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LGBTQ प्राइड मार्च के नाम पर अमेरिका में अश्लीलता : बच्चों के सामने महिलाओं ने नंगी होकर किया डांस, किस भी किया

प्राइड परेड में बच्चों के सामने अर्धनग्न हो मस्ती करती नजर आई महिलाएँ (फोटो साभार: वायरल विडियो का स्क्रीनग्रैब)
एलजीबीटीक्यू यानी कि लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और क्वीर (LQBTQ) कम्युनिटी प्राइड मंथ मना रही है। इस दौरान ये लोग दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में ‘प्राइड परेड’ निकालते और पार्टी करते हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्राइड पार्टी के दौरान महिलाएँ अर्द्धनग्न अवस्था में नाचते-गाते दिखाई दीं। बड़ी बात यह रही कि यह सब बच्चों के सामने हो रहा था।

न्यूयॉर्क के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में प्राइड परेड आयोजित की गई थी। इस परेड के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियोज में पुरुष और महिलाएँ मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, कुछ वीडियो में महिलाएँ टॉपलेस दिखाई दे रहीं हैं। इससे उनके ब्रेस्ट खुले तौर पर नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अर्धनग्न महिलाओं के बीच छोटे-छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं।

इसको लेकर नेटिजन्स कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों के सामने ऐसी हरकतें करने से उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। एक पत्रकार ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह न्यूयॉर्क शहर है। यहाँ के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में कई लोग नग्न होकर पार्टी कर रहे हैं। यह सब बच्चों के सामने हो रहा है। व्हाट द फ़*”

एक अन्य व्यक्ति ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन पर निशाना साधते हुए लिखा, “LGBTQ कम्युनिटी के लोग वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में बच्चों के सामने किस और डांस कर रहे हैं। आधिकारी खुले तौर पर ऐसा क्यों होने दे रहे हैं? इसके बाद भी बायडेन कहते हैं कि ये लोग अमेरिका में ‘प्रताड़ित’ हैं।”

 


बंगाल : बच्चे अब देखेंगे समलैंगिक संबंधों पर बनी 8 शॉर्ट फ़िल्में, स्कूलों में किया जाएगा प्रसारण

        पश्चिम बंगाल के विद्यालयों में समलैंगिक संबंधों पर दिखाई जाएँगी फ़िल्में (प्रतीकात्मक चित्र साभार: iStock)
पश्चिम बंगाल के विद्यालयों में बच्चों को अब ‘समावेश (Inclusiveness)’ को लेकर जागरूक करने के लिए समलैंगिक संबंधों पर 8 शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। ये ऐसी फ़िल्में हैं, जिन्हें ‘Prayasam’s Bad’ और ‘ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल’ द्वारा चुना गया है। कोरोना आपदा के बाद अब जब राज्य के शैक्षिक संस्थान धीरे-धीरे खुल रहे हैं, छात्र-छात्राओं को ‘युवा फिल्म निर्देशकों’ द्वारा बनाई गई ये शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। Prayasam के बारे में बता दें कि ये ‘संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)’ से जुड़ी संस्था है।

ये संगठन एक ऐसा माहौल बनाने का दावा करता है, जिसमें युवाओं को खुद को सशक्त महसूस करने को मिले। इन फि ल्मों को इन लोगों ने बनाया है, वो हैं – सलीम शेख, मनीष चौधरी, सप्तर्षि रॉय, और अविजित मार्जित। ये सभी नज़रुल पल्ली के महिषबाथान स्थित दाखिंडारी में रहते हैं। ये इलाका राजधानी कोलकाता में ही स्थित है। ये सभी ‘Prasyam विज़ुअल बेसिक्स एशिया’ की आधारभूत फिल्म स्टूडियो के छात्र हैं, जिसे एडोबी (Adobe) नामक कंपनी का समर्थन प्राप्त है।

इनका कहना है कि इन शॉर्ट फिल्मों को बच्चों को दिखा कर ‘समावेशी शिक्षा’ को बढ़ावा दिए जाने का उद्देश्य है। इन लोगों का कहना है कि LGBTQ युवा खुद को समाज से अलग या अवांछित महसूस न करें, इसके लिए ऐसा करना आवश्यक है। ‘Prayasam’s’ के निदेशक प्रशांत रॉय ने कहा कि स्कूलों के खुलते ही उनमें ये शॉर्ट फ़िल्में बच्चों को दिखाई जाएँगी। इन फिल्मों का टाइटल RESH (जिसकी ऊँची और गहरी आवाज़ की प्रकृति हो) रखा गया है।

इसमें समलैंगिक संबंधों से जुड़ी काल्पनिक कहानियाँ दिखाई जाएँगी। साथ ही उसमें भाईचारा, बच्चों के यौन शोषण के प्रति जागरूकता, स्वीकार्यता, पहचान का संकट, और आया मानवीय सवेदनाओं के पहलुओं को दिखाने का भी दावा किया गया है। इनका कहना है कि ये रोचक आइडियाज हैं, लेकिन इनमें सुधार की भी ज़रूरत है। सलीम शेख की ‘देखा’ नामक शॉर्ट फिल्म में एक पिता और उसके गे बेटे की कहानी है। ‘दक्खिना’ में एक ‘मेल एस्कॉर्ट’ की कहानी है, जिसे एक बुजुर्ग शहर में घुमा रहा होता है।

23 वर्षीय सलीम शेख ने कहा कि उनके कुछ दोस्त ‘मेल एस्कॉर्ट्स’ हैं, जिनका कहना है कि उनके लिए आत्मसम्मान काफी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन फिल्म के जरिए वो उनकी बातें व उनके चॉइसेज को समाज के सामने रखना चाहते हैं। ‘दूरबीन’ नामक शॉर्ट फिल्म में दिखाया गया है कि एक पत्रकार होने लिव-इन पार्टनर को बताता है कि कैसे उसके पिता के निधन के बाद उसे उनके समलैंगिक होने का पता चला। 24 वर्षीय निर्देशक सप्तर्षि रॉय ने कहा कि फिल्म की कहानी सुनते एक्टर्स भाग गए थे, इसीलिए इन्हें समाज को दिखाना बेहद आवश्यक है।

इसी तरह 24 वर्षीय डायरेक्टर मनीष चौधरी ने एक फ़ूड डिलीवरी बॉय और एक व्यक्ति के बीच में विकसित होते समलैंगिक संबंधों पर कहानी बनी है। उन्होंने कहा कि 15 मिनट के भीतर ही उन्होंने ऐसे रिश्तों के समक्ष खड़े होने वाले समाजिक-आर्थिक समस्याओं को एक्सप्लोर किया है। ‘कलान्जलि आर्ट स्पेस’ में होने वाले आठवें ‘बबैड एंड ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल’ में 3 दिसंबर, 2021 को इस फिल्मों को प्रीमियर किया जाएगा। हालाँकि, इन्हें बच्चों को दिखाए जाने को लेकर विरोध भी हो रहा है।

इन फिल्मों को इन लोगों ने बनाया है, वो हैं – सलीम शेख, मनीष चौधरी, सप्तर्षि रॉय, और अविजित मार्जित। ये सभी नज़रुल पल्ली के महिषबाथान स्थित दाखिंडारी में रहते हैं। ये इलाका राजधानी कोलकाता में ही स्थित है। ये सभी ‘Prasyam विज़ुअल बेसिक्स एशिया’ की आधारभूत फिल्म स्टूडियो के छात्र हैं, जिसे एडोबी (Adobe) नामक कंपनी का समर्थन प्राप्त है।

इनका कहना है कि इन शॉर्ट फिल्मों को बच्चों को दिखा कर ‘समावेशी शिक्षा’ को बढ़ावा दिए जाने का उद्देश्य है। इन लोगों का कहना है कि LGBTQ युवा खुद को समाज से अलग या अवांछित महसूस न करें, इसके लिए ऐसा करना आवश्यक है। ‘Prayasam’s’ के निदेशक प्रशांत रॉय ने कहा कि स्कूलों के खुलते ही उनमें ये शॉर्ट फ़िल्में बच्चों को दिखाई जाएँगी। इन फिल्मों का टाइटल RESH (जिसकी ऊँची और गहरी आवाज़ की प्रकृति हो) रखा गया है। 8 short films on same sex relationship ncpcr writes to CBFC

एक्टिव हुआ NCPCR, सेंसर बोर्ड को पत्र लिख माँगा जवाब

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष प्रसून जोशी को 10 नवंबर 2021 को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा, ”NCPCR को शिकायत मिली है, एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘समावेश (Inclusiveness)’ को लेकर जागरूक करने के लिए राज्य (पश्चिम बंगाल) में फिर से स्कूल खुलने के बाद समलैंगिक संबंधों पर 8 शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी।” उन्होंने कहा, ”CBFC कृपया 10 दिनों के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दें कि क्या चयनित फिल्मों ने राज्य में स्क्रीनिंग के लिए प्रमाणन प्राप्त किया है या नहीं। अगर, हाँ तो चयनित फिल्मों को किस श्रेणी का प्रमाणन प्रदान किया गया है।”

मर्द से भी बलात्कार कर रहे तालिबानी, औरतों को ताबूत में डाल भेज रहे विदेश

                                                                                                                                                                                              साभार: डेलीमेल
अफगानिस्तान में तालिबान के कारण हाहाकार मचा है। लेकिन भारत में बैठे उनके स्लीपर सेल उनकी तारीफों के कसीदे पढ़ रहे हैं। हाल में एक समलैंगिक पुरुष को इनकी बर्बरता का सामना करना पड़ा। युवक को उसके समलैंगिक होने के कारण न केवल मारा गया बल्कि उसका रेप भी हुआ। पीड़ित की पहचान नहीं हो सकी है।

मर्दों के बलात्कार पर आर्गेनाइजर में प्रकाशित संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया(स्व) के स्तम्भ Cabbages & Kings एकदम दिमाग में तरोताजा हो रहे हैं, अपने इस स्तम्भ में कई बार उन्होंने लिखा कि बुर्का कोई इस्लामिक प्रथा नहीं, बल्कि कई बार ऐसा भी समय आया कि खूबसूरत लड़कों को भी बुर्के में रहने को विवश होना पड़ा था। जिसका उनके जीवनकाल में किसी ने खंडन तक नहीं किया। 

डेलीमेल की रिपोर्ट बताती है कि वह डर से काबुल में छिपा हुआ था लेकिन दो तालिबानियों ने उससे दोस्त बन कर बाहर निकलने को कहा और आश्वसन दिया कि वो उसे मुल्क से बाहर भेजेंगे। हालाँकि, जब युवक उनसे मिला तो उन्होंने उससे मारपीट कर उसका रेप किया और बाद में उस व्यक्ति के पिता का नंबर लेकर उन्हें बताया कि उनका बेटा गे है।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित के साथ हुई इस घटना के बारे में अफगान राइट्स एक्टिविस्ट अर्तमिस अकबरी (Artemis Akbary) ने सूचना दी है। वह अभी तुर्की में रहते हैं और व्यक्ति से संपर्क में हैं। अफगान में तालिबान की बर्बरता का सबसे हालिया उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ये हमला सिर्फ एक उदाहरण है कि आखिर तालिबानी शासन में समलैंगिक लोगों को जीवन कैसा होगा।

अकबरी कहते हैं, “वो (तालिबान) बस दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम बदल गए और हमें स्त्री अधिकार और मानवाधिकारों से कोई आपत्ति नहीं है। वो झूठ बोल रहे हैं। तालिबान नहीं बदला है क्योंकि उनकी विचारधारा नहीं बदली है। मेरे दोस्त अफगानिस्तान में डरे हुए हैं। उन्हें नहीं पता कि उनके साथ भविष्य में क्या होगा, तो वो बस खुद को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।”

कुछ दिन पहले अफगान की एक पूर्व जज नजला, जो अब यूएस में रहती हैं, उन्होंने बताया था कि तालिबान ने कैसे एक महिला को आग के हवाले कर दिया था क्योंकि उन्हें उसके हाथ का बना खाना पसंद नहीं आ रहा था। इसके अलावा उन्होंने बताया था कि अफगान में महिलाओं को ताबूत में बंद करके सेक्स स्लेव बनाकर विदेश भेजा जा रहा है।

कई लोग ऐसे हैं जिन्हें नाइट लेटर्स देकर तालिबान की अदालत में पेश होने को कहा गया है। उन्हें आदेश दिया गया है कि या तो वो रिपोर्ट करें वरना मरने के लिए तैयार रहें। इनमें से एक 34 वर्षीय नाज भी हैं जो 6 बच्चों के पिता है उन्होंने कभी यूके मिलिट्री को हेलमंड में सड़के बनाने में मदद की थी। अब उन्हें तालिबान ने लेटर दिया है। नाज कहते हैं, “पत्र आधिकारिक है और तालिबान की मोहर भी लगी हुई है। संदेश साफ है कि वो मुझको मारना चाहते हैं।”

नाज के मुताबिक, “अगर मैंने कोर्ट अटेंड किया तो मुझे जीवन भर की सजा दी जाएगी। अगर नहीं तो मुझे मार दिया जाएगा, इसीलिए मैं छिपा-छिपा घूम रहा हूँ। ताकि मैं बचने का रास्ता निकाल सकूँ। लेकिन मुझको मदद चाहिए।” इसी तरह एक व्यक्ति जो ब्रिटिश मिलिट्री में ट्रांस्लेटर था, उसको भी जान से मारने की धमकी दी गई है। अगला लेटर एक दुभाषिए के भाई को चेतावनी देने के लिए दिया गया। जिसमें लिखा था कि दुभाषिए को आश्रय देने के लिए उसे मौत की सजा दी जाती है।