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शराब घोटाले : पूरी दिल्ली सरकार घिरी, सिसोदिया के बाद संजय सिंह भी आरोपी,

साभार 
शराब घोटाले से लेकर तमाम तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त दिल्ली सरकार के मंत्री एक-एक कर जेल जा रहे हैं। शराब घोटाले में शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी संजय सिंह का नाम भी शराब घोटाले की चार्जशीट में आ गया है। यानी वो भी जेल जा सकते हैं। इसके अलावा शराब घोटाले की आंच अब कट्टर ईमानदार मुख्यमंत्री केजरीवाल तक पहुंच गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने केजरीवाल को 16 अप्रैल को पूछताछ के लिए तलब किया है। सीबीआई का कहना है कि उसके पास सबूत है, यानी अब केजरीवाल की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। ऐसा लगता है कि अगले कुछ दिनों में पूरी केजरीवाल सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में होगी। एक दिलचस्प बात यह भी है कि केजरीवाल ने अपने साथियों और अपने बारे में जो भी भविष्यवाणी की थी वह एक-एक कर सच साबित हो रही है

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केजरीवाल ने कहा था- अगर मैं चोरी करूंगा तो मुझे भी जेल जाना पड़ेगा

अरविंद केजरीवाल ने एक समय कहा था- कल को अगर मनीष सिसोदिया चोरी करेंगे तो मनीष सिसोदिया केजरीवाल का कुछ नहीं लगता, उसको जेल जाना पड़ेगा। कल को अगर हमारा मंत्री चोरी करेगा, ये मेरे कोई सगे नहीं लगते इनको जेल जाना पड़ेगा। कल को कोई हमारा विधायक चोरी करेगा, कोई हमारा सगा नहीं लगता, उसको जेल जाना पड़ेगा। और मनीष, कल को अगर मैं चोरी करूंगा तो मैं भी तुम्हारा सगा नहीं लगता, मुझे भी जेल जाना पड़ेगा।

केजरीवाल की दोमुंही बातें

एक समय केजरीवाल कहते हैं- भ्रष्टाचार हुआ है, जांच कराओ, पकड़ो, जेल में डालो। जब मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजा गया तो तब उनके सुर बदल गए। उसके बाद केजरीवाल ने कहा- जिन लोगों ने मनीष सिसोदिया को पकड़ा है वे देश के दुश्मन हैं।

शराब घोटाले में आया संजय सिंह का नाम

शराब घोटाले में दिल्ली सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस समय ईडी की हिरासत में हैं। अब आम आदमी पार्टी के एक और कद्दावर नेता संजय सिंह पर भी इसकी गाज गिर सकती है। ईडी ने इस मामले में अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में संजय सिंह को भी आरोपी बना लिया है। संजय सिंह को आरोपी बनाने के लिए दिनेश अरोड़ा के बयान को आधार बनाया गया है। हालांकि, सांसद संजय सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह फर्जी बताया है और कहा है कि अडानी विवाद को संसद में उठाने के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर केस दर्ज करने की बात कही।

सीबीआई ने केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब नीति केस में सीबीआई ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 16 अप्रैल 2023 को CBI दफ्तर बुलाया है। इस पर आम आदमी पार्टी ने प्रतिशोध की राजनीति का आरोप लगाया है। वहीं, जांच एजेंसी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ सबूत होने का दावा किया है। सीबीआई का कहना है कि सबूत के आधार पर ही समन जारी किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से हाल ही में दायर चार्जशीट के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने शराब कारोबारी और आबकारी नीति घोटाले के मुख्य आरोपी समीर महेंद्रू से फेसटाइम पर बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने पार्टी के संचार प्रभारी विजय नायर पर भरोसा करने को कहा। ईडी का कहना है कि 12 नवंबर और 15 नवंबर 2022 को पूछताछ के दौरान समीर महेंद्रू ने अधिकारियों को बताया था कि विजय नायर ने अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी मुलाकात तय की थी, लेकिन बात नहीं बनी।

डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बारी

कानून के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अभी सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया है, लेकिन सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ पहली बार अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल किया था। 03 फरवरी, 2023 को पीएमएलए कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दी। चार्जशीट में सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ उनके करीबी विजय नायर, इंडोस्पिरिट्स के प्रमुख समीर महेंद्रू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ईडी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव के रूप में तैनात रहे दानिक्स अधिकारी सी अरविंद के बयान के आधार पर केजरीवाल को इस घोटाले में आरोपी बनाया। ईडी के मुताबिक दानिक्स अधिकारी अरविंद ने कहा कि उन्हें उनके बॉस सिसोदिया द्वारा केजरीवाल के आवास पर बुलाया गया था, जहां एक बैठक में उन्हें आबकारी नीति पर मंत्रियों की रिपोर्ट का एक मसौदा सौंपा गया था।

समीर और विजय नायर ने रची थी साजिश

ईडी के मुताबिक, नायर ने महेंद्रू और केजरीवाल को फेसटाइम वीडियो कॉल पर जोड़ा था। अरविंद केजरीवाल ने समीर से कहा कि विजय नायर उनके आदमी हैं और वह उन पर भरोसा कर सकते हैं। नायर इस मामले के आरोपियों में से एक हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि समीर महेंद्रू और विजय नायर ने कथित तौर पर दिल्ली शराब नीति घोटाले में दूसरों के साथ मिलकर साजिश रची थी।

CBI के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत

ईडी के अनुसार, समीर महेंद्रू विजय नायर के साथ मिलकर काम कर रहा था और राजनेताओं और शराब कारोबारियों के साथ कई बैठकों का हिस्सा रहा था। ईडी ने यह भी बताया था कि केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में शराब के कारोबार के सिलसिले में आंध्र प्रदेश के एक सांसद मगुनता श्रीनिवासलु रेड्डी से मुलाकात की थी। वहीं, दो प्रमुख गवाहों ने सीबीआई को बताया कि अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आबकारी नीति की ड्राफ्ट कॉपी आबकारी अधिकारी को दी गई और बाद में लागू की गई।

लाभ मार्जिन का 6 प्रतिशत हिस्सा अवैध रूप से AAP को दिया गया

दिल्ली में हुए शराब घोटाले में पॉलिसी मेकिंग में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो केजरीवाल और सिसोदिया के करीबी थे। इसमें प्रमुख नाम विजय नायर का है जो मनीष सिसोदिया के ज्यादा करीबी हैं। उसने शराब माफिया से करोड़ों रुपये वसूले और 12 प्रतिशत लाभ मार्जिन का 6 प्रतिशत हिस्सा अवैध रूप से AAP को वापस दिया। इसके लिए पालिसी में ढाई प्रतिशत मार्जिन को बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इस काम के लिए दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत के सरकारी बंगले का दुरूपयोग से लेकर रेस्टोरेंट और बार मालिकों से इलेक्शन फण्ड के नाम पर वसूली करना भी शामिल है।

गोवा चुनाव में खर्च किया गया शराब घोटाले का पैसा

समीर महेंद्रू का दावा है कि इस मामले में करोड़ों रुपये केजरीवाल के आदेश पर दिए गए थे, जिसे गोवा चुनाव में खर्च किया गया था।

आबकारी विभाग के सचिव ने लिया केजरीवाल का नाम

आबकारी विभाग में सचिव सी. अरविंद का बयान पहले मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किया गया था। जिसमें उन्होंने खुलासा किया था कि मनीष सिसोदिया आबकारी पॉलिसी को लेकर सीधे निर्देश दे रहे थे। सी. अरविंद ने ED और CBI के सामने अपने बयानों में खुलासा किया कि मार्च 2021 में अरविंद केजरीवाल के आवास पर शराब कारोबारियों का लाभ मार्जिन 12 प्रतिशत तय करने का फरमान लिया गया था।

YSRCP सांसद ने की थी केजरीवाल से मुलाकात

जांच एजेंसी के मुताबिक, YSRCP सांसद मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मिले थे। केजरीवाल ने उनका दिल्ली में शराब के कारोबार में शामिल होने के लिए स्वागत किया था। इसके अलावा कई नेता पर्दे के पीछे रहकर आबकारी घोटाले में शामिल थे। जिसमें साउथ की ‘लिकर लॉबी’ की अहम भूमिका है।

17 नवंबर 2022 को दी गई थी नई शराब नीति को मंजूरी

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने पिछले साल 17 नवंबर को नई शराब नीति को मंजूरी दी थी। इसके तहत दिल्ली में शराब की सरकारी दुकानों को बंद कर दिया गया। नई नीति को लागू करने के लिए दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया था। हर जोन में 27 शराब की दुकानें थीं। इन दुकानों का मालिकाना हक जोन को जारी किए गए लाइसेंस के तहत दिया गया था। हर वार्ड में 2 से 3 वेंडर को शराब बेचने की अनुमति दी गई।

सुकेश चंद्रशेखर ने कहा था- केजरीवाल शराब घोटाले का वजीर

महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने पटियाला हाउस कोर्ट में अपनी पेशी के दौरान मार्च 2023 में कहा था कि शराब नीति में अगली गिरफ्तारी अरविंद केजरीवाल की होगी। सुकेश ने कहा, “केजरीवाल वजीर है, एक-एक का पर्दाफाश करूंगा। शराब नीति मामले में अभी और गिरफ्तारियां होंगी। केजरीवाल अपनी टास्क को बखूबी निभा रहे हैं। शराब नीति से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। इससे पहले सुकेश चंद्रशेखर ने चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। सुकेश ने आम आदमी पार्टी को महाठग बताया था। इसके साथ ही लिखा था कि आपके सभी उल्टी सीधी कारगुजारियों और कारनामों का खुलासा करने के लिए मैं आ रहा हूं। सुकेश ने दावा किया था कि उसने सिसोदिया के साथ भी काफी नजदीकी से काम किया है और उसे पता है कि वो कैसे हर विभागीय काम में कमीशन खाते हैं।

दिल्ली में AAP के विधायकों और मंत्रियों की गिरफ्तारी

2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से अब तक केजरीवाल की पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। आम आदमी पार्टी के अब तक पांच मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया और दो मंत्रियों को रिश्वत लेने के मामले में पकड़ा गया। जबकि एक मंत्री को फर्जी डिग्री के मामले में आरेस्ट किया गया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के विधायक भी कई मामले में जेले भेजे गए थे। डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया को शराब घटाले में आपराधिक साजिश रचने के आरोप में जेल भेजा गया है। दिल्‍ली कैबिनेट में कुल 6 मंत्री थे, उनमें से दो अब जेल में हैं।

दिल्ली में किन मंत्रियों और विधायकों को अबतक गिरफ्तार किया गया

मनीष सिसोदियाः शराब घोटाले में जेल में

शराब घोटाले में सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। मनीष सिसोदिया को सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सीबीआई ने उन्हें कई सबूत दिखाए, इसमें कुछ दस्तावेज और डिजिटल सबूत थे। सिसोदिया इन सबूतों के सामने कोई जवाब नहीं दे सके थे। सिसोदिया को पूछताछ के लिए पहले पांच दिन और बाद में दो दिन के लिये सीबीआई की हिरासत में सौंपा गया था। यह अवधि समाप्त होने के बाद सिसोदिया को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

सत्येंद्र जैन : मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को 30 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज है। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन, उनकी पत्नी पूनम और अन्य पर केस दर्ज किया गया है। सत्येंद्र जैन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली ने कई शेल कंपनियां बनाई और खरीदी थी। कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटर्स से 54 शेल कंपनियों के जरिए 16.39 करोड़ रुपए का काला धन भी ट्रांसफर किया। ईडी जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। पिछले दिनों सत्येंद्र जैन के एक के बाद एक कई वीडियो जेल से सामने आए थे। इसमें सत्येंद्र जैन जेल की बैरक में मसाज लेते हुए दिख रहे थे।

अमानतुल्ला खानः अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन में पहुंचे जेल

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन से जुड़े एक मामले में सितंबर 2022 में गिरफ्तार हुए आप विधायक अमानतुल्ला खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। नवंबर 2022 में दिल्ली की एक अदालत ने कहा था कि ओखला विधायक के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के सबडिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने नवंबर 2016 में दिल्ली वक्फ बोर्ड में विभिन्न मौजूद और गैर-मौजूद पदों पर खान की ओर से मनमानी और अवैध नियुक्तियों का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई ने एक मामला दर्ज कर लिया था और जांच की थी, जिसमें पर्याप्त सबूत मिले थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उपराज्यपाल से अभियोजन की मंजूरी मांगी थी। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के विरुद्ध 2016 में दर्ज ‘अवैध’ नियुक्तियों के मामले में सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी।

आसिम अहमद खान: बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने के मामले में फंसे

साल 2018 में दिल्ली सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया था। तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटा दिया था। आसिम पर 6 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। आसिम अहमद खान दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री थे, सीएम केजरीवाल ने आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। आसिम पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने का आरोप है। केजरीवाल ने कहा था- ‘शिकायत करने वाले ने आसिम से बातचीत की। ऑडियो रिकॉर्डिंग मेरे पास भेजी। इसके बाद मैंने मंत्री के ख‍िलाफ कार्रवाई की।’ जबकि आसिम खान ने कहा था- मेरे खिलाफ साजिश की गई है।

संदीप कुमारः बलात्कार के आरोप में भेजे गए थे जेल

2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा सीट से विधायक बने संदीप कुमार को दिल्ली सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री और एससी-एसटी कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार को बलात्कार और अन्य आरोपों के सिलसिले में सितंबर 2016 में गिरफ्तार किया गया था। एक महिला ने उनके खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी और बाद में कुमार ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया था। यह महिला संदीप कुमार की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले सामने आई एक विवादास्पद सीडी में उनके साथ दिखाई दी थी। महिला ने आरोप लगाया था कि वह राशन कार्ड बनवाने के लिए गई थी लेकिन कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उनके साथ रेप किया गया। घटना के सामने आने के बाद कुमार को पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया था।

सोमनाथ भारतीः बीवी की प्रताड़ना के आरोप में गए जेल

दिल्ली सरकार के मंत्री रहे सोमनाथ भारती मालवीय नगर सीट से विधायक रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की पहली बार सरकार बनने के बाद सोमनाथ भारती को कानून, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली थी। सोमनाथ भारती की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब उनकी पत्नी लिपिका मित्रा ने 2013 में उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। लिपिका ने अपनी शिकायत में सोमनाथ भारती के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि सोमनाथ भारती ने उन्हें गर्भपात के लिए मजबूर किया। इसके बाद 2014 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। यूपी दौरे पर एक विवादित बयान के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2021 में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई।

जितेंद्र तोमरः फर्जी डिग्री रखने के आरोप में हुए थे गिरफ्तार

2015 में दिल्ली की त्रिनगर सीट के विधायक बने जितेन्द्र तोमर को केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। उन्हें दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी। उनके ऊपर वकालत की फर्जी डिग्री रखने का आरोप लगा था। इसका खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ था। मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। जहां भागलपुर यूनिवर्सिटी ने उनकी डिग्री को फर्जी बताया। 2016 में जितेन्द्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया। जनवरी 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी।

गुलाब सिंहः जबरन वसूली के आरोप में हुए थे गिरफ्तार

दिल्ली के मटियाला से विधायक गुलाब सिंह को अक्टूबर 2016 में गुजरात के सूरत से जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब वह आम आदमी पार्टी के गुजरात के प्रभारी थे। दिल्ली में दर्ज हुए मामले में गुलाब सिंह यादव को गुजरात से गिरफ्तार कर यहां लाया गया था। गुलाब सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ धमकी और वसूली मामले में गैर-जमानती वॉरंट जारी किया गया था। AAP के विधायक गुलाब सिंह यादव नवंबर 2022 में दिल्ली के श्याम विहार में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इस दौरान कार्यकर्ता टिकट बेचने को लेकर अचानक आक्रोशित हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। कार्यकर्ता विधायक पर टूट पड़े और उनका कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की करने लगे। कार्यकर्ताओं से बचने के लिए विधायक बाहर निकलकर भागने की कोशिश करने लगे तो कार्यकर्ता उनका पीछा करते हुए उन्हें मुक्के मारते रहे। कार्यालय में मारा इसके बाद पीटते हुए कार्यालय से बाहर लेकर आए। आखिरकार विधायक को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।

दिल्ली शराब घोटाला : केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से कांग्रेस वकीलों पर फूँक दिए 28 करोड़ रूपए

अपने आपको सबसे ईमानदार का ढोल पीटने वाले अरविन्द केजरीवाल किस तरह सरकारी खजाने का दुरूपयोग कर ऐश कर रहे हैं। ये वही केजरीवाल है, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं कांग्रेस के भ्रष्टाचारी 370 सबूतों को चुनावी सभाओं में लहराते थे, लेकिन खुद कितने भ्रष्टाचारी हैं, सरकारी खर्चे पर विदेशी अख़बारों में अपनी सरकार की प्रशंसा छपवा जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है। यह सत्ता परिवर्तन होते ही सामने आएगा।   
दिल्ली का शराब घोटाला न केवल अरविंद केजरीवाल सरकार बल्कि दिल्ली के सरकारी खजाने के लिए भी भरा पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार शराब घोटाले में पैरवी करने वाले वकीलों को 25 करोड़ रुपए से अधिक दे चुकी है। वहीं, बीते 18 महीनों में वकीलों की फीस के रूप में 28.10 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि शराब घोटाले की पैरवी करने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी को 18.97 करोड़ रुपए दिए हैं। वहीं, जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन की पैरवी करते दिखाई देने वाले वकील राहुल मेहरा को 5.30 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंघवी को साल 2021-22 के दौरान, पहले तो 14.85 करोड़ रुपए दिए गए। लेकिन, बाद में 4.1 करोड़ रुपए दिए गए हैं। मेहरा का भुगतान, जो 2020-21 में बयान की व्यय सूची में 2.4 लाख रुपए के रूप में दिखाया गया था, 2021-22 में बढ़कर 3.9 करोड़ रुपए हो गया और वर्तमान में 1.3 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि शराब घोटाला सामने आने से पहले, दिल्ली में आप सरकार का कुल खर्च केवल 6.70 करोड़ रुपए था। इसमें, अधिकांश खर्च सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और स्वास्थ्य विभाग के लिए खर्च किया जाता था।

दिल्ली का शराब घोटाला

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के अंतर्गत शराब कारोबार में गुटबाजी और एकाधिकार चल रहा था। यह भी आरोप लगाया गया है कि नई आबकारी नीति के तहत शर्तों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को भी शराब के लाइसेंस अवैध रूप से वितरित किए गए थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल की अनिवार्य स्वीकृति के बिना ही एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किए थे। सिसोदिया ने शराब विक्रेताओं द्वारा लाइसेंस के लिए भुगतान की जाने वाली लाइसेंस फीस पर ₹144.36 करोड़ की छूट दी थी। उन्होंने यह छूट कोविड-19 महामारी के नाम पर दी थी। यही नहीं, सिसोदिया ने बीयर पर प्रति पेटी 50 रुपए के आयात पास शुल्क को भी हटा दिया था। साथ ही, विदेशी शराब की कीमतों में संशोधन करके शराब विक्रेताओं को अनुचित तरीके से लाभ दिया था।
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, एल-1 लाइसेंस अवैध रूप से जारी किए गए थे। इसके लिए वकायदा रिश्वत ली गई थी। यह भी सामने आया है कि एक व्यापारी ने मनीष सिसोदिया के सहयोगी द्वारा संचालित कंपनी को 1 करोड़ रुपए का दिए थे। जाँच में यह भी सामने आया है कि L-1 लाइसेंस के लिए व्यापरियों से करोड़ों रुपए लिए जा रहे थे।

दिल्ली सरकार “मैसेंजर पर गोली न चलाएँ, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को धमकी न दें : सुप्रीम कोर्ट

केजरीवाल कोरोना सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वो डॉक्टर और नर्सों को सरकारी अस्पताल की दुर्दशा सामने लाने के लिए दंडित ना करें और ना ही उन्हें धमकाए। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसे कोरोना वॉरियर्स को धमकाया है, जिन्होंने कोरोना वार्ड में अमानवीय स्थिति के वीडियो बनाए। इसके बाद ऐसे प्रकरण सामने आए, जिनमें बताया गया कि अब उन्हें (वीडियो बनाने वाले को) अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के बिगड़ते हालातों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (जून 17, 2020) को एक बार फिर दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के समुचित इलाज और सरकारी अस्पतालों में शवों के गरिमामयी ढंग से निपटान से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार से पूछा – “दिल्ली ने इस मामले में क्या किया है? कृपया डॉक्टरों, नर्सों की सुरक्षा करें। वे कोरोना वॉरियर्स हैं। दिल्ली सरकार नहीं चाहती कि सच्चाई सामने आए। ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा – “मैसेंजर पर गोली न चलाएँ, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को धमकी न दें, उन्हें समर्थन दें। आप इस तरह से सच्चाई को दबा नहीं सकते। आपने एक डॉक्टर को निलंबित क्यों किया, जिसने आपके एक अस्पताल की दयनीय स्थिति का वीडियो बनाया था?”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार से एक हलफनामा भी देने को कहा है। आगे की सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की गई है।
अवलोकन करें:-
कोरोना बन गया व्यापार
निगम बोध घाट पर दाह संस्कार करने पर चिता लगाने से पहले ही वहां के सेवादार दो बण्डल पेटी के लिए आवाज़ लगा देते हैं। पहले बण्डल जो 350/400 रूपए में मिलता था, अब मिलता है 700 रूपए का।अस्पतालों पर तो सबकी नज़र है, लेकिन और इस अवैध व्यापार की ओर किसी सरकार का ध्यान नहीं। और यह गोरखधंधा कई वर्षों से चल रहा है।


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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार मोदी सरकार कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर काफी संवेदनशील है। मरीजों के समुचित इलाज के ....
हकीकत यह है कि हिसार के पैदाइशी अरविन्द केजरीवाल मुफ्तखोर दिल्लीवासियों की नब्ज अच्छी तरह पढ़ चुके हैं, चार साल कुछ मत करो, अंतिम यानि चुनावी वर्ष में कोई न कोई चीज फ्री कर दो, दिल्ली वाले सब भूल जाएंगे कि कोरोना से कितने मरे और कितने जिए, दिल्ली में कोरोना क्यों और कैसे फैला? मुफ्तखोर वोट हमें ही देंगे। केजरीवाल सरकार की लापरवाही के ही कारण आज दिल्ली में कितने hotspot और containment zones हैं। लेकिन अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए कभी प्राइवेट हॉस्पिटल तो कभी दिल्ली से बाहर वालों के इलाज पर पाबन्दी से दिल्ली वालों को मूर्ख बना कर अपने आपको जनता का शुभचिंतक और ईमानदार साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। केजरीवाल आखिर कब तक जनता को मुर्ख बनाते रहोगे?      

निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने का दिया निर्देश

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मोदी सरकार कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर काफी संवेदनशील है। मरीजों के समुचित इलाज के लिए हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशें की जा रही हैं। इसी बीच कई निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के मामले में मनमानी और ज्यादा पैसे मांगे जाने की खबरों के बाद मोदी सरकार हरकत में आ गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए कीमत तय करें। वहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जमीनी स्तर पर कोरोना से रही मृतकों की संख्या केवल शमशान और कब्रिस्तान जाने पर ही ज्ञात होती है। जून 16 को परिचित की मृत्यु होने के कारण निगम बोध घाट जाने पर एक घंटे(12 बजे से 1 बजे तक) में लगभग 14/15 शव देखने पर जब कर्मकांड करने वाले पंडितों से बातचीत करने पर चौकाने वाले आंकड़े सामने आये। संक्षेप में इतना ही कहना है कि "शाम को टीवी पर हुई मौतों की संख्या सुन हंसी आती है, कितने बड़े स्तर पर झूठ बोला जा रहा है। तीन दिन पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की केजरीवाल से बातचीत वाले दिन इतने शवों के दाह संस्कार हुआ, बता नहीं सकते। हनुमान मंदिर तक शवों से भरी गाड़ियों की लाइन लगी हुई थी। और एक एम्बुलेंस में 7/8 शव होते हैं, जिसकी आप सब अपनी आँखों से इस समय देख रहे हैं।"
Endless queues & funerals, scared staff — Delhi's Covid crisis ...
Coronavirus latest: worldwide deaths pass 250,000, with US ...दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर आम आदमी पार्टी के जितने भी धुरंदर नेताओं को इतने अपशब्दों से सम्बोधित करते बोले कि "....कोई बताए कि ये...कहाँ के रहने वाले हैं, और... कहते हैं कि दिल्ली में दिल्ली से बाहर वालों का इलाज नहीं होगा। शर्म आती है...ये पाखंडियों को नेता कहने पर शर्म आती है...दिल्ली का नाश करने में लगे हैं....दिल्ली वालों को एक फ्री की हड्डी दिखाओं..." अगर केजरीवाल सरकार गंभीर होती दिल्ली में इतनी बीमारी नहीं बढ़ती। छोटी-सी दिल्ली में Red Zone की कमी नहीं। "बाबू साहब कोरोना से कितनी मौतें हो रही हैं, दूसरे शमशानों और कब्रिस्तानों में जाकर देखिए, तब मालूम होगा कि अख़बारों और टीवी में बताई जाने वाली मौतों में कितना फक्र है। जब सिर्फ एक ही घंटे में इतने दाह संस्कार देखें हैं, शाम तक और कितने होंगे, अंदाज़ा लगा लो।" 
कोरोना बन गया व्यापार 
निगम बोध घाट पर दाह संस्कार करने पर चिता लगाने से पहले ही वहां के सेवादार दो बण्डल पेटी के लिए आवाज़ लगा देते हैं। पहले बण्डल जो 350/400 रूपए में मिलता था, अब मिलता है 700 रूपए का।अस्पतालों पर तो सबकी नज़र है, लेकिन और इस अवैध व्यापार की ओर किसी सरकार का ध्यान नहीं। और यह गोरखधंधा कई वर्षों से चल रहा है।      
कीमतें तय करने और प्रचारित करने का निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि इस मुद्दे पर कई स्थानीय निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ परामर्श करें। इसके बाद जब एक बार कीमत तय हो जाए, तब इसे प्रचारित भी करें ताकि मरीजों और सेवा प्रदाताओं को अच्छी तरह से पता चल जाए।
राज्यों के अस्पतालों में पहले से कीमतें तय
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कई राज्यों ने पहले से ही कोरोना की जांच और इलाज को लेकर अपने राज्यों के अस्पतालों में कीमत तय कर दी है। बयान में आगे कहा गया कि PMJAY पैकेज और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के पैकेज की दरें पहले से ही राज्यों के पास उपलब्ध हैं।
निजी अस्पतालों के साथ मिलकर काम करने पर जोर
वहीं, कुछ राज्यों में क्रिटिकल बिस्तरों की कमी की खबरें भी सामने आई हैं, इसलिए केंद्र ने राज्यों से प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन वाले बेड्स आदि की कमी को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने को कहा है।
स्वस्थ होने की दर 51.08 प्रतिशत तक पहुंची
वहीं मोदी सरकार की सजगता और तत्परता के साथ ही कोरोना मरीजों की जांच और इलाज के लिए सुविधाएं मुहैया करायी जा रही है। समय पर रोग का पता लग जाने और समुचित चिकित्सकीय उपचार से काफी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर में लगातार वृद्धि हो रही हैं। सोमवार को यह दर 51.08 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों में कोरोना से संक्रमित 7419 व्यक्ति स्वस्थ हुए हैं। इन्हें मिला कर अब तक कोरोना से संक्रमित कुल 1,69,797 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में 1,53,106 व्यक्ति सक्रिय चिकित्सीय देखरेख में हैं।
‘कोरोना के मामले तेजी से नहीं, बल्कि सपाट तरीके से बढ़े’
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार (15 जून) को कहा कि सरकार कोरोना महामारी से निपटने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रही है। उन्होंने कोरोना वायरस की वृद्धि दर दिखाते एक ग्राफ के साथ ट्वीट में कहा, ”लॉकडाउन जल्दी लगा दिया गया जिससे कोरोना वायरस के मामले तेजी से नहीं, बल्कि सपाट तरीके से बढ़े। ग्राफ में दिखाया गया कि 20 मार्च को कोरोना मामलों की वृद्धि दर 30 प्रतिशत से अधिक थी जो मई के पहले सप्ताह से करीब पांच प्रतिशत बनी हुई है। अमेरिका, ब्राजील और रूस के बाद कोरोना महामारी के सबसे ज्यादा मामले भारत में है।”

वाजिब दरों पर इलाज की सुविधा मुहैया कराने का प्रयास
मोदी सरकार ने सोमवार(जून 15) को राज्यों और केंद्रशासित प्रदशों से ऐसे बुनियादी ढांचे और वाजिब दरों पर जरूरी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने को कहा है। इस बीच आईसीएमआर ने निषिद्ध क्षेत्रों में कोरोना वायरस के उपचार के लिए त्वरित एंटीजन टेस्ट किटों के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। इससे लेबोरेटरी में जांच के बिना तेजी से उपचार संभव हो सकेगा।

विवाद : केजरीवाल सरकार ने विज्ञापन में सिक्किम को आजाद देश बताया

अरविंद केजरीवाल
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फिर से एक विवाद को जन्म दे दिया है। शनिवार (Hindustan Times, 23 मई, 2020, Page 3) को अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम को एक स्वतंत्र देश बता दिया। इसे लेकर विवाद पैदा होना स्वाभाविक है।
दिल्ली सरकार ने विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों में सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। दिल्ली सरकार का यह विज्ञापन करीब 200 वालंटियर्स की भर्ती के लिए है। बहरहाल, इस विज्ञापन में सिक्किम को एक अलग इकाई बताते हुए भूटान और नेपाल की तरह ही संप्रभु देशों की श्रेणी में रखा गया है।
दिल्ली सरकार द्वारा जारी विज्ञापन
विज्ञापन में आवेदन के लिए पात्रता बताई गई है। पात्रता मानदंड में कहा गया है कि भारतीय नागरिक या सिक्किम, भूटान, नेपाल और दिल्ली के लोग आवेदन कर सकते हैं।
सिक्किम 1975 में भारत का अभिन्न हिस्सा बना था। पूरी तरह से भारत में विलय होने के बाद यह देश का 22 वाँ राज्य बना। यह देश का दूसरा सबसे कम आबादी वाला राज्य है और पूर्वोत्तर में स्थित है।
जाने कैसे हुआ सिक्किम का भारत में विलय 
भारत ने 1947 में स्वाधीनता हासिल की। इसके बाद पूरे देश में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में अलग-अलग रियासतों का भारत में विलय किया गया। इसी क्रम में 6 अप्रैल, 1975 की सुबह सिक्किम के चोग्याल राजा को अपने राजमहल के गेट के बाहर भारतीय सैनिकों के ट्रकों की आवाज़ सुनाई दी।
भारतीय सेना ने राजमहल को चारों तरफ़ से घेर रखा था। सेना ने राजमहल पर मौजूद 243 गार्डों पर तुरंत काबू पा लिया। इसके बाद चोग्याल को उनके महल में ही नज़रबंद कर दिया गया। फिर सिक्किम में जनमत संग्रह कराया गया। जनमत संग्रह में 97.5 फीसदी लोगों ने भारत के साथ जाने की वकालत की। इसके बाद सिक्किम को भारत का 22वाँ राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में पेश किया गया।
उसी दिन इसे 299-11 के मत से इसे पास कर दिया गया। राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ और 15 मई, 1975 को जैसे ही राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने इस बिल पर हस्ताक्षर किए, चोग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया।
सिक्किम मुख्य सचिव ने जताई आपत्ति 
सिक्किम के मुख्य सचिव एससी गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने एक पत्र के माध्यम से दिल्ली सरकार के इस रवैये पर आपत्ति जताई और लिखा कि ये दुखदाई है।
गुप्ता ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा कि ये एक बेहद ही नुकसानदायक क़दम है। उन्होंने कहा कि सिक्किम के लोग इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने को लेकर गौरव महसूस करते हैं। बता दें कि मई 16, 1975 को सिक्किम भारतीय गणराज्य का 22वाँ राज्य बना था। आईएएस अधिकारी गुप्ता ने इस पत्र के साथ-साथ दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए एडवर्टाइजमेंट की कॉपी भी संलग्न की और दिल्ली के मुख्य सचिव को प्रेषित किया।
मुख्य सचिव ने इस आपत्तिजनक विज्ञापन को जल्द से जल्द वापस लेने की अपील की है। साथ ही एक ऐसी विज्ञप्ति जारी करने की अपील की गई है, जिससे सिक्किम के लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुँचे। बता दें कि इस विज्ञापन के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

दिल्ली : उत्तरी नगर निगम : डॉक्टरों को जनवरी से नहीं मिली सैलरी

केजरीवाल, डॉक्टर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और केंद्र सरकार इससे निपटने के लिए जनता को लगातार जागरूक करने में लगी हुई है। उधर दिल्ली सरकार पर इस मामले में असंवेदनशीलता दिखाने के आरोप लग रहे हैं।
अब अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा है कि उसने पिछले 3 महीनों से डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है। ऐसा दिल्ली की एक अधिकारी के ट्वीट से पता चला है। नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की कमिश्नर वर्षा जोशी ने ट्वीट कर बताया है कि डॉक्टरों को जनवरी 2020 से लेकर अब तक सैलरी नहीं दी गई है।
इससे पूर्व सफाई कर्मचारियों को वेतन न मिलने के कारण, दिल्ली की सफाई व्यवस्था चौपट होने पर केंद्र में मोदी सरकार पर समय से अनुदान न किए जाने का ठीकरा फोड़ते रहे। वही स्थिति अब डॉक्टरों के वेतन के हो रही है। दिल्ली सरकार के पास उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में पीड़ितों पर रूपए लुटाने के लिए धन था, लेकिन डॉक्टरों को वेतन देने के लिए नहीं। केजरीवाल बताएं कि "जब से दिल्ली की सत्ता में आए हैं, किसी मंत्री अथवा विधायक का वेतन रुका? 
दरअसल, वर्षा जोशी ने एक फोटो शेयर किया था, जिसमें नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की डॉक्टरों की टीम इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुस्तैद दिख रही है। कई लोगों ने इस तस्वीर के सामने आने के बाद डॉक्टरों की तारीफ करते हुए लिखा कि इन विषम परिस्थितियों में भी वो निःस्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। इस तस्वीर में IGI एयरपोर्ट पर डॉक्टरों को स्क्रीनिंग के लिए कार्यरत देखा जा सकता है। मास्क और ग्लव्स पहने ये डॉक्टर्स यात्रियों का मेडिकल टेस्ट करने के लिए वहाँ जमे हुए हैं।


इस तस्वीर को ट्वीट करने के बाद वर्षा जोशी ने बताया कि उन्होंने जनवरी से लेकर अब तक डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने अभी तक फंड रिलीज नहीं किया है। अभी तक उनकी ट्वीट का दिल्ली सरकार के किसी मंत्री या नेता ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोगों ने कहा कि केजरीवाल अपनी खुशामदी में किए गए ट्वीट्स का जवाब देते हैं, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान नहीं दे रहे। हालाँकि, एक व्यक्ति ने IAS अधिकारी वर्षा को सलाह दी कि वो दूसरे संसाधनों का प्रयोग करते हुए डॉक्टरों को सैलरी दें। वर्षा ने कहा कि अगर उनके पास दूसरे संसाधन होते तो फिर वो सैलरी के लिए दिल्ली सरकार के फंड्स का इन्तजार ही क्यों करती?
आज रविवार (मार्च 20, 2020) को पूरे देश में जनता कर्फ्यू का ऐलान किया गया है और आज 14 घंटों के लिए लोग सेल्फ-क्वारंटाइन का पालन करते हुए घरों में ही रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि शाम को सभी लोग अपने घर के दरवाजे, खिड़की या बालकनी में के पास जाकर ताली, घंटी या थाली बजा कर उन डॉक्टरों और कर्मचारियों का धन्यवाद करें, जो इन विषम परिस्थितियों में भी लगातार काम कर रहे हैं।
भारत में अब तक कोरोना वायरस के 327 मामले आ चुके हैं। इनमें से 26 मामले अकेले दिल्ली के हैं। ऐसे में डॉक्टरों को सैलरी न दिया जाना दिखाता है कि दिल्ली सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। जब सीएम केजरीवाल से शाहीन बाग़ प्रदर्शन के कारण कोरोना फैलने का सवाल किया गया था तो उन्होंने इसे हँसी-मजाक में टाल दिया था।

‘लाडली योजना’ : अरविंद केजरीवाल सरकार का फर्जीवाड़ा

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं 'आदमी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार होता है और भ्रष्टाचार की ही मदद से भ्रष्टाचार मुक्त हो जाता है', यही बात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की भी है, जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ते सत्ता में आए और खुद ही भ्रष्टाचार के रुमाली बिस्तर पर बैठ गए।  
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में आने का कारण भ्रष्टाचार से लड़ाई बताया था और वह हमेशा अपने लंबे-चौड़े भाषणों में भ्रष्टाचार मिटाने की बाते भी करते रहते हैं लेकिन अरविंद केजरीवाल की ये बातें बातें ही बनकर रह गई हैं। जनता यह भी नहीं भूली होगी कि किस तरह तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 घोटाले की सूची दिखाने के साथ-साथ उन्हें जेल भेजने की लॉलीपॉप जनता को ललचाते थे, लेकिन क्या हुआ 'खोदा पहाड़ निकला चूहा, वह भी मरा हुआ', यानि शीला स्वर्ग सिधार गयी, एक भी उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुद्दा सिद्ध करने में पूर्णरूप से असफल रहे। अब उसी ईमानदार केजरीवाल के खिलाफ आए दिन नए-नए घोटालों के मामले उजागर हो रहे हैं। 
‘लाडली योजना’ में केजरीवाल का करप्शन
अरविंद केजरीवाल के नाम घोटालों में अब एक और नया घोटाला जुड़ गया है। भाजपा की दिल्ली इकाई ने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया है कि ‘लाडली योजना’ के नाम पर दिल्ली सरकार ने बड़े घोटाले को अंजाम दिया है।
आरटीआई की कॉपी शेयर कर किया योजना में घोटाले का दावा
9 जनवरी को दिल्ली भाजपा ने एक आरटीआई कॉपी के साथ केजरीवाल की एक तस्वीर शेयर करते हुए ‘लाडली योजना’ में घोटाले का आरोप लगाया। दिल्ली भाजपा ने ट्वीट में बताया कि ‘केजरीवाल सरकार डकार गई लाडलियों का हक’, ‘लाडली योजना में हुई खुलेआम लूट’, ‘2016-17 में आए 9,122 आवेदन, योजना का फर्जी लाभ 37,751 लोगों को दिया’। आरटीआई के जरिए हुआ सनसनीखेज खुलासा। अब कोई इनसे पूछे कि जब 9,122 आवेदन प्राप्त हुए थे, फिर किस आधार पर 37,751 लाड़लियों को लाभ पहुँचाया गया? 

वहीं इससे एक दिन पहले बुधवार को भाजपा ने दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी रिपोर्ट पेश की थी और केजरीवाल सरकार को फेल बताया था। भाजपा, केजरीवाल सरकार के खिलाफ चार्जशीट कैंपेन के तहत हर योजना पर अपनी रिपोर्ट पेश कर रही है।
केजरीवाल सरकार ने पूरा नहीं किया सब्सिडी का वादा
केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने बताया कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एख बड़ा घोटाला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे उनके खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिर क्या वजह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं दी जा रही है।
सीबीआई जांच ना होने पर लोकायुक्त के पास जाएंगे
युसुफ ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि वह इन कंपनियों का ऑडिट कराएगी, लेकिन पांच सालों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। वही वरिष्ठ नेता मुकेश शर्मा ने इस पूरे मामले में जांच की मांग की, साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाएंगे।
करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
सीबीआई ने हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्र्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। मामले में अहम बात यह है कि रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर हैं। जागरण के अनुसार रजिस्ट्रार के लॉकर से सत्येंद्र जैन की तीन संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली है। इसके जरिये वर्ष 2011 में रुपये जमा कराये गए थे। यह डिपॉजिट स्लिप जैन, उनके परिवार व उन कंपनियों के नाम हैं, जिनमें जैन निदेशक थे। इसके अलावा, सत्येंद्र जैन व उनकी पत्नी के नाम की 41 चेक बुक भी मिली हैं। आयकर विभाग ने पहले से ही बाहरी दिल्ली में सत्येंद्र जैन की कथित 220 बीघा जमीन बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त कर रखी है। साथ ही भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई में उनके खिलाफ पहले ही मामला दर्ज है। जांच एजेंसी उनके खिलाफ हवाला ऑपरेटरों से संबंधों और काले धन को सफेद करने के लिए बोगस कंपनियां बनाने के मामले में भी जांच कर रही है।

2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला
दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया का भी एक घोटाला सामने आया, ये घोटाला स्कूलों के निर्माण से जुड़ा था। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला है कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं। लोग ने सवाल उठाए कि एक कमरे की लागत में 24 लाख रुपये कैसे हो सकती है। क्या केजरीवाल जी ने कमरे में सोने की टाइल्स लगवाईं हैं? यही नहीं ट्विटर पर #SisodiaKaGhapla ट्रेंड करने लगा और लोग अपनी बेबाक राय दीं।



खुद केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप
सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप उनके अपने ही कैबिनेट सहयोगी कपिल मिश्रा ने लगाया था। सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। जैसे इतने गंभीर आरोप पर न तो उन्होंने ठीक से सफाई देने की जरूरत समझी और न ही कपिल मिश्रा के विरोध में किसी कानूनी कार्रवाई की ही हिम्मत जुटा पाए।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता 
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा, लेकिन ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप है। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई है। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए हैं। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई है।

दवा घोटाला
केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है। इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि विवादित सीएम ने अपने खासम-खास और कई घोटालों के आरोपी स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के दबाव में ही दवाई खरीदने का काम मेडिकल सुपरिन्टेंडेन्ट से छीनकर, सेन्ट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी को दे दिया था। यानी लूट के लिए ऊपर से नीचे तक पूरी तैयारी की गई थी।

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप
दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सीएनजी घोटाला
केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। अंग्रेजी समाचार पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 10,000 कारों में जो सीएनजी किट लगावाए हैं, वो फर्जी कंपनी ने तैयार किए हैं। ये सारे सीएनजी किट 10 महीनों के भीतर कारों में फिट किए गए थे। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्जी सीएनजी किट कंपनी को इसका ठेका ऑड-इवन के फौरन बाद दिया गया था। जाहिर है कि इसके समय को लेकर भी दिल्ली सरकार की मंशा संदेहों से परे नहीं है। अपने आरोपों के समर्थन में कपिल ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार
घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।