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डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी नीति ने अमेरिका में ही मचाया बवाल, मीडिया और विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

                   डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग, नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: AI Grok/Forbes)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ही शब्दों में कि "नरेंद्र मोदी देशहित को सामने रख बात करते हैं", इतना जानने के बावजूद टैरिफ लगाकर ट्रम्प ने सोंचा था कि मोदी को डरा दूंगा। लेकिन अब यही पैंतरा ट्रम्प पर उल्टा पड़ रहा है। ट्रम्प इस बात को भी अच्छी तरह जानते हैं कि आज का भारत स्वाभिमानी है और स्वाभिमानी कभी धमकियों से नहीं डरता। ऐसी भी संभावनाएं लगाई जा रही है अगर ट्रम्प अपनी टैरिफ की जिद पर रहते हैं यह अमेरिका की इकॉनमी को प्रभावित करने के साथ डॉलर को भी झटका लग सकता है। इतना ही पाकिस्तान को भी अपने से दूर करना पड़ सकता है।    

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ लगाई गई 50% टैरिफ (आयात कर) की नीति अब उनके अपने देश में ही सवालों के घेरे में है। ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए यह भारी-भरकम टैरिफ लगाया, लेकिन ट्रंप की नीति ने न सिर्फ भारत को रूस और चीन के करीब ला दिया, बल्कि अमेरिका के भीतर भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ तीखी आलोचना शुरू हो गई है।

अमेरिकी मीडिया, विशेषज्ञ और यूट्यूबर से लेकर पॉडकास्टर तक सभी इस नीति को ‘बेतुका’ और ‘खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने’ वाला कदम बता रहे हैं। भारत ने न केवल डोनाल्ड ट्रंप की नीति को ठेंगा दिखाते हुए रूसी तेल खरीदना जारी रखा, बल्कि उसने रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिकोण को मजबूत किया और BRICS समूह को एकजुट करने में भी अहम भूमिका निभाई। आइए, इस पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं कि कैसे ट्रंप की नीति ने उनके अपने घर में हंगामा मचा दिया।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति: भारत को निशाना बनाने की गलती

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ इसलिए लगाया क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है। लेकिन यह बात अमेरिकी मीडिया और विशेषज्ञों को हजम नहीं हो रही कि आखिर भारत को ही क्यों निशाना बनाया गया, जबकि रूस से कहीं ज्यादा तेल खरीदने वाले चीन को कोई सजा नहीं मिली।

CNBC टीवी के शो ‘Squawk Box‘ में पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रॉनमैन ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “क्लिंटन प्रशासन से लेकर अब तक अमेरिका ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश की थी। लेकिन ट्रंप के इस टैरिफ ने भारत को हैरान कर दिया। भारत अब अमेरिका को भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार नहीं मान रहा।”

फ्रॉनमैन ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात साल बाद चीन यात्रा ट्रंप के इस टैरिफ का सीधा जवाब है। भारत और चीन के बीच कई मुद्दे हैं, लेकिन ट्रंप की नीति ने दोनों देशों को करीब ला दिया। फ्रॉनमैन ने कहा, “भारत यह संदेश दे रहा है कि वह अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। वह चीन और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के अन्य देशों के साथ नए रास्ते तलाश रहा है।”

अमेरिकी विशेषज्ञों ने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को बताया मूर्खता

अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड डी. वोल्फ और माइकल हडसन ने एक यूट्यूब चर्चा में ट्रंप प्रशासन की भारत नीति को ‘मूर्खतापूर्ण’ और ‘हताश’ करार दिया। इस चर्चा को 3 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। वोल्फ ने व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ कहा था।

वोल्फ ने कहा, “नवारो कोई तेज दिमाग नहीं हैं। अगर भारत को रूस के साथ व्यापार के लिए सजा दी जा रही है, तो रूस के साथ व्यापार करने वाले 100 से ज्यादा देशों को भी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन सिर्फ भारत को क्यों निशाना बनाया गया?”

वोल्फ ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत और मोदी को रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि असल में यह युद्ध वाशिंगटन डीसी की नीतियों का नतीजा है, जिसने नाटो को रूस की सीमा तक बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों को सजा देकर अमेरिका खुद को अलग-थलग कर रहा है।

माइकल हडसन ने भी ट्रंप की नीति को भारत की संप्रभुता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी मर्जी से किसी भी देश के साथ व्यापार करेगा। हडसन ने कहा, “1945 से अमेरिका ने खाद्य निर्यात को हथियार बनाया और कई देशों में अपनी मर्जी से सत्ता परिवर्तन करवाया। लेकिन मोदी ट्रंप की माँगों के सामने नहीं झुकेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की नीति ने भारत को चीन और रूस के और करीब ला दिया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ा बदलाव होगा।

पाकिस्तान के साथ ‘दोस्ती’ और भारत के साथ दुश्मनी पर भड़के अमेरिकी पॉडकास्टर

अमेरिकी पॉडकास्टर ‘Speaknsee‘ ने डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ट्रंप का पाकिस्तान के साथ ‘ब्रोमांस’ (दोस्ताना रवैया) और भारत के खिलाफ टैरिफ लगाना समझ से परे है। पॉडकास्टर ने कहा, “पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करके रिश्वत देने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने कभी ऐसा नहीं किया।”

पॉडकास्टर ने मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें ‘सर्वकालिक महान’ (GOAT) कहा और बताया कि जहां ट्रंप की लोकप्रियता 45% है, वहीं मोदी की भारत में 72% अप्रूवल रेटिंग है। उन्होंने ट्रंप को सलाह दी कि वह नोबेल पुरस्कार का सपना छोड़ दें, क्योंकि एक फोन कॉल से भारत-पाकिस्तान जैसे जटिल मुद्दे हल नहीं हो सकते।

अमेरिकी मीडिया बोली – ट्रंप ने भारत के साथ रिश्ते बर्बाद किए

अमेरिकी मीडिया में भी ट्रंप की भारत नीति की कड़ी आलोचना हो रही है। आमतौर पर मोदी की आलोचना करने वाले CNN के पत्रकार फरीद जकारिया ने कहा कि ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को अपूरणीय नुकसान पहुँचाया है। जकारिया ने कहा, “ट्रंप की भारत के प्रति अचानक दुश्मनी ने पिछले पाँच प्रशासनों की नीतियों को उलट दिया, जिसमें उनकी पहली सरकार भी शामिल थी। यह ट्रंप की सबसे बड़ी रणनीतिक गलती हो सकती है।”

जकारिया ने बताया कि भारत ने धीरे-धीरे अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते बनाए थे, लेकिन ट्रंप ने भारत को सीरिया और म्यांमार जैसे देशों की श्रेणी में डालकर अपमानित किया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ लंच किया और पाकिस्तान के साथ क्रिप्टो डील की, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ कहकर तंज कसा। जकारिया ने चेतावनी दी कि भारत इस अपमान को लंबे समय तक याद रखेगा।

‘The Daily Show’ ने भी एक वीडियो में ट्रंप की टैरिफ नीति की खिल्ली उड़ाई। वीडियो का शीर्षक था, “ट्रंप की टैरिफ नीति ने अमेरिका की साख बर्बाद कर दी। क्या कोई अब भी हमारा सम्मान करता है?” इसमें बताया गया कि ट्रंप ने अपनी चुनावी रैलियों में कहा था कि उनकी सरकार में अमेरिका फिर से सम्मानित होगा, लेकिन उनकी नीतियों की वजह से चीन, फ्रांस, इटली, कनाडा, पोलैंड, सिंगापुर, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में अमेरिका की साख गिरी है।

BRICS और RIC का उभार: ट्रंप की नीति का उल्टा असर

ट्रंप की टैरिफ नीति ने BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) और RIC (रूस-भारत-चीन) त्रिकोण को और मजबूत कर दिया। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की नीति ने भारत को चीन और रूस के करीब धकेल दिया, जो अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से नुकसानदायक है। माइकल हडसन ने कहा, “ट्रंप ने भारत को BRICS का सबसे कमजोर कड़ी मान लिया था, लेकिन उनकी नीति ने भारत और चीन को एक साथ ला दिया। दोनों देश मिलकर सिलिकॉन वैली को चुनौती दे सकते हैं।”

अमेरिकी के परंपरावादी टिप्पणीकार विक्टर डेविस हैनसन ने भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अच्छे रिश्ते थे, क्योंकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और भौगोलिक स्थिति इसे चीन के खिलाफ एक आदर्श सहयोगी बनाती थी। लेकिन ट्रंप के टैरिफ ने भारत को रूस और चीन के करीब ला दिया, जो पहले से ही भारत का पुराना दोस्त है। हैनसन ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से भी अमेरिका ने इस्लामिक पाकिस्तान का समर्थन करके गलती की, जबकि रूस ने भारत का साथ दिया।”

डोनाल्ड ट्रंप की अपनी ही पार्टी में नाराजगी

डोनाल्ड ट्रंप की नीति की आलोचना सिर्फ मीडिया और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। उनकी अपनी पार्टी और समर्थकों में भी नाराजगी बढ़ रही है। मशहूर रेडियो होस्ट और ट्रंप समर्थक एलेक्स जोन्स ने ट्रंप की आलोचना की, क्योंकि उन्होंने अपने वादे के मुताबिक एपस्टीन फाइल्स को सार्वजनिक नहीं किया। जोन्स ने कहा कि ट्रंप का MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) अभियान अब एक ‘पंथ’ बनता जा रहा है।

यूट्यूबर मैलन बेकर ने भी ट्रंप की टैरिफ नीति को ‘राजनीतिक हथियार’ बताते हुए कहा कि यह भारत और ब्राजील के खिलाफ राजनीतिक कारणों से लगाया गया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के इस कदम को गैरकानूनी ठहराया है, और अगर यह फैसला बरकरार रहा, तो ट्रंप की सरकार को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।

क्या होगा भविष्य में?

डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी नीति ने न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों को नुकसान पहुँचाया, बल्कि उनके अपने देश में भी उनकी साख को ठेस पहुँचाई है। अमेरिकी मीडिया और विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने भारत को गलत निशाना बनाकर एक ऐसी गलती की है, जिसका खामियाजा अमेरिका को लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है। भारत अब रूस और चीन के साथ मिलकर BRICS और RIC को मजबूत कर रहा है, जो वैश्विक व्यापार और कूटनीति में एक नया समीकरण बना सकता है।

ट्रंप ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा दिया था, लेकिन उनकी नीतियों ने उल्टा असर दिखाया। जैसा कि कई विशेषज्ञों ने कहा, ट्रंप की नीति ने ‘मेक एशिया ग्रेट अगेन’ का रास्ता खोल दिया है। भारत के साथ रिश्तों में आई इस दरार को ठीक करना आसान नहीं होगा, और ट्रंप प्रशासन को अब अपने ही घर में बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

व्हाइट हाउस का काला सच: डेड नहीं सबसे तेज है भारत की Economy, ट्रंप टैरिफ बेअसर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जिस तरह धमकी दे रहे हैं, शायद भूल रहे हैं कि ये उनके दोस्त नरेंद्र मोदी का भारत है, जिसने झुकना और धमकियों की कभी परवाह नहीं की। बल्कि उन्हें अपनी सफलता की सीढ़ी बनाता है। ट्रम्प ने समझा कि जिस ईयू, जापान और कई अन्य देशों को डराया शायद भारत भी धौंस में आ जाने का भ्रम है। और जिस तरह तारीख पर तारीख दे रहा है वह ट्रम्प को अपना स्थान दिखा रहा है। जो अमेरिका के लिए घातक साबित होने वाला है।  
भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का झूठ बार-बार दोहराने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झूठों की फेहरिस्त लंबी होती चली जा रही है। इसी दिशा में अब ट्रंप ने भारतीय इकोनॉमी को ही डेड बता दिया है, जबकि वास्तविकता यह है कि भारत की विकास दर दुनियाभर में सबसे तेज हैं। यहां तक कि अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों खुद भारत की तेज बढ़ती इकोनॉमी का लोहा मान रही हैं। लेकिन झूठ पर झूठ बोले जा रहे ट्रंप को टैरिफ के सिवाय कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है। वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ को 7 दिन के लिए टाल दिया है। ये आज से लागू होना था, जो अब 7 अगस्त से लागू होगा। हालांकि ट्रैड डील में इस टैरिफ के कम होने की बात कही जा रही है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों का मानना है कि इस टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई ज्यादा असर होने वाला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैश, नोमुरा और बार्कलेज ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में ट्रंप टैरिफ से भारत की जीडीपी में केवल 0.3 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान लगाया है। नोमुरा का मानना है कि टैरिफ का भारत पर कम असर होगा और इससे विकास दर में मात्र 0.2 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।

ट्रंप के ट्रैप में ना फंसना भारत की एक बड़ी सफलता
जीटीआरआइ ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच अभी भी समझौता हो सकता है, लेकिन यह केवल उचित शर्तों पर ही होगा। इसमें भारत के हित भी समाहित होंगे। फिललहाल तो भारत डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा समझौते के जाल से दूर निकल आया है, जो कि वैश्विक परिदृश्य में एक बड़ी सफलता है। ब्रिटेन, ईयू, जापान, इंडोनेशिया और वियतनाम ट्रेड डील के बावजूद अब उच्च टैरिफ का सामना कर रहे हैं और बदले में अमरीका को व्यापक रियायतें भी देंगे। इसमें अमरीकी कृषि उत्पादों पर शून्य टैरिफ, बड़े पैमाने पर निवेश के वादे और अमरीकी तेल, गैस व हथियारों की खरीद शामिल है। भारत ने ऐसी कोई रियायत नहीं दी है।

ट्रंप का झूठ बोलने का रिकॉर्ड, अमेरिकी अखबारों ने लिस्ट छापी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप झूठ बोलने, अपनी बात से मुकरने और यू-टर्न लेने के लिए जाने जाते हैं। ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रुकवाने का 26 बार दावा किया है। लेकिन, भारत सरकार तीसरे पक्ष की भूमिका से साफ-साफ इनकार कर चुकी है। लेकिन ट्रंप हैं कि झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। इससे पहले, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट समेत अमेरिका के तमाम अखबार ट्रंप के झूठ की फेहरिस्त प्रकाशित कर चुके हैं। भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद वॉशिंगटन में ट्रंप ने कहा कि भारत-रूस दोनों अपनी डेड इकोनॉमी के साथ डूब जाएं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। भारत की नीतियां अमेरिका के लिए नुकसानदायक हैं।

अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय इकोनॉमी को बताया सबसे सशक्त
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस इकोनॉमी को डेड बता रहे हैं, उसी भारत की इकोनॉमी को अमेरिकी एजेंसियां ही सबसे तेज और सशक्त बता रही हैं। लेकिन ट्रंप ने जानबूझकर इस और से आंखें मूंदकर एक और झूठ गढ़ दिया है। पिछले माह में ही भारत की इकोनॉमी को दुनिया की आर्थिक नब्ज टटोलने वाली 3 शीर्ष अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी ग्लोबल, गोल्डमैन सेक व मॉर्गन स्टेनली ने सबसे सशक्त बताया था। हाल में आईएमएफ ने भी कहा है कि भारतीय इकोनॉमी सबसे तेजी से बढ़ रही है और 2025-26 में 6.4% दर से बढ़ेगी। जबकि अमेरिकी ग्रोथ रेट 2.9% है। वहीं, एपल जैसी शीर्ष अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर टिकी होने से असर सीमित रहेगा
भारत से जाने वाले सामानों पर सात अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान अमेरिका ने किया है। इससे भारत और अमरीका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव की स्थिति है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की आर्थिक विकास दर, निर्यात और कंपनियों की कमाई पर टैरिफ का ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैश, नोमुरा और बार्कलेज ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में ट्रंप टैरिफ से भारत की जीडीपी में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान लगाया है। नोमुरा का मानना है कि टैरिफ का भारत पर कम असर होगा और इससे विकास दर में 0.2 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। बार्कलेज और गोल्डमैन सैश का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर टिकी होने से असर सीमित रहेगा।

ट्रंप ने कुछ देशों पर ज्यादा टैरिफ का दबाव बनाकर लिया है यू-टर्न
गोल्डमैन सैश का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि भारत ने रूस से ऊर्जा और रक्षा के सौदे किए हैं, जिससे अमरीका नाराज है। नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका की नाराजगी सिर्फ व्यापार घाटे की वजह से नहीं है, बल्कि उसे भारत की रूस पर बढ़ती निर्भरता भी चिंता में डाल रही है। वहीं, बार्कलेज का मानना है कि यह फैसला अमरीका की ओर से ट्रेड डील हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी कुछ देशों पर ज्यादा टैरिफ का दबाव बनाकर बाद में इसे कम कर चुके हैं। क्योंकि उनके लिए अपनी ही कही किसी भी बात पर यू-टर्न लेना मामूली बात है।

भारत मांसाहारी गाय का दूध किसी भी कीमत पर नहीं लेगा
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में ट्रेड डील पर बातचीत शुरू हुई थी। यानी 6 महीने हो चुके हैं, लेकिन दोनों देश अभी तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं। दरअसल, भारत में ज्यादातर लोग शुद्ध शाकाहारी दूध उत्पाद चाहते हैं, जबकि अमेरिका में कुछ डेयरी उत्पादों में जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम (जैसे रैनेट) का इस्तेमाल होता है। भारत ऐसी मांसाहारी गायों के दूध और उसने बने प्रोडक्ट को किसी भी कीमत पर लेने को तैयार नहीं है। इसके पीछे किसानों के हित के अलावा धार्मिक वजहें भी हैं। इसके अलावा भारत अपने छोटे और मंझोले उद्योगों (MSME) को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारत में आएंगे, तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, धार्मिक भावना भी जुड़ी हुई है। इसलिए भारत की शर्त है कि कोई भी डेयरी उत्पाद तभी भारत में बिक सकता है जब वह यह प्रमाणित करे कि वह पूरी तरह शाकाहारी स्रोत से बना हो।

ईयू, जापान और कई अन्य देशों ने ट्रंप के दबाव में बात मानी
दरअसल, अब इस बात का खुलासा हो चुका है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर व्यापार के मामले में देशों को धमकाने के लिए ऊंचा टैरिफ लगाते हैं, फिर अपनी मर्जी के मुताबिक ट्रेड डील करते हैं। ईयू, जापान और कई अन्य देशों ने ट्रंप के दबाव में आकर उनकी बात मान ली थी। ट्रंप का टैक्स लगाने का तरीका दिखाता है कि वे व्यापार को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन के चलते भारत ने अपने हितों को बचाने का फैसला किया है। भारत के मामले में ट्रंप का यह तरीका अभी सफल नहीं हो पाया। क्योंकि भारत दबाव में आने के बजाय अपनी बात पर कायम रहा। नई दिल्ली ने तो साफ-साफ संदेश दे दिया कि सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। थिंक टैंक जीटीआरआइ ने कहा है कि 25 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद भारत की स्थिति अमरीका के साथ ट्रेड डील करने वाले देशों से बेहतर हो सकती है। भारत के भाव न देने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का रुख नरम पड़ता दिखाई दे रहा है। 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त जुर्माने की घोषणा के बाद ट्रंप के तेवर कुछ ही घंटे में ढीले पड़ गए। अब उन्होंने पीएम मोदी की दोस्ती का हवाला देते हुए भारत के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही है।