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हिंसा पर ममता सरकार नहीं दे रही जवाब : बंगाल गवर्नर का त्राहिमाम

                                              हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे राज्यपाल जगदीप धनखड़
उत्तर प्रदेश या किसी अन्य भाजपा शासित राज्य में हिंसा होने पर चीखने-चिल्लाने वाले समस्त मोदी विरोधी बंगाल में हो रही हिंसा पर खामोश क्यों? अपने-अपने राज्य छोड़ वहां पिकनिक मनाने पहुँच जाते हैं, लेकिन बंगाल में हिंसा होने पर किस आधार पर खामोश हैं? कहाँ है अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव और अन्य मोदी विरोधी आदि? जबकि इस हिंसा के वह भी पीड़ित हो रहे हैं। NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने मई 7, 2021 को उन्होंने बताया कि पीड़ित महिलाएँ अपने साथ हुए अत्याचार को लेकर आवाज़ भी नहीं उठाना चाहतीं, क्योंकि उन्हें डर है कि इसके बाद उनके साथ कुछ बुरा किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के साथ ही TMC के गुंडों पर भाजपा, कांग्रेस और CPI(M) ने हिंसा के आरोप लगाए हैं। भाजपा के डेढ़ दर्जन कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। 

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद भड़की हिंसा को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर इस संबंध में जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि प्रशासनिक असहयोग के बावजूद वे हिंसा प्रभावित इलाकों के दौरे पर जाएँगे।

राज्यपाल ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हैं। राजनीतिक बदले की हिंसा, आगजनी, लूट की घटनाएँ अब डराने-धमकाने और जबरन वसूली तक पहुँच गई है। राज्यपाल ने यह बात ऐसे समय में कही है जब सोमवार (10 मई 2021) को ही राज्य में 43 मंत्रियों ने शपथ ली है। इससे पहले उन्होंने 5 मई को भी हिंसा पर चिंता जताई थी, जब ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

राज्यपाल धनखड़ ने कहा है कि अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरान करने का फैसला किया। इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक इंतजाम करने को कहे। लेकिन, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे आने वाले दिनों में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाएँगे।

उन्होंने कहा कि हिंसा को लेकर राज्य सरकार के रवैए को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। कोई जवाबदेही नहीं है। तीन मई को इस संबंध में राज्य के डीजीपी, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल होम सेक्रेटरी से रिपोर्ट तलब की थी, जो अब तक नहीं मिली है। अधिकारियों ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम को रिपोर्ट भेजी, पर उन्होंने आज तक ये रिपोर्ट मुझे फॉरवर्ड नहीं की है। राज्यपाल ने कहा कि जमीनी हालात बेहद खराब हैं, लेकिन सरकार का रवैया ऐसा है जैसे कोई हिंसा ही नहीं हुई हो।

हेलीकाप्टर मांगने पर पायलट समस्या का बहाना 

राज्यपाल का कहना है कि उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाने के लिए हेलिकॉप्टर की माँग की थी। लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला। अनाधिकारिक तौर पर उन्हें बताया गया कि हेलिकॉप्टर और पायलट्स के साथ कुछ समस्या है। उन्होंने पूछा कि क्या संवैधानिक मुखिया को सूचना देने का ये तरीका होता है। साथ ही यह भी कहा कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने जो रिपोर्ट उन्हें देने के लिए चीफ सेक्रेटरी होम को भेजी थी, वह भी उन्हें नहीं दी गई।

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बंगाल हिंसा वाली रिपोर्ट राज्यपाल तक नहीं पहुँचे: ममता बनर्जी का ऑफिसरों को आदेश

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आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुल सकता है लेकिन बंगाल हिंसा के खिलाफ याचिका लिस्ट तक
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पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद से ही हिंसा जारी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के गुंडे बी...

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे दो मई को आए थे। नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत तय होते ही राजनीतिक खून खराबे का नया दौर शुरू हो गया था। टीएसमी के गुंडों पर विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाने का आरोप है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा पार्टी के 14 कार्यकर्ताओं की हत्या होने की बात कहे जाने बाद से भी पार्टी की राज्य ईकाई कुछ और कार्यकर्ताओं की हत्या का दावा कर चुकी है। इस हिंसा में पिछले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम भी राज्य का दौरा कर चुकी है।

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यदि ममता बनर्जी के प्रथम कार्यकाल से ही हिन्दुओं पर हो रहे प्रहारों को भाजपा ने गंभीरता से लिया होता, आज बंगाल की सत्ता भाजपा के हाथों में होती और जितनी सीटें अभी संपन्न हुए चुनाव में आयी हैं, उससे अधिक पिछली विधान सभा में होतीं। फिर ममता द्वारा बांग्लादेशियों, रोहिंग्यों आदि के आधार कार्ड और पहचान पत्र आदि बनाए जाने के मुद्दे को भी भाजपा ने गंभीरता से नहीं लिया। वैसे यथासंभव दिल्ली की भी ऐसी ही स्थिति है, लेकिन दिल्ली भाजपा भी सोई हुई है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक हिन्दुओं पर होते हमलों पर सारे छद्दम सेक्युलरिस्ट, संविधान की दुहाई देने वाले, #award vapasi, #mob lynching, #intolerance और "गंगा-जमुनी तहजीब" का नारे आदि लगाने वाले गैंगस्टर खामोश हैं, क्यों? यदि यही विपरीत दुर्घटनाएं किसी भाजपा शासित राज्य में हो रही होती, सबके सब सड़क से लेकर UNO तक पहुँच गए होते।  

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों को चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुई हिंसा पर रिपोर्ट देने से मना कर दिया। हिंसा पर आधारित यह रिपोर्ट राज्यपाल को दी जानी थी लेकिन सीएम ममता बनर्जी के कहने पर गृह सचिव ने राज्य की कानून व्यवस्था की रिपोर्ट राज्यपाल को दी ही नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा दी गई रिपोर्ट भी आगे नहीं बढ़ाई गई।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स के विनोद शर्मा से बात करते हुए उक्त आरोप लगाए हैं। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट करके भी यह जानकारी साझा की।

Another sleepless night with reports of rampant post poll violence continually pouring. Ashamed of such anarchy and lawlessness @MamataOfficial.

In morning another shocker from print media! All is well ? How can this be ?

And today Central Minister attacked. pic.twitter.com/xgKlEltWeJ

— Governor West Bengal Jagdeep Dhankhar (@jdhankhar1) May 6, 2021

चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा पर बात करते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि बंगाल में 02 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम के आने के बाद से ही हत्या, लूटपाट और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध जारी है। ऐसे में राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को हिंसा की रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके द्वारा कई बार मुख्यमंत्री से बात की गई लेकिन उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई एक्शन नहीं लिया गया।

राज्यपाल धनखड़ से यह प्रश्न किया गया कि हिंसा प्रारंभ होने के समय ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ नहीं ली थी तो क्या उन पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि उन्होंने अधिकारियों को रिपोर्ट सबमिट करने से मना किया होगा?

इस पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य गृह सचिव ने उनसे खुद यह बात कही कि उन्हें ममता बनर्जी द्वारा रिपोर्ट न देने के बारे में निर्देश आया था। इसके अलावा गृह सचिव ने राज्यपाल धनखड़ को यह भी अवगत कराया कि उन्हें डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा राज्य कानून व्यवस्था पर दी गई रिपोर्ट भी राज्यपाल को न देने का निर्देश दिया गया था। राज्यपाल ने बताया कि 03 मई को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद ममता बनर्जी के पास मुख्यमंत्री की सभी शक्तियाँ थीं।

ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण के बाद वक्तव्य देने के प्रश्न पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ही इसके लिए उनसे आग्रह किया था और राज्य में लगातार चल रही हिंसा को देखते हुए उन्होंने इस मुद्दे को शपथ ग्रहण के बाद उठाना उचित समझा।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हिंसा के दौरान राज्य का दौरा किया और हिंसा से पीड़ित लोगों से मिले। भाजपा अध्यक्ष के इस दौरे पर अपनी राय देते हुए बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह एक संवैधानिक प्रमुख हैं और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के विषय में विचार करना उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है जब तक कि Covid-19 के प्रोटोकॉल्स का कोई उल्लंघन न हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बंगाल की स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि सभी पार्टियाँ इस मुद्दे पर आगे आएँ और लोगों में विश्वास उत्पन्न करें।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार हिंसा हो रही है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रमुख रूप से निशाना बनाया जा रहा है। हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ता बंगाल से पलायन कर रहे हैं और असम की ओर जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में न केवल राज्यपाल अपितु गृह मंत्रालय ने भी राज्य में हो रही हिंसा की रिपोर्ट माँगी लेकिन उचित कार्रवाई न होने पर गृह मंत्रालय ने अपनी एक 4 सदस्यीय टीम बंगाल भेजी है जो सीधे गृह मंत्रालय को हिंसा की रिपोर्ट सौंपेगी।

मोदी जी बंगाल को कश्मीर बनने से बचाओ

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद खूनी खेल शुरू हो गया है। राज्य में कई जगहों पर राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं। जगह-जगह तोड़फोड़ और आगजनी हो रही है तो घरों में घुसकर लोगों को मारा-पीटा जा रहा है। लूटपाट की जा रही है तो कई लोगों को मौत के घाट भी उतार दिया गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं के साथ राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर दु:ख जताया है। प्रधानमंत्री ने बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से फोन पर बात करते हुए हालात पर चिंता व्यक्त की है।

यदि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई, बंगाल दूसरा कश्मीर बन सकता है। क्योकि यदि यही हिंसा किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती, समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष सडकों पर आकर कोहराम मचा रहे होते, लेकिन अब चुप्पी साधे रहने से शंका हो रही है। केंद्र सरकार को केवल इस बात की जाँच नहीं करनी होगी कि मरने वाला भाजपा से सम्बंधित है या किसी अन्य पार्टी से, जाँच इस बात कि होनी चाहिए कि इस खुनी साज़िश के पीछे अवैध रूप से रह रहे राजनितिक संरक्षण में पाकिस्तानी, बांग्लादेशी या रोहिंग्या तो नहीं? चुनावी सभा में ममता बनर्जी द्वारा मुस्लिमों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील को गंभीरता से लेना होगा।  

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि नतीजों के बाद उनकी पार्टी के करीब 100 दफ्तरों और कार्यकर्ताओं के घरों को तबाह कर दिया गया और कुछ को आग के हवाले कर दिया गया है। कई बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की खबरें आ रही है। बीजेपी ने अपनी 2 महिला पोल एजेंट के साथ गैंगरेप का भी दावा किया है। ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ ने भी अपने दफ्तरों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगाए हैं।

राजधानी कोलकाता में स्थित एबीवीपी के दफ्तर में टीएमसी के गुंडे घुस गए और उन्होंने वहां जम कर तोड़फोड़ मचाई। साथ ही वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। टीएमसी के गुंडे यही तक नहीं रूके। उन्होंने देवी-देवातओं को भी नहीं छोड़ा। जान-बूझकर मां काली और भगवान हनुमान की प्रतिमाओं के साथ तोड़फोड़ की। प्रतिमाओं को नीचे गिरा कर उन्हें पैरों तले रौंदा भी गया। दफ्तर में मौजूद श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सुभाष चंद्र बोस और रवीन्द्रनाथ टैगोर की तस्वीरों को भी तोड़ डाला। एबीवीपी की महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि जिन्होंने भी ममता बनर्जी के खिलाफ बोला, उनको निशाना बनाया जा रहा है। 

शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा क्षेत्र नंदीग्राम के केन्डमारी गांव में टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं को जमीन पर पटक-पटक कर पीटा, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद लोग राज्य में महिला सुरक्षा पर भी सवाल उठा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि महिलाओं को पीटने वाले ‘टीएमसी के मुस्लिम गुंडे’ हैं। अब तक करीब एक दर्जन लोगों की हत्या की बात कही जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन पर बातचीत की जानकारी राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने खुद दी है। उन्होंने मंगलवार(मई 4, 2021) दोपहर को ट्वीट करते यह जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फोन पर बात कर बंगाल में जारी हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की है। मैंने पीएमओ को हिंसा संबंधी बर्बरता, आगजनी की गंभीर चिंताओं को साझा किया है। यहाँ लूट और हत्याएँ बेरोकटोक जारी हैं। इस पर नियंत्रण बहुत ही जरूरी है।”

इससे पहले राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) पी नीरजनयन और कोलकाता पुलिस (CP) कमिश्नर सोमेन मित्रा से इस मसले पर तत्काल रिपोर्ट तलब किया। डीजीपी और कोलकाता सीपी ने राज्यपाल से मुलाकात कर मंगलवार को कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मगर इसके बावजूद राज्य में हिंसा थम नहीं रही है। राज्यपाल ने मंगलवार को ट्वीट किया, “रिपोर्ट्स भयावह स्थिति को दर्शाती हैं। भयभीत लोग खुद को बचाने के लिए भाग रहे हैं। एसओएस में अपील की बाढ़ आ गई है। हत्या और विनाश का तांडव मचाया जा रहा है। संवैधानिक मूल्यों के प्रति इस तरह के संबंध को नहीं माना जा सकता। सीएम ममता बनर्जी व्यवस्था को सँभाले।”

पश्चिम बंगाल में 2 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किए गए हैं, जिसके बाद से ही राज्य में हिंसा का दौर जारी है। बंगाल के कई जिलों में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, रेप और हत्या होने की शिकायत सामने आई है।

भारतीय जनता पार्टी ने भी आरोप लगाया है कि नंदीग्राम, कोलकाता, आसनसोल समेत कई इलाकों में उनके समर्थकों, कार्यकर्ताओं की दुकानें लूट ली गई हैं, घरों में आग लगाई गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के साथ रेप किया गया है, जबकि कई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है।

कैलाश विजयवर्गीय का दावा है कि नतीजों के बाद से बंगाल में 9 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। इनमें से 6 नाम सामने आ चुके हैं। जगदाल में शोभा रानी मंडल, राणाघाट में उत्तम घोष, बेलेघाट में अभिजीत सरकार, सोनारपुर दक्षिण में हरोम अधिकारी, सीतलकुची में मोमिक मोइत्रा और बोलपुर में गौरब सरकार की हत्या का बीजेपी ने दावा किया है।

इंडिया टुडे ने कहा कि बीजेपी ने ननूर में तृणमूल के गुंडों पर अपनी दो महिला कार्यकर्ताओं के साथ गैंगरेप का आरोप लगाया है। हालाँकि पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर इसे नकार दिया। इंडिया टुडे के एग्जीक्यूटिव एडिटर दीप हालदार ने भी बंगाल बीजेपी के हवाले से ट्वीट कर कहा था कि बीरभूम में भाजपा की दो महिला पोल एजेंट के साथ गैंगरेप हुआ है और कई महिलाओं को प्रताड़ित किया गया है। हालदार बंगाल में वामपंथी शासनकाल में हुए मरीचझापी नरसंहार पर किताब भी लिख चुके हैं।