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‘उम्माह’ के लिए कुछ भी करेगा ‘इस्लामी’ इकोसिस्टम, इनका दोहरापन; अरफा के लिए US-इजरायल की मार से तबाह हुआ ईरान ‘विश्वगुरु’, वो सुपरपॉवर भी

                अरफा खानम शेरवानी (फोटो साभार: arfakhanum/Instagram/@khanumarfa/X)
अरफा खानम शेरवानी जिन्हें हम सब ‘अरफा’ के नाम से जानते हैं, एक बार फिर अपने दोगले चेहरे का प्रदर्शन कर रही हैं। बुधवार (08 अप्रैल 2026) को ही उन्होंने दो पोस्ट किए। पहले पोस्ट में लिखा कि “ईरान उभर के सामने आया है” और दूसरे में सीधे घोषणा कर दी- “I have no hesitation in saying that after defeating America, Iran is now the ultimate ‘Vishwa Guru’ of the world”। फिर ईरान दूतावास की पोस्ट को कोट करते हुए लिख दिया, “Hello Superpower ”। वाह रे अरफा! विश्वगुरु? सचमुच?

याद दिला दें कि जब भारत के संदर्भ में ‘विश्वगुरु’ शब्द आता है तो इन कॉन्ग्रेसियों और इस्लामी इकोसिस्टम वालों को चिढ़ मच जाती है। जब पीएम मोदी ने जब भारत को विश्वगुरु बनाने की बात की तो इन्हें हँसी आ गई, ट्रोलिंग शुरू हो गई। लेकिन आज अस्थाई संघर्ष-विराम के मौके पर अचानक ईरान को ‘विश्वगुरु’ और ‘सुपरपावर‘ बताने लगी हैं। समझते भी हैं ये लोग कि विश्वगुरु होने का मतलब क्या होता है? या फिर बस उम्माह का झंडा लेकर घूमने का बहाना चाहिए?

अरफा, कल तक तुम अयातोल्ला की ख़िलाफ़त कर रही थीं। महिला अधिकार, मानवाधिकार, फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के नाम पर ईरान की तानाशाही को कोस रही थीं। फिर अचानक अमेरिका के खिलाफ़ ‘इस्लामी उम्माह’ का नारा लगाने लगीं।

और अब? अस्थाई सीजफायर होते ही ईरान को विश्वगुरु साबित करने में जुट गईं। क्यों?

क्योंकि तुम्हारा सहोदर पाकिस्तान वहाँ दलाली करने लगा था। बात अब उम्माह की हो गई है ना?

वर्ना उसी ईरान के मूल निवासियों (पारसियों) को भारत ने अपने घर में पनाह दी है। बिना किसी परेशानी के। वे यहाँ फल-फूल रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, पढ़ रहे हैं, परिवार चला रहे हैं। लेकिन अरफा को समस्या भारत से इस बात की है कि वो तमाम झंझावातों के बीच भी अपने सभी लोगों का ख्याल रख रहा है। उसी ईरान से लोगों को बाहर निकालकर ला रहा है, जिसमें अधिकतर इसके मुस्लिम भाई ही हैं। फिर भी इन नमकहरामों के मन में भारत के प्रति इतनी घृणा बैठी हुई है कि बर्बाद हो चुके ईरान में उन्हें विश्वगुरु दिखने लगा है।

इसे ही कहते हैं दोगलापन। ये खाएँगी भारत का, भारत की हवा-पानी, भारत की आजादी, भारत की मीडिया में छूट, भारत की सिक्योरिटी। लेकिन गाएँगी ईरान का, पाकिस्तान का, लेबनान का, गाजा का… या हर उस जगह का जहाँ इनके उम्माह वाले दिखेंगे। हाँ भाई, क्यों नहीं? क्योंकि ये तो ‘काफिरों’ का देश है ना। तो इनका प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों पर ही रहेगा। चाहे वहाँ लाखों मार दिए जाएँ (अयातोल्लाओं की ओर से) या इनके बंधु पूरी दुनिया को बम-धमाकों में उड़ाते रहें जन्नत के नाम पर।

अभी उसी ईरान से तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें अपने पुलों को बचाने के लिए ईरान महिलाओं और बच्चों की ह्यूमन चेन बना रहा है। महिलाएँ, बच्चे – जिनकी सुरक्षा के नाम पर अरफा पहले चिल्लाती थीं- आज उनको ढाल बनाकर पुल बचा रहे हैं। और अरफा? उन्हें ‘विश्वगुरु’ कह रही हैं। वाह रे दोगलों! कल तक महिला-वाद के नाम पर अयातोल्ला को कोसती थीं, आज वही महिलाएँ ह्यूमन शील्ड बन रही हैं तो मुँह बंद। क्योंकि अब उम्माह का मुद्दा आ गया।

अरफा तुम The Wire की सीनियर एडिटर हो, AMU की एलुम्ना हो। तुम्हारा पूरा इकोसिस्टम कॉन्ग्रेस और इस्लामी लॉबी का है। तुम्हें हमेशा ‘सेकुलरिज्म’ का ढोंग रचाना पड़ता है। लेकिन जब बात अपनी आती है तो असली चेहरा सामने आ जाता है। पाकिस्तान से प्यार, ईरान से प्यार, गाजा से प्यार – लेकिन भारत? भारत तो बस ‘फासीवादी’ है, ‘इस्लामोफोबिक’ है। भारत ने ईरानियों को शरण दी, उनको सुरक्षा दी, लेकिन तुम्हें ये सहन नहीं होता। क्योंकि तुम्हारा दिल कहीं और बसता है। तुम्हें भारत की तरक्की, भारत की मजबूती, भारत की विश्व पटल पर बढ़ती पहचान कभी रास नहीं आई।

देखो अरफा, विश्वगुरु बनने के लिए सिर्फ़ एक युद्ध में अमेरिका से टकराना काफी नहीं होता। विश्वगुरु वो होता है जो अपने नागरिकों की रक्षा करे, महिलाओं को आजादी दे, बच्चों को भविष्य दे, अर्थव्यवस्था को मजबूत करे। ईरान में आज महिलाएँ हिजाब के नाम पर कोड़े खा रही हैं, विरोध करने पर जेल जा रही हैं। लेकिन तुम्हें वो ‘सुपरपावर’ दिख रहा है। क्योंकि तुम्हारा एजेंडा हिंदुस्तान को नीचा दिखाना है। तुम चाहती हो कि भारत हमेशा ‘दूसरे’ देशों के मुकाबले छोटा दिखे।

ये दोगलापन सिर्फ़ तुम्हारा नहीं, पूरे उस इकोसिस्टम का है जिसमें तुम खड़ी हो। कल अमेरिका दुश्मन था, आज ईरान हीरो बन गया। कल पाकिस्तान ‘पीस’ का दूत था, आज ईरान ‘विश्वगुरु’। कल महिला अधिकार, आज उम्माह। कल सेकुलर, आज इस्लामी ब्रदरहुड। ये चरित्रहीनता है। ये नमकहरामी है।

अरफा, तुम भारत में बैठकर ईरान का गान गा सकती हो। लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने तुम्हें वो आजादी दी है जो ईरान में कभी नहीं मिलेगी। तुम बिना हिजाब के घूम सकती हो, बिना डरे बोल सकती हो, बिना जेल गए आलोचना कर सकती हो। लेकिन तुम्हें ये आजादी भी भारत से ही मिली है। फिर भी तुम्हारा दिल ईरान और पाकिस्तान के लिए धड़कता है।

ये ही तो दुख की बात है। भारत तुम्हें खिला-पिला रहा है, लेकिन तुम्हारा प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों के लिए है। बर्बाद ईरान में विश्वगुरु ढूँढ रही हो, जबकि असली विश्वगुरु वो देश है जो तुम्हें शरण दे रहा है। लेकिन तुम्हारा? वाह रे दोगलों… वाह!