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पीलीभीत में ढेर हुए थे जिस खालिस्तानी संगठन के आतंकी, उसने ही ली महाकुंभ में आग की जिम्मेदारी: ATS-NIA की रडार पर 1000 संदिग्ध, NSUI नेता शाहिद से पूछताछ

                                  इस अग्निकांड में जान का नुकसान नहीं हुआ था (फोटो साभार: Jansatta)
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में हाल ही में लगी आग की जिम्मेदारी खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स (KZF) ने ली है। इस संगठन के ही तीन आतंकी हाल में पीलीभीत में पुलिस ने मार गिराए थे। KZF ने अग्निकांड को एनकाउंटर का बदला करार दिया है। इस अग्निकांड की जाँच अब NIA और यूपी ATS कर रही हैं। कई संदिग्धों को इस मामले में पकड़ा भी गया है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 19 जनवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के कुछ टेंटों में लगी आग में खालिस्तानी एंगल सामने आया है। लंदन और ग्रीस से चलने वाले KZF आतंकी समूह ने इस आग का कारण ब्लास्ट बताया था और दावा किया था कि उसने ही यह काम किया है।

KZF ने दावा किया है कि वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे और केवल यह दिखाना चाहते थे कि क्या करने की क्षमता रखते हैं। यह पूरी बात उन्होंने मीडिया संस्थानों को भेजे गए एक ईमेल में लिखी है। उन्होंने इसे एक शुरुआत बताया है और पीलीभीत एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। पुलिस अभी इस खालिस्तानी एंगल को नकार रही है।

हालाँकि, NIA और ATS ने आग लगने के दौरान आसपास मौजूद 1000 लोगों पर जाँच चालू की है। यह भी बताया गया है कि इन 1000 में से लगभग 900 हिन्दू नहीं हैं। ऐसे में शक और भी गहरा हो गया है। इनसे पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं।

दावा है कि ATS वाराणसी से 10 लोगों को हिरासत में ले चुकी है। इनसे पूछताछ चल रही है। संदिग्धों से पूछताछ के लिए सवालों की एक लिस्ट तैयार की गई है। इसमें उनकी महाकुंभ में आस्था से लेकर घटनास्थल के वीडियो फोटो से जुड़े सवाल तक हैं।

वाराणसी में NSUI नेता शाहिद से भी पूछताछ हुई है। उन्हीं लोगों से मुख्य तौर पर पूछताछ हो रही है जिन्होंने घटना के दिन महाकुंभ को सोशल मीडिया पर दिखाया था और लोकेशन भी साझा की थी। इनमें से शक उन पर अधिक है जिन्होंने बाद में फोटो वीडियो डिलीट किए।

मामले में दूसरे प्रदेशों की पुलिस को भी अलर्ट भेज दिया गया है। जिनसे पूछताछ हुई है, उन्हें शहर ना छोड़ने को कहा गया है। धमकी में फ़तेह सिंह बागी का नाम भी लिखा है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह वही बागी है जिसका हाल ही में गुरदासपुर हमले में नाम आया था। वह ब्रिटिश आर्मी का एक सैनिक रहा है और आतंकियों का हैंडलर है।

महाकुंभ शुरू होने से पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी हमला करने की बात कही थी। उसने भी पीलीभीत एनकाउंटर को फेक बताया था और बदला लेने की बात कही थी। इसको लेकर उसने वीडियो जारी किए थे।

पन्नू ने मंगलवार (24 दिसम्बर, 2024) को एक वीडियो जारी किया। 3 मिनट के इस वीडियो में उसने कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी था और मारे गए तीनों आतंकी असल में शहीद हैं। उसने परिवार को मदद देने का भी ऐलान किया है। उसने कहा है कि SFJ उन तीनों परिवारों को ₹5 लाख देगा।

उसने साथ ही में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर भी अपशब्द कहे। पन्नू ने कहा है पीलीभीत में ही 1991 में एक फर्जी एनकाउंटर हुआ था जिसमें 11 सिखों को मार दिया गया था। उसने कहा है कि हालिया एनकाउंटर का बदला वह प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में लेगा।

पन्नू ने कहा है कि 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में हमला किया जाएगा। उसने हिंदुत्व को आतंकवाद करार दिया है। उसने पंजाब की आजादी और खालिस्तान को लेकर भी अपना प्रलाप दोहराया है। पन्नू की धमकी को पीलीभीत पुलिस ने संज्ञान में लिया है।

पीलीभीत पुलिस ने साइबर थाने में इस संबंध में एक FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बताया है कि वह इस वीडियो को लेकर जाँच कर रहे हैं। कई जगह दावा किया गया है कि पीलीभीत पुलिस को भी इस घटना के बाद धमकियाँ दी गई हैं।

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19 जनवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में आग लगी थी। यह आग सेक्टर 19 में लगी थी। इसमें कई टेंट जल गए थे। आग पर कुछ ही मिनटों के भीतर काबू पा लिया गया था। इसका कारण एक खाना बनाने वाले सिलेंडर का फटना बताया गया था। आग में किसी की जान नहीं गई थी।

‘घाटी छोड़ो वरना मार दिए जाओगे’: ULF के आतंकी मार रहे उत्तर प्रदेश-बिहार के लोगों को

                                             जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने दी धमकी
जम्मू-कश्मीर में गैर-मुस्लिमों पर होते हमले अब लगातार बढ़ रहे हैं। 17 अक्टूबर को भी वहाँ दो मजदूरों की हत्या हुई, जिसकी पूरी जिम्मेदारी लश्कर से जुड़े आतंकी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULF) ने ली और एक पत्र जारी कर धमकाया कि गैर-कश्मीरी घाटी छोड़ दें वरना उन्हें भी मार दिया जाएगा। बता दें कि रविवार को दो गैर-कश्मीरियों पर गोली चलाकर उन्हें मारा गया था जबकि 1 को घायल कर दिया गया था।

अनुच्छेद 370 ख़त्म करने के बाद से मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होने की बात की जा रही थी, लेकिन नितरोज होती हत्याओं से लगता है, स्थिति पहले ही जैसी है। क्यों नहीं आतंकवादियों को पनाह देने की शिनाख्त कर जेलों में डाला जाता? आखिर कब तक मासूमों के साथ आतंकवादी खून की होली खेलते रहेंगे? अगर सीमा पार से आ रहे हैं, तो सीमा सुरक्षा क्या कर रही है और अगर ये बात गलत है, फिर कश्मीर में छिपे बैठे इन आतंकवादियों और इन्हें पनाह देने वालों के साथ भी आतंकवादियों की भांति कार्यवाही की जाए?

आतंकी समूह द्वारा इस पत्र को 17 अक्टूबर को जारी किया गया। इस पर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू एंड कश्मीर लिखा है और नीचे इस समूह के प्रवक्ता उमर वानी का नाम और स्टैम्प है। पत्र में कहा गया, “अस्सलाम वालेकुम, आज से पहले ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ ने तीन गैर स्थानीय हिंदुत्ववादी लोगों को साउथ कश्मीर के कुलगाम के वानपोह इलाके में मारा था। हिंदुत्व कट्टरपंथियों ने बिहार में 200 मुस्लिमों को पिछले एक साल में मारा। जैसा कि पहले ही धमकी दी जा चुकी है कि वो लोग हमारी जमीन को छोड़ें वरना उन चीजों के लिए तैयार रहें। ये बदला लेने के लिए की गई स्ट्राइक्स थीं उन अत्याचारों के विरुद्ध जो भारतीय सेना मासूम नागरिकों पर करती है।”

आगे पत्र में कहा गया, “केवल एक हफ्ते में सेना ने हमारे 4 मासूम नागरिक नकली एनकाउंटर्स में शहीद कर दिए। सीआरपीएफ ने एक गरीब को भी अनंतनाग जिले के कोकरनाग में मारा था।”

आतंकी संगठन ने धमकी देते हुए पत्र में कहा है, “हम फिर हर गैर-कश्मीरी को हमारी जमीन छोड़ने को कहते हैं वरना वो परिणामों के लिए तैयार रहें। अगर सेना ने नागरिकों के विरुद्ध अत्याचार नहीं खत्म किया हमारे स्वतंत्रता सेना राजनेताओं और पुलिस के परिवार को निशाना बनाने में बिलकुल नहीं हिचकेंगे।”

जम्मू-कश्मीर में अब तक 11 लोगों की जानें चली गई हैं। हत्याओं को अंजाम देने का सिलसिला 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था।

  • 2 अक्टूबर को मोहम्मद शफी डार को मारा गया था क्योंकि उन पर सुरक्षाबल से लिंक होने के आरोप थे।
  • 2 अक्टूबर को ही मजीद अहमद गोजरी की हत्या हुई थी। वह श्रीनगर के छतबाल निवासी थे। उन पर सेना की मदद करने के आरोप थे।
  • 5 अक्टूबर को 68 साल के माखन लाल बिंद्रू श्रीनगर में उन्हीं की फार्मेसी की दुकान पर मारे गए थे।
  • 5 अक्टूबर को ही श्रीनगर के लाल बाजार में एक सड़क किनारे खाने का सामान बेचने वाले वीरेंद्र पासवान को मारा गया था। वह भागलपुर के रहने वाले थे।
  • 5 अक्टूबर को मोहम्मद शफी लोन को आतंकियों द्वारा मारा गया। वह बांदीपोरा में टैक्सी स्टैंड अध्यक्ष थे और कैब चलाते थे।
  • 7 अक्टूबर को एक सरकारी स्कूल में घुसने के बाद आतंकियों ने सुपिंदर कौर और दीपक चंद नामक शिक्षकों को छाँट कर मारा। 
  • 16 अक्टूबर सगीर अहमद जो उत्तरप्रदेश के थे और कारपेंटर थे, उन्हें भी पुलावामा में मारा गया।
  • अरबिंद कुमार शाह भी बिहार के बांका से थे और श्रीनगर में गोलगप्पा बेचते थे। ईदगाह इलाके में गोलगप्पा बेचते समय उन्हें आतंकियों ने निशाना बनाया और गोली मार उन्हें खत्म कर दिया। इस पूरी घटना के बाद नीतीश कुमार ने 2 लाख का मुआवजा शाह के परिवार के लिए देने का वादा किया है।
  • 17 अक्टूबर को मारे गए राजा ऋषि देव भी बिहार के मजदूर थे। वह कुलगाम के वानपोह में रहते थे। उनके साथ जोगिंदर ऋषि देव को भी मारा गया है। ये घटना एक पूर्व एसएलए के आवास से नजदीक में हुई है। इस हमले में चुनचुन ऋषिदेव घायल हैं।

जम्मू-कश्मीर में होती इन घटनाओं की बाबत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से फोन पर बात की। उन्होंने राजा ऋषिदेव और जोगिंदर ऋषिदेव की हत्या एवं चुनचुन ऋषिदेव के घायल होने पर दुख जताया। नीतीश ने इस आतंकी हमले में मारे गए दोनों लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रूपए देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने श्रम संसाधन विभाग एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से मृतकों के परिजनों को नियमानुसार अन्य लाभ दिलाने का अधिकारियों को निर्देश दिया है।