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उत्तर प्रदेश : SHUATS यूनिवर्सिटी में बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्तियाँ: जम कर हुई फंड्स की बंदरबाँट

                                 SHUATS में फर्जी नियुक्ति मामले में एफआईआर (फोटो साभार: नेटवर्क 18)
फतेहपुर ईसाई धर्मांतरण मामले में जारी जाँच के बीच सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी एंड साइंस (SHUATS) में नियुक्ति और फंडिंग में घपलेबाजी का मामला भी खुल गया है। इसे लेकर प्रयागराज के रहने वाले दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने शिकायत दी थी। शिकायत मिलने के बाद की गई जाँच में यह साबित हो गया है कि SHUATS में शिक्षकों और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है। संस्थान की फंडिंग में भी घपलेबाजी की गई है।

प्रयागराज STF ने दोनों ही मामलों में 12 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करा दी है। मामले में STF की तरफ से शुआट्स के कुलपति राजेन्द्र बी लाल,कुलाधिपति (chancellor) जे ऐ ऑलिवर, समेत नियुक्ति और अवैध लेन देन में शामिल 12 पदाधिकारियों के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत धारा 7 और 13(1)(बी) के तहत नैनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा केस से जुड़े तीन बड़े मामलों की जाँच STF अभी कर रही ,है जिससे साफ है कि यूनिवर्सिटी के इन अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।

इस मामले की जाँच कर रहे एसटीएफ प्रभारी एसआई नवेंन्दु कुमार की तरफ से दर्ज FIR के अनुसार, शुआट्स में चांसलर और वॉइस चासंलर सहित तमाम बड़े पद पर बैठे लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर यूनिवर्सिटी के पदों पर अवैध नियुक्तियाँ की। वर्ष 1984 से वर्ष 2017 के बीच कुल 69 प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति बिना भर्ती प्रक्रिया का पालन किए की गई। उनके वेतन भी नियम से अलग तय किए गए। जाँच में नियुक्त सभी लोग अयोग्य पाए गए हैं।

नियमों की अनदेखी

एसआईटी के मुताबिक, चयन प्रक्रिया में गवर्मेंट पे रोल पर नियुक्ति के लिए कई मानकों की अनदेखी की गई। पदों पर नियुक्ति के लिए कम से कम 2 समाचार पत्रों में विज्ञापन नहीं दिया गया। साक्षातकार के लिए बुलावा पत्र और चयन के बाद नियुक्ति पत्र प्रसारित नहीं किया गया। बिना आवेदन पत्र के ही चयन किया गया। चुने गए लोगों के वेतन व भत्तों के भुगतान में भी नियमों की अनदेखी की गई है।
मामले में सर्वजीत हावर्ड और अशोक सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। आरोप है कि धर्मांतरण को बढ़ावा देने और इससे होने वाली आमदनी की बंदरबाँट के लिए कुलपति समेत बड़े पदाधिकारियों ने सुविधानुसार अयोग्य लोगों की नियुक्ति विवि के प्रोफेसर समेत अलग अलग पदों पर की।