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उत्तर प्रदेश : SP-RLD को समर्थन से पीछे हटे टिकैत, BJP कैंडिडेट हमारे दुश्मन नहीं--नरेश टिकैत, किसान नेता

                                     सपा रालोद गठबंधन को समर्थन के बयान से पलट गए नरेश टिकैत 
राजनीति वह चीज है, जहाँ कौन नेता कब पलटी मार जाये, कह नहीं सकते। राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत द्वारा पलटी मारने से किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। किसान आंदोलन के दौरान भी इनका योगदान भी केवल भाई की ममता के लिए था। नरेश भी अच्छी तरह जानते हैं, कि कृषि कानून किसान विरोधी नहीं, बल्कि उसके हित में थे, लेकिन दलालों के चुंगल में फंस भाई राकेश का मजबूरी में समर्थन करते रहे। दूसरे, नरेश द्वारा समाजवादी और राष्ट्रीय लोक दल को समर्थन देने के बावजूद पीछे हटने का मुख्य कारण सर्वे में योगी सरकार की वापसी ने एक मनोवैज्ञानिक भय ने संकेत दे दिया कि आम जनमानस किसान विरोधी हो गया है, जो किसान संघ के बिलकुल भी हित में नहीं है। 

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अपने उस बयान पर यू टर्न ले लिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सपा और रालोद गठबंधन (SP-RLD Alliance) के प्रत्याशियों को खुला समर्थन देने की बात कही थी। यह यू टर्न उन्होंने 24 घंटे के ही अंदर लिया है। नए बयान में उन्होंने किसी का भी समर्थन न करने की घोषणा की है। यह बयान उन्होंने 16 जनवरी 2022 (रविवार) को जारी किया।

ANI को दिए इंटरव्यू में किसान नेता नरेश टिकैत ने अपने पिछले बयान को गलती माना है। नए बयान में नरेश टिकैत ने कहा, “वैसे तो कोई आ ही नहीं रहे। ये गठबंधन वाले ही आए। वहाँ किसान भवन में इकट्ठे हो रहे थे। मैंने भी कह दिया कि इनका ख्याल रखो। हम संयुक्त किसान मोर्चे के बंधन से फ़ालतू बोल पड़े। हमारे लिए किसान संयुक्त मोर्चा ही सर्वोपरि है। किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी आया तो हम उसे आशीर्वाद देंगे। यहाँ कोई वोट माँगने न आए। 40 संगठनों का मोर्चा है किसान संयुक्त मोर्चा। हम अकेले जाएँगे तो वो हमें भी निकाल देंगे। 2014 में BJP की लहर थी तब हमने उन्हें समर्थन किया था। पर अब दूसरी बात है। भाजपा कैंडिडेट भी हमारे दुश्मन नहीं है। सबका स्वागत है।”

एक दिन पहले शनिवार (15 जनवरी) को नरेश टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वो गठबंधन को सफल बनाने की बात कह रहे थे। उनके आस पास समाजवादी और RLD कार्यकर्ता दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, “आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है। गठबंधन ते सफल बनाना है। गठबंधन को जिताने के लिए आप जो भी कर सकते हैं करें।”

अब टिकैत ने अपने इसी बयान पर सफाई दी है। उन्होंने वायरल वीडियो में जो कुछ भी कहा उसे गलती बताते हुए कहा कि वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। अगर वह संयुक्त किसान मोर्चा से अलग गए तो मोर्चा उन्हें अलग कर सकता है। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट्स को समर्थन दिए जाने पर ये भी कहा कि अगर बीजेपी उम्मीदवार उनके पास जाएँगे तो वो उनका स्वागत करेंगे। चाय पानी की व्यवस्था करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उनके दुश्मन नहीं है।

लोकसभा में दिखा राहुल गांधी का ‘पलटीमार अवतार’

कांग्रेस कब राहुल गाँधी को राजनीति की शिक्षा देगी, अगर परिवार की गुलामी इस बात की आज्ञा नहीं दे रही, निश्चित रूप से कांग्रेस का डूबना निश्चित है। अभी तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 'पलटीमार' की महारत थी, लेकिन फरवरी 11 को लोकसभा में केजरीवाल को भी पीछे छोड़ दिया। जो बजट पर बोलने के लिए कहकर अपनी ही बात से पलट गए। यही कारण है पार्टी में बुद्धिजीवी के साथ-साथ अन्य कोई दल कभी गंभीरता से नहीं लेता। कांग्रेस को रही-सही अपनी इज्जत बचाने की खातिर राहुल और प्रियंका को जितना दूर रखेंगे, उतना ही अच्छा है। 
जब लोकसभा की कार्यवाही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हिस्सा लेते हैं तो अपनी नौटंकी से सदन के साथ ही देश के लोगों का भी भरपूर मनोरंजन करते हैं। गुरुवार को भी लोकसभा में ऐसा ही देखने को मिला, जब राहुल गांधी ने अपनी हरकतों से उपहास के पात्र बने। बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपना ‘पलटीमार’ रूप दिखाकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को भी नाराज कर दिया। स्पीकर ने राहुल के व्यवहार को सदन की गरिमा के खिलाफ बताया। 

बात जब गंभीर विमर्शों की हो तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी जैसे अपरिपक्व नेता, जिनकी सबसे बड़ी पूँजी ही परिवार का नाम है, की चर्चा का तुक नहीं बनता। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को कांग्रेस के युवराज ने लोकसभा में ‘हम दो हमारे दो’, ‘अडानी-अंबानी’ टाइप ढेर सारी बातें की, जबकि चर्चा बजट पर थी। बावजूद उनका जिक्र भर क्योंकि वे केरल के वायनाड से ही लोकसभा पहुँचे हैं। वायनाड ने उन्हें तब सदन में भेज दिया, जब अमेठी की परंपरागत सीट पर 2019 के आम चुनावों में हार की आहट पाकर वे वहाँ गए थे।

यदि कृषि बाजार 40 लाख करोड़ है, फिर वह कौन-से कारण थे, कि किसान कर्जे में डूब कर आत्महत्या कर रहा था? क्या कोई कृषि बिल विरोधी इस बात का जवाब देगा? वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा अपने ट्वीट से प्रश्न कर रहे हैं, जिसका जवाब किसान ही नहीं समस्त राष्ट्र मांगता है।  

राहुल गांधी के भाषण के दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कई बार राहुल को टोकते हुए कहा कि आप बजट पर चर्चा कीजिए। राहुल गांधी ने कहा, “मैं आ रहा हूं बजट पर, सर मैं पांच मिनट में बजट पर आ रहा हूं। मैं अभी फाउंडेशन लगा रहा हूं।” लेकिन राहुल गांधी ने तुरंत यू टर्न ले लिया और कहा, “मैं बजट पर आज यहां टिप्पणी नहीं करने वाला हूं, मैं सिर्फ किसानों के मुद्दे पर बोलूंगा और उसके बाद अपना मुंह चुप कर लूंगा।” इस दौरान किसानों के मुद्दे पर राहुल गांधी ने खूब ड्रामा किया।

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