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‘बृजभूषण को हटाना है, कुश्ती फेडरेशन पर कब्जा करना है...ससुर को कोच बता विनेश ने दिलवाए 30 लाख’ रूपए : योगेश्वर दत्त

विनेश फोगाट और योगेश्वर दत्त 
आन्दोलनजीवियों के समर्थन से जैसे-जैसे जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना लम्बा चलता जा रहा है, नितरोज इनके घोटाले भी सामने आने लगे हैं कि किस तरह अपने सम्मानों का इन्होने दुरुपयोग किया है, और अब जब सरकार इन घोटालों की जाँच करवाएगी आन्दोलनजीवी उन घोटालों को अनुचित बता पहलवानों के धरने को कुचलने का सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग बता चिल्लाते नज़र आएंगे। 

भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठने वाले पहलवानों को चैंपियनशिप के ट्रायल में छूट मिलने के बाद विवाद हो गया है। इस छूट को नए पहलवानों के साथ अन्याय बताया जा रहा है। इस फैसले पर सवाल उठाने वाले ओलंपियन योगेश्वर दत्त धरना देने वाले पहलवानों के निशाने पर आ गए हैं।

जो कोई इन पहलवानों के हाँ में हाँ नहीं मिला रहा है, उनको ये निशाने पर ले रहे हैं। चाहे वह सरकार हो, खेल मंत्री हों, दिल्ली पुलिस हो, भारतीय ओलंपिक संघ और उसकी अध्यक्ष पीटी उषा हों या योगेश्वर दत्त। ट्रायल में छूट के फैसले का विरोध करने पर विनेश फोगाट ने योगेश्वर दत्त को अपमानित करने की कोशिश की है। इसके बाद दत्त लाइव आए और कई खुलासे किए।

फर्जीवाड़ा कर पति के मामा को दिलवाई सरकारी ग्रांट

शुक्रवार (23 जून 2023) की रात को योगेश्वर दत्त अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लाइव आए और विनेश फोगाट के भ्रष्टाचार का खुलासा किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट ने अपने पति के मामा को कोच बताकर हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट दिलाई।
विनेश फोगाट को लेकर योगेश्वर दत्त ने कहा, “आपका गुरु आपका ताऊ महावीर फोगाट है। आपको अभी हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट मिली थी, वह आपने कोच ओमप्रकाश दहिया को दिलवाई, जबकि वह आपका कोच नहीं है। आपने उसे कोच बनाकर उसे इतनी बड़ी ग्रांट दिलवा दी।”
योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “आपने उसे पैसे क्यों दिलवाए यह भी मैं बता देता हूँ। पूरे देशवासियों को पता होना चाहिए। जिस सोमबीर राठी से आपकी शादी हुई है, उनके मामा हैं ओमप्रकाश दहिया। इसलिए आपने अपने ताऊ को यहाँ पर छोड़ दिया और अपनी रिश्तेदारी निभाई। इन 25 लाख के लिए आपने क्या भूमिका सेट की, मुझे इसका नहीं पता।

रेलवे की नौकरी में फर्जीवाड़ा

योगेश्वर दत्त यहीं नहीं रूके। उन्होंने रेलवे में नौकरी में फर्जीवाड़ा का भी खुलासा किया। दत्त ने कहा, “आप सरकार से जाकर मिले और आपने अपनी ट्रांसफर मनमर्जी से रेलवे में करवाई। रेलवे में जो हमारे कुश्ती के सीनियर अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी रहे हैं, उनका आपने ट्रांसफर करवाया और उनकी जगह पर आप खुद बैठ गए।”
ओलंपियन ने आगे कहा, “ऐसा कौन सा आंदोलन आपने किया कि आपके मन मुताबिक सारी बातें हो रही हैं? जिस लड़ाई को लेकर आप आए थे, वह लड़ाई कहाँ है आपकी? मेरी सभी खाप प्रतिनिधियों और किसान संगठनों से आग्रह है कि वह इस धरने की सच्चाई को जानिए। इस धरने के बाद से जो इन पहलवानों को बेनिफिट मिल रहा है, इसका क्या कारण है।”

धरना लीड करने पर हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष का लालच

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “मुझे जंतर मंतर पर धरने का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। इसके लिए मुझे हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद का लालच भी दिया गया था। यह सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर किया गया है।”
योगेश्वर दत्त ने कहा कि जब पहलवानों के आरोपों के बाद जाँच कमिटी बनी थी, तब उसमें उन्हें सदस्य चुना गया था। उस समय 4 पहलवान और 3 कोच देर रात 9 बजे उनके घर पर आए और धरने को लीड करने के लिए कहा। दत्त ने कहा कि उन लोगों ने हरियाणा कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनवाने का लालच देते हुए कहा कि बृजभूषण सिंह को हटाना है और फेडरेशन पर कब्जा करना है।
योगेश्वर दत्त आगे बताते हैं, “मैंने कहा था कि लड़कियों पर शोषण के मामले के बीच मुझे कोई पद नहीं चाहिए। इस बातचीत का मकसद सिर्फ यही था कि बृजभूषण सिंह को हटाना है।” उन्होंने कहा कि अभी जो कष्ट निवारण कमेटी बनी थी, उसी में से एक कोच उनके घर आया था। दत्त ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे उन पहलवानों और कोचों के नामों का खुलासा करेंगे।

धरने के लिए पहलवानों पर डलवाया गया दबाव

योगेश्वर दत्त ने कहा, “पहले धरने में आपने रवि दहिया, दीपक पूनिया समेत तमाम पहलवानों को किस तरह से बुलाया था, वह भी हमें पता है। उन पहलवानों पर कहाँ-कहाँ से आपने कितना दबाव डलवाया, यह सब भी हम जानते हैं। इस बार भी आपने खूब कोशिश की, लेकिन आप के आंदोलन में कोई नहीं आया। सभी को सच्चाई मालूम हो गई है। यह सच्चाई मुझे पहले दिन से ही पता थी।”
धरना देने वाले पहलवानों को लेकर दत्त ने आगे कहा, “आज हरियाणा का कोई भी पहलवान आपके साथ नहीं है। पहले भी कोई नहीं था। खाप पंचायतों और किसान संगठनों को जो आपने बताया, वह आपके बहकावे में आ गए। वे आपसे बिना कुछ पूछे आपके साथ लगे रहे। आज वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।”

पहलवानों के माँ-बाप पर बनाया गया दबाव

विनेश फोगाट ने आरोपों का जवाब देते हुए योगेश्वर दत्त ने कहा, “उन्होंने लगाए कि मैंने कई शिकायतकर्ता खिलाड़ियों और उनके माँ-बाप को फोन किया और उनसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा। मैं विनेश से यही कहूँगा कि जिन लड़कियों के पास मैं गया, उन्हें सामने आना चाहिए। जिन पहलवानों के माँ-बाप को मैंने फोन किया, उन्हें भी सामने आना चाहिए।”
योगेश्वर दत्त ने कहा कि उनसे खुद मिलने के लिए कई खिलाड़ी और उनके माँ-बाप आए थे। उन्होंने कहा, “वे लो मुझसे बोले कि योगेश्वर जी, हमें इस मामले में फँसाया जा रहा है। हमें नहीं पता था कि यह ऐसे करेंगे। हमारी बेटियों को बहला-फुसलाकर यहाँ लेकर आए थे। तीसरी पहलवान ने भी यही बात कही थी कि हमें फेडरेशन में जाकर अपनी बातें मनवानी है, यह कहकर वहाँ ले जाया गया था और हमें जंतर मंतर पर ले जाकर बैठा दिया।”
योगेश्वर दत्त ने आगे बताया, “इसी पहलवान के पिता ने मुझे फोन करके बताया कि विनेश फोगाट ने उस पहलवान की मम्मी के पास फोन किया था और भला-बुरा कहते हुए कहा कि तुमने शिकायत से नाम वापस क्यों लिया? तुम पीछे क्यों हट गई?” योगेश्वर दत्त ने फिर जोर देकर कहा कि ये सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर था।

विनेश फोगाट कई बार ले चुकी हैं छूट

योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट पहले भी कई बार छूट ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 2017 में इंडोनेशिया गेम्स के लिए उनका ट्रायल नहीं लिया गया था। इसके अलावा, विनेश फोगाट ने फेडरेशन से कहा कि 48 की जगह 53 किलोग्राम वर्ग में उनका चयन किया जाए और फेडरेशन ने वह भी किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि इन सब सहूलियत मिलने के बाद भी वह इंडोनेशिया गेम्स खेलने नहीं गईं।
दत्त ने कहा, “जिस खिलाड़ी का 53 वेट था, उसका वेट 48 करना पड़ा और वह वेट चेंज की वजह से हार गई। इस वजह से दोनों वेट कैटेगरी में भारत को कुछ नहीं मिला। इसके बावजूद भी आप पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस आपको शोकॉज नोटिस देकर छोड़ दिया गया। शोकॉज नोटिस भी दिया या नहीं, यह भी मुझे पक्का नहीं पता।”
दत्त के अनुसार, साल 2018 के एशियन गेम्स के ट्रायल भी विनेश फोगाट ने नहीं दिए थे। फेडरेशन पर दबाव डालकर वह बिना ट्रायल के ही एशियन गेम्स के लिए गई थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जहाँ तक मेरा मानना है कि फेडरेशन ने आपका दबाव इसलिए माना, क्योंकि आप अच्छी खिलाड़ी थीं। इसका मैं कोई और मतलब नहीं निकाल सकता।”
योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “2019 ओलिंपिक क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में आप हंगरी गई थीं। बिना कोच के आप गई थीं। यह सभी चीजें हमें ओवरसाइट कमेटी से पता लगी हैं। वहाँ पर किसी भारतीय कोच के साथ आप नहीं रहीं, उनसे अलग रहीं।”
उन्होंने आगे कहा, “2022 के विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता में भी आपने ट्रायल न करवाने की जिद की थी। कहा था कि मुझे बिना ट्रायल के भेजो, लेकिन आप की ट्रायल ली गई। आपकी ट्रायल इसलिए हुई, क्योंकि आपके वेट में अंतिम नाम की लड़की थी, जो आपके बराबर की थी। उसके साथ आप की ट्रायल हुई।”
योगेश्वर दत्त ने यह खुलासा तब किया है, जब उन्होंने इन पहलवानों को मिली ट्रायल से छूट पर सवाल उठाया था। इसके बाद विनेश फोगाट ने इन्हें बृजभूषण सिंह की थाली का झूठा खाने वाला, महिला पहलवानों के नाम मीडिया में लीक करने वाला, कुश्ती का गद्दार सहित कई आरोप लगाए थे। इसके बाद योगेश्वर दत्त ने इन सब बातों का खुलासा किया है।

केजरीवाल से कम नहीं जंतर-मंतर वाले पहलवान : जिनके भी सुर हुए अलग उनके मेडल खोटे

पीटी उषा, योगेश्वर दत्त, बबीता फोगाट (साभारः स्पोर्ट्स अनटोल्ड/मिड डे/एनडीटीवी)
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ धरना देने वाली विनेश फोगाट ने अब ओलंपियन योगेश्वर दत्त पर हमला बोला है। विनेश आलोचना तो करती हैं, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी भूल जाती हैं। भाजपा सांसद के बाद योगेश्वर के मामले में भी यह देखने को मिल रहा है। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो ये पहलवान कुश्ती की अरविंद केजरीवाल साबित हो रही हैं।

जंतर मंतर पर अपनी मनमाफिक बात मनवाने के लिए धरना देने वाले पहलवानों ने जाट खाप पंचायतों से लेकर किसानों तक का सहयोग लिया। हालाँकि, उन्होंने पूरे मामले में जिसने भी सही बात की, उनके ऊपर ये लोग कीचड़ उछालने लगे। विनेश फोगाट ने दिल्ली पुलिस, IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) के बाद अब योगश्वर दत्त पर भी यही कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है।

दरअसल, IOA की एडहॉक कमिटी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले 6 पहलवानों- विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, संगीता फोगाट, सत्यव्रत कादियान और जितेंद्र किन्हा  को ट्रायल में छूट दी है। इन पहलवानों को एशियन और ओलंपिक, दोनों चैंपियनशिप में भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए सिर्फ ट्रायल के विजेताओं को हराने की जरूरत होगी।

इसी को लेकर योगेश्वर दत्त ने सवाल उठाया है। दत्त ने इसे कुश्ती के लिए काला दिन बताते हुए कहा, “सिर्फ यही 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट देना मेरी समझ के बाहर है। बिना नियम देखे और बिना क्राइटेरिया बनाए लिया गया यह फैसला गलत है। तो जितने भी पहलवान हैं … लड़कियाँ हैं… अपनी आवाज जरूर उठाइए।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ये नहीं कहता कि धरना कीजिए, प्रदर्शन कीजिए… लेकिन अपनी आवाज मीडिया के माध्यम से उठाइए, आप प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखिए, गृहमंत्री जी को पत्र लिखिए, खेलमंत्री अनुराग ठाकुर जी को पत्र लिखिए, IOA को पत्र लिखिए।”

योगेश्वर दत्त द्वारा सवाल उठाए जाने पर विनेश फोगाट भड़क गईं और ट्विटर पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने योगेश्वर दत्त को ना सिर्फ छवि का हनन करने की कोशिश की है, बल्कि उन्होंने भाषा की मर्यादा को खत्म करते हुए ‘तू-तड़ाक’ भी किया है। उन्होंने दत्त पर कई आरोप लगाए।

विनेश ने लिखा, “योगेश्वर दत्त का वीडियो सुना तो उसकी वह घटिया हँसी दिमाग़ में अटक गई। वह महिला पहलवानों के लिए बनी दोनों कमेटियों का हिस्सा था। जब कमेटी के सामने महिला पहलवान अपनी आपबीती बता रही थीं तो वह बहुत घटिया तरह से हँसने लगता। जब 2 महिला पहलवान पानी पीने के लिए बाहर आयीं तो बाहर आकर उनको कहने लगा कि कुछ ना हो बृजभूषण का। जाके अपनी प्रैक्टिस कर लयो।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक दूसरी महिला पहलवान को बड़े भद्दे तरीक़े से बोला कि ये सब तो चलता रहता है। इसको इतना बड़ा इशू मत बनाओ। कुछ चाहिए हो तो मुझे बताओ। कमेटी की बैठक के बाद योगेश्वर ने महिला पहलवानों के नाम बृजभूषण और मीडिया को लीक कर दिए। उसने कई महिला पहलवानों के घर फ़ोन करके यह भी कहा कि अपनी लड़की को समझा लो। वह पहले ही सरेआम महिला पहलवानों के ख़िलाफ़ बयान दे रहा था, उसके बावजूद उसे दोनों कमेटियों में रखा गया।”

योगेश्वर पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए विनेश ने आगे कहा, “वह पहलवानों और कोचों को महिला पहलवानों के आंदोलन में शामिल होने से लगातार रोकता रहा। सारा कुश्ती जगत समझ गया था कि योगेश्वर बृजभूषण की थाली का झूठा खा रहा है। कुश्ती जगत को आपका बृजभूषण के तलवे चाटना हमेशा याद रहेगा। समाज में कोई भी अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है तो योगेश्वर ज़रूर उल्टियाँ करता है। पहले किसानों, जवानों, छात्रों, मुसलमानों, सिखों पर घटिया टिप्पणियाँ कीं और अब महिला पहलवानों को बदनाम करने में लगा हुआ है।”

दत्त को गद्दार बताते हुए विनेश ने आगे कहा, “समाज से ग़द्दारी के कारण ही दो बार चुनाव में औंधे मुँह गिरे हो तुम। मैं चैलेंज करती हूँ कि कभी ज़िंदगी में चुनाव नहीं जीतोगे, क्योंकि समाज ज़हरीले नाग से हमेशा सावधान रहता है और उसके कभी पैर नहीं लगने देता। महिला पहलवानों को तोड़ने में इतना ज़ोर मत लगाओ। ध्यान रखना कहीं ज्यादा जोर लगवाने से कमर न टूट जाए। रीढ़ तो पहले ही बृजभूषण के पैरों में रख चुके हो। तुम बहुत संवेदनहीन इंसान हो। ज़ालिम के हक़ में खड़े हो, उसकी चापलूसी कर रहे हो। जब तक कुश्ती में योगेश्वर जैसे जयचंद रहेंगे, यकीनन जालिमों के हौसले बुलंद रहेंगे।”

दरअसल, ये पहलवान उन सबको निशाना बना रही हैं, जो उनसे अलग राय रखता है। ये पहलवान उन्हें बृजभूषण शरण सिंह का आदमी बताकर तुरंत अपराधी घोषित कर देती हैं। ये वही पहलवान हैं, जिन्होंने धरना दिया कि बिना उनके FIR दर्ज कराए बृजभूषण सिंह को कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए। उस वक्त उन लोगों ने साफ कहा था कि वे एशियन या ओलंपिक चैंपियनशिप के लिए ट्रायल नहीं देंगी। यही उनकी प्रमुख माँग थी। इसका वीडियो भी सामने आया था।

दरअसल, बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कर दिया था कि विशेषाधिकार किसी को नहीं मिलेगा। सबको ट्रायल में अपनी-अपनी वेट कैटेगरी के पहलवान को हराना होगा। जो जीतेगा वही टीम में शामिल होगा। इसके खिलाफ पहलवान धरने पर बैठ गईं। बाद में उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया। इनमें एक आरोप एक नाबालिग लड़की के नाम पर था। हालाँकि, बाद में उस नाबालिग ने अपना बयान वापस लेते हुए साफ कर दिया कि उसने साथ बृजभूषण शरण सिंह ने कुछ नहीं किया और इन पहलवानों ने उस पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया।

दरअसल, धरनेबाज पहलवान चाहते थे कि POCSO एक्ट में बृजभूषण सिंह की तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी, उसके बाद कुश्ती संग वो अपने हिसाब से चलाएँगे। उन्होंने यहाँ तक माँग कर डाली थी कि कुश्ती संघ में बृजभूषण सिंह और उनका कोई भी आदमी चुनाव नहीं लड़ना चाहिए और ना ही इसमें मतदान करना चाहिए। धरनेबाज पहलवानों के अनुसार, पिछली बार खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ हुई मुलाकात में इस पर सहमति भी बनी है।

इन पहलवानों का साफ मानना है कि उनसे सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए। जो उनसे सवाल पूछेगा वो उनका विरोधी है, चाहे वह सरकार हो या खिलाड़ी। इन पहलवानों तो एक बार यहाँ तक आरोप लगा दिया था कि खेल मंत्री अनुराग ठाकुर बृजभूषण शरण सिंह को बचाव कर रहे हैं। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जब दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की तो इन पहलवानों ने साफ कह दिया कि उन्हें दिल्ली पुलिस पर विश्वास नहीं है।

विनेश फोगाट ने कहा था, “हमारी माँग है कि उन्हें (बृजभूषण शरण सिंह को) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।” वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा था, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक ने यहाँ तक कह दिया था कि जाँच में पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा था, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” 

पहलवानों की धरने और बयानबाजी को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ओलंपिक संघ ने कहा था कि पहलवान धरना देकर भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं। IOC ने पहलवानों को एथलीट कमीशन में आने के लिए कहा। IOC की अध्यक्ष पीटी उषा ने पहलवानों के धरने को अनुशासनहीनता बताया था।

इसके बाद पहलवान पीटी उषा पर भड़क गए थे। पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया। साक्षी मलिक ने गुरुवार (27 अप्रैल 2023) को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते।”

इतना ही नहीं, पीटी उषा जब इन पहलवानों से मिलने के लिए 3 मई 2023 को जंतर मंतर पर गईं तो उनके धक्का-मुक्की, खींचतान और बदतमीजी की गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में एक महिला थप्पड़ ताने नजर आती है और पीटी उषा बचने की कोशिश करती हुई दिख रही हैं। सुरक्षाबल ने बड़ी मुश्किल से उन्हें वहाँ से निकाला था।

इसी तरह, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के एक-एक गिरने के बाद पहलवान बौखला गए। साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत ने सामूहिक रूप से एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने एक कागज दिखाते हुए आरोप लगाया था कि उनके प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति भाजपा नेता बबीता फोगाट ने दिलाई थी। इसमें उन्होंने भाजपा नेता तीरथ राणा का भी नाम लिया था। इस दौरान साक्षी मलिक कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा का बचाव भी करती नजर आईं।

वीडियो सामने आने के बाद बबीता फोगाट ने दोनों के आरोपों को हास्यास्पद बताया था। बबीता ने पहलवानों पर आरोप लगाया कि वो अपने मामले में उन नेताओं का साथ ले रहे हैं जिन पर पहले से बलात्कार के केस चल रहे हैं। नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन किए गए हंगामे और गंगा में मेडल बहाने जैसे प्रयासों को बबीता ने शर्मनाक कदम बताते हुए इसे देश की छवि को गिराने वाला काम बताया। उन्होंने पीएम पर भरोसा जताते हुए साक्षी और उनके पति पर कॉन्ग्रेस की कठपुतली बन जाने का भी आरोप लगाया। 

इस तरह, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक जैसे पहलवानों ने अपने साथी खिलाड़ियों से लेकर IOA की प्रमुख को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया कि उन लोगों का बयान इन पहलवानों को पसंद नहीं आया। वहीं, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय मंत्री को इसलिए निशाना बनाया कि उन्होंने बृजभूषण सिंह को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की थी, जिस पर बिना आँख मूँदे अमल नहीं हुआ। इन तमाम कहानियों के बाद आखिरकार IOA की एडहॉक द्वारा उनकी वो सारे माँगें मान ली हैं, जिसको लेकर पहलवानों ने आरोप लगाए और अपने साथियों तक को निशाना बनाया। इसलिए सोशल मीडिया पर इन पहलवानों को रंग बदलने में सीएम केजरीवाल से भी दो कदम आगे बताया जा रहा है।