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सेलेक्टिव क्यों हैं राहुल गांधी और CJP? झारखंड में सड़क पर उतरे युवाओं का सवाल


झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में गड़बड़ी, घोटालों और पेपर लीक को लेकर बवाल मचा हुआ है। छात्र और युवा सड़क पर उतर कर परीक्षा रद्द करने और सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। लेकिन 29 जुलाई,2026 को लोकसभा में 53 मिनट तक परीक्षा और पेपर लीक पर भाषण देने वाले राहुल गांधी ने एक बार भी झारखंड के छात्रों और युवाओं की मांगों का जिक्र नहीं किया। वहां पर परीक्षाओं में हो रही धांधली का मुद्दा नहीं उठाया, क्योंकि झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम की सरकार है। वहीं 29 जुलाई को ही झारखंड के बीजेपी सांसदों ने संसद भवन परिसर में झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने हेमंत सरकार और सरकार में शामिल कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सांसदों ने पूछा राहुल गांधी मौन क्यों है? इतना सब होने के बावजूद राहुल गांधी की आंखें क्यों नहीं खुलीं?

खड़गे, सोनिया, राहुल का दोहरा चरित्र – आदित्य साहू
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस दोहरी राजनीति करती है। दिल्ली में मांग करती है कि जांच हो और झारखंड में पूरी तरह मौन है। 19 अभ्यर्थी उत्पाद सिपाही दौड़ में मारे गए हैं। कांग्रेस झारखंड में मांग करे कि उन मृत बच्चों के परिजनों को हेमंत सरकार एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा तत्काल भुगतान करे। भाजपा की मांग है कि दिल्ली से कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी झारखंड की धरती पर जाएं, वहां की जनता इनका चेहरा देखना चाहती है और इनसे पूछना चाहती है कि आप लोगों का यह दोहरा चरित्र क्यों?

झारखंड में परीक्षा में धांधली के विरोध में सड़क पर उतरे छात्र और युवा
बुधवार 29 जुलाई को रांची में हजारों छात्रों ने जेपीएससी 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में धांधली के विरोध में सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक संविधान यात्रा निकाली। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने झारखंड सरकार और आयोग से भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब छात्र और युवा सवाल कर रहे हैं कि राहुल गांधी सेलेक्टिव क्यों है? जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं पर अपनी आखें खोलें, परीक्षा रद्द करें और सीबीआई से जांच कराएं।

सरकार ने छात्रों को प्रदर्शन में हिस्सा लेने से रोका, बस मालिकों को धमकी
झारखंड की कांग्रेस और जेएमएम सरकार युवाओं के इस प्रदर्शन को दबाना और कुचलना चाहती है।  छात्रों को प्रदर्शन स्थलों तक पहुंचने से रोकने और यातायात व बस सेवाओं को प्रभावित करने की खबरें सामने आईं। रांची, हजारीबाग और अन्य शहरों में परीक्षा में गड़बड़ी व पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर छात्रों के जत्थों और वाहनों को रास्ते में ही रोका गया। प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाली कई बस सेवाओं और परिवहन के साधनों के मार्ग में फेरबदल किया गया या उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। प्रशासन की ओर से बस सेवाएं बंद रखने या बदलने का दबाव, और धमकाने जैसी परिस्थितियाँ देखने को मिलीं।

विरोध के बीच JPSC की मुख्य परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित
बढ़ते विवाद और विरोध के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 को आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है। कथित अनियमितताओं की जांच सीआईडी (CID) द्वारा की जा रही है, जिसके तहत पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक और अन्य संबंधित लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। लेकिन सवाल है छात्रों के नाम पर दिल्ली की सड़कों पर हंगामा करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी कहां हैं? क्या छात्रों की आवाज़ सिर्फ वहीं सुनाई देती है, जहां राजनीतिक एजेंडा साधना हो? क्या झारखंड के छात्रों के अधिकार, उनका भविष्य और उनका इन पार्टियों के लिए कोई मायने नहीं रखता? जब मुद्दा राजनीति का नहीं, छात्रों के भविष्य का हो, तब यह चुनिंदा संवेदनशीलता और सुविधानुसार चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है।

JPSC की कुल 10 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच CBI के पास
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित कुल 10 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पास है। 6 भर्ती जांच के दायरे में और 9 भर्ती परीक्षा स्थगित हो गई हैं। हालिया विवादों और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच राज्य स्तर पर क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) द्वारा की जा रही है, जिसमें अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


वामपंथी और विपक्षी दल कैसे कर रहे छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल? विदेशी फंडिंग और खालिस्तानी कनेक्शन पर भी सवाल

CAA प्रोटेस्ट से लेकर अब NEET पेपर लीक तक विपक्ष ने जितने भी धरने/प्रदर्शन हुए हैं सभी अपने असली मुद्दे से भटके हैं। दूसरे विपक्ष का किसी न किसी बहाने संसद को बाधित करना रहा है। तीसरे, अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मुग़ल आक्रांताओं के गुणगान की बजाए उनकी असलियत पुस्तकों में लाई गयी होती कोई प्रधान का इस्तीफा नहीं मांगता। सभी धरनों में भोजन मिलना पहली बार देखा गया है। जो इस बात को साबित करता है कि हमारा विपक्ष भारत विरोधियों के हाथों बिका हुआ है। जनता समझती है ये नेता जनता के हित में काम कर रहे हैं जबकि संसद से लेकर सड़क तक जो भी उपद्रव हो रहा है सब विदेशी फंडिंग से हो रहा है। जिसका तक़रीबन हर चैनल पर जिक्र किया जा रहा है। चुनावों में जनता से मदद मांगी जाती है लेकिन धरनों में भारत विरोधियों की शरण में, ये क्या तमाशा है?     
राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर तमाशे, उपद्रव और घिनौनी राजनीति का गवाह बन रहा है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के शुरू हुए एक व्यंग के मंच और तथाकथित छात्र संगठन के बैनर तले जो कुछ भी पिछले दिनों से रचा जा रहा है, उसने देश के जागरूक नागरिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

परीक्षा सुधारों, रोजगार और छात्रों के निष्पक्ष भविष्य की जिन माँगों को लेकर यह आंदोलन शुरू होने का दावा किया गया था, वह असली मुद्दा अब बहुत पीछे छूट चुका है। https://www.facebook.com/share/r/1F4fka4oWh/

आज जंतर-मंतर का मंच छात्रों की समस्याओं का समाधान खोजने की जगह विपक्षी दलों का ‘राजनीतिक लॉन्चपैड’ और ‘मोदी विरोधी बैटलग्राउंड’ बन गया है। लोकतंत्र में जनता द्वारा बार-बार खारिज की जा चुकी और अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की हताशा में झुलस रही कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जैसी पार्टियाँ इस मंच का इस्तेमाल केवल अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए कर रही हैं।

इतना ही नहीं, बांग्लादेश, कतर से लेकर खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) जैसे भारत विरोधी तत्वों का इस आंदोलन में दिलचस्पी लेना और वित्तीय सहायता फंडिंग का ऐलान करना यह साफ दिखाता है कि इस पूरे ड्रामे के तार कितने खतरनाक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

पृष्ठभूमि और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उभार: व्यंग्य से शुरू हुआ खेल अब अराजकता का औजार

शुरुआत में जिस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को सोशल मीडिया पर एक मजाकिया या व्यंग्यात्मक ग्रुप की तरह पेश किया गया था, वह रातों-रात विरोध प्रदर्शन का चेहरा कैसे बन गई? इस संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके सहयोगियों ने जब NEET परीक्षा में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाकर जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू किया, तो पूरे देश के आम छात्रों को लगा कि शायद यह उनकी आवाज है। लेकिन महज कुछ ही दिनों में इस पूरे आंदोलन की दिशा मोड़ दी गई।

छात्रों के जायज सवालों को किनारे करके मंच से नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी, राजनीतिक भाषणबाजी और व्यवस्था को अपाहिज बनाने की धमकियाँ दी जाने लगीं। व्यंग्य का चोला पहनकर उतरी CJP दरअसल वामपंथी इकोसिस्टम और मोदी विरोधी लॉबी का ही नया अवतार बनकर उभरी है, जिसका मकसद केवल देश में अशांति और अस्थिरता का माहौल बनाना है।

जो छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार के अवसर तलाश रहे थे, उन्हें समझने ही नहीं दिया गया कि उनके पीछे से एक सुनियोजित राजनीतिक और विचारधारात्मक एजेंडा चलाया जा रहा है।

राजनीति चमकाने की होड़: कॉन्ग्रेस, आप, सपा और TMC ने छात्रों के मंच पर डाला डेरा

जैसे ही जंतर-मंतर पर भीड़ जुटने लगी, वैसे ही अपनी खोई साख तलाश रहे विपक्षी दलों ने इस मौके को भुनाने में जरा भी देर नहीं की। शिक्षा और छात्रों के हित का ढोंग रचने वाली राजनीतिक पार्टियों में इस बात की होड़ मच गई कि कौन जंतर-मंतर जाकर CJP का सबसे बड़ा हमदर्द दिखेगा।
कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और उनके तमाम नेताओं ने संसद में काले कपड़े पहनने से लेकर सड़कों पर प्रदर्शन का नाटक करके इस मुद्दे को तुरंत भुनाने की कोशिश की और इसे अपनी डूबती नैया पार लगाने का जरिया बना लिया।

इसी होड़ में समाजवादी पार्टी भी पूरे तामझाम के साथ कूद पड़ी। मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव खुद जंतर-मंतर पहुँचीं और CJP के प्रदर्शनकारियों के बीच बैठकर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई।

यही नहीं अखिलेश यादव और सपा के अन्य बड़े नेताओं से लेकर सपा छात्र सभा के कार्यकर्ताओं तक, पूरी पार्टी ने CJP के इस आंदोलन को खुला राजनीतिक और नैतिक समर्थन देने का ऐलान कर दिया।

जो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार चुनावों में हार के बाद अपनी जमीन तलाश रही है, उसने छात्रों के इस मंच का इस्तेमाल केवल केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने और अपनी पार्टी का राजनीतिक कद चमकाने के लिए किया।

उधर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और उनके नेता खुद को चमकाने सीधे जंतर-मंतर के मंच पर पहुँच गए। जो आम आदमी पार्टी दिल्ली के युवाओं को रोजगार देने और अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने में नाकाम रही, वही आज छात्रों के कंधे पर हाथ रखकर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश कर रही है।

वहीं दूसरी ओर बंगाल में चुनावी हिंसा पर मौन रहने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसी नेताओं ने भी इस मंच का पूरा इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए किया।

इन तमाम राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े चेहरों का अचानक जंतर-मंतर पर जमावड़ा होना यह साबित करता है कि इन्हें छात्रों के भविष्य की जरा भी चिंता नहीं है, बल्कि इन्हें केवल अपने चुनाव के लिए एक गरमा-गरम मुद्दा चाहिए।

भटक गया असली मुद्दा: छात्रों का दर्द पीछे छूटा, एजेंडा हावी हुआ

जो छात्र दूर-दराज के इलाकों से इस उम्मीद में दिल्ली आए थे कि उनकी परीक्षाओं की निष्पक्षता, NEET लीक मामलों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सरकार से गंभीर संवाद होगा, वे आज खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

राजनीतिक नेताओं की एंट्री होते ही पूरा ध्यान छात्रों की वास्तविक माँगों से हटकर अरविंद केजरीवाल के भाषणों, राहुल गाँधी के आरोपों और ममता बनर्जी के समर्थनों पर केंद्रित हो गया। मंच से अब परीक्षा प्रणाली में सुधार की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने, संसद घेरने और प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने की धमकियाँ दी जा रही हैं।

वास्तविक और निर्दोष छात्र अब इस भीड़ में पूरी तरह गायब हो चुके हैं और उनकी जगह पेशेवर प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के नए चेहरों ने ले ली है। छात्रों के कंधों को ढाल बनाकर अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करना और असली मुद्दों को दबा देना ही इन राजनीतिक आकाओं का असली मकसद बन चुका है।

लाइमलाइट बटोरने की होड़: छात्रों के दर्द पर अभिनय करते फिल्मी कलाकार

राजनीतिक दलों के साथ-साथ इस आंदोलन में खुद को ‘क्रांतिकारी’ दिखाने और खोई हुई लाइमलाइट वापस पाने की होड़ फिल्मी गलियारों के कुछ चुनिंदा चेहरों में भी साफ देखी जा रही है।
स्वरा भास्कर, इमरान खान,हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और प्रकाश राज जैसे अभिनेता, जिनका फिल्मी करियर लंबे समय से ढलान पर है या जो मुख्यधारा के सिनेमा से लगभग गायब हो चुके हैं, वे अब जंतर-मंतर के इस मंच को अपने पब्लिसिटी स्टंट का जरिया बना रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लंबे-चौड़े ज्ञान देने वाले ये कलाकार अब छात्रों के हक की आड़ में अपनी ढहती साख को बचाने की नाकाम कोशिशों में जुटे हैं। प्रकाश राज और स्वरा भास्कर जैसे चेहरे, जो हर सरकारी नीति के विरोध में कूदने के लिए जाने जाते हैं, वे एक बार फिर ‘मोदी विरोध’ के अपने पुराने एजेंडे को चमकाने आ गए हैं।
वहीं लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर इमरान खान और हाल ही में सुर्खियों में रहने की कोशिश कर रहीं सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोग भी छात्रों की वास्तविक समस्याओं से दूर, केवल कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर खुद को ‘जनता का मसीहा’ साबित करने का खेल खेल रहे हैं।

विदेश से फंडिंग और ऑनलाइन सप्लाई: कतर, बांग्लादेश और खालिस्तानी एंगल

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर चल रहे इस तथाकथित ‘गरीब और पीड़ित छात्र आंदोलन’ का असली चेहरा तब बेनकाब हुआ, जब इसके पीछे चल रहे संदिग्ध फंडिंग और सप्लाई नेटवर्क की परतें खुलीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के लिए बांग्लादेश और कतर जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के संदिग्ध खातों से भारी मात्रा में ऑनलाइन खाना और महंगे फूड डिलीवरी ऑर्डर्स भेजे गए। सवाल उठता है कि विदेशों में बैठे इन आकाओं को भारत के छात्रों के खाने-पीने की इतनी चिंता क्यों अचानक सताने लगी?

आंदोलन की देशविरोधी साँठगाँठ उस समय पूरी तरह उजागर हो गई जब अमेरिका में बैठे प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने CJP आंदोलनकारियों के लिए 1 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने का खुला ऐलान कर दिया। यह सीधे तौर पर भारत में खालिस्तानी एजेंडे को घुसाने और युवाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है।

यह साबित करने के लिए काफी है कि यह आंदोलन केवल भारत के अंदर की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत विरोधी वैश्विक ताकतें इसे ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की टूलकिट के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।

हिंसा, बैरिकेडिंग तोड़ना और पुलिस पर हमला: ‘बांग्लादेशी मॉडल’ की खतरनाक पुनरावृत्ति

जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियों की तुलना अगर आप पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए तख्तापलट से करेंगे, तो आपको एक जैसा पैटर्न साफ दिखाई देगा। बांग्लादेश में भी इसी तरह छात्रों के आंदोलन की आड़ में उग्र तत्वों ने हिंसा फैलाकर चुनी हुई सरकार को निशाना बनाया था और अराजकता पैदा की थी।

जंतर-मंतर पर CJP के उपद्रवियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नकाब उतारकर जब ‘चलो संसद’ का आह्वान किया, तो दिल्ली पुलिस के लगाए बैरिकेड्स को तोड़ा गया और कानून-व्यवस्था में तैनात सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी और बोतलें फेंकी गईं।

इस हिंसा में उत्तरी दिल्ली के DCP, पंजाबी बाग के ACP समेत 118 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। जब-जब पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कानून के मुताबिक कदम उठाते हैं, तब-तब यह पूरा राजनीतिक इकोसिस्टम ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने लगता है।

ऑन-ड्यूटी जवानों और महिला पुलिसकर्मियों का खून बहाने वाले उग्र तत्वों के बचाव में उतरना यह दिखाता है कि इस आंदोलन का उद्देश्य संवाद नहीं, बल्कि केवल हिंसा और टकराव है।

मोदी विरोध की आड़ में देश को अस्थिर करने का टूलकिट: युवाओं को होना होगा सावधान

शाहीन बाग से लेकर लाल किले पर हिंसा वाले किसान आंदोलन और अब जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से जारी यह प्रदर्शन सब एक ही सिक्के के पहलू हैं। जब-जब देश में मोदी सरकार के खिलाफ जनता का जनादेश नहीं मिलता, तब-तब ये हताश ताकतें सड़कों पर अराजकता का माहौल बनाकर देश को बंधक बनाने की रणनीति अपनाती हैं।

निजी स्वार्थों से प्रेरित राजनीतिक दल अपनी चमक खो चुकी राजनीति को चमकाने के लिए मासूम छात्रों को ह्यूमन शील्ड बना रहे हैं। देश का युवा अगर आज भी यह नहीं समझ पाया कि परीक्षा सुधार के नाम पर उसके कंधों का इस्तेमाल खालिस्तानी समर्थकों, विदेशी फंडिंग एजेंसियों और मोदी-विरोधी नेताओं द्वारा देश विरोधी मंसूबों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

देश के छात्रों को इस राजनीतिक टूलकिट से खुद को तुरंत अलग कर लेना चाहिए ताकि उनका भविष्य, उनकी मेहनत और देश की सुरक्षा तीनों सुरक्षित रह सकें।

पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा ऐलान, फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

इन सब के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट ऐलान किया है कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द और सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा।

PM मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा कि युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में तुरंत आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए लगातार फैसले ले रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँगे। इससे मामलों का जल्दी निपटारा होगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

मोदी ने अपने संदेश में साफ कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार चाहती है कि छात्रों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था पर बना रहे।

RPSC पेपर लीक में चार्जशीट से चौंकाने वाले खुलासे : एक ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व कर लिए सवाल, दूसरी परीक्षा देने ही नहीं गई… फिर भी कांग्रेस राज में बन गईं लेक्चरर

कांग्रेस के शासनकाल में राजस्थान में पुलिस से लेकर हिंदी लेक्चरर की हुई भर्ती परीक्षा में पेपरलीक से लेकर तमाम अनियमितताएँ सामने आई हैं। सब इंस्पेक्टर भर्ती, सीएचओ भर्ती, लाइब्रेरियन भर्ती और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की लेक्चरर भर्ती परीक्षा 2022 में भी पेपर लीक और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

इस परीक्षा में फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी लेने और डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास करने का खुलासा हुआ है। करीब तीन महीने पहले अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो युवतियों- ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जाँच करने वाले एसओजी ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

चार्जशीट से पता चला है कि फर्जी डॉक्यूमेंट पेश करने वाली युवती ब्राह्मा कुमारी ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व पेपर हासिल कर लिया था। उसने गंगरार (चित्तौड़गढ़) की मेवाड़ यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने की कोशिश थी। सांचौर निवासी ब्रह्मा कुमारी ने सुरेश बिश्नोई और ओमप्रकाश मांजू के साथ मिलकर परीक्षा से पहले ही पेपर सॉल्व कर लिया था।

इस परीक्षा में ब्रह्मा कुमारी और कमला का चयन भी हो गया और वे मेरिट में आ गईं। इसके बाद RPSC ने दोनों के दस्तावेज चेक किए तो उसमें गड़बड़ी मिली। आवेदन के समय किसी अन्य विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करना बताया था, जबकि चयन होने के बाद किसी दूसरे विश्वविद्यालय की डिग्री पेश की थी। इसके बाद RPSC ने इस मामले में सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज करा दी।

इसकी जाँच एसओजी को सौंपी गई थी। जाँच में एसओजी को पता चला कि आरोपित युवती कमला ने खुद लिखित परीक्षा नहीं दी थी। इसके लिए उसने अपने स्थान पर उर्मिला पत्नी पूनमा राम नाम की एक युवती को डमी कैंडिडेट के रूप में इस्तेमाल किया था। उर्मिला खुद एक शिक्षिका है। डमी कैंडिटे के रूप में बैठने के लिए उर्मिला ने कमला से 10 लाख रुपए लिए थे।

एसओजी की जाँच में यह भी पता चला कि दोनों आरोपितों को फर्जी डिग्री उनके भाइयों ने उपलब्ध कराए थे। इनमें से एक आरोपित का भाई शिक्षक है, जबकि दूसरे का भाई डॉक्टर है। जाँच में स्थिति स्पष्ट होने के बाद एसओजी ने आरोपित ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार कर लिया था। इसके साथ ही उनके दोनों भाइयों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

कमला के मौसेरे भाई दलपत फर्जी डिग्री का इंतजाम किया था। ब्रह्मा कुमारी का भाई सुरेश कुमार जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में डॉक्टर है। फर्जी डिग्री के लिए दलपत ने सुरेश कुमार से और सुरेश ने भीनमाल निवासी परिचित महेंद्र सिंह बिश्नोई से संपर्क किया। महेन्द्र ने अपने मित्र अशोक चोटिया से बात की। सुरेश ने पीजी हॉस्टल स्थित कमरे में बैठकर फर्जी डिग्री बनाने की साजिश रची थी।

इसके बाद अशोक चोटिया ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी से सत्र 2017-19 की डिग्री के बदले 70-70 हजार रुपए में सौदा तय किया। अब एसओजी परीक्षा से पहले पेपर लीक कर अभ्यर्थी को सॉल्व कराने वाले सांचौर के मांजू और दूसरी अभ्यर्थी कमला की जगह परीक्षा देने वाली टीचर उर्मिला और परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा सहित इस गिरोह में शामिल कई लोगों की तलाश कर रही है।

ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती में दाखिल हो चुकी है चार्जशीट

इससे पहले ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में ईडी ने कोर्ट में तीन आरोपियों के खिलाफ जयपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए थे। इन आरोपितों में राजस्थान लोक सेवा आयोग से निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक किए थे।
उसने ग्रेड सेकेंड परीक्षा के पेपर की सौदेबाजी अपने भतीजे विजय डामोर के जरिए की थी। एक करोड़ रुपए में आरपीएससी का पेपर लीक कर गिरोह के सरगना शेर सिंह मीणा उर्फ अनिल मीणा को बेचा था।बाद में सरगना अनिल मीणा ने गिरोह के साथी सरगना भूपेंद्र सारण को को पेपर बेचा था।