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कांग्रेसी सरकारों में ‘हिन्दू’ शब्द लिखना हुआ अपराध, दुकानदारों के खिलाफ FIR दर्ज


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं में हिन्दू धर्म के प्रति नफरत भरा हुआ है। इसी का नतीजा है कि देश में कांग्रेस की नेतृत्व वाली सरकारों में हिन्दू विरोधी हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। महाराष्ट्र और पंजाब के बाद अब झारखंड में ‘हिन्दू’ बोलना और लिखना अपराध बन गया है। जमशेदपुर में पुलिस ने कुछ ऐसे फल दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं, जिन्होंने ‘हिन्दू फल दुकान’ के बैनर लगाए थे। पुलिस का कहना है कि दुकानदारों के खिलाफ ‘हिन्दू’ शब्द लिखने के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, क्योंकि यह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की एक कोशिश है।
सरकार को अगर फलों की दुकानों पर हिन्दू दुकान के बैनरों से आपत्ति थी, तो चेतावनी देकर हटवा जा सकते थे, कि इन तरह के बैनर से ऐसे माहौल में शांति भंग होने से सरकार और पुलिस की परेशानी बढ़ जाएगी, लेकिन FIR दर्ज करना आग में घी का काम न हो जाए।  
जमशेदपुर में कई दुकानों पर बैनर लगाए गए, जिसमें भगवान राम और शिव की तस्वीरें हैं। उसके नीचे दुकानदारों के पते दर्ज हैं। ऐसे बैनरों की तादाद हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी है। खासकर उस अफवाह के बाद, जिसमें कहा गया था कि एक विशेष समुदाय के लोग कोरोना महामारी फैलाने के लिए फल और सब्जियों पर थूक लगा रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में बिक्री घट गई थी क्योंकि एक विशेष समुदाय से जुड़ी खबरें आने के बाद लोगों ने सामान खरीदना कम कर दिया था। ऐसी स्थिति में यही उपाय बचा था कि लोगों में यह संदेश दिया जाए कि दुकानदार राम, हनुमान या शिव भक्त हैं। इसे देखते हुए ऐसे बैनर लगाए गए।
एक टि्वटर यूजर ने इन बैनरों के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस शीघ्र ऐसे बैनर लगे दुकानों पर पहुंची। पुलिस ने बिना किसी नोटिस के दुकानदारों को बैनर हटाने का निर्देश दिया। पुलिस की कार्रवाई देख कई दुकानदारों ने बैनर हटा लिए। जिन दुकानों पर ऐसे बैनर मिले उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए। छह दुकानदारों सहित आठ लोगों के खिलाफ शांतिभंग करने का मामला भी दर्ज किया गया। एसएसपी अनूप बिरथरे ने कहा वर्तमान माहौल में ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। बैनर हटा दिए गए हैं। किसी भी संप्रदाय की भावना को ठेस पहुंचाने का काम होगा तो अवश्य कार्रवाई होगी।


दुकानदारों और ठेले वालों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध भी शुरू हो चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता रघुवर दास ने इस कार्रवाई को गलत बताया। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को तुष्टिकरण की नीति बताते हुए हेमंत सोरेन सरकार की आलोचना की। रघुवर दास ने कहा है कि सरकार छोटे दुकानदारों को निशाना न बनाए। दास ने चेतावनी दी है कि पुलिस अगर ऐसे दुकानदारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लेती है तो वे विरोध-प्रदर्शन करेंगे। 
झारखंड के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता सीपी सिंह ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि किस कानून के तहत पोस्टर हटाया गया? झारखंड में हिन्दू धर्म का पालन अपराध है? झारखंड सरकार ‘हलाल सर्टीफाइड मार्क’ कब हटा रही वस्तुओं व दुकानों से? एक सम्प्रदाय विशेष के तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। मौलिक अधिकारों का हनन है।
कांग्रेस की सरकारों में हिन्दुओें के खिलाफ हो रही कार्रवाई और हिंसा के पीछे कांग्रेस और उसके नेताओं की नफरत भरी मानसिकता जिम्मेदार है, जो तुष्टिकरण के कारण हिन्दुओं और उसके देवी देताओं का अपमान करते आ रहे हैं। कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टी के नेता किस हद तक हिंदू धर्म के विरोधी हैं, एक नजर डालते हैं-
BJP on Twitter: "गृह मंत्रालय के पूर्व अनु ...
हिन्दू धर्म को दुनियाभर में बदनाम ...
JAIDEEP MAZUMDAR on Twitter: "Never forget, never forgive ...
"हिन्दू आतंकवाद"और "भगवा आतंकवाद"
पाकिस्तान प्रशिक्षित इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण और बचाव करने की "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" को फलीफूत करने बेकसूर और निर्दोष साधु-संत और साध्वियों को झूठे आरोपों में जेल में डाल अमानवीय यातनाएं दी गयीं थीं। इनका सात्विकता को नष्ट किया गया था। विपरीत इसके जनता की आँखों में धूल झोंकने के लिए जिन आतंकवादियों को पकड़ा जाता था, उनकी बिरयानी और कोरमा से सेवा की जाती थी। "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" पर प्रकाशित पुस्तकों का फिल्म निर्माता महेश भट्ट और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जैसे नेता विमोचन कर सुर्खियां बटोर रहे थे।      
पंजाब में साधु पर हमला
Two people attacked Swami Pushpendra ji in Punjab Tiday ..Swami ji is attacked with a deadly weapon. Why Sadhus are on target ? What are the intentions and who is behind such criminals ? Kindly look and work for the safety of Sadhus. @HMOIndia @AmitShah @capt_amarinder pic.twitter.com/9QCY2cq0Ng
— Dr.Monika Langeh (@drmonika_langeh) April 24, 2020
पंजाब के होशियारपुर में स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप के ऊपर जानलेवा हमला हुआ। मास्क पहने कुछ हमलावरों ने शुक्रवार रात लगभग 10 बजे स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर दीवार फांद कर आश्रम में घुसे और स्वामी जी पर हमला कर दिया। स्वामी पुष्पेंद्र स्वरुप को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने उनके हाथ-पांव बांध दिए और हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया। हमलावर आश्रम से 50 हजार रुपए और कुछ अन्य समान लेकर फरार हो गए।
महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की हत्या
महाराष्ट्र में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बदलते ही हिन्दू विरोधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। 16 अप्रैल को पालघर में जिस तरह पुलिस की मौजूदगी में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग की गई है, उससे राज्य के हिंदुओं में दहशत का माहौल है। पालघर में पुलिस के सामने जूना अखाड़ा के दो साधुओं कल्पवृक्ष गिरि महाराज और सुशील गिरी महाराज को पीट-पीटकर मार दिया गया। जूना अखाड़े के दोनों साधु अपने ड्राइवर के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी गुरुभाई के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। हैरानी की बात यह है कि महाराष्ट्र पुलिस मूकदर्शक बन सारा तमाशा देखती रही। साधु पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें भीड़ के हवाले कर दिया।

कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है- राहुल गांधी
जम्मू कश्मीर में छपने वाले उर्दू दैनिक अखबार “इंकलाब” ने 12 जुलाई, 2018 को बहुत बड़ा खुलासा किया। फ्रंट पेज पर खबर छापी कि 11 जुलाई को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। इसके साथ यह खबर भी छपी है कि राहुल ने कहा कि उनका और उनकी मां का कमिटमेंट है कि मुसलमानों को उनका हक मिलना चाहिए और इससे वो कोई समझौता नहीं कर सकते।

गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।

शरिया अदालत लागू करने का राहुल ने किया वादा
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांगें भी मान ली। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने ये वादा किया कि अगर वे 2019 में देश के प्रधानमंत्री बने तो देश के हर जिले में शरिया अदालत बनाने की मांग पूरी कर देंगे।

राहुल के आदेश से हिंदुओं को ‘गाली’ दे रहे कांग्रेसी!
पिछले साल 11 जुलाई को कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदुओं को कट्टरपंथी बताते हुए ‘हिंदू पाकिस्तान’ की बात कही। इसके बाद 13 जुलाई को दिग्विजय सिंह ने हिंदुओं को कट्टरपंथी कहा और भारत के पाकिस्तान बन जाने की बात कही। खबर है कि यह सब राहुल गाधी के आदेश से किया जा रहा है। गौरतलब है कि 11 जुलाई को ही राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी और मुलाकात से पहले और बाद वह यही संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिमों की असल हितैषी कांग्रेस है।

कांग्रेस के डीएनए में है हिंदू विरोध
हिंदू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। 17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’ अमेरिकी राजदूत के सामने दिया गया उनका ये बयान कांग्रेस की बुनियादी सोच को ही दर्शाता है। ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।

मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की हिंदू धर्म, हिंदू देवी-देवताओं में कोई आस्था नहीं है। हिंदू धर्म में आस्था और जनेऊधारी हिंदू बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी के खासमखास वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। दिल्ली में राष्ट्र विरोधी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। मस्जिद और मुसलमानों के प्रेम में डूबे अय्यर ने कहा कि राजा दशरथ एक बहुत बड़े राजा थे, उनके महल में 10 हजार कमरे थे, लेकिन भगवान राम किस कमरे में पैदा हुए ये बताना बड़ा ही मुश्किल है। इसलिए ये दावा करना कि राम वहीं पैदा हुए थे, यह ठीक नहीं है।

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में हिन्दू शब्द से नेहरू को ऐतराज था 
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू शब्द रखने पर जवाहर लाल नेहरू को घोर आपत्ति थी, उन्होंने इस शब्द को हटाने के लिए कहा था। पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने यूनिवर्सिटी से हिंदू शब्द हटाने के लिये दबाव डाला था। हालांकि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुस्लिम शब्द रखने पर कभी आपत्ति नहीं जताई।
वंदे मातरम को राष्ट्र गीत पर नेहरू को थी आपत्ति 
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने पर जवाहर लाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। उन्हीं की आपत्ति के बाद मुस्लिमों का मनोबल बढ़ा, जिससे आज तक मुस्लिम वंदे मातरम गाने का विरोध करते हैं।
इन्दिरा गाँधी ने साधुओं के खून से पार्लियामेंट स्ट्रीट लाल कर दी थी 
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में हजारों नागा साधु इकट्ठा होकर ये मांग कर रहे थे कि – गाय की हत्या बंद होनी चाहिए, इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर गौ हत्या बंद करने के मूड में नहीं थी। फिर क्या था, दिल्ली में ही इंदिरा गांधी ने जालियावाला कांड दोहराया और जनरल डायर की तरह हजारों नागा साधुओं के ऊपर गोलियां चलवा दीं। इस गोलीबारी में 6 साधु की मौत हो गई, यही नहीं उस समय गौभक्त माने जाने वाले गुलजारी लाल नंदा को इंदिरा ने गृहमंत्री पद से हटा दिया। इस घटना के बाद इंदिरा गांधी कई राज्यों में चुनाव हार गई थीं।
मोदी को हराने के लिए हिन्दू कार्ड 
राहुल गांधी सिर्फ मोदी को हराने के लिए हिन्दू बने हैं… वर्ना पूरे नेहरू परिवार का कभी भी हिन्दू धर्म से नाता नहीं रहा है। यहां तक कि हिन्दू पर्व- त्योहारों में बधाई देना भी अपमान माना जाता है। उदाहरण के लिए इस साल पहली बार कांग्रेस दफ्तर में होली मनाई गई, इससे पहले अघोषित बैन था। राहुल गांधी ने पहली बार लोगों को 2017 में दिवाली की शुभकामनाएं दी।
हज पर सब्सिडी और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स 
कांग्रेस ने ही पहली बार मुस्लिमों को हज में सब्सिडी देने और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाने का पाप किया। दुनिया के किसी भी देश में हज में सब्सिडी नहीं दी जाती है, सिर्फ कांग्रेस सरकारों ने भारत में मुसलमानों के वोट के लिए ये खैरात बांटना शुरू किया। लेकिन मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

राजस्थान से लेकर झारखण्ड क्यों हुए भाजपा मुक्त ?

पत्थलगड़ी, खूँटी
पत्थलगड़ी वाले क्षेत्रों में CM रघुबर दास के ख़िलाफ़ गुस्से
को साधने के लिए भाजपा ने अर्जुन मुंडा को लगाया था
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कई बार अपने इसी ब्लॉग पर भाजपा के स्थानीय स्तर के नेताओं की कार्यशैली के विषय में लिखता रहा हूँ, जिसे भाजपा समर्थक भाजपा विरोधी मान दरकिनार करते रहे, परन्तु मन्थन करने का साहस नहीं किया। स्थानीय नेतृत्व अपने कार्य पर कम मोदी-अमित-योगी के कन्धों पर सवार है। 
फिर जिस पार्टी की सदस्यता करोड़ों में हो, वही पार्टी राज्यों से अपनी सरकारें गँवा दे, इस मुद्दे पर भी शीर्ष नेतृत्व को चिंतन करना होगा। "हर हर मोदी, घर घर मोदी" लोकसभा चुनावों में अच्छे लगते हैं, स्थानीय चुनावों में नहीं। क्योकि लोकसभा चुनावों में बोलता है मोदी का काम। 
गुटबाज़ी इतनी जबरदस्ती है कि भाजपा उम्मीदवार बिक जाते हैं और हारने उपरांत अपने व्हाट्सअप पर मोदी के विरुद्ध और विरोधी पार्टी को वोट देने का प्रचार किया, क्या दिल्ली प्रदेश और ज़िले ने क्या कार्यवाही की? 
हरियाणा में तो दुष्यंत चौटाला ने भाजपा की लाज रख ली, लेकिन पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब झारखण्ड भी भाजपा के हाथ से गया। ऐसा आभास होता है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व वास्तविकता यानि धरातल पर स्थानीय नेताओं के कार्यकलापों पर लेशमात्र भी ध्यान नहीं दे रहा है। अगर भाजपा शीर्ष नेतृत्व 2015 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से ऑंखें नहीं खोली। मनोनीत मुख्यमंत्री किरण बेदी के विरुद्ध जनता में उपजे रोष को शीर्ष नेतृत्व समझ नहीं पाया। 
स्थानीय मुद्दों पर ध्यान नहीं 
भाजपा शीर्ष नेतृत्व स्थानीय चुनावों को भी लोकसभा के समान्तर मान मैदान में उतरता है। यदि किसी कारणवश आज लोकसभा चुनाव होते हैं, भाजपा 300+ ही रहेगी, क्योकि लोकसभा में जनता नरेन्द्र मोदी के नाम और काम पर वोट देती है, जबकि विधानसभा और नगर निगम चुनाव स्थानीय मुद्दों पर होते हैं, केन्द्रीय उपलब्धियों पर नहीं। अनुच्छेद 370, आतंकवादियों पर कठोर प्रहार, अयोध्या में राममन्दिर और अब नागरिकता कानून आदि और केन्द्र स्तर पर जो देशहित में फैसले होंगे, उनका लाभ लोकसभा में मिलेगा, स्थानीय चुनावों में नहीं। स्थानीय नेताओं द्वारा व्हाट्सअप पर डाली जाने वाली फोटो से शीर्ष नेतृत्व को भ्रमित किया जाता है। एक बार निर्वाचित हो गया, तिजोरी भरो, और अगला चुनाव हार गए तो क्या हुआ, पेंशन तो मिलती ही रहेगी, क्यों और किसके लिए करे काम? 
विचारणीय बात यह है कि जब भी चुनाव आते हैं, महंगाई मुंह फाडे खड़ी हो जाती है, जमाखोर प्याज, दालें जमा कर लेते हैं, केन्द्र सरकार मतदान के बाद ही हरकत में आती है, क्यों? जब प्याज 150 रूपए मिलेगी, क्यों कोई केंद्र शासित पार्टी को वोट देगा? इतनी सर्दी के मौसम में 10/15 रूपए बिकने वाला आलू, साग 10 रूपए बिकने वाला, जब 30 और 40 रूपए बिकेगा कौन भाजपा को वोट देगा? आज बाजार में कोई भी सब्ज़ी 40 रूपए किलो से कम नहीं। दालों के भाव न ही पूछो तो अच्छा है। यहाँ स्थानीय चुनावों में आती है केंद्र की भूमिका। 
आज़ादी के समय जनता को सब्जबाग दिखाए जाते थे कि आज़ाद भारत में दूध की नदियां बहेंगी, 1 पैसे सेर बिकने वाला दूध आज 50 रूपए लीटर हो गया है, यह नहीं भूलना चाहिए कि सेर लीटर से अधिक होता है। इन जन समस्याओं पर राज्य और केंद्र सरकारें आंखें मींचे बैठी है। खाद्य पदार्थों से शुद्धता नाम की चीज तो कहीं लुप्त हो चुकी है, पता नहीं खाद्य मंत्रालय क्या कर रहा है?   
 BJP छीन लेगी आदिवासियों की ज़मीनें: पत्थलगड़ी में ‘डर’
झारखण्ड को जानने-समझने वाले लोगों ने पत्थलगड़ी का नाम ज़रूर सुना होगा। आदिवासियों के इस मूवमेंट को कुछ मिशनरियों व कट्टरवादियों का समर्थन मिला, जिससे इसे सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई का एक प्रतीक बना दिया गया। लेकिन मोदी के कंधे पर सवार स्थानीय नेता इस जहर को निकालने एवं हो रहे दुष्प्रचार का खंडन कर पाए। जबकि आदिवासियों में भाजपा से कहीं अधिक काम संघ का है। उसके बावजूद इस दुष्प्रचार को प्रभावहीन करने में स्थानीय नेतृत्व पूर्णरूप से असफल रहा। अपने काम तो सुधारों, मोदी के पास क्या जादू की झड़ी है? 
दिल्ली में बैठे कुछ नेताओं को तो बहुत से बहुत 20 सीटों की आशा थी। क्योकि स्थानीय स्तर पर हो रही 
हालाँकि, आज स्थिति सामान्य है लेकिन फिर भी खूँटी और गुमला जैसे जिलों में चुनाव के दौरान स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण रही। एक समय यह आंदोलन लोहरदगा, राँची और सिमडेगा तक फैल गया था। नक्सलियों के उभार के बाद ये हिंसक हो गया था और मिशनरियों के साथ के कारण ग़ैर-क़ानूनी रूप से इसके तहत ‘स्वतंत्र सरकार’ स्थापित करने का प्रयास किया गया था – अर्थात, सामानांतर सरकार।
नक्सल समर्थित इस मूवमेंट वाले इलाक़ों में मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ ख़ूब दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। लोगों के बीच अफवाह फैलाई गई कि भाजपा आदिवासी विरोधी है, इसीलिए उसने 2014 में जीतने के बाद एक गैर-आदिवासी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। क्या नक्सलियों की ये साज़िश कामयाब रही? इसके लिए खूँटी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 6 विधानसभा क्षेत्रों के ट्रेंड देखिए क्योंकि पत्थलगड़ी मूवमेंट का एक तरह से यही गढ़ रहा है:
खरसावाँ: (2014: झामुमो) अब- झामुमो
तमाड़: (2014:आजसू) अब- झामुमो
तोरपा: (2014: झामुमो) अब- भाजपा
खूँटी: (2014: भाजपा) अब- भाजपा
कोलेबिरा: (2018: कॉन्ग्रेस) अब- कॉन्ग्रेस
सिमडेगा: (2014: भाजपा) अब- कॉन्ग्रेस

इस चुनाव से पहले खूँटी की 2 सीटें भाजपा व 2 सीटें कॉन्ग्रेस के पास थीं। अब 4 सीटें कॉन्ग्रेस व झामुमो के पास हैं। इससे पहले कि आपके मन में सवाल उठे, बता दें कि आदिवासियों द्वारा शिलालेख पर अपने पूवजों व बलिदानियों के नाम लिखने की परंपरा है, जो पत्थलगड़ी कहलाई। आदिवासियों के बीच डर बैठाया गया है कि सरकार उनकी ज़मीन छीन लेगी, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। खूँटी में विपक्षियों ने रघुवर दास पर उनकी रैली में चप्पल-जूते भी फेंके थे।
पत्थलगड़ी मूवमेंट को देखते हुए ही हिंसा रोकने हेतु चुनाव के दौरान इन क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। चुनाव के दौरान गाँव-गाँव तक में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखी गई थी। हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों के ख़िलाफ़ सैंकड़ों मामले दर्ज हैं, जो चुनाव का मुद्दा भी बनी। इस संबंध में कुल 19 मामलों में 172 नामजद आरोपित हैं। भाजपा के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार का एक मुद्दा यह भी रहा। हालाँकि, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के जरिए इन इलाक़ों को साधने का प्रयास भी किया। पूरे आंदोलन के दौरान मुंडा ने इसके विरोध में कुछ नहीं बोला। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खूँटी से ही सांसद हैं, ऐसे में उनके गढ़ में भाजपा के लिए स्थिति कैसी रही, यह परिणाम से पता चल जाता है।
मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ गुस्सा क्यों था? ये इसीलिए, क्योंकि उनकी सरकार ने 2016 के अंत में एक संशोधन क़ानून पास किया था, जिसके तहत ट्राइबल क्षेत्रों की ज़मीन का भी विकास कार्यों के लिए अधिग्रहण किया जाना था। पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपित और विकास के लिए आदिवासियों का जमीन अधिग्रहण- इन दो फैक्टरों को मिला दें और झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन का बयान देखें… तो इस क्षेत्र की राजनीति साफ हो जाएगी। शिबू सोरेन ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि उनकी सरकार बनते ही पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपितों पर से सभी केस हटा लिए जाएँगे। और फिर खूँटी का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ से चुनाव प्रचार किया था।