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अखिलेश यादव सरकार में केवल मुसलमानों का कल्याण


उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति किसी से छिपी नहीं है। सपा ने खुद को हमेशा अल्पसंख्यकों की पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के बीच अपना जनाधार बनाए रखने के लिए पार्टी ने अपने विभिन्न कार्यकालों में अनेक योजनाओं के केंद्र बिंदु में मुस्लिमों को ही रखा। यहां तक कि कई योजनाओं तो उन्होंने सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही शुरू कीं। मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव के कार्यकाल तक अल्पसंख्यक कल्याण को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया। यही कारण है कि भाजपा सहित अन्य दल अक्सर समाजवादी पार्टी पर “मुस्लिम तुष्टिकरण” की राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं।

सपा ने चार कार्यकाल में मुस्लिमों में ही पहचान बनाई

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार चार प्रमुख कार्यकालों में सत्ता में रही। मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 के बीच मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 तक राज्य की कमान संभाली। इन अवधियों में मुस्लिम समुदाय की शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार, मदरसा आधुनिकीकरण, अल्पसंख्यक महिलाओं के उत्थान और सामाजिक सुरक्षा के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक समाजवादी पार्टी ने अल्पसंख्यक कल्याण को अपनी राजनीति और शासन की केंद्रीय धुरी बनाए रखा। छात्रवृत्ति, मुस्लिम लड़कियों के लिए आर्थिक सहायता, मदरसा आधुनिकीकरण, उर्दू शिक्षा और आरक्षण की मांग जैसी पहलों ने मुस्लिम समुदाय के बीच पार्टी की मजबूत पहचान बनाई। दूसरी ओर, इन्हीं नीतियों को विपक्ष ने “मुस्लिम तुष्टिकरण” करार दिया।

कब्रिस्तानों की चारदीवारी योजना: वोट बैंक के लिए कब्जे 

अखिलेश यादव सरकार के सबसे चर्चित फैसलों में से एक राज्यभर के कब्रिस्तानों की चारदीवारी का निर्माण था। वर्ष 2012-13 के बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया गया। सरकार का तर्क था कि भूमि विवादों और अतिक्रमण को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हजारों कब्रिस्तानों की चारदीवारी के लिए एक हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए। विपक्ष ने इसे खुलकर मुस्लिम तुष्टिकरण बताया। यह योजना मुस्लिम समाज में बेहद लोकप्रिय रही और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिला। सपा सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मो. आजम खां के पास था। उन्होंने ही कब्रिस्तानों की चारदीवारी के निर्माण की योजना चलाई। इस योजना पर पांच साल में 1200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि हकीकत यह है कि कई जिलों में योजना पर काम ही नहीं हुआ। जहां काम हुआ भी वहां भी घपले की शिकायतें हैं।

लैपटॉप वितरण योजना में उर्दू शिक्षा और उर्दू सॉफ्टवेयर को बढ़ावा

अखिलेश यादव सरकार ने लैपटॉप वितरण योजना में उर्दू सॉफ्टवेयर शामिल करने की घोषणा की। रामपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि विद्यार्थियों को दिए जाने वाले लैपटॉप में हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया जाएगा। मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग ने इसे उर्दू भाषा के संरक्षण और डिजिटल युग में उसके विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना।

सच्चर समिति के तहत मुस्लिमों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की पैरवी

दिसंबर 2012 में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर सपा विधि विषेशज्ञों की राय लेकर केरल तथा आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मुसलमानों को इतना आरक्षण देगी, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुसलमानों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे। हालांकि यह नीति पूरी तरह लागू नहीं हो सकी, लेकिन मुस्लिम समुदाय के बीच इसे सपा की राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत किया गया।

‘हमारी बेटी उसका कल’: मुस्लिम लड़कियों के लिए सबसे चर्चित योजना

10 दिसंबर 2012 को रामपुर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने “हमारी बेटी उसका कल” योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत हाईस्कूल उत्तीर्ण अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को 30,000 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती थी। इसका उद्देश्य लड़कियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह संबंधी सहायता देना था। योजना का सबसे बड़ा लाभ मुस्लिम छात्राओं को मिला। क्योंकि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय का है। प्रारंभिक चरण में लगभग 14,000 लड़कियों को इसका लाभ मिला। बाद में यह संख्या और बढ़ी। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। “हमारी बेटी उसका कल” योजना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका तक दाखिल हुई थी।

 वोट बैंक को साधने के लिए 84 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे

2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार समाजवादी पार्टी ने 2012 विधानसभा चुनाव में लगभग 84 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। सपा के 42 मुस्लिम उम्मीदवार विजयी होकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में कुल 63 मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचे थे, जिनमें सबसे अधिक सपा के थे। 15 मार्च 2012 को बनी पहली अखिलेश यादव सरकार में कुल 48 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इनमें 9 मुस्लिम मंत्री शामिल थे।
प्रदेश में हज यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार
मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए अखिलेश सरकार ने हज यात्रियों की सुविधा के लिए लखनऊ हज हाउस और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तार किया। हज प्रशिक्षण शिविरों, आवास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया। गाजियाबाद में 1886 हज यात्रियों के रुकने के लिए बनाए गए हज हाउस में शासन ने 51.16 करोड़ रुपये खर्च किए। 11 साल में बनकर तैयार हुए इस हज हाउस शिलान्यास 30 मार्च 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम ¨सिंह ने किया था और उद्घाटन उनके पुत्र व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 5 सितंबर 2016 को किया। नगर विकास मंत्री आजम खान ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के हज पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जाने के लिए व्यवस्था की गई है।