Showing posts with label #no confidence motion. Show all posts
Showing posts with label #no confidence motion. Show all posts

ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा विपक्ष: लोकसभा स्पीकर को हटाने का नियम और कब-कब लाया गया प्रस्ताव

आखिर राहुल गाँधी के गुलाम बन INDI गठबंधन देश को कहां ले जाना चाहता है? वैसे लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला जो अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने जा रहे हैं उसके जिम्मेदार वे स्वयं हैं। लोक सभा में हंगामा कर रोज के करोड़ों रूपए बर्बाद करने वालों को सदन से बाहर नहीं करना। आखिर मार्शल किस लिए हैं? लोक सभा अध्यक्ष की अपेक्षा विधान सभा के अध्यक्ष हंगामा करने वालों के विरुद्ध मार्शल को बुलाकर उन सदस्यों को सदन से बाहर करते हैं। बिरला को हंगामा करने वाले सदस्यों को बाहर निकलवाकर सदन की कार्यवाही को चालू रखना चाहिए। जब तक ईंट का जवाब पत्थर नहीं दिया जाएगा उपद्रवी बाज़ नहीं आने वाले।   
लोकसभा में विपक्ष लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी को संसद में बोलने नहीं देने का आरोप विपक्ष लगा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान राहुल गाँधी पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे के अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए सरकार पर आरोप लगा रहे थे। उस वक्त स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए राहुल गाँधी को रोका। इस मुद्दे पर कई दिनों तक विपक्ष ने सदन को नहीं चलने दिया।

कांग्रेस इस बात से भी नाराज है कि जब महिला सांसदों ने पीएम की सीट को सदन में घेरा, तो स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि कोई अप्रत्याशित घटना घट सकती थी, इसलिए प्रधानमंत्री को सदन आने से उन्होंने रोका। लेकिन ऐसी घटनाएँ सदन में पहली बार हुई कि महिला सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा को संबोधित नहीं कर पाए। इसकी वजह महिला सांसदों का इस तरह से पीएम की सीट को घेरना था। चर्चा यह है कि नरेंद्र मोदी पर हमले की सूचना ओम बिरला को कांग्रेस में इस घिनौनी हरकत के विरोधी सदस्यों ने दी थी।  

विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी और दूसरे प्रधानमंत्रियों पर आरोप लगाया। संसद में हंगामे के दौरान 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। सासंदों के निलंबन और महिला सांसदों द्वारा पीएम की सीट घेरने को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगे थे। इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी बोलना चाहते हैं, लेकिन बोलने की अनुमति नहीं मिली।

स्पीकर के खिलाफ ‘हटाने का प्रस्ताव’ लाया जाता है

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, उससे थोड़ा अलग होता है। इसमें लोकसभा स्पीकर को ‘हटाने का प्रस्ताव’ यानी मोशन ऑफ रिमूवल ऑफ स्पीकर लाया जाता है। यह संविधान की अनुच्छेद 94 सी के तहत लाया जाता है। इस अनुच्छेद में लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताई गई है।

लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश करने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होता है। ये नोटिस लिखित होना चाहिए। इस प्रस्ताव पर कम से कम 50 सांसदों का हस्ताक्षर होना जरूरी है यानी कोई भी सांसद लोकसभा में खड़े होकर अपने दम पर स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव नहीं ला सकता। स्पीकर पर स्पष्ट और ठोस आरोप लगे हों। प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद इस पर सदन में चर्चा होती है और फिर सांसद वोटिंग करते हैं। इस दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं करते हैं, बल्कि डिप्टी स्पीकर या सदन का वरिष्ठ सदस्य सदन की अध्यक्षता करते हैं।

हटाने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत

लोकसभा में प्रस्ताव सदन में उपस्थित सांसदों द्वारा बहुमत से पास होना जरूरी है, कोई दो-तिहाई बहुमत की जरूरत नहीं होती। स्पीकर को हटाने के लिए सिर्फ बहुमत की जरूरत होती है। जितने सांसद वोट दे रहे हों, उनका 50 फीसदी से एक ज्यादा जरूरी है।

अगर प्रस्ताव पास हो जाता है तो तुरंत ही स्पीकर पद से हट जाता है। वह सांसद बना रहता है, लेकिन स्पीकर नहीं और फिर सदन को दूसरा स्पीकर चुनना होता है।

स्पीकर को हटाने के लिए आज तक कभी वोटिंग नहीं हुई

सदन में स्पीकर को हटाने के लिए कई बार नोटिस दिया गया है। सदन में प्रस्ताव पर बहस भी हुई है, लेकिन वोटिंग नहीं हुई है।

पहली बार 1954 में तत्कालीन स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस पर सदन में बहस हुई। विपक्ष ने उनपर कांग्रेस का पक्ष लेने का आरोप लगाया था। सदन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और वोटिंग हुई नहीं।

दूसरी बार लोकसभा स्पीकर डॉक्टर नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ 1967 में हटाने का प्रस्ताव पेश किया। इन पर कांग्रेस का पक्ष लेने का विपक्ष ने आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस वक्त भी मतदान नहीं हुआ।

तीसरी बार 8वीं लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड के खिलाफ विपक्ष ने 1987 में अविश्वास प्रस्ताव रखा। उस वक्त बोफोर्स को लेकर कांग्रेस सरकार पर विपक्ष हमलावर था। विपक्ष का आरोप था कि जाखड नियमों का हवाला देकर विपक्ष को बोलने से रोकते हैं और सरकार को बचाते हैं। इस प्रस्ताव पर भी वोटिंग की नौबत नहीं आई।

13वीं लोकसभा स्पीकर जीएमसी बालयोगी को हटाने के लिए विपक्ष ने नोटिस दिया। उस वक्त एनडीए की सरकार थी। 2001 में नोटिस दिया गया, लेकिन प्रस्ताव खारिज हो गई। उन पर आरोप था कि सरकार के पक्ष में स्थगन प्रस्ताव को वह खारिज कर देते हैं।

2011 में 15वीं लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें 2जी, सीडब्लूजी घोटालों को लेकर बहस में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। स्पीकर सरकार का बचाव कर रही हैं। इस नोटिस को भी खारिज कर दिया गया और वोटिंग तक बात नहीं पहुँची।

17वीं लोकसभा में 2020 में वर्तमान स्पीकर ओम बिरला ने कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष के जबरदस्त हंगामे पर विपक्षी सांसदों को निलंबित किया था। इसके विरोध में विपक्ष ने स्पीकर को हटाने का नोटिस देने की बात सार्वजनिक रूप से कीकांग्रेस लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने पर प्रस्ताव सदन में लाया ही नहीं जा सका।