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उत्तर प्रदेश के स्कूलों का हाल : डीएम के सामने इंग्लिश टीचर ही नहीं पढ़ सकीं चंद लाइनें

यूपी के स्कूलों का हाल, डीएम के सामने इंग्लिश टीचर ही नहीं पढ़ सकीं चंद लाइनें, VIDEOउत्तर प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर को बयां करने वाली एक घटना सामने आई है। पिछले दिनों एक स्कूल में जब डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम) अचानक स्कूल में चेकिंग के लिए पहुंचे तो उन्होंने वहां पर इंग्लिश टीचर से एक बुक पढ़ने के लिए कहा तो वह एक भी लाइन नहीं पढ़ सकीं। ये मामला यूपी के उन्नाव जिले में सिकंदरपुर सरोसी का है। इस घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस घटना के बाद इंग्लिश टीचर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने की सिफारिश कर दी गई।
स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा, 'महिला टीचर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। वह एक इंग्लिश टीचर है। इसके बाद भी वह एक लाइन इंग्लिश में नहीं पढ़ सकतीं।' इंग्लिश टीचर के इंग्लिश न पढ़ पाने की वजह से डीएम काफी उखड़ गए। जब महिला टीचर ने अपनी सफाई पेश करने की कोशिश की तो अधिकारी ने कहा, 'ये क्या है, आप बीए पास हैं, या नहीं हैं? मैंने आपसे बुक से ट्रांसलेट करने के लिए नहीं कहा, मैंने किताब से कुछ लाइन आपसे पढ़ने के लिए कहा और आप ऐसा भी नहीं कर सकीं।'

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार पांडेय नवम्बर 29 को सिकंदरपुर सरोसी में स्कूल के निरीक्षण के लिए अचानक पहुंच गए। उन्होंने पहले क्लास में मौजूद बच्चों से इंग्लिश की किताब में से कुछ लाइनें पढ़ने के लिए कहा। जब बच्चे पढ़ते समय अटकने लगे तो उन्होंने महिला टीचर से किताब की कुछ लाइनें पढ़ने को कहा। अधिकारी ये देखकर खफा हो गए कि टीचर भी उन लाइनों को ढंग से नहीं पढ़ पा रही हैं। इसके बाद डीएम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को टीचर को सस्पेंड करने के लिए कहा। बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा, 'जब डीएम अपनी रिपोर्ट दे देंगे उसके बाद इस मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।'
ये कोई पहला अवसर नहीं, जब किसी अध्यापिका को अयोग्य पाया जा रहा है। पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो आते रहे हैं, जहाँ अध्यापक/अध्यापिका इंग्लिश में दिन एवं महीना भी ठीक नहीं लिखते पाए गए। लेकिन उस समय तक सोशल मीडिया इतना प्रभावी नहीं था। इतना ही नहीं, टीचर तो टीचर प्रिंसिपल तक को यह नहीं मालूम कि उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री का नाम क्या है। टीचर का कक्षा में आराम से सोना एवं मसाज करवाने तक के वीडियो सोशल मीडिया पर आते रहे हैं, परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे में प्रश्न होता है कि आखिर किस अनपढ़ नेता/अधिकारी के आग्रह पर ऐसे टीचरों की नियुक्ति हुई? जिस दिन गंभीरता से उत्तर प्रदेश, बिहार, और मध्य प्रदेश के कुछ प्रांतों में स्कूलों की जाँच करने पर आधे से अधिक टीचर सड़क पर आ जाएंगे। 
इससे दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के ही सोनभद्र का स्कूल भी गलत खबरों के कारण चर्चा में आया था। उस समय प्राइमरी स्कूल में एक लीटर दूध को बाल्टी भर पानी में मिलाकर बच्चों को पिलाने का मामला सामने आया था। हालांकि इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

खुलासा : कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई ने IPS अफसर के सीने पर दागी थीं गोलियां, दबाई जांच

सनसनीखेज : कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई ने IPS अफसर के सीने पर दागी थीं गोलियां, दबाई जांचउत्तर प्रदेश के 'सेंगर बंधुओं' के हाथों हुए जघन्य अपराधों की फेहरिस्त उन्नाव दुष्कर्म मामले पर आकर नहीं रुकती। अपने लिए न्याय की गुहार लगा रहे डीआईजी रैंक के उत्तर प्रदेश कैडर के एक आईपीएस अधिकारी राम लाल वर्मा पर 'सेंगर बंधुओं' ने कभी चार गोलियां दाग दी थीं, जो उनके सीने और पेट में लगी थीं। उत्तर प्रदेश में खासा रसूख रखने वाले सेंगर बंधुओं ने आईपीएस अफसर वर्मा पर जानलेवा हमले के अहम दस्तावेज न सिर्फ गुम करवा दिए, बल्कि मामले की सुनवाई वर्षो तक टलवा दी। साल 2004 में बतौर पुलिस अधीक्षक वर्मा ने जब उन्नाव के एक अवैध खनन स्थल पर दबिश दी थी, उस दौरान कुलदीप सेंगर के छोटे भाई अतुल सेंगर और उसके गुर्गे ने उन्हें गोली मार दी थी। भाजपा से निष्कासित विधायक और उन्नाव दुष्कर्म मामले के मुख्य आरोपी कुलदीप सेंगर ने उन दिनों ऐसा राजनीतिक दबाव बनाया था कि थाने से महत्वपूर्ण केस डायरियां चोरी हो गईं। 
यही वजह है कि वर्मा की हत्या के प्रयास जैसे सनसनीखेज मामले की सुनवाई 15 साल बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। कई तरह की सर्जरी और महीनों अस्पताल में भर्ती रहे आईपीएस अधिकारी राम लाल वर्मा की जान संयोगवश बच गई। आखिरकार कई गोलियों से उन्हें मिले जख्म भर गए। उस नृशंस हमले को याद करते हुए वर्मा ने कहा कि उन्हें उन्नाव में गंगा किनारे माफिया गिरोह द्वारा करवाए जा रहे अवैध रेत खनन के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। जब वह खनन स्थल पर पहुंचे तो अतुल सेंगर और उसके गर्गे ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। वर्मा ने कहा, "मुझे चार गोलियां मारी गईं (छाती के पास और पेट में)। मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे समय पर एक अस्पताल ले जाया गया। उस गोलीबारी में कुलदीप सेंगर, भाई अतुल और उनके कई गुर्गे शामिल थे।" 
उनके मुताबिक, चार बार के विधायक कुलदीप सेंगर अपने रसूख की बदौलत मामले की जांच और मुकदमे की सुनवाई को प्रभावित किया करते थे। उन्होंने जोर देकर कहा, "मुकदमे की स्थिति का पता लगाने के लिए मुझे आरटीआई फाइल करनी पड़ी थी। एक आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद मेरे साथ जो हुआ, वह बेहद निराश करने वाला है। मुझे ड्यूटी निभाते समय लगभग मार ही दिया गया था। मगर उस मामले की सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।" उन्होंने कहा, "मैं एक प्रशिक्षण के सिलसिले में अभी चेन्नई में हूं।मैं जब कानपुर पहुंचूंगा, तब आपको इस मामले की जांच की प्रगति से जुड़े सभी ब्योरे उपलब्ध कराऊंगा।" 
वर्मा के बेटे अभिषेक वर्मा भी उत्तर प्रदेश कैडर के 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में चयनित हो गए। शीर्ष पुलिस परिवार से होने के बावजूद वर्मा न्याय पाने और अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए अपने बेटे के साथ मिलकर संघर्ष कर रहे हैं। राम लाल वर्मा के एक बैच मित्र व यूपी में पदस्थ एक डीआईजी ने कहा, "सच तो यह है कि सेंगर उत्तर प्रदेश में शक्तिशाली राजनेता होने के नाते इस मामले की जांच रुकवाने में कामयाब रहे हैं। महत्वपूर्ण केस डायरियां चोरी हो चुकी हैं। गवाहों को धमका दिया गया है। दुख की बात यह है कि ये सब उस मुकदमे में हो रहा है, जिसमें एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीड़ित है। भारत के प्रधान न्यायाधीश को भी वर्मा के मामले पर संज्ञान लेना चाहिए।" 
वर्मा के बैच मित्र ने आगे खुलासा किया कि राज्य में रेत खनन का धंधा चलानेवालों पर प्रभुत्व रखने वाले सेंगर के खिलाफ कार्रवाई करने से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक डरते हैं। पुलिस रिकार्ड से पता चलता है कि अतुल सेंगर के खिलाफ उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की बेरहमी से हत्या सहित कई भयानक आपराधिक मामले दर्ज हैं। हाल यह है कि लोकायुक्त ने सेंगर के खिलाफ 125 करोड़ के खनन घोटाले की जांच के जो आदेश दिए हैं, उसे भी अधिकारियों द्वारा दबाया जा रहा है। आईजी रैंक के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने का आग्रह करते हुए बताया, "कुलदीप सेंगर जातीय राजनीति करनेवाले नेताओं के अत्यंत प्रभावशाली गुट के हिस्सा हैं। इसी नाते वह हर शासनकाल में शक्तिमान रहे हैं, राजनीतिक विचारधारा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।" 
पुलिस पर भी सवाल
एफआईआर में कहा गया है कि सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी ही पीड़िता के हर पल की जानकारी कुलदीप सिंह सेंगर को देता था
। 
कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक हैं। वह रेप के मामले में एक साल से जेल के अंदर हैं।पीड़िता ने आरोप लगाया था कि कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ रेप किया जब वह उनके घर 2017 में नौकरी की तलाश में गई थी। इसके बाद उसके पिता को पुलिस पकड़ ले गई जहां हिरासत के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के पहले कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सेंगर और उनके लोगों ने पुलिस हिरासत में ही पिता की पिटाई की थी। अतुल सिंह सेंगर को भी हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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