यूरोपीय संघ के 23 सांसदों का समूह, जो जम्मू-कश्मीर में हैं, 'स्थायी शांति और आतंक के खात्मे के प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन करेंगे'। इनमें से एक सांसद ने बताया कि उन्होंने सुबह मीडिया के कुछ चुनिंदा लोगों से बात की, इनमें स्थानीय कश्मीरी मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की सेना के अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं और अक्टूबर 29 को डल झील में शिकारा की सवारी की गई। सांसदों ने भारी सुरक्षा और राज्य के कुछ हिस्सों में बंद के दौरान जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के हटाए जाने के बाद पहली बार कोई अंतरराष्ट्रीय टीम ने कश्मीर का दौरा किया है। अगस्त महीने में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने का ऐलान किया था। यूरोपीय संघ के सांसदों के कश्मीर का दौरा करने पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशान साधा है कि जब भारत के राजनेताओं को कश्मीर का दौरा नहीं करने दिया जा रहा तो विदेशी सांसदों को कैसे मंजूरी दी गई? पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को फंडिंग उनके दौरे पर भारत के कुछ राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े किए थे। सांसदों ने उन दलों के नेताओं का जवाब देते हुए कहा कि उनके दौरे पर विवाद करना गलत है। कश्मीर में वो ज्यादातर लोगों से मिले और वो शांति के साथ विकास चाहते हैं। हमारा मकसद सिर्फ कश्मीर के हालात को जानना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है जो केंद्र से पैसा जाता है उसका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं होता है। असदुद्दीन ओवैसी के नाजीवाद समर्थक के आरोपों का जवाब देते हुए सांसदों ने कहा कि अगर वो ऐसा होते तो उनके देश की जनता उन्हें नहीं चुनती। सांसदों ने कहा कि वो लोग हिटलर के समर्थक नहीं हैं। कश्मीर आने का मकसद सिर्फ और सिर्फ वहां के लोगों से मिलने का था। स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद वो इस नतीजे पर पहुंचे हैं लोग आतंकवाद से परेशान हो चुके थे और वो खुली हवा में सांस लेना चाहते थे। सांसदों ने कहा कि यह पूरी तरह से साफ है कि पाकिस्तान आतंकियों को फंडिंग करता है जिसे रोकने की जरूरत है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के नजरिए से वो लोग इत्तेफाक रखते हैं। दुनिया के दूसरे मुल्कों को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग थलग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो लोग चाहते हैं कि यूरोप के ज्यादा से ज्यादा लोग कश्मीर का दौरा करें और वहां की सही तस्वीर को पेश करें। सांसदों के समूह में शामिल एक सांसद ने बुधवार को कहा, 'हम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल, स्थाई शांति और आतंक के खात्मे के प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन करते हैं। हमारे स्वागत के लिए हम भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन को धन्यवाद देते हैं।' इन सांसदों को श्रीनगर एयरपोर्ट से शहर के एक लग्जरी होटल में बुलेट-प्रूफ वाहनों में ले जाया गया। वहीं सुरक्षा का काफिला भी इनके साथ चल रहा था। इनमें से ज्यादात्तर सांसद धुर दक्षिणपंथी पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं। 27 में से केवल तीन सांसद लेफ्ट या लिबरल पार्टी से हैं। ये सब भारत निजी दौरे पर आए हैं। सांसदों का समूह जब घाटी के दौरे पर था तो बंद के बीच घाटी और शहर के विभिन्न हिस्से में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रमण्यम और पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने घाटी और जम्मू कश्मीर के अन्य हिस्से में हालात पर शिष्टमंडल को अवगत कराया। शिष्टमंडल ने एक पांच सितारा होटल में नवनिर्वाचित पंचायत सदस्यों और पार्षदों सहित आम लोगों से भी संवाद किया। शहर में सर्दी के बीच कुछ सांसदों ने डल झील में शिकारे का भी आनंद लिया। सांसदों ने सेंटूर होटल के पास नौका विहार किया। इसी होटल में पांच अगस्त के बाद से 30 नेताओं और कार्यकर्ताओं को रखा गया था। फ्रांस से यूरोपीय संघ में सांसद वर्जिन जोरोन ने कहा, ‘यह अच्छा दौरा है और हम कश्मीर में स्थिति जानने के लिए आए हैं। यहां जमीनी हालात का अनुभव हुआ और हमें यहां स्थानीय लोगों से बात कर अच्छा लगा।' ईयू प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद पर बारामूला के उपमेयर आबिद सलाम ने कहा कि विचारों के आदान प्रदान का ‘‘अच्छा मंच'' था और हम कश्मीर में अमन चैन के पक्ष में हैं। यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने कहा कि उनका दौरा आधिकारिक नहीं है। उन लोगों के विजिट को अलग नजरिए से देखा जा रहा है जो सही नहीं है। उन लोगों को मकसद सिर्फ और सिर्फ 370 हटने के बाद के हालात का जायजा लेना था। स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद उन लोगों की सोच यह बनी है कि जम्मू-कश्मीर का जितना विकास हो सकता था वो नहीं हुआ और उसका असर देखा भी जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि शहर में पूरी तरह बंद है और श्रीनगर तथा घाटी के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कुछ जगह झड़पों में कम से कम चार लोग घायल हो गए। लोगों ने 90 फुट रोड सहित श्रीनगर के कम से कम पांच स्थानों पर सड़क को अवरूद्ध कर दिया। दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और झड़पों के कारण सड़कों से गाड़ियां भी नदारद रहीं। पथराव की भी कुछ घटनाएं हुईं। (एजेंसीज इनपुट्स)
अक्टूबर 28 को यूरोपियन संसद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल से मुलाकात की। इस मुलाकात में जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर खुलकर बात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए अजित डोभाल से ये चर्चा कर यूरोपियन यूनियन का प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट नजर आया। यूरोपियन संसद का प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर 29 को जम्मू-कश्मीर का भी दौरा करेगा। 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल का ये कश्मीर दौरा होगा। ये यूरोपीय सांसद में ज्यादातर अपने-अपने देश की दक्षिणपंथी पार्टियों के नेता हैं और सरकार इन्हें निजी हैसियत में कश्मीर ले जा रही है ना कि उनके देश के प्रतिनिधि के तौर पर। विदेशी प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे को लेकर बीजेपी के ही सीनियर नेता सुब्रमण्यण स्वामी ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ईयू डेलिगेशन को जम्मू-कश्मीर भेजने का विदेश मंत्रालय का फैसला अनैतिक है और मैं हैरान हूं. यह विदेश नीति के साथ खिलवाड़ है. मैं सरकार से कहता हूं कि वह इस प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे को रद्द करे. वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ मजाक है. उन्होंने कहा कि भारतीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर के नेताओं और लोगों से मिलने से रोका जाता है और विदेशी प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर भेजा जा रहा है. जम्मू कश्मीर से धारा 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बाद से ही दुनियाभर में जम्मू-कश्मीर का मसला छाया हुआ था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तरफ से हर वैश्विक मंच पर इस मसले को उठाया जा रहा था. ऐसे में इस चर्चा के बीच यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल का ये दौरा काफी अहम है. जम्मू-कश्मीर जाने वाले यूरोपियन संसद के प्रतिनिधिमंडल में कुल 28 सदस्य होंगे. अभी तक भारत की ओर से किसी भी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी.
I am surprised that the MEA has arranged for European Union MPs, in their private capacity [Not EU's official delegation],to visit Kashmir area of J&K. This is a perversion of our national policy. I urge the Government cancel this visit because it is immoral.
When Indian political leaders have been prevented from meeting the people of J&K, what possessed the great chest-beating champion of nationalism to allow European politicians to visit J&K. This is an outright insult to India's own Parliament and our democracy! https://t.co/D48dnctRqE
मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से बयान भी जारी किया गया. पीएमओ की ओर से कहा गया कि यूरोपीय सांसदों का भारत के कल्चर को जानना काफी खुशी का विषय है. PM मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों में दल का दौरा काफी सफल होगा, इस दौरान उन्हें भारत के कल्चर, यहां चल रहे विकास कार्यों के बारे में जानने का मौका मिलेगा. PMO की तरफ से जारी किया गया बयान प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बयान जारी कर कहा गया- यूरोपियन संसद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 7, लोक कल्याण मार्ग पर आज मुलाकात की. प्रधानमंत्री ने यूरोपियन यूनियन के सांसदों के भारत आने पर खुशी जताई.
PMO: Members of European Parliament called on Prime Minister Narendra Modi at 7, Lok Kalyan Marg today. Prime Minister appreciated the importance the Parliamentarians attach to their relationship with India by visiting right at the beginning of their term. pic.twitter.com/iPuRnRqszy
PMO: PM expressed hope they have fruitful visit to various parts of country, including to J&K.Their visit to J&K should give delegation better understanding of cultural&religious diversity of region; apart from giving a clear view of development&governance priorities of region https://t.co/8ga7FkaNB1
Delhi: Members of European Parliament called on Prime Minister Narendra Modi at 7, Lok Kalyan Marg today. The delegation would be visiting Jammu and Kashmir tomorrow. pic.twitter.com/JQKq5xifkk
#WATCH Delhi: Members of European Parliament called on Prime Minister Narendra Modi at 7, Lok Kalyan Marg today. The delegation would be visiting Jammu and Kashmir tomorrow. pic.twitter.com/X4YQEjerLs
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा- प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई है कि सांसदों की भारत यात्रा जिसमें जम्मू कश्मीर की यात्रा भी शामिल है सफल होगी. पीएम ने कहा कि इससे सांसदों को भारत को नजदीक से जानने समझने का मौैका मिलेगा. इन सदस्यों को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को न्योता दिया गया था. इस पूरी विजिट को एक यूरोपियन NGO द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इसमें अधिकतर इटालियन मेंबर हैं. अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद भारत ने दुनिया के बड़े देशों को अपना पक्ष रखा था, जिसमें सभी नियमों, पाकिस्तान के द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को समझाया गया था. इस दौरान कई देशों को इस बारे में प्रेजेंटेशन दी गई, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को भी उजागर किया गया.
हालांकि, यूरोपियन संसद के सदस्यों का जम्मू-कश्मीर आना इस स्टेज का अगला हिस्सा है जो खुद कश्मीर जाकर वहां के हालात को देखना चाहते हैं. पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र, यूरोपियन संसद में इस मसले को उठाया गया था, जहां भारत ने दो टूक जवाब दिया था. गौरतलब है कि यूरोपियन यूनियन (EU) में कुल 28 देश हैं, इन्हीं देशों के सदस्यों को मिलाकर एक संसद बनाई गई है जो कि यूरोपियन संसद है. इसी संसद का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगा. भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को पंगु कर दिया था. इसके बाद से जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले सभी विशेषाधिकार वापस ले लिए गए थे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं, जैसे कि हजारों की संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती, स्थानीय नेताओं को नज़रबंद रखना, फोन-इंटरनेट की सुविधा को बंद कर देना.
इन्हीं कारणों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्तर पर कई बार जम्मू-कश्मीर को लेकर सवाल खड़े किए गए. पाकिस्तान की ओर से भी भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए. हालांकि, भारत की ओर से हर अंतरराष्ट्रीय मंच, विदेशी राष्ट्रप्रमुखों को जम्मू-कश्मीर के बारे में ब्रीफ किया गया. भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को आंतरिक मसला बताया और साथ ही पाबंदियों को सिर्फ एहतियात के तौर पर बताया गया.