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बच्ची के रेपिस्ट से मालिश कराने वाले पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का जेल में ‘खेल’ जारी, अब अकेलापन दूर करने को सेल में शिफ्ट कराए दो कैदी

आप नेताओं के पाप रह-रहकर सामने आ रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तिहाड़ जेल में बंद होने के बावजूद दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन अपने ‘रसूख’ का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे पहले जैन के जेल की सेल से दो वीडियो वायरल हो चुके हैं। इनमें एक में वो बच्ची के रेपिस्ट से मालिश कराते हुए नजर आए, तो दूसरे में जेल में अधिकारियों का दरबार लगाते दिखे। अब एक बार फिर केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे सत्येंद्र जैन सुर्खियों में हैं। तिहाड़ से सत्येंद्र जैन को लेकर एक और नया अपडेट सामने आया है। जेल की सेल में अपना अकेलापन दूर करने के लिए जैन ने फिर अपनी ‘पहुंच’ का इस्तेमाल किया। जैन ने जेल संख्या 7 के सुपरिंटेंडेंट की मदद से उनके सेल में 2 कैदियों को बकायदा ट्रांसफर भी करवा लिया। तिहाड़ जेल के प्रशासन को जैसे ही इस बात की भनक लगी तो वह अलर्ट मोड में आ गया। जेल प्रशासन ने सुपरिंटेंडेंट को नोटिस जारी करके पूछा है कि किसकी इजाजत से दो कैदियों को जैल की सेल में शिफ्ट किया गया?

जैन को जमानत न देने के लिए हाईकोर्ट की आशंका सही साबित, जेल में कर रहे ‘खेल’
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने ईडी मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जैन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जमानत मिलने पर वह सबूतों को तोड़-मरोड़ सकते हैं। हाईकोर्ट की आशंका को जैन जेल में रहते ही सही साबित कर रहे हैं। उनके प्रभाव के इस्तेमाल का वीडियो पहले वायरल हो चुका है। एक बार फिर जैन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने अपनी मंशा का पूरी करने और अकेलेपन से निजात पाने के लिए जेल सुपरिंटेंडेंट को बकायदा चिठ्ठी लिखी।

पूर्व मंत्री ने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए दो कैदी सेल में शिफ्ट कराए
चिठ्ठी में जैन ने लिखा है कि उसको जेल में अकेलापन सता रहा है और अपने साथ 2 कैदियों को रखने के लिए तिहाड़ प्रशासन को चिट्ठी लिखी। 11 मई को लिखी गई इस चिट्ठी में सत्येंद्र जैन ने कहा है कि वह जेल में काफी अकेलापन महसूस कर रहे हैं और मनोचिकित्सक ने उन्हें अकेला नहीं रहने की सलाह दी है। इसलिए उनके साथ दो कैदियों और कैदियों को रखा जाए। हैरानी की बात ये है कि सत्येंद्र जैन की इस मांग पर जेल संख्या 7 के सुपरिंटेंडेंट ने उनके सेल में 2 कैदियों को ट्रांसफर भी कर दिया। जैन ने लिखा कि एक मनोचिकित्सक ने मुझे और अधिक सामाजिक संपर्क का सुझाव दिया है। उन्होंने कम से कम दो और लोगों के साथ रहने का अनुरोध किया। जैन ने पत्र में अपनी पसंद के दो कैदियों के नामों का भी जिक्र किया। इसके बाद अधीक्षक ने दो कैदियों को दिल्ली के पूर्व मंत्री के सेल में स्थानांतरित कर दिया।

नियमों के विपरीत शिफ्टिंग से हुआ हंगामा, तिहाड़ प्रशासन ने जारी किया नोटिस
पूर्व मंत्री की सेल में दो कैदियों के ट्रांसफर हो जाने के बाद इसकी जानकारी तिहाड़ जेल को प्रशासन लगी। अधिकारियों के संज्ञान में आया कि जेल संख्या 7 के सुपरिंटेंडेंट ने सत्येंद्र जैन की सेल में 2 कैदियों को ट्रांसफर किया है। नियमों के विपरीत यह काम हो जाने के बाद जेल प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया और दोनों कैदियों को वापस पुरानी जगह भेज दिया। इसके साथ ही तिहाड़ प्रशासन ने जेल सुपरिंटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि किसके आदेश पर और कौनसे नियमों के तहत कैदियों के जैन की सेल में शिफ्ट किया गया ? आपको बता दें कि सत्येंद्र जैन को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही कड़ी सुरक्षा वाली जेल में बंद हैं।

तिहाड़ में मसाज करवाते हुए सामने आया था वीडियो
इससे पहले सत्येंद्र जैन का तिहाड़ जेल से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह मालिश करवाते हुए दिख रहे थे। इसके बाद जैन पर आरोप लगा था कि उन्होंने जेल अधिकारियों को धमकाया भी था कि वो जेल से बाहर निकलने के बाद उन्हें देख लेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तिहाड़ जेल में बंद सत्येंद्र जैन जेल में ही आराम से मालिश करवाते नजर आए।  न केवल मालिश बल्कि हेड मसाज और फुट मसाज भी करवाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है की मंत्री को जुर्म की सजा नहीं, बल्कि VVIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। मालिश और मसाज के साथ ही वे जेल मीटिंग भी करते हैं और तमाम लोग उनसे मिलने आते हैं। सवाल यह उठता है कि जेल में आखिर ये सब कैसे संभव है। और यह तब है जब अदालत ने दो दिन पहले ही यह कहते हुए मंत्री की जमानत याचिका खारिज कर दी कि पहली नजर में वे मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी हैं। इससे पहले भी सत्येंद्र जैन जेल में मसाज करवाते पाए गए थे। इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया था। उसके बाद जेल के कुछ स्टाफ पर कार्रवाई भी की गई थी।

 

केजरीवाल ने कहा था- अब नेताओं को भी बाकी कैदियों की तरह जेल में रहना पड़ेगा

कट्टर ईमानदार अरविंद केजरीवाल ने कहा था दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा था कि इन नेताओं ने जेल के अंदर VIP रूम रखा था कि कोई नेता जेल में जाएगा तो सुविधा मिलेगी। हमने उसे सील कर दिया। अब चाहे कोई नेता हो, जैसे बाकी कैदी रहते हैं उसे भी वैसे ही रहना पड़ेगा।

हेड मसाज, फुट मसाज और बैक मसाज का वीडियो वायरल

ये वीडियो 13 सितंबर, 2022 का बताया जा रहा है। तिहाड़ जेल के सेल-4 ब्लॉक A की ये सीसीटीवी फुटेज है। ED ने जेल में सत्येंद्र जैन को VIP ट्रीटमेंट की बात कही थी। ED ने अपने हलफनामे में जैन को मसाज की सुविधा मिलने का आरोप लगाया था। ईडी ने कहा था कि सत्येंद्र जैन को हेड मसाज, फुट मसाज और बैक मसाज मिलता है। जो कि सामने आई सीसीटीवी फुटेज में भी दिख रहा है। ED ने तिहाड़ से सत्येंद्र जैन को मसाज दिए जाने वाली फुटेज ली थी, जो अब सबके सामने है। लेकिन जैन ने मसाज कराते फुटेज को रोकने की कोर्ट से अपील की थी।

तिहाड़ जेल में दरबार लगाने का वीडियो भी हो चुका है वायरल

तिहाड़ जेल में बंद  सत्येंद्र जैन का एक और वीडियो वायरल हुआ था।  जेल में दरबार लगाए सत्येंद्र जैन का यह वीडियो 12 सिंतबर, 2022 का है। वीडियो में दिख रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सत्येंद्र जैन तीन लोगों के साथ बैठकर दरबार लगाए हुए हैं। जेल सुपरिंटेंडेंट अजीत कुमार के आते ही तीनों वहां से उठकर चले जाते हैं। जेल सुपरिंटेंडेंट कुर्सी पर बैठ कर सत्येंद्र जैन से किसी बात को लेकर चर्चा करते रहते हैं। जेल सुपरिंटेंडेंट अजीत कुमार को सस्पेंड किया जा चुका है। उनपर सत्येंद्र जैन को जेल में वीवीआईपी सुविधाएं देने का आरोप है।

इस वीडियो के सामने आने के बाद एक बार फिर आम आदमी पार्टी सरकार की खूब थू-थू हुई। सोशल मीडिया पर केजरीवाल, आप सरकार और इसके मंत्री की जमकर किरकिरी हुई।  लोग वीडियो शेयर कर तंज कस रहे हैं।

सोमनाथ भारती से लेकर मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया तक जेल, टूटता केजरीवाल की कट्टर ईमानदारी का तिलिस्म

अरविन्द केजरीवाल की मानसिकता रामलीला ग्राउंड में चल रहे अन्ना आंदोलन में उस समय सामने आ गयी थी, जब भूख हड़ताल के चलते अन्ना की तबियत ख़राब हुई थी, पूछिए उन लोगों से जो उस समय आंदोलन में केजरीवाल के साथ थे। पुस्तिकाएं प्रकाशित हुई हैं, जिनमें  केजरीवाल कुकर्मों का ब्यौरा है। फिर भी कम से कम उन लोगों को खुलकर अपने श्रीमुख से बताना पड़ेगा ताकि केजरीवाल को वोट देने वालों को मालूम हो कि केजरीवाल किस गिरी मानसिकता का है। प्रमाण वैसे भी सबके सामने है। जितनी जल्दी इस पार्टी के तथाकथित नेता किसी न किसी आरोप में गिरफ्तार हो रहे हैं, उतनी जल्दी किसी पार्टी के नहीं हुए।  माना भ्रष्टाचार से कोई पार्टी अछूती नहीं। किसी में कम तो किसी में ज्यादा। 
आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने के वादे के साथ अस्तित्व में आई थी, लेकिन अब भ्रष्टाचार ही उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। दिल्ली और पंजाब में एक के बाद एक ‘आप’ के विधायक और मंत्री जेल जा रहे हैं। इससे आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचारियों की सूची लंबी होती जा रही है। अब इस सूची में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का नाम भी जुड़ गया है। रविवार (26 फरवरी, 2023) को आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में 8 घंटे तक चली पूछताछ के बाद सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के और भी नेताओं और मंत्रियों की की गिरफ्तारी हो सकती है। इससे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही है और उनकी कट्टर ईमानदारी का तिलिस्म टूटता जा रहा है। 

कोर्ट ने सिसोदिया को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा 

सीबीआई ने सोमवार (27 फरवरी, 2023) को दोपहर में मनीष सिसोदिया को राउज एवन्यू कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मनीष सिसोदिया को पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है। अब सिसोदिया चार मार्च तक सीबीआई की रिमांड पर रहेंगे। सीबीआई की टीम ने कोर्ट में कहा था कि आबकारी घोटाले में अभी सिसोदिया से पूछताछ करनी है और इस मामले में डिटेल जानकारी चाहिए। इन सबके लिए उन्हें पांच दिन की रिमांड चाहिए। कोर्ट ने सीबीआई की इस अपील के बाद सिसोदिया को रिमांड पर भेजने का फैसला किया। सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि शराब नीति घोटाला मामले की एफआईआर में मनीष सिसोदिया आरोपी नंबर वन हैं। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सिसोदिया ने शराब घोटाले में आपराधिक साजिश रची और सबूतों को मिटाने की भी कोशिश की।

डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बारी

कानून के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अभी सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया है, लेकिन सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ पहली बार अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल किया था। 03 फरवरी, 2023 को पीएमएलए कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दी। चार्जशीट में सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ उनके करीबी विजय नायर, इंडोस्पिरिट्स के प्रमुख समीर महेंद्रू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ईडी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव के रूप में तैनात रहे दानिक्स अधिकारी सी अरविंद के बयान के आधार पर केजरीवाल को इस घोटाले में आरोपी बनाया। ईडी के मुताबिक दानिक्स अधिकारी अरविंद ने कहा कि उन्हें उनके बॉस सिसोदिया द्वारा केजरीवाल के आवास पर बुलाया गया था, जहां एक बैठक में उन्हें आबकारी नीति पर मंत्रियों की रिपोर्ट का एक मसौदा सौंपा गया था।

दिल्ली में AAP के विधायकों और मंत्रियों की गिरफ्तारी

2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से अब तक केजरीवाल की पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। आम आदमी पार्टी के अब तक पांच मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया और दो मंत्रियों को रिश्वत लेने के मामले में पकड़ा गया। जबकि एक मंत्री को फर्जी डिग्री के मामले में आरेस्ट किया गया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के विधायक भी कई मामले में जेले भेजे गए थे। अब डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को शराब घटाले में आपराधिक साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दिल्‍ली कैबिनेट में कुल 6 मंत्री है, उनमें से दो अब जेल में हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गिरफ्तारी के बाद भी सत्येंद्र जैन को अभी तक उनके पद से नहीं हटाया है। वह सरकार में बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं। जैन के जेल जाने के बाद उनके ज्यादातर मंत्रालय मनीष सिसोदिया को सौंपे गए थे।

दिल्ली में किन मंत्रियों और विधायकों को अबतक गिरफ्तार किया गया है

सत्येंद्र जैन : मनी लॉन्ड्रिंग केस में शिकंजा कसा गया

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को पिछले साल 30 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज है। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन, उनकी पत्नी पूनम और अन्य पर केस दर्ज किया गया है। सत्येंद्र जैन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली ने कई शेल कंपनियां बनाई और खरीदी थी। कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटर्स से 54 शेल कंपनियों के जरिए 16.39 करोड़ रुपए का काला धन भी ट्रांसफर किया। ईडी जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। कुछ दिन पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन ने जेल अधिकारियों को धमकी दी थी कि सबको बाहर निकलकर देख लूंगा। सत्येंद्र ने जेल अधिकारियों को गाली देते हुए उनके खिलाफ कुछ भी करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। पिछले दिनों सत्येंद्र जैन के एक के बाद एक कई वीडियो सामने आए थे। इसमें सत्येंद्र जैन कथित तौर पर जेल की बैरक में मसाज लेते हुए दिख रहे हैं। 

अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन के आरोप में अमानतुल्ला खान गए थे जेल

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन से जुड़े एक मामले में सितंबर 2022 में गिरफ्तार हुए आप विधायक अमानतुल्ला खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। पिछले साल नवंबर में दिल्ली की एक अदालत ने कहा था कि ओखला विधायक के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के सबडिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने नवंबर 2016 में दिल्ली वक्फ बोर्ड में विभिन्न मौजूद और गैर-मौजूद पदों पर खान की ओर से मनमानी और अवैध नियुक्तियों का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई ने एक मामला दर्ज कर लिया था और जांच की थी, जिसमें पर्याप्त सबूत मिले थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उपराज्यपाल से अभियोजन की मंजूरी मांगी थी। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के विरुद्ध 2016 में दर्ज ‘अवैध’ नियुक्तियों के मामले में सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कई घंटों की लंबी पूछताछ के बाद विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार कर लिया।

आसिम अहमद खान: बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने के मामले में फंसे

साल 2018 में दिल्ली सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया था। तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटा दिया था। आसिम पर 6 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। आसिम अहमद खान दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री थे, सीएम केजरीवाल ने आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। आसिम पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने का आरोप है। केजरीवाल ने कहा था- ‘शिकायत करने वाले ने आसिम से बातचीत की। ऑडियो रिकॉर्डिंग मेरे पास भेजी। इसके बाद मैंने मंत्री के ख‍िलाफ कार्रवाई की।’ जबकि आसिम खान ने कहा था- मेरे खिलाफ साजिश की गई है। 

बलात्कार के आरोप में मंत्री संदीप कुमार गए थे जेल

2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा सीट से विधायक बने संदीप कुमार को दिल्ली सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री और एससी-एसटी कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार को बलात्कार और अन्य आरोपों के सिलसिले में सितंबर 2016 में गिरफ्तार किया गया था। एक महिला ने उनके खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी और बाद में कुमार ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया था। यह महिला संदीप कुमार की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले सामने आई एक विवादास्पद सीडी में उनके साथ दिखाई दी थी। महिला ने आरोप लगाया था कि वह राशन कार्ड बनवाने के लिए गई थी लेकिन कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उनके साथ रेप किया गया। घटना के सामने आने के बाद कुमार को पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया था।

बीवी की प्रताड़ना के आरोप में सोमनाथ भारती गए थे जेल

दिल्ली सरकार के मंत्री रहे सोमनाथ भारती लगातार सुर्खियों में रहे हैं। सोमनाथ भारती मालवीय नगर सीट से विधायक रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की पहली बार सरकार बनने के बाद सोमनाथ भारती को कानून, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली थी। सोमनाथ भारती की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब उनकी पत्नी लिपिका मित्रा ने 2013 में उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। लिपिका ने अपनी शिकायत में सोमनाथ भारती के खिलाफ गई गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि सोमनाथ भारती ने उन्हें गर्भपात के लिए मजबूर किया। इसके बाद 2014 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। यूपी दौरे पर एक विवादित बयान के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2021 में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई।

फर्जी डिग्री रखने के आरोप में कानून मंत्री जितेंद्र तोमर हुए थे गिरफ्तार 

2015 में दिल्ली की त्रिनगर सीट के विधायक बने जितेन्द्र तोमर को केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। उन्हें दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी। उनके ऊपर वकालत की फर्जी डिग्री रखने का आरोप लगा था। इसका खुलासा आईटीआई के जरिए हुआ था। मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। जहां भागलपुर यूनिवर्सिटी ने उनकी डिग्री को फर्जी बताया। 2016 में जितेन्द्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया। जनवरी 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी।

जबरन वसूली के आरोप में विधायक गुलाब सिंह हुए थे गिरफ्तार

दिल्ली के मटियाला से विधायक गुलाब सिंह को अक्टूबर 2016 में गुजरात के सूरत से जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब वह आम आदमी पार्टी के गुजरात के प्रभारी थे। दिल्ली में दर्ज हुए मामले में गुलाब सिंह यादव को गुजरात से गिरफ्तार कर यहां लाया गया था। गुलाब सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ धमकी और वसूली मामले में गैर-जमानती वॉरंट जारी किया गया था। AAP के विधायक गुलाब सिंह यादव नवंबर 2022 में दिल्ली के श्याम विहार में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इस दौरान कार्यकर्ता टिकट बेचने को लेकर अचानक आक्रोशित हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। कार्यकर्ता विधायक पर टूट पड़े और उनका कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की करने लगे। कार्यकर्ताओं से बचने के लिए विधायक बाहर निकलकर भागने की कोशिश करने लगे तो कार्यकर्ता उनका पीछा करते हुए उन्हें मुक्के मारते रहे। कार्यालय में मारा इसके बाद पीटते हुए कार्यालय से बाहर लेकर आए। आखिरकार विधायक को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।

बेड न मिलने से अस्पताल के बाहर मरीज ने दम तोड़, उड़ा दी केजरीवाल के दावे की धज्जियां

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2 मई, 2020 को ‘दिल्ली कोरोना’ एप लॉन्च किया। इस एप को लॉन्च करते समय केजरीवाल ने कहा कि अब लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, लेकिन हमने इतना इंतजाम किया हुआ है कि अगर आपके घर में कोई बीमार होता है तो उसके लिए बेड, ऑक्सीजन और आईसीयू का इंतजाम है। लेकिन दो दिन बाद ही केजरीवाल के इस दावे की पोल खुल गई। बेड न मिलने की वजह से एक मरीज ने लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया। 
मृतक 1 जून को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। घरवालों की शिकायत है कि मरीज को 1 तरीख से लगातार दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में एडमिट करने की कोशिश की गई लेकिन उन्हें कहीं जगह नहीं मिली।
जून 4 की सुबह जब मरीज की हालत ज्यादा खराब हुई तो उन्हें दिल्ली के लोक नायक अस्पताल लाया गया। लेकिन अस्पताल ने मरीज को एडमिट करने से मना कर दिया। काफी देर इंतजार करने के बाद घर वाले खुद मरीज को स्ट्रेचर पर सुलाकर इमरजेंसी में ले जाने लगे तो एक डॉक्टर ने मरीज को भर्ती किया। कुछ समय के बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले पर सफाई देते हुए अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब मरीज अस्पताल लाया गया तो वो पहले से ही मृत था। वहीं मृतक की बेटी अमरप्रीत ने ट्वीट कर आपने पिता की मौत की जानकारी देते हुए कहा कि वो अब नहीं रहे, हमारी सरकार ने हमें फेल कर दिया।


अमरप्रीत पिछले कई दिनों से लगातार ट्वीटर पर अपने पिता के इलाज को लेकर दिल्ली सरकार और अस्पतालों से मदद मांगने की कोशिश कर रही थीं। पिता को अस्पताल लाने के बाद अमरप्रीत ने ही ट्वीट कर कहा “मेरे पिता को तेज बुखार है, हमें जल्द उन्हें अस्पताल में भर्ती करना है, मैं लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के बाहर खड़ी हूं और ये लोग इन्हें भर्ती नहीं कर रहे हैं। मेरे पिता को कोरोना है, तेज बुखार है, उन्हे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। वो बिना मदद के नहीं बच पाएंगे। प्लीज मदद कीजिए।”
एप लॉन्च करते समय सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर बेड खाली होने के बाद भी कोई अस्पताल मरीज को नहीं भर्ती करता है तो आप 1031 पर फोन कीजिए और अपनी समस्या बताइए। इसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को होगी और वह तुरंत उस अस्पताल से बात करके आपको ऑन द स्पॉट बेड दिलवाएंगे। लेकिन हेल्पलाइन पर मदद की गुहार लगाने पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अमरप्रीत ने ट्वीट कर बताया कि 2 जून को हैल्पलाइन नंबर पर कॉल किया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
पिता को खोने के बाद अब अमरप्रीत और उनके परिवारवालों के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। पिता की मौत की खबर के बाद अमरप्रीत ने ट्वीट कर बताया कि उनके परिवार का कोरोना टेस्ट नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि हम सुबह से कोशिश कर रहे हैं लेकिन हमारा टेस्ट नहीं हो पा रहा है। मेरी मां, भाई, उनकी बीवी और 2 बच्चों का टेस्ट होना है।
दिल्ली सरकार के दावे के विपरीत अस्पतालों में अव्यवस्था का आलम है। कोरोना टेस्ट की समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से मरीज और उनके परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकने को मजबूर है। मरीज के परिजन सीएम केजरीवाल, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और आम आदमी पार्टी के नेताओं से ट्विटर और अन्य माध्यम से मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मरीज के परिजनों ने केजरीवाल को नसीहत दी है कि रोज 12 बजे टीवी पर आकर गाल बजाने से इलाज नहीं होता।

दिल्ली : जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करती केजरीवाल सरकार

Image result for केजरीवालआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार द्वारा दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं लेकिन दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं के हालात उनके दावों से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते हैं। केजरीवाल ने चुनाव से पहले घोषणापत्र में कहा था कि वे 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाएँगे और दिल्ली के अस्पतालों में 30,000 अतिरिक्त बेड मुहैया कराए जाएँगे जिसमें से 4000 मैटरनिटी वार्ड में होंगे।
केजरीवाल ने प्रति 1000 लोगों पर 5 बेड देने का वादा किया था। लेकिन हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने 1000 मोहल्ला क्लिनिक खोलने का वादा किया था लेकिन 2018 तक केवल 160 मोहल्ला क्लिनिक ही खुल पाए थे। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अब तक 9,098 बेड की व्यवस्था ही हो पाई है।
केजरीवाल के मंत्रियों को नहीं अपने अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिक पर भरोसा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का दावा करते हैं, मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन एक आरटीआई के जरिये खुलासा हुआ कि केजरीवाल और उनके मंत्रियों को न सरकारी अस्पताल पर भरोसा है और न ही मोहल्ला क्लीनिक पर। बीजेपी ने एक आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के हवाले से खुलासा किया कि पिछले 4 सालों के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्रियों के इलाज पर सरकारी खजाने से 35 लाख रुपये से ज्यादा की रकम खर्च हुई। इसमें से करीब 25 लाख रुपये अकेले सीएम और डेप्युप्टी सीएम व उनके परिजनों के इलाज पर खर्च किए गए। बीजेपी ने इस जानकारी के हवाले से पूछा है कि जब सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में तमाम सुविधाएं देने का दावा करते हैं और मोहल्ला क्लिनिकों की तारीफ करते नहीं थकते, तो फिर उन्होंने और उनके मंत्रियों ने अपना या अपने परिजनों का इलाज महंगे प्राइवेट अस्पतालों में क्यों कराया।
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक केजरीवाल के इलाज पर सरकारी खजाने से कुल 12,18,027 रुपये खर्च किए गए। मनीष सिसोदिया ने 4 साल में 35 बार इलाज कराया, जिस पर कुल 13,25,329 रुपये खर्च हुए। इसमें डेप्युटी सीएम के खुद के इलाज का एक भी खर्च नहीं है। यह सारा खर्च उनके फैमिली मेंबर्स के इलाज पर किया गया।
मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया। एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।
एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है.दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।
दिल्ली में नहीं लागू की आयुष्मान भारत योजना
दिल्ली में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल खराब होने के बावजूद केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत को लागू करने से इंकार कर दिया।
केजरीवाल सरकार ने राज्य की हेल्थ स्कीम को बेहतर बताते हुए केंद्र की आयुष्मान भारत योजना को लागू करने से इनकार कर दिया।

मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत 71 लाख लोगों इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य (पीएम-जेएवाई) के तहत 19.595 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है और 6.71 करोड़ से अधिक लोगों को ई-कार्ड भी जारी किए गए हैं।
दवा घोटाला
केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है।
इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि विवादित सीएम ने अपने खासम-खास और कई घोटालों के आरोपी स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के दबाव में ही दवाई खरीदने का काम मेडिकल सुपरिन्टेंडेन्ट से छीनकर, सेन्ट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी को दे दिया था। यानी लूट के लिए ऊपर से नीचे तक पूरी तैयारी की गई थी।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा, लेकिन ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप है।
इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई है। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए हैं। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई है
दूसरी तरफ केजरीवाल सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की जनता को जहरीली हवा में सांस लेने को भी मजबूर कर रखा है, जो कि दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य पर किसी हमले से कम नहीं है

‘निर्भया के दोषियों’ की दया याचिका को दिल्ली सरकार ने किया अस्वीकार

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दिल्ली गैंगरेप की घटना के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से फाँसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद सर्वोच्च अदालत द्वारा दी गई फाँसी की सजा कम करने सम्बन्धी राष्ट्रपति को भेजे जाने वाली दया याचिका को दिल्ली सरकार ने अस्वीकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की है।
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Image result for nirbhaya kand29 अक्टूबर 2019 को जेल प्रशासन ने सभी कानूनी रास्ते बंद हो जाने पर दोषियों को राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने के लिए सात दिन का वक़्त दिया था। इन दोषियों में सिर्फ विनय शर्मा ने ही इस याचिका के लिए अपनी अर्जी दाखिल की थी जिसे दिल्ली सरकार ने अस्वीकार कर दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अपनी अस्वीकार्यता के साथ ही दिल्ली सरकार ने इस सम्बन्ध में अपनी ओर से कड़ी टिप्पणी भी दर्ज की है।
दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली सरकार के गृहमंत्री सतेन्द्र जैन ने लिखा कि, “प्रार्थी ने एक जघन्य अपराध को अंजाम दिया है, यह एक ऐसा केस है जिसमें दी जाने वाली सजा को नजीर के तौर पर देखा जाएगा ताकि आने वाले समय में कोई भी इस अपराध को अंजाम न दे। दया याचिका में कोई योग्यता नहीं है, हम इसे अस्वीकार करने की सिफारिश करते हैं।”

16 दिसंबर 2012 की इस घटना का शिकार हुई ‘निर्भया’ ने 29 दिसंबर 2012 को इलाज के दौरान सिंगापुर में दम तोड़ दिया था। दिल्ली में हुई इस गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 23 वर्षीय निर्भया को छ: लोगों ने दुष्कर्म कर चलती बस से धक्का देकर बाहर फेंक दिया था। सभी दोषियों पर लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने घटना के दोषियों को फाँसी की सज़ा सुनाई थी। इनमें से एक दोषी राम सिंह ने पहले ही जेल में फाँसी लगाकर आत्म-हत्या कर ली थी जबकि एक अन्य अभियुक्त (जो घटना के वक़्त नाबालिग था) इस मामले में अपनी तीन साल की अधिकतम सज़ा बाल सुधार गृह में पूरी कर चुका है। बता दें की यह याचिका दिल्ली सरकार के बाद मुख्य सचिव और गृहमंत्री के बाद लेफ्टिनेंट गवर्नर और फिर राष्ट्रपति के पास उनके निर्णय के लिए भेजी जाएगी।