Showing posts with label Mohammed bin Salman. Show all posts
Showing posts with label Mohammed bin Salman. Show all posts

सऊदी अरब में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर बड़ी संख्या में NRIs को किया भारत को प्रत्यर्पित

                                                                                        फाइल चित्र 
सऊदी अरब ने बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों (NRIs) को वापस भारत को प्रत्यर्पित किया है। ये सभी खाड़ी मुल्क में रहते हुए CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे। इन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर वहाँ भी सड़क पर उतर कर मोदी सरकार के इस कानून के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया था। अब सऊदी अरब ने इन सभी को भारत को सौंपने का निर्णय लिया है।

सऊदी अरब की दूसरी वाणिज्यिक राजधानी मानी जाने वाली जेद्दाह में प्लाकार्ड्स लेकर मोदी सरकार और CAA के खिलाफ इन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इन सभी ने दिल्ली में इस कानून को लेकर उपद्रव कर रहे लोगों से सहमति जताते हुए उन्हें अपना समर्थन दिया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद से ही इन NRIs के सामने मुश्किलें खड़ी होती गईं। इनमें से कइयों को गिरफ्तार कर के उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।

उन पर मुल्क के नियम-कायदों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए। साथ ही उन पर अवैध तरीके से भीड़ जुटाने का आरोप लगाया गया। इनमें से कइयों को वापस भारत प्रत्यर्पित किया जा चुका है। खाड़ी मुल्कों में विरोध प्रदर्शनों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। घेराव या भीड़ जुटा कर नारेबाजी को भी बर्दाश्त नहीं किया जाता। कुछ युवा प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वो इन नियम-कायदों से अनजान थे।

कइयों पर तो सिर्फ इसीलिए कार्रवाई की गई, क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की थी। अक्टूबर 2019 में सऊदी अरब और भारत ने एक नए रणनीतिक पार्टनरशिप के लिए कदम बढ़ाया था। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान तब नई दिल्ली आए थे और यहीं सुरक्षा के मसलों पर साझेदारी की नई रणनीति बनी। उधर सऊदी अरब ने पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है।

हाल ही में  सऊदी अरब सरकार ने रियाद में मौजूद दूतावास और जेद्दाह स्थित वाणिज्य दूतावास में 27 अक्टूबर को ‘कश्मीर बैक डे’ आयोजन की बात खारिज कर दी। इससे पाकिस्तान को गहरा झटका लगा। सऊदी अरब (जिसे पाकिस्तान अपना नज़दीकी सहयोगी मुल्क मानता है) ने FATF पर पाकिस्तान के विरोध में मत दिया, जिसके चलते पाकिस्तान ग्रे सूची में बना हुआ है। इसके बाद पाकिस्तानी सऊदी अरब को ‘गद्दार’ तक बताने लगे। 

सऊदी अरब देने जा रहा है पाकिस्तान को 7,09,15,00,00,000 रु. का तोहफा

सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान (फाइल फोटो)
आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ रहे पाकिस्‍तान को जल्‍द खुशखबरी मिलने वाली है. खुशखबरी भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी है, क्‍यों‍कि इससे उसकी खस्‍ता आर्थिक स्थिति पटरी पर आ सकती है. दरअसल, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान पाकिस्‍तान के पहले दौरे पर जाने वाले हैं और इस दौरान वे पा‍किस्‍तान केे साथ 10 बिलियन डॉलर से ज्‍यादा यानि करीब 7,09,15,00,00,000 रुपये के तीन बड़े एमओयू पर साइन कर सकते हैं. 
पाकिस्‍तान का भरने वाला है खजाना, सऊदी अरब देने जा रहा है 7,09,15,00,00,000 रु. का तोहफापाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के न्‍योते पर प्रिंस सलमान संभवत: 16 फरवरी को पाकिस्‍तान आ सकते हैं, जोकि यहां उनका पहला दौरा होगा. इस दौरे में वह तीन बड़े दोनों मुल्‍कों की सरकारों के बीच तीन बड़े समझौतों पर हस्‍ताक्षर करेंगे. यह जानकारी बोर्ड ऑफ इंवेस्‍टमेंट (BoI) के चेयरमैन हारुन शरीफ ने दी. यह समझौते ऑयल रिफाइनिंग, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) और मिनरल डेवलमपेंट के क्षेत्र में होंगे. 
इन समझौतों के अलावा पाकिस्‍तान और सऊदी अरब के बीच कई व्‍यापारिक समझौते भी हो सकते हैं, क्‍योंकि सऊदी के 40 टॉप बिजनेसमैन एक समूह भी प्रिंस के साथ पाकिस्‍तान आ रहा है. यह प्रतिनिधिमंडल स्‍थानीय व्‍यापारियों से मुलाकात भी करेगा. उम्मीद है कि यात्रा के दौरान कुछ अन्य निजी स्तर के समझौते भी हो सकते हैं. 
तेल रिफाइनरी के बारे में बात करते हुए शरीफ ने बताया कि 'सऊदी अरब 8 बिलियन डॉलर की लागत से ग्वादर में तेल रिफाइनरी भी लगाएगा. विदेशी निवेश के इतर वह स्‍थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान करेगा. यदि वे (सउदी) रिफाइनरी के साथ एक पेट्रोकेमिकल परिसर भी स्थापित करते हैं, तो इसके लिए अरबों डॉलर के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी'.
BoI प्रमुख ने कहा कि सऊदी सरकार ग्वादर में एक तेल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए उत्सुक थी और उसने इस संबंध में व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का आग्रह किया था.
सऊदी अरब के ग्‍वादर में निवेश से चीन की प्रतिक्रिया को लेकर शरीफ ने कहा कि चीन को वहां तेल रिफाइनरी लगाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है. उन्‍होंने बताया कि “वास्तव में जिस क्षेत्र में सउदी रिफाइनरी स्थापित करेगा, वह एक अध्ययन के बाद तय की जाएगी. हालांकि यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से बहुत दूर होगा.