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हैदराबाद : ‘तुम्हारी मुंडी घुमाकर तुम्हें सुधार देंगे’ : नायडू के आँसू देख TDP नेता ने दी सत्ताधारी पार्टी को धमकी, पत्रकार को जड़ चुके हैं झापड़

आंध्र प्रदेश विधानसभा में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की पत्नी का अपमान होने के बाद उनके परिवार में सत्ताधारी पार्टी और उसके नेताओं के ख़िलाफ़ गुस्सा है। ऐसे में नंदमुरी परिवार के साथ हुई नायडू की बैठक के बाद मशहूर एक्टर व टीडीपी विधायक बालाकृष्णा नंदमुरी ने आवेश में बयान दिया है। उन्होंने नायडू की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद YSRCP को धमकाया है। इस कॉन्फ्रेंस में नायडू भावुक होकर रोने लगे थे।

बालाकृष्णा ने कहा, “हम यहाँ चुप नहीं बैठे। अगर तुम नहीं बदले। हम तुम्हारी मुंडी घुमाकर तुम्हें सुधारेंगे। सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारे पास बहुमत है। हम तुम्हारी कही कोई भी भी बर्दाश्त नहीं कर लेंगे।” उन्होंने धमकी देते हुए कहा,

“चंद्रबाबू की वजह से ही हम शांत रहे हैं, लेकिन एक हद्द तक। हमें अब उनसे पूछने की जरूरत नहीं है। राज्य जिन मुद्दों का सामना कर रहा है, उनकी बात करें, महिलाओं को राजनीति में न घसीटें। सावधान रहें और जुबान संभाल कर रखें। हम इस तरह की टिप्पणियों को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे, यह अंतिम चेतावनी है।”

सत्ताधारी पार्टी को धमकी देते हुए नंदमुरी रामकृष्णा जूनियर ने कहा कि YSRCP ने अपनी हदों को पार किया है। वह बोले, “निजी मुद्दों पर निजी हमलें न करें। हमारा सब्र न देखें। अगर तुमने हद पार की तो हम भी करेंगे। ऐसे बयान दोबारा न आ जाएँ।”

ऐसे ही नंदमुरी परिवार के अन्य लोगों ने भी नायडू की पत्नी पर हुए हमले की निंदा की। उन लोगों ने वाईएसआरसीपी विधायक गन्नावरम वल्लभनेनी वामसी द्वारा नारा के खिलाफ की गई ‘निंदनीय टिप्पणियों’ पर दुख व्यक्त किया।

साउथ के एक्टर बालाकृष्णा रिश्ते में चंद्रबाबू नायडू के बहनोई लगते हैं। उनका ऐसा धमकाने वाला रवैया पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले साल 2019 में बालाकृष्णा ने चुनाव प्रचार के दौरान वहाँ मौजूद एक पत्रकार को थप्पड़ जड़ दिया था। इसके साथ ही उससे बदतमीजी की थी और गालियाँ देते हुए मारने की धमकी दी थी। पूरी घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वह साउथ के मशहूर एक्टर और टीडीपी से विधायक हैं।

आंध्र प्रदेश : चंद्रबाबू नायडू के बयान ‘मंदिरों के पास धर्मांतरण को बढ़ावा देती ईसाई मिशनरी’ के बाद 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने पार्टी छोड़ी

तेलुगु देशम पार्टी के क्रिश्चियन सेल के आंध्र प्रदेश स्थित 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने विजयवाड़ा में इकट्ठा होकर 13 जनवरी 2021 को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। इसकी वजह थी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कथित विवादित बयान। इसके पहले पार्टी के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर (Philip C Tocher) ने भी अपने रास्ते अलग कर लिए थे। 

टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष किन्जरपू अट्चननायडू को अपना इस्तीफ़ा सौंपते हुए पूर्व विधायक टोचर ने लिखा, “बेहद दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मैं पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। इसकी वजह चंद्रबाबू नायडू द्वारा ईसाई समुदाय के लिए दिया गया नफ़रत भरा बयान है। इस बयान की वजह से हमारे समुदाय के लोग तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।”

अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर 1983 से ही पार्टी से जुड़े हुए थे और 2014 से 2019 के बीच टीडीपी के शासनकाल में बतौर एंग्लो इंडियन विधायक नामित किए गए थे। 

दरअसल पिछले कुछ समय के दौरान प्रदेश में मंदिरों और मूर्तियों पर हमला करने के तमाम मामले सामने आए थे। इस पर आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

हिन्दू धार्मिक स्थलों पर हमलों के मुद्दे पर चंद्रबाबू नायडू ने भी विवादित बयान दिया था। रामतीर्थम दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा था कि ईसाई मिशनरी प्रदेश के तमाम बड़े मंदिरों के इर्द-गिर्द धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही हैं।

इस बयान के सुर्ख़ियों में आने पर प्रदेश के कई ईसाई नेताओं ने नायडू की जम कर आलोचना की। कुछ लोगों ने विशाखापट्टनम के ग्रेटर विशाखापट्टनम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन स्थित महात्मा गाँधी की मूर्ति के नज़दीक विरोध प्रदर्शन करते हुए माँग उठाई थी कि चंद्रबाबू नायडू को अल्पसंख्यकों से माफ़ी माँगनी चाहिए।

विजयवाड़ा के दलित ईसाई नेता पेरिका वराप्रसाद राव ने यहाँ तक कहा कि नायडू ने राजनीति में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए इस तरह का बयान दिया है। इसी तरह 2019 के चुनावों में टीडीपी का समर्थन करने वाले एक और अल्पसंख्यक नेता जॉन बेनी लिंगम ने कृष्णा जिले के एसपी को लिखा, “हमें इस बात का संदेह है कि नायडू अपने आदमियों की मदद से इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और ईसाईयों को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं।” 

टीडीपी क्रिस्चियन सेल के पूर्व प्रदेश संयोजक प्रवीण ने द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए कहा, “प्रदेश में चर्च बहुत पहले समय से हैं, टीडीपी और वाईएसआरसीपी की सरकारों से भी पहले। उन्हें अब क्यों चर्चों से परेशानी हो रही है। हमें उनसे (नायडू) इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। बीते 30-35 सालों में उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। अगर उनकी पार्टी ने इस तरह की बात पहले कभी कही होती तो हम उनके साथ इतने समय तक कभी नहीं रहते।”

इसके अलावा प्रवीण ने नायडू को ढोंगी भी कहा क्योंकि कुछ ही समय पहले वह धर्म निरपेक्ष नज़र आने की कोशिश में पादरियों से शुभकामनाएँ ले रहे थे और क्रिसमस मना रहे थे। 

आंध्र प्रदेश में लगातार हो रहे मंदिरों पर हमले: चंद्रबाबू नायडू

                                                   आंध्र प्रदेश में हो रहा मंदिरों पर हमला
आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर बढ़ रहे हमलों के मद्देनजर टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को प्रदेश के सीएम पर आरोप लगाया कि इतने मामले आने के बावजूद उन्होंने अभी तक एक भी मंदिर में जाने की ज़हमत नहीं उठाई। 

अपने पार्टी नेताओं को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम चाहे कोई भी धर्म का अनुसरण करता हो, मगर उसका फर्ज है कि वह हर धर्म के श्रद्धालुओं को समानता और न्याय दें। उन्होंने कहा कि ये आज की सरकार की जिम्मेदारी है वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें।

आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में कई मंदिरों पर हमले के मामले सामने आए हैं। अभी हाल की घटना में उपद्रवियों ने मकापेटा गाँव में प्राचीन काशी विश्वेश्वरा स्वामी मंदिर में नंदी की प्रतिमा को तोड़ दिया था। इसके अलावा मंदिर से आभूषण और कई कीमती चीजें चोरी हुई थी। 

इसी तरह प्रदेश के पूर्वी गोदावरी इलाके में अंतर्वेदी एक तीर्थस्थल है। वहाँ कुछ समय पहले एक 62 साल पुरानी श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा की मूर्ति को जलाकर राख करने का मामला सामने आया था। अजीब बात यह थी जिस समय घटना हुई, उस दौरान सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे। इस घटना के उजागर होने के बाद कई हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने प्रदर्शन किया था और ईसाई मिशनरी ग्रुप्स पर आरोप लगाया था।

नेल्लोर में रथ पर जब हमला हुआ, तो पुलिस ने कहा कि यह काम मानसिक तौर पर अस्थिर इंसान ने किया है। जिस पर चिलकुर मंदिर के डॉ सीएस रंगाराजन ने कहा था कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में संयोजित रूप से हिंदू मंदिरों पर हमले हो रहे हैं।

नेल्लोर के प्रसन्ना वेंकटेश्वर मंदिर में पिछली फरवरी को भी एक रथ जलाया गया था। उसी महीने, गुंटूर जिले के रोम्पीचर्ला गाँव में श्री वेणु गोपाल स्वामी मंदिर में देवताओं की मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था। इसके अलावा श्री गणेश की मूर्ति भी वहाँ से कथित तौर पर चोरी हो गई थी।

फिर जनवरी में ही, अज्ञात उपद्रवियों ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पीथापुरम शहर में हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियों को तोड़ दिया था। साथ ही उन्होंने उन बैनरों को भी जला दिया, जिन पर हिंदू देवताओं की तस्वीरें छपी थीं।

नायडू ने कल ऐसे ही मामलों का उल्लेख करते हुए वाईएसआरसी पर कई अन्य आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह पार्टी झूठों की और जालसाजों की है। उनके नेता ब्लैकमेल करने, बरगलाने में माहिर हैं। अपनी पार्टी को सेकुलर कहते हुए कहा जब तक उनकी पार्टी सत्ता में थी उन्होंने हर धार्मिक स्थल की रक्षा की। वहीं वाईएसआरसी सिर्फ़ टीडीपी के ख़िलाफ झूठी जानकारी के साथ अभियान चलाती रही।

नायडू ने इस बात का भी जिक्र किया कि यह शर्म की बात है वाईएसआरसी सांसद, टीडीपी को निशाना साधने के लिए संसद परिसर में बैठें हैं न कि प्रदेश की जनता के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने कभी अपने आंदोलनों में किसानों का मुद्दा नहीं उठाया न कभी केंद्र से सवाल किए। उन्होंने पूर्व मंत्री अत्चन्नािदु को 80 दिन तक जेल में डाले जाने पर सत्ता पक्ष की निंदा की। साथ ही कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने लेबर मिनिस्टर गुम्मानुर जयाराम के ख़िलाफ़ एक्शन नहीं लिया जबकि  ईएसआई स्कैम में उनकी संलिप्ता के पर्याप्त सबूत थे।

टूटेगा चंद्रबाबू नायडू का आलीशान बंगला 'प्रजा वेदिका'












आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने जून 24 को विपक्ष के नेता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के आवास के समीप स्थित 'प्रजा वेदिका' बंगले को तोड़ने का आदेश दे दिया। इस भवन को मंगलवार से तोड़ा जाएगा। समझा जाता है कि इस फैसले के बाद जगनमोहन रेड्डी और नायडू के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। आंध्र प्रदेश कैपिटल रिजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीसीआरडीए) ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास को विस्तार देते हुए 'प्रजा वेदिका' का निर्माण किया था। इस भवन का निर्माण लोगों की शिकायतें सुनने के लिए हुआ था और इसके निर्माण में आठ करोड़ रुपए की लागत आई थी। नायडू इस भवन का इस्तेमाल अपने आधिकारिक कार्यों एवं पार्टी की बैठकों के लिए करते थे।
जिलाधिकारियों की बैठक में अपने फैसले का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा, 'यदि कोई आदमी बिना अनुमति के निर्माण कार्य कराएगा तो अधिकारी उस भवन को तोड़ देंगे।' बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को कॉन्फ्रेंस हॉल को अपने कब्जे में ले लिया। वहीं, तेदेपा ने इस कदम को 'बदले की राजनीति' करार दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति कोई शिष्टाचार नहीं दिखाया और उंदावल्ली स्थित इस इमारत से उनके सामान बाहर फेंक दिए गए। साल 2016 में आंध्र प्रदेश का प्रशासन जब हैदराबाद से अमरावती स्थानांतरित हुआ तब से नायडू कृष्णा नदी के तट पर स्थित उंदावल्ली के इस भवन में रहते आ रहे थे। हैदराबाद अब तेलंगाना की राजधानी है।
नायडू ने भवन में बैठक की अनुमति देने के लिए इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री रेड्डी को पत्र लिखा था। उन्होंने जगन सरकार से इस भवन को विपक्ष के नेता के आवास का हिस्सा घोषित करने का अनुरोध किया था लेकिन नायडू के इस अनुरोध को अनसुना करते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने 'प्रजा वेदिका' को अपने कब्जे में ले लिया। बता दें कि नायडू अभी देश से बाहर अपने परिवार के साथ छुट्टियों पर हैं। आंध्र प्रदेश सरकार ने कहा है कि अब कलेक्टरों की बैठक इस भवन में होगी। इससे पहले कलेक्टरों की बैठक राज्य सचिवालय में हुआ करती थी।


Andhra Pradesh CM YS Jagan Mohan Reddy orders demolition of 'Praja Vedika' building, demolition of the building to begin day after tomorrow. (file pic)
आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराए गए थे। इन दोनों चुनावों में चंद्रबाबू नायूड को तगड़ा झटका लगा। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटों में से तेदेपा केवल तीन सीटें जीत पाई। जबकि वाईएसआर कांग्रेस 22 सीटों पर विजयी रही। विधानसभा चुनाव में तेदेपा को और बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। तेदेपा प्रदेश की 175 सीटों में से महज 23 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हो पाई जबकि जगनमोहन की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के खाते में 151 सीटें गईं। नायडू पहले एनडीए का हिस्सा थे लेकिन आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर वह उससे अलग हुए और चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी नीतियों की आलोचना की। चुनाव से पहले नायडू ने कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास किया लेकिन उनकी यह मुहिम सफल नहीं हो सकी।

जगन मोहन रेड्डी इकलौते मुख्यमंत्री, जिनके पास होंगे 5-5 डिप्टी सीएम

जगन मोहन रेड्डी पांच उपमुख्यमंत्रियों वाले इकलौते मुख्यमंत्री
हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम 
आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में एतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्ता में बिल्कुल अनोखा फार्मूला पेश किया है। वाईएसआर कांग्रेस की कैबिनेट में 5 डिप्टी सीएम होंगे। भारत के सियासी इतिहास में संभवत: ऐसा पहली बार ही होगा जब कि सरकार में 5 उपमुख्यमंत्री होंगे। जगन मोहन रेड्डी की कैबिनेट में 25 सदस्य होंगे जिनमें 5 उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे। जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम का फार्मूला राज्य में सभी वर्गों और जातियों संतुलन के लिए किया है। इन पांचों में एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से होगा 
आशंका यह भी व्यक्त की जा रही हैं कि प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी इन्हे सरकार के गिरने का खतरा है। और उसका कारण बता जा रहा है कि जैसे-जैसे पूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के खिलाफ घोटालों का पटाक्षेप होने का श्रीगणेश होगा, तो उन्हें उजागर होने के पूर्व कहीं खरीद-फरोक कर बाबू उनकी सरकार को धराशाही कर दें। स्मरण हो, 1977 चुनावों में बहुमत मिली जनता पार्टी को किस तरह संघ की दोहरी सदस्यता मुद्दे पर सरकार गिरा दी गयी थी।   
एक लंबे संघर्ष के बाद सत्ता पर काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी ने अपने कैबिनेट में कमजोर वर्ग को तरजीह दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मिड टर्म में सरकार के काम काज को देखने के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी किए जाएंगे 
पूर्व चंद्रबाबू नायडू सरकार में दो उपमुख्यमंत्री शामिल थे। बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने गुरुवार (30 मई) को आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने अपने कार्यालय में पहले दिन वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने का आदेश दिया था। जगन की पार्टी ने चुनाव के दौरान यह वादा किया था।आंध्र प्रदेश की सत्ता पर हाल ही में काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी ने बड़ा फैसला लिया है। 
सीएम जगन मोहन ने ऐलान किया है कि राज्य में काम करने वाली आशा कार्यकत्रियों को अब 10,000 रुपये मिलेंगे। आपको बता दें कि पहले यह राशि मात्र 3000 रुपये थी, जिसे अब तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। 
देशभर में 8 लाख से ज्यादा आशा वर्कर्स स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में तैनात हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर विशेष योगदान दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में ही आंध्र प्रदेश में 35000 से ज्यादा आशा वर्कर्स काम कर रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने, उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानकारी देने, प्रसव के बारे में जानकारी और प्रसव के समय अस्पताल ले जाने और लोगों को जागरूक करने जैसे कार्यों के लिए आशा कार्यकत्रियों की नियुक्ति की जाती है।
राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने विजयवाड़ा में आईजीएमसी स्टेडियम में जगन (46) को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। जगन की पार्टी ने लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनावों में कुल 175 में से 151 सीटों पर जीत हासिल की थी 
jagan mohan reddy and chandrababu naidu- India TV
चन्द्र बाबू नायडू की बढ़ती मुश्किलें 
वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की नई सरकार ने एक मास्टर स्ट्रोक चलते हुए पिछली तेलुगू देशम पार्टी (TDP) सरकार के फैसले को पलट दिया है और केंद्रीय एजेंसियों को छापे और जांच करने की अनुमति दे दी है। इससे आने वाले दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
तेदेपा सरकार ने पिछले साल नवंबर में एक आदेश पारित कर सामान्य सहमति वापस ले ली थी और राज्य में जांच करने की केंद्रीय एजेंसी के अधिकार पर अंकुश लगा दिया था। सीबीआई और सभी एजेंसियों को राज्य सरकारों द्वारा सामान्य सहमति नियमित रूप से छह महीने से एक वर्ष तक की अवधि के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के तहत दी जाती है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो में उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एजेंसी आठ मामलों में जांच कर सकती है, जहां राज्य में 30,000 करोड़ रुपये के सौदे शामिल हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि पिछले साल सितंबर में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के. श्रवण कुमार द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें कथित भ्रष्टाचार के लिए नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि नायडू और लोकेश भ्रष्टाचार के मामलों में 21,000 करोड़ रुपये के निवेश के नाम पर कंपनियों के साथ फर्जी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने में शामिल थे। नायडू के बेटे लोकेश ने मई 2013 में राजनीतिक में कदम रखा था। यह आरोप लगाया जाता है कि लोकेश आंध्र प्रदेश में बहुत सक्रिय थे और निवेश के नाम पर विभिन्न कंपनियों के साथ अधिकांश समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करते थे।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी वर्ष 2017 में लोकेश के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने आंध्र प्रदेश में 80 एकड़ में फैली सरकारी जमीन हड़प ली। सीबीआई ने शिकायत को स्वीकार कर लिया था, लेकिन पार्टी से जांच के लिए अदालत का निर्देश लेने के लिए कहा, क्योंकि विचाराधीन भूमि आंध्र प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग की थी। यहां तक कि लोकेश की पत्नी नारा ब्राह्मणी भी 2011 में सीबीआई के शिकंजे में आ गई थी, क्योंकि एजेंसी ने एम्मार प्रॉपर्टीज में विला खरीदने के संबंध में उन्हें नोटिस भेजा था।
सूत्रों ने बताया कि नायडू की महत्वाकांक्षी पोलावरम परियोजना भी केंद्रीय एजेंसियों के दायरे में आने की संभावना है, क्योंकि परियोजना की अनुमानित लागत 16,010 करोड़ रुपये से बढ़कर 58,319.06 करोड़ रुपये हो गई है। आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती का निर्माण भी निगरानी के तहत है, क्योंकि यह आरोप लगाया गया है कि शहर के निर्माण के लिए लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 33,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण विभिन्न तरीकों से किया गया था। जांच एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि विशाखापत्तनम में भी एक लाख एकड़ से अधिक भूमि से संबंधित रिकॉर्ड गायब हो गए हैं।

'मोदी के पालतू कुत्ते' हैं केसीआर और जगनमोहन रेड्डी : चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री

ChandraBabu Naidu
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज नेताओं में इतना अधिक आक्रोश और संकुचित सोंच हो गयी है, कि इनके भाषण सुनने पर कई बार तो अब यह सोंचना पड़ता है कि बोलने वाला जनता हितैषी या कोई मवाली? जम्मू-कश्मीर में अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के विरुद्ध भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, तो जम्मू-कश्मीर से बाहर दूसरे नेता भी कम नहीं। क्या ऐसी अशोभनीय भाषा बोलने वाले नेताओं के हाथ देश अथवा प्रदेश की बाग़डोर देना हितकारी हो सकती है? क्यों नहीं ऐसे नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाए? जनता को चाहिए ऐसे नेताओं को एक भी वोट ना दी जाए। 
आभास होता है कि मोदी विरोध में अधिकतर नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। भारत में चुनाव पहले भी होते थे, तब विरोधी केवल नीतिगत एवं तर्कपूर्ण तथ्यों पर लड़ाई लड़ते थे, परन्तु आज अब पिछले कुछ चुनावों से विरोधी अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर पता नहीं किस संस्कृति का पालन कर भारतीय संस्कृति को ही नहीं, अपितु अपने माता-पिता एवं पूर्वजों को भी बदनाम कर, पता नहीं ऐसे नेता देश को किस पाताललोक में लेकर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का विरोध करने को बहुत मुद्दे हैं, लेकिन उस ओर किसी का लेशमात्र भी ध्यान नहीं। जिस तरह दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का विरोध करने को दस-बीस नहीं हज़ारों कारण हैं, लेकिन कोई नहीं बोलता, क्योकि सभी नेताओं एवं पार्टियों का उसमे निजी स्वार्थ छुपा है, जिसे जनमानस समझ नहीं पाता।      
अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बयान देते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 8 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी और टीआरएस के अध्यक्ष व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को 'मोदी का पालतू कुत्ते' कहा है। मचिलीपटनम में अप्रैल 8 को एक रैली को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा, 'बेशर्म जगनमोहन रेड्डी कत्ते के बिस्किट खा रहे हैं। वह ये बिस्किट हमें भी बांट रहे हैं। जगनमोहन और केसीआर मोदी के पालतू कुत्ते हैं, जो एक बिस्किट के लिए अपने घुटनों पर बैठे रहेंगे। होशियार रहिए, जगन ये बिस्किट आपको भी देने की कोशिश करेंगे।'
चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी और टीआरएस पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को फंड देने का आरोप भी लगाया और कहा कि करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी राज्य में उन्हें वोट नहीं मिलेगा। चंद्रबाबू नायडू  ने जगनमोहन रेड्डी को फंडिंग की  बात करते हुए कहा, 'मोदी और केसीआर ने 1000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। केसीआर तुमने ये पैसे क्यों खर्च किए? तुम अपने राज्य का पैसा हमारे यहां क्यों खर्च कर रहे हो। एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद यहां से तुम्हें एक भी वोट नहीं मिलने वाला। हमारे लोग तुमसे बहुत नाराज हैं।'
गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू ने ऐसे समय में ये विवादित टिप्पणी की है जब राज्य में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सियासी गर्मी उच्चतम स्तर पर है। 11 अप्रैल को आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होने जा रही है। मतगणना 23 मई को होगी।

नायडू के धरने पर अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी को बताया पाकिस्तान का पीएम

चंद्रबाबू नायडू ने एनटीआर की बेटी से की शादीआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर फरवरी 10 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमला बोलते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर टीडीपी के संस्थापक एनटी रामा राव के साथ विश्वासघात किया है। चार दशक पहले चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में सिनेमेटोग्राफी मंत्री थे। उस समय वो नंदमूरि तारक रामाराव के करीब आए, जो फिल्म अभिनेता और राजनीतिज्ञ थे। वो हिंदू देवताओं का किरदार निभाते हुए लोगों में बहुत प्रसिद्ध हो गए। इसके बाद वो राजनीति में कूदे और टीडीपी पार्टी की गठन किया ताकि वो आंध्र से कांग्रेस का सफाया कर सकें। ससुर की मृत्यु उपरान्त नायडू कांग्रेस से समझौता कर रहे हैं। वास्तव में राजनीति में कौन किसके साथ मिल जाए और कौन किस से बगावत। शायद यही कारण है कि चुनावों में सभी दल एक दूसरे पर कीजड़ फेंकते नज़र आते हैं, लेकिन जो भी पार्टी सत्ता में आती है, फिर कीजड़ करने वाले दल पर कोई कार्यवाही नहीं करती। और जनता ,मगरमच्छी आंसुओं पर पिगल जाती है, नादान जनता को नहीं मालूम कि हमाम में नंगे सारे ही हैं। 
अब देखिए भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्तामुक्त करने कितने गठबन्धन होंगे और किस-किस के नेतृत्व में होंगे, कहना कठिन लगता है। मोदी विरोधी इतने बौखलाए हुए हैं कि उन्हें स्वयं समझ नहीं आ रहा कि किसके नेतृत्व में गठबंधन को अंतिम रूप दें। 
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के सिलसिले में सीएम चंद्रबाबू नायडू धरने पर बैठे हैं। धरना पर बैठने से पहले वो राजघाट पहुंचे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के विकास के लिए केंद्र की तरफ से केवल लॉलीपॉप मिला है। केंद्र सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी। धरना स्थल पर चंद्र बाबू नायडू के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंच साझा किया।
जिस नेता को देखो अपनी नेतागिरी चमकाने अपने प्रदेश को विशेष दर्जा को विशेष दर्जा देने का रोना रो रहे हैं, कोई यह नहीं कहता कि भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए कोर्ट को प्रतिदिन सुनवाई करवा कर उनको जेल भेजेंगे। दिल्ली विधान सभा चुनावी रैलियों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लिए जनता को मुर्ख बनाते रहे, क्योकि सत्ता हाथ आते ही सारे 370 आरोप पता नहीं कहाँ गायब हो गए। 
भारत में आज़ादी से लेकर अब तक इतने खरबों के घोटाले हुए हैं, यदि नेताओं में देश प्रेम की लेशमात्र भी भावना होती, देश के कम से कम 6 बजट का खर्चा निकल जाए। जिस नेता को देखें अपने पेट की चिन्ता में देश की जनता को पागल बना रहे हैं।  
अरविंद केजरीवाल के बिगड़े बोल
PM Modi behaving like Pak PM, says Delhi CM Arvind Kejriwal | @tusharswarup with details

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Delhi CM Arvind Kejriwal, DMK's T Siva and TMC's Derek O' Brien at Andhra Pradesh CM & TDP Chief N Chandrababu Naidu's day-long fast in Delhi
चंद्रबाबू नायडू के अनशन में एक एक कर विपक्षी दलों के नेता शिरकत कर रहे हैं। वो एक तरफ अपनी बात को कह रहे हैं। ये बात अलग है कि नेताओं की भाषा अमर्यादित भी हो जा रही है। केजरीवाल ने कहा कि किसी राज्य का सीएम सिर्फ एक पार्टी की सीएम नहीं होता है। पीएम भी किसी एक पार्टी की पीएम नहीं होता है। लेकिन पीएम मोदी विपक्षी दल वाले राज्यों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे वो पाकिस्तान के पीएम हों। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा पूरे .....

चंद्रबाबू नायडू के धरना स्थल पर पहुंचे शरद यादव

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Delhi: Andhra Pradesh and Telugu Desam Party chief CM N Chandrababu Naidu & other leaders at 'Dharma Porata Deeksha' - his daylong hunger strike against central govt over the issue of special status to Andhra Pradesh.
धर्म पोरता दीक्षा में एक एक कर विरोधी दल के नेता शिरकत कर रहे हैं। आप को बता दें कि आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस की मांग पर आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू एक दिन के भूख हड़ताल पर हैं। 
नायडू के मंच पर पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह

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Delhi: Former Prime Minister & Congress leader Manmohan Singh at Andhra Pradesh CM N Chandrababu Naidu's day-long fast, at Andhra Pradesh Bhawan.
आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस दिए जाने की मांग पर आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू धरने पर बैठे हुए हैं। उनकी मांग के समर्थन में पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह ने भी मंच साझा किया। 
नायडू के मंच से राहुल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

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Delhi: Congress President Rahul Gandhi at the Andhra Pradesh CM N Chandrababu Naidu's day-long hunger strike against the central government.
राहुल गांधी ने इस मौके पर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज पीएम नरेंद्र मोदी अपनी स्वीकार्यता खो चुके है। पीएम मोदी देश के अलग अलग हिस्सों में जाते हैं और अलग अलग अंदाज में बयान देते हैं। पीएम खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ अलह जगाने की बात करते हैं लेकिन सच ये है कि देश को चौकीदार चोर है। 
चंद्रबाबू नायडू ने एनटीआर की बेटी से की शादी 
साल 1981 में चंद्रबाबू नायडू ने एनटीराव की बेटी भुवनेश्वरी से शादी कर ली। भुवनेश्वरी से शादी करने के दो साल बाद वो टीडीपी में उस वक्त शामिल हुए जब उसकी राज्य में सरकार थी। इसके बाद वो अपने ससुर के विश्वासपात्र बन गए और परदे के पीछे उनके नजदीकी रणनीतिकारों में शामिल हो गए। टीडीपी में शामिल होने के ठीक एक दशक बाद, नायडू ने अपने ससुर के खिलाफ विद्रोह करके तख्तापलट किया। इसके साथ ही उन्होंने टीडीपी पर कब्जा किया और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए।
एनटीआर ने खुद की तुलना शाहजहां से की 

'सपने में भी विद्रोह के बारे में नहीं था'चंद्रबाबू नायडू के विद्रोह के करने के बाद एनटीआर ने कहा था कि उनके दामाद के अच्छे दिनों को गिना जाएगा और वो बदला लेंगे। अपने आखिरी इंटरव्यू में एनटीआर ने खुद की तुलना 17 वीं शताब्दी के मुगल सम्राट शाहजहाँ से की थी जिसे उसके बेटे ने कैद कर लिया था। उन्होंने नायडू को आस्तीन का सांप बताया था और कहा था कि वो अपने परिवार केखिलाफ जाने वालों से बदला लेंगे, विशेष रूप से अपने दामादऔर उत्तराधिकारी के तौर पर सीएम की गद्दी पर बैठने वाले नायडू से। हालांकि वो राजनीति में वापसी नहीं कर पाए और साल 1996 में हार्टअटैक की वजह से उनका निधन हो गया।
नायडू एनटीआर की मौत के बाद बने 'चहेते' नेता 

एनटीआर की मौत के बाद नायडू राज्य के प्रसिद्ध नेता बन गए हैं। उन्होंने अब तक तीन बार आंध्र प्रदेश के सीएम के तौर पर सूबे की बागडोर संभाली है। सीएम बनने के बाद टेक फ्रेंडली नायडू ने खुद को राज्य के सीईओ के तौर पर पेश किया और हैदराबाद को आईटी हब के तौर स्थापित किया। उन्होंने टेक्नोलॉजी से जुड़ी बड़ी माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम और ओरेकल जैसी कंपनियों को यहां आने के बाद आकर्षित किया। चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एनटीआर के खिलाफ विद्रोह को सही बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पीडीपी को बुरे लोगों से बचाया है। एनटीआरने एनटीआर की दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती को 'दुष्टा शक्ति' बताते हुए कहा कि वो पार्टी को बर्बाद करना चाहती थी और पार्टी को बचाने के लिए उन्होंने विद्रोह किया और पार्टी को टूटने से बचाया।
'सपने में भी विद्रोह के बारे में नहीं था' 

चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि वो सपने में भी अपने ससुर के खिलाफ विद्रोहकी नहीं सोच सकते थे। मेरे लिए वो मेरे ससुर नहीं भगवान के समान थे, जिनकी मैं हमेशा पूजा करता था। एनटीआर 'दुष्ट ताकतों' के प्रभाव में आकर परेशानियों का सामना कर रहे थे। उनके पास टीडीपी को बचाने के लिए दूसरा विकल्प नहीं था। नायडू दिल्ली में सोमवार को आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर धरने पर बैठें हैं। वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी पार्टी के नेताओं को इस मसले पर अपने पक्ष में लाने के बाद लाइमलाइट में आ गए हैं। नायडू को शायद इस बात का अहसास हो गया था कि मोदी के खिलाफ बगावत करना केंद्र में सत्ता में अपनी पकड़ बनाने का सबसे बेहतरीन मौका था।