस्सा है। शक्ति की उपासना और तंत्र साधना में पशु बलि प्राचीन काल से दी जाती रही है।

इसका कारण है कि वनवासी समाज भी हिन्दू धर्म का हिस्सा है और वो देवी-देवताओं को खुश करने के लिए वही अर्पण करता रहा है, जो उसकी दिनचर्या का हिस्सा है। इसीलिए, वो मांस भी प्रसाद के रूप में चढ़ाते आ रहे हैं। भारत के ‘सेक्युलर’ कानून का तमाशा देखिए कि यहाँ अगर कोई मांस खाने के लिए पशु हत्या करे तो ये जायज है, लेकिन अगर बलि के रूप में हो तो अपराध है। साफ़ है कि सिर्फ एक समुदाय की धार्मिक परंपराओं का मानमर्दन किया जा रहा है, उन्हें रोका जा रहा है।

पशु बलि पर सरकार बैन लगा देती है, लेकिन बकरीद के दिन खून की नदियाँ बह जाती हैं फिर भी किसी के मुँह से चूँ तक नहीं मिलता। मुस्लिम समाज मांस भी ‘झटका’ नहीं, ‘हलाल’ खाता है। इस प्रक्रिया में जानवरों को तड़पा-तड़पा कर धीमे-धीमे मारा जाता है। इसमें किसी को पशु क्रूरता नज़र नहीं आती। चूँकि मुस्लिम समाज में एकता है और राजनीतिक दलों का उनका तुष्टिकरण भी करना है, इसीलिए उनकी किसी भी परंपरा को छुआ तक नहीं जाता।

लेकिन, बात हिन्दुओं की हो तो सरकारें ठेकेदार बन कर सामने आ जाती हैं। जबकि पशु हत्या का इस्लामी तरीका खासा बर्बर है। हालाँकि, इस्लामी तौर-तरीके इसका आधार नहीं होने चाहिए कि हिन्दू परंपराओं को लेकर सरकार या अदालत क्या फैसला लेती है। हिन्दू समाज को अपनी परंपराओं के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। दूसरे समाज में क्या हो रहा है, इसे आधार बना कर नहीं बल्कि अपने इतिहास को आधार बना कर। इस हिसाब से पशु बलि पर सरकार का बैन लगाना ठीक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा किए जाने की अनुमति दे दी थी, उन एक्टिविस्ट्स की याचिका के आधार पर जिनकी हिन्दू धर्म में कोई श्रद्धा ही नहीं थी। जबकि सबरीमाला मंदिर में बच्चियों और बुजुर्ग महिलाओं को पूजा की अनुमति है। फिर भी इस मंदिर के बारे में दुष्प्रचारित किया गया कि ये महिला विरोधी है। किसी मस्जिद में कौन घुसेगा और कौन नहीं, क्या ये आपने सरकार या न्यायपालिका को तय करते हुए देखा है?

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हिन्दू धर्म कैसे चलेगा, ये हमारे मंदिरों की परंपराओं, शास्त्रों, इतिहास और हिन्दू विद्वानों के मत से तय होगा – सरकार या कोर्ट से नहीं। क्योंकि सनातन हिन्दू धर्म जब से चला आ रहा है, तब से अनेक बार इसमें नए बदलाव हुए हैं, कुछ चीजें जुड़ी हैं और कुछ हटाई गई हैं – ये सब समाज ने ही तय किया है। तब कोर्ट या सरकार मौजूदा रूप में नहीं होते थे। कुछ दिनों बाद सरकार कहने लगेगी कि माँ काली के गले से नरमुंड भी हटा दिए जाएँ, इससे हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है। धर्म ऐसे नहीं चलेगा।