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ईसाई मिशनरियों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले सांसद ने राम मंदिर के लिए दिए 4 लाख रूपए, पार्टी के लोगों ने दी थी धमकी

रघुराम कृष्णम राजू, राम मंदिर
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के बागी सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी 3 महीने की सैलरी 3.96 लाख रुपए दान में दिए हैं। उन्होंने सोमवार (जुलाई 20, 2020) को इसकी घोषणा की।
अगस्त 5 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर का भूमि-पूजन करेंगे। सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पत्र लिख कर चेक सौंपा।
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मोदी 5 अगस्त की सुबह सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू होगा। विहिप का कहना है कि द्वितीया सह तृतीया तिथि अपने आप में सर्वार्थ सिद्धि योग वाली है। देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे।


सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने कहा कि देश-विदेश के करोड़ों हिन्दुओं की तरह वो भी उस क्षण का दर्शन करने को बेताब हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे और भूमि-पूजन करेंगे। हाल ही में उन्होंने आंध्र प्रदेश में गायों की देखभाल के लिए आवाज़ उठाई थी। सांसद ने मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को पत्र लिख कर राज्य में गोशाला डेवलपमेंट कमिटियों के गठन की माँग की थी।
उन्होंने कहा था कि मंदिरों और कई गैर-सरकारी संगठनों ने गायों की देखभाल का जिम्मा ले रखा है लेकिन उनके गोशालों में गायें मर रही हैं, ऐसे में राज्य में गोशाला कमिटी की ज़रूरत है। उन्होंने गोरक्षा हेतु ऐसा करने की अपील की थी। सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने कहा कि ये मुद्दा हिन्दुओं के दिल के काफी नजदीक है। वो अक्सर हिन्दुओं की भावनाओं के लिए आवाज़ उठाते रहते हैं।
रघुराम कृष्णम राजू उद्योगपति भी हैं, जिन्होंने बाद में राजनीति का रुख कर लिया। हाल ही में जब तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तू-तू-मैं-मैं हुई थी।
मई 2020 में वो ‘टाइम्स नाऊ’ पर डिबेट के दौरान इस बात को ऑन एयर शो में मानते नज़र आए थे कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं है कि ये कन्वर्जन की प्रक्रिया सिर्फ आंध्र प्रदेश में चल रही है, बल्कि वो तो ये कह रहे हैं कि ये पूरे देश में हो रहा है। उन्होंने इसके मिशनरियों के ‘मनी-पॉवर’ को जिम्मेदार ठहराया था।
इसके बाद उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं से जान से मार डालने की धमकी मिलनी शुरू हो गई थी। उनका कहना था कि चुनाव भी उन्होंने अपने ही दम पर जीता है, इसमें जगन मोहन रेड्डी के चेहरे का कोई योगदान नहीं है। बता दें कि रघुराम कृष्णम राजू पहले भाजपा में थे। इसके बाद चुनाव आते ही उन्होंने वाईएसआरसीपी (YSRCP) का दामन थाम लिया था। उससे पहले वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रहे थे।

आँध्र प्रदेश : धर्मांतरण पर YSRCP नेता का खुलासा : रिकॉर्ड में सिर्फ 2.5% ईसाई, हकीकत में तो 25% हैं

आँध्र प्रदेश 25% ईसाई
आँध्र प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर मिशनरीज की हकीकत का खुलासा करने वाले YSRCP नेता रघु रामकृष्णा राजू ने कल(मई 26) दोबारा एक नया खुलासा किया। उन्होंने प्रदेश की सच्चाई बताते हुए खुलेआम कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही ईसाइयों की संख्या 2.5% है मगर, हकीकत में ये आँकड़ा 25% से कम नहीं है।
देखा जाए तो राजू ने कोई नयी बात नहीं की है, बल्कि वर्षों से चल रहे ईसाई मिशनरी द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण की चादर को सिर्फ छुआ है, चादर नहीं हटाई है। अभी इसके ऊपर से चादर हटनी बाकी है।  
टाइम्स नाउ की डिबेट से शुरू हुए धर्मांतरण के मुद्दे पर एंकर पद्मजा जोशी ने कल फिर जगन मोहन रेड्डी की सरकार में मंत्री राजू से इस मुद्दे पर आगे की जानकारी माँगी। हालाँकि पहले तो वह अपने पुराने ढर्रे का राग लापते दिखे कि कन्वर्जन सिर्फ़ आँध्र प्रदेश में नहीं पूरे देश में हो रहा है।
किंतु, जैसे ही पद्मजा जोशी ने कहा कि क्या वो पूरे देश की उन जगहों के बारे में मुख्यत: बता सकते हैं, जहाँ-जहाँ ये प्रक्रिया चालू है। तो, रघु रामकृष्णा राजू ने एक नया चौंकाने वाला आँकड़ा पेश कर दिया।
उन्होंने कहा, “रिकॉर्ड के अनुसार हमारे राज्य में ईसाइयों का प्रतिशत 2.5% से कम है, लेकिन वास्तव में यह 25% से कम नहीं होगा।”
उन्होंने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं मालूम कि ये सब बाते अच्छी हैं या बुरी, लेकिन वो जो ये बातें कह रहें है, वो सिर्फ़ आँकड़े बयान करती है।


इस खुलासे को सुनकर पद्मजा ने उन्हें उनकी ईमानदारी के सराहा और आगे उनसे सवाल पूछा कि आखिर ये सब मुमकिन कैसे हुआ?
इस पर, YSRCP नेता ने बताया कि कुछ लोग ऐसे वर्ग से आते हैं, जिन्हें पहले से ही फायदा मिल रहा होता है। ऐसे में यदि वो ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो उन्हें वो फायदा मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि लोग धर्मांतरण करते हैं, मगर उसका पंजीकरण नहीं करवाते।
आगे इस पूरी धर्मांतरण की प्रक्रिया को ऱघु रामकृष्णा मानव मनोविज्ञान का नतीजा बताते हैं और इस प्रक्रिया को न्यायोचित ठहराने के लिए वो आर्टिकल 25 (1) का भी हवाला देते हैं। साथ ही इस बात का स्पष्टीकरण भी देते हैं कि वो ईसाई धर्म के ख़िलाफ़ नहीं हैं। वो हर धर्म की इज्जत करते हैं।
जब उनसे पूछा जाता है कि वो अपने राज्य में होते धर्मांतरण करवाने वालों को रोकते क्यों नहीं है? उनकी सरकार इन सबके लिए कुछ करती क्यों नहीं हैं, तो वो इस मुद्दे को डायवर्ट करके दूसरे राज्यों की बातों को शुरू कर देते हैं।
ये पूरा विवाद 25 मई को टाइम्स नाऊ की एक डिबेट से शुरू हुआ था। उस डिबेट में YSRCP के सांसद रघु कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना था कि आँध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया बहुत तेजी से चालू है। उन्होंने इस डिबेट में यह भी बताया था कि ये सब मिशनरी के जरिए होता है, जो मनी पावर का इस्तेमाल करके इन कामों को अंजाम देते हैं।
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जगनमोहन रेड्डी सरकार में मंत्री रघु रामकृष्णा राजू ने दिया चौकाने वाला बयान आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े ....
जब उनसे पूछा गया कि सब जानते-समझते हुए उनकी सरकार क्या कर रही है? तो वो इस बात को कहते नजर आए कि इसमें वो क्या कर सकते हैं? ये सब तो पूरे देश में हो रहा है।

आंध्र प्रदेश : बड़े स्तर पर मिशनरीज पैसे के दम पर कर रही कन्वर्जन तो हम क्या करें: रघु रामकृष्णा राजू , मंत्री, जगनमोहन रेड्डी सरकार

आंध्र प्रदेश मिशनरीज कन्वर्जन
जगनमोहन रेड्डी सरकार में मंत्री रघु रामकृष्णा राजू ने दिया चौकाने वाला बयान
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े स्तर पर हो रहे धर्मांतरण को सामान्य मान लिया है। इसका खुलासा कल टाइम्स नाऊ की एक डिबेट में हुआ। इस डिबेट में जगन मोहन रेड्डी सरकार के मंत्री खुलेआम ऑन एयर शो पर ये बोलते नजर आए कि यदि मिशनरी के लोग धर्मांतरण करवा रहे हैं, तो उसमें वो क्या कर सकतें हैं।
जी हाँ, टाइम्स नाऊ पर डिबेट के दौरान YSRCP के सांसद रघु कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन वह ये भी कहते नजर आए कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।
ऐसे बयान पर जब एंकर ने सांसद से कहा कि वो इस संबंध में बहुत बड़ी बात बोल रहे हैं कि वो मानते हैं कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण बहुत बड़े स्तर पर हो रहा है। तो वो अपनी सफाई में ये कहते सुनाई दिए कि वो ये नहीं कह रहे कि ये कन्वर्जन की प्रक्रिया राज्य में चल रही है, बल्कि वो तो ये कह रहे हैं कि ये पूरे देश में हो रहा है।

इसके बाद इस ड़िबेट में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मंत्री ने ये भी कहा कि ये सब मिशनरी के पास मनी पॉवर के कारण हो रहा है। जिसका इस्तेमाल वे इन सब चीजों के लिए कर रहे हैं। हालाँकि, इस बिंदु पर एंकर ने उन्हें फिर टोका, कि वो ये कह रहे हैं कि ईसाई मिशनरी पैसे जुटाकर बड़े स्तर पर धर्मांतरण के काम को अंजाम दे रहे हैं। जो कि पूर्ण रूप से अवैध है, तो आखिर ऐसे में वो खुद क्या कर रहे हैं? जिसपर रघु बार-बार यही कहते रहे कि इसमें हम क्या कर सकते हैं। ये सब पूरे देश में हो रहा है।
रघु इस दौरान धर्मांतरण को उचित ठहराने के लिए भारत के सेकुलर होने का हवाला देते नजर आए। मगर, जब पद्मजा जोशी उन्हें बताती हैं कि सेकुलर देश में धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का इस्तेमाल पूर्ण रूप से अवैध और गैर कानूनी है, तो वो कहते हैं कि इन सबमें नहीं पड़ना चाहते। जब एंकर ने उनके इस रवैये पर हैरानी जताई तो उन्होंने दूसरे पैनेलिस्ट मोहनदास पई से पूछा कि क्या ये सब पूरे देश में नहीं होता? जिसपर मोहनदास ने उन्हें जवाब दिया कि वो मानते हैं कि पूरे देश में ये सब बड़े स्तर पर हो रहा है, पर जिस तरह आंध्र प्रदेश में खुलेआम हो रहा है। वैसे ये सब कही नहीं होता।
सर्व इंडिया मिनिस्ट्री NGOका खुलासा 
गौर करने की बात है कि YSRCP नेता का ये बयान उस समय आया है। जब अभी हाल ही में तमिननाडु के कोयंबटूर के एक ईसाई एनजीओ सर्व इंडिया मिनिस्ट्री पर अवैध धर्मांतरण, हिंदुओं के ख़िलाफ़ हेट स्पीच और FCRA फ्रॉड जैसे आरोप लगे हैं। जिसका खुलासा लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर किया है।
LRPF ने अपनी शिकायत में एनजीओ प्रमुख इबेनेजर सैम्यूल के ख़िलाफ़ शिकायत की है। साथ ही एनजीओ पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया है। इसके अलावा इस एनजीओ पर बड़े स्तर पर धर्मांतरण, जादू टोने, प्रलोबन आदि उपाय करने का इल्जाम भी लगाया गया है।
LRPF की जाँच से पता चलता है कि इबेनेजर के NGO को पिछले 10 वर्षों में एफसीआरए फंड के रूप में 48.92 करोड़ रुपए मिले हैं और ये फंड्स ज्यादातर यूएसए से नफरत फैलाने, दैवीय इलाज की कहानियों को बताने पर प्राप्त किए गए हैं, जो कि भारत में अवैध हैं।
ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, लीगल फोरम ने अपनी शिकायत में ये भी कहा कि इस संगठन द्वारा भारत में दिए टैक्स और अमेरिका में दिए टैक्स अलग अलग हैं। अपने पत्र में उन्होंने इस मामले संबंधी सभी जानकारियों का उल्लेख किया और टैक्स से जुड़े जरूरी कागजात भी लगाए।
इसके अलावा साल 2019 की एक वीडियो में हम इबेनेजर को यूएसए में बोलते हुए देख सकते हैं कि वो वहाँ के लोगों को बता रहे हैं कि वे हिंदुओं, मुस्लिमों, बौद्धों और विभिन्न अन्य धार्मिक समूहों के बीच चर्चों को शामिल करने में शामिल हैं।
बात सिर्फ़ धार्मिक स्थलों के बीच अपना धार्मिक स्थल स्थापित करने संबंधी नहीं है। इस एनजीओ के प्रमुख लगातार अपनी स्पीचों में कई बार इस बात का उल्लेख कर चुके हैं कि वो कैसे हिंदुओं को ईसाई बनाने के काम में अग्रसर हैं।
सैम्यूल जैसे लोग जो इस प्रकार के एनजीओ से जुड़े हैं, वो उन हिंदुओं को मुख्यतः अपना निशाना बनाते हैं, जो गरीब हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे लोग इबेनेजर के चंगुल में फँस जाते हैं, क्यूँकि उन्हें झाँसा दिया जाता है कि अगर वह धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनका ख्याल मिशनरी द्वारा रखा जाएगा।
इसके अलावा सर्व इंडिया मिनिस्ट्री द्वारा स्वयं ऐसे अभियान चलाए जाते हैं जिनके तहत बच्चों को ईसाई धर्म के प्रति आकर्षित किया जाता है। इन अभियानों के अंतर्गत शिक्षा, साफ-सफाई, प्रार्थना और कहानियों तक के जरिए ये लोग अपने मकसद को अंजाम देते हैं।
आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर पिछले साल खबर आई थी कि प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी सरकार का जन-कल्याणकारी योजनाओं को रफ़्तार देने पर फोकस नहीं दिख रहा। बल्कि वह लोगों को मुफ़्त में चीजें देने की नीति पर ज़्यादा फोकस कर रहे हैं। जिससे न सिर्फ़ सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुँच रही है, बल्कि राज्य में धर्मांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
उस समय भी रेड्डी सरकार पर आरोप लग रहे थे कि उनकी सरकार ने लोगों को धर्मान्तरण के लिए प्रोत्साहित किया है। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना था कि आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्मान्तरण ने जोर पकड़ लिया है और जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं की गई तो यह हिंसक भी हो सकता है।

आंध्र प्रदेश : प्रदर्शन करने जा रहे चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नजरबंद

आंध्र प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करने जा रहे चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नजरबंदगुंटूर जिले में विरोध प्रदर्शन करने से रोकने के लिेए तेलगु देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे एन लोकेश को नजरबंद कर लिया गया है, जबकि विधायकों समेत पार्टी के कई नेताओं को आज(सितम्बर 11) को हिरासत में लिया गया है। यह विरोध प्रदर्शन कुछ ग्रामीणों को गांव से निकालने के विरोध में किया जाना था। हालांकि बाद में नायडू को गुंटूर जाने की अनुमति दे दी गई
सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी गुंटूर में हिरासत में लिया गया. उक्त नेताओं ने भी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था. तेदेपा ने घोषणा की थी कि पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ नायडू अपने आवास पर दिनभर का अनशन करेंगे. तेदेपा के अध्यक्ष गुंटूर जिले के पालनाडु क्षेत्र के रहने वाले लोगों के समूह को अटमाकुरू नाम के गांव में ले जाना चाहते थे.
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नायडू ने कहा, ‘वाईएसआर के लोगों और पुलिस ने जिन ग्रामीणों को गांव से बाहर निकाल दिया था मैंने उन लोगों को वापस वहां ले जाने की योजना बनाई थी. यह कोई आंदोलन नहीं है बल्कि हम तो यह बताना चाहते हैं कि हम राजनीतिक पक्षपात के शिकार लोगों के साथ हैं.’

वाईएसआर ने आरोप लगाया कि तेदेपा लोगों को पैसे देकर यह सब करवाना चाहती है. पार्टी ने खुद भी ‘चलो अटमाकुरु’ का आह्वान किया था लेकिन पुलिस ने दोनों ही पक्षों को इसकी इजाजत नहीं दी और भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अटमाकुरू और पलनाडु क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

हमारी सरकार का लक्ष्य भ्रष्ट शासन देना है--उपमुख्यमंत्री पी.पुष्पा श्रीवानी, आंध्रा प्रदेश

डिप्टी CM की फिसली जुबान, कहा- हमारी सरकार का लक्ष्य भ्रष्ट शासन देना है
पी पुष्पा श्रीवानी
हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम 
उपमुख्यमंत्री पी पुष्पा श्रीवानी को जुबान फिसलने की वजह से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।15 जून को उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में भ्रष्ट शासन मुहैया कराना है' दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है "पूत के पॉँव पालने में ही नज़र आ गए।" एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार का लक्ष्य राज्य में भ्रष्ट शासन देना है' दरअसल नई डिप्टी सीएम 'भ्रष्टाचार मुक्त शासन' कहना चाहती थीं लेकिन उनकी जुबान से 'भ्रष्टाचार शासन' निकल गया। श्रीवानी डिप्टी सीएम बनने के बाद पहली बार अपने गृह जनपद आईं थीं
इस मामले में विपक्षी पार्टी टीडीपी ने निशाना साधते हुए कहा, 'हम डिप्टी सीएम के बयान से सहमत हैं' टीडीपी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा, 'अपने लक्ष्य के बारे में बताने के लिए धन्यवाद मैडम, हम आपके बयान से सहमत हैं बता दें कि सीएम जगन मोहन रेड्डी ने बीते हफ्ते राज्य में पांच डिप्टी सीएम की नियुक्ति की है हाल ही में बीते विधानसभा चुनावों में रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआर कांग्रेस ने 151 सीटें जीती थीं और एन चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी केवल 23 सीटों पर ही निपट गई थी
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हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में एतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्त...

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्ता में बिल्कुल अनोखा फार्मूला पेश किया है वाईएसआर कांग्रेस की कैबिनेट में 5 डिप्टी सीएम हैं भारत के सियासी इतिहास में संभवत: ऐसा पहली बार ही होगा जब कि सरकार में 5 उपमुख्यमंत्री होंगे जगन मोहन रेड्डी की कैबिनेट में 25 सदस्य हैं जिनमें 5 उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम का फार्मूला राज्य में सभी वर्गों और जातियों संतुलन के लिए किया है इन पांचों में एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से होगा (इनपुट: एएनआई)

'मोदी के पालतू कुत्ते' हैं केसीआर और जगनमोहन रेड्डी : चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री

ChandraBabu Naidu
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज नेताओं में इतना अधिक आक्रोश और संकुचित सोंच हो गयी है, कि इनके भाषण सुनने पर कई बार तो अब यह सोंचना पड़ता है कि बोलने वाला जनता हितैषी या कोई मवाली? जम्मू-कश्मीर में अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के विरुद्ध भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, तो जम्मू-कश्मीर से बाहर दूसरे नेता भी कम नहीं। क्या ऐसी अशोभनीय भाषा बोलने वाले नेताओं के हाथ देश अथवा प्रदेश की बाग़डोर देना हितकारी हो सकती है? क्यों नहीं ऐसे नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाए? जनता को चाहिए ऐसे नेताओं को एक भी वोट ना दी जाए। 
आभास होता है कि मोदी विरोध में अधिकतर नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। भारत में चुनाव पहले भी होते थे, तब विरोधी केवल नीतिगत एवं तर्कपूर्ण तथ्यों पर लड़ाई लड़ते थे, परन्तु आज अब पिछले कुछ चुनावों से विरोधी अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर पता नहीं किस संस्कृति का पालन कर भारतीय संस्कृति को ही नहीं, अपितु अपने माता-पिता एवं पूर्वजों को भी बदनाम कर, पता नहीं ऐसे नेता देश को किस पाताललोक में लेकर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का विरोध करने को बहुत मुद्दे हैं, लेकिन उस ओर किसी का लेशमात्र भी ध्यान नहीं। जिस तरह दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का विरोध करने को दस-बीस नहीं हज़ारों कारण हैं, लेकिन कोई नहीं बोलता, क्योकि सभी नेताओं एवं पार्टियों का उसमे निजी स्वार्थ छुपा है, जिसे जनमानस समझ नहीं पाता।      
अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बयान देते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 8 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी और टीआरएस के अध्यक्ष व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को 'मोदी का पालतू कुत्ते' कहा है। मचिलीपटनम में अप्रैल 8 को एक रैली को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा, 'बेशर्म जगनमोहन रेड्डी कत्ते के बिस्किट खा रहे हैं। वह ये बिस्किट हमें भी बांट रहे हैं। जगनमोहन और केसीआर मोदी के पालतू कुत्ते हैं, जो एक बिस्किट के लिए अपने घुटनों पर बैठे रहेंगे। होशियार रहिए, जगन ये बिस्किट आपको भी देने की कोशिश करेंगे।'
चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी और टीआरएस पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को फंड देने का आरोप भी लगाया और कहा कि करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी राज्य में उन्हें वोट नहीं मिलेगा। चंद्रबाबू नायडू  ने जगनमोहन रेड्डी को फंडिंग की  बात करते हुए कहा, 'मोदी और केसीआर ने 1000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। केसीआर तुमने ये पैसे क्यों खर्च किए? तुम अपने राज्य का पैसा हमारे यहां क्यों खर्च कर रहे हो। एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद यहां से तुम्हें एक भी वोट नहीं मिलने वाला। हमारे लोग तुमसे बहुत नाराज हैं।'
गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू ने ऐसे समय में ये विवादित टिप्पणी की है जब राज्य में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सियासी गर्मी उच्चतम स्तर पर है। 11 अप्रैल को आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होने जा रही है। मतगणना 23 मई को होगी।