Showing posts with label Jammu Kashmir reorganization bill. Show all posts
Showing posts with label Jammu Kashmir reorganization bill. Show all posts

अनुच्छेद 370 : दो हिस्‍सों में बंटी कांग्रेस, कर्ण सिंह ने फैसले का किया समर्थन

Image result for डॉ कर्ण सिंहसरकार के जम्‍मू-कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देने से संबंधित अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले पर कांग्रेस दो हिस्‍सों में बंट गई है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता डॉ कर्ण सिंह ने इस मसले पर सरकार के फैसले का समर्थन किया है उन्‍होंने अनुच्छेद 35A हटाने का भी समर्थन किया. उन्‍होंने सरकार के फैसले का स्‍वागत किया है डॉ कर्ण सिंह महाराजा हरि सिंह के पुत्र हैं उन्‍होंने कहा कि लद्दाख को केंद्र शासित क्षेत्र बनाया जाना स्‍वागत योग्‍य कदम है अनुच्छेद 35A में व्‍याप्‍त रहे लैंगिक भेदभाव को दुरुस्‍त करने की जरूरत थी...मेरी मुख्‍य चिंता जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी वर्गों और क्षेत्रों के कल्‍याण की है
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल (Jammu Kashmir reorganization bill) अगस्त 6 को लोकसभा में पारित हो गया। बिल के पक्ष में 370 वोट जबकि विपक्ष में 70 वोट पड़े। इन सबके बीच, राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन किया है।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार(अगस्त 6) को अपने ट्विटर हैंडल से अनुच्छेद 370 और 35A हटाने को समर्थन दिया





कांग्रेस में दो फाड़
पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर लिखा कि मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर किए गए फैसले का समर्थन करता हूं। साथ ही भारत में इसके पूर्ण एकीकरण का भी समर्थन करता हूं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि अगर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया होता। तब इस मामले पर कोई भी सवाल नहीं उठाया जा सकता था। फिर भी, यह हमारे देश के हित में है और मैं इसका समर्थन करता हूं
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश में उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं। संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नहीं होते। लेकिन ये फैसला राष्ट्र हित मे लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं
सोमवार(अगस्त 5) को यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया था।राज्यसभा में सोमवार को इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े थे, वहीं विपक्ष में 61 सांसदों में मतदान किया। राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा, कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व सांसद जर्नादन द्विवेदी भी अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही जगहों पर इसका जमकर विरोध किया
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
अमेरिका ने पाकिस्‍तान को सख्‍त संदेश देते हुए कहा है कि वह भारत को धमकी देने के बजाय अपनी सरजमीं पर पनपने वाले आतंक....

अनुच्छेद 370: इमरान ने सांसदों से पूछा, क्या भारत पर हमला कर दें!; पुलवामा जैसी घटनाएं बढ़ेंगी

एक तरफ भारत में कांग्रेस और कुछ भाजपा विरोधी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A समाप्त होने पर जो विरोधी बातें कर  रहे हैं, लगभग वही स्वर पाकिस्तान से भी आ रहे हैं। स्मरण हो, कांग्रेस के ही कुछ नेता अलगाववादियों और पाकिस्तान जाकर नरेन्द्र मोदी को हराने में मदद करने की भीख माँगने उनकी गोदी में बैठ रहे थे। जो प्रमाणित करता है मोदी विरोधियों को पूर्व आभास था कि अकेले दम मोदी को हराना असंभव है, इसलिए आधुनिक जयचन्द भारत विरोधियों की गोदियों में बैठ रहे थे। अगर जयचन्दों ने हिन्दू सम्राटों से गद्दारी नहीं की होती, मुग़ल आतताई भारत में घुस ही नहीं सकते थे। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जयचन्द कभी किसी शासक के नहीं हो सकते। मुग़ल युग में इनकी सन्तानों ने ब्रिटिश सरकार की मदद की और ब्रिटिश राज्य स्थापित करने में सहायक बने। 
बदलते परिवेश को वर्तमान जयचन्द समझ नहीं पा रहे, ये लोग अपने परिवारों के लिए भी संकट खड़े कर रहे हैं। 
जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाने और सूबे के पुनर्गठन को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने से पाकिस्‍तान बौखला गया है। यह बौखलाहट आज पाकिस्‍तान की संसद में भी नजर आई। दरअसल, विपक्ष के नेता और पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्‍तान सरकार को जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाने के मामले में तीखी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
इमरान खान ने शरीफ की मांग पर पूछा कि विपक्ष के नेता क्‍या चाहते हैं? क्‍या मुझे पाकिस्‍तानी सेना को भारत पर हमले का आदेश दे देना चाहिए? इमरान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अलावा वहां की सेना समेत कई लोग मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर भारत के खिलाफ बोल रहे हैं।
पाकिस्तान के मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने ट्वीट किया कि मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलस्तीन बनाना चाहती है। पाकिस्‍तान के सांसदों को भारत को खून, आंसू और पसीने से जवाब देना चाहिए। अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।
पाकिस्तान में संयुक्त सत्र में क्या-क्या हुआ…
-आज पाकिस्‍तान की बौखलाहट संसद में भी नजर आई
-इमरान ने पूछा, क्या भारत पर आक्रमण कर देना चाहिए
-पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ ने अनुच्छेद 370 पर प्रतिक्रिया देना चाह रहे थे
-चौधरी फवाद हुसैन-मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलस्तीन बनाना चाहती है
-पाकिस्‍तान के सांसदों को भारत को खून, आंसू और पसीने से जवाब देना चाहिए
-अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए
-इमरान ने कहा,अनुच्‍छेद-370 हटाने के कारण भारत में पुलवामा जैसी घटनाएं होंगी
-हम इस मामले को संयुक्त राष्‍ट्र लेकर जाएंगे
-हम अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को बताएंगे कि बीजेपी की नस्‍लवादी विचारधारा
-भारत में अल्‍पसंख्‍यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है
पाकिस्‍तान की सेना की बैठक
पाकिस्तान की सेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी अनुच्‍छेद-370 को लेकर ट्वीट किए गए। इनमें बताया गया कि कश्मीर के मौजूदा हालात पर सेना पाकिस्तान सरकार के साथ है। पाकिस्‍तान की सेना कश्मीर पर लिए गए भारत के फैसले को नकारती है। पाकिस्तान ने कभी भी अनुच्‍छेद-370 और 35A के जरिये जम्मू-कश्मीर को कब्जाने को कभी मान्यता नहीं दी। पाकिस्तान की सेना इस अत्याचार के खिलाफ कश्मीरियों के साथ है।
PoK से उठी आवाज़ "हमें भारत के साथ शामिल किया जाए।"
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म क्या हुआ पाकिस्तान की बौखलाहट कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। इनसब के बीच पाक अधिकृत कश्मीर से भी भारत में विलय की मांग उठने लगी है। पीओके से उठने वाली इस आवाज ने पाकिस्तान की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। गिलगिट-बटालिस्तान के लोगों ने भारत से अपील की है कि हमें भी भारत में शामिल कर दिया जाए। लोगों का कहना है कि उन्हें भारतीय संविधान प पूरा भरोसा है, उन्होंने भारतीय संविधान में अपने प्रतिनिधित्व की मांग की है।
पीओके से उठने वाली इस आवाज ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद छीन ली है। बतादें गिलगिट और बटालिस्तान पर पाकिस्तान का अनधिकृत कब्जा है। गिलगिट और बटालिस्तान के लोगों की भारत में होने वाली हर हलचल पर पैनी नजर है। इन लोगों ने अमित शाह के फैसले को दुरुस्त ठहराया है और पाकिस्तान की हरकतों से निजात का मन बना लिया है।
क्या कहते हैं पीओके के लोग…
-गिलगिट-बटालिस्तान ने भारत में शामिल होने की मांग की
-यहां के लोगों ने भारतीय संविधान पर पूरा भरोसा जताया है
-इन लोगों ने भारतीय संविधान में अपने प्रतिनिधित्व की मांग की
-यहां के लोगों ने अमित शाह के फैसले को दुरुस्त ठहराया है
गिलगिट में लोगों को अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे सेंग एच. सेरिंग ने कहा
-अमित शाह से अपील,क्षेत्र के लोग भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं
– उन्हें भी भारतीय संविधान में प्रतिनिधित्व दिया जाए
-पाक अधिकृत कश्‍मीर, जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है
-हम मानते हैं कि गिलगिट-बाल्टिस्तान भी भारत का अभिन्न हिस्सा है
-गिलगिट-बाल्टिस्तान लद्दाख का विस्तार है
-हम भारतीय संघ और संविधान के तहत अपने लिए अधिकार की मांग करते हैं
-हम भारत की विधायी इकाई में प्रतिनिधित्व की मांग करते हैं
-केंद्रशासित प्रदेशों में रिजर्व सीटों पर गिलगिट-बाल्टिस्तान के लिए सीटें होनी चाहिए
-भारत की राज्यसभा और लोकसभा में हमारा प्रतिनिधित्व होना चाहिए
अवलोकन करें:-

About this website
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल (Jammu Kashmir reorganization bill) मंगलवार(अगस्त 6) को लोकसभा में पारित हो गया....

लोकसभा में पीओके पर सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा, जब हम जम्मूज-कश्मीर की बात करते हैं तो उसमें पीओके भी शामिल होता है। हम पीओके को वापस लेने के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं।(एजेंसीज इनपुट्स)

वर्तमान लौह पुरुष नरेन्द्र मोदी : 'जम्मू कश्मीर पुनर्गठन' बिल लोकसभा में हुआ पास, पक्ष में 370, विपक्ष में 70 वोट पड़े

LIVE: 'जम्मू कश्मीर पुनर्गठन' बिल लोकसभा में हुआ पास, पक्ष में 370, विपक्ष में 70 वोट पड़े
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल (Jammu Kashmir reorganization bill) मंगलवार(अगस्त 6) को लोकसभा में पारित हो गया. बिल के पक्ष में 370 वोट जबकि विपक्ष में 70 वोट पड़े. यह संभव हुआ वर्तमान "लौह पुरुष" नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो सका. लोकसभा से भी बिल पारित होने पर कश्मीर के लिए भारतीय जनसंघ संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बलिदान दिया था. अनुच्छेद 370 समाप्त कर लोक और राज्य सभा ने डॉ मुख़र्जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है. बता दें सोमवार(अगस्त 5) को यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया है. 
राज्यसभा में सोमवार को इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े थे, वहीं विपक्ष में 61 सांसदों में मतदान किया. राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया. 
इससे पहले लोकसभा में इस बिल पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी फैसला लेने के लिए भारत की संसद को पूरा अधिकार है. गृहमंत्री ने कहा कि यहां उपस्थित एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया. वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोट बैंक का प्रश्न आ जाता है.
 
अमित शाह ने कहा, 'देश का बच्चा-बच्चा बोलता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.' हम ये क्यों नहीं बोलते कि यूपी देश का अभिन्न अंग है, तमिलनाडु देश का अभिन्न अंग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 370 ने इस देश और दुनिया के मन में एक शंका पैदा कर दी थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं.
 
'पूर्ण राज्य का दर्जा देने में संकोच नहीं' 
अमित शाह ने कहा कि जहां तक केंद्र शासित राज्य का सवाल है तो मैं देश और मुख्य रूप से घाटी के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि स्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में हमें कोई संकोच नहीं होगा.

अमित शाह ने कहा कि हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते, घाटी के लोग हमारे हैं, हम उनको सीने से लगाएंगे, उनको प्यार से रखेंगे, पूरा हिंदुस्तान उन्हें प्यार से रखेगा. अगर उनके मन में कोई आशंका है तो जरूर चर्चा करेंगे, हमें कोई आपत्ति नहीं है.
अमित शाह ने कहा कि मुझे विश्वास है कि 5 साल के बाद जम्मू और कश्मीर में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जो विकास होने वाला है उसे देखकर घाटी की जनता भी कहेगी कि 370 का झुनझुना जो हमें पकड़ाया गया उससे हमारा बहुत अहित हुआ.
 
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले पर कांग्रेस पार्टी बंटती नजर आ रही है। कांग्रेस के नेता एक-कर कर अनुच....

निचले सदन में गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पेश संकल्प में कहा गया है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के साथ पठित अनुच्छेद 370 के खंड 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि वह जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद के सभी खंड लागू नहीं रहेंगे, सिवाय खंड 1 के. इसमें कहा गया है कि 19 दिसंबर 2018 को राष्ट्रपति की अधिघोषणा के बाद जम्मू कश्मीर राज्य विधायिका की शक्ति इस सदन को है.