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डॉ रितु श्रीवास्तव :भारत की ‘रॉकेट वुमन’ : कर रही हैं ‘चंद्रयान 3’ मिशन का नेतृत्व

                               इसरो की वैज्ञानिक रितु श्रीवास्तव (साभार: फाइनेंशियल एक्सप्रेस)
भारत ने चंद्रयान-3 को प्रक्षेपित कर दिया है। यह अब तक अपनी नियत शर्तों के तहत काम कर रहा है और उम्मीद है कि अगले महीने के तीसरे सप्ताह में चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग भी करेगा। इस मिशन के पीछे भारत की ‘रॉकेट वुमन’ के नाम से प्रसिद्ध रितु करिधल श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पूरे मिशन का नेतृत्व किया था।

जब चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण हुआ और वह लगभग 3.85 लाख किलोमीटर की अपनी यात्रा पर निकला तो ISRO की वरिष्ठ वैज्ञानिक और मिशन की निदेशक डॉक्टर रितु के घर में जश्न मनाया जाने लगा। रितु के परिजनों ने मिठाइयाँ बाँटीं।

रितु लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्होंने साल 1996 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी (Physics) में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ इंजनीयरिंग (ME) किया।

साल 1997 में रितु भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) में शामिल हो गईं। वह चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर और मंगलयान मिशन की डिप्युटी ऑपरेशंस डायरेक्टर थीं। उन्होंने अब तक देश-विदेश की जर्नल में 20 से अधिक शोध पत्र छपवा चुकी हैं।

रितु करिधल ISRO और NASA की पेपर कटिंग को इकट्ठा करती हुई बड़ी हुई हैं। वह बड़ी होकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती थीं। आखिरकार उनका सपना साकार हुआ और उन्होंने आगे चलकर ISRO को जॉइन कर लिया।

उनके योगदान के लिए रितु को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने उन्हें ‘ISRO यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। साल 2007 में मिला यह अवॉर्ड रितु के लिए गौरव का क्षण था।

इसके अलावा, उन्हें सोसाइटीज ऑफ इंडियन एयरोस्पेेस टेक्नोलॉजिज एवं इंडस्ट्रीज (SIATI) द्वारा दिया गया वीमन अचीवर्स ऑफ एयरोस्पेस अवॉर्ड 2017 शामिल है। उन्हें ISRO Team Award for MOM (2015) और ASI Team Award’ भी मिल चुका है।

रितु करिधाल श्रीवास्तव एक शानदार इंजीनियर और समर्पित लीडर हैं। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह STEM क्षेत्रों में महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं और वह दुनिया भर के कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं।

यूरोपियन एजेंसी 12 साल बाद ढूंढ पाई थी अपना लैंडर, हमारे वैज्ञानिकों ने 35 घंटे में ही ढूंढ निकाला

Image result for विक्रम लैंडर ऑर्बिटर
ISRO के चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चांद की सतह पर तिरछा पड़ा हुआ है। वैज्ञानिक उससे संपर्क साधने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि चंद्रयान-2 ही इकलौता यान नहीं है जिससे संपर्क टूटा है। अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में इससे पहले भी ऐसा हो चुका है।
यूरोपियन स्पेस एजेंसी का एक यान जिससे संपर्क टूट गया था, उसके बारे में 12 साल बाद जानकारी मिली थी। वह मिला भी लेकिन उससे संपर्क नहीं हो पाया। यानी उम्मीद खोने की जरूरत नहीं है। इसरो वैज्ञानिकों ने तो विक्रम लैंडर को करीब 35 घंटे बाद ही खोज लिया था। अब प्रयास सिर्फ इस बात का हो रहा है कि विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित हो जाए।
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यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल ग्रह के लिए 2 जून 2003 को एक लैंडर लॉन्च किया था। इसका नाम था बीगल-2। पूरे मिशन का नाम था मार्स एक्सप्रेस मिशन। जून में लॉन्च किए गए इस लैंडर को 6 महीने बाद यानी 19 दिसंबर 2003 को मंगल पर पहुंचना था। यान पहुंचा भी लेकिन उसी दिन इससे यूरोपियन स्पेस एजेंसी से संपर्क टूट गया। करीब ढाई महीनों तक बीगल-2 से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उसने पृथ्वी से भेजे गए किसी भी संदेश का जवाब नहीं दिया। अंत में फरवरी 2004 में इस मिशन को नाकाम घोषित कर दिया गया।
ESA ने बीगल-2 मिशन को मंगल पर इसलिए भेजा था ताकि वहां के जरिए जीवन की संभावना का पता लगाया जा सके। बीगल से संपर्क टूटने के बाद ESA मार्स एक्सप्रेशन मिशन के ऑर्बिटर से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। ऑर्बिटर से ऐसी तस्वीरें भी नहीं मिली कि यह पता चल सके कि वहां क्या हुआ।
करीब 12 साल बाद जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का यान मार्स रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर मंगल से जानकारियां जमा करने के लिए उसकी कक्षा में चक्कर लगा रहा था, तब उसने 16 जनवरी 2015 को बीगल-2 की तस्वीरें लीं। इस बीच, बीगल-2 मिशन के कर्ताधर्ता कोलिन पेलिंगर की भी मौत हो चुकी थी। नासा से मिली तस्वीरों से पता चला कि बीगल-2 अपने तय लैंडिंग वाली जगह से करीब 5 किमी दूर पड़ा था। मंगल के इस इलाके को इसिडिस प्लेनेशिया कहते हैं।

चंद्रमा की सतह पर टूटा नहीं साबुत है लैंडर 'विक्रम'- ISRO अधिकारी

चंद्रमा की सतह पर टूटा नहीं साबुत है लैंडर 'विक्रम'- ISRO अधिकारी
चंद्रयान-2’ में एक ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है और वह ‘चंद्रयान-2' के लैंडर ‘विक्रम' से संपर्क स्थापित करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है, जो ‘हार्ड लैंडिंग' के बाद इस समय चंद्रमा की सतह पर है. ‘विक्रम' का शनिवार को ‘सॉफ्ट लैंडिंग' के प्रयास के अंतिम क्षणों में उस समय इसरो के कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया था जब यह चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था. लैंडर के भीतर ‘प्रज्ञान' नाम का रोवर भी है.
मिशन से जुड़े इसरो के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ‘ऑर्बिटर के कैमरे से भेजी गईं तस्वीरों के मुताबिक यह तय जगह के बेहद नजदीक एक ‘हार्ड लैंडिंग' थी. लैंडर वहां साबुत है, उसके टुकड़े नहीं हुए हैं. वह झुकी हुई स्थिति में है.'
अधिकारी ने कहा, ‘‘हम लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं.' उन्होंने कहा, ‘‘यहां इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में एक टीम इस काम में जुटी है.'  ‘चंद्रयान-2' में एक ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं. लैंडर और रोवर की मिशन अवधि एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिनों के बराबर है.
इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने शनिवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क साधने की 14 दिन तक कोशिश करेगी. उन्होंने रविवार को लैंडर की तस्वीर मिलने के बाद यह बात एक बार फिर दोहराई.
अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘जब तक (लैंडर में) सबकुछ सही नहीं होगा, यह (दोबारा संपर्क स्थापित करना) बहुत मुश्किल है. संभावनाएं कम हैं. अगर ‘सॉफ्ट लैंडिंग' हुई हो और सभी प्रणालियां काम कर रही हों, तभी संपर्क स्थापित किया जा सकता है. फिलहाल उम्मीद कम है.'
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख के सिवन ने रविवार को कहा कि हमें चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर का लोक.....

इसरो के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लैंडर के फिर सक्रिय होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, ‘लेकिन कुछ सीमाएं हैं. हमें भूस्थिर कक्षा में अंतरिक्ष यान (जिनका संपर्क टूट गया) की बहाली का अनुभव है. लेकिन यहां (विक्रम के मामले में) बहुत अधिक गुंजाइश नहीं है. वह पहले ही चंद्रमा की सतह पर पड़ा है और हम उसे फिर से ठीक नहीं कर सकते.' उन्होंने कहा, ‘ऐसे अभियान बहुत कठिन होते हैं. साथ ही संभावनाएं भी हैं और हमें हाथ थामकर इंतजार करना चाहिए.'
Chandrayaan 2: ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर का पता लगाया

चंद्रयान 2 : चंद्रमा पर लापता लैंडर विक्रम पता चला,ऑर्बिटर ने इमेज क्लिक किया - इसरो चीफ के सिवन

 ISRO Chief K Sivan
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख के सिवन ने रविवार को कहा कि हमें चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर का लोकेशन मिला है और ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल इमेज क्लिक किया है। लेकिन अभी तक कम्युनिकेशन नहीं है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द कम्युनिकेट किया जाएगा।
गौर हो कि भारत का दूसरा मून मिशन चंद्रयान 2 लॉन्च होने के बाद सात सितंबर को चंद्रमा पर पहुंच गया था लेकिन चंद्रमा की सतह को छूने से चंद मिनट पहले लैंडर विक्रम का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया  था। इसरो ने बताया था कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चंद्रमा की ऑर्बिट में सुरक्षित है और सामान्य तरीके से काम कर रहा है। रविवार को इसरो चीफ ने कहा कि  हमें चंद्रमा की सतह पर लैंडर विक्रम का लोकेशन मिला है और ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल इमेज क्लिक किया है। लेकिन अभी तक कम्युनिकेशन नहीं है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द कम्युनिकेट किया जाएगा।

गौर हो कि कि 3,840 किलोग्राम के चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को जीएसएलवी एमके-3 एम1 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था। चंद्रयान-2 ने धरती की ऑर्बिट को छोड़कर चंद्रमा की तरफ अपनी यात्रा 14 अगस्त को इसरो के ट्रांस लूनर इन्सर्शन नाम की प्रक्रिया को अंजाम दिए जाने के बाद शुरू की थी। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष यान को लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्ट्री में पहुंचाने के लिए अपनाई गई। अंतरिक्ष यान 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था। 2379 किलोग्राम ऑर्बिटर के मिशन का जीवन काल एक साल है।
लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान मिशन 5 फीसदी था जो हमने खोया: ISRO
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चंद्रयान 2 के चांद की सतह पर कदम रखने में सस्पेंस बना हुआ है. फिलहाल इसरो ने बताया कि विक्रम लैंडर से उनका संपर्क टूट ...

मिशन चंद्रयान 2 पर इमरान खान के मंत्री ने उड़ाया भारत का मजाक, सोशल मीडिया पर उड़ता मजाक

Fawad chaudhary
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जो दूसरों के उपर ताक-झांक करते हैं उन्हें सबसे पहले अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए। ये कहावत इस समय पाकिस्तान पर बिल्कुल सटीक बैठती है। आर्थिक बदहाली के सबसे से बुरे दौर से पाकिस्तान गुजर रहा है इसके बावजूद वहां के मंत्री और नेता अपने बड़बोलेपन से अपनी मूर्खता को जगजाहिर करते रहते हैं। कभी परमाणु तो कभी आतंकवाद की आड़ में छद्दम युद्ध की धमकी पर जनता के विकास में खर्च होने धन को बर्बाद कर रहा है। 
पाकिस्तान में 50 फीसदी से भी अधिक लोगों को दो वक्त खाने की रोटी भी नसीब नहीं है और वह इंडिया से टक्कर लेने की बात करता है। गरीबी, आर्थिक मोर्चे पर विफलता, भूखमरी, आतंकवाद, कुपोषण, अशिक्षा जैसी गंभीर समस्याओं से गुजर रहे पाक को अपनी समस्याएं कभी नजर नहीं आती हैं लेकिन वह भारत के मामलों में अपनी राय देने के लिए फौरन आगे रहता है। कुछ ऐसा ही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के एक मंत्री ने किया है। 
भारत में इस नुकसान को सहने की क्षमता है, काश स्थिति विपरीत होती, पाकिस्तान इस नुकसान से शायद कभी उभर नहीं पाता। पाकिस्तान जो अपनी स्थापना से लेकर आज तक बस "कश्मीर" को अपना सबकुछ समझ आर्थिक स्थिति में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया, जबकि लगभग 47 वर्ष पूर्व पाकिस्तान से अलग हुआ बांग्लादेश कहाँ से कहाँ पहुँच गया, परन्तु पाकिस्तान कुँए का मेंढक ही बना हुआ है। 
इमरान खान के मंत्री ने चंद्रयान 2 पर भारत का उड़ाया मजाक
भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान 2 को शुक्रवार(सितम्बर 6) देर रात करीब 1:30 से 2:30 बजे के करीब चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था। लेकिन करीब 1:38 बजे चंद्रयान-2 जब चंद्रमा से 2.1 किमी ऊंचाई पर था, तभी लैंडर विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया। पिछले साल ही सितंबर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि छोटे लोग बड़े कार्यालयों में केवल जगह भरने के लिए हैं।

अब ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने ये बात अपने ही कैबिनेट के विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी के लिए कही थी। मिशन चंद्रयान 2 पर पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी ने कुछ ऐसा कहा है जिसकी खूब आलोचना हो रही है। चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग असफल होने के बाद फवाद ने सोशल मीडिया पर भारतीय वैज्ञानिकों का मजाक उड़ाने का प्रयास किया।
शनिवार अहले सुबह के समय ट्विटर पर उन्होंने कई सारे ट्वीट्स किए और भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया। हालांकि इससे ये बात तो साफ पता चल गई कि जिस भारतीय मिशन का वो मजाक बना रहे हैं उसी को देखने के लिए वे सारी रात सोए भी नहीं। 
भारतीय वैज्ञानिकों का मजाक उड़ाने की कोशिश
फवाद चौधरी को अपने इन ट्वीट्स को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना भारी पड़ गया। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उनके इन ट्वीट्स का करारा जवाब दिया। बता दें कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के महत्वाकाक्षी मिशन चंद्रयान 2  का विक्रम लैंडर दुर्भाग्यवश चंद्रमा की सतह तक आते-आते इसरो से संपर्क टूट गया। ये ऐसे समय में हुआ जब लैंडर चंद्रमा की साउथ पोल की सतह से मात्र 2.1 किमी से दूर था। 

इमरान खान के मंत्री ने भारत के स्पेस प्रोग्राम पर कई बेहद घटिया ट्वीट्स किए। लैंडर विक्रम के चंद्रमा की सतह पर पहुंचने से पहले ही उसका संपर्क इसरो से टूटने की खबर आने के बाद फवाद चौधरी ने सबसे पहले ट्वीट किया- Awwwww.....जो काम आता नहीं पंगा नहीं लेते ना..... एंडिया।
पाकिस्तानी यूजर्स ने भी की खिंचाई
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि चौधरी ने इंडिया को एंडिया लिखा। इस ट्वीट पर फौरन ही सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी खिंचाई करनी शुरू कर दी। इस पर तकरीबन 8,800 कमेंट्स आए। किसी ने लिखा इनमें सबसे फनी बात ये है कि चंद्रयान 2 ने इन्हें सारी रात जगाए रखा। 

भारत को नीचा दिखाने की कोशिश में चौधरी के इस ट्वीट पर ना सिर्फ भारतीयों ने भला-बुरा कहा बल्कि वह अपने देश पाकिस्तान में भी घिर गए। वहां के कुछ लोगों ने भी उनकी खिंचाई की और भारत के प्रयासों की सराहना की। पाकिस्तान के एक यूजर ने लिखा- हमारे लिए और शर्मनाक मत बनो, कम से कम भारत ने प्रयास तो किया, जबकि हम अपने अंदरुनी समस्याओं से ही लड़ रहे हैं। हमें किसी भी देश की वैज्ञानिक क्षमताओं की प्रशंसा करनी चाहिए और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।



 
पार की बेशर्मी की हद
हालांकि बेशर्मी की हद तो तब हो गई जब फवाद यहीं नहीं रुके उन्होंने ट्वीट्स करना जारी रखा। भारतीय नागरिकों के तीखे कमेंट्स आने के बाद फवाद ने फिर कहा कि भारतीयों के प्रतिक्रिया देखकर हैरान हूं, ऐसा लग रहा है कि उनकी इस मिशन के फेल होने के पीछे कारण मैं था। भाई मैंने कहा था 900 करोड़ लगाओ इन नालायकों पर? अब सब्र करो और सोने की कोशिश करो।

किसी भारतीय नागरिक ने इसरो को टौग करते हुए लिखा कि उससे इंतजार नहीं हो रहा है वे जल्दी चंद्रयान पर कोई अपडेट्स दें। इस पर भी पाकिस्तानी मंत्री ने कमेंट करते हुए लिखा कि- सो जा भाई चंद्रमा की बजाए मुंबई में उतर गया खिलौना।
पीएम मोदी के इसरो में दिए भाषण पर उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि मोदी जी सैटेलाइट कम्युनिकेशन भाषण दे रहे हैं जैसे कि वे एक अंतरिक्ष यात्री हों ना कि राजनेता। लोकसभा को गरीब नागरिकों के 900 करोड़ रुपए बर्बाद करने को लेकर उनसे सवाल पूछना चाहिए।
'इसरो' के आगे कहीं नहीं टिकता 'सुपार्को'
गौरतलब है कि पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी भारत की स्पेस एजेंसी इसरो से पहले स्थापित की गई थी। इसरो की स्थापना से 8 साल पहले ही पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO की शुरुआत की गई थी लेकिन आज दुनिया जानती है कि इसरो कहां है और सुपार्को कहां है। इसरो जहां 1969 में बना था वहीं सुपार्को 1961 में बना था। आज सुपार्को का दुनिया में कोई नाम तक नहीं जानता है।

भारतीय एजेंसी इसरो ने सैटेलाइट प्रोग्राम्स में कई इतिहास रचे हैं लेकिन पाकिस्तान अंतरिक्ष एजेंसी सुपार्को इनके सामने कहीं नहीं टिकता है। पाकिस्तान ने अब तक 5 सैटेलाइट ही लॉन्च किए हैं वह भी उसने अफने बलबूते नहीं बल्कि उसने कई प्रोग्राम्स में चीन की मदद ली है। जबकि इसरो ने अब तक 370 उपग्रह छोड़े हैं इनमें 269 विदेशी सैटेलाइट्स हैं।  

Chandrayaan 2: विक्रम लैंडर से संपर्क टूटा, पीएम मोदी ने कहा - होप फॉर द बेस्ट, ये छोटी कामयाबी नहीं है

Chandrayaan 2 के  लैंडर से संपर्क टूटने पर पीएम मोदी ने दिया दिलासा तो इसरो प्रमुख ने वैज्ञानिकों से कही यह बात...चंद्रयान 2  के चांद की सतह पर कदम रखने में सस्पेंस बना हुआ है. फिलहाल इसरो ने बताया कि विक्रम लैंडर से उनका संपर्क टूट गया है. इसरो ने बताया कि चांद से 2.1 किमी दूर तक चंद्रयान-2 से संपर्क था, लेकिन फिलहाल संपर्क टूट गया है. इसरो चीफ के मुताबिक अभी आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान इसरो सेंटर में मौजूद थे. उन्होंने वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई और उनका हौसला बढ़ाया. पीएम मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों की तारीफ करते हुए कहा यह कोई छोटी कामयाबी नहीं है. मेरी तरफ से आपको बधाई. इससे हम काफी कुछ सीख सकते हैं. मैं आपके साथ हूं. हिम्मत के साथ चलें.
Chandrayaan 2: इसरो ने कहा- विक्रम लैंडर से टूटा संपर्क, कर रहे डेटा का विश्लेषणमोदी ने कहा, 'ये कोई छोटी उपलब्धि नहीं है जो आपने किया, पूरा देश आप पर गर्व करता है. मेरी तरफ से आप सभी को बहुत बधाई. आपने देश की और विज्ञान की बहुत बड़ी सेवा की है. मैं पूरी तरह आपके साथ हूं. हमारी यात्रा आगे भी जारी रहेगी. आप हिम्‍मत के साथ चलें. जब मिशन बड़ा होता है तो निराशा से पार पाने का हिम्मत होना चाहिए. मेरी तरफ से आप सभी को बहुत बधाई है. आपने देश की मानव जाति की बड़ी सेवा की है.'
'विक्रम' ने 'रफ ब्रेकिंग' और 'फाइन ब्रेकिंग' चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन 'सॉफ्ट लैंडिंग' से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया. इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर निराशा की लकीरें छा गईं. लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद पीएम मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित देश के तमाम नेताओं ने इसरो के वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाया.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 मिशन को लेकर इसरो की टीम ने अनुकरणीय प्रतिबद्धता और साहस का प्रदर्शन किया. राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, "देश को इसरो पर गर्व है. हम सभी बेहतर की उम्मीद करते हैं."
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 को चंद्रमा के सतह के करीब पहुंचाने की इसरो की कोशिशों से हर भारतीय गौरवान्वित है. लैंडर विक्रम के साथ इसरो केंद्र का संपर्क टूटने के चंद मिनट बाद शाह ने ट्वीट किया, "चंद्रयान-2 को लेकर अभी तक की इसरो की उपलब्धि पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है." उन्होंने कहा, "भारत हमारे प्रतिबद्ध और कठिन मेहनत करने वाले इसरो के वैज्ञानिकों के साथ है. भविष्य की यात्रा के लिए मेरी शुभकामनाएं.
चंद्रयान-2: लैंडर से संपर्क टूटने पर वैज्ञानिक निराश, PM मोदी ने कहा- 'आप पर गर्व, होप फॉर द बेस्ट'कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंतरिक्ष एजेंसी को शानदार कार्य के लिए बधाई थी और कहा कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए एक प्रेरणा है. राहुल ने ट्वीट किया, "इसरो की टीम को चंद्रयान-2 मून मिशन पर शानदार काम के लिए बधाई. आपका जुनून और समर्पण प्रत्येक भारतीय के लिए एक प्रेरणा है." विक्रम को चंद्रमा की सतह के करीब तक पहुंचाने में इसरो की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए राहुल ने कहा, "आपका का काम बेकार नहीं जाएगा. इसने कई बेजोड़ और महत्वाकांक्षी भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की बुनियाद रखी है."
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस संबंध में ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि पूरा देश वैज्ञानिकों के साथ है.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट कर वैज्ञानिकों को सैल्यूट किया और उनके काम की सराहना की.
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी वैज्ञानिकों की तारीफ की.
इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि संपर्क उस समय टूटा, जब विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले स्थान से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था. विक्रम का चांद पर उतरने से ठीक पहले संपर्क टूट गया है. इसरो आंकड़ों का इंतजार कर रहा है. चांद से ठीक पहले चंद्रयान का संपर्क टूटने से वैज्ञानिकों में निराशा है. इससे पहले रात एक बजकर 52 मिनट 54 सेकेंड पर चांद की सतह पर चंद्रयान-2 को लैंड करना था. इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसरो सेंटर पहुंचे थे.









लैंडर को रात लगभग एक बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया. ‘विक्रम' ने ‘रफ ब्रेकिंग' और ‘फाइन ब्रेकिंग' चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन ‘सॉफ्ट लैंडिंग' से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया. इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर निराशा की लकीरें छा गईं.
Chandrayaan 2: भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया, जब वह शनिवार तड़के चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि संपर्क उस समय टूटा, जब विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले स्थान से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था. इसरो चीफ के सिवन ने कहा कि अभी आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है. इस खबर से जहां इसरो के वैज्ञानिकों में निराशा देखने को मिली, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आपने बहुत अच्छा काम किया है.

इसरो के अनुसार, लैंडर में तीन वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं जो चांद की सतह और उप सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे, जबकि रोवर के साथ दो वैज्ञानिक उपकरण हैं जो चांद की सतह से संबंधित समझ बढ़ाएंगे. सफल 'सॉफ्ट लैंडिंग' के साथ ही भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का प्रथम देश बन जाएगा. सिवन ने हाल में कहा था प्रस्तावित 'सॉफ्ट लैंडिंग' दिलों की धड़कन थाम देने वाली स्थिति होगी क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है.

चंद्रयान 2 ने भेजी धरती की फोटो, दूर से ऐसी नजर आती है पृथ्वी

चंद्रयान 2 ने भेजी धरती की फोटो,  दूर से ऐसी नजर आती है पृथ्वी
चंद्रयान ने भेजी धरती के ऐसी फोटो.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने रविवार को ‘चंद्रयान 2’ से ली गई पृथ्वी की तस्वीरों का पहला सैट जारी किया. यह तस्वीरें चंद्रयान 2 पर लगे एल 14 कैमरे से ली गई हैं. यह तस्वीरें पृथ्वी को विभिन्न रूपों में दिखाती हैं. इसरो ने इन तस्वीरों के साथ एक ट्वीट में कहा, ”चंद्रयान2 एल14 कैमरों से तीन अगस्त, 2019” चंद्रयान 2, चांद के अध्ययन के लिए भेजा गया देश का दूसरा मिशन है. इसे पिछले पखवाड़े ही अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था.
भारत के ‘चंद्रयान-2’ का चांद तक का सफर जारी है और उसने बीती शुक्रवार को चौथी बार पृथ्वी की कक्षा में और ऊंचाई पर सफलतापूर्वक पहुंचाया गया. उसकी कक्षा में अगला परिवर्तन 6 अगस्त को किया जाएगा. भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 की सभी गतिविधियां सामान्य हैं. अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बताया कि पिछले महीने प्रक्षेपण के बाद से ‘चंद्रयान-2’ की चौथी बार कक्षा बदली गई थी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के मुख्यालय ने यहां एक बयान में कहा कि चंद्रयान-2 की कक्षा को 646 सेकेंड में चौथी बार सफलतापूर्वक परिवर्तित किया गया
.
3,850 किलो के तीन मॉड्यूल के साथ ‘चंद्रयान-2’ का 22 जुलाई को प्रक्षेपण किया गया था. इसरो का मकसद ‘चंद्रयान-2’ को 7सितंबर को चांद के अनछुए हिस्से दक्षिणी ध्रुव पर उतारना है, जो देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ी छलांग साबित होगा. अगर यह मिशन सफल रहा तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चौथा देश होगा, जिसने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई है.

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग : यह भारतीयों के लिए गर्व का क्षण--प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी

Narendra Modi
तस्वीर साभार: PTI
भारत के चंद्रमा मिशन चंद्रयान -2 की सफल लॉन्चिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सोमवार को कहा कि भारत का यह मिशन चंद्रमा के बारे में नई जानकारी देगा। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारतीय वैज्ञानिकों के कौशल एवं 130 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को प्रदर्शित करता है। पीएम ने चंद्रयान की लॉन्चिंग की तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाते हुए आज दो बजकर 43 मिनट पर अपने चंद्रयान-2 मिशन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की।
इसरो के निदेशक के सिवन ने चंद्रयान-2 के पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो जाने के बाद अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिकों को बधाई दी। सिवन ने बताया कि रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 ने चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया है और एक महीने से ज्यादा समय तक चंद्रयान 2 पृथ्वी की अलग-अलग कक्षा में परिक्रमा करेगा।
मोदी ने चंद्रयान 2 मिशन की कामयाबी पर कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयान 2 की सफल लॉन्चिंग ने हमारे वैज्ञानिकों की कुशलता का परिचय दुनिया को कराया है। पीएम ने कहा कि इस मिशन से चंद्रमा और उसकी सतह के बारे में नई जानकारियां प्राप्त होंगी।
Special moments that will be etched in the annals of our glorious history!

The launch of illustrates the prowess of our scientists and the determination of 130 crore Indians to scale new frontiers of science.

Every Indian is immensely proud today!

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प्रधानमंत्री ने अपने एक ट्वीट में कहा, 'चंद्रयान 2 की तरह के हमारे प्रयास विज्ञान एवं उच्च कोटि के अनुसंधान एवं नए प्रयोगों की दिशा में युवाओं को आकर्षित करेंगे। इस मिशन के लिए चंद्रयान टीम को बधाई। इससे भारत के चंद्र मिशन को काफी ताकत मिलेगी। इसके अलावा यह मिशन चंद्रमा के बारे में हमारी जानकारियों को और बढ़ाएगा।'
Indian at heart, Indian in spirit!

What would make every Indian overjoyed is the fact that is a fully indigenous mission.

It will have an Orbiter for remote sensing the Moon and also a Lander-Rover module for analysis of lunar surface.
उन्होंने कहा, 'चंद्रयान 2 मिशन खास है क्योंकि यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के सतह का अध्ययन एवं उसका परीक्षण करेगा। चांद का यह हिस्सा अभी तक किसी परीक्षण से अछूता रहा है। यह मिशन चंद्रमा के बारे में नई जानकारियां हमें देगा।' पीएम ने कहा कि चंद्रयान-2 मिशन पूरी तरह से स्वदेशी है और यह बात प्रत्येक भारतीय को आनंदित करने वाली है। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर दूर से चंद्रमा का परिक्रमा करेगा जबकि लैंडर और रोवर चांद की सतह की जांच करेंगे।
is unique because it will explore and perform studies on the south pole region of lunar terrain which is not explored and sampled by any past mission.

This mission will offer new knowledge about the Moon.
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चांद पर भारत के दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को सोमवार को श्रीहरिकोटा से सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी-मा.....

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गौरवशाली इतिहास के कालखंड में इसे एक खास उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। चंद्रयान -2 की लॉन्चिंग हमारे वैज्ञानिकों की कुशलता एवं 130 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को प्रदर्शित करता है। यह युवा पीढ़ी को विज्ञान के नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। आज प्रत्येक भारतीय गर्व का अनुभव कर रहा है।
डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था कि "सपने तभी पूरे होते हैं जब आप सपने देखते हैं"।
अटल जी जब प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होनें और डॉक्टर कलाम ने ही मिलकर ये सपना देखा था कि भारत चाँद पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए।
हालांकि अटल सरकार का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चंद्रयान-1 पहले ही सफ़ल हो चुका है,परंतु उसी कड़ी में इसरो का ये मिशन चंद्रयान-2 कई मायनों में अद्भुत है।

इस मिशन की सबसे खास बात ये है कि इसका नेतृत्व एक महिला वैज्ञानिक #एम_वनिता कर रही हैं।
अर्थात ये मिशन चंद्रयान-2 ना सिर्फ भारतीय वैज्ञानिकों के पराक्रम और उनके कौशल को दर्शाता है बल्कि सदियों से हाशिये पर धकेल दी गयीं भारतीय महिलाओं की वास्तविक शक्ति को भी दर्शाता है।
और ये तो अभी शुरुआत ही है।अगले कुछ दिनों में भारतीय वैज्ञानिकों और नारी शक्ति का ये पराक्रम पूरी दुनिया से #नये_भारत की ताकत का परिचय कराएगा।