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| एंटी-CAA विरोध प्रदर्शन के नाम पर कुछ और ही खिचड़ी पका रही है |
एक व्हाट्सप्प ग्रुप “Anti-CAA Protest (Law St)” है, जिसका उद्देश्य है क़ानून की पढाई करने वाले छात्रों के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप, जिसमें संशोधित नागरिकता क़ानून का विरोध किया जाएगा। नीचे इस ग्रुप का बायो देखिए, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि यहाँ केंद्र सरकार के इस क़ानून का विरोध किया जाएगा और अन्य लोगों को भी जोड़ने की सलाह दी गई है:
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| एंटी-CAA ग्रुप का बायो |
इस ग्रुप में वैसे ही मैसेज आ रहे थे, जिनका इस्तेमाल वामपंथी प्रपंचों के लिए किया जाता है। इस ग्रुप के एडमिन्स पर एक नज़र डालिए। रीतम सिंह इसका पहला एडमिन है, जिसकी फेसबुक प्रोफाइल ये रही:
लेकिन, यहाँ से कुछ साफ़ नहीं होता। हाँ, जैसे ही आप उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर जाते हैं, वह कांग्रेस के झंडे वाला अंगवस्त्र पहने दीखता है और सबकुछ साफ़ हो जाता है। ये देखिए:
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| रीतम सिंह का फेसबुक प्रोफाइल |
बाद में हमें पता चलता है कि रीतम कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का नेशनल RTI सेल कॉर्डिनेटर है। ये देखिए:
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| रीतम का इंस्टाग्राम प्रोफाइल, कांग्रेस के झंडे वाले दुपट्टे के साथ |
इस ग्रुप का दूसरी एडमिन भी कॉन्ग्रेस से ही जुडी हुई हैं। उनका नाम श्रीमंजित है। ये देखिए:
इसी तरह इस व्हाट्सप्प ग्रुप के एडमिन्स कांग्रेस, एनएसयूआई और कॉन्ग्रेस के अन्य संगठनों से जुड़े लोग थे। इनमें से कई ऐसे हैं जो आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे। जब मैंने एडमिन्स के एनएसयूआई से होने की बात कही तो ग्रुप के लोगों ने समझाया कि ये आंदोलन राजनीतिक नहीं है। ये देखिए:
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| रीतम का एनएसयूआई कनेक्शन |
रीतम सिंह का मैसेज काफ़ी कुछ बता रहा था। जिस तरह से उसने असम के विरोध प्रदर्शन की तर्ज पर सबकुछ करने की सलाह दी, उससे उसके इरादे नेक नहीं लग रहे थे। इस पूरे ग्रुप का उद्देश्य ये था कि कांग्रेस के जुड़ाव को किसी तरह छिपाया जाए और इसे जनता का न्यूट्रल विरोध प्रदर्शन के रूप में पेश किया जाए। साज़िश रची जा रही थी कि 19 दिसंबर को सभी लॉ कॉलेजों में उपद्रव हो और संशोधित नागरिकता क़ानून का विरोध प्रदर्शन किया जाए। कर्नाटक युथ कांग्रेस का प्रवक्ता आरोन मिर्ज़ा भी इस ग्रुप का सदस्य था। ये देखिए:
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| एडमिन श्रीमंजित भी कॉन्ग्रेस से जुड़ी हैं |
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| मेरे मैसेज का रीतम ने दिया जवाब |
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| कर्नाटक युथ कॉन्ग्रेस से जुड़ा है आरोन मिर्ज़ा |
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| रवीश और अमानतुल्लाह सहित अन्य ‘खेवनहारों’ के नंबर शेयर किए गए |
(साभार :ऑपइंडिया की संपादक नुपुर शर्मा के विस्तृत अंग्रेजी लेख का संक्षिप्त अनुवाद)









जामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ख़ुद जानकारी दी है कि उसके कैम्पस में 750 फेक आईडी कार्ड मिले हैं। कहा गया है कि यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में बाहरी लोग घुसपैठ कर रहे हैं और 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड का मिलना सदेह पैदा करता है। जामिया के प्रॉक्टर ने हिंसा के लिए इसी घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराया है। जामिया की कुलपति नज़मा अख्तर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी कैम्पस में बाहर से
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसा और आक्रामकता के दौर से ऐसा गुजरा कि कई बसों में आग लगा दी गई और 100 से अधिक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जामिया कैम्पस में पुलिस को घुसना पड़ा और उपद्रवियों को नियंत्रित किया गया। जामिया के छात्रों ने पुलिस पर बर्बरता से पेश आने का आरोप लगा। पुलिस ने बताया कि उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। जामिया के कई छात्रों ने वीडियो शेयर कर यह दिखाने का प्रयास किया कि पुलिस उन्हें पीट रही है और क्रूरता से पेश आ रही है।हालाँकि, कई फोटोज में कुछ कॉमन भी था।
लदीना का वो फोटो देखिए, जिसमें वो दीवार पर खड़ी हुई दिख रही है। सूडान की सलाहा भी कुछ इसी तरह खड़ी हुई थी, कार पर। उससे एक क़दम और आगे जाते हुए लदीदा और अन्य युवतियाँ दीवार पर खड़ी हुई। सूडान के आंदोलन को नक़ल करने की पूरी कोशिश। ‘फर्स्टपोस्ट’ में 8 बजे लदीदा का एक लेख आता है, उसकी बाइलाइन। उसके एक घण्टे बाद ही उसका वीडियो आता है, ‘फर्स्टपोस्ट’ में उसके बारे में ख़बर प्रकाशित होती है। यह 16 नवंबर की शाम की बात है। आप भी कहेंगे- इस साज़िश के सूत्रधारों ने क्या होमवर्क किया था! वाह!

