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Fabindia : दिवाली का उर्दूकरण करने के कारण कंपनी को 20 सालों में पहली बार 116 करोड़ रूपए का नुकसान

                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर
छद्दम सेक्युलरिस्टों की राह पर चलते 
20 सालों के इतिहास में पहली बार फैब इंडिया को घाटा हुआ है। फैब इंडिया की बिक्री में करीब एक तिहाई की कमी आई है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण लॉकडाउन को ही माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान कई ब्रांड रिटेलरों को कई हफ्तों तक शोरूम बंद रखने पर गए थे। हालाँकि ज्यादातर लोगों का कुछ और ही कहना है। लोगों का मानना है कि दिवाली के ठीक पहले फैब इंडिया के विज्ञापन के कारण ऐसा हुआ है।

सोशल मीडिया में लोग इसके मजे भी ले रहे हैं और तरह तरह के मीम्स बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक टैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं। इनमें #जश्नएक़िल्लत, #MahauleMaatam, #जश्नऐदिवालिया#Fabindia, #KalejaeThandai, #JashneKutai और #Jashn_e_Kangaal आदि शामिल हैं।

20 वर्षों में पहली बार हुआ है घाटा 

जानकारी के मुताबिक, 2020-21 में फैब इंडिया का रिवेन्यू 30% तक कम हो गया और यह 1059 करोड़ रुपए रह गया है। 2021 के मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में इस कंपनी को 116 करोड़ रुपए का नुकसान सहना पड़ा है। ग्रामीण इलाकों से गारमेंट्स और फैब्रिक्स जैसे प्रोडक्ट्स शहरों तक पहुँचाने वाली इस कंपनी की बिक्री पिछले दो दशक में पहली बार कम हुई है।

क्यों हुआ था विवाद 

दिवाली के मौके पर फैब इंडिया के एक विज्ञापन कर जमकर विवाद हुआ था। दरअसल उस दौरान अपने कपड़ों के लिए कंपनी ने एक विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में दिवाली के मौके पर जश्न-ए-रिवाज का नाम दिया गया था। इसी शब्द पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं और सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया में बवाल हो गया और लोगों ने इसके बहिष्कार करने की माँग शुरू कर दी थी। फैब इंडिया ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए यह विज्ञापन हटा लिया था। फैब इंडिया ने लिखा था, “जैसा कि हम प्यार और प्रकाश के त्योहार का स्वागत कर रहे हैं। जश्न-ए-रिवाज फैबइंडिया का कलेक्शन है जो बेहद खूबसूरती से अपना सम्मान भारतीय परंपरा को देता है।”

इस ट्वीट में जश्न-ए-रिवाज शब्द को देख यूजर्स भड़क गए। भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने मामले को उठाते हुए लिखा था  कि दीपावली कोई जश्न-ए-रिवाज नहीं है। हिंदू त्योहार का इब्राहिमीकरण, ऐसी मॉडलों का प्रदर्शन जिन्होंने हिंदू परिधान न पहने हों, सबका बहिष्कार होना चाहिए और फैब इंडिया न्यूज जैसे ब्रांड को ऐसी हरकत के लिए आर्थिक हर्जाना चुकाना चाहिए। मालूम हो कि फैब इंडिया की शुरुआत 1960 में जॉन बिस्सेल ने की थी। वह फोर्ड फाउंडेशन ग्रांट पर कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम के सलाहकार के रूप में भारत आए थे।