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‘मुफ्त का लालच देने वाले दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो, चुनाव चिह्न वापस लिए जाएँ’: केंद्र और चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनवरी, 2022 को राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को रिझाने के लिए सरकारी कोष का दुरुपयोग करने पर केंद्र और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। दरअसल, शीर्ष न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर उन राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने और उनके चुनाव चिन्ह जब्त करने की माँग की गई है, जो मतदाताओं को मुफ्त में सुविधाएँ देने के वादे कर रहे हैं।

अगले महीने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। ऐसे में कई राजनीतिक दल सरकारी कोष से अतार्किक मुफ्त ‘उपहारों’ का मतदाताओं को लालच दे रहे हैं। इस दलों में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी (SP) पार्टी शीर्ष पर हैं। आम आदमी पार्टी ने गोवा और पंजाब के आम वोटरों को बिजली व अन्य सुविधाएँ मुफ्त में देने का वादा किया है। वहीं, किसानों की कर्जमाफी को वे चुनावों में बड़ा मुद्दा बना रहा हैं।

गोवा में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कई चुनावी घोषणाएं की थीं। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर गोवा में हमारी सरकार बनती है तो यहाँ की सभी महिलाओं के लिए गृह आधार योजना के तहत 1500 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए प्रति माह किया जाएगा। 18 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को 1000 रुपए प्रति माह दिए जाएँगे। इसके अलावा केजरीवाल ने कहा था कि गोवा में हमारी सरकार बनी तो दिल्ली की तरह यहाँके लोगों को भी बिजली मुफ्त में देंगे। युवाओं को रोजगार देंगे और जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिलता, तब तक बेरोजगारी भत्ता देंगे।

इसी तरह अरविंद केजरीवाल के पद चिन्हों पर चलते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव ((UP Assembly Election 2022) से पहले बड़ा ऐलान करते हुए घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया था। इसके अलावा कहा था कि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिलेगी।