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भोपाल की चैरिटेबल संस्था CFI ने बाइबिल नहीं बाँटने पर 22 लड़कियों को नौकरी से निकाला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चैरिटेबल संस्था CFI पर धर्मान्तरण कराने के आरोप लगे हैं। इस संस्था से निकाले गए कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत की है। शिकायत में लोगों ने बाइबिल बाँटने और धर्मान्तरण कराने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपित संस्था CFI के प्रमुख डॉक्टर सजि थॉमस हैं। इसका मुख्यालय भोपाल के अयोध्या बाईपास स्थित शंकर गार्डन में है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार संस्था ने अपने उन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है जिन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार और बाइबिल बाँटने से इंकार कर दिया।। खुद पर धर्मान्तरण का आरोप लगाने वाले पूर्व कर्मचारी राजेश खन्ना के खिलाफ CFI संस्था ने अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है। CFI संस्था लगभग 20 वर्ष पुरानी बताई जा रही है।

अपनी पहिचान गुप्त रखने की शर्त पर CFI से निकाली गई लड़कियों ने पूरी बात बताई है। उनके अनुसार 22 लड़कियों का समूह गर्भवती महिलाओं के लिए लगभग 3 वर्ष से काम कर रहा। कुछ समय से उनको बाइबिल बाँटने के लिए कहा जाने लगा। जब उन्होने मना किया तो उनको नौकरी से निकाल दिया गया। इसी के साथ मीटिंग के लिए ऑफिस में बुला कर उन्हें अपमानित किया गया।

लड़कियों ने CFI में मदर चाइल्ड हेल्थ विंग प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर पर भी आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया है। वीडियो में दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। इसी वीडियो में हेल्थ कंसल्टेंट फेवा थॉमस को कहते सुना जा रहा है कि हम पर धर्मान्तरण के आरोपों को साबित करके दिखाओ।

चैरिटेबल ट्रस्ट CFI की संस्था MCI की प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर ने इन आरोपों में किसी भी प्रकार की सच्चाई न होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि मैंने किसी भी कर्मचारी को संस्था से नहीं निकाला है। उनके अनुसार आरोप लगाने वाली 22 लड़कियों का उनसे सीधा वास्ता ही नहीं है। वो सभी संस्था के कर्मचारी राजेश खन्ना के अधीनस्थ काम करती हैं।

डॉक्टर प्रीति ने कहा कि उन पर आरोप क्यों लग रहे हैं ये उन्हें भी नहीं समझ में आ रहा। उन सभी की जानकारी अपडेट करने के लिए उन्हें बुधवार को बुलाया गया था। हमने उन्हें कभी भी बाइबिल बाँटने के लिए भी नहीं कहा है। इसी के साथ हम पर लग रहे धर्मांतरण के आरोप भी सही नहीं हैं।

बकौल प्रीति नायर उनकी तरफ से राजेश खन्ना के खिलाफ पुलिस में अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई गई है। इस मामले में आरोपित राजेश खन्ना का कहना है कि वो CFI में लगभग 5 वर्ष से नौकरी कर रहे हैं। उन्हें संस्था के मदर चाइल्ड हेल्थ विंग में महिलाओं को जागरूक बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले कुछ समय से उन्हें बाइबिल बाँटने के साथ ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए कहा जा रहा है।

उनके अधीनस्थ काम करने वाली महिलाओं को भी यही काम करने का दबाव CFI संस्था द्वारा बनाया जा रहा था। लड़कियों ने ऐसा करने से मना किया तो उन्हें निकाल दिया गया। प्रचार करने और बाइबिल बँटवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

बुधवार दोपहर संस्था प्रमुख डॉक्टर प्रीति नायर और फेवा ने इसी सिलसिले में सबको बातचीत के लिए बुलाया था। मुझे ऑफिस के बाहर ही रोक दिया गया। सिर्फ लड़कियों को अंदर ले जाया गया। कुछ देर बाद अंदर से चीख सुन कर मैं भी वहाँ पहुँच गया। मेरे पहुँचते ही उन्होंने मुझ पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। लड़कियों ने बाइबिल बाँटने और ईसाई धर्म का प्रचार करने से मना कर दिया इसलिए उन सभी को नौकरी से निकाल दिया गया।

राजेश खन्ना के अनुसार उन्होंने इसकी लिखित शिकायत स्थानीय थाने छोला मंदिर में की है। साथ ही उन्होंने गुरुवार को नौकरी से इस्तीफा भी दे दिया। उनके अनुसार पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है।

इस घटनाक्रम पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छोला मंदिर टीआई अनिल मौर्य ने बताया कि CFI संस्था के खिलाफ राजेश खन्ना ने प्रार्थना पत्र दिया है। दी गई तहरीर में उन्होंने CFI द्वारा धर्मान्तरण करवाने और उनके अधीनस्थ काम करने वाली लड़कियों से बाइबिल बँटवाने का आरोप लगाया है। संस्था ने ही राजेश खन्ना के खिलाफ अभद्रता करने का आरोप लगा कर तहरीर दी है। दोनों मामलों की जाँच करवाई जा रही है। अंत में जो भी दोषी होगा उस पर वैधानिक एक्शन लिया जाएगा।

इस प्रकरण की जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने स्थानीय छोला मंदिर थाने में फोन मिलाया। थाने के लैंडलाइन नंबर को रिसीव करने वाले स्टाफ ने कार्रवाई में किसी प्रगति की जानकारी होने से इंकार कर दिया। वहीं जब थाना प्रभारी के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन मिलाया गया तब कोई जवाब नहीं मिला।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : इस्लामी देश बनाना चाहता था भारत को’ – जामिया छात्र आसिफ इक़बाल का कबूलनामा

आसिफ इकबाल तन्हा
गिरफ्तार आसिफ इकबाल तन्हा (साभार: सियासत)
जैसे-जैसे नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हुए दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों की जाँच आगे बढ़ रही है, दंगाइयों के नापाक मंसूबे उजागर होने पर उन समस्त हिन्दुओं को शर्म आनी चाहिए, जो चंद सिक्कों और मुफ्त की कोरमा, बिरयानी  की खातिर उन्हीं के कंधे सवार होकर उन्हीं के विनाश का खेल खेल रहे थे। 
शंका है, जो लोग हिन्दू विरोधी षड्यंत्र को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर स्वांग रच रहे थे, बकरा या चिकन के साथ उस मांस को मिश्रित कर दिया हो, जो हिन्दुओं में प्रतिबंधित है। इनकी नापाक हिन्दू विरोधी हरकतों से ये लालची हिन्दू तब भी नहीं चेते, जब प्रदर्शनों और धरनों में हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी नारे लग रहे थे। और लालची हिन्दू गंगा-जमुनी तहजीब और सेकुलरिज्म जैसे भ्रमिक नारों की आड़ में अपने ही खिलाफ रची जा रही साज़िश का हिस्सा बन रहे थे। समस्त देशप्रेमी संगठनों को एकजुट होकर इन नारों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। शर्म उन नेताओं को भी आनी चाहिए जो संविधान की शपथ लेकर, देश को तोड़ने वालों का समर्थन कर रहे थे/कुछ किसी न किसी प्रकार से अभी भी कर रहे हैं। जनता को चाहिए आने वाले चुनावों में ऐसे नेताओं और उनकी पार्टियों का बहिष्कार कर ईंट का जवाब पत्थर से दें।   
खूब अपना फ्लैट बेचकर लंगर लगाने के स्वांग को मीडिया भी हवा दे रहा था, जबकि पार्टी फण्ड से ख़रीदे फ्लैट को बेचकर ये नौटंकी की गयी थी। इस्लामिक राष्ट्र बनाने वाले साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त और शांति के दुश्मन बेचारे गरीब, मजलूम और शांतिदूत इतने शातिर दिमाग के थे कि हिन्दुओं के सामने कुछ बयान और हिन्दुओं के पीछे इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए जद्दोजहद करने पर कवायत की जाती थी। (पढ़िए नीचे दिए लिंक) जब इन हिन्दू विरोधी दंगाइयों को पकड़ा जा रहा था, तब तुष्टिकरण और सेकुलरिज्म का शोर मचा कर Victim Card खेला जा रहा था। इनके समर्थक मुस्लिम होने की सजा देने का जहर फैलाकर वास्तविकता को छुपाने का घिनौना खेल खेल कर देश को गुमराह कर रहे थे। अब किसी की आवाज़ नहीं निकल रही कि इन पर देशद्रोह का केस दर्ज कर सख्त से सख्त सजा दी जाए। लेकिन वोट बैंक के डर से कोई नहीं बोलेगा।  
बहुत शोर मचाया जा रहा था कि "देखो मोदी देश को तोड़ रहा है, बर्बाद कर रहा है, क्या जरुरत थी इस बिल को लाकर कानून बनाने की?" आदि आदि, लेकिन दंगों की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, असली मंसूबे सामने आ रहे हैं, वैसे तो नीयत प्रदर्शन और धरनों में ही नज़र आ गयी थी, लेकिन मीडिया ने भी अपनी TRP को बनाये रखने के लिए नज़रअंदाज करती रही। मुफ्त में कोरमा, बिरयानी और स्वादिष्ट फलों से भरपूर नाश्ता और दिनभर की दहाडी भी ने इन दंगाइयों का हौंसला आफजाई करती रही। 
UAPA के तहत गिरफ्तार जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा ने पुलिस पूछताछ के दौरान कुछ बड़े खुलासे करते हुए बताया है कि किस तरह से नागरिकता कानून (CAA) और NRC के विरोध के नाम पर उन्होंने लोगों को भड़काने के साथ बसों और घरों को जलाया था। आसिफ इकबाल तन्हा ने कहा कि वो देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता था और इसीलिए हिंदुओं को तंग कर धार्मिक भावनाएँ आहत करने की साज़िश रची।
जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO) के सदस्य और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आरोपित आसिफ इकबाल तन्हा ने पुलिस को दिए बयान में बताया की जब CAA/NRC बिल आया, तो उसे ये बिल मुसलमानों के खिलाफ लगा, जिसके बाद आसिफ इस बिल का विरोध करने के लिए जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ जुड़ गया। आरोपित आसिफ जामिया यूनिवर्सिटी का छात्र है और 2014 से स्टूडेंट इस्लामिस्क ऑर्गेनाइजेशन (SIO) का सदस्य भी है।
दिल्ली पुलिस के हवाले से जी न्यूज़ की इस रिपोर्ट में बताया गया है- “आरोपित आसिफ इकबाल ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि ’12 दिसंबर को हम 2500-3000 लोग जामिया यूनिवर्सिटी के गेट नम्बर 7 पर मार्च कर रहे थे, उसके बाद 13 दिसंबर को शरजील इमाम भड़काऊ भाषण देते हुए चक्का जाम करने की बात कहता है। मैंने खुद लोगों को उकसाया। जामिया मेट्रो से पार्लियामेंट तक मार्च की कॉल दी, जिसमें कई संगठन हमें समर्थन देते हैं। जब हम मार्च कर रहे थे, तो पुलिस ने हमें बैरिकेड लगाकर रोक लिया। तभी मैंने कहा कि तुम आगे बढ़ो, पुलिस की इतनी हिम्मत नहीं, जो हमें रोक ले। फिर इसी दौरान जब हम जबरदस्ती आगे बढ़े, तो पुलिस ने हमें रोक लिया और लाठीचार्ज हुआ, जिसमें पुलिस और छात्रों को चोट भी आई।”
जी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित आसिफ इकबाल तन्हा ने कबूलनामे में बताया, “हमने प्लानिंग के तहत 15 दिसंबर को पार्लियामेंट तक मार्च का ऐलान किया, जिसका नाम हमने गाँधी पीस मार्च दिया, ताकि दिखने में ठीक लगे। फिर उसके बाद हम मार्च को जामिया से लेकर जाकिर नगर, बटला हाउस से होते हुए जामिया ले आए। फिर सूर्या होटल के पास पुलिस बैरिकेड लगे थे। हम जबरन बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए, पुलिस हमें रोकने की कोशिश की। भीड़ बेकाबू हो गई और पथराव शुरू हो गया। बसों में आग लगा दी जाती है, बहुत दंगा फसाद हो जाता है। इस दौरान JMI के कई छात्र समेत पुलिस वाले घायल हो जाते हैं।”
आरोपित आसिफ इकबाल ने कहा कि जामिया में हुई हिंसा के बाद जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (JCC) का गठन किया गया था, जिसमें AISA, JSF, SIO, MSF, CYSS, CFI, NSUI जैसे संगठन से जुड़े लड़के शामिल थे। आसिफ ने कहा कि SIO (स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाईजेशन) के कहने पर उसने दिल्ली से बाहर के अन्य कई राज्यों में भारत सरकार के खिलाफ मुस्लिमों को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाया था और जरूरत पड़ने पर हिंसक प्रदर्शन के लिए भी कहा था।
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साभार : यूट्यूब आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार शीर्षक देख आप सोंचगे...
आसिफ इकबाल ने दंगों को लेकर होने वाली फंडिंग पर खुलासा किया कि एलुमिनाई एसोसिएशन ऑफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया (AAJMI) भी इस मूवमेंट में जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी के साथ थी और AAJMI और PFI से ही इस योजना की फंडिंग होती थी।