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उत्तर प्रदेश : ब्रह्मा-विष्णु-इंद्र को बलात्कारी बता AMU में हो रही थी रेप की पढ़ाई

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University- AMU) एक फिर गलत कारणों से चर्चा में है। यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने अपने लेक्चर में हिंदू देवी-देवताओं (Hindu God) को बलात्कारी साबित करने की कोशिश की। बवाल होने के बाद यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया है। वहीं, हिंदू संगठनों ने प्रोफेसर पर रासुका लगाने की माँग की है।

निलंबन पत्र को ट्विटर पर शेयर करते हुए AMU ने कहा, “एएमयू ने डॉ जितेंद्र कुमार को किया निलंबित। प्रथम दृष्टया मिसकंडक्ट और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ जितेंद्र को जाँच पूरी होने तक सेवा से निलंबित कर दिया गया है। डॉ कुमार को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि बलात्कार के संदर्भ में पौराणिक घटनाओं की जिक्र प्रोफेसर ने अपने स्लाइड के कंटेंट में किया, जिसकी यूनिवर्सिटी प्रशासन और मेडिसिन विभाग निंदा करता है। छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और जनता की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इस मामले में मेडिसिन विभाग के डीन राकेश भार्गव के निर्देशन में दो सदस्यीय जाँच समिति बनाई गई है। मामला बढ़ने और चारों तरफ आलोचना होने के बाद प्रोफेसर जितेंद्र कुमार ने बिना शर्त माफी माँगी है। हालाँकि, माफी माँगने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हो रही है। यूपी पुलिस के क्षेत्राधिकारी ने कहा कि AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ जितेंद्र से संबंधित विवादित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन की जानकारी सामने आई है।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने हिंदुओं के लिए न्याय की माँग करते हुए कहा कि प्रो जितेंद्र का अस्थायी निलम्बन कर AMU अपने कुकर्मों पर पर्दा डाल रहा है। उन्होंने VC और आरोपित के निलंबन के साथ-साथ रासुका लगाकर अविलंब गिरफ्तारी की माँग की।

बंसल ने कहा कि हिंदू देवी देवताओं को बलात्कारी बताने वाले AMU के प्रोफेसर उसके उसके सभी षड्यंत्रकारियों पर रासुका लगा कर कठोरतम कार्यवाही जरूरी है। उन्होंने कहा, “जिहादी व कम्युनिस्टों के इन जहरीले फनों को अविलंब कुचलना जरूरी है।”

डॉ. जितेंद्र कुमार AMU से संबद्ध जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वह मंगलवार (5 अप्रैल 2022) को सेक्सुअल ऑफेंस पर लेक्चर के दौरान हिंदू पौराणिक घटनाओं का संदर्भ लेते हुए एक स्लाइड शो शेयर किया। इसमें उन्होंने ब्रह्मा, इंद्र और भगवान विष्णु के चरित्र पर सवाल उठाया।

लेक्चर के दौरान प्रोफेसर जितेंद्र ने कहा कि ब्रह्मा ने अपनी पुत्री के साथ रेप किया। इंद्र ने गौतम ऋषि को धोखा देते हुए उनकी पत्नी के साथ संबंध बनाए। दैत्यराज जलंधर की पत्नी के साथ विष्णु ने संबंध जोड़ा। लेक्चर के दौरान इन संदर्भों को देखकर विद्यार्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। टिप्पणी के बाद बुधवार (6 अप्रैल) को भी यूनिवर्सिटी में माहौल गरमाया हुआ है।

इससे पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में भी हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा पर हंगामा मचा था। BHU में एक पेटिंग प्रदर्शनी के दौरान भगवान श्रीराम की पेंटिंग के ऊपर प्रोफेसर ने अपनी और माता सीता की पेटिंग पर अपनी पत्नी की तस्वीर लगा दिया था। इसको लेकर भी भारी बवाल हुआ था।

केरल : ‘इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाथ काटा, चर्च के डर से अपनों ने छोड़ा’: परेशान हो पत्नी ने भी कर ली आत्महत्या

                                                           प्रोफेसर टीजे जोसेफ
केरल के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाने वाले प्रोफेसर पर साल 2010 में ईशनिंदा का आरोप मढ़ कर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस हमले में उनके हाथ काटे गए थे। अब उन्हीं टीजे जोसेफ नामक प्रोफेसर का संस्मरण बाजार में अंग्रेजी भाषा में अनुवाद होकर आया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे कट्टरपंथियों ने उनके साथ जो किया सो किया लेकिन चर्च, कॉलेज, दोस्त, पड़ोसियों ने भी उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

रविवार(सितम्बर 19) को संडे टाइम्स को साक्षात्कार देते हुए जोसेफ ने कहा कि आरोपितों को दंड देने से न्याय नहीं मिलेगा। असल समस्या कट्टरपंथ की है। याद दिला दें इससे पहले टीजे जोसेफ पिछले वर्ष चर्चा में आए थे जब मलयालम में उनका संस्मरण रिलीज हुआ था। अब वही संस्मरण- नंदकुमार द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किए जाने के बाद शीर्षक ‘अ थाऊजेंड कट्स: एन इनोसेंट क्वाश्चन एंड डेडली आंसर’ के साथ बाजार में आया है।

इसमें उन्होंने बताया, “थोड़ूपुझा न्यूमैन कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंद का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया और कोठामंगलम सूबा के 120 चर्चों में मेरे खिलाफ पत्र पढ़े गए कि आखिर मेरे विरुद्ध ऐसा एक्शन क्यों लिया गया है। कई ईसाई दोस्तों और परिवारों ने हमारे घर आना छोड़ दिया। उन्हें डर था कि चर्च उनसे नाराज हो जाएगा। मेरे ऊपर हमला करने वालों की आँख पर कट्टरपंथ की पट्टी बंधी थी जिसने मुझे शारीरिक रूप से दुख दिया। लेकिन जो मेरे लोगों ने मेरे साथ किया वो भी और भी ज्यादा भयावह है क्योंकि उससे मेरे परिवार पर प्रभाव पड़ा।”

टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से हमला करके उनका दाहिना हाथ काट दिया था। जोसेफ पर आरोप था कि उन्होंने बीकॉम का पेपर तैयार करते हुए पैगंबर मोहम्मद का नाम लिया, जबकि जोसेफ कहते हैं कि वो पीटी कुंजू मोहम्मद नामक एक लेखक के बारे में लिख रहे थे पर कुछ लोगों ने जानबूझकर मोहम्मद नाम को गलत लिया। इसके बाद उनपर हमला हुआ, उन्हें नौकरी से निकाला गया और उनकी पत्नी ने भी हालातों से तंग आकर सुसाइड कर ली।

जोसेफ के अनुसार, उनकी पत्नी गहरे सदमें में थी। 19 मार्च 2014 को वह मनोवैज्ञानिक के पास से लौटीं और सुसाइड कर ली। ये क्षण जोसेफ के लिए और मुश्किल भरा था। उन्हें दुख इस बात का था कि उनकी पत्नी उन्हें दोबारा जॉब करते नहीं देख पाईं जो कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी। जोसेफ अपनी किताब में आपबीती लिखते हुए समझाते हैं कि कैसे कट्टरपंथ के कारण हर कोई खतरे में हैं।