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नागरिक संशोधन कानून के विरोध को उग्र बनाने में कांग्रेस का हाथ

संशोधित नागरिकता क़ानून विरोध
एंटी-CAA विरोध प्रदर्शन के नाम पर कुछ और ही खिचड़ी पका रही है
नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा और राजसभा में पास होते ही क़ानून बन गया। इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन ये सवाल लाजिमी है कि इस विरोध प्रदर्शन को हिंसक और उग्र बनाने में किसका हाथ है? सबसे बड़ी हिंसा पश्चिम बंगाल में हुई जहाँ घंटों ट्रेनों व यात्रियों को बंधक बनाया गया। जुमे की नमाज के बाद हज़ारों की संख्या में निकली भीड़ ने रेलवे स्टेशनों को तहस-नहस कर दिया। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है कि संशोधित नागरिकता क़ानून मुस्लिमों के ख़िलाफ़ भेदभाव कर रहा है। क्या आपको पता है कि इस क़ानून के विरोध के लिए एक व्हाट्सप्प ग्रुप है, जहाँ सारी रणनीति तैयार की जा रही है?
एक व्हाट्सप्प ग्रुप “Anti-CAA Protest (Law St)” है, जिसका उद्देश्य है क़ानून की पढाई करने वाले छात्रों के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप, जिसमें संशोधित नागरिकता क़ानून का विरोध किया जाएगा। नीचे इस ग्रुप का बायो देखिए, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि यहाँ केंद्र सरकार के इस क़ानून का विरोध किया जाएगा और अन्य लोगों को भी जोड़ने की सलाह दी गई है:
एंटी-CAA ग्रुप का बायो

इस ग्रुप में वैसे ही मैसेज आ रहे थे, जिनका इस्तेमाल वामपंथी प्रपंचों के लिए किया जाता है। इस ग्रुप के एडमिन्स पर एक नज़र डालिए। रीतम सिंह इसका पहला एडमिन है, जिसकी फेसबुक प्रोफाइल ये रही:
लेकिन, यहाँ से कुछ साफ़ नहीं होता। हाँ, जैसे ही आप उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर जाते हैं, वह कांग्रेस के झंडे वाला अंगवस्त्र पहने दीखता है और सबकुछ साफ़ हो जाता है। ये देखिए:
रीतम सिंह का फेसबुक प्रोफाइल

बाद में हमें पता चलता है कि रीतम कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का नेशनल RTI सेल कॉर्डिनेटर है। ये देखिए:
रीतम का इंस्टाग्राम प्रोफाइल, कांग्रेस के झंडे वाले दुपट्टे के साथ

इस ग्रुप का दूसरी एडमिन भी कॉन्ग्रेस से ही जुडी हुई हैं। उनका नाम श्रीमंजित है। ये देखिए:
इसी तरह इस व्हाट्सप्प ग्रुप के एडमिन्स कांग्रेस, एनएसयूआई और कॉन्ग्रेस के अन्य संगठनों से जुड़े लोग थे। इनमें से कई ऐसे हैं जो आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे। जब मैंने एडमिन्स के एनएसयूआई से होने की बात कही तो ग्रुप के लोगों ने समझाया कि ये आंदोलन राजनीतिक नहीं है। ये देखिए:
रीतम का एनएसयूआई कनेक्शन

रीतम सिंह का मैसेज काफ़ी कुछ बता रहा था। जिस तरह से उसने असम के विरोध प्रदर्शन की तर्ज पर सबकुछ करने की सलाह दी, उससे उसके इरादे नेक नहीं लग रहे थे। इस पूरे ग्रुप का उद्देश्य ये था कि कांग्रेस के जुड़ाव को किसी तरह छिपाया जाए और इसे जनता का न्यूट्रल विरोध प्रदर्शन के रूप में पेश किया जाए। साज़िश रची जा रही थी कि 19 दिसंबर को सभी लॉ कॉलेजों में उपद्रव हो और संशोधित नागरिकता क़ानून का विरोध प्रदर्शन किया जाए। कर्नाटक युथ कांग्रेस का प्रवक्ता आरोन मिर्ज़ा भी इस ग्रुप का सदस्य था। ये देखिए:
एडमिन श्रीमंजित भी कॉन्ग्रेस से जुड़ी हैं

मेरे मैसेज का रीतम ने दिया जवाब
कर्नाटक युथ कॉन्ग्रेस से जुड़ा है आरोन मिर्ज़ा
इसी तरह योगेंद्र यादव के ‘स्वराज इंडिया’ से जुड़ा ऋषभ रंजन भी इस ग्रुप का सदस्य है, जो मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट का विरोधी वकील था। इस ग्रुप में रवीश कुमार और अमानतुल्लाह ख़ान जैसों के कांटेक्ट नंबर भी शेयर किए गए हैं, जिन्हें आपात स्थिति में मदद के लिए कहा जा सकता है। ये देखिए:                           
रवीश और अमानतुल्लाह सहित अन्य ‘खेवनहारों’ के नंबर शेयर किए गए
कुल मिला कर इस ग्रुप का उद्देश्य यही था कि 19 दिसंबर को लॉ कॉलेजों में हिंसा भड़काई जाए। जामिया के छात्रों की तरह उपद्रव किया जाए, उससे भी बड़ा। इस ग्रुप में कॉन्ग्रेस और कई एनएसयूआई के लोग एडमिन के रूप में जुड़े हैं, जो किसी राजनीतिक दल से अपनी पहचान छिपा कर इस कथित आंदोलन को न्यूट्रल साबित करना चाहते हैं।
(साभार :ऑपइंडिया की संपादक नुपुर शर्मा के विस्तृत अंग्रेजी लेख का संक्षिप्त अनुवाद)

महीनों से रची जा रही थी साज़िश ; जामिया में मिले 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड

जामिया इस्लामिया, नागरिकता क़ानूनजामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ख़ुद जानकारी दी है कि उसके कैम्पस में 750 फेक आईडी कार्ड मिले हैं। कहा गया है कि यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में बाहरी लोग घुसपैठ कर रहे हैं और 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड का मिलना सदेह पैदा करता है। जामिया के प्रॉक्टर ने हिंसा के लिए इसी घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराया है। जामिया की कुलपति नज़मा अख्तर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी कैम्पस में बाहर से लोग आ रहे हैं और वो फ़र्ज़ी आईडी कार्ड बना कर रह रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि यही घुसपैठिए हिंसा फैला कर जामिया के छात्रों को बदनाम भी कर रहे हैं। पिछले 3 महीनों के अंदर 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड बरामद किए गए हैं। इससे पता चलता है कि जामिया में हो रही हिंसा की साजिश पिछले 3 महीने से रची जा रही थी। हिंसा भड़काने की तैयारी काफ़ी पहले से थी और संशोधित नागरिकता क़ानून के रूप में उन्हें एक नया हथियार मिल गया। अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में फ़र्ज़ी आई कार्ड मिलने के बाद क्या पुलिस में इसकी शिकायत की गई? अगर शिकायत हुई तो पुलिस की जाँच में क्या निकला?

पुलिस के बयान से भी इसके पीछे बड़ी साज़िश की बू आती है। साउथ ईस्ट दिल्ली के एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश ने कहा कि पुलिस ने जब आँसू गैस के गोले छोड़े, तब उससे बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने भींगे हुए कम्बलों का प्रयोग किया। ये उनके पास बड़ी तादाद में थे। इससे पता चलता है कि वो पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये विरोध प्रदर्शन स्वाभाविक नहीं था, बल्कि जो कुछ भी हिंसक वारदातें हुईं उसकी पहले से योजना बनाई गई थी।
फ़िलहाल जामिया नगर में हुई हिंसा के मामले में मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है। ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर लगातार प्रदर्शनकारी छात्रों से अपील कर रहे हैं कि वे पत्थरबाजी न करें लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। पुलिस ने पूरी तरह संयम का परिचय दिया लेकिन 4 बसों को जलाए जाने और 100 से भी अधिक वाहनों को क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद पुलिस को हालात पर काबू पाने के लिए जामिया कैम्पस में प्रवेश करना पड़ा।

पहले से तैयार था जामिया का स्क्रिप्ट?; याकूब समर्थक आयशा और जिहाद का ऐलान करने वाली लदीदा

बरखा दत्त, जामिया उपद्रवजामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसा और आक्रामकता के दौर से ऐसा गुजरा कि कई बसों में आग लगा दी गई और 100 से अधिक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जामिया कैम्पस में पुलिस को घुसना पड़ा और उपद्रवियों को नियंत्रित किया गया। जामिया के छात्रों ने पुलिस पर बर्बरता से पेश आने का आरोप लगा। पुलिस ने बताया कि उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। जामिया के कई छात्रों ने वीडियो शेयर कर यह दिखाने का प्रयास किया कि पुलिस उन्हें पीट रही है और क्रूरता से पेश आ रही है।हालाँकि, कई फोटोज में कुछ कॉमन भी था।
एक युवती है, जो जामिया की छात्रा है। वो कई फोटो में दिख रही है। विरोध प्रदर्शन करते हुए। पुलिस की लाठी से साथियों को कथित रूप से बचाते हुए। मोदी और भाजपा के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए। मीडिया के गिरोह विशेष ने जिस छात्रा को नायिका बना रखा है, उसका नाम है- आयशा रेना। आयेशा की एक फोटो एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार बरखा दत्त के साथ भी वायरल हुई है। आख़िर वो हर फोटो में क्यों दिख रही है और क्या उसे आंदोलन का चेहरा बना कर पेश किए जाने की कोशिश हो रही है, यह सवाल जायज है।
क्या आयशा को एक ‘वीर, बहादुर और साहसी’ युवती की तरह पेश किया जा रहा है, जो हिजाब लपेटे हुए भारत सरकार की ‘दमनकारी नीतियों’ के ख़िलाफ़ एक चेहरा बन कर उभरे और उपद्रवियों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल हों? शक होना लाजिमी है क्योंकि आयशा आतंकवादियों की समर्थक है। याकूब मेमन की समर्थक है। वो भारत को एक फ़ासिस्ट देश मानती है आयशा की नज़र में सरकार नहीं, मोदी नहीं बल्कि ये पूरा का पूरा देश ही फासिस्ट है। याकूब कौन है? ये वही आतंकी है, जिसका 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों में हाथ था। यानी, 317 लोगों की हत्या का एक गुनहगार। उसे 30 जुलाई 2015 को फाँसी पर लटका दिया गया।
एक आतंकी को सज़ा-ए-मौत दिया जाना आयशा को पसंद नहीं आया और उसने देश को फासिस्ट बताते हुए कहा कि माफ़ करना याकूब, हम तुम्हें बचा नहीं पाए। एक आतंकवादी, जिसका हाथ सवा 300 लोगों के ख़ून से रंगा हुआ है, उसका समर्थन करने वाली युवती आज मोदी सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा बन कर उभर रही है, या फिर जबरन उभारी जा रही है।
बरखा दत्त ने तो रेना की तारीफों के पुल बाँधे। उसके अलावा बरखा दत्त ने लदीदा फरज़ाना का भी नाम लिया, जो इस्लाम और कुरान को लेकर वीडियो बनाती है। जामिया मिलिया इस्लामिया की 3 छात्राओं की प्रोफाइल कई मीडिया हाउस ने पहले ही तैयार कर ली थी, जैसे आउटलुक में उसके बारे में कुछ दिन पहले ही काफ़ी कुछ छप गया था। आख़िर यह सब किसके इशारे पर हुआ? मीडिया में कुछ लोग तो हैं ऐसे जो एजेंडा सेट कर रहे हैं, उसके लीडर तय कर रहे हैं और पहले से तैयारी कर के नैरेटिव सेट कर रहे हैं? बरखा दत्त का नाम आते ही स्थिति और भी संदेहास्पद हो जाती है।
ऐसा हम कोई मज़ाक में नहीं कह रहे। ‘आउटलुक’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ने तो जामिया के दंगाइयों की तुलना ‘अरब स्प्रिंग’ से भी कर दी। वो ये भूल गए कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जबकि अरब में आंदोलन तानाशाही के ख़िलाफ़ हुआ था। लदीदा अरबी की ही छात्र है। वो जामिया में प्रथम वर्ष की छात्रा है। लदीदा 2 सालों से भाषण वगैरह दे रही है। वो तैयार हो रही थी, किसी बड़े आंदोलन के लिए। आंदोलन नहीं, इसे उपद्रव कह लीजिए। तैयार की जा रही थी। कुछ लोग थे, जिन्हें पता था कि ऐसी युवतियों का समय आने पर इस्तेमाल किया जा सकता है और अभी ऐसा ही हो रहा है।
सूडान में ‘आला सलाह’ नामक एक युवती के कुछ वीडियो वायरल हुए थे। वो गाने गाकर विरोध करती थी। ‘आउटलुक’ ने लदीदा की तुलना उससे ही की। मीडिया का एक बड़ा वर्ग दुनियाभर के बड़े प्रदर्शनों की तरह, उन विरोध प्रदर्शन में शामिल नायक-नायिकाओं की तरह, कुछ लोगों को यहाँ भी उसी तर्ज पर उभारना चाहता था और लदीदा का फेसबुक वाल देख कर सब साफ़ हो जाता है। वो बद्र, उहद और कर्बला का जिक्र करती हैं। ये सभी वो लड़ाइयाँ हैं, जो इस्लामी समाज ने शुरुआत में लड़ी थी। वो लड़ाई, जो काफिरों के ख़िलाफ़ लड़ी गई थी। याद रखिए, इस्लाम में हिन्दुओं को भी अरसे से काफिरों के रूप में पहचाना गया है। क्या जामिया का आंदोलन या दंगा भी उसकी ही एक चिंगारी है, जिसे ‘काफिरों के खात्मे’ के लिए शुरू किया गया है।

लदीना सोशल मीडिया में जिहाद की बातें करती हुई दिखती हैं। वो ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूल अल्लाह’ का नारा लगाते हुए दिखती हैं। इन चीजों से उनकी मंशा साफ़ हो जाती है। लदीदा का जिहाद अहिंसा का पाठ तो नहीं है, इतना स्पष्ट है। ये जो भी है, उसकी बानगी हमें देखने को मिल चुकी है- बंगाल में, जामिया नगर में। लदीदा भारत से नफरत करने वाली युवती है। वो भारत को ‘मिडिल फिंगर’ दिखाती है। कठुआ रेपकांड के बाद उसने भारत को ‘मिडिल फिंगर’ दिखाते हुए इमोजी पोस्ट की थी। देश से नफरत करने वाली इस युवती को मसीहा बना कर उभारने का प्रयास जारी है, उसी देश में।
फिर से थोड़ा पीछे चलिए। शाहीन अब्दुल्लाह का नाम जान लीजिए। ये वही आदमी है, या फिर छात्र कह लीजिए, जो पुलिस से बचते हुए वहीं जाकर छिपता है जहाँ लदीदा और आयशा रहती है। वह पुलिस से मार खाता है, दोनों युवतियाँ उसे बचाती है। एक परफेक्ट फुटेज तैयार हो जाता है। एक पीड़ित छात्र, एक ‘लोकतान्त्रिक छात्र आंदोलन’, दो ‘साहसी’ महिलाएँ और बर्बर ‘भारत देश की पुलिस’। इससे ज्यादा क्या चाहिए किसी आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिला कर सरकार पर दबाव बनाने के लिए? अब्दुल्लाह ‘मकतूब मीडिया’ के लिए पत्रकार का काम करता है।
‘मकदूब मीडिया’ केरल से चलता है। लदीदा भी केरल की ही है। इस तरह से सारी कड़ियाँ जुड़ती हुई चली जाती हैं। आखिर केरल के इस पत्रकार को पुलिस क्यों खदेड़ रही थी? क्या पुलिस के साथ कुछ ऐसी हरकत की गई थी, जिससे पुलिस ने मज़बूरी में शाहीन अब्दुल्लाह को खदेड़ा और फिर वह वहीं जाकर छिपा जहाँ पर लदीदा और आयशा थी? क्या यह सब स्क्रिप्ट पहले से तैयार कर लिया गया था, जिसमें पुलिस को वहाँ पर लाया गया, जहाँ जिहाद का ऐलान करने वाले लोग चाहते थे? उस वीडियो को आप गौर से देखिए। पता चलता है कि वीडियो को किसी हाई क्वालिटी कैमरे से शूट किया गया है, एकदम सटीक एंगल के साथ।
लदीना का वो फोटो देखिए, जिसमें वो दीवार पर खड़ी हुई दिख रही है। सूडान की सलाहा भी कुछ इसी तरह खड़ी हुई थी, कार पर। उससे एक क़दम और आगे जाते हुए लदीदा और अन्य युवतियाँ दीवार पर खड़ी हुई। सूडान के आंदोलन को नक़ल करने की पूरी कोशिश। ‘फर्स्टपोस्ट’ में 8 बजे लदीदा का एक लेख आता है, उसकी बाइलाइन। उसके एक घण्टे बाद ही उसका वीडियो आता है, ‘फर्स्टपोस्ट’ में उसके बारे में ख़बर प्रकाशित होती है। यह 16 नवंबर की शाम की बात है। आप भी कहेंगे- इस साज़िश के सूत्रधारों ने क्या होमवर्क किया था! वाह!


छात्रों का इस्तेमाल कर के मोदी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है। ऐसा करने वाले लोग मीडिया के बड़े चेहरे हैं, जो अल्पसंख्यक युवतियों के जरिए मोदी सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बनाते हैं। शेहला रशीद भी उसी कड़ी का एक हिस्सा भर थी। अब लदीदा है। आयशा है। कल को किसी और यूनिवर्सिटी में छात्रों को दंगाई बना दिया जाएगा। किसी और देश के आंदोलन को कॉपी किया जाएगा। कोई नया ‘हीरो’ या ‘Shero’ निकल कर आएगा या आएगी। सावधान रहिए, मासूम चेहरों का मास्क बना कर भेड़ियें खेल रहे हैं। काफिरों के ख़िलाफ़ जिहाद का ऐलान करने वाले ‘लोकतंत्र की हत्या’ का नैरेटिव चलाने वालों से जा मिले हैं। आगे ये क्रम और भी हिंसक होगा।

क्या दिल्ली को गोधरा बनाने का प्रयास हो रहा है?

नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लेकर देश के कई राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहा है वहीं देश की राजधानी दिल्ली के जामिया इलाके में भी विरोध प्रदर्शन चल रहा है रविवार शाम नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन काफी उग्र हो गया प्रदर्शनकारियों ने जुलेना के पास तीन बसों में आग लगा दी है प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने पानी, आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी के विधायक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया मनोज तिवारी ने कहा कि आप विधायक ने हिंसा को भड़काया वहीं आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा कि मैं कालिंदी कुंद के प्रदर्शन में शामिल था वो प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा
LIVE: नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली में उग्र प्रदर्शन, 3 बसों में आग, 6 मेट्रो स्टेशन बंदविरोध प्रदर्शन के चलते 6 मेट्रो स्टेशन बंद
डीएमआरसी के मुताबिक, सुखदेव विहार, जामिया मिलिया इस्लामिया, ओखला विहार, जसोला विहार और शाहीन बाग के एंट्री और एग्जिट गेट बंद हैं इन स्टेशनों पर ट्रेनें नहीं रुकेंगी. बता दें, आश्रम मेट्रो स्टेशन के गेट पहले ही बंद कर दिए गए थे
पुलिस ने की छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील
पुलिस ने छात्रों से शांत बनाए रखने की अपील की है
 पुलिस सूत्रों के मुताबिक, "हम छात्रों से शांत और शांतिपूर्ण बने रहने का अनुरोध करते हैं अगर उन्हें कोई समस्या है तो वे हमारे कंट्रोल रूम को फोन करें कि वे अवांछित तत्वों को आश्रय न दें कोई भी उन्हें उचित अनुमति के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जाने से नहीं रोकता है"
सुखदेव विहार और आश्रम  मेट्रो स्टेशन बंद 
डीएमआरसी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की सलाह पर सुखदेव विहार मेट्रो स्टेशन प्रवेश और निकास द्वार और आश्रम मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-3 बंद कर दिए गए हैं
 सुखदेव विहार में ट्रेनें नहीं रुकेंगी
कानून बना नागरिकता संशोधन बिल
बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल 2019 राज्यसभा और लोकसभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से इसे मंजूरी मिलने के बाद कानून में बदल गया
 राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 वोट और विरोध में 99 वोट पड़े थे. वहीं, लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 311 और विरोध में 80 वोट पड़े नागरिकता संशोधन कानून के तहत भारत के तीन पड़ोसी इस्लामी देशों- पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर भारत की शरण में आए गैर-मुस्लिम लोगों को आसानी से नागरिकता मिल सकेगी
क्या दिल्ली को गोधरा बनाने का प्रयास हो रहा है?
दिल्ली में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज़ हो गया है। जामिया नगर में उपद्रवियों ने डीटीसी की 3 बसों को आग के हवाले कर दिया। ड्राइवर व अन्य स्टाफ अपनी जान बचा कर भागे। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने बसों को जलाए जाने में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ विपक्षी दल और कई मुस्लिम संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
जामिया नगर में न सिर्फ़ बसों को जलाया गया बल्कि पत्थरबाजी कर कई बसों के शीशे भी फोड़ डाले गए। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि क्षतिग्रस्त बसों के पास पत्थर के टुकड़े पड़े हैं और कैसे उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस किया;


बसों में लगाई गई आग को बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को लगाया गया। सूचना मिलते ही दमकलकर्मी और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ वहाँ पर पहुँचीं। ताज़ा सूचना मिलने तक प्रदर्शनकारी वहाँ से भाग खड़े हुए थे लेकिन बसों से तेज़ धुआँ लगातार उठ रहा था। मौके पर कई प्राइवेट वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। जब ये घटना हुई, तब जामिया के कई छात्र वहाँ पर प्रदर्शन कर रहे थे।
जामिया के छात्रों ने दावा किया है कि ये हरकत उन्होंने नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अहिंसक है। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को बदनाम करने के लिए शरारती तत्वों ने बसों को जलाने का काम किया है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर प्रदर्शनकारियों को रोका, लेकिन जब वो नहीं माने तो लाठीचार्ज और आँसू गैस का सहारा लिया गया। आसपास के क्षेत्र को खाली करा लिया गया है। जब सदन में नागरिकता संशोधन बिल पेश किए जाने की बात चल रही थी, तभी से इन इलाक़े में तनाव व्याप्त हो गया था।

जामिया कैम्पस के भीतर छात्रों का प्रदर्शन अभी भी जारी है और वो लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। जहाँ ये घटना हुई है, वो जगह जामिया कैम्पस से कुछ ही दूरी पर जामिया नगर में स्थित है। जामिया के पूर्व छात्रों के संगठन ने इस घटना की निंदा की है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई है कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है।
ट्रैफिक पुलिस ने ओखला अंडरपास से सरिता विहार जाने वाले मार्ग पर यातायात रोक दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे इस रास्ते न गुजरें। ज्ञात हो कि केंद्रीय दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है। वहाँ पूर्वोत्तर के छात्र संशोधित नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए जुटे हैं।