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चुनाव आया, आन्दोलनजीवी सड़क पर आया : केजरीवाल सरकार ने कहा – ‘किसानों को गिरफ्तार करना गलत, नहीं बनाएँगे जेल’

        किसानों का दिल्ली कूच, केजरीवाल सरकार ने केंद्र के प्रस्ताव को किया नामंजूर (फोटो साभार : दैनिक जागरण)
जब भी देश में चुनाव होते हैं या कोई विदेशी मेहमान भारत आता है, आंदोलनजीवी सड़क पर उतर माहौल ख़राब करने आ जाते हैं। विदेशी चंदे पर चलते आंदोलनों पर आखिर कब लगाम लगेगी? चेहरा छुपाकर हंगामा करना क्या आंदोलनकारियों का काम है? ये काम कोई आंदोलनकारी नहीं कर सकता। तलवारों और JVC का आंदोलन में क्या काम ? उनकी मंशा को समझा जा सकता है। आंदोलनकारियों और इनके आकाओं की मंशा यह है कि सुरक्षाकर्मियों को इतना उकसा दो कि वह गोली चला दे और मरने वालों की लाशों पर अपनी खोई प्रतिष्ठा को वापस चमकाया जा सके। 

ज्वलंत प्रश्न यह है कि सरकार क्यों नहीं इन नेताओं के खातों की जाँच करती, ताकि मालूम हो कि ये कितने बड़े धन्नासेठ होने के बावजूद कर्जदार हैं? पिछले आंदोलन में यह बात भी सामने आयी थी कि वास्तविक किसान तो खेत में काम कर रहा है।  

अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों के मार्च के मद्देनजर बवाना स्टेडियम को अस्थायी जेल में बदलने के केंद्र के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। दिल्ली के गृह मंत्री कैलाश गहलोत ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को पत्र लिखकर अनुमति देने से इनकार कर दिया और किसानों के मार्च के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

कैलाश गहलोत के पत्र में लिखा गया, “किसानों की माँगें वास्तविक हैं। दूसरी बात, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए, किसानों को गिरफ्तार करना गलत है।” दिल्ली सरकार ने कहा कि किसानों की माँग जायज है। किसान इस देश के अन्नदाता हैं। अन्नदाता को जेल में डालना गलत है। हम बवाना स्टेडियम को अस्थायी जेल बनाने की परमिशन नहीं दे सकते।

इससे पहले, आम आदमी पार्टी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के अन्नदाताओं से नफरत का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि दिल्ली की हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती बॉर्डरों पर लोगों को राजधानी में एंट्री करने से रोकने के लिए कीलों वाली रिकेडिंग हाईवे पर कर दी है। जो अन्नदाता किसान देश का पेट भरने के लिए जमीन पर फसल उगाते हैं, पीएम मोदी ने उन्हीं किसानों को रोकने के लिए रास्ते में कीलों का जाल बिछाया है।

इस बीच, किसानों का दिल्ली मार्च जारी है। भारी संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर पहुँचने भी लगे हैं। किसानों ने कहा कि हम अपनी माँगों को पूरा करवाकर ही जाएँगे। हम 6 महीने का राशन लेकर आए हैं। किसान पहले दिल्ली के पास बॉर्डर पर जमा होंगे और दोपहर तीन बजे आगे की रणनीति के बारे में फैसला करेंगे। किसानों की ओर से कहा गया है कि हम अन्न उगाते हैं। सरकार ने हमारे लिए कीलों की फसल उगा रखी है। सरकार हमारे लोगों को अलग-अलग राज्यों में पकड़ रही है। हम फिर भी सरकार से बात करने को तैयार हैं।

LoC में सुरंग बनाने की तैयारी में पकिस्तान, आतंकियों को दिए अत्याधुनिक हथियार




  • जम्मू-कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट इतनी बढ़ गई है कि अब पाक एलओसी पर रोबोटिक हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकी घुसपैठ कराने की फिराक में है। घुसपैठ की कोशिश में पाकिस्तान आतंकियों को हैवी मशीन गन मुहैया करा रहा है। 
  • गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान ने स्टील बुलेट के लिए चीन से मदद मांगी है। अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान अपनी ताकत बढ़ा रहा है। इस सिलसिले में गृह मंत्रालय को सुरक्षा एजेंसियों ने रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मदद पाकिस्तान पीओके के मानसेहरा में सामरिक टनल बनाने में जुटा है। इसके साथ ही लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के नजदीक पाकिस्तान प्रेशर सेंसर का इस्तेमाल कर रहा है। इसे उसने अमेरिका से खरीदा था।
    ज्ञात हो, जब कश्मीर में सेना पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही थी, भारत में आतंकवादी समर्थक इस गन का विरोध कर रहे थे, परन्तु अब जब पाकिस्तान आतंकियों को स्टील बुलेट दे रहा है, आतंकवादी समर्थक क्यों चुप हैं? और जब सेना द्वारा स्टील बुलेट से ज्यादा खतरनाक बुलेट का इस्तेमाल किये जाने पर कोई आतंकवादी समर्थक अपना मुँह न खोले और यदि खोले तो सरकार उनके साथ भी सख्ती से पेश आए।
    एक तरफ मीडिया में पाकिस्तान में बढ़ती महँगाई से जनता को दुःखी दिखाया जा रहा है, लेकिन कोई इस बात को नहीं बता रहा कि भूखे पाकिस्तान के पास आतंकवादियों को अत्याधुनिक हथियारों के लिए कहाँ से धन आ रहा है?
    आतंकियों को पाकिस्तानी सेना 12.7 MM की हैवी मशीन गन भी दे रही है। इसके लिए खतरनाक स्टील बुलेट को पाकिस्तान ने चीन की एक कंपनी से गुपचुप तरीके से मंगाया है। साथ ही एलओसी पर पाकिस्तान रोबोटिक हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकियो के घुसपैठ में मदद कर सकता है।
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    जम्मू-कश्मीर का विशेषाधिकार समाप्त कर दो केंद्र शासित राज्य बनाने के मद्देनजर हिरासत में लिए विभिन्न राजनीतिक दल...

    अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान की नाराजगी साफ झलक रही है। पाकिस्तान सरकार और सेना के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें भी हो चुकी हैं। भले ही कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा हो, लेकिन संवैधानिक अनुच्छेदों में परिवर्तन किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान पूरी दुनिया में मदद की गुहार लगा रहा है। इसी के मद्देनजर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी मदद की अपील की थी। लेकिन वहां भी उसकी नहीं सुनी गई।