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कश्मीर : सुदूर गाँव में जला बल्ब; '60 साल में पहली बार बिजली देखी…हमारे बच्चे अब उजाले में पढ़ेंगे’

                                      75 साल बाद आई बिजली (तस्वीर साभार: इंडियन पब्लिक खबर)
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के एक सुदूर गाँव तेथन में 75 साल बाद जाकर रविवार (8 जनवरी 2023) को बिजली आई। ये सब प्रधानमंत्री विकास पैकेज योजना के कारण संभव हुआ। इस गाँव की आबादी 200 है। आजतक यहाँ किसी घर में बिजली नहीं थी। पिछले रविवार को यहाँ पहला बल्ब जला। इतने साल तक लोग यहाँ ग्रामीण लालटेन और मोमबत्ती जलाकर काम चला रहे थे। गाँव का विकास देखने के बाद ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री का हृदय से धन्यवाद किया।

फजुल-उ-द्दीन नाम के ग्रामीण ने कहा, “हमने आज पहली बार बिजली देखी। हमारे बच्चे अब उजाले में पढ़ाई करेंगे…हम अभी तक लकड़ी से अपनी जरूरत पूरी करते थे। हमारी मुश्किलें सुलझ गई हैं। हम सरकार और संबंधित विभाग के आभारी हैं।”

इसी तरह जफर खान ने कहा, “आज हमारी खुशकिस्मती है कि सरकार ने हमें बिजली दी। मैं 60 साल का हो गया हूँ मगर पहली दफा बिजली देखी है…हम एलजी साहब और डीसी साहब के शुक्रगुजार हैं। हम बिजली विभाग के भी आभारी हैं। हमारे पूर्वजों ने ये चमत्कार नहीं देखा था।”

उल्लेखनीय है कि तेथन गाँव, अनंतनाग की पहाड़ियों पर स्थित है। लोग यहाँ सालों से रहते हैं पर बुनियादी चीजों से हमेशा अछूते रहे। रविवार को गाँव में  बिजली देखने के बाद उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। लोगों ने डांस करके अपनी खुशी मनाई।

45 किलोमीटर में बने गाँव में बिजली आने को लेकर एक अधिकारी ने कहा कि तेथन में बिजली लाने का काम फास्ट ट्रैक प्रक्रिया में हुआ है।  बिजली विकास विभाग के तकनीकी अधिकारी फैयाज अहमद सोफी ने बताया कि इस सुदूर गाँव में बिजली लाने के लिए नेटवर्किंग की प्रक्रिया 202 में शुरू की गई थी। मगर हाई टेंशन लाइन की टैपिंग मसला था। आज सुदूर इलाके में बिजली आ गई है। गाँव में 63 किलोवॉट के ट्रांस्फॉर्मर फिट किए गए हैं। सोफी ने कहा कि गाँव में एक ट्रांसफॉर्मर, 38 हाई टेंशन लाइन और 57 एलटी पोल (कुल 95 पोल) लगाए गए, जिससे 60 घरों में बिजली पहुँचाना संभव हुआ और उनका पहला बल्ब जला।

‘घाटी छोड़ो वरना मार दिए जाओगे’: ULF के आतंकी मार रहे उत्तर प्रदेश-बिहार के लोगों को

                                             जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने दी धमकी
जम्मू-कश्मीर में गैर-मुस्लिमों पर होते हमले अब लगातार बढ़ रहे हैं। 17 अक्टूबर को भी वहाँ दो मजदूरों की हत्या हुई, जिसकी पूरी जिम्मेदारी लश्कर से जुड़े आतंकी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULF) ने ली और एक पत्र जारी कर धमकाया कि गैर-कश्मीरी घाटी छोड़ दें वरना उन्हें भी मार दिया जाएगा। बता दें कि रविवार को दो गैर-कश्मीरियों पर गोली चलाकर उन्हें मारा गया था जबकि 1 को घायल कर दिया गया था।

अनुच्छेद 370 ख़त्म करने के बाद से मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होने की बात की जा रही थी, लेकिन नितरोज होती हत्याओं से लगता है, स्थिति पहले ही जैसी है। क्यों नहीं आतंकवादियों को पनाह देने की शिनाख्त कर जेलों में डाला जाता? आखिर कब तक मासूमों के साथ आतंकवादी खून की होली खेलते रहेंगे? अगर सीमा पार से आ रहे हैं, तो सीमा सुरक्षा क्या कर रही है और अगर ये बात गलत है, फिर कश्मीर में छिपे बैठे इन आतंकवादियों और इन्हें पनाह देने वालों के साथ भी आतंकवादियों की भांति कार्यवाही की जाए?

आतंकी समूह द्वारा इस पत्र को 17 अक्टूबर को जारी किया गया। इस पर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू एंड कश्मीर लिखा है और नीचे इस समूह के प्रवक्ता उमर वानी का नाम और स्टैम्प है। पत्र में कहा गया, “अस्सलाम वालेकुम, आज से पहले ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ ने तीन गैर स्थानीय हिंदुत्ववादी लोगों को साउथ कश्मीर के कुलगाम के वानपोह इलाके में मारा था। हिंदुत्व कट्टरपंथियों ने बिहार में 200 मुस्लिमों को पिछले एक साल में मारा। जैसा कि पहले ही धमकी दी जा चुकी है कि वो लोग हमारी जमीन को छोड़ें वरना उन चीजों के लिए तैयार रहें। ये बदला लेने के लिए की गई स्ट्राइक्स थीं उन अत्याचारों के विरुद्ध जो भारतीय सेना मासूम नागरिकों पर करती है।”

आगे पत्र में कहा गया, “केवल एक हफ्ते में सेना ने हमारे 4 मासूम नागरिक नकली एनकाउंटर्स में शहीद कर दिए। सीआरपीएफ ने एक गरीब को भी अनंतनाग जिले के कोकरनाग में मारा था।”

आतंकी संगठन ने धमकी देते हुए पत्र में कहा है, “हम फिर हर गैर-कश्मीरी को हमारी जमीन छोड़ने को कहते हैं वरना वो परिणामों के लिए तैयार रहें। अगर सेना ने नागरिकों के विरुद्ध अत्याचार नहीं खत्म किया हमारे स्वतंत्रता सेना राजनेताओं और पुलिस के परिवार को निशाना बनाने में बिलकुल नहीं हिचकेंगे।”

जम्मू-कश्मीर में अब तक 11 लोगों की जानें चली गई हैं। हत्याओं को अंजाम देने का सिलसिला 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था।

  • 2 अक्टूबर को मोहम्मद शफी डार को मारा गया था क्योंकि उन पर सुरक्षाबल से लिंक होने के आरोप थे।
  • 2 अक्टूबर को ही मजीद अहमद गोजरी की हत्या हुई थी। वह श्रीनगर के छतबाल निवासी थे। उन पर सेना की मदद करने के आरोप थे।
  • 5 अक्टूबर को 68 साल के माखन लाल बिंद्रू श्रीनगर में उन्हीं की फार्मेसी की दुकान पर मारे गए थे।
  • 5 अक्टूबर को ही श्रीनगर के लाल बाजार में एक सड़क किनारे खाने का सामान बेचने वाले वीरेंद्र पासवान को मारा गया था। वह भागलपुर के रहने वाले थे।
  • 5 अक्टूबर को मोहम्मद शफी लोन को आतंकियों द्वारा मारा गया। वह बांदीपोरा में टैक्सी स्टैंड अध्यक्ष थे और कैब चलाते थे।
  • 7 अक्टूबर को एक सरकारी स्कूल में घुसने के बाद आतंकियों ने सुपिंदर कौर और दीपक चंद नामक शिक्षकों को छाँट कर मारा। 
  • 16 अक्टूबर सगीर अहमद जो उत्तरप्रदेश के थे और कारपेंटर थे, उन्हें भी पुलावामा में मारा गया।
  • अरबिंद कुमार शाह भी बिहार के बांका से थे और श्रीनगर में गोलगप्पा बेचते थे। ईदगाह इलाके में गोलगप्पा बेचते समय उन्हें आतंकियों ने निशाना बनाया और गोली मार उन्हें खत्म कर दिया। इस पूरी घटना के बाद नीतीश कुमार ने 2 लाख का मुआवजा शाह के परिवार के लिए देने का वादा किया है।
  • 17 अक्टूबर को मारे गए राजा ऋषि देव भी बिहार के मजदूर थे। वह कुलगाम के वानपोह में रहते थे। उनके साथ जोगिंदर ऋषि देव को भी मारा गया है। ये घटना एक पूर्व एसएलए के आवास से नजदीक में हुई है। इस हमले में चुनचुन ऋषिदेव घायल हैं।

जम्मू-कश्मीर में होती इन घटनाओं की बाबत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से फोन पर बात की। उन्होंने राजा ऋषिदेव और जोगिंदर ऋषिदेव की हत्या एवं चुनचुन ऋषिदेव के घायल होने पर दुख जताया। नीतीश ने इस आतंकी हमले में मारे गए दोनों लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रूपए देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने श्रम संसाधन विभाग एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से मृतकों के परिजनों को नियमानुसार अन्य लाभ दिलाने का अधिकारियों को निर्देश दिया है।

रोजा-सहरी के नाम पर ‘पुलिसवाली’ ने ही आतंकियों को नहीं खोजने दिया, लगा UAPA

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले की एक विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) को ‘आतंकवाद का महिमामंडन करने’ और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य का निर्वहन करने से ‘रोकने’ के आरोप में गिरफ्तार कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। महिला पुलिसकर्मी पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वैसे यह कोई हैरान करने वाली खबर नहीं, क्योकि जिस समय वहां पुलिस और आर्मी में भर्ती होने के लिए लग रही भीड़ को देख जो शंका व्यक्त की जा रही थी, वही अब शायद चरितार्थ भी होने लगी है। 

पुलिस प्रवक्ता ने अप्रैल 16, 2021 को बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले में फ्रिसल इलाके की निवासी सायमा अख्तर को अवैध गतिविधि रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों को फ्रिसल गाँव के कारेवा मोहल्ले में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद वहाँ तलाशी अभियान चलाया गया। प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान अख्तर ने आतंकवादियों को खोज रही टीम को अपना काम करने से रोका।

उन्होंने बताया कि जैसे ही सुरक्षाबलों ने तलाशी लेने के लिए कुछ घरो में जाने की कोशिश की तो वहाँ कुछ महिलाओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया और पुलिस को अपना काम करने से रोका। इन महिलाओं की अगुवाई साइमा अख्तर नाम की एक महिला कर रही थीं, जो खुद जम्मू कश्मीर पुलिस में SPO के तौर पर काम कर रही थीं।

पुलिस के अनुसार साइमा के उकसावे पर भीड़ उग्र हो गई और पुलिस को अपना ऑपरेशन बीच में ही रोकना पड़ा। इसके चलते इलाके से कुछ संदिग्ध शायद भागने में कामयाब भी हुए। लेकिन घटना यहाँ ख़त्म नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “महिला ने तलाश अभियान चला रहे दल को रोका और वह हिंसक हो गई। महिला ने आतंकवादियों के हिंसक कृत्यों का महिमामंडन करने वाले बयान भी दिए।” प्रवक्ता ने बताया कि सायमा अख्तर ने अपने फोन से एक वीडियो बनाया और ‘तलाशी अभियान बाधित करने के इरादे से’ उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि मामले को संज्ञान में लेते हुए महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

वीडियो वायरल 

आरोपित द्वारा बनाए गए वीडियो में दिख रहा है एक महिला सैन्यकर्मी पर चिल्ला रही थी। उसका कहना था कि कम से कम रमजान के दौरान तो सुरक्षाकर्मी छानबीन ना करें। महिला द्वारा सैन्य कर्मियों को वीडियो में ‘बाहरी’ बुलाया जाना सुना जा सकता है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार वीडियो में  महिला ने कहा- “तुम बार-बार क्यों आते हो? उन घरों में जाओ, जहाँ आतंकवादी हैं। आप हमें हमारी सेहरी (रमज़ान के दौरान सुबह का भोजन) भी नहीं करने दे रहे हैं। यदि आपको हमारे घर की तलाशी लेनी है, तो पहले अपने जूते निकालें। मेरी माँ की तबीयत ठीक नहीं है। अगर उसके साथ कुछ होता है, तो आप देखभाल करेंगे।”

वीडियो में देखा जा सकता है महिला के रोकने पर सैन्य कर्मी चिल्लाया। इस पर महिला ने कहा कि वे उसे डरा नहीं सकते। उसने कहा, “अपना मुँह बंद करें। हम डरने वाले नहीं हैं। यह हमारा कश्मीर है। आप बाहर से आए हैं। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं, वह करें, अगर वे (आतंकवादी) यहाँ होते तो अब तक आपके सीने में गोलियाँ उतार चुके होते।”

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पुलिस थाना यारीपोरा में भारतीय दंड संहिता की धारा 353 (लोक सेवक को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए बल प्रयोग या हमला करना) और अवैध गतिविधि रोकथाम कानून की धारा 13 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा मामले की जाँच जारी है। जानकारी के मुताबिक साइमा को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है और मामले में शामिल बाकी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की तैयारी भी की जा रही है।

'नए कश्मीर' ने महिलाओं को भी नहीं बक्शा--मुफ़्ती महबूबा 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आतंकवाद का महिमामंडन करने के कारण महिला एसपीओ को गिरफ्तार किए जाने के मामले में कहा कि ‘नए कश्मीर में जुल्मों से महिलाओं को भी नहीं बख्शा’ जा रहा है।

मुफ्ती ने बयान में कहा, “सायमा अख्तर को उसके घर में बार-बार अकारण तलाशी लिए जाने के कारण उचित प्रश्न उठाने पर यूएपीए के तहत आरोपित बनाया गया। यह समझा जा सकता है कि सायमा की माँ के बीमार होने के कारण उसकी चिंता और बढ़ गई। नए कश्मीर में क्रूरता से महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा।”

दक्षिण कश्मीर में इस समय सुरक्षा बलों का अभियान चरम पर है और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यहाँ आए दिन आतंकियों को तलाश किया जा रहा है। ऐसे में इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से इन अभियानों पर असर पड़ सकता है। इसलिए पुलिस ने अपनी ही एक कर्मी के खिलाफ इतना सख्त फैसला लिया।

मानवाधिकार पर कश्मीर पर आज फिर पिटेगा पाकिस्तान

Related imageसंयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद यानी यूएनएचआरसी (UNHRC) की बैठक में पाकिस्‍तान, जम्‍मू-कश्‍मीर का मुद्दा उठा सकता है. जेनेवा में आयोजित यूएनएचआरसी के 42वें सत्र में भारत और पाकिस्‍तान दोनों को ही मंगलवार को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. हालां‍कि UNHRC में कश्मीर मुद्दा उठाने पर भारत भी पाकिस्तान पर पलटवार करेगा. पाकिस्तान के जवाब में भारत PoK में मानवाधिकार हनन का मुद्दा उठाएगा. भारत, पाकिस्तान के सिंध-बलूचिस्‍तान में सेना के दमन का मुद्दा भी उठाएगा. भारत PoK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार को उजागर कर सकता है. बलूचिस्तान, गिलगित, खैबर पख्तूनख्वा में मानवाधिकार उल्लंघन का जिक्र संभव है. हिंदू, सिख पर हो रहे जुल्म का भी जिक्र किया जा सकता है.
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जेनेवा में राजनयिक अजय बिसारिया के साथ एक प्रतिनिधिमंडल लगातार इस सिलसिले में सदस्य देशों से मुलाकात कर रहा है. यूरोप, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका के देशों से बातचीत हो रही है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के कुल 47 सदस्य हैं.
दरअसल पाकिस्तान, कश्‍मीर मुद्दे पर बहस या प्रस्ताव के लिए कह सकता है. लेकिन भारत की दमदार कूटनीति के कारण अमेरिका, फ्रांस और रूस के समर्थन मिलने की संभावना बेहद कम है. चीन भी पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन नहीं कर पाएगा. हांगकांग में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में चीन खुद फंसा है. चीन खुद नहीं चाहेगा कि मामला वोटिंग तक पहुंचे.
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कश्‍मीर की हकीकत
वैसे भारत ने UNHRC के सेशन से पहले दुनिया को कश्मीर की हक़ीक़त बताई. जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के हालात दुनिया को बताया. जम्मू-कश्मीर में 100% टेलीफोन सर्विस बहाल हो चुकी है. ज़्यादातर इलाकों में मोबाइल सर्विस भी बहाल हो गया है. 10वीं तक सभी स्कूल खुले, परीक्षाओं की तैयारी जारी है. 92% इलाकों में आने-जाने पर कोई पाबंदी नहीं है. हज यात्रा जारी, 10 हज़ार से ज़्यादा यात्री जल्द लौटेंगे. 10,281 ट्रकों के जरिए 1.67 लाख मीट्रिक टन सेब की ढुलाई हुई. जम्मू-कश्मीर में बैंकिंग और एटीएम सेवा भी सामान्य है. दफ्तरों में कर्मचारी लगातार आ रहे हैं. सरकारी कामकाज में कोई दिक्कत नहीं है.

पाकिस्‍तान में हिंदू-सिख महफूज नहीं
कश्‍मीर में मानवाधिकारों के उल्‍लंघन का आरोप लगाने वाले पाकिस्‍तान में खुद अल्‍पसंख्‍यकों के अधिकारों का किस कदर हनन हो रहा है, इसका खुलासा खुद पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के विधायक ने किया है. इमरान खान की पार्टी पीटीआई के पूर्व विधायक बलदेव कुमार ने पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर हो रहे अत्‍याचारों के चलते भारत में शरण मांगी है. वह इस वक्‍त अपने परिवार के साथ पंजाब आए हुए हैं.

बलदेव कुमार पख्तूनख्वां की बारीकोट सीट से विधायक रहे हैं. 43 वर्षीय पूर्व विधायक अब अपने परिवार के साथ पाकिस्‍तान नहीं लौटना चाहते हैं. उनका कहना है कि पाकिस्‍तान में हिंदू-सिख महफूज नहीं हैं. वहां उन पर अत्‍याचार होते हैं. उनकी हत्‍याएं हो रही हैं. उनका यह भी कहना है कि इमरान के पीएम बनने के बाद अल्‍पसंख्‍यकों पर जुल्‍म बढ़ा है.

अनुच्छेद 370 : दो हिस्‍सों में बंटी कांग्रेस, कर्ण सिंह ने फैसले का किया समर्थन

Image result for डॉ कर्ण सिंहसरकार के जम्‍मू-कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देने से संबंधित अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले पर कांग्रेस दो हिस्‍सों में बंट गई है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता डॉ कर्ण सिंह ने इस मसले पर सरकार के फैसले का समर्थन किया है उन्‍होंने अनुच्छेद 35A हटाने का भी समर्थन किया. उन्‍होंने सरकार के फैसले का स्‍वागत किया है डॉ कर्ण सिंह महाराजा हरि सिंह के पुत्र हैं उन्‍होंने कहा कि लद्दाख को केंद्र शासित क्षेत्र बनाया जाना स्‍वागत योग्‍य कदम है अनुच्छेद 35A में व्‍याप्‍त रहे लैंगिक भेदभाव को दुरुस्‍त करने की जरूरत थी...मेरी मुख्‍य चिंता जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी वर्गों और क्षेत्रों के कल्‍याण की है
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल (Jammu Kashmir reorganization bill) अगस्त 6 को लोकसभा में पारित हो गया। बिल के पक्ष में 370 वोट जबकि विपक्ष में 70 वोट पड़े। इन सबके बीच, राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन किया है।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार(अगस्त 6) को अपने ट्विटर हैंडल से अनुच्छेद 370 और 35A हटाने को समर्थन दिया





कांग्रेस में दो फाड़
पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर लिखा कि मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर किए गए फैसले का समर्थन करता हूं। साथ ही भारत में इसके पूर्ण एकीकरण का भी समर्थन करता हूं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि अगर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया होता। तब इस मामले पर कोई भी सवाल नहीं उठाया जा सकता था। फिर भी, यह हमारे देश के हित में है और मैं इसका समर्थन करता हूं
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश में उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं। संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नहीं होते। लेकिन ये फैसला राष्ट्र हित मे लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं
सोमवार(अगस्त 5) को यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया था।राज्यसभा में सोमवार को इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े थे, वहीं विपक्ष में 61 सांसदों में मतदान किया। राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा, कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व सांसद जर्नादन द्विवेदी भी अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही जगहों पर इसका जमकर विरोध किया
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अमेरिका ने पाकिस्‍तान को सख्‍त संदेश देते हुए कहा है कि वह भारत को धमकी देने के बजाय अपनी सरजमीं पर पनपने वाले आतंक....

जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों तक अपनी बात रखने के लिए 5 भाषाओं का इस्‍तेमाल मोदी ने किया

Image result for नरेंद्र modiजम्‍मू-कश्‍मीर पुनर्गठन बिल लोकसभा में भी पास होने के बाद पीएम मोदी ने जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों तक अपनी बात अलहदा अंदाज में रखी. उन्‍होंने 5 भाषाओं-इंग्लिश, हिंदी, उर्दू, पंजाबी और लद्दाखी में अपनी बात रखी. दरअसल जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र में ये पांच भाषाएं बोली जाती हैं. उन्‍होंने कहा, ''ऐतिहासिक क्षण. एकता और अखंडता के लिए सारा देश एकजुट. जय हिंद! हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिए यह एक गौरव का क्षण है, जहां जम्मू-कश्मीर से जुड़े ऐतिहासिक बिल भारी समर्थन से पारित किए गए हैं. मैं जम्मू-कश्मीर की बहनों और भाइयों के साहस और जज्बे को सलाम करता हूं. वर्षों तक कुछ स्वार्थी तत्वों ने इमोशनल ब्लैकमेलिंग का काम किया, लोगों को गुमराह किया और विकास की अनदेखी की. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब ऐसे लोगों के चंगुल से आजाद है. एक नई सुबह, एक बेहतर कल के लिए तैयार है!

उन्‍होंने कहा, ''ये कदम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवाओं को मुख्यधारा में लाएंगे, साथ ही उन्हें उनके कौशल और प्रतिभा को प्रदर्शित करने के अनगिनत अवसर प्रदान करेंगे. इससे वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा, व्यापार-उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और आपसी दूरियां मिटेंगी. लद्दाख के लोगों को विशेष रूप से बधाई! मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की उनकी दशकों पुरानी मांग आज पूरी हो गई है. इस फैसले से लद्दाख के विकास को अभूतपूर्व बल मिलेगा. लोगों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी.''

उन्‍होंने कहा, ''इन विधेयकों का पारित होना देश के कई महान नेताओं को सच्ची श्रद्धांजलि है: सरदार पटेल, जो देश की एकता के लिए समर्पित थे; बाबासाहेब अम्बेडकर, जिनके विचार सर्वविदित हैं; डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. संसद में जिस प्रकार विभिन्न पार्टियों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर और वैचारिक मतभेदों को भुलाकर सार्थक चर्चा की, उसने हमारे संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाने का काम किया है. इसके लिए मैं सभी सांसदों, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को बधाई देता हूं.

उन्‍होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को गर्व होगा कि सांसदों ने वैचारिक मतभेदों को भुलाकर उनके भविष्य को लेकर चर्चा की. साथ ही साथ वहां शांति, प्रगति और समृद्धि की राह सुनिश्चित की. RS में 125:61 और LS में 370:70 का विशाल बहुमत इस फैसले के प्रति भारी समर्थन को दिखाता है.

'उन्हें मारो जिन्होंने तुम्हारा मुल्क लूटा है'-- गवर्नर सत्यपाल मलिक, जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जुलाई 21 को कारगिल में खरी सुल्तान चू स्टेडियम में कारगिल लद्दाख टूरिज्म फेस्टिवल 2019 के उद्घाटन के दौरान कहा कि ये लड़के (आतंकी) जो बंदूक लिए फिजूल में अपने लोगों को मार रहे हैं। पीएसओ, एसडीओ को मारते हैं। क्यों मार रहे हो इनको? उन्हें मारो जिन्होंने तुम्हारा मुल्क लूटा है, जिन्होंने कश्मीर की सारी दौलत लूटी है। इनमें से भी कोई मारा है आपने अभी? बंदूक से कुछ हासिल नहीं होगा। ये फिजूल में अपना जान गंवा रहे हैं। इससे कुछ नहीं निकलने वाला है। बंदूक से कोई चीज हासिल नहीं होगी क्योंकि हिन्दुस्तान में बंदूक से जरिए सरकार को कोई नहीं झूका सकता है।
उन्होंने कहा, 'श्रीलंका में लिट्टे नामक एक संगठन था और उसे समर्थन भी था लेकिन यह भी समाप्त हो गया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक परिवारों ने कश्मीर पर शासन किया है, उन्होंने जनता का पैसा लूटकर दुनिया भर में संपत्ति अर्जित की है। लेकिन मलिक ने हिंसा को खत्म करने की अपील भी करते हुए कहा, 'भारत की सरकार बंदूक के आगे कभी नहीं झूकेगी।' राज्यपाल ने चुनावों में कम वोटिंग प्रतिशत पर कहा कि नेताओं में प्रतिनिधित्व क्षमता नहीं है। 
श्री मलिक ने राज्य में भ्रष्टाचार के बारे में बात की और कहा कि अगर यह उनके ऊपर होता तो वे भ्रष्टाचारियों को जेल में डाल देते। उन्होंने कहा, 'कश्मीर पर शासन करने वाले बड़े परिवारों ने अकूत संपत्ति हासिल की। उनका एक घर श्रीनगर में है, एक दिल्ली, दुबई में, एक लंदन और दूसरी जगहों पर है। वे बड़े होटलों में शेयरहोल्डर हैं।' पिछले महीने, मलिक ने दावा किया था कि कश्मीर में स्थिति में सुधार हुआ है क्योंकि उन्होंने राज्य के राज्यपाल का पदभार संभाला है।
सत्यपाल मलिक की बात का केवल वही नेता-लोग विरोध कर रहे हैं, जिनके विरुद्ध राज्यपाल ने बोला है। आतंकवादी गतिविधियों और पत्थरबाजों को जिन लोगों का समर्थन प्राप्त है, उनका कोई बच्चा कश्मीर में नहीं। सब कश्मीर से बाहर विलासिता का जीवन जी रहे हैं, और कश्मीर के लोगों को गुमराह कर चंद रूपए देकर जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रहे हैं। विपरीत इसके यदि यही धन जनहित में खर्च किया होता, धरती का स्वर्ग कहलाए जाने वाला कश्मीर नर्क नहीं बनता। बेगुनाहों के खून नहीं बहते। जबकि इनके समर्थक नेता इस लोगों को बहका कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर ऐश कर रहे हैं। 
राज्यपाल के इस बयान पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने कहा कि मलिक को दिल्ली में अपनी प्रतिष्ठा की जांच करनी चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा, "यह शख्स, संवैधानिक रूप से एक जिम्मेदार व्यक्ति है, जो संवैधानिक पद पर काबिज है, जो उग्रवादियों से भ्रष्ट राजनेताओं को मारने के लिए कहता है। शायद इन्हें अपने दिल्ली में अपनी प्रतिष्ठा के बारे में पता लगाना चाहिए। इन दिनों मंजूरी देने से पहले गैर-कानूनी हत्याएं हो रही हैं और कंगारू अदालतें लगाई जा रही हैं।
J&K Guv SP Malik:Yeh ladke jo bandook liye fizool mein apne logon ko maar rahe hain,PSOs,SDOs ko marte hain.Kyun maar rahe ho inko?Unhe maaro jinhone tumhara mulk loota hai,jinhone Kashmir ki saari daulat looti hai.Inmein se bhi koi maara hai abhi?Bandook se kuch haasil nahi hoga
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कांग्रेस प्रदेश प्रमुख जी ए मीर से पूछा, क्या वह जंगल राज को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि राज्यपाल का बयान मलिक के कब्जे वाली संवैधानिक स्थिति से अलग नहीं है। हालाँकि गवर्नर ने अपने भाषण के दौरान तुरंत कहा कि बंदूकों से कभी समाधान नहीं हो सकता है और उन्होंने श्रीलंका में लिट्टे के उदाहरण का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए क्योंकि भारत सरकार बंदूक के आगे नहीं झूकेगी। उन्होंने कहा कि घाटी में केवल 250 आतंकवादी बचे थे। जिनमें से 50 प्रतिशत पाकिस्तानी थे जो मुठभेड़ों में मारे गए या आत्मसर्मपण कर दिया है। उन्होंने स्थानीय आतंकियों से अपील की कि मौलवी आपको मरने के बाद स्वर्ग देने का वादा करते हैं, लेकिन मैं आपको यहां जिंदा रहते हुए स्वर्ग देने का वादा कर रहा हूं। मुख्यधारा के राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए मलिक ने कहा कि ये नेता दिल्ली में एक अलग भाषा और कश्मीर में एक अलग भाषा बोलते हैं। उन्हें दोनों जगहों पर एक भाषा में बात करनी चाहिए और हमें डरने की जरूरत नहीं है। 

'घृणा की दीवार है धारा 370 : रविंदर रैना

Ravinder Raina on Article 370 and 35 A

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर वर्तमान भारतीय जनता पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A का विरोध करने के ही कारण गैर-भाजपाई भाजपा को मुस्लिम विरोधी और साम्प्रदायिक करार देते रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस और इसके समर्थक दल इन अनुच्छेदों की आड़ में अपना साम्प्रदायिक कार्ड खेल समस्त मुस्लिम समाज को भ्रमित कर, देश की मुख्यधारा से अलग रख केवल अपने वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। 
स्मरण हो, भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर जाने से पूर्व वहाँ की सरकार से परमिट लेने की प्रथा, वहाँ का अलग प्रधानमन्त्री, एक देश दो प्रधान, एक देश दो विधान आदि को समाप्त करने के लिए नेहरू के मंत्रिमण्डल को त्याग इन कुप्रथाओं के विरुद्ध बिना परमिट के जम्मू-कश्मीर कूच करने के कारण वहां के तत्कालीन प्रधानमन्त्री शेख अब्दुल्ला ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, जहाँ से उनका शव ही बाहर आया यानि नेहरू द्वारा कुरीतियों के विरुद्ध डॉ मुखर्जी ने अपना बलिदान दे दिया। परिणामस्वरूप, विवश होकर नेहरू ने जम्मू-कश्मीर जाने से पूर्व परमिट प्रथा और शेख अब्दुल्ला के प्रधानमन्त्री पद को तो समाप्त कर दिया, लेकिन इन अनुच्छेदों को समाप्त नहीं किया।जम्मू कश्मीर के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रविंदर रैना ने मई 26 को कहा कि उनकी पार्टी संविधान के अनुच्छेदों 370 और 35 ए को जल्दी हटाने के पक्ष में है। रैना ने उम्मीद जताई कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अपने बलबूते अगली सरकार बनाएगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ सबसे बड़ा अन्याय है, यह एक अस्थायी संक्रमणकालीन प्रावधान है जबकि 35ए सबसे बड़ी संवैधानिक गलती है जिसे संसद की सहमति के बगैर पिछले दरवाजे से जोड़ा गया था। हम उम्मीद करते हैं कि इन दोनों संवैधानिक प्रावधानों को जल्दी हटाया जाएगा।’

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश की नवनिर्वाचित सरकार के प्रधानमन्त्री कार्यालय में पदस्थ राज्य मंत्री और कश्मी
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लोकसभा चुनाव 2019 के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात कही है। इस पर जम्...

अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता है और राज्य से संबंधित कानून बनाने के लिए संसद की शक्तियों को सीमित करता है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान के अनुच्छेदों 370 और 35ए को नहीं हटा सकते हैं।
कश्मीर के राजनेताओं पर प्रदेश के लोगों को इन अनुच्छेदों पर भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए रैना ने कहा कि अनुच्छेद 370 ‘घृणा की दीवार’ है और कश्मीर की मौजूदा स्थिति के लिए यही जिम्मेदार है।

पहली बार चीन ने अरुणाचल और पूरे जम्मू कश्मीर को माना भारत का हिस्सा

Narendra Modi and Xi Jinping
आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
चीन में दूसरी बार बेल्ट एंड रोड (BRI) फोरम का आयोजन हो रहा है। अप्रैल 25 को यहां दुनिया भर के नेता जमा हुए। हालांकि भारत इस बार भी फोरम का बहिष्कार कर रहा है। अमेरिका ने भी इस बार फोरम का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इन सबके बीच चीन का एक आश्चर्यचकित करने वाला रूख सामने आया है। इस फोरम के दौरान चीन ने BRI रूट का एक नक्शा जारी किया जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया है।
चीन के इस रूख पर तब और हैरानी होती है जब भारत लगातार चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का बॉयकाट कर रहा है। इकनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, यह नक्शा चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तीन दिवसीय बीआरआई सम्मेलन के दौरान जारी किया गया। गौर करने वाली बात ये है कि चीन ने हाल ही में कई ऐसे नक्शों (Maps) को नष्ट कर दिया था जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया गया था। जब भी भारत का शीर्ष नेतृत्व अरुणाचल का दौरा करता है तो चीन हमेशा इसका विरोध करते रहा है। ऐसे में चीन का यह रूख हैरान करने वाला है।
China considers Jammu and Kashmir and Arunachal as part of India in belt and road initiative summitइससे पहले चीन ने बीआरआई को लेकर जम्मू-कश्मीर का जो नक्शा जारी किया था उसमें पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) को पाकिस्तान का हिस्सा बताया था। चीन के इस कदम से विशेषज्ञ भी हैरान हैं और पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं ये चीन की कोई नई चाल तो नहीं है, क्योंकि वह किसी भी तरह से अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई में भारत को शामिल करना चहता है। 
पिछले साल नवंबर में जब कराची में चीन वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमला हुआ था तो उसके बाद चीन की सरकारी मीडिया 'सीजीटीएन' ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान के नक्शे से अलग दिखाया था। भारत हमेशा से ही चीन की सीपैक परियोजना का विरोध करता रहा है क्योंकि भारत मानता है कि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है। सीपैक चीन के बेल्ट और रोड पहल (बीआरआई) का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

चीनी काउंसलेट हमले के बाद बदला रुख 


चीन इससे पहले पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को पाकिस्तान का हिस्सा बताता रहा है। हालांकि कराची स्थित चीनी काउंसलेट पर हमले के बाद से चीन का रुख बदलता दिख रहा है। इसी के बाद से चीन के स्टेट रन मीडिया (CGTN टेलीविजन) ने पीओके को पाकिस्तान का मानने से इनकार कर दिया था। 

चीन ने नष्ट किए हजारों मानचित्र 

बता दें कि चीन जम्मू कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का विवादित क्षेत्र बताया था। वहीं अरुणाचल प्रदेश को चीन के तहत दिखाया था। चीन ने अकशाई चीन को भी भारत के हिस्से में दिखाया है, जिस पर चीन का कब्जा है। चीन की तरफ से यह एक अजीब वाक्या नजर आया है। बता दें कि चीन ने हाल ही में हजारों मानचित्र को मानचित्र को नष्ट किया है, जो अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दर्शाते रहे हैं। वहीं चीन अरुणाचल प्रदेश का दौरा करने वाले भारत के टॉप लीडर का विरोध करता रहा है।

अनुच्‍छेद 370 हटने पर भारत का कश्‍मीर से रिश्‍ता टूट जाएगा: कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी अनुच्‍छेद 370 और 35A के कश्मीर से समाप्त करने का क्यों विरोध कर रहे हैं? क्या यह अनुच्छेद देश के हित में हैं? जब एक कश्मीरी कश्मीर से बाहर भारत के किसी भी भाग में रह सकता है, स्वतन्त्र व्यापार कर सकता है, फिर क्यों कोई गैर-कश्मीरी कश्मीर में स्वतन्त्र रूप से व्यापार कर सकता? क्या यह अनुच्‍छेद देश को विघटन करने को प्रेरित नहीं करती ? हकीकत यह है कि इन धाराओं के समाप्त होने पर इन सबकी कश्मीर में चल रही दुकानें यानि पार्टियों का अस्तित्व ही पतन की ओर चला जाएगा। 
भारतीय जनसंघ वर्तमान भाजपा के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने इन अनुच्छेदों को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर जाने से पहले परमिट लेने की प्रथा को समाप्त करने के लिए ही अपना बलिदान दिया था। नेहरू मंत्रिमंडल से उद्योग मंत्री पद को त्याग जनसंघ की स्थापना की थी। उनके बलिदान ने शेख अब्दुल्ला का प्रधानमंत्री पद और परमिट प्रथा को समाप्त कर दिया था, क्या इन धाराओं को समाप्त करवाने के लिए एक और डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को पैदा होना पड़ेगा? भारत के स्वतन्त्र होने से आज तक जब कहते हैं "कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है" फिर किस आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल ने शेख अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर का अलग से प्रधानमंत्री बनाया था? जो इस बात को प्रमाणित करता है कि प्रारम्भ से ही कांग्रेस विघटनकारी शक्तियों को बढ़ावा देती रही। वास्तव में कश्मीर समस्या कांग्रेस द्वारा बोया गया विघटन-रूपी वृक्ष है, जिसके काटे जाने पर सबको परेशानी हो रही है। किस आधार पर शेख अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री बनाया गया था, जबकि जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे? कहाँ थे कांग्रेस के निडर और निर्भीक नेता, क्यों नहीं किया नेहरू का विरोध? क्यों केवल केंद्रीय उद्योग मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को ही जम्मू-कश्मीर से इन कूप्रधाओं को समाप्त करने के बलिदान देना पड़ा था?
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जम्मू कश्मीर कभी भी पूरी तरह इस देश का हिस्सा न बन पाए इसके लिए इतिहास में तरह-तरह के षड... 
कांग्रेस के कश्‍मीरी नेता सैफुद्दीन सोज ने विवादित बयान देते हुए कहा है कि अगर कश्‍मीर से संविधान का अनुच्‍छेद 370 हटेगा तो कश्मीर का रिश्ता भारत के साथ ख़त्म हो जायेगा. उन्‍होंने ये भी कहा कि ये समझ में नहीं आ रहा की कश्मीर में इतनी फौज तैनात क्‍यों की जा रही है? इतनी जरूरत नहीं है. इससे कश्मीर के लोग चौंक जाते हैं. उन्‍होंने कहा कि 35 A खत्‍म होने के साथ अनुच्‍छेद 370 अपने आप खत्‍म हो जाएगा.
चित्र में ये शामिल हो सकता है: 3 लोग
उन्‍होंने आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट में जाकर 35A, 370 ख़त्म करवाना चाहता है. ये टेढ़ी सोच के लोग हैं. आरएसएस ने पहले ही देश को नुकसान पहुंचाया है. सुप्रीम कोर्ट में 370 के संबंध में याचिका किसने दी है. इसके साथ ही जोड़ा कि 2019 में इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है. 2019 में शासन बदलेगा.
सोज ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के साथ रिश्ता खत्म होगा तो लोग विरोध करेंगे. अगर इसके साथ छेड़खानी हुई तो हम, फारूक अब्‍दुल्‍ला, उमर अब्‍दुल्‍ला, महबूबा मुफ्ती लाल चौक से विरोध करेंगे. हमारा रिश्ता सेक्‍युलर भारत से है. नफरत के सौदागरों के साथ रिश्ता नहीं रहा है.
संवैधानिक प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ खतरनाक चलन : लोन
इस बीच पीपुल्स कान्फ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर में लागू संवैधानिक प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए. लोन ने इसके साथ ही मलिक से ऐसा कोई भी निर्णय लेने से परहेज करने को कहा जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. लोन जम्मू कश्मीर की पूर्ववर्ती पीडीपी नीत राज्य सरकार में भाजपा के कोटे से एक मंत्री थे. उन्होंने कहा कि राज्यपाल या राष्ट्रपति शासन सरकार के दिन प्रतिदिन के कार्यों के लिए एक अस्थायी उपाय है.

लोन ने कहा, ‘‘राज्यपाल से ऐसा कोई प्रमुख नीतिगत निर्णय लेने की अपेक्षा नहीं की जाती जो कि केवल एक निर्वाचित सरकार का विशेषाधिकार है. किसी भी तरह से राज्यपाल या राष्ट्रपति उन संवैधानिक प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते या नहीं करनी चाहिए जिससे जम्मू कश्मीर राज्य के केंद्र के साथ संवैधानिक संबंध स्थायी रूप से प्रभावित हों.’’
उन्होंने कहा कि राज्य के लिए लागू संवैधानिक प्रावधानों से राज्यपाल प्रशासन द्वारा छेड़छाड़ एक खतरनाक चलन है, जिसके केंद्र के साथ राज्य के संवैधानिक रिश्तों के संबंध में गंभीर प्रभाव होंगे. उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने हाल में न केवल संविधान के 103वां संशोधन कानून, 2019 को बल्कि संविधान के 77वें संशोधन कानून, 1995 को भी जम्मू-कश्मीर में लागू करने की सिफारिश की. उन्होंने कहा कि राज्यपाल की सिफारिशों पर राष्ट्रपति ने कुछ दिन पहले इस संबंध में आदेश जारी किये.
आग से मत खेलिए, 35ए के साथ छेड़छाड़ मत कीजिए : पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार को खुले तौर पर चेतावनी दी है. दरअसल, देशभर में चर्चाएं हैं कि केंद्र सरकार आर्टिकल 35ए को खत्म करने पर विचार कर रही है. इसी को लेकर महबूबा मुफ्ती ने केंद्र को कहा कि आग से मत खेलिए, 35ए के साथ छेड़छाड़ मत कीजिए. अगर ऐसा हुआ तो आप वो देखेंगे जो 1947 के बाद से आज कर नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर 35ए को खत्म किया गया तो, मैं नहीं जानती कि जम्मू कश्मीर के लोग मजबूर होकर तिरंगे की जगह कौन सा झंडा उठा लेंगे. 
इससे पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन ने रविवार को सभी अटकलों को विराम देते हुए कहा था कि अनुच्छेद 35ए के मुद्दे पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और निर्वाचित सरकार ही इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में रुख रख पाएगी. सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 35ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. जम्मू कश्मीर में राज्यपाल के प्रशासन के मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किये गये वरिष्ठ नौकरशाह रोहित कंसल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सुप्रम कोर्ट में अनुच्छेद 35ए पर सुनवाई को टालने के अनुरोध पर राज्य सरकार का रुख वैसा ही है जैसा 11 फरवरी को अनुरोध किया गया था.’’ 
वह इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे कि क्या इस विवादास्पद मुद्दे पर राज्यपाल के प्रशासन के रुख में कोई बदलाव आया है. कंसल ने राज्य की जनता से भी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि आधी अधूरी और अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर लोग घबराहट पैदा नहीं करें. जम्मू कश्मीर सरकार के वकील ने उच्चतम न्यायालय से अनुच्छेद 35ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आगामी सुनवाई को स्थगित करने के लिए सभी पक्षों के बीच एक पत्र वितरित करने के लिए अनुमति मांगी थी. उन्होंने कहा कि राज्य में कोई ‘निर्वाचित सरकार’ नहीं है.
अनुच्छेद 35 ए राज्य के नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करता है. सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 35ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई कर सकता है. बता दें कि आर्टिकल 35ए पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस तक सभी केंद्र को नसीहत देते हुए नजर आ रहे हैं.