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मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए रोहिंग्या को बसाने में लगे हैं केजरीवाल; जम्मू-कश्मीर के हिंदू बहुल इलाकों में मुस्लिमों से निकाह कराने के लिए रोहिंग्या महिलाओं को खरीदकर बनवा रहे डोमिसाइल

म्यांमार में कुछ साल पहले सेना के दमन के बाद रोहिंग्या मुस्लिम भारत समेत 6 एशियाई देशों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहिंग्याओं के चलते इन देशों में न सिर्फ अपराध बढ़ रहे हैं, बल्कि भारत में तो इनके तार घुसपैठ से लेकर आतंकी गतिविधियों तक में जुड़े हुए हैं। बिहार पुलिस ने खुलासा किया कि कट्टरपंथी प्रतिबंधित पीएफआई अपने संगठन में भर्ती करने के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड तक बनवा रहा है। अब रोहिंग्या की मदद से जम्मू-कश्मीर के हिंदू बहुल इलाकों में बाहरी लोगों को बसाने के षडयंत्र का भंडाफोड़ हुआ है। जम्मू-कश्मीर में म्यांमार की महिला को मूल निवासी प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आने के बाद अब रोहिंग्याओं को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। डोमिसाइल बनवाने वाले आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि उनका रैकेट कश्मीर के बूढ़ों, दिव्यांगों और गरीबों की शादी तस्करी कर लाई गई रोहिंग्या महिलाओं से करा रहा है। इन महिलाओं को 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक में खरीदा जाता है। शादी के कुछ वर्ष बाद रोहिंग्या महिलाओं का डोमिसाइल बनवा लिया जाता है।

भारत में घुसपैठ कर तेजी से बढ़ रही है रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी
गृह मंत्रालय ने UNHRC के हवाले से बताया कि भारत में दिसंबर 2021 तक 18 हजार रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की जानकारी मौजूद थी। जो अब बढ़कर करीब दोगुने हो गए हैं। देश में रोहिंग्या विशेषकर जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, दिल्ली-NCR, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मणिपुर में हैं। देश की स्थानीय आबादी वृद्धि दर 1 प्रतिशत है, जबकि रोहिंग्या की आबादी वृद्धि 5 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इनकी बढ़ती आबादी के कारण सरकार द्वारा इनके लिए सुविधाएं जुटाने में परेशानी आ रही है। उधर, थाईलैंड में रोहिंग्याओं के लिंक मानव तस्करी से जुड़े पाए गए हैं। वहां के रास्ते मानव तस्करी मलेशिया तक हो रही है। आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान रोहिंग्याओं को भी इसी रास्ते पर ले जा रहा है।

रोहिंग्या महिलाओं को खरीदकर स्थानीय बूढ़े मुस्लिमों से करा रहे हैं निकाह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएफआई नई पहचान बनाने के लिए रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में दिहाड़ी मजदूरों के रूप में भेज रहा है। रोहिंग्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, दिल्ली-NCR हैं। रोहिंग्या बहुल कॉक्स बाजार क्षेत्र में पिछले 5 साल में चोरी, हत्या, डकैती, दुष्कर्म, नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियां 7 गुना हो चुकी हैं। जम्मू-कश्मीर में तो हिंदू बहुल इलाकों में रोहिंग्या महिलाओं को आधिकारिक रूप से बसाने के लिए उनके डोमिसाइल तक बनाए जा रहे हैं। हाल ही में किश्तवाड़ में के एक युवक की पत्नी अनवारा बेगम के पास कश्मीर का डोमिसाइल मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। अनवारा स्थानीय निवासी से शादी कर सालों से रह रही थीं। 2020 में निवास प्रमाणपत्र हासिल किया। पुलिस ने महिला सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक ऐसे और भी कई मामले हैं जिसकी जांच की जा रही है। ऐसे केस में रोहिंग्या महिलाओं को 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक में खरीदा गया। पुलिस तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है।

हिंदू बहुल इलाकों में रोहिंग्या से जनसंख्या अनुपात बदलने का षडयंत्र
रोहिंग्या शरणार्थी जम्मू-कश्मीर में एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं। ये 2012 से यहां आ रहे हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार अब तक 8 हजार रोहिंग्या आ चुके हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू में 15,29,958 लोगों की आबादी है। इसमें करीब 84.27% हिंदू और 7.03% मुसलमान हैं। भाजपा, शिवसेना और जेके पैंथर्स पार्टी रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रवेश को जनसंख्या अनुपात बदलने की साजिश बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सभी रोहिंग्या मुसलमान हैं और उनमें से अधिकतर लोग जम्मू में रहते हैं, जो हिंदू बहुल इलाका है। जम्मू के एक प्रमुख लेखक और राजनीतिज्ञ प्रोफेसर हरि ओम इसे जनसांख्यिकी आक्रमण बताते हैं।

जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली की केजरीवाल सरकार दे रही रोहिंग्या को पनाह
जम्मू-कश्मीर सरकार ने कुछ दलों के विरोध के बाद दिखावे के लिए अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान के लिए अभियान शुरू किया। इसके तहत बायोमीट्रिक और अन्य जांच के बाद केवल 300 अवैध शरणार्थी ही हाथ आए। इनको जम्मू के हीरानगर जेल के अस्थायी ‘होल्डिंग सेंटर’ में रखा है। इस सेंटर में कई बार पुलिस और कैदियों के बीच 15 झड़प हुई हैं। जेल में कैद रोहिंग्या शरणार्थी उन्हें इस सेंटर से रिहाई या म्यांमार में लौटने की मांग करते हैं। जम्मू के अलावा दिल्ली में भी केजरीवाल सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को खुलेआम पनाह देने में लगी है। आम आदमी पार्टी के नेताओं के इससे जुड़े वीडियो भी वायरल हो चुके हैं। उधर त्रिपुरा में भी एक साल में 52 रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया है। त्रिपुरा पुलिस का रोहिंग्याओं की घुसपैठ रोकने के लिए अलग एक्शन प्लान है।

बहुत से दलाल रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के रास्ते असम में लाते हैं- सरमा
पिछले दिनों असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मामले में चिंता जाहिर की थी। सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि इसमें ऐसे बहुत से दलाल है, जो रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के रास्ते असम में ले आते है। देश में पासपोर्ट और वीजा के बिना घुसने वाला कोई भी हो, हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। त्रिपुरा के डीआईजी ने कहा कि देश में अवैध तरीके से रहने वाले रोहिंग्याओं का पता लगने के लिए त्रिपुरा पुलिस के पास देश भर में नेटवर्क है। इनके खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही हमारी नजर उन दलालों पर भी है जो इनकी बॉर्डर से घुसपैठ में मदद करते है। हम ग्राउंड पर एक्टिव है और मामले में लीड्स मिल रही हैं। हम उत्तर पूर्वी राज्यों में काम कर रहे है और हमें वहां की पुलिस का सहयोग मिल रहा है।

पाक में 2.5 लाख रोहिंग्या, वहां आतंक और घुसपैठिए की ट्रेनिंग दी जा रही
भारत ही नहीं, रोहिंग्या के चलते कुछ अन्य देश की परेशान हैं। क्योंकि रोहिंग्या मुस्लिमों की ड्रग्स, महिला तस्करी, आतंकी वारदात में लिप्तता सामने आई है। इतना ही नहीं पाकिस्तान में तो म्यांमार से 5 साल के दौरान करीब ढाई लाख रोहिंग्या मुस्लिम पहुंच चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां रोहिंग्याओं को आतंकी ट्रेनिंग देकर बांग्लादेश सीमा से भारत में आतंकी घुसपैठ कराने की तैयारी हो रही है। मुस्लिम देश होने के बावजूद इंडोनेशिया अपराधों में लिप्तता, खाने-रहने की परेशानी को देखते हुए अपने यहां रोहिंग्याओं को रखना नहीं चाहता। उसने इतनी सख्ती बरती कि बीते साल रोहिंग्याओं से भरी एक बोट को अपने आचे प्रांत में ठहरने नहीं दिया। थाईलैंड में करीब 92 हजार रोहिंग्याओं ने शरण ली है। वहां भी ये परेशानी खड़ी कर रहे हैं। अवैध रूप से पहुंच रहे रोहिंग्याओं को लौटाने के लिए थाईलैंड ने फरमान जारी किया था। इसके बाद 13000 रोहिंग्याओं को वापस भेजा जा चुका है।

रोहिंग्या मुस्लिम कौन है? जो ड्रग्स, महिला तस्करी, आतंकी वारदात में लिप्त हैं
रोहिंग्या एक स्टेटलेस (राज्यविहीन) लोग है। इनमें ज्यादातर रोहिंग्या इस्लाम को मानते है। ये म्यांमार के रखाइन प्रांत से आते है। कई साल पहले बौद्ध बहुल देश म्यांमार ने रोहिंग्या की नागरिकता छीन ली थी। इससे उन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरी समेत कई अधिकारों से अलग कर दिया गया। तब से म्यांमार में रोहिंग्या के खिलाफ हिंसा जारी है। 2017 में हुए रोहिंग्या के नरसंहार से पहले म्यांमार में उनकी आबादी करीब 14 लाख थी। 2015 के बाद से म्यांमार से 9 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी भागकर बांग्लादेश और भारत समेत आसपास के अन्य देशों में जा चुके हैं। बांग्लादेश की शेख हसीना कह चुकी हैं कि हमारे यहां 11 लाख रोहिंग्या हैं। इनका बोझ उठाना है। रोहिंग्या ड्रग्स और महिला तस्करी जैसे अपराधों में शामिल हैं, जो कानून व्यवस्था के लिहाज से हमारे लिए चुनौती है। रोहिंग्या मुसलमान लंबे समय से समस्याएं पैदा कर रहे हैं।

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए रोहिंग्या को बसाने में लगे हैं केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। चाहे देश और राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा खतरे में क्यों न पड़ जाए। हालांकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक ट्वीट के बाद आम आदमी पार्टी और केजरीवाल सरकार के मंत्रियों ने अपने को देशभक्त और रोहिंग्या विरोधी घोषित कर बीजेपी को फंसाने की जो चाल चली थी, उसमें वो खुद घिरते नजर आ रहे हैं। इसी बीच बीजेपी ने केजरीवाल सरकार का एक पत्र जारी कर आम आदमी पार्टी के प्रोपेगैंडा की हवा निकाल दी है।

आम आदमी पार्टी के प्रोपेगैंडा के खिलाफ बीजेपी ने भी मोर्चा खोल दिया था। बीजेपी ने एक पत्र जारी किया, जिसे केजरीवाल सरकार ने 23 जून, 2021 को NDMC को भेजा था। इसमें केजरीवाल सरकार ने NDMC से बक्करवाला में मौजूद 240 EWS फ्लैट्स रोहिंग्या के लिए देने की मांग की थी। इस पत्र में कहा गया था कि 11 बांग्लादेशी और 71 रोहिंग्याओं के लिए रिस्ट्रिकशन सेंटर बनाना है। इसके लिए EWS फ्लैट के साथ-साथ वहां मौजूद बारात घर की जरूरत है।

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि सिर्फ झूठ बोलना ही अरविंद केजरीवाल का काम है। दिल्ली सरकार ने 23 जून, 2021 को एनडीएमसी को भी एक पत्र लिखकर बक्करवाला में 240 ईडब्ल्यूएस फ्लैट और एक कम्युनिटी सेंटर अलॉट करने का अनुरोध किया था, यह होती है दोहरी नीति। उन्होंने ट्वीट किया, “रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा मुफ़्त बिजली, पानी और आर्थिक सहायता देने को लेकर जब मीडिया वालों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया से प्रश्न पूछा तो एकदम उठ खड़े हुए और Press Conference छोड़ कर भाग गए।”

बीजेपी सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी पार्टी दोहरी नीति पर काम करती है। केजरीवाल की सरकार ने 23 जून 2021 को एक पत्र लिखकर दिल्ली के बक्करवाला में 240 ईडब्ल्यूएस फ्लैट और एक कम्युनिटी सेंटर अलॉट करने का अनुरोध किया था। आज बोल रहे हैं कि रोहिंग्या को दिल्ली में नहीं बसने देंगे।

 इसी तरह बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने भी पत्र को साझा करते हुए कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दोहरी छवि खुलकर सामने आ गई है। गटर लेवल की राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी अब अपने बातों से ही पलट गई है।

गिरफ्तार कश्मीरी दंपति के मोबाइल में मिला आतंकी का पूरा प्रोफाइल

जांच में खुलासा- गिरफ्तार कश्मीरी दंपति के मोबाइल में मिला इस आतंकी का पूरा प्रोफाइल
जहांजेब समी और हिना बशीर बेग की गिरफ्तार (फाइल फोटो))
ISIS से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार कश्मीरी पति-पत्नी के मोबाइल और लैपटॉप से अहम सुराग मिले है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने इन दोनों के मोबाइल और लैपटॉप भी जब्त किए थे जिनसे अब यह बड़ा खुलासा हुआ है 
इनके मोबाइल और लैपटॉप से आतंकी आमिर सुल्तान उर्फ हुजैफा अल बाकिस्तानी का पूरा प्रोफाइल मिला है इसमें आमिर सुल्तान उर्फ हुजैफा अल बाकिस्तानी की एक तस्वीर भी है हुजैफा की इस तस्वीर को इस्लामिक स्टेट द्वारा उसकी मौत के बाद रिलीज किया गया था
इस प्रोफाइल में आमिर सुल्तान उर्फ हुजैफा अल बाकिस्तानी के बारे में और उसकी गतिविधियों के बारे में सब काफी जानकारियां लिखी हुई हैं वह कब ISJK से जुड़ा, वह कब लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया हाफिज सईद की रैलियों में जाने लगा, वह कब लश्कर-ए-तैयबा के मीडिया डिपार्टमेंट से जुड़ा और वह किस तरह हाफिज सईद के लिए प्रोपेगेंडा फैलाता था इस प्रोफाइल में यह भी लिखा है कि आमिर सुल्तान उर्फ हुजैफा अल बाकिस्तानी का भाई पाकिस्तान में स्पेशल सर्विस ग्रुप यानी SSG का कमांडो था
रविवार (8 मार्च) को, दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने आईएस खोरासन मॉड्यूल के साथ कथित संबंधों के चलते ओखला से एक कश्मीरी दंपत्ति को गिरफ्तार किया था दंपति की पहचान जहांजेब समी (पति) और हिना बशीर बेग (पत्नी) के तौर पर की गई है 
पुलिस ने कुछ आपत्तिजनल सामग्री भी जब्त की थी और अभी वह उनसे पूछताछ कर रही है सूत्रों के मुताबिक, दंपति शाहीन बाग में नागरिक संशोधन कानून के खिलाफ विरोध भड़का रहे थे

अनुच्छेद 370 भारत का अंदरूनी मामला; कश्मीर को सीरिया नहीं बनने देंगे-- कश्मीर का दौरा करने के बाद EU सांसद

यूरोपीय संघ के 23 सांसदों का समूह, जो जम्मू-कश्मीर में हैं, 'स्थायी शांति और आतंक के खात्मे के प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन करेंगे' इनमें से एक सांसद ने बताया कि उन्होंने सुबह मीडिया के कुछ चुनिंदा लोगों से बात की, इनमें स्थानीय कश्मीरी मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की सेना के अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं और अक्टूबर 29 को डल झील में शिकारा की सवारी की गई सांसदों ने भारी सुरक्षा और राज्य के कुछ हिस्सों में बंद के दौरान जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के हटाए जाने के बाद पहली बार कोई अंतरराष्ट्रीय टीम ने कश्मीर का दौरा किया है अगस्त महीने में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने का ऐलान किया था यूरोपीय संघ के सांसदों के कश्मीर का दौरा करने पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशान साधा है कि जब भारत के राजनेताओं को कश्मीर का दौरा नहीं करने दिया जा रहा तो विदेशी सांसदों को कैसे मंजूरी दी गई?
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को फंडिंग 
उनके दौरे पर भारत के कुछ राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े किए थे। सांसदों ने उन दलों के नेताओं का जवाब देते हुए कहा कि उनके दौरे पर विवाद करना गलत है। कश्मीर में वो ज्यादातर लोगों से मिले और वो शांति के साथ विकास चाहते हैं। हमारा मकसद सिर्फ कश्मीर के हालात को जानना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है जो केंद्र से पैसा जाता है उसका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं होता है। 
असदुद्दीन ओवैसी के नाजीवाद समर्थक के आरोपों का जवाब देते हुए सांसदों ने कहा कि अगर वो ऐसा होते तो उनके देश की जनता उन्हें नहीं चुनती। सांसदों ने कहा कि वो लोग हिटलर के समर्थक नहीं हैं। कश्मीर आने का मकसद सिर्फ और सिर्फ वहां के लोगों से मिलने का था। स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद वो इस नतीजे पर पहुंचे हैं लोग आतंकवाद से परेशान हो चुके थे और वो खुली हवा में सांस लेना चाहते थे। 
सांसदों ने कहा कि यह पूरी तरह से साफ है कि पाकिस्तान आतंकियों को फंडिंग करता है जिसे रोकने की जरूरत है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के नजरिए से वो लोग इत्तेफाक रखते हैं। दुनिया के दूसरे मुल्कों को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग थलग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो लोग चाहते हैं कि यूरोप के ज्यादा से ज्यादा लोग कश्मीर का दौरा करें और वहां की सही तस्वीर को पेश करें। 
सांसदों के समूह में शामिल एक सांसद ने बुधवार को कहा, 'हम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल, स्थाई शांति और आतंक के खात्मे के प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन करते हैं हमारे स्वागत के लिए हम भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन को धन्यवाद देते हैं'
इन सांसदों को श्रीनगर एयरपोर्ट से शहर के एक लग्जरी होटल में बुलेट-प्रूफ वाहनों में ले जाया गया वहीं सुरक्षा का काफिला भी इनके साथ चल रहा था इनमें से ज्यादात्तर सांसद धुर दक्षिणपंथी पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं 27 में से केवल तीन सांसद लेफ्ट या लिबरल पार्टी से हैं ये सब भारत निजी दौरे पर आए हैं
सांसदों का समूह जब घाटी के दौरे पर था तो बंद के बीच घाटी और शहर के विभिन्न हिस्से में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रमण्यम और पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने घाटी और जम्मू कश्मीर के अन्य हिस्से में हालात पर शिष्टमंडल को अवगत कराया
शिष्टमंडल ने एक पांच सितारा होटल में नवनिर्वाचित पंचायत सदस्यों और पार्षदों सहित आम लोगों से भी संवाद किया शहर में सर्दी के बीच कुछ सांसदों ने डल झील में शिकारे का भी आनंद लिया सांसदों ने सेंटूर होटल के पास नौका विहार किया इसी होटल में पांच अगस्त के बाद से 30 नेताओं और कार्यकर्ताओं को रखा गया था। 
फ्रांस से यूरोपीय संघ में सांसद वर्जिन जोरोन ने कहा, ‘यह अच्छा दौरा है और हम कश्मीर में स्थिति जानने के लिए आए हैं यहां जमीनी हालात का अनुभव हुआ और हमें यहां स्थानीय लोगों से बात कर अच्छा लगा'
ईयू प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद पर बारामूला के उपमेयर आबिद सलाम ने कहा कि विचारों के आदान प्रदान का ‘‘अच्छा मंच'' था और हम कश्मीर में अमन चैन के पक्ष में हैं
यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने कहा कि उनका दौरा आधिकारिक नहीं है। उन लोगों के विजिट को अलग नजरिए से देखा जा रहा है जो सही नहीं है। उन लोगों को मकसद सिर्फ और सिर्फ 370 हटने के बाद के हालात का जायजा लेना था। स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद उन लोगों की सोच यह बनी है कि जम्मू-कश्मीर का जितना विकास हो सकता था वो नहीं हुआ और उसका असर देखा भी जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि शहर में पूरी तरह बंद है और श्रीनगर तथा घाटी के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कुछ जगह झड़पों में कम से कम चार लोग घायल हो गए लोगों ने 90 फुट रोड सहित श्रीनगर के कम से कम पांच स्थानों पर सड़क को अवरूद्ध कर दिया दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और झड़पों के कारण सड़कों से गाड़ियां भी नदारद रहीं पथराव की भी कुछ घटनाएं हुईं। (एजेंसीज इनपुट्स) 

क्या कश्मीर में रची जा रही है कोई गहरी साजिश?

क्या कश्मीर में रची जा रही है कोई गहरी साजिश, अधिकारियों ने दिए संकेत
श्रीनगर और इसके आसपास के इलाकों में करीब दो दर्जन आतंकवादी मौजूद हैं और कुछ इलाकों में वे दुकानदारों को खुलेआम धमकी दे रहे हैं जिसको लेकर सुरक्षा बलों में काफी चिंता है. अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा बल हर तरह से एहतियात बरत रहे हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि आतंकवादी स्थिति का इस्तेमाल लोगों को भड़काने में नहीं कर सकें क्योंकि पहले भी आतंकवाद निरोधक अभियानों के दौरान युवक पथराव की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं. जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में पांच अगस्त को बांटने की घोषणा करने के बाद सरकार द्वारा लगाई गई कई पाबंदियां के बाद केवल छिटपुट घटनाएं ही सामने आई हैं. 
उन्होंने कहा कि पाबंदियां धीरे- धीरे हटाई जा रही हैं लेकिन कश्मीर घाटी में स्थिति 'सामान्य से कहीं दूर' नजर आती है खासकर आतंकवादियों की मौजूदगी को देखते हुए. अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर के बाहरी इलाकों में कई स्थानों पर आतंकवादियों को खुलेआम घूमते देखा गया और वे दुकानदारों को दुकानें बंद रखने और उनका आदेश मानने की धमकी भी दे रहे हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रमुख दिलबाग सिंह ने आतंकवादियों की मौजूदगी की संभावना से इंकार नहीं किया लेकिन कहा कि यह दावा करना कि वे खुलेआम घूम रहे हैं. 'अतिशयोक्ति' है. राज्य के साथ ही केंद्र के कई अधिकारियों से बातचीत के बाद अनुमान है कि करीब दो दर्जन आतंकवादी नगर की सीमा में मौजूद हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही एवं उनका देखा जाना आम बात है. 
अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि जम्मू-कश्मीर पर सरकार ने पांच अगस्त को जब अपने निर्णय की घोषणा की तब से आतंकवाद निरोधक अभियान बुरी तरह प्रभावित है. पांच अगस्त के बाद केवल दो अभियान हुए हैं. 20 अगस्त को बारामूला में और नौ सितम्बर को दूसरा मुठभेड़ सोपोर में. आतंकवादियों ने अंचार झील और सौरा के आसपास के इलाकों सहित नगर के कुछ हिस्सों में आवाजाही रोक रखी है. अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि अभी तक किसी नागरिक की मौत नहीं हुई है और उनको आशंका है कि किसी भी कठोर कार्रवाई से हिंसक प्रदर्शन भड़क जाएगा. 
अधिकारियों का मानना है कि आतंकवादियों ने 'गहरा षड्यंत्र' रच रखा है क्योंकि उनकी 'भारी मौजूदगी' के बावजूद हिंसा के स्तर में कमी आई है. नगर के राज बाग, जवाहर नगर और लाल चौक सहित कई इलाकों में दुकानदारों को बंदूक का भय दिखाकर दुकानें बंद रखने के लिए कहा गया और पूरी तरह हड़ताल सुनिश्चित की गई. अधिकारियों ने कहा कि दुकानदारों और कुछ मीडिया संगठनों को अपने आसपास के सीसीटीवी कैमरे बंद रखने के लिए कहा गया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद प्रभावित शोपियां में आतंकवादियों ने ऑटोमोबाइल के एक वर्कशॉप को जला दिया जहां शनिवार को वाहनों की मरम्मत हो रही थी. 

पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का है, पाकिस्तान तुरंत PoK को छोड़ दे : लंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन

बॉब ब्लैकमैन, रूचि घनश्यामलंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर पर खरी-खरी सुनाई है। ब्लैकमैन ने साफ़ कर दिया कि पाकिस्तान को पीओके छोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर पूरी तरह भारतीय गणराज्य का हिस्सा है। बॉब ब्लैकमैन के बयान से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेइज्जती का रिकॉर्ड बना रहे पाकिस्तान को नया झटका लगा है। शनिवार (सितम्बर 12, 2019) को कश्मीरी पंडितों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए सांसद बॉब ब्लैकमैन जम्मू कश्मीर पर यूएन रेजॉल्यूशन की भी चर्चा की।
लंदन में ब्रिटेन स्थित कश्मीरी पंडितों के एक समूह को संबोधित करते हुए  कंजरवेटिव पार्टी के एमपी बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे पर यूएन में प्रस्ताव पेश करने की योजना पर सवाल खड़े किये ब्लैकमैन बलिदान दिवस पर आयोजित खास कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे  इस कार्यक्रम का आयोजन कश्मीरी पंडित कल्चरल सोसायटी और ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (AIKS) ने किया था कार्यक्रम में एक नाटक का भी मंचन किया गया जिसका शीर्षक था- 'वी रिमेंबर: द जर्नी ऑफ कश्मीरी पंडित्स.' जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही नॉर्थ लंदन से एमपी बॉब ब्लैकमैन इस फैसले का समर्थन करते रहे हैं और भारत के पक्ष में बोलते रहे हैं वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी प्रशंसक हैं हाल ही में सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटा दिया इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है बॉब ब्लैकमैन ने कहा, 'पूरा जम्मू-कश्मीर संप्रभु भारत का हिस्सा है ऐसे लोग, जो वहां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने की बात करते हैं, वे उस प्रस्ताव को भूल जाते हैं, जिसके मुताबिक राज्य के एकीकरण के लिए पाकिस्तानी सेना को कश्मीर छोड़ देना चाहिए'   
यूएन रेजॉल्यूशन को लागू करने की माँग पाकिस्तान भी करता रहा है। शुरुआत में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग ठुकरा दी थी लेकिन अब वह हमेशा इसकी माँग करता है। बॉब ब्लैकमैन ने याद दिलाया कि यूएन की रिजॉल्यूशन के मुताबिक़, सबसे पहले पाकिस्तान और उसकी फ़ौज को कश्मीर छोड़ना पड़ेगा, जिससे पूरे राज्य का एकीकरण हो सके। इस कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त रूचि घनश्याम भी उपस्थित थीं। 
कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने काफ़ी अच्छी प्रस्तुतियाँ दी, जिनकी प्रशंसा रूचि ने भी की। उच्चायुक्त ने बॉब ब्लैकमैन को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि बॉब ब्लैकमैन कंजर्वेटिव पार्टी की ‘1922 कमिटी (प्राइवेट मेंबर्स कमिटी)’ के जॉइंट एग्जीक्यूटिव सेक्रटरी हैं और वह 2012 से ही इस पद पर बने हुए हैं। लंदन के अनुभवी नेताओं में से एक ब्लैकमैन पिछले 9 साल से हैरो ईस्ट के सांसद बने हुए हैं।

बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को भी पत्र लिखा था। बॉब के पत्र का जवाब देते हुए ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री इस जयशंकर से बात की है। उन्होंने साफ़ किया कि जम्मू कश्मीर भारत-पाक्सितान के बीच का मुद्दा है और ब्रिटेन का शुरू से यही मानना रहा है। बॉब ब्लैकमैन कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से निकाल बाहर किए जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं।
इससे पहले सांसद बॉब ने लेबर पार्टी के कुछ सांसदों को हिन्दू-विरोधी करार देते हुए याद दिलाया था कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद कहा था कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा था कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?

भारतीय जेम्सबॉन्ड अजीत डोभाल : जिनकी रणनीति के आगे पस्त हुआ पाकिस्तान

कौन हैं अजीत डोभाल, जिनकी रणनीति के आगे पस्त हुआ पाकिस्तान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इनदिनों कश्मीर दौरे पर है। शनिवार को वह अनंतनाग में आम लोगों से मिलते नजर आए। अजीत डोभाल ने देश की सुरक्षा के कई ऐसे कारनामें हैं जिसे लोग आज भी याद करते हैं, चाहे वो ऑपरेशन ब्लू स्टार रहा हो या पाकिस्तान में खुफिया तरीके से रहना हो या फिर भारत का पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक रहा हो, हर जगह डोभाल ने खुद को साबित किया है और देश की सुरक्षा चाक चौबंद की है। अजीत डोभाल से न केवल पाकिस्तान की हवा खराब रहती है बल्कि चाइना भी उनकी नीतियों से ड़रता है।
कौन हैं अजीत डोभाल 
अजीत डोभाल केरल कैडर के एक आईपीएस अधिकारी हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद वो देश के पांचवें सुरक्षा सलाहकार बने। डोभल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के गिरि बानसेल्युन गाँव में हुआ था। उनके पिता इंडियन आर्मी में थे।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के अजमेर में अजमेर सैन्य स्कूल में की। उन्होंने 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। स्नातक के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। डोभाल केरल कैडर में 1968 में आईपीएस में शामिल हुए।
अजीत डोभाल ने ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया। कहा जाता है कि वह सात साल तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस रहे।
एक तेज तर्रार खुफिया अफसर के रूप में स्थापित अजीत डोभाल इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से सन 2005 रिटायर हुए। इसके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बन गए. इस दौरान न्यूज पेपर में लेख भी लिखते रहे।
साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का नेतृत्व किया था। उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी।
जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था।
अजीत डोभाल 33 साल तक नार्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे हैं, जहां उन्होंने कई अहम ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। 30 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने एक जासूस की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका।
पाकिस्तान में 7 साल तक रह चुके हैं डोभाल
एनएसए अजीत डोभाल 7 सालों तक खुफिया तरीके से पाकिस्तान में जासूस के तौर पर रह चुके हैं। इसका एक किस्सा काफी फेमस हुआ था- लाहौर में एक मजार के पास एक मुसलमान ने अजीत डोभाल को पहचान लिया था कि वो पाकिस्तानी या एक तरह से कहें तो मुसलमान हैं ही नहीं। उस मुसलमान ने उनसे पूछा कि क्या तुम हिंदू हो? तो डोभाल चौंक गए और उन्होंने जवाब दिया- नहीं। फिर वो उन्हें अपने साथ लेकर गया और एक छोटे कमरे में दोनों गए, उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और एक बार फिर उसने कहा कि देखो मैं कह रहा हूं तुम हिंदू हो। डोभाल ने फिर से ना मे जवाब दिया। तो उस मुसलमान ने अजीत से कहा कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं।
डोभाल ने बात बनाते हुए कहा कि हां बचपन में मेरे कान छेदे गए थे लेकिन मैं बाद में कनवर्ट हो गया था। उसने कहा तुम बाद में भी कनवर्ट नहीं हुए थे। खैर तुम इसकी प्लास्टिक सर्जरी करवा लो नहीं तो यहां लोगों को शक हो जाएगा।
इसके बाद उस मुसलमान ने कहा कि वो भी एक हिंदू है। फिर उसने अपनी आलमारी में शिव और दुर्गा जी की तस्वीरें उन्हें दिखाई। डोभाल ने विदर्भ मैनेजमेंट एसोसिएशन के समारोह में भाषण देते हुए एक कहानी सुनाई थी।
पाकिस्तान में छिपकर रहते हुए पाकिस्तान के कई खुफिया राज अजीत डोभाल ने पता कर लिए थे और यही वजह है कि पाकिस्तान आज भी उनसे डरता है।
डोभाल का कश्मीर दौरा
अजीत डोभाल इनदिनों कश्मीर दौरे पर है। डोभाल खुद जमीन पर उतर कर काम कर रहे हैं, और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उन्हें समझा रहे हैं कि उनके पास एकमात्र विकल्प भारत और उसका विकास का मॉडल है। वहाबी सलाफिज्म मत में इस्लामिक कट्टरता है, जो युवाओं को राजनीतिक जिहाद के लिए प्रेरित करती है, जो भारत के लिए सबसे बड़ी चिन्ता की बात है। इंटरनेट पर डार्क बेब का उपयोग कर इसका प्रचार-प्रसार किया जाता है।
यह देखते हुए कि पुलवामा हमला एक स्थानीय फियादीन द्वारा किया गया था, भारत काफी सर्तकता बरत रहा है। हालांकि सभी प्रमुख देशों ने कहा है कि यह भारत का आंतरिक मसला है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए रास्ता आगे कठिन है, क्योंकि कर्फ्यू हटाकार जनजीवन को सामान्य करना सबसे बड़ी चुनौती है।
डोभाल वहां धुरी की तरह काम कर रहे हैं। लेकिन केवल सोमवार का ईद त्योहार ही केंद्र सरकार के संकल्प का परीक्षण नहीं है, बल्कि पूरा हफ्ता कठिन रहने वाला है। 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है और 15 अगस्त को भारत स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जब दक्षिण कश्मीर की पंचायतों में भारतीय तिरंगा लहराया जाएगा, जिसमें तनावग्रस्त सोपियां, कुलगाम, पुलवामा और अनंतनाग जिले भी शामिल हैं।
भाजपा सरकार संदेश देने के लिए जोर दे रही है कि सभी तीनों क्षेत्रों में तिरंगा लहराया जाए। घाटी में डोभाल अर्धसैनिक बलों, सेना के कमांडरों और अन्य यूनिफाइड कमांड पिरामिड के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि इस काम में तेजी आ सके। भारत इस तरह के निर्णय लेने के बाद संकल्प के इस प्रदर्शन में किसी भी बिंदु पर कमजोर नहीं दिखना चाहता।
सरकार ने पत्थरबाजी और अलगाववादी आंदोलनों को रोकने के लिए बड़ी सर्तकता के साथ काम किया है। इंतेफादा के संभावित नेताओं को एयरलिफ्ट कर आगरा और बरेली के जेल में भेजने की तैयारी है। अब यह जानकारी सामने आई है कि एनएसए ने इसे लेकर 15 दिन पहले ही अभ्यास किया था।
आईबी और जेकेएपी के दल ने उत्तर प्रदेश की कुछ उच्च सुरक्षा वाली जेलों का जायजा लिया था, जिसमें आगरा और बरेली की जेलें शामिल हैं। साथ ही हरियाणा की कुछ जेलों का भी जायजा लिया गया था।

तबाही मचाने के इंतजार में हैं आतंकी गुट

तबाही मचाने के इंतजार में हैं आतंकी गुट, खुफिया एजेंसियों ने किया अलर्टइस्लामिक स्टेट और आईएसआई समर्थित आतंकवादी गुट भारत में तबाही मचाने के लिए घात लगाए बैठे हैं। इस बारे में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने कुछ समय पहले ही इन तमाम अति-संवेदनशील खुफिया सूचनाओं से सरकार को अवगत करा दिया है, ताकि विध्वंसकारी ताकतों को वक्त रहते काबू किया जा सके।
9 अगस्त को इंटेलीजेंस ब्यूरो मुख्यालय द्वारा जारी गोपनीय रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा समर्थित जेहादी आतंकी गुट जम्मू एवं कश्मीर और उसके बाहर बड़ी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।
इस सिलसिले में संबंधित राज्यों की अभिसूचना ईकाइयों और पुलिस मुख्यालयों को सचेत कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो इस बार इस्लामिक स्टेट और पाक समर्थित कट्टरपंथी आतंकी संगठन बकरीद जैसे बड़े पर्व पर भीड़ को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
खुफिया एजेंसियां इस बात से भी इनकार नहीं कर रही हैं कि पाक खुफिया एजेंसी और इस्लामिक स्टेट समर्थित ये आतंकी गुट बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों (ट्रांसपोर्ट नेटवर्क) सहित अन्य कुछ महत्वपूर्ण जगहों को भी निशाना बनाने की फिराक में हैं।
देश की खुफिया एजेंसियों के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, भले ही आईएसआई लंबे समय से भारत में अशांति फैला पाने में कामयाब न हो पाई हो, लेकिन कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद वह भी बुरी तरह से बौखलाई हुई है। इमरान खान भी पुलवामा टाइप हमलों के लिए पहले ही बोल चुके हैं। 

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छे 370 खत्म कर विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद से पाकिस्तान की बेचैनी खत्म होने का नाम नही.... 
तालिबान समर्थित कुछ स्लिपिंग मॉड्यूलों की भारत में मौजूदगी की खबरें भी इन दिनों आ रही हैं। कुछ वक्त पहले ही एनआईए ने केरल सहित कुछ अन्य राज्यों में छापेमारी की थी। श्रीलंका में हुए सीरियल बम धमाकों के तार भी केरल से जुड़े थे।

पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों की रिलीज पर लगाई रोक

पाकिस्तान सरकार ने लिया बड़ा फैसला, भारतीय फिल्मों की रिलीज पर लगाई रोक
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ  पत्रकार  
पाकिस्तान जितनी तेजी से बौखलाहट में एक के बाद एक कदम उठा रही है, उससे स्पष्ट हो गया है, कि पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान वास्तव में भारत के विरुद्ध बयानबाज़ी और पाबंदियाँ लगा कर पाकिस्तान में सरकार के विरुद्ध जन आक्रोश से जनता का ध्यान हटाने का केवल प्रयास मात्र है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं। 
दूसरे यह कि जिस तरह पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाई है, यह उन भारतीयों के मुँह पर तमाचा है, जो चंद सिक्कों की खातिर पाकिस्तान कलाकारों को अपनी फिल्मों और रियलिटी शो में बुलाते हैं। यदि यही कदम भारत सरकार ने उठाया होता, #intolerance, #award vapsi और #not in my name आदि गैंग सडकों पर उतर आए होते।    
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर पाकिस्तान में बौखलाहट साफ नजर आ रही है। 5 अगस्त को भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने देश के जम्मू-कश्मीर राज्य से धारा 370 हटाने को लेकर राज्यसभा में बिल पेश किया था, जिसके बाद लोकसभा में भी इस बिल को पेश किया गया। दोनों सदनों से ये बिल भारी बहुमत से पास हुआ। लेकिन पाकिस्तान भारत के इस फैसले से बौखलाया हुआ है। अब पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों को अपने देश में बैन कर दिया है। इस बात की जानकारी एएनआई के ट्विटर हैंडल से दी गई है
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्पेशल असिस्टेंट डा. फिरदौस आशिक अवान ने इस बात का ऐलान किया है। फिरदौस ने कहा, 'भारत की कोई भी फिल्म पाकिस्तानी सिनेमाघरों में नहीं दिखाई जाएगी।' इससे पहले पाकिस्तान ने भारत और पाक के बीच चलने वाली 'समझौता एक्सप्रेस (Samjhota Express)' को भी बंद कर दिया है


भारत के जम्मू-कश्मीर के फैसले पर पाकिस्तानी सिनेमा के कई दिग्गज सितारों ने भी ट्विटर के माध्यम से अपना रिएक्शन दिया है। जिसमें आतिफ असलम (Atif Aslam), माहिरा खान और वीना मलिक जैसी हस्तियां शामिल हैं। सिंगर आतिफ असलम ने ट्वीट करते हुए कहा कि मैं कश्मीर में हो रही हिंसा की निंदा करता हूं। इस ट्वीट के बाद आतिफ ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए थे
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके सलाहकार शायद भूल रहे हैं, कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने का मुद्द...

वर्तमान लौह पुरुष नरेन्द्र मोदी : 'जम्मू कश्मीर पुनर्गठन' बिल लोकसभा में हुआ पास, पक्ष में 370, विपक्ष में 70 वोट पड़े

LIVE: 'जम्मू कश्मीर पुनर्गठन' बिल लोकसभा में हुआ पास, पक्ष में 370, विपक्ष में 70 वोट पड़े
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल (Jammu Kashmir reorganization bill) मंगलवार(अगस्त 6) को लोकसभा में पारित हो गया. बिल के पक्ष में 370 वोट जबकि विपक्ष में 70 वोट पड़े. यह संभव हुआ वर्तमान "लौह पुरुष" नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो सका. लोकसभा से भी बिल पारित होने पर कश्मीर के लिए भारतीय जनसंघ संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बलिदान दिया था. अनुच्छेद 370 समाप्त कर लोक और राज्य सभा ने डॉ मुख़र्जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है. बता दें सोमवार(अगस्त 5) को यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया है. 
राज्यसभा में सोमवार को इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े थे, वहीं विपक्ष में 61 सांसदों में मतदान किया. राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया. 
इससे पहले लोकसभा में इस बिल पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी फैसला लेने के लिए भारत की संसद को पूरा अधिकार है. गृहमंत्री ने कहा कि यहां उपस्थित एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया. वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोट बैंक का प्रश्न आ जाता है.
 
अमित शाह ने कहा, 'देश का बच्चा-बच्चा बोलता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.' हम ये क्यों नहीं बोलते कि यूपी देश का अभिन्न अंग है, तमिलनाडु देश का अभिन्न अंग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 370 ने इस देश और दुनिया के मन में एक शंका पैदा कर दी थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं.
 
'पूर्ण राज्य का दर्जा देने में संकोच नहीं' 
अमित शाह ने कहा कि जहां तक केंद्र शासित राज्य का सवाल है तो मैं देश और मुख्य रूप से घाटी के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि स्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में हमें कोई संकोच नहीं होगा.

अमित शाह ने कहा कि हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते, घाटी के लोग हमारे हैं, हम उनको सीने से लगाएंगे, उनको प्यार से रखेंगे, पूरा हिंदुस्तान उन्हें प्यार से रखेगा. अगर उनके मन में कोई आशंका है तो जरूर चर्चा करेंगे, हमें कोई आपत्ति नहीं है.
अमित शाह ने कहा कि मुझे विश्वास है कि 5 साल के बाद जम्मू और कश्मीर में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जो विकास होने वाला है उसे देखकर घाटी की जनता भी कहेगी कि 370 का झुनझुना जो हमें पकड़ाया गया उससे हमारा बहुत अहित हुआ.
 
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले पर कांग्रेस पार्टी बंटती नजर आ रही है। कांग्रेस के नेता एक-कर कर अनुच....

निचले सदन में गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पेश संकल्प में कहा गया है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के साथ पठित अनुच्छेद 370 के खंड 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि वह जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद के सभी खंड लागू नहीं रहेंगे, सिवाय खंड 1 के. इसमें कहा गया है कि 19 दिसंबर 2018 को राष्ट्रपति की अधिघोषणा के बाद जम्मू कश्मीर राज्य विधायिका की शक्ति इस सदन को है.