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संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी जीत, सलाहकार समिति में सदस्य चुनी गईं भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भारत को वैश्विक स्तर पर एक के बाद एक सफलता मिल रही है। इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र में भारत को एक और बड़ी जीत मिली। भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा को प्रशासनिक एवं बजट संबंधी प्रश्न (एसीएबीक्यू) पर संयुक्त राष्ट्र की सलाहकार समिति में सदस्य चुना गया है। सदस्य के लिए हुए चुनाव में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव मैत्रा को 126 वोट मिले।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरूमूर्ति ने एक वीडियो संदेश में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों के भारी समर्थन से मैत्रा को संयुक्त राष्ट्र एसीएबीक्यू में शुक्रवार को चुना गया। तिरूमूर्ति ने इस अहम चुनाव में भारत का समर्थन करने और उसके उम्मीदवार में विश्वास जताने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

तिरूमूर्ति ने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र बजट पर दबाव बढ़ रहा है, ऐसे समय में एसीएबीक्यू में भारत की सदस्यता प्रासंगिक है। राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में पेशेवर ऑडिटिंग अनुभव लाने का भारत का एक शानदार रिकॉर्ड है और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में उत्कृष्ट योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि मैत्रा “एसीएबीक्यू के कामकाज में एक स्वतंत्र, उद्देश्यपूर्ण और बहुत आवश्यक लैंगिक संतुलित परिप्रेक्ष्य लाएंगी।”

एसीएबीक्यू संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक आनुषंगिक अंग है। महासभा सलाहकार समिति में सदस्यों को नियुक्त करती है। सदस्यों का चयन व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व, निजी योग्यता और अनुभव के आधार पर होता है। मैत्रा एशिया-प्रशांत राष्ट्रों के समूह से नामित हुए दो उम्मीदवारों में से एक हैं। उनका कार्यकाल तीन साल का होगा जो एक जनवरी 2021 से शुरू होगा। यह जीत ऐसे वक्त में हुई है जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो साल के लिए अस्थायी सदस्य के तौर पर जनवरी 2021 से कार्यभार संभालने की तैयारी कर रहा है। 

भारत ने UN में पाक प्रधानमंत्री का लिया पूरा नाम- इमरान खान 'नियाजी'

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में इमरान खान के भारत के खिलाफ जहर उगलने के बाद भारत ने करारा जवाब दिया है. संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने भारत का पक्ष रखते हुए पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री को उनके पूरे नाम इमरान खान 'नियाजी' से संबोधित किया. दरअसल इमरान आमतौर पर अपने सरनेम का इस्‍तेमाल नहीं करते. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है कि 1971 की लड़ाई में पूर्वी पाकिस्‍तान (मौजूदा बांग्‍लादेश) के तत्‍कालीन लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने अपनी फौज के साथ भारतीय सेना के समक्ष आत्‍मसमर्पण किया था. उसके बाद से कई मशहूर पाकिस्‍तानी हस्तियों ने इस सरनेम से परहेज करना शुरू कर दिया. नियाजी एक पख्‍तून ट्राइब है. इसकी जड़ें पूर्वी अफगानिस्‍तान से मानी जाती हैं. पाकिस्‍तान में नियाजी ट्राइब काफी पहले उत्‍तरी-पश्चिमी पंजाब के मियांवाली में आकर बस गई थी.

 UN में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ( ने 'राइट टू रिप्‍लाई' (Right to Reply) प्रावधान का इस्‍तेमाल करते हुए पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के भड़काऊ भाषण पर सख्‍त जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान ने यूएन में आतंकवाद को सही ठहराया. पाकिस्‍तान ने दुनिया के सबसे बड़े मंच का दुरुपयोग किया. भारत ने इमरान पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस शख्‍स ने कभी जेंटलमेन गेम क्रिकेट खेला हो उसका संयुक्‍त राष्‍ट्र में भाषण नफरत से भरा हुआ था. पाकिस्‍तान ने यूएन के मंच से भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी. संयुक्‍त राष्‍ट्र में इमरान खान का भाषण दुर्भाग्‍यपूर्ण है. इमरान खान की मानसिकता मध्‍ययुगीन जैसी है.
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संयुक्त राष्ट्र महासभा सभागार (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा दी गई भाषण का भारत ने मुंहतोड़ ज.....

भारत ने कहा कि पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पेंशन देने वाला दुनिया का अनोखा मुल्‍क है. पाकिस्‍तान में 25 प्रतिबंधित आतंकी संगठन सक्रिय हैं. संयुक्‍त राष्‍ट्र में प्रतिबंधित 130 आतंकवादी पाकिस्‍तान में रहते हैं. दुनिया को पाकिस्‍तान जाकर हालात देखने चाहिए. पाकिस्‍तान ने खुलेआम आतंकी ओसामा बिन लादेन का बचाव किया. पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर अत्‍याचार हो रहा है. अल्‍पसंख्‍यकों पर अत्‍याचार करने वाला मुल्‍क मानवाधिकारों की बातें कर रहा है. पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक 23 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत रह हुए.(साभार)

UNGA में भारत ने खोल कर रख दी इमरान खान की पोल

Vidisha Maitraसंयुक्त राष्ट्र महासभा सभागार (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा दी गई भाषण का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया. भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की सचिव विदिशा मैत्रा ने इमरान खान के भाषण को भड़काऊ और नफरत से भरा बतलाया. इतना ही नहीं, पाकिस्तान को नसीहत भी दी कि आतंक की फैक्ट्री चलाने वाला देश हमें मानवाधिकार की बात न सिखाए. संयुक्त राष्ट्र महासभा सभागार के मंच से करीब 50 मिनट तक दिए भाषण में खान ने परमाणु युद्ध का राग अलापते हुए आधा समय कश्मीर और भारत पर बोला. भारत ने इमरान खान के सभी आरोपों का जवाब दिया. भारत ने इमरान खान के संबोधन के जवाब में अपने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने पहले संबोधन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर पर ज्यादा फोकस करते हुए भारत पर अनाप-शनाप आरोप लगाए। इसके बाद भारत ने 'राइट टू रिप्लाई' के अधिकार का उपयोग करते हुए इमरान खान के एक-एक दावे की पोल खोल दी। यूएन में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने इमरान के भाषण पर जवाब देते हुए उनसे कई सवाल भी किए।




  • क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि यह दुनिया की एकमात्र सरकार है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध आतंकियों को पेंशन प्रदान करती है?
  • क्या पाकिस्तान के पीएम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संस्थाओं का घर है? 
  • इमरान खान को नियाजी संबोधित करते हुए मैत्रा ने कहा, 'हम आपसे अनुरोध करेंगे कि आप इतिहास की अपनी संक्षिप्त समझ को ताजा करें। 1971 में अपने ही लोगों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा किए गए भीषण नरसंहार को न भूलें।'
  • क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार करेगा कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने देश को 27 में से 20 प्रमुख मापदंडों के उल्लंघन के लिए नोटिस पर रखा है? और क्या पीएम इमरान खान न्यूयॉर्क शहर से इनकार करेंगे कि वह ओसामा बिन लादेन के खुले समर्थक नहीं थे?
  • यह एक ऐसा देश जिसने 1947 के अपने अल्पसंख्यक समुदाय को 23% से घटाकर 3% कर दिया और आज ईसाई, सिख, अहमदिया, हिंदू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूचियों का जबरदस्त शोषण, जबरन धर्मांतरण और अपमान किया जा रहा है। 
  • इमरान को जवाब देते हुए मैत्रा ने कहा, 'भारत के नागरिकों को उनकी ओर से बोलने के लिए किसी और की आवश्यकता नहीं है, कम से कम उन सभी लोगों से जिन्होंने नफरत की विचारधारा से आतंकवाद का उद्योग खड़ा किया है।' 
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पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की जुबान एक बार फिर फिसल गई, जब वह सितम्बर 27 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के अध...

  • इमरान खान के भाषण पर निशाना साधते हुए भारत ने कहा, 'शायद ही कभी संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस तरह के दुरुपयोग को देखा है। मंच का उपयोग गुमराह करने के लिए किया गया।'
  • जब कूटनीति की बात आती है तो शब्द मायने रखते हैं। पोग्रोम, खून-खराबा, नस्लीय संहार, बंदूक उठाएं और 'अंत तक लड़ने' के लिए जैसे वाक्यांशों का आह्वान मध्ययुगीन मानसिकता को दर्शाता है न कि 21 वीं सदी की दृष्टि को।
  • जिस तरह से इमरान खान परमाणु हमले की धमकी देते हैं वो एक राजनेता की नहीं अपरिपक्वता की निशानी है।