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आंध्र प्रदेश : जगनमोहन रेड्डी सरकार पर तिरुपति बालाजी मंदिर से 2 करोड़ रूपए के बालों की तस्करी का आरोप

                                      TDP ने जगनमोहन रेड्डी सरकार पर लगाए आरोप (फोटो साभार : रिपब्लिक)
पूर्व मंत्री और तेलगु देशम पार्टी (TDP) के वरिष्ठ नेता सीएच अयन्ना ने आंध्र प्रदेश की वर्तमान वायएसआर कांग्रेस पार्टी पर तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्तों के द्वारा दान में अर्पित किए गए बालों की अवैध तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में असम रायफल द्वारा लगभग 2 करोड़ रुपए के भक्तों के बाल जब्त किए जाने के बाद यह साफ हो जाता है कि वायएसआर के नेता शराब, सीमेंट और बालू के अतिरिक्त तिरुपति बालाजी के अनन्य भक्तों की श्रद्धा की भी अवैध तस्करी कर रहे हैं।

अयन्ना ने जगनमोहन रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हिन्दुओं की भावनाओं पर भी हमले कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक धर्मस्थल की पवित्रता बनाए रखने में भी असमर्थ है।

अयन्ना ने घटना के बारे में बताया कि असम रायफल ने म्यांमार बॉर्डर से तस्करों को पकड़ा जिनके पास से 120 बालों से भरे बंडल बरामद हुए हैं। इनकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपए है। ये बाल अवैध रूप से थाईलैंड भेजे जा रहे थे जहाँ से उन्हें प्रोसेस करके चीन भेजा जाता। वहाँ उन बालों से विग का निर्माण किया जाता जो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेच दिया जाता।

अयन्ना ने आगे कहा कि लाखों भक्त देश और विदेश से तिरुपति बालाजी आते हैं। वे यहाँ श्रद्धापूर्वक अपने बाल समर्पित करते हैं। इन बालों की तस्करी होना दुर्भाग्यपूर्ण है और उससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि वायएसआर सरकार लगातार हिन्दुओं के इस पवित्र तीर्थ की मर्यादा को ध्वस्त करने का प्रयास कर रही है।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD-बालाजी मंदिर के ट्रस्ट) ने कहा है कि बालों की तस्करी को टीटीडी से जोड़ना गलत है और ट्रस्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ट्रस्ट ई-नीलामी के माध्यम से तिरुपति मंदिर में अर्पित किए गए बालों को बेचता है और यह प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी है। किन्तु फिर भी यदि कोई कंपनी इस कार्य में संलिप्त है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। हालाँकि, टीटीडी ने किसी खरीदार के द्वारा तस्करी किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।

जिस सांसद ने किया ईसाई धर्मान्तरण का खुलासा, उसे अपनी ही पार्टी से मिल रही जान से मारने की धमकी

रघुराम कृष्णम राजू YSRCPआंध्र प्रदेश में धर्मान्तरण में लिप्त ईसाई मिशनरियों की पोल खोलने वाले सांसद ने अपनी पार्टी से अपनी जान को ख़तरा बताया है। वहाँ की सत्ताधारी वाईएससीआरपी (YSRCP) के नेता ने कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी से जान का ख़तरा है। रघुराम कृष्णम राजू नर्सापुरम से सांसद हैं। उन्होंने अंदेशा जताया है कि उनकी अपनी ही पार्टी YSRCP के नेता और कार्यकर्ता उन्हें जान से मारना चाहते है। बता दें कि जगन रेड्डी की सरकार पर ईसाई तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं।
रघुराम कृष्णम राजू ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला को एक याचिका देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें केंद्रीय बलों के द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के विधायक और समर्थक लगातार जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। रघुराम कृष्णम राजू पिछले कुछ दिनों से आंध्र प्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस-प्रशासन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है, इसीलिए वो केंद्रीय सुरक्षा के लिए निवेदन कर रहे हैं।
रघुराम कृष्णम राजू उद्योगपति भी हैं, जिन्होंने बाद में राजनीति का रुख कर लिया। हाल ही में जब तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तू-तू-मैं-मैं हुई थी।

उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया, इसीलिए उन्हें मजबूरन लोकसभाध्यक्ष से गुहार लगानी पड़ी। उनका आरोप है कि एक विधायक ने तो उन्हें गन्दी-गन्दी गालियाँ भी दीं। उन्होंने वाईएसआरसीपी कैडर पर भी उन्हें धमकी देने का आरोप लगाया है। रघुराम कृष्णम राजू का कहना है कि चुनाव भी उन्होंने अपने ही दम पर जीता है, इसमें जगन मोहन रेड्डी के चेहरे का कोई योगदान नहीं है।
रघुराम कृष्णम राजू पहले भाजपा में थे। इसके बाद चुनाव आते ही उन्होंने वाईएसआरसीपी (YSRCP) का दामन थाम लिया था। उससे पहले वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रहे थे। वाईएसआरसीपी पार्टी के टिकट पर ही वो सांसद भी चुने गए थे। उनके आरोपों को लेकर पार्टी ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोकसभाध्यक्ष की तरफ से फ़िलहाल किसी प्रकार का एक्शन लिए जाने की सूचना नहीं है।
एक न्यूज़ डिबेट में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के सांसद खुलेआम ऑन एयर शो पर ये बोलते नजर आए थे कि यदि मिशनरी के लोग धर्मांतरण करवा रहे हैं, तो उसमें वो क्या कर सकते हैं। YSRCP के सांसद रघुराम कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना था कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन वह ये भी कहते नजर आए थे कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।
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आँध्र प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर मिशनरीज की हकीकत का खुलासा करने वाले YSRCP नेता रघु रामकृष्णा राजू ने कल(मई 26) दोबार...
इसके बाद उन्होंने कहा था, “रिकॉर्ड के अनुसार हमारे राज्य में ईसाइयों का प्रतिशत 2.5% से कम है, लेकिन वास्तव में यह 25% से कम नहीं होगा।” YSRCP नेता ने बताया था कि कुछ लोग ऐसे वर्ग से आते हैं, जिन्हें पहले से ही फायदा मिल रहा होता है। ऐसे में यदि वो ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो उन्हें वो फायदा मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि लोग धर्मांतरण करते हैं, मगर उसका पंजीकरण नहीं करवाते।

जगन मोहन रेड्डी इकलौते मुख्यमंत्री, जिनके पास होंगे 5-5 डिप्टी सीएम

जगन मोहन रेड्डी पांच उपमुख्यमंत्रियों वाले इकलौते मुख्यमंत्री
हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम 
आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में एतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्ता में बिल्कुल अनोखा फार्मूला पेश किया है। वाईएसआर कांग्रेस की कैबिनेट में 5 डिप्टी सीएम होंगे। भारत के सियासी इतिहास में संभवत: ऐसा पहली बार ही होगा जब कि सरकार में 5 उपमुख्यमंत्री होंगे। जगन मोहन रेड्डी की कैबिनेट में 25 सदस्य होंगे जिनमें 5 उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे। जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम का फार्मूला राज्य में सभी वर्गों और जातियों संतुलन के लिए किया है। इन पांचों में एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से होगा 
आशंका यह भी व्यक्त की जा रही हैं कि प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी इन्हे सरकार के गिरने का खतरा है। और उसका कारण बता जा रहा है कि जैसे-जैसे पूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के खिलाफ घोटालों का पटाक्षेप होने का श्रीगणेश होगा, तो उन्हें उजागर होने के पूर्व कहीं खरीद-फरोक कर बाबू उनकी सरकार को धराशाही कर दें। स्मरण हो, 1977 चुनावों में बहुमत मिली जनता पार्टी को किस तरह संघ की दोहरी सदस्यता मुद्दे पर सरकार गिरा दी गयी थी।   
एक लंबे संघर्ष के बाद सत्ता पर काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी ने अपने कैबिनेट में कमजोर वर्ग को तरजीह दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मिड टर्म में सरकार के काम काज को देखने के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी किए जाएंगे 
पूर्व चंद्रबाबू नायडू सरकार में दो उपमुख्यमंत्री शामिल थे। बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने गुरुवार (30 मई) को आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने अपने कार्यालय में पहले दिन वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने का आदेश दिया था। जगन की पार्टी ने चुनाव के दौरान यह वादा किया था।आंध्र प्रदेश की सत्ता पर हाल ही में काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी ने बड़ा फैसला लिया है। 
सीएम जगन मोहन ने ऐलान किया है कि राज्य में काम करने वाली आशा कार्यकत्रियों को अब 10,000 रुपये मिलेंगे। आपको बता दें कि पहले यह राशि मात्र 3000 रुपये थी, जिसे अब तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। 
देशभर में 8 लाख से ज्यादा आशा वर्कर्स स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में तैनात हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर विशेष योगदान दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में ही आंध्र प्रदेश में 35000 से ज्यादा आशा वर्कर्स काम कर रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने, उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानकारी देने, प्रसव के बारे में जानकारी और प्रसव के समय अस्पताल ले जाने और लोगों को जागरूक करने जैसे कार्यों के लिए आशा कार्यकत्रियों की नियुक्ति की जाती है।
राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने विजयवाड़ा में आईजीएमसी स्टेडियम में जगन (46) को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। जगन की पार्टी ने लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनावों में कुल 175 में से 151 सीटों पर जीत हासिल की थी 
jagan mohan reddy and chandrababu naidu- India TV
चन्द्र बाबू नायडू की बढ़ती मुश्किलें 
वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की नई सरकार ने एक मास्टर स्ट्रोक चलते हुए पिछली तेलुगू देशम पार्टी (TDP) सरकार के फैसले को पलट दिया है और केंद्रीय एजेंसियों को छापे और जांच करने की अनुमति दे दी है। इससे आने वाले दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
तेदेपा सरकार ने पिछले साल नवंबर में एक आदेश पारित कर सामान्य सहमति वापस ले ली थी और राज्य में जांच करने की केंद्रीय एजेंसी के अधिकार पर अंकुश लगा दिया था। सीबीआई और सभी एजेंसियों को राज्य सरकारों द्वारा सामान्य सहमति नियमित रूप से छह महीने से एक वर्ष तक की अवधि के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के तहत दी जाती है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो में उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एजेंसी आठ मामलों में जांच कर सकती है, जहां राज्य में 30,000 करोड़ रुपये के सौदे शामिल हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि पिछले साल सितंबर में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के. श्रवण कुमार द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें कथित भ्रष्टाचार के लिए नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि नायडू और लोकेश भ्रष्टाचार के मामलों में 21,000 करोड़ रुपये के निवेश के नाम पर कंपनियों के साथ फर्जी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने में शामिल थे। नायडू के बेटे लोकेश ने मई 2013 में राजनीतिक में कदम रखा था। यह आरोप लगाया जाता है कि लोकेश आंध्र प्रदेश में बहुत सक्रिय थे और निवेश के नाम पर विभिन्न कंपनियों के साथ अधिकांश समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करते थे।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी वर्ष 2017 में लोकेश के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने आंध्र प्रदेश में 80 एकड़ में फैली सरकारी जमीन हड़प ली। सीबीआई ने शिकायत को स्वीकार कर लिया था, लेकिन पार्टी से जांच के लिए अदालत का निर्देश लेने के लिए कहा, क्योंकि विचाराधीन भूमि आंध्र प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग की थी। यहां तक कि लोकेश की पत्नी नारा ब्राह्मणी भी 2011 में सीबीआई के शिकंजे में आ गई थी, क्योंकि एजेंसी ने एम्मार प्रॉपर्टीज में विला खरीदने के संबंध में उन्हें नोटिस भेजा था।
सूत्रों ने बताया कि नायडू की महत्वाकांक्षी पोलावरम परियोजना भी केंद्रीय एजेंसियों के दायरे में आने की संभावना है, क्योंकि परियोजना की अनुमानित लागत 16,010 करोड़ रुपये से बढ़कर 58,319.06 करोड़ रुपये हो गई है। आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती का निर्माण भी निगरानी के तहत है, क्योंकि यह आरोप लगाया गया है कि शहर के निर्माण के लिए लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 33,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण विभिन्न तरीकों से किया गया था। जांच एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि विशाखापत्तनम में भी एक लाख एकड़ से अधिक भूमि से संबंधित रिकॉर्ड गायब हो गए हैं।